रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर छत्तीसगढ़ को "अडानीगढ़" बनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार की नीतियों से हसदेव अरण्य के घने जंगलों और आदिवासी समुदायों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हसदेव क्षेत्र में प्रस्तावित वन कटाई और कोयला खनन परियोजनाओं का पुरजोर विरोध करेगी तथा जल्द ही इसके खिलाफ बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैज ने जारी बयान में कहा कि सरगुजा क्षेत्र के केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की सिफारिश कर दी है। अब यह प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजा गया है। केंद्र की मंजूरी मिलते ही सात लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य मध्य भारत का महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है, जिसे ‘लंग्स ऑफ सेंट्रल इंडिया’ भी कहा जाता है। यहां बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होगा और हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाएंगे।
हसदेव विवाद : कांग्रेस के प्रमुख आरोप
- 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्जन की सिफारिश
- 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की आशंका
- आदिवासी ग्राम सभाओं के विरोध की अनदेखी का आरोप
- हाथियों और वन्यजीवों के आवास पर खतरा
- कांग्रेस ने बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह पूरा क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में शामिल है और यहां के आदिवासी समुदाय लंबे समय से नए कोल ब्लॉकों और खनन परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं। हरैया, फतेहपुर, साल्ही और हर्रई समेत कई गांवों के लोग लगातार आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है।
बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा की डबल इंजन सरकार एक उद्योगपति को लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और वन संपदा को दांव पर लगा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022 में विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर परसा कोल ब्लॉक सहित पांच कोल ब्लॉकों के आवंटन को निरस्त करने की मांग केंद्र सरकार से की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के संसाधनों की रक्षा और आदिवासी हितों के संरक्षण के लिए कांग्रेस संघर्ष जारी रखेगी तथा हसदेव अरण्य में वन कटाई के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।






