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आम लोगों के खातों का इस्तेमाल, 'म्यूल अकाउंट' गिरोह के 2 फ़रार सदस्य गिरफ़्तार

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर ज़िले में साइबर धोखाधड़ी के लिए आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल (म्यूल अकाउंट) करने वाले एक गिरोह के दो फ़रार सदस्यों को पुलिस ने रायपुर से गिरफ़्तार किया है.

तारबाहर थाना पुलिस के मुताबिक़, इस मामले में चार लोगों की गिरफ़्तारी पहले ही हो चुकी है. ताज़ा कार्रवाई में गिरफ़्तार किए गए दोनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत (रिमांड) पर जेल भेज दिया गया है.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह मामला मई 2026 का है.

  • 13 मई 2026 को पुलिस को सूचना मिली थी कि बिलासपुर के व्यापार विहार स्थित स्टेट बैंक (SBI) के पास कुछ लोग आम ग्राहकों को लालच दे रहे हैं.

  • अभियुक्त बैंक आने-जाने वाले लोगों को कमीशन का प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते (Mule Accounts) इस्तेमाल के लिए ले लेते थे.

  • इन खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से साइबर ठगी से हासिल की गई रक़म को मंगाने और आगे ट्रांसफ़र करने के लिए किया जाता था.

तकनीकी साक्ष्यों से रायपुर में हुई गिरफ़्तारी

इस मामले में पुलिस ने 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश से जुड़ी विभिन्न धाराओं (318(4), 317(4), 112, 3(5)) के तहत मामला दर्ज़ किया था. पुलिस ने पहले ही इस मामले में दीपेश कुमार गुप्ता, नवनीत मिश्रा, ऋषभ साहू और राजा घरानी नामक चार अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया था.

फ़रार चल रहे अन्य अभियुक्तों की तलाश के लिए साइबर सेल की मदद ली गई. तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम ने रायपुर में दबिश दी और दोनों फ़रार अभियुक्तों को हिरासत में ले लिया. पुलिस पूछताछ में दोनों ने क़बूल किया है कि वे कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रक़म के लेन-देन में मदद करते थे.

गिरफ़्तार अभियुक्तों की पहचान:

  1. अमीर उर्फ़ अमीरुद्दीन (29 वर्ष), निवासी- मौदहापारा, ज़िला रायपुर.

  2. मोहम्मद अल्मास गाज़ी (24 वर्ष), निवासी- मौदहापारा, ज़िला रायपुर.

पुलिस ने इन दोनों के पास से घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फ़ोन भी बरामद किए हैं.

ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़, किशन चंद बजाज समेत 4 आरोपी जेल भेजे गए

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित 'सट्टा किंग' किशन चंद बजाज सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। तोरवा थाना पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने आरोपी के घर पर छापेमारी कर नकदी, मोबाइल फोन, प्रिंटर और दो वाहन जब्त किए हैं।

मुखबिर की सूचना पर हुई रेड

पुलिस के अनुसार, जिले में अवैध जुआ और ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान सूचना मिली थी कि तोरवा के साईधाम कॉलोनी स्थित एक मकान से ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जा रहा है।

सूचना के आधार पर 6 जुलाई 2026 को तोरवा पुलिस और ACCU की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। पुलिस का दावा है कि मौके पर चार लोग मोबाइल फोन के जरिए ऑनलाइन सट्टा खिलाते मिले।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार

पुलिस ने मौके से इन आरोपियों को गिरफ्तार किया है—

  • किशन चंद बजाज (66), निवासी साईधाम कॉलोनी, तोरवा
  • दिनेश कुमार वाधवानी (39), निवासी फजलबाड़ा, थाना कोतवाली
  • भैयालाल सोनकर (39), निवासी आरपीएफ कॉलोनी, सिरगिट्टी
  • मनोहर लाल खत्री (63), निवासी साईधाम कॉलोनी, तोरवा

नकदी, मोबाइल और वाहन जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 50,690 रुपये नकद, एक प्रिंटर, 7 टच स्क्रीन मोबाइल, 4 कीपैड मोबाइल, एक स्कॉर्पियो (CG 04 PW 3311) और एक मोटरसाइकिल (CG 11 CD 0570) जब्त की।

संगठित अपराध की धारा भी लगाई गई

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 और 7 के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 (संगठित अपराध से संबंधित प्रावधान) के तहत मामला दर्ज किया है।

गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

नोट: यह समाचार बिलासपुर पुलिस की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में विचारण के बाद होगी।

Instagram से शुरू हुई दोस्ती, शादी से इनकार के बाद रेप FIR... हाई कोर्ट ने दी बड़ी राहत

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहमति से बने लंबे रिलेशनशिप के बाद शादी नहीं होने पर दर्ज दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने एफआईआर के आधार पर चल रही ट्रायल कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है और राज्य सरकार तथा शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।

Instagram पर हुई थी दोस्ती

याचिका के अनुसार, पामगढ़ क्षेत्र के ग्राम ससहा निवासी सुरेश कुमार साहू वर्ष 2020 में बैंक में नौकरी करते हुए बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे। इसी दौरान उनकी सारंगढ़ क्षेत्र की एक युवती से इंस्टाग्राम के माध्यम से पहचान हुई। दोनों के बीच मुलाकातें बढ़ीं और वे आपसी सहमति से लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे।

शादी नहीं होने पर दर्ज हुई FIR

याचिका के मुताबिक, युवती ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में पेश की। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू कर दी।

याचिका में क्या कहा गया?

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रितेश शर्मा ने दलील दी कि दोनों पक्ष बालिग थे और वर्ष 2020 से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों कई वर्षों तक आपसी सहमति से संबंध में रहे।

याचिका में कहा गया कि शिकायत कथित घटनाओं के काफी समय बाद दर्ज कराई गई। इसमें ऐसा कोई प्रथमदृष्टया साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि शुरुआत से ही याचिकाकर्ता की शादी करने की मंशा नहीं थी या उसने धोखा देने के उद्देश्य से झूठा वादा किया था। केवल बाद में रिश्ता समाप्त होना या शादी से इनकार करना अपने आप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दंडनीय अपराध नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ता ने एफआईआर, चार्जशीट, ट्रायल कोर्ट के संज्ञान आदेश और उससे आगे की पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की।

राज्य सरकार ने किया विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस चरण में मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की।

हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के जवाब के बाद याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा।

साथ ही, हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक बिलासपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में लंबित आपराधिक प्रकरण की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।

नोट: यह हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश है। अदालत ने एफआईआर या आरोपों को निरस्त नहीं किया है, बल्कि अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई है। मामले का अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद होगा।

बैग में भरकर बेचने निकला था गांजा, पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा, 4.18 किलो बरामद

रायपुर: TODAY छत्तीसगढ़  / रायपुर पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 4.180 किलोग्राम गांजे के साथ ओडिशा के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से करीब 2.09 लाख रुपये कीमत का गांजा और नकदी जब्त की गई है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

बेचने की फिराक में था आरोपी

पुलिस के मुताबिक, 3 जुलाई 2026 को सूचना मिली थी कि पंडरी थाना क्षेत्र के कापा स्थित मालधक्का रोड के पास एक व्यक्ति बैग में गांजा लेकर बिक्री करने की फिराक में खड़ा है।

सूचना के बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और पंडरी थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध की घेराबंदी की। पुलिस को देखकर वह भागने लगा, लेकिन टीम ने उसे पकड़ लिया।

बैग से मिला 4.180 किलो गांजा

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मानस रंजन नाग (28) निवासी जिला नुआपाड़ा (ओडिशा) बताया। वर्तमान में वह रायपुर के लोधीपारा क्षेत्र में रह रहा था।

तलाशी लेने पर उसके बैग से 4.180 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने गांजे के साथ 500 रुपये नकद भी जब्त किए। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 2,09,500 रुपये बताई गई है।

NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पंडरी थाने में एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की धारा 20(b) के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।

पूरे नेटवर्क की जांच जारी

रायपुर पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि गांजा कहां से लाया गया था और किन लोगों तक इसकी सप्लाई की जानी थी। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

नोट: यह समाचार रायपुर पुलिस की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोपी को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। मामले की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट की नजर, लंबित क्लोजर रिपोर्ट पर मांगी अपडेट

बिलासपुर:  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य में पुलिस जांच पूरी होने के बावजूद अदालतों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने के मामलों को गंभीरता से लिया है। अदालत में पेश आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में 1 लाख 47 हजार 714 ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें पुलिस जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक सक्षम न्यायालयों के समक्ष अंतिम रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) पेश नहीं की गई है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक (DGP) को 22 जुलाई 2026 तक अद्यतन (अपडेटेड) स्टेटस रिपोर्ट शपथपत्र के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद DGP ने दाखिल किया हलफनामा

हाई कोर्ट के 10 अप्रैल और 6 मई 2026 के आदेशों के अनुपालन में डीजीपी ने व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल किया। इसमें बताया गया कि वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए राज्यभर में विशेष अभियान और कार्ययोजना शुरू की गई है।

डीजीपी के अनुसार, इस अभियान की निगरानी पुलिस कमिश्नर, रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर पर की जा रही है।

IG और SP को दिए गए सख्त निर्देश

हलफनामे में यह भी बताया गया कि 7 मई 2026 को डीजीपी ने सभी रेंज आईजी और जिला एसपी के साथ वर्चुअल बैठक कर लंबित क्लोजर रिपोर्ट और चार्जशीट समय पर अदालतों में पेश करने के निर्देश दिए थे।

पुलिस विभाग ने अदालत को यह भी बताया कि लंबित मामलों का रिकॉर्ड अत्यधिक बड़ा है। इसलिए विस्तृत जानकारी पेन ड्राइव के माध्यम से सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी गई है।

महाधिवक्ता ने दी कार्रवाई की जानकारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने अदालत को पुलिस विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की है।

DGP को बताना होगा कितना हुआ निपटारा

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले डीजीपी शपथपत्र के साथ यह जानकारी दें कि विशेष अभियान शुरू होने के बाद 1.47 लाख से अधिक लंबित मामलों में से कितने मामलों का निपटारा हो चुका है और वर्तमान में कितने मामले अभी भी लंबित हैं।

यह मामला राज्य की आपराधिक न्याय व्यवस्था में लंबित जांचों और न्यायालयों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पत्नी की कुल्हाड़ी से हत्या के बाद पति ने लगाई फांसी ! किराए के मकान में मिले दोनों के शव

बिलासपुर:  TODAY छत्तीसगढ़  / तोरवा थाना क्षेत्र के हेमूनगर स्थित एक किराए के मकान में शनिवार सुबह पति-पत्नी के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि पति ने पहले कुल्हाड़ी से पत्नी की हत्या की और उसके बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि पुलिस का कहना है कि घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

एक कमरे में पत्नी का शव, दूसरे में फंदे पर लटका मिला पति

पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान अशोक देवांगन (52) और उनकी पत्नी धनेश्वरी देवांगन (49) के रूप में हुई है। अशोक का शव कमरे में फंदे से लटका मिला, जबकि धनेश्वरी का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा था। महिला के गले पर धारदार हथियार (कुल्हाड़ी) से कई वार के निशान मिले हैं।

घटना की सूचना मिलने पर तोरवा पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए गए और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

पड़ोसियों की सूचना पर टूटा दरवाजा

तोरवा थाना प्रभारी रजनीश सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच पड़ोसियों को घर से कोई हलचल नहीं होने पर अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर पुलिस और मकान मालिक मौके पर पहुंचे। परिजनों की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए।

दो मासूम बच्चे घर के दूसरे कमरे में मिले

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि दंपति के दो छोटे बच्चे उसी घर के दूसरे कमरे में मौजूद थे। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद दोनों बच्चे गहरे सदमे में हैं।

पुलिस बच्चों की काउंसलिंग कराने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि बच्चों के बयान घटना की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल उनसे बेहद संवेदनशील तरीके से पूछताछ की जाएगी।  

आर्थिक तंगी या पारिवारिक विवाद, सभी पहलुओं की जांच

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अशोक देवांगन सब्जी बेचने का काम करते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से काम पर नहीं जा रहे थे। पुलिस आर्थिक तंगी, व्यवसाय में नुकसान, पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव समेत सभी संभावित कारणों की जांच कर रही है।

आसपास के लोगों और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा

पुलिस का कहना है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

नोट: यह समाचार पुलिस की प्रारंभिक जांच पर आधारित है। पति द्वारा पत्नी की हत्या और उसके बाद आत्महत्या की आशंका जताई गई है, लेकिन इसकी अंतिम पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी। 

चौराहे पर चापड़ लहराकर लोगों में फैला रहा था दहशत, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

दुर्ग:  TODAY छत्तीसगढ़  / जिले के सुपेला थाना क्षेत्र में सार्वजनिक स्थान पर धारदार हथियार लहराकर लोगों में दहशत फैलाने वाले एक आरोपी को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से एक लोहे का धारदार चापड़ बरामद किया गया है। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी

पुलिस के अनुसार, शनिवार को सूचना मिली कि चंद्रा-मौर्या चौक के पास एक व्यक्ति हाथ में धारदार लोहे का चापड़ लेकर उसे लहराते हुए राहगीरों को डरा-धमका रहा है। सूचना मिलते ही सुपेला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया।

चापड़ जब्त, आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम राम सुखम पाल (57) निवासी कॉन्ट्रेक्टर कॉलोनी, होटल लोटस के पीछे, थाना सुपेला, जिला दुर्ग बताया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से करीब 500 रुपये कीमत का एक धारदार लोहे का चापड़ बरामद किया गया।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 947/2026 दर्ज कर आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत कार्रवाई की। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पुलिस ने लोगों से की अपील

दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में थाना प्रभारी अंबर भारद्वाज, प्रधान आरक्षक उपेंद्र सिंह और आरक्षक योगेंद्र बिलौने की प्रमुख भूमिका रही।

नोट: यह खबर दुर्ग पुलिस की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया है। मामले का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

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