STATE

नई दिल्ली, छत्तीसगढ़, Politics, बिहार

GUEST COLUMN

Guest Column

EDITOR CHOICE

Editor Choice

TRAVELLING STORY

TRAVELLING STORY

TCG EXCLUSIVE

टीसीजी एक्सक्लूसिव, इतिहास

VIDEO

VIDEO
LATEST NEWS
Loading Latest News...

कैमरे की कलम: पर्चा नहीं, भरोसा लीक हो रहा है

भारत में इम्तिहान अब सिर्फ़ इम्तिहान नहीं रह गए हैं। वे लाखों नौजवानों के लिए नौकरी, दाख़िले और बेहतर ज़िंदगी तक पहुंचने का रास्ता हैं। इसलिए जब किसी इम्तिहान का पर्चा लीक होता है, तो सिर्फ़ कुछ सवालों के जवाब पहले से बाज़ार में नहीं पहुंचते, बल्कि मेहनत, योग्यता और बराबरी के पूरे विचार पर चोट होती है।

पिछले कुछ वर्षों में देश ने पेपर लीक के ऐसे मामले देखे हैं जिन्होंने व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया। मेडिकल दाख़िले की नीट परीक्षा से लेकर सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं तक, पर्चा लीक एक ऐसा मुद्दा बन गया है जिसने संसद से लेकर अदालत और सड़कों तक गहरी नाराज़गी पैदा की। सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया और 2024 में पेपर लीक और नकल के संगठित अपराध के ख़िलाफ़ कड़े प्रावधानों वाला क़ानून बनाया। अब 2026 में इसमें और सख़्ती का प्रस्ताव सामने है, लेकिन छत्तीसगढ़ की एक घटना इस पूरी बहस के बीच एक असहज सवाल खड़ा करती है—क्या सिर्फ़ सख़्त सज़ा लिख देने से अपराध रुक जाता है?

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा के प्रश्नपत्र की तस्वीरें निकालकर उसे बेचने के आरोप में दुर्ग के एक निजी कृषि कॉलेज के प्रोफेसर समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। आरोप है कि प्रश्नपत्र लेकर आने-जाने की जिम्मेदारी निभाने वाले प्रोफेसर ने लिफ़ाफ़े में बारीक छेद कर छोटा कैमरा भीतर पहुंचाया, प्रश्नपत्र की तस्वीरें खींचीं और उसे महज़ 11 हज़ार रुपये में बेच दिया। जिस काग़ज़ की वजह से सैकड़ों-हज़ारों छात्रों की मेहनत और भविष्य प्रभावित हो सकते थे, उसकी कीमत अपराधी के लिए 11 हज़ार रुपये थी। यही इस मामले की सबसे डरावनी बात है।

एक कॉलेज शिक्षक, जिसे परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता और छात्रों के भविष्य की ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए, इतनी छोटी रकम के लिए उस भरोसे को बेच देता है। यह केवल लालच का मामला नहीं है। यह उस मानसिकता का मामला है जिसमें अपराधी को लगता है कि पकड़े जाने का ख़तरा कम है और अगर पकड़ा भी गया तो व्यवस्था से बच निकलने की गुंजाइश बनी रहेगी।

क़ानून की किताब में पांच साल, दस साल या उससे अधिक की सज़ा लिख देने से यह मानसिकता नहीं बदलती। अपराधी के लिए असली सवाल यह होता है कि पकड़े जाने की संभावना कितनी है, जांच कितनी पक्की होगी, मुकदमा कितने साल चलेगा और आख़िर में सज़ा होगी भी या नहीं।

भारत की न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यही है कि सज़ा की कठोरता से ज्यादा उसकी निश्चितता अपराध को रोकती है। अगर किसी को यह भरोसा हो कि वह वर्षों तक मुकदमा लड़ सकता है और शायद बच भी सकता है, तो काग़ज़ पर लिखी कठोर सज़ा उसका बहुत कम डर पैदा करती है।

पेपर लीक में एक और नैतिक पहलू है जिसे अक्सर कानूनी बहस के बीच हम भूल जाते हैं। इसमें नुकसान सिर्फ़ उस छात्र का नहीं होता जिसने प्रश्नपत्र नहीं खरीदा। नुकसान उन तमाम ईमानदार छात्रों का होता है जिन्होंने महीनों और वर्षों तक पढ़ाई की, परिवार की बचत लगाई, अपनी नींद और सुविधाएं छोड़ीं और यह भरोसा किया कि परीक्षा के दिन सबके सामने एक जैसा प्रश्नपत्र होगा।

जब कोई छात्र पैसे देकर पहले से प्रश्नपत्र हासिल करता है, तो वह केवल अपने लिए फायदा नहीं खरीदता। वह किसी दूसरे के हिस्से का अवसर भी छीनता है। इसीलिए पेपर लीक को सामान्य भ्रष्टाचार मानना भूल होगी। यह समान अवसर के सिद्धांत पर हमला है।

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि बेरोज़गारी और सीमित सरकारी नौकरियों के बीच एक सीट के लिए हजारों-लाखों युवा मुकाबला करते हैं। ऐसे में अगर उन्हें यह लगने लगे कि परीक्षा में मेहनत से ज्यादा पैसा, पहचान या जुगाड़ काम करता है, तो सबसे पहले योग्यता पर विश्वास टूटता है और उसके बाद मेहनत पर।

अगर एक नौजवान को लगे कि वह चाहे जितना पढ़ ले, कोई दूसरा व्यक्ति पैसे देकर उससे आगे निकल जाएगा, तो उसके भीतर सिर्फ़ गुस्सा पैदा नहीं होता, एक गहरी निराशा भी पैदा होती है। यही वह सामाजिक मनोविज्ञान है जिसे पेपर लीक के हर मामले में समझना ज़रूरी है।

नीट विवाद ने इस संकट की भयावहता पूरे देश के सामने रख दी थी। परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने के बाद लाखों छात्रों और उनके परिवारों में पैदा हुई बेचैनी इस बात का सबूत थी कि परीक्षा व्यवस्था में भरोसा कितना नाज़ुक होता है। एक बार यह भरोसा टूट जाए तो केवल दोबारा परीक्षा करा देना पर्याप्त नहीं होता।

इसीलिए छत्तीसगढ़ का यह मामला संख्या में छोटा होकर भी महत्व में छोटा नहीं है। एक विश्वविद्यालय के एक प्रश्नपत्र से शायद कुछ सौ या कुछ हजार छात्र प्रभावित होते हों, लेकिन ऐसी घटनाएं मिलकर पूरे समाज को यह संदेश देती हैं कि व्यवस्था निष्पक्ष नहीं है।

छत्तीसगढ़ खुद इसका एक बड़ा उदाहरण है। राज्य लोक सेवा आयोग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों ने यह सवाल पहले ही खड़ा कर दिया है कि सरकारी नौकरी जैसी सार्वजनिक संपत्ति को अगर पैसे और पहुंच के आधार पर बांटा जाने लगे, तो मेहनत करने वाले नौजवान किस पर भरोसा करें।

पेपर लीक की बीमारी का इलाज इसलिए केवल अपराधियों को जेल भेजना नहीं है। जेल ज़रूरी है, कड़ी सज़ा भी ज़रूरी है, लेकिन उससे पहले और उसके साथ परीक्षा व्यवस्था की ऐसी संरचना बनानी होगी जिसमें एक व्यक्ति के लिए पर्चा चुराना मुश्किल हो, उसे बाहर पहुंचाना लगभग असंभव हो और पकड़े जाने की संभावना बहुत अधिक हो।

प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर उनके परिवहन, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा केंद्र पर खोलने तक हर चरण में जवाबदेही तय करनी होगी। डिजिटल निगरानी, सुरक्षित पैकेजिंग, कैमरों और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं सिर्फ़ काग़ज़ पर नहीं, व्यवहार में लागू करनी होंगी। परीक्षा केंद्रों और उनसे जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण—जांच और मुकदमे की गति ऐसी हो कि आरोपी को वर्षों तक कानून से खेलते रहने का अवसर न मिले।

2024 के कड़े क़ानून और 2026 में प्रस्तावित और कड़े प्रावधान इस समस्या को गंभीरता से लेने की राजनीतिक इच्छा दिखाते हैं। लेकिन क़ानून की असली ताकत उसकी धाराओं में नहीं, उसके लागू होने में दिखाई देती है। अगर एक व्यक्ति को पता हो कि अपराध करते ही गिरफ्तारी, तेज़ जांच, संपत्ति और आर्थिक लाभ की जब्ती तथा निश्चित सज़ा उसका इंतज़ार कर रही है, तो अपराध का जोखिम उसके लिए वास्तविक हो जाता है। इसके उलट अगर कानून केवल डरावने आंकड़ों का संग्रह बनकर रह जाए, तो अपराधी उससे डरना बंद कर देते हैं।

इसलिए लोकसभा में प्रस्तावित संशोधन पर बहस केवल इस बात तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि सज़ा कितनी बढ़ाई जाए। असली सवाल यह होना चाहिए कि सज़ा निश्चित कैसे होगी और परीक्षा प्रणाली इतनी मजबूत कैसे होगी कि अपराध होने से पहले ही उसकी गुंजाइश खत्म हो जाए।

क्योंकि पेपर लीक करने वाले लोग हर बार कोई नया रास्ता खोजेंगे। कभी लिफ़ाफ़े में कैमरा जाएगा, कभी डिजिटल तस्वीर बाहर आएगी, कभी कोई कर्मचारी बिकेगा और कभी कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी बेचेगा। अपराधी तरीके बदलेंगे। व्यवस्था को उनसे एक कदम आगे रहना होगा।

छत्तीसगढ़ के इस मामले में 11 हज़ार रुपये ने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा किया है। अगर किसी शिक्षक के लिए 11 हज़ार रुपये इतने आकर्षक हो सकते हैं कि वह सैकड़ों छात्रों के भविष्य और अपने पेशे की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दे, तो समस्या सिर्फ़ उस व्यक्ति की नहीं है। समस्या उस व्यवस्था की भी है जिसने उसे ऐसा करने का अवसर दिया और शायद उसके मन में यह भरोसा पैदा किया कि वह बच सकता है।

इम्तिहान की मेज़ पर बैठा छात्र यह उम्मीद नहीं करता कि व्यवस्था उसके लिए चमत्कार करेगी। वह सिर्फ़ बराबरी चाहता है। उसे चाहिए कि जिस प्रश्नपत्र को वह परीक्षा केंद्र में पहली बार देख रहा है, उसे किसी दूसरे छात्र ने एक रात पहले पैसे देकर न खरीद लिया हो। यह बहुत बड़ी मांग नहीं है। यह किसी भी सभ्य परीक्षा व्यवस्था की न्यूनतम शर्त है।

भारत के नौजवानों को आज नौकरी से पहले भरोसे की ज़रूरत है—इस भरोसे की कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी। दाख़िले और नौकरी की हर सीट किसी की जागीर नहीं, सार्वजनिक अवसर है। उसे बेचने, खरीदने या चोरी करने वाले सिर्फ़ कानून नहीं तोड़ते, वे उस भरोसे को तोड़ते हैं जिस पर प्रतियोगी समाज टिका हुआ है।

इसलिए पेपर लीक के खिलाफ़ लड़ाई में कड़ा कानून ज़रूरी है, तेज़ न्याय ज़रूरी है और अपराधियों को कठोर सज़ा भी ज़रूरी है। लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाना जिसमें ईमानदार छात्र को यह विश्वास हो कि उसकी मेहनत का मुकाबला किसी बंद लिफ़ाफ़े, छिपे कैमरे या 11 हज़ार रुपये से नहीं किया जा सकता क्योंकि परीक्षा का पर्चा सिर्फ़ काग़ज़ नहीं होता। वह लाखों नौजवानों के भविष्य पर लिखी हुई उम्मीद होती है और उस उम्मीद को बेचने वालों के लिए समाज की तरफ़ से सबसे कड़ा संदेश यही होना चाहिए—मेहनत के मुकाबले में बेईमानी की कोई जगह नहीं है।

सीपी राधाकृष्णन के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर सरकार अलर्ट, तैयारियों की हुई समीक्षा

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुई बैठक में उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, चिकित्सा, स्वागत और कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

उपराष्ट्रपति 2 सितंबर को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।

मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम 

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल और मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुसार सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक और वापसी के दौरान एंट्री-एग्जिट प्लान को बेहतर समन्वय के साथ अंतिम रूप देने को कहा गया।

एयरपोर्ट पर स्वागत, रिसेप्शन लाइन, एम्स में रिसेप्शन और अन्य प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं के लिए रायपुर कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए गए। एयरपोर्ट और कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने को भी कहा गया।

सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था 

मुख्य सचिव ने गृह विभाग को सुरक्षा संबंधी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही ठहरने, प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं और आकस्मिक चिकित्सा सहायता की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

दीक्षांत समारोह में बैठक व्यवस्था भारत सरकार के निर्धारित प्रोटोकॉल और डायस प्लान के अनुरूप रखने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम की शुरुआत में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान सहित सभी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने एम्स प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को दीक्षांत समारोह की सभी व्यवस्थाएं समय पर और बेहतर समन्वय के साथ पूरी करने के निर्देश दिए।

अब मदन महल तक जाएगी अम्बिकापुर-जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 11266/11265 अम्बिकापुर-जबलपुर-अम्बिकापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस का विस्तार अब मदन महल स्टेशन तक कर दिया गया है। रेलवे के अनुसार यह व्यवस्था 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई है। इससे अम्बिकापुर और जबलपुर के बीच सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।

अम्बिकापुर से मदन महल तक का समय

गाड़ी संख्या 11266 अम्बिकापुर-मदन महल इंटरसिटी एक्सप्रेस अम्बिकापुर स्टेशन से सुबह 6:15 बजे रवाना होगी। ट्रेन जबलपुर स्टेशन दोपहर 2:55 बजे पहुंचेगी, जहां से 3 बजे रवाना होकर मदन महल स्टेशन दोपहर 3:20 बजे पहुंचेगी।

मदन महल से अम्बिकापुर की वापसी

वापसी में गाड़ी संख्या 11265 मदन महल-अम्बिकापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस मदन महल स्टेशन से दोपहर 12:25 बजे रवाना होगी। ट्रेन जबलपुर स्टेशन 12:35 बजे पहुंचेगी और 12:45 बजे रवाना होगी, जबकि अम्बिकापुर स्टेशन रात 11 बजे पहुंचेगी।

इंटर्न डॉक्टरों को स्टाइपेंड बढ़ने की उम्मीद, मंत्री से चर्चा के बाद आंदोलन स्थगित

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात कर अपनी मांगों को लेकर चर्चा की। स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने सरकार पर भरोसा जताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।

स्टाइपेंड बढ़ाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि IMA-MSN छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के आधार पर इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभागीय स्तर पर इसी महीने मांगों पर आवश्यक एवं सकारात्मक निर्णय लेने के लिए कार्रवाई तेज की जा रही है।

चिकित्सा शिक्षा को लेकर सरकार प्रतिबद्ध

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विषयों को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों के हितों की रक्षा और उनकी मांगों के समाधान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अंबिकापुर को मिलेगा 24 कोर्ट रूम वाला नया जिला न्यायालय भवन, 46 करोड़ की मंजूरी

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने मंगलवार को जिला न्यायपालिका की अधोसंरचना मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरगुजा जिले के अंबिकापुर में नवीन जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण के लिए वर्चुअल भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया। इसी कार्यक्रम में सूरजपुर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नव निर्मित आवास गृह तथा न्यायिक अधिकारियों के आवासीय परिसर का वर्चुअल लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, जो सरगुजा के पोर्टफोलियो जज हैं, तथा न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल, सूरजपुर के पोर्टफोलियो जज, मौजूद रहे।

4 मंजिला भवन में होंगे 24 न्यायालय कक्ष

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने बताया कि अंबिकापुर में बनने वाला नया जिला एवं सत्र न्यायालय भवन चार मंजिला और 24 न्यायालय कक्षों वाला होगा। भवन के निर्माण के लिए 46 करोड़ 2 लाख 52 हजार रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और जल्द कार्यादेश जारी किया जाएगा।

भवन में पार्किंग, सेंट्रल फाइलिंग, ई-सेवा केंद्र, आवक-जावक शाखा, कैंटीन, विश्राम कक्ष, रीडर एवं स्टेनो रूम, कॉन्फ्रेंस हॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, साक्षी कक्ष, वीआईपी वेटिंग, न्यायिक अभिलेखागार, मालखाना और अधिवक्ता हॉल जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भवन का निर्माण ऐसा हो, जो प्रदेश के अन्य न्यायालय भवनों के लिए मिसाल बने।

सूरजपुर में 12 आवासों का लोकार्पण

सूरजपुर में न्यायिक अधिकारियों के लिए 7.08 करोड़ रुपये की लागत से 12 आवासीय मकान बनाए गए हैं। इनमें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के लिए एक बी-टाइप आवास तथा न्यायिक अधिकारियों के लिए तीन डी-टाइप और आठ ई-टाइप आवास शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने नवनिर्मित आवासीय सुविधाओं पर प्रसन्नता जताते हुए न्यायिक अधिकारियों को बेहतर कार्य वातावरण का लाभ उठाते हुए पूरी मेहनत और प्रतिबद्धता से कार्य करने का आह्वान किया।

न्यायालय भवन की स्वच्छता बनाए रखने की अपील

न्यायमूर्ति सिन्हा ने अधिवक्ताओं और न्यायालय आने वाले लोगों से नए भवन की साफ-सफाई और देखभाल में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेहतर अधोसंरचना का उद्देश्य न्यायिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और न्याय की अपेक्षा लेकर आने वाले लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने में सहायता करना है।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश के दूरस्थ जिला मुख्यालयों और बाह्य न्यायालयों का लगातार भ्रमण कर न्यायिक अधोसंरचना और आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल सहित रजिस्ट्री के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। वहीं सरगुजा और सूरजपुर के न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी, अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, न्यायालयीन कर्मचारी तथा मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

पशुओं से क्रूरता: अमानवीय तरीके से पशुओं का परिवहन करते दो गिरफ्तार, वाहन जब्त

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / पशुओं को अमानवीय और क्रूरतापूर्वक तरीके से परिवहन करने के मामले में डीडी नगर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक रिंग रोड नंबर-1 स्थित ग्लोबल स्टार अस्पताल के पास एक टाटा मजदा वाहन में 5 गाय और 5 बछड़ों को क्षमता से अधिक ठूंसकर ले जाया जा रहा था। वाहन तिरपाल से ढका हुआ था, जिससे पशुओं को पर्याप्त हवा और आवागमन की सुविधा नहीं मिल रही थी।

पुलिस को 17 अगस्त की रात करीब 9 बजे इसकी सूचना मिली। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में डीडी नगर पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए वाहन से सभी पशुओं को बरामद किया।

दस्तावेज नहीं दिखा सके आरोपी

पुलिस ने पशुओं के परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज, परिवहन अनुमति और पशु चिकित्सक का प्रमाणपत्र मांगा, लेकिन आरोपी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

पुलिस ने 5 गाय और 5 बछड़ों को गवाहों के समक्ष जब्त कर लिया। पशुओं को सुरक्षा के लिए गौशाला में रखा गया है और जिला पशु चिकित्सालय, पंडरी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई

मामले में थाना डीडी नगर में अपराध क्रमांक 514/2026 के तहत पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(1)(घ) में अपराध दर्ज किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने खिलेश यादव (22), निवासी तारबाहर, जिला बिलासपुर और रविन्द्र सिंह (55), निवासी गंगा नगर, थाना सिविल लाइन, जिला बिलासपुर को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

OTP से डिजिटल अरेस्ट तक, विद्यार्थियों को साइबर ठगी के तरीकों से कराया रूबरू

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार को लेकर बिलासपुर पुलिस का साइबर जागृति अभियान जारी है। इसी अभियान के तहत मंगलवार को सीएम दुबे पीजी कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों की जानकारी देते हुए सतर्क रहने की अपील की।

कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इंटरनेट और मोबाइल आज जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

OTP, UPI और APK फ्रॉड से रहें सावधान

एसएसपी ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी। इनमें OTP फ्रॉड, UPI फ्रॉड, फर्जी लिंक, APK फाइल, सोशल मीडिया फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, साइबर ब्लैकमेलिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, पासवर्ड, CVV या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान स्रोत से APK अथवा अन्य फाइल डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत

पुलिस ने विद्यार्थियों को बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो उसे घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। एसएसपी ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की।

उन्होंने कहा कि साइबर ठगी की जानकारी जितनी जल्दी पुलिस और संबंधित तंत्र तक पहुंचाई जाएगी, ठगी की रकम को रोकने या उसके आगे के लेन-देन पर कार्रवाई की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।

‘साइबर सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी’

एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से खुद जागरूक रहने के साथ-साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

अभियान को व्यापक बनाने के लिए विद्यार्थियों से ‘जागरूकता सेल्फी’ लेकर उसे व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के स्टेटस पर साझा करने की अपील भी की गई। कार्यक्रम में सैकड़ों विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया।

कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) रामगोपाल करियारे, CMD कॉलेज चेयरमैन संजय दुबे, प्राचार्य, प्राध्यापक, पुलिस अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com
TODAY छत्तीसगढ़
लाइव मार्केट & सराफा