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स्वरोजगार के नाम पर 165 महिलाओं से 49 लाख की ठगी, पुलिस ने सिखाया सबक

TODAY छत्तीसगढ़  / रायगढ़ जिले में आर्थिक अपराधों और भोले-भाले ग्रामीणों को लूटने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन हंट' लगातार जारी है। इसी कड़ी में धरमजयगढ़ पुलिस ने महिलाओं को स्वरोजगार का झांसा देकर 49.50 लाख रुपये की ठगी करने वाली चिटफंड कंपनी 'फ्लोरा मैक्स' के दो फरार अधिकारियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। दोनों आरोपित लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे थे। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

ऐसे बुनते थे ठगी का जाल 

धरमजयगढ़ थाना पुलिस के अनुसार, ग्राम चैनपुर निवासी बाल कुमारी राठिया ने बीते वर्ष दिसंबर में मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। फ्लोरा मैक्स कंपनी के संचालकों ने धरमजयगढ़ के नीचेपारा में बकायदा अपना ऑफिस खोल रखा था। शातिर ठगों ने ग्रामीण महिलाओं को व्यवसाय से जोड़ने और प्रतिमाह 2,700 रुपये का मुनाफा देने का प्रलोभन दिया। कंपनी के डायरेक्टर अखिलेश सिंह ने 10-10 महिलाओं के समूह बनाकर चैनपुर, सिथरा, जबगा और जमाबीरा गांव की करीब 165 महिलाओं को अलग-अलग बैंकों से 30-30 हजार रुपये का लोन दिलवा दिया।

महिलाओं के सिर मढ़ दिया कर्ज का बोझ 

आरोपितों ने लोन के पैसों से महिलाओं के नाम पर दुकानें तो खुलवा दीं, लेकिन उन दुकानों से होने वाली पूरी कमाई (आय) पर खुद कब्जा कर लिया। जब महिलाओं को मुनाफे की रकम नहीं मिली और बैंक के कर्ज की किश्तें जमा करने का नोटिस आने लगा, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस और छत्तीसगढ़ निक्षेपकों का संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

मुखबिर की सूचना पर कसा शिकंजा

एसएसपी शशि मोहन सिंह के सख्त निर्देश पर फरार आरोपितों की धरपकड़ शुरू की गई। मुखबिर तंत्र से मिली पुख्ता सूचना के बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपित श्याम सिंह राजपूत (50 वर्ष) को जांजगीर-चांपा के हथनेवरा से और बलराम बंजारा उर्फ बल्लू (36 वर्ष) को जशपुर के तिलडेगा से गिरफ्तार कर लिया।

विदित हो कि इस बड़े फर्जीवाड़े में पुलिस कंपनी की एजेंट मंजू चौहान को पहले ही जेल भेज चुकी है, वहीं मास्टरमाइंड डायरेक्टर अखिलेश सिंह, राजू सिंह और गुड़िया देवी कोरबा जिले के एक अन्य ठगी मामले में पहले से ही सलाखों के पीछे हैं। एसएसपी ने दोटूक कहा है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले किसी भी ठग को बख्शा नहीं जाएगा।

ऑटो और ई-रिक्शा में क्यूआर कोड लगाने की शुरुआत

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने एक बड़ी पहल की है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के मार्गदर्शन में शनिवार (27 जून) को यातायात कार्यालय परिसर (कालीबाड़ी) में ऑटो और ई-रिक्शा वाहनों पर 'क्यूआर कोड' (QR Code) लगाने के अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया।

इसके साथ ही, रायपुर यातायात पुलिस ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के मामले में 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज कराया है।

क्यूआर (QR) कोड प्रणाली और यात्रियों के लिए इसके लाभ

शहर में चलने वाले सभी ऑटो और ई-रिक्शा में यह क्यूआर कोड चस्पा किया जाएगा। इस व्यवस्था से यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में अहम बदलाव आएंगे:

  • चालक की जानकारी: कोई भी यात्री ऑटो/ई-रिक्शा में बैठने से पहले या सफ़र के दौरान अपने मोबाइल कैमरे (गूगल लेंस आदि) से क्यूआर कोड को स्कैन कर वाहन और चालक की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है।

  • अपराध पर नियंत्रण: इस प्रणाली से वाहनों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगेगी और नागरिकों, विशेषकर महिलाओं में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

  • सामान की वापसी: सफ़र के दौरान यदि यात्री का कोई सामान वाहन में छूट जाता है, तो क्यूआर कोड के ज़रिए वाहन मालिक से संपर्क करना बेहद आसान हो जाएगा।

  • पुलिस की अपील: यातायात पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के मद्देनज़र केवल 'क्यूआर कोड' लगे ऑटो या ई-रिक्शा में ही यात्रा करें।

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में रायपुर का नाम

पब्लिक ट्रांसपोर्ट का डिजिटल रजिस्ट्रेशन करने के मामले में रायपुर देश का पहला ज़िला बन गया है। यातायात पुलिस ने ऑटो यूनियन और चालकों के समन्वय से महज़ 15 दिनों के भीतर 15,047 ऑटो/ई-रिक्शा का ऑनलाइन पंजीयन पूरा किया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' की टीम ने पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों को सर्टिफिकेट और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।

अगले चरण की कार्ययोजना

क्यूआर कोड लगाने के बाद, पुलिस कमिश्नरेट की योजना ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और अधिक अनुशासित बनाने की है:

  • सभी ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को अधिकृत परिचय पत्र (ID Card) जारी किए जाएंगे।

  • शहर में व्यवस्थित पार्किंग के लिए ऑटो स्टैंड का चिन्हांकन कर सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

जागरूकता के लिए शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग

इस अवसर पर यातायात नियमों के पालन, साइबर क्राइम, महिला अपराध और सड़क सुरक्षा से जुड़ी जागरूकता शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग भी की गई। इन फिल्मों को सोशल मीडिया, शहर के प्रमुख चौराहों की एलईडी स्क्रीन, मॉल्स और पीवीआर सिनेमाघरों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाया जाएगा। 

कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पुलिस विभाग और कॉरपोरेट जगत के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे:

  • वरिष्ठ पुलिस अधिकारी: अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले, डीसीपी (उत्तर) मयंक गुर्जर, डीसीपी (पश्चिम) संदीप पटेल, डीसीपी (क्राइम) स्मृतिक राजनाला, एडीसीपी (मुख्यालय) अर्चना झा, डीसीपी (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल) विवेक शुक्ला।

  • कॉरपोरेट व यूनियन प्रतिनिधि: श्री नारायण हॉस्पिटल के सीईओ युवराज खेमका, विश्व गीता इस्पात से सुधीर सुल्तानिया, हीरा इस्पात से प्रकाश अग्रवाल, सागर टीएमटी से पंकज अग्रवाल और ऑटो यूनियन के पदाधिकारी कमल पांडेय व नारायण सोनी।

200 करोड़ का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बना 'सफेद हाथी', कांग्रेस ने पूछा- क्या निजी हाथों में सौंपने की है तैयारी ?

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर (कोनी) में 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने 220 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का संचालन अब सियासी रंग लेने लगा है। अस्पताल के पूरी क्षमता से संचालित न होने पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी ने सुविधाओं के अभाव को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। कांग्रेस का स्पष्ट आरोप है कि करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद आम जनता अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित है।

पीएम के लोकार्पण के बाद भी सुविधाओं का टोटा 

कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने याद दिलाते हुए कहा कि 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अस्पताल का भव्य लोकार्पण किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी स्वयं अस्पताल का दौरा कर सुविधाओं का जायजा लिया था। उस दौरान यह जोर-शोर से दावा किया गया था कि यह अस्पताल पूरे बिलासपुर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेगा। लोगों को यह आस बंधी थी कि अब गंभीर बीमारियों जैसे- हार्ट, किडनी और न्यूरो के इलाज के लिए उन्हें रायपुर या नागपुर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लेकिन, वर्तमान स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है।

सिर्फ 'भवन' बनकर रह गया अस्पताल 

विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा समय में यह विशाल अस्पताल केवल एक ईंट-गारे का 'भवन' मात्र बनकर रह गया है। कई जीवनरक्षक और बुनियादी सुविधाएं अब तक जमीनी स्तर पर शुरू ही नहीं हो पाई हैं। कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर निम्नलिखित सवाल खड़े किए हैं:

  • बुनियादी सुविधाओं का अभाव: अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन सेवा, पूरी तरह चालू आईसीयू (ICU), कैथ लैब और ऑक्सीजन प्लांट जैसी जीवनरक्षक सुविधाओं की भारी कमी है।

  • स्टाफ और नियुक्ति पर सस्पेंस: विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के बावजूद तकनीकी कर्मचारियों के अभाव में कैथ लैब शुरू नहीं हो सकी है। प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

  • मरीजों को किया जा रहा रेफर: गंभीर सुविधाओं के अभाव का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आज भी गंभीर मरीजों को मजबूरन सिम्स (CIMS), जिला अस्पताल या अन्य निजी संस्थानों में रेफर किया जा रहा है।

  • एंबुलेंस व्यवस्था नदारद: गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार देने और उन्हें सुरक्षित स्थानांतरित करने के लिए आधुनिक एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं है।

क्या निजीकरण की है तैयारी? केशरवानी ने कहा कि इस अस्पताल का नामकरण छत्तीसगढ़ के कद्दावर और वरिष्ठ नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर किया गया है, जो सीधे तौर पर प्रदेश की जनता के सम्मान और भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल दागा है कि क्या भविष्य में इस भव्य अस्पताल के संचालन को 'निजी हाथों' (Privatization) में सौंपने की कोई गुप्त योजना चल रही है?

कांग्रेस ने दी चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी कांग्रेस ने सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखते हुए कहा है कि अस्पताल के संचालन की पूरी कार्ययोजना को तुरंत सार्वजनिक किया जाए। इसके साथ ही ऑक्सीजन प्लांट, कैथ लैब, आधुनिक उपकरणों की स्थापना और स्टाफ की नियमित भर्ती की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से पूरी की जाए।

विपक्ष ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि बिलासपुर की जनता के बुनियादी स्वास्थ्य अधिकारों की लड़ाई है। यदि जल्द ही अस्पताल में आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त कर इसे इसकी पूरी क्षमता के साथ आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी जनहित में सड़क पर उतरकर चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। 


दूसरे के नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर भेजे अश्लील मेसेज, जानिए कोर्ट ने क्या कहा

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक युवक के नाम से फ़र्ज़ी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर अश्लील और धमकी भरे संदेश भेजने के मामले में एक स्थानीय अदालत ने आरोपी छात्रा को नियमित ज़मानत दे दी है.

दशम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत ने मामले की प्रकृति, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की ज़ब्ती और आरोपी के छात्रा होने के आधार पर यह फ़ैसला सुनाया है.

क्या है साइबर अपराध का यह मामला?

तोरवा थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुमित रात्रे नामक युवक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके नाम का उपयोग कर सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया गया है.

  • आरोप: शिकायत में कहा गया था कि इस फ़र्ज़ी अकाउंट के ज़रिए अश्लील, आपत्तिजनक और धमकीपूर्ण संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं, जिससे शिकायतकर्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंच रहा है.

  • पुलिस की जांच: तोरवा पुलिस ने आईटी एक्ट (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की. साइबर सेल द्वारा तकनीकी साक्ष्यों, सोशल मीडिया अकाउंट डिटेल्स और 'डिजिटल ट्रेल' का विश्लेषण किया गया.

  • गिरफ़्तारी: साइबर जांच में यह बात सामने आई कि उक्त फ़र्ज़ी अकाउंट का संचालन प्रीति सूर्यवंशी नामक छात्रा द्वारा किया जा रहा था. इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया.

ज़मानत के आधार और अदालत की शर्तें

पुलिस ने गिरफ़्तारी के बाद आरोपी छात्रा को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया था, जहाँ से उसकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी गई थी. इसके बाद बचाव पक्ष ने सत्र न्यायालय में अपील की.

दशम एडिशनल जज की अदालत में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता (प्रार्थी) की ओर से ज़मानत का कड़ा विरोध किया गया. वहीं, आरोपी की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता (हाईकोर्ट वकील) पुष्पेंद्र कुमार पटेल ने दलीलें पेश कीं.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने निम्नलिखित आधारों पर छात्रा को नियमित ज़मानत दे दी:

  • आरोपों की प्रकृति और जांच का वर्तमान चरण.

  • मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (मोबाइल/लैपटॉप आदि) की पुलिस द्वारा पहले ही ज़ब्ती.

  • आरोपी छात्रा का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होना.

  • आवेदक का एक महिला और छात्रा होना.

इसके साथ ही, अदालत ने ज़मानत के लिए कुछ सख़्त शर्तें भी तय की हैं:

  • आरोपी द्वारा अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों (सबूतों) के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी.

  • मामले से जुड़े किसी भी गवाह को डराया या धमकाया नहीं जाएगा.

  • मुक़दमे की न्यायिक कार्रवाई और सुनवाई में पूरा सहयोग दिया जाएगा.

  • ज़मानत अवधि और मुक़दमे के दौरान आरोपी कोई अन्य अपराध नहीं करेगी.

रात में घर के बाहर खड़ी थी ई-रिक्शा, सुबह ग़ायब थीं बैटरियां... पुलिस ने ऐसे सुलझाया मामला

TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर में पुलिस ने ई-रिक्शा की बैटरियां चोरी करने और चोरी का सामान ख़रीदने के मामले का ख़ुलासा करते हुए तीन अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. खमतराई थाना पुलिस ने गिरफ़्तार लोगों के पास से 10,000 रुपये क़ीमत की दोनों बैटरियां बरामद कर ली हैं. विधिक कार्रवाई के बाद अदालत के निर्देश पर तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

घर के बाहर खड़े ई-रिक्शा से हुई थी चोरी

खमतराई थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, भनपुरी (टिंबर मार्केट) के रहने वाले राजू सोनी ने पुलिस में चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी.

  • घटना: शिकायतकर्ता के मुताबिक़, 24 जून 2026 की रात उन्होंने अपना ई-रिक्शा (CG 04 PB 3187) घर के बाहर खड़ा किया था. अगली सुबह देखा तो रिक्शे से दो बैटरियां (स्टार लाइट लाल रंग) ग़ायब थीं.

  • प्राथमिक कार्रवाई: शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात चोर के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303 (2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

मुखबिर की सूचना पर पकड़ाया मुख्य अभियुक्त

रायपुर (नॉर्थ ज़ोन) पुलिस उपायुक्त मयंक गुर्जर के निर्देश पर पुलिस टीम ने अज्ञात चोर की तलाश शुरू की. इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि गोंदवारा स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप के पास एक युवक ई-रिक्शा की बैटरी बेचने की फ़िराक में घूम रहा है.

पुलिस टीम ने घेराबंदी कर संदेही राय सिंग उर्फ़ प्रकाश को हिरासत में लिया. पुलिस के अनुसार, कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने 24 जून की रात भनपुरी से बैटरी चोरी करने का जुर्म स्वीकार कर लिया.

उसने पुलिस को बताया कि उसने चोरी की दोनों बैटरियां 5-5 हज़ार रुपये में दो अन्य युवकों (दीपक और किशुन) को बेची हैं. चोरी का सामान ख़रीदने के आरोप में पुलिस ने प्रकरण में धारा 317 (2) और 3(5) जोड़ते हुए दोनों ख़रीदारों को भी गिरफ़्तार कर लिया और उनके कब्ज़े से बैटरियां ज़ब्त कर लीं.

👥 गिरफ़्तार अभियुक्तों का विवरण

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में गिरफ़्तार किए गए तीनों अभियुक्तों की पहचान इस प्रकार है:

  • राय सिंग उर्फ़ प्रकाश (उम्र 30 वर्ष), मूल निवासी- ज़िला डिंडोरी (मध्य प्रदेश), वर्तमान निवास- गोंदवारा, रायपुर (मुख्य अभियुक्त- चोरी करने वाला).

  • दीपक उर्फ़ दीपू दास (उम्र 25 वर्ष), निवासी- बीरगांव गाजीनगर, थाना उरला, ज़िला रायपुर (चोरी का सामान ख़रीदने वाला).

  • किशुन उर्फ़ किशन भारती (उम्र 30 वर्ष), निवासी- पार्वती नगर, मुर्राभट्ठा, थाना गुढ़ियारी, ज़िला रायपुर (चोरी का सामान ख़रीदने वाला).

बैटरी में तनाव: दोनों पक्षों के 7 लोगों को पुलिस ने लिया हिरासत में, जानिए क्या है पूरा

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर ज़िले (मल्हार पुलिस चौकी क्षेत्र) के ग्राम बैटरी में आपसी विवाद और तनाव के बाद पुलिस ने दो गुटों के सात लोगों के ख़िलाफ़ प्रतिबंधात्मक (प्रिवेंटिव) कार्रवाई की है.

पुलिस प्रशासन का कहना है कि गांव में शांति और क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह एहतियाती क़दम उठाया गया है. सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया गया.

मल्हार पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई 24 जून 2026 को हुए एक विवाद के बाद की गई है, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

प्रार्थी जवाहरलाल कश्यप ने हनुमान प्रसाद, उनके बेटे बाबूलाल, दयाराम और अन्य के ख़िलाफ़ दोपहर क़रीब 1:30 बजे मामला दर्ज कराया था.

इसके जवाब में दूसरे पक्ष के हनुमान प्रसाद वर्मा ने भी जवाहर कश्यप, जीवन कश्यप, दुष्यंत कश्यप और प्रेमचंद पांडे के ख़िलाफ़ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

कार्रवाई की मुख्य वजह

पुलिस के मुताबिक़, दोनों पक्षों की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज़ कर मामले की जांच की जा रही थी. लेकिन, पुलिस की कार्रवाई के बावजूद दोनों गुटों के बीच गांव में लगातार आरोप-प्रत्यारोप और विवाद जारी था. लगातार मिल रही शिकायतों और गांव का माहौल ख़राब होने (शांति भंग होने) की आशंका को देखते हुए पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत दोनों पक्षों के लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में ग्राम बैटरी (चौकी मल्हार, थाना मस्तूरी) के बाबूलाल वर्मा, नंदकुमार वर्मा, राम रतन वर्मा, मधुसूदन कश्यप, दुष्यंत कश्यप, राजेश्वर उर्फ़ राजा और प्रेमचंद पांडे के खिलाफ कारवाही की गयी है। 

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाक़ों में गुटबाज़ी और आपसी रंजिश के कारण क़ानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.

नशा मुक्त सप्ताह का समापन; जिले के सभी थानों में चला पुलिस का 'चेतना अभियान'


TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर ज़िले में शुक्रवार (26 जून) को 'अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस' के मौक़े पर पुलिस प्रशासन ने व्यापक जागरूकता अभियान चलाया. नशा मुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से ज़िले के सभी थाना और चौकी क्षेत्रों में पुलिस ने आम जनता के साथ मिलकर नशा विरोधी रैलियां निकालीं.

'चेतना अभियान' के तहत कार्यक्रमों का आयोजन

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार के निर्देश पर 17 जून से 26 जून तक 'नशा मुक्त भारत सप्ताह' मनाया जा रहा था. इसी कड़ी में बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में ज़िले में 'चेतना अभियान' चलाया जा रहा है. 

आज इस सप्ताह के अंतिम दिन सभी राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में मोर्चों को संभालते हुए इन जागरूकता कार्यक्रमों का नेतृत्व किया. 

युवाओं और महिलाओं पर विशेष ध्यान

पुलिस प्रशासन ने इन रैलियों में युवाओं, महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया. जागरूकता: कार्यक्रमों के दौरान आम लोगों को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.

पुलिस अधिकारियों ने जनता से अपील की कि वे ख़ुद को और अपने परिवार को नशे से दूर रखें. साथ ही, क़ानूनी कार्रवाइयों के अलावा सामाजिक स्तर पर भी पुलिस का सहयोग करने का आग्रह किया गया, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके.

इस वृहद आयोजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज पटेल, सीएसपी निमितेश सिंह, रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता, निरीक्षक देवेश सिंह, रवींद्र अनंत और नीलेश पांडेय सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. 




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