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मुरूम खनन: सूचना लीक होने का संदेह, खनिज चोरी पर लगाम नहीं


बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले के ग्रामीण अंचलों में खनिज चोरी का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। इसका ताजा मामला ग्राम पंचायत लोफंदी में सामने आया है, जहां दिनदहाड़े पोकलेन मशीनों से मुरूम की अवैध खुदाई की जा रही है। प्रशासनिक दावों के बावजूद जमीनी हकीकत अलग नजर आ रही है, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। 

ग्रामीणों के अनुसार, बिलासपुर शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित लोफंदी गांव में खनिज माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं। अब स्थिति यह है कि दिन के उजाले में ही अवैध उत्खनन किया जा रहा है और कार्रवाई का कोई भय नहीं दिखता। स्थानीय लोगों ने बताया कि ग्राम पंचायत के सरपंच अयोध्या देवांगन सहित ग्रामीणों ने कई बार कलेक्टर से शिकायत की है। खनिज विभाग को भी चार-पांच बार लिखित और मौखिक जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।  

कार्रवाई से पहले ही कैसे लीक हो जाती है सूचना?

ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी कार्रवाई के लिए टीम आने की सूचना मिलती है, उससे पहले ही खनिज माफिया मौके से फरार हो जाते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कार्रवाई की जानकारी पहले ही कैसे लीक हो जाती है। कुछ ग्रामीणों ने खनिज विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद केवल आश्वासन मिल रहा है, जबकि जमीन पर हालात जस के तस हैं। 

प्रशासन का पक्ष

इस मामले पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन संसाधनों और समय की सीमाओं के कारण हर स्थान पर एक साथ पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने ग्रामीणों से एकजुट होकर विरोध करने की अपील की और कहा कि यदि किसी अधिकारी की संलिप्तता के प्रमाण हों तो उन्हें प्रस्तुत किया जाए, ताकि सख्त कार्रवाई की जा सके।

ACB का जाल: घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया RTO का बाबू


रायपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी रायपुर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में पदस्थ एक बाबू को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 14 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी वाहन का नाम ट्रांसफर करने के नाम पर रिश्वत मांग रहा था। 

एसीबी के अनुसार, संतोषी नगर निवासी वीर सिंह ठाकुर ने शिकायत की थी कि उसने चोला मण्डलम से वित्तपोषित चारपहिया वाहन अशोक लीलैंड खरीदा है। वाहन के नामांतरण के लिए वह आरटीओ कार्यालय पहुंचा, जहां उसकी मुलाकात सहायक प्रोग्रामर शोभा राम देवांगन से हुई। आरोप है कि देवांगन ने नाम ट्रांसफर करने के लिए 18 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, जिसमें से 3 हजार रुपये पहले ही ले लिए थे। शेष राशि देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने एसीबी से संपर्क किया। शिकायत के सत्यापन में मामला सही पाया गया। बातचीत के दौरान आरोपी ने 15 हजार की जगह 14 हजार रुपये लेने पर सहमति जताई। एसीबी टीम ने 10 अप्रैल को ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपी को 14 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

दुष्कर्म के बाद जघन्य हत्या का आरोपी चिरमिरी से 8 दिन बाद गिरफ्तार


अंबिकापुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर में महिला से दुष्कर्म के बाद जघन्य हत्या के मामले में फरार आरोपी को पुलिस ने आठ दिन बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को कोरिया जिले के चिरमिरी क्षेत्र से पकड़ा गया है। उसे पकड़ने के लिए सरगुजा पुलिस की टीम रवाना हो गई है।

पुलिस के अनुसार, 2-3 अप्रैल की रात आरोपी ने महामाया द्वार के समीप फुटपाथ पर महिला के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। घटना के बाद से आरोपी फरार था, जिसकी तलाश पुलिस द्वारा लगातार की जा रही थी। जांच में आरोपी की पहचान पांडा उर्फ मिथुन के रूप में हुई थी। बताया गया कि आरोपी पहले से महिला के संपर्क में था और दोनों कबाड़ बीनने का काम करते थे।

ये था पूरा मामला - महामाया द्वार के पास मिला महिला का गला रेतकर हत्या, चेहरा कुचला—दरिंदगी की आशंका 

घटना के बाद सरगुजा पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया। पुलिस महानिरीक्षक स्तर से 30 हजार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर से 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। आरोपी की तलाश में चार विशेष टीमें गठित की गई थीं, वहीं विभिन्न थानों में उसका फोटो और स्केच भी भेजा गया था। सूचना के आधार पर आरोपी को चिरमिरी क्षेत्र में पकड़ लिया गया। पुलिस द्वारा आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

562 वन्यजीवों की मौत पर उठे सवाल, जानकारी देने से विभाग का इंकार


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की अस्वाभाविक मौत का मामला अब सवालों के घेरे में आ गया है। विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी में अंतर सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है।

विधानसभा में विधायक शेषराज हरवंश के प्रश्न के उत्तर में वन विभाग ने दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच 9 बाघ, 38 हाथी सहित कुल 562 वन्यजीवों की अस्वाभाविक मौत की जानकारी दी थी। हालांकि, रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा मांगी गई जानकारी को वन विभाग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(क) का हवाला देते हुए देने से इंकार कर दिया। विभाग का कहना है कि यह जानकारी वन्यप्राणी सुरक्षा, प्रबंधन रणनीति और शासन हित में गोपनीय है।

आंकड़ों में अंतर से बढ़ा विवाद

सिंघवी के अनुसार, विधानसभा में 38 हाथियों की मौत बताई गई, जबकि RTI में 36 का आंकड़ा दिया गया। इसी तरह 9 बाघों की मौत के बजाय एंटी-पोचिंग डेटा में केवल 2 बाघों के शिकार की जानकारी सामने आई। उन्होंने सवाल उठाया कि बाकी वन्यजीवों की मौत कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुई—यह जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही।

RTI कानून पर उठे सवाल

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(क) राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़ी सूचनाओं को गोपनीय रखने की अनुमति देती है। लेकिन सिंघवी का कहना है कि जो जानकारी विधानसभा में सार्वजनिक की जा चुकी है, उसे आम नागरिकों से छिपाना समझ से परे है।

🐾 “शिकारगढ़” बनने का आरोप

सिंघवी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में वन्यजीवों का संरक्षण कमजोर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि 16 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 6 तेंदुओं की खाल जब्त की गई, जिससे हालिया शिकार की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा दंतेवाड़ा में एक बाघ की खाल जब्त होने का भी मामला सामने आया है।

 बड़ा सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

👉 जो जानकारी विधानसभा में सार्वजनिक है, वह RTI में गोपनीय कैसे हो गई?

👉 क्या विभाग किसी बड़ी लापरवाही को छिपा रहा है?

👉 वन्यजीव संरक्षण की वास्तविक स्थिति क्या है?

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