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कैमरे की कलम: जब कैमरा गवाह बन जाए

कभी कहा जाता था कि "दीवारों के भी कान होते हैं।" इक्कीसवीं सदी ने इस कहावत को बदल दिया है। अब दीवारों के सिर्फ कान नहीं, आंखें भी हैं। जेब में रखा मोबाइल फोन, सड़क पर लगा सीसीटीवी कैमरा और पुलिस की वर्दी पर लगा बॉडी कैमरा आज लोकतंत्र के सबसे निष्पक्ष गवाह बनते जा रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें न सत्ता का भय होता है, न विपक्ष का मोह और न ही किसी दल या व्यक्ति के प्रति पूर्वाग्रह। कैमरा वही दिखाता है जो उसके सामने घटता है।

पिछले कुछ वर्षों में देश में जितने बड़े राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक विवाद सामने आए हैं, उनमें से अधिकांश की शुरुआत किसी वीडियो, ऑडियो या सीसीटीवी फुटेज से हुई। कहीं कोई मंत्री अपने पद के अहंकार में दिखाई दिया, कहीं कोई अधिकारी जनता से दुर्व्यवहार करता मिला, कहीं पुलिस की बर्बरता कैमरे में कैद हुई, तो कहीं अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट करते जनप्रतिनिधि की हेकड़ी कुछ ही घंटों में अदालत तक पहुंच गई। यदि ये कैमरे न होते तो अधिकांश मामलों में वही पुराना सरकारी वाक्य सुनाई देता—"आरोप निराधार हैं। जांच कराई जाएगी।"

दरअसल, तकनीक ने लोकतंत्र को वह ताकत दे दी है, जिसे कभी केवल अखबार, अदालत और विपक्ष मिलकर भी नहीं दे पाते थे—तथ्य का निर्विवाद प्रमाण।

यही कारण है कि कैमरे से सबसे अधिक असहज वही लोग होते हैं जो अधिकार को जवाबदेही से ऊपर मानते हैं। आम नागरिक कैमरे से इसलिए नहीं डरता क्योंकि उसके पास छिपाने को बहुत कम होता है। लेकिन सत्ता, चाहे वह राजनीतिक हो या प्रशासनिक, अक्सर रिकॉर्डिंग से असहज हो जाती है। जैसे ही कोई नागरिक मोबाइल निकालता है, कई जगह सबसे पहला आदेश सुनाई देता है—"वीडियो बंद करो। मोबाइल रखो। रिकॉर्डिंग मत करो।"

सवाल यह है कि क्यों?

यदि सरकारी अधिकारी नियमों के अनुसार काम कर रहा है, पुलिस कानून के दायरे में कार्रवाई कर रही है और जनप्रतिनिधि जनता के प्रति मर्यादित व्यवहार कर रहा है, तो रिकॉर्डिंग से डर किस बात का?

लोकतंत्र में सत्ता जनता से ताकत लेती है। इसलिए जनता को यह अधिकार भी होना चाहिए कि वह सत्ता के व्यवहार का दस्तावेज तैयार कर सके।

विडंबना यह है कि सरकार नागरिकों को तो हर जगह कैमरों की निगरानी में रखती है। रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, टोल प्लाजा, बैंक, सरकारी कार्यालय, अस्पताल, बाजार, चौराहे—हर जगह सीसीटीवी लगे हैं। नागरिक की हर गतिविधि रिकॉर्ड होती है। लेकिन जैसे ही नागरिक सरकार की गतिविधि रिकॉर्ड करना चाहता है, उसे अनुशासन, गोपनीयता और कानून का पाठ पढ़ाया जाने लगता है। लोकतंत्र में यह दोहरा मापदंड नहीं चल सकता।

दुनिया के अनेक लोकतांत्रिक देशों में पुलिस के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य है। इसका उद्देश्य केवल पुलिस की निगरानी करना नहीं, बल्कि पुलिस को झूठे आरोपों से बचाना भी है। यदि कोई आरोपी पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाता है और रिकॉर्डिंग कुछ और कहती है, तो वही वीडियो पुलिस की ढाल बन जाता है। इसी प्रकार यदि पुलिस अपनी शक्ति का दुरुपयोग करती है तो वही कैमरा जनता के अधिकारों का प्रहरी बन जाता है।

अर्थात कैमरा किसी एक पक्ष का नहीं, सत्य का पक्षधर होता है।

भारत में भी समय-समय पर पुलिस को बॉडी कैमरे दिए गए, लेकिन उनका उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सका। कहीं उपकरण अलमारियों में बंद रह गए, कहीं बैटरी खत्म रही और कहीं कैमरे चालू ही नहीं किए गए। तकनीक उपलब्ध थी, लेकिन पारदर्शिता की इच्छा अनुपस्थित रही।

असल प्रश्न यह है कि क्या केवल पुलिस ही क्यों?

सरकारी कार्यालयों में होने वाली प्रत्येक औपचारिक बातचीत की रिकॉर्डिंग क्यों न हो?

तहसील, नगर निगम, पंचायत, आरटीओ, राजस्व कार्यालय, पुलिस थाना, विकासखंड, बिजली कार्यालय—जहां भी नागरिक अपने अधिकार के लिए सरकारी कर्मचारी के सामने खड़ा होता है, वहां उसकी बातचीत रिकॉर्ड करने का अधिकार उसे क्यों न मिले?

आज अधिकांश भ्रष्टाचार फाइलों में नहीं, मौखिक आदेशों में होता है।

कई वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को विवादास्पद निर्देश कभी लिखित में नहीं देते। आदेश हमेशा मौखिक होता है। बाद में जब जांच होती है तो वही अधिकारी कह देता है—"मैंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया।"

यदि ऐसे संवाद रिकॉर्ड किए जा सकें, तो न केवल गलत आदेश देने की प्रवृत्ति कम होगी, बल्कि ईमानदार कर्मचारी भी सुरक्षित रहेगा।

भारतीय प्रशासन में "मौखिक आदेश" शायद सबसे बड़ा अदृश्य भ्रष्टाचार है। फाइलें साफ रहती हैं और जिम्मेदारी हवा में गायब हो जाती है।

तकनीक इस बीमारी का इलाज बन सकती है।

बेशक, इसका अर्थ यह नहीं कि निजी जीवन की गोपनीयता समाप्त कर दी जाए। लोकतंत्र में निजता मौलिक अधिकार है। किसी के घर, निजी बातचीत या व्यक्तिगत जीवन में अनधिकृत रिकॉर्डिंग स्वीकार्य नहीं हो सकती। लेकिन जब कोई व्यक्ति सरकारी पद पर बैठकर सार्वजनिक दायित्व निभा रहा हो, तब उसके आधिकारिक व्यवहार पर पारदर्शिता का सिद्धांत लागू होना चाहिए।

लोकतंत्र में सरकारी पद निजी संपत्ति नहीं होता।

यह जनता का विश्वास होता है।

और विश्वास का सबसे मजबूत आधार पारदर्शिता है।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही देश के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दे चुका है। कई राज्यों में इस दिशा में काम भी हुआ है। अदालतों की कार्यवाही रिकॉर्ड होती है। संसद और विधानसभाओं की हर गतिविधि रिकॉर्ड होती है। नगर निगम की बैठकों का भी वीडियो बनता है। यदि लोकतंत्र के सर्वोच्च संस्थानों की कार्यवाही रिकॉर्ड हो सकती है तो फिर सरकारी दफ्तरों में जनता और अधिकारियों के बीच होने वाली औपचारिक बातचीत रिकॉर्ड होने में आपत्ति कैसी?

जो व्यवस्था स्वयं को ईमानदार मानती है, उसे कैमरे से नहीं, कैमरे की अनुपस्थिति से डरना चाहिए।

यह भी सच है कि कैमरा हर समस्या का समाधान नहीं है। कैमरा रिश्वतखोरी समाप्त नहीं कर सकता। कैमरा भ्रष्टाचार की मानसिकता नहीं बदल सकता। कैमरा कानून का विकल्प नहीं है। लेकिन कैमरा सत्य का ऐसा दस्तावेज अवश्य बन सकता है जिसे झुठलाना कठिन हो।

लोकतंत्र में झूठ सबसे अधिक वहीं फलता-फूलता है जहां प्रमाण नहीं होते।

कैमरा प्रमाण पैदा करता है।

इसलिए वह लोकतंत्र का शत्रु नहीं, सहयोगी है।

अब समय आ गया है कि सरकार स्पष्ट नीति बनाए। नागरिकों को यह कानूनी अधिकार मिले कि वे सरकारी कार्यालयों में अपने आधिकारिक कामकाज के दौरान होने वाली बातचीत रिकॉर्ड कर सकें। पुलिस कार्रवाई में बॉडी कैमरा अनिवार्य रूप से चालू रहे। सरकारी बैठकों में मौखिक निर्देशों के बजाय रिकॉर्डेड या लिखित आदेशों की व्यवस्था हो। और यदि कोई अधिकारी बिना वैध कारण रिकॉर्डिंग रोकता है या नागरिक का मोबाइल छीनता है, तो इसे भी अनुशासनहीनता माना जाए।

इक्कीसवीं सदी में लोकतंत्र का नया प्रहरी कोई व्यक्ति नहीं, तकनीक है।

कैमरा न पक्षधर होता है, न विरोधी। वह न सरकार के लिए वोट मांगता है, न विपक्ष के लिए नारे लगाता है। वह केवल सच दर्ज करता है।

शायद यही कारण है कि जो लोग सच के साथ खड़े हैं, उन्हें कैमरे से डर नहीं लगता।

और जो कैमरे से डरते हैं, वे अनजाने में यह स्वीकार कर देते हैं कि उन्हें सच से असुविधा है। 

SECL HR टीम के साथ जश्न: मनीष श्रीवास्तव के जन्मदिन पर स्नेह और सम्मान का संगम

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  आज मनीष श्रीवास्तव, महाप्रबंधक (मानव संसाधन), SECL का जन्मदिन पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर SECL के निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास जी ने संपूर्ण मानव संसाधन टीम के साथ मिलकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं।

इस ख़ास मौके पर मनीष श्रीवास्तव ने अपने सोशल अकाउंट पर लिखा कि  "मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे SECL के निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास जी के नेतृत्व वाली टीम का सदस्य बनने का अवसर मिला। इस टीम ने न केवल मुझे सीखने और आगे बढ़ने का अवसर दिया, बल्कि मेरे जन्मदिन को भी यादगार बनाकर मुझे अपनापन और सम्मान का एहसास कराया। मैं हृदय से श्री बिरंची दास सर तथा पूरी SECL मानव संसाधन टीम का आभार व्यक्त करता हूँ। आप सभी का स्नेह, सहयोग और विश्वास मेरे लिए हमेशा प्रेरणादायक रहेगा।"

TODAY छत्तीसगढ़ परिवार भी मनीष श्रीवास्तव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ देता है। ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और दीर्घायु प्रदान करें साथ ही उनके उज्जल भविष्य की हम कामना करते हैं।


आधुनिक ट्रैक मशीनों से रेल पथ अनुरक्षण को नई गति: SECR

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने आधुनिक ट्रैक मशीनों के माध्यम से रेल पथ अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाने का दावा किया है। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रेलवे के लगभग 5,500 ट्रैक किलोमीटर के नेटवर्क पर प्रतिदिन 400 से अधिक यात्री और मालगाड़ियों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

रेलवे के अनुसार, ट्रैक अनुरक्षण में आधुनिक मशीनों के उपयोग से कार्य अधिक तेज, सटीक और सुरक्षित तरीके से किए जा रहे हैं। इससे ट्रैक कर्मियों की सुरक्षा बढ़ने के साथ ही ट्रेनों के परिचालन पर भी न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (1 अप्रैल से 30 जून 2026) के दौरान ट्रैक मशीनों की मदद से 2,042 किलोमीटर प्लेन ट्रैक टैंपिंग, 907 टर्नआउट टैंपिंग, 102 किलोमीटर डीप स्क्रीनिंग (गिट्टी छनाई), 50 किलोमीटर ट्रैक रिन्यूअल तथा 58 टर्नआउट रिन्यूअल का कार्य पूरा किया गया।

रेलवे के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 92 आधुनिक ट्रैक मशीनें कार्यरत हैं। इनमें सीएसएम, ड्योमैटिक, एमपीटी, यूनिमेट, बीसीएम, एफआरएम, पीक्यूआरएस, टी-28, बीआरएम, डीजीएस और यूटीवी जैसी मशीनें शामिल हैं। इनके संचालन एवं रखरखाव के लिए लगभग 900 प्रशिक्षित कर्मचारी कार्यरत हैं।

नागपुर–झारसुगुड़ा मुख्य रेलखंड पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से ट्रेनों के संचालन को ध्यान में रखते हुए उच्च गुणवत्ता वाले ट्रैक अनुरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि आधुनिक ट्रैक मशीनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से सुरक्षित, विश्वसनीय और समयबद्ध रेल परिचालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

जल जीवन मिशन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए उपमुख्यमंत्री साव

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव ने कहा है कि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के दीर्घकालीन और सुचारू संचालन के लिए वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इससे भूजल रिचार्ज होगा और जल स्रोतों में लंबे समय तक पानी की उपलब्धता बनी रहेगी।

श्री साव गुरुवार को नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने यूनिसेफ और एक्शन फॉर कम्युनिटी डेवलपमेंट (ACE) के सहयोग से किया, जिसमें प्रदेशभर की लगभग 100 महिला सरपंचों ने भाग लिया।

 उपमुख्यमंत्री ने महिला सरपंचों से गांवों में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद आए बदलावों, पंचायतों द्वारा संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था, जल स्रोतों की स्थिति, जल गुणवत्ता परीक्षण और रखरखाव शुल्क जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के पंचायतों को हस्तांतरित होने के बाद उनके संचालन और संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। ग्रामवासियों की भागीदारी से जलापूर्ति व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्टॉपडैम निर्माण, वर्षा जल संग्रहण, भूजल स्रोतों के पुनर्भरण तथा प्राकृतिक जल प्रवाह में अवरोध और अतिक्रमण हटाकर तालाबों को भरने की दिशा में कार्य करने पर भी जोर दिया।

कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, संधारण और मरम्मत से जुड़े अनुभवों तथा बेस्ट प्रैक्टिसेज पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को योजनाओं के सफल, निर्बाध और दीर्घकालीन संचालन के संबंध में जानकारी दी।

कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, आरजीएनजीडब्ल्यूटीआरआई की निदेशक रूबी मुखर्जी, यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ श्वेता पटनायक, प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम तथा अधीक्षण अभियंता समीर गौड़ सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

महिला ऑफिसर्स क्लब का पौधारोपण अभियान, हरित भविष्य का दिया संदेश

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / पर्यावरण संरक्षण एवं हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला ऑफिसर्स क्लब द्वारा गुरुवार को क्लब परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सदस्याओं ने विभिन्न फलदार पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में डॉ. तरल गर्ग, श्रीमती निकिता अग्रवाल, श्रीमती सोनिया सर्वे, श्रीमती उषा भांगे, श्रीमती भारती दीक्षित और श्रीमती अलका अग्रवाल सहित अन्य सदस्याओं ने मौसंबी, अमरूद और आम के पौधे लगाए। इस दौरान सभी ने पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया।

महिला ऑफिसर्स क्लब की पदाधिकारियों ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण और नियमित देखभाल के लिए आगे आने की अपील भी की।

खुरदूर हत्या कांड का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार; डंडा और रक्तरंजित कपड़े जब्त

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / कोटा थाना क्षेत्र के ग्राम खुरदूर में हुए हत्या के मामले का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में निखिल यादव (23) निवासी कलारतराई और अंकुश रजक (22) निवासी खुरदूर को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, 29 जुलाई की रात लगभग 9:10 बजे ग्राम खुरदूर स्थित विकास किराना स्टोर के सामने सामान और पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान सिदेशी बघेल (42) पर बांस के डंडे से हमला किया गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही कोटा पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की। घटनास्थल के निरीक्षण, पंचनामा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना की गई।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ और आरोपियों के मेमोरेंडम कथनों के आधार पर घटना में प्रयुक्त रक्तरंजित बांस का डंडा तथा घटना के समय पहने गए रक्तरंजित कपड़े बरामद कर जब्त किए गए। पुलिस ने बताया कि जब्ती और मेमोरेंडम की कार्रवाई की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से कर डिजिटल साक्ष्य भी सुरक्षित किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर चिकित्सीय परीक्षण के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई में थाना प्रभारी शशिकांत भारद्वाज, उपनिरीक्षक शिव कुमार साहू, प्रधान आरक्षक सत्य प्रकाश यादव तथा अन्य पुलिस कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पुलिस का जागरूकता अभियान, छात्राओं को सुरक्षा के दिए अहम टिप्स

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  डीसीपी यातायात डॉ. अर्चना झा के मार्गदर्शन में सड़क सुरक्षा जनजागरूकता अभियान के तहत लक्ष्मी नारायण कन्या विद्यालय, कालीबाड़ी में यातायात, महिला सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम में कक्षा 8वीं से 12वीं तक की लगभग 250 छात्राओं, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन ने भाग लिया।

एसीपी स्नेहिल साहू ने छात्राओं को साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग तथा महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन, साइबर क्राइम हेल्पलाइन, 112, पिंक पेट्रोल और अभिव्यक्ति ऐप जैसी सुविधाओं की जानकारी भी साझा की गई।

कार्यक्रम में एसीपी सीमा अहिरवार ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारों के साथ नागरिकों के कर्तव्यों का पालन भी आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं और शिक्षकों से विद्यालय आने-जाने के लिए क्यूआर कोड युक्त ऑटो और ई-रिक्शा का उपयोग करने तथा वाहन का क्यूआर कोड स्कैन कर उसकी जानकारी अभिभावकों से साझा करने की अपील की।

पुलिस के अनुसार, छात्राओं को क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और ई-चालान प्रणाली की जानकारी भी दी गई। साथ ही उन्हें अपने परिवार और समाज में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए "ट्रैफिक एंबेसडर" बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम में 'रक्षा-सुरक्षा' ट्विन सेफ्टी एंजेल ने भी यातायात सुरक्षा से संबंधित जानकारी साझा की। पुलिस ने बताया कि सड़क सुरक्षा अभियान के तहत पहले विद्यालय प्राचार्यों और अभिभावकों की काउंसलिंग की गई थी तथा अब छात्र-छात्राओं को जागरूक कर सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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