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मोटरसाइकिल चोरी के छह मामलों का खुलासा, सात लोग गिरफ्तार


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /   शहर में लगातार सामने आ रही मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं के बीच पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई में चोरी करने वाले चार आरोपियों और चोरी के वाहन खरीदने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का कहना है कि शहर में बढ़ती चोरी की घटनाओं को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई थी। जांच के दौरान टीम ने घटनास्थलों और आसपास के इलाकों में लगे 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। इन फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई और उनके हुलिये तथा गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई गई। इसके साथ ही साइबर सेल की तकनीकी सहायता से आरोपियों के संभावित ठिकानों का पता लगाया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने मस्तुरी क्षेत्र के बेदपरसदा निवासी एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में उसने विभिन्न स्थानों से मोटरसाइकिल चोरी करना स्वीकार किया। इसके साथ ही उसने उन लोगों के बारे में भी जानकारी दी, जिन्हें चोरी की मोटरसाइकिलें बेची गई थीं। इसके आधार पर पुलिस ने अन्य आरोपियों और खरीददारों को भी गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह की गिरफ्तारी से बिलासपुर, जांजगीर और दुर्ग जिलों में दर्ज कुल छह मोटरसाइकिल चोरी के मामलों का खुलासा हुआ है। इनमें विभिन्न थानों में दर्ज मामले शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत करीब दो लाख रुपये बताई जा रही है। बरामद वाहनों में हीरो पैशन प्रो, बजाज सीटी 100, होंडा शाइन और हीरो स्प्लेंडर जैसे मॉडल शामिल हैं।

प्रेमिका बनी ‘राज’, पिता और दोस्त संग मिलकर उतारा मौत के घाट


कबीरधाम।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले के वन क्षेत्र में स्थित रानीदहरा जलप्रपात के पास पिछले दिनों एक अज्ञात महिला का शव मिलने से शुरू हुई जांच ने पांच दिनों के भीतर एक सुनियोजित हत्या का खुलासा कर दिया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी को महाराष्ट्र के पुणे शहर से गिरफ्तार किया गया है  जबकि उसके पिता और एक सहयोगी को भी हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने बताया कि 19 मार्च को स्थानीय लोगों की सूचना पर जलप्रपात के समीप एक महिला का शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच में मृतका की पहचान अज्ञात होने के कारण मामला जटिल था। इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय पूछताछ और अन्य उपलब्ध सुरागों के आधार पर पुलिस ने दो दिनों के भीतर मृतका की पहचान कर ली। वह छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की निवासी सुखमती बैगा थी। 

इसके बाद जांच का दायरा सीमित किया गया और संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया तेज की गई। पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन विश्लेषण ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मुख्य आरोपी देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल राज्य से बाहर छिपा हुआ है। इसके बाद एक विशेष टीम को पुणे भेजा गया, जहां से उसे गिरफ्तार कर कबीरधाम लाया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस के अनुसार, उसने अपने पिता केषव प्रसाद जायसवाल और एक अन्य व्यक्ति मनोज पटेल के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी।

पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया कि मृतका और आरोपी के बीच प्रेम संबंध था। आरोपी ने कथित रूप से समाज में बदनामी के भय का हवाला देते हुए हत्या की योजना बनाई। जांच में यह भी सामने आया कि 16 मार्च की शाम महिला को रानीदहरा जलप्रपात क्षेत्र में ले जाया गया, जहां उस पर पत्थर से हमला किया गया और बाद में शव को झरने में फेंक दिया गया।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर घटनास्थल पर डमी पुतले के माध्यम से घटना का पुनर्निर्माण (सीन रिक्रिएशन) किया गया। इससे कथित तौर पर यह स्पष्ट हुआ कि अपराध को किस प्रकार अंजाम दिया गया। इसके अलावा, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद करने की बात कही है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपी देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल, उसके पिता केशव प्रसाद जायसवाल और मनोज पटेल को गिरफ्तार किया है। 

ACB: सुरही रेंजर पल्लव नायक और डिप्टी रेंजर श्रीवास्तव 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) बिलासपुर की टीम ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अचानकमार टाइगर रिजर्व के सुरही रेंज में पदस्थ रेंजर पल्लव नायक और डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। दोनों अधिकारियों पर एक प्रकरण में चालान जल्द पेश करने और जब्त वाहन वापस करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है।

ACB के डीएसपी अजितेश सिंह ने बताया कि मुंगेली जिले के लोरमी निवासी अजीत कुमार वैष्णव ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, दिसंबर 2025 में वह अपने साथियों के साथ सुरही रेंज क्षेत्र में चारपहिया वाहन से घूमने गया था, जहां एयर गन के साथ बनाई गई एक रील सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए वाहन जब्त कर लिया था और संबंधित लोगों को करीब 18 दिन जेल में भी रहना पड़ा।  

जेल से रिहा होने के बाद प्रार्थी जब मामले में जल्द चालान पेश कराने के लिए डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव से मिला, तो उससे कथित तौर पर 4 से 5 लाख रुपये खर्च होने की बात कही गई। साथ ही वाहन छोड़ने के लिए 70 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई। शिकायत का सत्यापन सही पाए जाने के बाद ACB ने ट्रैप की योजना बनाई। 26 मार्च को प्रार्थी को कोटा स्थित मित्र मिलन रेस्टोरेंट में आरोपियों को रिश्वत की पहली किश्त देने भेजा गया। यहां प्रार्थी ने मनीष श्रीवास्तव को 50 हजार रुपये सौंपे, तभी ACB टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान मौके पर रेंजर पल्लव नायक भी मौजूद थे। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने भी प्रार्थी से रिश्वत की मांग की थी। ACB ने मनीष श्रीवास्तव से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

ACB ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई शासकीय कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो इसकी सूचना तत्काल ACB को दें। उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों में ACB बिलासपुर की यह 45वीं ट्रैप कार्रवाई है, जो विभाग की सक्रियता को दर्शाती है।  


अचानकमार की आबोहवा में जहर घोलने वाला ये वीडियो, जिसके आरोपियों की मदद के लिए रेंजर और डिप्टी रेंजर लाखों रूपये की रिश्वत मांगते हुए आज पकडे गये। देखें पूरा वीडियो - 

आईपीएस रतन लाल डांगी निलंबित, यौन उत्पीड़न के आरोप


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, आईपीएस रतन लाल डांगी को निलंबित कर दिया है। यह निर्णय उनके आचरण से जुड़े एक मामले के प्रारंभिक परीक्षण के बाद लिया गया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय उनके कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद लिया गया है। इसके साथ ही कुछ दिन पहले एक SI की पत्नी ने आईपीएस रतनलाल डांगी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने के कारण यह कार्रवाई की गई है।

गृह (पुलिस) विभाग द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि संबंधित अधिकारी का व्यवहार सेवा की अपेक्षित गरिमा और मानकों के अनुरूप नहीं था। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके आचरण से पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हुई है।

सरकार ने मामले में अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के तहत प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई प्रारंभ की है। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान अधिकारी पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर से संबद्ध रहेंगे और बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विभागीय जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी। 

क्या है पूरा मामला - 

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लगभग पांच महीने पहले उन्हें आईजी पद से भी हटा दिया गया था। यह मामला अक्टूबर 2025 में दर्ज एक शिकायत से संबंधित है। शिकायत में एक महिला ने अधिकारी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पुलिस मुख्यालय में दर्ज शिकायत के अनुसार, महिला का कहना है कि उनकी मुलाकात वर्ष 2017 में कोरबा में हुई थी, जब संबंधित अधिकारी वहां पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे।

शिकायत में कहा गया है कि शुरुआती संपर्क सोशल मीडिया के माध्यम से हुआ, जो बाद में नियमित बातचीत में बदल गया। महिला का आरोप है कि समय के साथ अधिकारी द्वारा संपर्क बनाए रखने के लिए दबाव डाला गया।

महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे मिलने के लिए बुलाया गया और मना करने पर उसके पति के तबादले की धमकी दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसके पास अपने दावों के समर्थन में कुछ डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन आरोपों की जांच जारी है। मामले में अभी तक आरोपों पर अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार ने कहा है कि आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।  

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