STATE

नई दिल्ली, छत्तीसगढ़, Politics, बिहार

GUEST COLUMN

Guest Column

EDITOR CHOICE

Editor Choice

TRAVELLING STORY

TRAVELLING STORY

TCG EXCLUSIVE

टीसीजी एक्सक्लूसिव, इतिहास

VIDEO

VIDEO
LATEST NEWS
Loading Latest News...

नक्सलमुक्त बस्तर में बनेगी एजुकेशन सिटी, ट्राइबल यूनिवर्सिटी पर भी सरकार की नजर

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि नक्सलवाद की चुनौती से मुक्त होने के बाद छत्तीसगढ़ विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य सरगुजा से लेकर बस्तर तक संतुलित और लक्ष्य केंद्रित विकास करना है। मुख्यमंत्री शनिवार को राजधानी के महोबा बाजार स्थित निजी होटल में आईटीवी नेटवर्क और इंडिया न्यूज के युवा मंच कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं साझा कीं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया गया।

नक्सलवाद खत्म होने से विकास को मिली रफ्तार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद लंबे समय तक बड़ी बाधा रहा। सरकार बनने के बाद केंद्र के साथ हुई बैठकों में छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या की गंभीरता सामने आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों ने अभियान चलाया और प्रदेश को नक्सल समस्या से मुक्त करने में सफलता हासिल की।

उन्होंने कहा कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज की जा रही है। सरगुजा से बस्तर तक सभी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।

चित्रकोट से धुड़मारास तक पर्यटन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण देश-दुनिया में पहचान रखता है। धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि धुड़मारास में बंबू राफ्टिंग और होम स्टे जैसी गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। राज्य की नई उद्योग नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है, ताकि इस क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ें।

युवाओं के भविष्य पर सरकार का जोर

सीएम साय ने कहा कि सरकार युवाओं के साथ लगातार संवाद कर रही है और उनके सुझावों को नीति निर्माण में महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएससी में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की गई है और अब भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। बरसात के बाद रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न उद्योगों में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।

बस्तर में एजुकेशन सिटी, ट्राइबल यूनिवर्सिटी की तैयारी

मुख्यमंत्री ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताते हुए कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है और आसपास के राज्यों में भी बड़ी जनजातीय आबादी रहती है। ऐसे में राज्य में ट्राइबल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जनजातीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का बेहतर अवसर मिल सके।

प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज, पांच नए कॉलेजों को मंजूरी

सीएम साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जबकि पांच नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिल चुकी है। इन कॉलेजों में कुल 250 सीटें स्वीकृत हुई हैं और इसी वर्ष पढ़ाई शुरू होने की बात कही गई।

उन्होंने बताया कि बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो चुका है, जहां ब्रेन ट्यूमर जैसे गंभीर रोगों का भी इलाज किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है और करीब 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है।

नई उद्योग नीति से 8 लाख करोड़ के एमओयू

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की नई उद्योग नीति के तहत करीब 8 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए गए हैं। सेमीकंडक्टर प्लांट, एआई डाटा सेंटर और टेक्सटाइल सेक्टर में काम आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे उद्यमियों को विशेष इंसेंटिव देने का प्रावधान किया गया है, जो एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएंगे। सरकार का उद्देश्य उद्योगों के विस्तार के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

धर्मांतरण और भर्ती परीक्षाओं पर भी बोले सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने के लिए कड़ा कानून लाया गया है। अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद धर्म स्वातंत्र्य विधेयक लाया गया है और प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा, आईटीवी नेटवर्क और इंडिया न्यूज के पदाधिकारी तथा गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

कैमरे की कलम: वर्दी का रौब, सुप्रीम कोर्ट का तमाचा

कानून की किताबों में पुलिस को नागरिकों की सुरक्षा का प्रहरी कहा गया है। संविधान पुलिस को असीमित शक्ति नहीं देता, बल्कि उसे कानून की सीमाओं में काम करने की जिम्मेदारी देता है। लेकिन जब हिरासत में लिया गया एक व्यक्ति तीन दिन बाद अस्पताल में दम तोड़ देता है, उसके सिर में लगी चोट उसकी मौत की वजह बताई जाती है और उसकी मौत की आपराधिक जांच के लिए FIR दर्ज करने में ढाई साल से अधिक समय लग जाता है, तब सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं रह जाता—सवाल पूरी पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता, जवाबदेही और कार्यक्षमता का बन जाता है।

छत्तीसगढ़ से सामने आया यह मामला इसी सवाल को कटघरे में खड़ा करता है। और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने तो पुलिस प्रशासन के शीर्ष स्तर पर ही ऐसा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कथित लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) पर बेहद तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने कहा— “हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि हमें यह दर्ज करना होगा कि छत्तीसगढ़ के DGP पूरी तरह से अयोग्य हैं!”

किसी राज्य के पुलिस महानिदेशक के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से ऐसी टिप्पणी आना अपने आप में असाधारण है। लेकिन इस टिप्पणी के पीछे जिस घटनाक्रम की परतें हैं, वे उससे भी अधिक गंभीर हैं।

मामले के अनुसार, 34 वर्षीय व्यक्ति को उसकी किराने की दुकान के सामने बिक्री के लिए शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। शराब की कथित कीमत लगभग 1,200 रुपये थी। 18 जनवरी 2024 को उसे हिरासत में लिया गया। सवाल यह नहीं है कि वह अपराधी था या नहीं। सवाल यह है कि पुलिस की हिरासत में जाने के बाद उसकी जान कैसे चली गई। गिरफ्तारी के समय उसकी मेडिकल जांच की गई थी। राज्य ने हाईकोर्ट के सामने बताया कि उस समय उसके शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं थी—सिर्फ लगभग 15 दिन पुरानी बताई गई थोड़ी सूजन का उल्लेख था, लेकिन महज तीन दिन बाद तस्वीर बदल चुकी थी।

21 जनवरी 2024 को उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया और सुबह करीब छह बजे उसकी मौत हो गई। एक व्यक्ति पुलिस की हिरासत में गया था। तीन दिन बाद वह मृत अवस्था में बाहर आया। यहीं से राज्य की जवाबदेही शुरू होती है। 

22 जनवरी को जेल अधीक्षक ने सेशन जज को पत्र लिखकर मृतक की मौत की न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया। इसके बाद चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने CrPC की धारा 176 के तहत जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ी और संबंधित JMFC ने जुलाई 2024 में अपनी रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में राय दी गई कि मौत सिर की चोट से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई थी। यह तथ्य बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिरासत में हुई मौत के मामले में सबसे पहला और सबसे जरूरी सवाल यही होता है कि चोट लगी कैसे? अगर गिरफ्तारी के समय गंभीर चोट नहीं थी और हिरासत के कुछ ही दिनों बाद व्यक्ति की मौत सिर की चोट की जटिलताओं से हुई, तो यह पता लगाना राज्य की कानूनी जिम्मेदारी बन जाती है कि वह चोट किन परिस्थितियों में लगी, लेकिन यहां सवालों के जवाब तलाशने के बजाय व्यवस्था मानो फाइलों के पीछे छिप गई। यह पुलिसिंग की गति है या फाइलों की तपस्या?

मृतक की पत्नी और दो बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। परिवार ने मांग की कि हिरासत में हुई मौत की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उन्हें 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि राज्य उन कर्मचारियों का नियोक्ता है जिनकी लापरवाही के कारण मृतक की जान गई और इसलिए मुआवजा देने की जिम्मेदारी राज्य की है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मुआवजे का उद्देश्य पुलिस और जेल अधिकारियों पर ऐसा प्रभाव डालना होना चाहिए कि भविष्य में वे ऐसी हरकत न करें जिनसे किसी व्यक्ति की जान चली जाए, लेकिन यहां एक बुनियादी सवाल रह जाता है— क्या किसी नागरिक की हिरासत में मौत की कीमत वास्तव में एक लाख रुपये हो सकती है?

मुआवजा जीवन की कीमत नहीं है। वह राज्य की जिम्मेदारी स्वीकार करने का एक सार्वजनिक कानून संबंधी उपाय है। सर्वोच्च न्यायालय भी लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि हिरासत में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर दिया गया मुआवजा किसी अन्य आपराधिक या कानूनी जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता इसलिए परिवार के लिए असली सवाल रकम का नहीं, न्याय का है।

यही वह बिंदु है जहां पूरा मामला और ज्यादा गंभीर हो जाता है। मृत्यु जनवरी 2024 में हुई। न्यायिक जांच शुरू हुई। जुलाई 2024 में जांच रिपोर्ट सामने आई, जिसमें सिर की चोट से हुई मौत की बात कही गई फिर भी पुलिस ने मौत की जांच के लिए FIR 30 जुलाई 2026 को दर्ज की यानी जिस मौत की परिस्थितियों की आपराधिक जांच समय रहते होनी चाहिए थी, उसके लिए FIR दर्ज करने में लगभग ढाई साल निकल गए। यह देरी सिर्फ प्रशासनिक सुस्ती नहीं कही जा सकती। हिरासत में मौत जैसे मामले में समय स्वयं एक सबूत होता है। समय बीतने के साथ CCTV फुटेज गायब हो सकते हैं, रिकॉर्ड बदल सकते हैं, गवाहों की याद कमजोर हो सकती है और परिस्थितिजन्य साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं और यही कारण है कि हिरासत में हुई मौत के मामलों में पुलिस से सामान्य मामलों की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शिता और तत्परता की अपेक्षा होती है। 

इस वर्ष जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को नोटिस जारी किया। राज्य की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया, लेकिन अदालत के सामने वह सबसे बुनियादी सवाल का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका—FIR दर्ज करने और मृतक की हिरासत में हुई मौत की जांच के लिए आखिर क्या कदम उठाए गए? यहीं सुप्रीम कोर्ट का धैर्य टूटता दिखाई दिया। किसी राज्य का सर्वोच्च पुलिस अधिकारी यदि अपने अधीनस्थ तंत्र में हुई हिरासत में मौत के मामले में यह सुनिश्चित नहीं कर पाता कि समय पर FIR हो, स्वतंत्र जांच हो और अदालत को स्पष्ट जवाब दिया जाए, तो फिर सवाल सिर्फ नीचे के स्तर के पुलिसकर्मियों पर क्यों रुके? यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें अदालत ने DGP को “पूरी तरह से अयोग्य” तक कह दिया। 

छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग को लेकर अक्सर अपराध नियंत्रण, नक्सल विरोधी अभियान, कानून-व्यवस्था और पुलिस की कठोर छवि की चर्चा होती है लेकिन पुलिस की असली परीक्षा अपराधी को पकड़ने में नहीं, हिरासत में लिए गए व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करने में होती है। जिस व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ लिया, वह उसकी निजी संपत्ति नहीं हो जाता। हथकड़ी संविधान को नहीं रोकती। पुलिस स्टेशन संविधान से बाहर की जगह नहीं है और हिरासत न्यायपालिका से बाहर का क्षेत्र नहीं है। अगर पुलिस के पास किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति है तो उसी के साथ उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी आती है। यही लोकतांत्रिक पुलिसिंग और सत्ता के बल पर चलने वाली पुलिसिंग के बीच अंतर है।

पुलिस की वर्दी का उद्देश्य नागरिक को डराना नहीं, उसे कानून पर भरोसा दिलाना है लेकिन जब हिरासत में कोई व्यक्ति मर जाता है और उसके परिवार को न्याय के लिए हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ता है, तो जनता के मन में स्वाभाविक सवाल उठता है— अगर पुलिस हिरासत में हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती, तो पुलिस की शक्ति का औचित्य क्या है? एक लोकतंत्र में पुलिस सबसे शक्तिशाली संस्था नहीं होती। पुलिस संविधान की अधीनस्थ संस्था होती है। उसकी ताकत कानून से आती है और उसकी सीमा भी कानून ही तय करता है इसलिए हिरासत में मौत का हर मामला पुलिस के लिए सिर्फ एक विभागीय घटना नहीं होना चाहिए। वह पूरे बल के लिए संवैधानिक जवाबदेही की परीक्षा होना चाहिए। 

“पूरी तरह से अयोग्य” जैसी टिप्पणी को केवल अदालत की नाराजगी मानकर आगे बढ़ जाना खतरनाक होगा। यह टिप्पणी पुलिस नेतृत्व के लिए चेतावनी है कि वरिष्ठ पद केवल पदनाम और प्रोटोकॉल का विषय नहीं है। DGP का मतलब सिर्फ राज्य की पुलिस का सर्वोच्च अधिकारी होना नहीं है। इसका अर्थ यह भी है कि राज्य की पुलिस में होने वाली गंभीर घटनाओं पर अंतिम प्रशासनिक जवाबदेही तय हो।

छत्तीसगढ़ के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने केवल एक मौत पर सवाल नहीं उठाया है। उसने उस मानसिकता पर चोट की है जिसमें पुलिस की गलती को विभागीय प्रक्रिया, देरी और कागजी जवाबों के नीचे दबा देने की उम्मीद की जाती है।

अब सवाल यह है कि इस टिप्पणी के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस बदलेगी या केवल एक और जवाबी हलफनामा दाखिल होगा? क्योंकि वर्दी की ताकत तभी सम्मान पैदा करती है, जब उसके पीछे जवाबदेही हो। वरना 1,200 रुपये की शराब के लिए दिखाई गई तत्परता और एक इंसान की हिरासत में हुई मौत पर दिखाई गई सुस्ती के बीच का अंतर जनता को बहुत कुछ समझा देता है और शायद यही इस मामले का सबसे कड़वा निष्कर्ष है— पुलिस अगर नागरिक को गिरफ्तार करने में तेज है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने में धीमी, तो समस्या सिर्फ पुलिसिंग की नहीं, पुलिस संस्कृति की है।

रात का विवाद बना खूनी खेल, युवक की मौत; दोनों आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / सरस्वती नगर थाना क्षेत्र के सतनामी पारा कोटा में आपसी विवाद को लेकर एक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल महेश धृतलहरे की एम्स में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल लकड़ी और ईंट भी बरामद की है।

आपसी विवाद के बाद किया हमला

पुलिस के मुताबिक, सतनामी पारा कोटा निवासी राजेंद्र धृतलहरे ने थाना सरस्वती नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 7 और 8 अगस्त की दरम्यानी रात आपसी विवाद के दौरान तुषार महिधर उर्फ बाउ और सुरेंद्र मधुकर उर्फ पोका ने उसके भाई महेश धृतलहरे के साथ मारपीट की।

हमले में महेश को गंभीर चोटें आईं। उसे तत्काल उपचार के लिए एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

चंद घंटों में पुलिस के हाथ लगे दोनों आरोपी

घटना की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी वेस्ट जोन रोबिनसन गुड़िया के निर्देशन और एडीसीपी राहुल देव शर्मा के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर दोनों आरोपियों को घटना के कुछ ही घंटों में पकड़ लिया।

पूछताछ में आरोपियों ने आपसी विवाद के चलते हमला करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त लकड़ी और ईंट बरामद कर जब्त कर ली।

दोनों आरोपी न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे गए

सरस्वती नगर पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 168/26 के तहत धारा 109, 103, 3(5) बीएनएस के अंतर्गत अपराध दर्ज किया है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

गिरफ्तार आरोपी:

  • तुषार महिधर उर्फ बाउ, 19 वर्ष, सतनामी पारा मंदिर के पास कोटा, रायपुर।
  • सुरेंद्र मधुकर उर्फ पोका, 25 वर्ष, सतनामी पारा मंदिर के पास कोटा, रायपुर।

एक पौधा आज, हरियाली कल: साव ने युवाओं से किया खास आह्वान

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स जिला संघ द्वारा आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में अमरूद का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि वृक्ष हमारे पर्यावरण की अनमोल धरोहर हैं। पौधारोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधों की देखभाल और उनका संरक्षण भी हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पौधे लगाकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर पर्यावरण तैयार कर सकते हैं। हरियाली बढ़ेगी, तो हमारा पर्यावरण भी स्वस्थ और सुंदर बनेगा।

उन्होंने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स जिला संघ द्वारा आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों और युवाओं की पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में भागीदारी से इस अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया जा सकता है।

अब राशन दुकान पर इंतजार नहीं, शुरू हुआ ग्रेन एटीएम

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / सार्वजनिक वितरण प्रणाली को तकनीक से जोड़ते हुए बिलासपुर के सरकंडा में शनिवार को अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की शुरुआत हुई। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इसका शुभारंभ किया, जबकि खाद्य मंत्री दयालदास बघेल वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े। आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद हितग्राही मशीन से निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न कुछ ही सेकंड में प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की भी बचत होगी।

अंगूठा लगाते ही स्क्रीन पर दिखेगा राशन

अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है। हितग्राही मशीन के सामने पहुंचकर फिंगरप्रिंट के माध्यम से आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करेगा। इसके बाद स्क्रीन पर उसके लिए उपलब्ध राशन और उसकी मात्रा दिखाई देगी।

हितग्राही मात्रा की पुष्टि करने के बाद अपना खाली बैग मशीन के डिस्पेंसर के नीचे रखेगा और डिस्पेंस बटन दबाएगा। इसके कुछ ही सेकंड बाद निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न स्वत: बैग में भर जाएगा। पूरी प्रक्रिया के बाद स्क्रीन पर प्रदर्शित संदेश की पुष्टि करनी होगी।

राशन वितरण में मानवीय त्रुटि होगी कम

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम को जनता को समर्पित करते हुए इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तकनीकी नवाचार और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीक से हितग्राहियों को सुगम और त्वरित सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इस व्यवस्था से राशन की मात्रा में मानवीय त्रुटि की संभावना कम होगी। साथ ही हितग्राहियों को राशन लेने में कम समय लगेगा और वितरण प्रक्रिया अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनेगी।

WFP के सहयोग से हुई स्थापना

अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की स्थापना राज्य शासन के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के सहयोग से की है। इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधुनिक और हितग्राही-केंद्रित बनाने की दिशा में एक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।

शुभारंभ के दौरान मशीन से खाद्यान्न वितरण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया गया। मशीन की कार्यप्रणाली देखकर राशन कार्डधारी हितग्राहियों और उपस्थित नागरिकों में खासा उत्साह देखने को मिला।

हितग्राहियों ने बताया सुविधाजनक

कार्यक्रम में मौजूद राशन कार्डधारी हितग्राहियों ने मशीन की सरल प्रक्रिया, सटीक तौल और तेजी से राशन मिलने की व्यवस्था की सराहना की। नागरिकों ने उम्मीद जताई कि तकनीक आधारित यह व्यवस्था राशन वितरण को और अधिक सुविधाजनक बनाएगी।

कार्यक्रम में विधायक सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित खाद्य विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

सड़क के बीच बिजली के खंभे देख भड़के अरुण साव, जांच के दिए निर्देश

बिलासपुर / TODAY छत्तीसगढ़  / उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने कहा है कि समय की मांग बदल रही है, इसलिए अधिकारी वर्तमान के साथ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर दूरदर्शी कार्ययोजना बनाएं। विकास कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों में विलंब को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करने की बात कही। श्री साव आज जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित अधिकारियों की बैठक में शासकीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।बैठक में विधायक धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला एवं दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित सभी जनपद पंचायतों एवं नगरीय निकायों के अध्यक्ष तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

      प्रभारी मंत्री श्री साव ने बिल्हा के बरतोरी से मोहतरा मार्ग पर सड़क के बीच  बिजली के खंभे खड़े किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला पंचायत सीईओ को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने पर बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक से अनुपस्थित रहने वाले चार अधिकारियों के प्रति भी प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने बिल्हा, कोटा और तखतपुर जनपद पंचायत के सीईओ तथा रतनपुर नगरपालिका के सीएमओ को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने विभागों के कार्यों की नियमित रूप से समीक्षा करते रहने और मैदानी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान 

श्री साव ने कहा कि बिलासपुर शहर में पहली ही बारिश में जलभराव की स्थिति सामने आई है। इससे निपटने के लिए अभी से ऐसी बेहतर और स्थायी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे आने वाले वर्षों में शहरवासियों को इस समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान सड़कों पर गड्ढे और क्षति की स्थिति बनती है। विभागीय अधिकारी इसकी तैयारी अभी से रखें, ताकि बारिश समाप्त होते ही सड़कों की मरम्मत और सुधार कार्य तत्काल शुरू किया जा सके। उन्होंने निर्माण विभागों की अलग से बैठक लेकर कार्यों की विस्तृत समीक्षा करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण किए जाएं।

मौसमी बीमारियों की रोकथाम के

प्रभारी मंत्री ने मलेरिया सहित मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने गांव स्तर पर लगातार निगरानी रखने तथा मितानिन स्तर तक आवश्यक एवं मूलभूत दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि कोटा विकासखंड में अब तक मलेरिया के 48 मरीज मिले हैं। इनमें 6 मरीज उपचाररत हैं, जबकि अन्य मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। रोटरी क्लब के सहयोग से प्रभावित क्षेत्र में 1500 मच्छरदानियों का वितरण किया जा रहा है।

पर्याप्त बारिश से फसलों की स्थिति 

  कृषि विभाग की समीक्षा में बताया गया कि जिले में पर्याप्त बारिश होने से फसलों की स्थिति अच्छी है। बांधों में भी पर्याप्त जलभराव है। जिले में खाद-बीज की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में समितियों में लगभग 300 क्विंटल बीज तथा 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी, यूरिया सहित अन्य उर्वरक उपलब्ध हैं। श्री साव ने कहा कि इस वर्ष धान खरीदी के लिए किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन जरूरी है। उन्होंने किसानों को इसकी जानकारी देने और गांव-गांव शिविर लगाकर पंजीयन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंजीयन के अभाव में एक भी किसान धान बेचने से वंचित नहीं होना चाहिए।

वीबी-जी रामजी योजना में काम स्वीकृत करें

जिला पंचायत की योजनाओं की समीक्षा के दौरान श्री साव ने वीबी-जी रामजी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत फील्ड की वास्तविक जरूरतों के आधार पर कार्य स्वीकृत किए जाएं। मुक्तिधाम, शौचालय, स्कूलों की मरम्मत, जल संरक्षण, छोटे बांध सहित स्थानीय आवश्यकता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने गांवों में जल संरक्षण के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने और पानी बचाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन की समीक्षा में बताया गया कि जिले में 804 सिंगल विलेज योजनाओं में से 310 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इनमें से 219 योजनाएं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जा चुकी हैं। प्रभारी मंत्री ने योजनाओं के निरंतर संचालन एवं रखरखाव के लिए जनभागीदारी से जल अर्पण अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने वाटर रिचार्जिंग के लिए जिले में जनभागीदारी के साथ किए गए प्रयासों की सराहना की।

मल्हार और रतनपुर के समन्वित विकास 

श्री साव ने ऐतिहासिक नगरी मल्हार और रतनपुर के समन्वित एवं सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों ऐतिहासिक स्थलों की विरासत, पर्यटन संभावनाओं और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार की जाए। नगर विकास की समीक्षा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, अधोसंरचना विकास और साफ-सफाई के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने बिलासपुर में आईएसडीपी योजना के तहत निर्मित आवासों की आवश्यक मरम्मत कराकर पात्र गरीब परिवारों को शीघ्र आवंटित करने को कहा। जीवनदीप और आयुष समिति की बैठक में कई प्रस्ताव स्वीकृत किए । समीक्षा बैठक के बाद जिला अस्पताल की जीवनदीप समिति तथा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की आयुष समिति की बैठक आयोजित की गई। इन बैठकों में अस्पताल एवं महाविद्यालय की आवश्यक सुविधाओं और विकास कार्यों से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर कई प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री साव द्वारा दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

गुजरात में छत्तीसगढ़ पर्यटन की दमदार दस्तक, TTF में छाया राज्य का वैभव

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में शामिल कराने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को गांधीनगर में आयोजित ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (TTF) से नई गति मिली है। 6 से 8 अगस्त तक आयोजित पर्यटन मेले में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 100 वर्गमीटर का आकर्षक पवेलियन तैयार कर राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और रोमांचक पर्यटन संभावनाओं को देशभर के पर्यटन व्यवसायियों के सामने प्रस्तुत किया। मेले में बोर्ड से पंजीकृत 26 ट्रैवल एजेंट और होटल व्यवसायियों ने भी सहभागिता की।

गांधीनगर में आयोजित TTF में देश के विभिन्न राज्यों से ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर, होटल व्यवसायी और पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि पहुंचे। छत्तीसगढ़ पवेलियन में आने वाले लोगों को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन सुविधाओं और विभिन्न गंतव्यों की विशेषताओं की जानकारी दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ की ओर से प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों, जलप्रपातों, वन क्षेत्रों और रोमांचक पर्यटन स्थलों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।

पर्यटन की विविध संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 100 वर्गमीटर क्षेत्र में पवेलियन तैयार किया। इसमें राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ प्रमुख पर्यटन स्थलों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

पवेलियन में पर्यटन व्यवसायियों के लिए बैठक और व्यावसायिक संवाद की सुविधा भी रखी गई। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को सीधे देश के पर्यटन उद्योग से जोड़ने का अवसर मिला।

TTF गांधीनगर में छत्तीसगढ़ की सहभागिता के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। बड़ी संख्या में नए ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर और पर्यटन व्यवसायी छत्तीसगढ़ पवेलियन पहुंचे और राज्य के पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी ली।

कई नए पर्यटन व्यवसायियों ने छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के साथ पंजीयन कराने में रुचि दिखाई है। इससे भविष्य में राज्य के लिए नए पर्यटन पैकेज तैयार होने और देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।

26 पर्यटन व्यवसायियों ने बढ़ाई सहभागिता

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के साथ पंजीकृत 26 ट्रैवल एजेंट और होटल व्यवसायियों की मेले में सहभागिता निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पर्यटन उद्योग से जुड़े इन प्रतिनिधियों ने संभावित पर्यटकों और देशभर के कारोबारियों के साथ सीधे संवाद किया।

इससे पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ने की संभावना है।

कई राज्यों ने भी किया पर्यटन का प्रदर्शन

TTF गांधीनगर में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और गुजरात पर्यटन के साथ मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, गोवा, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब और दिल्ली समेत कई राज्यों ने हिस्सा लिया।

एक ही मंच पर देश के अलग-अलग राज्यों के पर्यटन उत्पादों की प्रस्तुति से पर्यटन कारोबारियों को नए गंतव्यों की जानकारी और व्यावसायिक संभावनाओं को विस्तार देने का अवसर मिला। 


© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com
TODAY छत्तीसगढ़
लाइव मार्केट & सराफा