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शुभेंदु अधिकारी ने ली बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ


कोलकाता। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / बंगाल की राजनीति में आज सुबह बड़ा बदलाव हो गया है. बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. उन्हें बंगाल के राज्यपाल ने शपथ दिलाई. शुभेंदु ने भवानीपुर में पूर्व सीएम ममता बनर्जी को हराया था. प्रोटोकॉल के हिसाब से ममता बनर्जी को भी शपथ ग्रहण समारोह का न्योता भेजा गया था. 

शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन कोलकाता स्थित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में किया गया. इस समारोह में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई दिग्गत नेता भी इस शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बने. 

शुभेंदु अधिकारी के साथ-साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निसिथ प्रामाणिक, खुदीराम टुडू और अशोक कीर्तनिया ने भी मंत्री पद की शपथ ली. 8 मई को अमित शाह कोलकाता पहुंचे थे जहां शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया था. शाह ने खुद उनके नाम का ऐलान किया. इसके बाद शुभेंदु ने कोलकाता में राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात की और विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपकर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था. 

बता दें कि बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की 207 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की थी. वहीं, टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमटकर रह गई और उसके 15 सालों के शासन का खात्मा हो गया.


शुभेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री, अमित शाह ने किया ऐलान


कोलकाता।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुनते हुए राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में आयोजित बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम की घोषणा की।

बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने नई सरकार का एजेंडा स्पष्ट करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, घुसपैठ और गोतस्करी के मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि “घुसपैठिया मुक्त बंगाल” नई सरकार का प्रमुख संकल्प होगा। शाह ने कहा कि केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश से घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर निकालने का काम किया जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जीत केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, “राष्ट्रीय सुरक्षा में जो सबसे बड़ा छिद्र था, उसे इस जीत ने बंद करने का काम किया है।” शाह ने दावा किया कि अब पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार होने से घुसपैठ और गोतस्करी पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

अमित शाह ने कहा कि बंगाल सरकार और केंद्र सरकार मिलकर अंतरराष्ट्रीय सीमा को “अभेद्य दुर्ग” में बदलने का काम करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा ध्रुवीकरण का नहीं बल्कि देश की सुरक्षा का है। गृह मंत्री ने राज्य में राजनीतिक हिंसा और कटमनी प्रथा समाप्त करने का भी भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बंगाल में भय और हिंसा का माहौल बनाया गया था, लेकिन जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भरोसा जताकर पार्टी को प्रचंड जनादेश दिया है। बीजेपी की इस जीत को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है और शुभेंदु अधिकारी राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री होंगे।

जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट के फैसले पर लगी रोक, अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

नई दिल्ली। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगा दी है. एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की तरफ से दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जिसके खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. जहां 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने  अमित जोगी को दोषी ठहराए जाने के फैसले पर रोक लगाई है. जो उनके लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.  

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है. जिसमें हाईकोर्ट ने अमित जोगी को जग्गी हत्याकांड में आरोपी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने के लिए भी कहा गया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगा दी है. जग्गी हत्याकांड 2003 में हुआ था. यह छत्तीसगढ़ बनने के बाद कोई पहला हाईप्रोफाइल मामला था. जिसमें अमित जोगी का नाम सामने आया था. ऐसे में यह मामला पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा में था. 

अमित जोगी ने लगाई थी दो याचिका 

अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिका लगाई थी. जिसमें पहली याचिका में सीबीआई से संबंधित अपील दायर करने के मामले में थी. दूसरी याचिका में हाई कोर्ट के मुख्य फैसले को चुनौती दी गई थी. जिसमें उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. अमित जोगी के वकीलों ने तर्कों के आधार पर सजा पर रोक लगाने या निरस्त करने की मांग की थी. ऐसे में अमित जोगी के लिए फिलहाल राहत मिली है. 

जग्गी हत्याकांड से जुड़ा है मामला 

मामला रायपुर के कारोबारी और एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है. 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी. जिसमें अजित जोगी का नाम सामने आया था. 2007 में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया गया था. लेकिन जग्गी के बेटे ने इस फैसले के खिलाफ याचिका लगाई थी. जिसमें हाई कोर्ट ने 2026 में अमित जोगी को दोषी पाया था. इसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई थी. 23 साल पुराने इस मामले में अब एक बार फिर बड़ा फैसला आ गया है. 


जग्गी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को राहत नहीं, 23 अप्रैल को अगली सुनवाई


नई दिल्ली/रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार को दो जजों की बेंच ने उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए सरेंडर पर रोक देने से इनकार कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।

अमित जोगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। एक याचिका हाईकोर्ट के आदेश के तहत सरेंडर पर स्थगन के लिए एक जज के चैंबर में प्रस्तुत की गई, जबकि दूसरी याचिका दो जजों की बेंच के समक्ष लगाई गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि सरेंडर पर राहत का निर्णय संबंधित जज के चैंबर में ही लिया जाएगा। सुनवाई के दौरान मृतक नेता रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी के वकील भी अदालत में उपस्थित रहे। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले को 23 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया है।

गौरतलब है कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के इस चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को दोषी ठहराया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के 31 मई 2007 के फैसले को पलट दिया था। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि समान साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों को दोषी ठहराना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण और साक्ष्यों के विपरीत बताया था।

मामले के अनुसार, 4 जून 2003 की रात रायपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई जांच में इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए अमित जोगी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान गवाहों के बयान, कॉल डिटेल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर साजिश की पुष्टि हुई थी। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था और समय सीमा में पालन न होने पर गिरफ्तारी के निर्देश भी दिए गए थे।

मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से की मुलाकात, बस्तर विकास का रोडमैप सौंपा


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तीन दिवसीय दिल्ली प्रवास के बाद गुरुवार सुबह रायपुर लौट आए। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा में उन्होंने बताया कि प्रवास के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तथा सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश से मुलाकात हुई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रदेश की तीन करोड़ जनता की ओर से नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति दिलाने के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही बस्तर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए विस्तृत रोडमैप भी प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि देश की जनता का विश्वास एनडीए और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बना हुआ है। असम सहित विभिन्न राज्यों में पार्टी की स्थिति मजबूत है और आगामी चुनावों में बेहतर परिणाम की उम्मीद है। साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। इस अधिनियम से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसका वे स्वागत करते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष और संगठन पदाधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

तेंदुलकर के परिवार का ‘लो-प्रोफाइल’ बिलासपुर दौरा, गांवों और स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में मंगलवार तड़के एक ऐसा दौरा हुआ, जिसकी जानकारी 24 घंटे तक सार्वजनिक नहीं हुई। भारत रत्न और देश के के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के परिवार के सदस्य अंजलि तेंदुलकर, सारा तेंदुलकर और सानिया चांडक शहर पहुंचे और सीमित दायरे में विभिन्न स्थानों का दौरा किया। इस पूरे कार्यक्रम को बेहद कम प्रोफाइल रखा गया और इसकी जानकारी केवल चुनिंदा अधिकारियों तक ही सीमित रही।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तीनों सदस्य सुबह करीब 5:30 बजे बिलासपुर पहुंचे और मंगला चौक स्थित कोर्टयार्ड मेरिओट होटल में ठहरे। होटल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रही, हालांकि आम लोगों की आवाजाही या भीड़ से बचने के लिए कार्यक्रम को सार्वजनिक नहीं किया गया। 

ATR के गांवों का दौरा और स्थानीय लोगों से संवाद

दोपहर के समय यह दल अचानकमार क्षेत्र के छपरवा-बम्हनी गांव पहुंचा। यहां उन्होंने पैदल भ्रमण किया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उन्होंने ग्रामीणों से उनकी जीवनशैली, जरूरतों और दैनिक चुनौतियों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बच्चों के साथ बातचीत और एक नवजात शिशु को गोद में लेने जैसे दृश्य भी सामने आए। यह दौरा औपचारिक कार्यक्रम की बजाय जमीनी स्तर पर स्थितियों को समझने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस

बुधवार यानी आज सुबह यह दल गनियारी स्थित एक जन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। यहां फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया गया और डॉक्टरों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। सूत्रों का कहना है कि यह दौरा किसी सामाजिक संस्था के आमंत्रण पर हुआ और स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावित सहयोग पर भी बातचीत हुई।

गोपनीयता और प्रशासनिक तैयारी

इस दौरे की एक प्रमुख विशेषता इसकी गोपनीयता रही। जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की, लेकिन कार्यक्रम को सार्वजनिक नहीं होने दिया गया।सम्भवतः इस तरह के दौरे में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जानकारी सीमित रखी है।”

क्या संकेत देता है यह दौरा?

कुछ जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरे यह संकेत देते हैं कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग अब सीधे जमीनी स्तर पर जाकर सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस दौरे से जुड़े किसी औपचारिक बयान या भविष्य की योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


बाप-बेटे को पुलिस कस्टडी में बर्बरता और मौत पर चला कानून का डंडा, 9 पुलिसवालों को मौत की सजा


नई दिल्ली।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  तमिलनाडु की मदुरै डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बाप-बेटे की पुलिस कस्टडी में मौत मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. मदुरै कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल 2026) को बिजनेसमैन पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में हुई मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है. दोषियों में शामिल पुलिस इंस्पेक्टर श्रीधर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

केस बारे में पढ़कर दिल कांप उठता है: कोर्ट

कोर्ट ने जिन पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई है उसमें इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन और रघु गणेश और पुलिसकर्मी मुरुगन, समदुरई, मुथुराजा, चेल्लादुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेइलुमुथु शामिल हैं. कोर्ट ने कहा, 'पिता और बेटे को बदले की भावना से निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया था. इसके बारे में पढ़कर दिल कांप उठता है. अगर बेंच की निगरानी नहीं होती तो सच दबकर रह जाता.' 

सीबीआई ने की थी फांसी की मांग

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में सीसीटीवी फुटेज पेश किए गए, जबकि आम तौर पर ऐसे मामलों में ऐसा नहीं होता. मदुरै डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में कई ईमानदार पुलिस अधिकारी हैं और यह फैसला पुलिस के बीच डर पैदा नहीं करेगा. पुलिस हिरासत में टॉर्चर और उसके बाद हुई मौत मामले में सीबीआई ने अधिकतम सजा के रूप में फांसी या बिना पैरोल की संभावना के आजीवन कारावास की मांग की थी.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 19 जून, 2020 को शुरू हुआ, जब मोबाइल की दुकान चलाने वाले जयराज और बेनिक्स को लॉकडाउन के दौरान तय समय से अधिक दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. दोनों को सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई. घरवालों ने आरोप लगाया था कि पुलिस कस्टडी में उनके साथ मारपीट की गई थी.

इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य की सीबी-सीआईडी ​​से जांच का जिम्मा संभालने वाली सीबीआई ने इस मामले में 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए लोगों में एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और कई कांस्टेबल शामिल थे. बाद में एजेंसी ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया. (साभार / abp न्यूज़)

जग्गी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के दो फैसलों को जोड़कर संयुक्त सुनवाई 20 अप्रैल को


नई दिल्ली / बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, हालांकि मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और संजीव मेहता की पीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 25 मार्च और 2 अप्रैल 2026 के फैसलों को एक साथ जोड़ते हुए 20 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई का निर्णय लिया है।अमित जोगी ने हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए एसएलपी दायर की थी।

हाईकोर्ट ने उन्हें हत्या और साजिश के मामले में दोषी करार दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सजा पर रोक लगाने से इनकार किया है। सुनवाई के दौरान अमित जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे ने पक्ष रखा।

वकीलों ने दलील दी कि—
हाईकोर्ट के फैसलों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों की अवहेलना की गई
एक निर्णय बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अमित जोगी अंतिम निर्णय के विरुद्ध 20 अप्रैल से पहले याचिका दायर करें, ताकि सभी संबंधित मामलों की एक साथ अंतिम सुनवाई की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को राहत देने से किया इनकार, उम्रकैद बरकरार

नई दिल्ली।  TODAY छत्तीसगढ़  /  बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक देने से इनकार कर दिया। इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2003 के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने उन्हें हत्या की साजिश और हत्या के अपराध में मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए सजा दी थी।

हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, लेकिन शीर्ष अदालत से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब उन्हें सजा का पालन करना होगा।

रैपिडो राइडर और कोरियर के जरिए एमडीएमए नेटवर्क, 6 आरोपी गिरफ्तार


रायपुर ।
 TODAY छत्तीसगढ़  / राजधानी में सूखा नशा और सिंथेटिक ड्रग्स के अंतर्राज्यीय नेटवर्क के खिलाफ रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस सिंडिकेट का संचालन दिल्ली में बैठकर महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा कर रहे थे, जो एमडीएमए ड्रग्स और पार्टी पिल्स की सप्लाई का नेटवर्क चला रहे थे।

जांच में पुलिस ने ड्रग्स सप्लाई के एक नए और खतरनाक तरीके “डेड ड्रॉप सिस्टम” का खुलासा किया है। इस सिस्टम में ड्रग्स को सुनसान स्थानों पर रखकर उसकी लोकेशन और वीडियो ग्राहकों को भेजी जाती थी, जिससे सीधा संपर्क कम से कम रखा जा सके। पुलिस उपायुक्त स्मृतिक राजनाला और उमेश गुप्ता ने बताया कि मास्टरमाइंड महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा वर्ष 2024 में भी थाना खम्हारडीह में दर्ज ड्रग्स प्रकरण में जेल जा चुके हैं।

आरोपियों के कब्जे से 48.03 ग्राम एमडीएमए (कीमत लगभग 7 लाख रुपये), 8 पार्टी पिल्स, 9 मोबाइल फोन, एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल और ड्रग्स सप्लाई में उपयोग किए गए कोरियर बॉक्स जब्त किए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ थाना तेलीबांधा में एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(ख) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ऐसे काम करता था नेटवर्क:

एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट को सूचना मिली थी कि Rapido राइडर्स के माध्यम से शहर में ड्रग्स सप्लाई की जा रही है। जांच में सामने आया कि दिल्ली से कोरियर के जरिए ड्रग्स रायपुर भेजा जाता था। यहां कुणाल मंगतानी इसे रिसीव कर रैपिडो राइडर्स के जरिए सुनसान जगहों पर “डेड ड्रॉप” करता था। इसके बाद लोकेशन और वीडियो मास्टरमाइंड को भेजे जाते, जो व्हाट्सएप के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाए जाते थे। भुगतान के लिए अलग-अलग बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।

पुलिस टीम ने 29 मार्च को तेलीबांधा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए तीन रैपिडो राइडर्स—सौरभ डोंगरे, शुभम राठौर और सौरभ यादव को एमडीएमए ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में नेटवर्क की परतें खुलती गईं और कुणाल मंगतानी समेत मास्टरमाइंड तक पुलिस पहुंच गई। दिल्ली के पंचशील विहार में लोकेशन ट्रेस कर महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा को हिरासत में लेकर रायपुर लाया गया, जहां उनकी भूमिका सिद्ध होने पर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में दोनों ने नाइजीरियन नागरिकों से ड्रग्स खरीदने की बात भी स्वीकार की है।

अब तक गिरफ्तार आरोपी:

कुणाल मंगतानी (23), काशीराम नगर, तेलीबांधा
सौरभ डोंगरे (29), टिकरापारा
शुभम राठौर (31), टिकरापारा
सौरभ यादव (21), खमतराई
महेश सिंह खड़का (28), पंचशील विहार, दिल्ली
कुसुम हिन्दुजा (25), अवंति विहार, रायपुर

गिरोह में काम का बंटवारा:

महेश खड़का, कुसुम हिन्दुजा – मास्टरमाइंड व नेटवर्क संचालन
कुणाल मंगतानी – कोरियर से ड्रग्स रिसीव
रैपिडो राइडर्स – ग्राहकों तक “डेड ड्रॉप” के जरिए सप्लाई  

डिब्रूगढ़ में चाय बागान पहुंचे पीएम मोदी, महिलाओं संग तोड़ी चाय पत्तियां


गुवाहाटी।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को असम के डिब्रूगढ़ ज़िले में एक चाय बागान का दौरा किया, जहां उन्होंने महिला श्रमिकों से बातचीत की और उनके कामकाज को करीब से देखा। प्रधानमंत्री एक दिन के असम दौरे पर हैं, जहां वे भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में दो चुनावी रैलियों को भी संबोधित करने वाले हैं।

डिब्रूगढ़ स्थित ‘मनोहारी टी इस्टेट’ के दौरे के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि उन्हें चाय जनजाति के परिवारों के प्रयासों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की मेहनत और लगन ने असम के गौरव को बढ़ाया है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री को महिला श्रमिकों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ते हुए भी देखा गया। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में बताया कि इस दौरान महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी साझा की और अंत में उनके साथ एक तस्वीर भी ली गई। प्रधानमंत्री ने अपने दौरे की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिन्हें उन्होंने डिब्रूगढ़ के चाय बागान की झलकियां बताया। असम में चाय उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है, और बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।

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जग्गी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में दोबारा शुरू हुई प्रक्रिया, 1 अप्रैल को अंतिम बहस तय


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले की सुनवाई दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में शुरू हो चुकी है। अदालत ने अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है।

मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की उस अपील को स्वीकार किया, जिसमें मामले की दोबारा समीक्षा की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि केस के तथ्यों और सबूतों पर फिर से विस्तार से विचार किया जाना आवश्यक है। इससे पहले, अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए 28 आरोपियों को दी गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया था। उस फैसले को इस लंबे समय से चल रहे मामले में एक अहम पड़ाव माना गया था।

रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक प्रमुख नेता थे। इस घटना ने उस समय राज्य की राजनीति में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी और इसे छत्तीसगढ़ के चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है। मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू अमित जोगी से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की अपील पर भी सुनवाई की अनुमति दी है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अंतिम सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस लंबे समय से चले आ रहे मामले में आगे की दिशा तय होने की संभावना है।

VIDEO: 13 साल की खामोशी के बाद हरीश राणा को अंतिम विदाई


नई दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  दिल्ली के ग्रीन पार्क में बुधवार सुबह एक ऐसे जीवन को अंतिम विदाई दी गई, जो 13 वर्षों से अस्पताल के बिस्तर और मशीनों के बीच ठहरा हुआ था। हरीश राणा—एक नाम, जो कभी सपनों, पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं से जुड़ा था, अब स्मृतियों में बदल गया है।

हरीश 2013 में एक हादसे के बाद कोमा में चले गए थे। पंजाब विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे इस छात्र के जीवन की दिशा एक पल में बदल गई, जब वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। सिर में आई गंभीर चोट ने उन्हें ऐसी खामोशी में धकेल दिया, जहां से वे फिर कभी लौट नहीं सके।

“सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार… ॐ शांति ॐ…” —तो यह केवल सूचना नहीं थी, बल्कि 13 साल लंबे एक संघर्ष के अंत की घोषणा थी। 

इन 13 वर्षों में बहुत कुछ बदला—मौसम, शहर, लोग—लेकिन हरीश की स्थिति वैसी ही बनी रही। उनके लिए समय जैसे थम गया था, जबकि उनके परिवार के लिए हर दिन एक लंबा इंतज़ार बनता चला गया। उम्मीद और असहायता के बीच झूलता यह इंतज़ार आखिरकार एक कठिन निर्णय पर आकर ठहरा।

11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। इसके बाद दिल्ली के एम्स में डॉक्टरों की देखरेख में उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि उन्हें किसी प्रकार की पीड़ा न हो—दवाओं के सहारे उन्हें शांति दी गई। 

उनके पिता अशोक राणा ने जब व्हाट्सऐप समूह में एक संक्षिप्त संदेश लिखा— “सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार… ॐ शांति ॐ…” —तो यह केवल सूचना नहीं थी, बल्कि 13 साल लंबे एक संघर्ष के अंत की घोषणा थी। यह संदेश पढ़ते ही कई लोगों की आंखें नम हो गईं। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल शब्दों से परे था। परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग—सभी एक ऐसे जीवन को विदा कर रहे थे, जो जीते हुए भी जैसे कहीं ठहर गया था। 

13 साल तक उनका परिवार उम्मीद में जीता रहा—हर दिन एक चमत्कार का इंतजार। लेकिन जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो यह इंतजार धीरे-धीरे असहनीय पीड़ा में बदल गया।

भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ मान्यता दी है। लेकिन हर ऐसा मामला केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं होता—यह एक परिवार की पीड़ा, उम्मीद और अंततः स्वीकृति की कहानी भी होता है। हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन अनगिनत अनकहे सवालों की है, जो जीवन और मृत्यु के बीच की उस पतली रेखा पर खड़े होकर पूछे जाते हैं— क्या कभी-कभी विदाई ही सबसे शांतिपूर्ण उत्तर होती है? 

TMC मैनिफेस्टो लॉन्च, ममता का BJP पर तीखा वार


कोलकाता। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का घोषणापत्र जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों ने पार्टी को अपार समर्थन और आशीर्वाद दिया है और सरकार ने भी उनकी सेवा करने का हरसंभव प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ता में आने के बाद से भाजपा हर चुनाव में साजिश रचती रही है। उन्होंने कहा कि इस बार साजिश की सारी सीमाएं पार कर दी गई हैं और भाजपा किसी भी तरह पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कब्जा करना चाहती है।

ममता बनर्जी ने आगे कहा कि देश की स्थिति चिंताजनक है और कई राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश को गलत दिशा में ले जा रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में ‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ जैसी स्थिति पैदा कर दी गई है, क्योंकि भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल की जनता से डर रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।

हाईकोर्ट में यूएनआई की याचिका खारिज, दफ्तर सील


नई दिल्ली।
  TODAY छत्तीसगढ़  / दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के हाई कोर्ट के आदेश पर न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) का दफ्तर सील कर दिया। परिसर के बाहर चस्पा नोटिस में कहा गया कि 9, रफी मार्ग की संपत्ति केंद्र सरकार ने कब्जे में ली है। बिना अनुमति प्रवेश या उपयोग पर कार्रवाई होगी। 

दिल्ली जिले के डीसीपी सचिन शर्मा ने बदसलूकी के आरोपों को खारिज किया और कहा, कार्रवाई कानून के तहत हुई। इसकी वीडियोग्राफी है।

हाई कोर्ट ने यूएनआई की याचिका खारिज करते हुए कहा, जमीन आवंटन 1979 में हुआ, लेकिन एजेंसी 4 दशक बाद भी निर्माण शुरू नहीं कर सकी। इससे आवंटन का उद्देश्य विफल हो गया, इसलिए जमीन वापस लेना वैध है। दूसरी ओर, यूएनआई और इसके मौजूदा प्रबंधन स्टेट्समैन ने कार्रवाई को 'मीडिया की आजादी पर हमला' बताया। स्टेट्समैन ने कहा, 'देश की सबसे पुरानी न्यूज एजेंसियों में से एक के दफ्तर से कर्मचारियों को जबरन निकाला गया, कई को उनका सामान लेने का मौका नहीं मिला।' यूएनआई ने कहा, 'करीब 300 पुलिसकर्मी पहुंचे और बिना पर्याप्त समय दिए परिसर खाली कराया। महिला पत्रकारों से बदसलूकी की गई। इस कार्रवाई से हमारी अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू न्यूज सेवाएं ठप हो गईं।  

हाथियों के परिवार का भावुक दृश्य वायरल, IAS सुप्रिया साहू ने साझा किया वीडियो


दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  आईएएस सुप्रिया साहू ने अपने X हैंडल पर इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है कि तमिलनाडु के अनामलाई टाइगर रिज़र्व के गहरे जंगलों में हाथियों का एक प्यारा परिवार सो रहा है—एक ऐसा अद्भुत पल जो कैमरे में कैद हो गया। हाथी का बच्चा बड़े हाथी के ऊपर अपना पैर धीरे से रखता है, मानो वह उससे आराम, सुरक्षा और प्यार चाहता हो। हाथियों की दुनिया में, परिवार ही सब कुछ होता है। और उनके चारों ओर जंगल खामोश, सुरक्षा देने वाला और शाश्वत रूप से खड़ा है—ठीक उस पालने की तरह जो जीवन को अपनी गोद में थामे रहता है। 'अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस' के इस अवसर पर, यह कोमल दृश्य हमें एक सीधी-सादी सच्चाई की याद दिलाता है: अगर जंगल नहीं होंगे, तो कुछ भी नहीं बचेगा। बिल्कुल कुछ भी नहीं। जंगलों के बिना, यह दुनिया और भी गरीब, कठोर और सूनी हो जाएगी। हाथियों के लिए, वन्यजीवों के लिए, नदियों के लिए और इंसानों के लिए—जंगल ही जीवन हैं। अद्भुत तस्वीर  
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर साझा किए गए इस वीडियो के जरिए उन्होंने जंगलों के संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि जंगल नहीं रहेंगे तो न केवल वन्यजीव बल्कि इंसानों का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। जंगल ही जीवन का आधार हैं।

पीएम मोदी से तीनों उपराज्यपालों की अलग-अलग मुलाकात


नयी दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  / दिल्ली, लद्दाख और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपालों ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अलग-अलग मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े प्रशासनिक और विकासात्मक विषयों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने ‘एक्स’ पर दी जानकारी में बताया कि दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। इसी क्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल डी. के. जोशी (सेवानिवृत्त) ने भी प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात की।

बताया गया कि हाल ही में नियुक्ति के बाद यह मुलाकात औपचारिक परिचय और समन्वय के लिहाज से अहम मानी जा रही है। संधू और सक्सेना को पांच मार्च को संबंधित पदों पर नियुक्त किया गया था।

तरनजीत सिंह संधू इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं। वहीं, विनय कुमार सक्सेना लद्दाख में नियुक्ति से पूर्व दिल्ली के उपराज्यपाल के पद पर कार्यरत थे।

दिल्ली आबकारी नीति मामला: अदालत ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को क्लीन चिट


नई दिल्ली। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए शुक्रवार को बरी कर दिया। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) द्वारा दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से भी इनकार कर दिया।इस मामले में 21 अन्य आरोपियों को भी अदालत ने बरी कर दिया है।

सीबीआई ने आम आदमी पार्टी (आम आदमी पार्टी) की पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई और बाद में रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच की थी। 

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने यह भी कहा कि सिसोदिया के विरुद्ध प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता नहीं है।  

न्यायाधीश ने आरोपपत्र में “आंतरिक विरोधाभासों” और “भ्रामक कथनों” का उल्लेख करते हुए कहा कि कई आरोप ऐसे हैं जिनकी पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों या गवाहों से नहीं होती। अदालत के अनुसार, आरोपपत्र में मौजूद कमियां कथित साजिश की थ्योरी को कमजोर करती हैं।

अदालत ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते और किसी भी व्यक्ति को बिना ठोस आधार के अभियोजन का सामना कराना कानून के शासन के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। सिसोदिया के संबंध में अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो उनकी संलिप्तता को दर्शाता हो, और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी दिखाई गई है।  

बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट पर पहली बार नाइट लैंडिंग ट्रायल सफल

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट पर शुक्रवार को पहली बार रात्रिकालीन उड़ान (नाइट लैंडिंग) का सफल ट्रायल किया गया। स्टेट प्लेन से किए गए इस परीक्षण के सफल रहने के साथ ही बिलासपुर हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक नए दौर में प्रवेश कर गया है।

ट्रायल के दौरान रनवे लाइटिंग सिस्टम, एप्रोच लाइट्स, एयर ट्रैफिक समन्वय सहित सभी तकनीकी मानकों की जांच की गई, जो पूरी तरह संतोषजनक पाए गए। अधिकारियों ने इसे बिलासपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू होने से यात्रियों को अधिक उड़ान विकल्प मिल सकेंगे।

इस अवसर पर एयरपोर्ट डायरेक्टर एन. बिरेन सिंह, नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो रायपुर के क्षेत्रीय निदेशक सहित एयरपोर्ट के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू होने से क्षेत्र के औद्योगिक, व्यावसायिक और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। 

एयरपोर्ट प्रशासन ने बताया कि आवश्यक औपचारिकताओं और अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद नियमित रूप से रात्रिकालीन उड़ानों का संचालन शुरू किया जाएगा। यह सफल ट्रायल बिलासपुर के बुनियादी ढांचे और विकास के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, भाजपा ने घेरा


नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट 2026 के दौरान शुक्रवार को इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ लिखी टी-शर्ट लहराई।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान 15 से 20 की संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और हाथों में सफेद रंग की टी-शर्ट लेकर विरोध जताया। टी-शर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर लगी थी और उस पर ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ लिखा हुआ था।

इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि एआई समिट के मंच के पीछे सच को दबाया नहीं जा सकता। संगठन ने आरोप लगाया कि जब देशहित से ऊपर कॉरपोरेट हित नजर आने लगें और विदेश नीति में नरमी दिखे, तब विरोध करना आवश्यक हो जाता है।

वहीं, भाजपा ने इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान इस तरह का प्रदर्शन देश की छवि धूमिल करने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयोग था और इसकी योजना राहुल गांधी के आवास पर बनाई गई थी, जहां सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

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