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एम्स में नौकरी: कॉलेज फ्रेंड ने ही लगाया चूना, नौकरी के नाम पर लाखों ऐंठे


दुर्ग।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  वैशाली नगर पुलिस ने रायपुर एम्स में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 14 लाख 50 हजार रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को उत्तर प्रदेश के लखनऊ से गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था, जिसे साइबर तकनीकी सहायता से ट्रेस कर पकड़ा गया।

पुलिस के अनुसार प्रार्थी मुकेश कोसरे निवासी वृंदा नगर कैम्प-1 भिलाई ने थाना वैशाली नगर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसका कॉलेज मित्र अभिषेक जयसवाल खुद की पहचान बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से होना बताकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में स्टाफ नर्स की नौकरी दिलाने का झांसा दे रहा था।

आरोपी ने नौकरी लगवाने और ज्वाइनिंग लेटर दिलाने का भरोसा देकर सितंबर 2021 से 16 अक्टूबर 2022 के बीच अलग-अलग किश्तों में कुल 14 लाख 50 हजार रुपये ले लिए। इसके बाद आरोपी लगातार ज्वाइनिंग लेटर देने और रकम वापस करने के नाम पर टालमटोल करता रहा और बाद में फरार हो गया।

मामले में थाना वैशाली नगर में धारा 420 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान साइबर सेल भिलाई की मदद से आरोपी के मोबाइल नंबर और बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की लोकेशन लखनऊ में मिलने पर पुलिस टीम वहां रवाना हुई।

पुलिस ने लखनऊ में घेराबंदी कर आरोपी अभिषेक जयसवाल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने मामले से जुड़े दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य भी जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में थाना वैशाली नगर पुलिस और साइबर सेल भिलाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



उर्स जुलूस में चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले दो युवक गिरफ्तार


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  पुलिस ने उर्स त्यौहार के दौरान संदल जुलूस में चाकू और धारदार हथियार लहराकर आम लोगों को भयभीत करने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक बड़ा चाकू और एक चापड़नुमा हथियार जब्त किया गया है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में हर्ष खांण्डे निवासी तारबहार और अब्दुल अजीम खान निवासी तालापारा शामिल हैं। दोनों के खिलाफ धारा 25 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

जानकारी के मुताबिक उर्स त्यौहार के अवसर पर घोड़ादाना स्कूल तारबहार से संदल की एक टोली चादर लेकर निकली थी। पुलिस लाइन के पास डांस के दौरान पैर टकराने को लेकर विवाद हो गया। इसी दौरान आरोपी हर्ष खांण्डे हाथ में चाकू लेकर लहराने लगा और लोगों को डराने लगा। पुलिस के पहुंचने पर आरोपी मौके से फरार हो गया था। बाद में आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच और खोजबीन के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

वहीं दूसरी घटना में तालापारा सिविल लाइन से निकली संदल टोली के दौरान मगरपारा चौक के पास आरोपी अब्दुल अजीम खान हाथ में धारदार चाकू लहराते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने मौके पर ही उसे हिरासत में लेकर कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लोहे का बड़ा धारदार चाकू और एक चापड़नुमा हथियार जब्त किया है।

बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों में शांति भंग करने और आम लोगों को डराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी लगातार की जा रही है।

कैमरे की कलम: अंधेरे का आत्मनिर्भर भारत


छत्तीसगढ़ के दूसरे बड़े शहर के रूप में अपनी पहचान रखने वाले बिलासपुर ने पिछले दिनों आखिरकार विकास की उस ऊंचाई को छू ही लिया, जहां आदमी को यह समझ में आ जाता है कि असली सभ्यता बिजली नहीं, मोमबत्ती है। बात पिछले मंगलवार की है, शहर और आस-पास के इलाकों में 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली और पूरा शहर ऐसी विनम्रता से अंधेरे में समा गया, जैसे किसी सरकारी दफ्तर में आम आदमी की अर्जी समा जाती है। गाँवों का हाल तो पूछिए ही मत। 

आंधी आई। पेड़ गिरे। तार टूटे। खंभे झुके। और उसके साथ ही “जीरो पॉवर कट” का दावा भी कहीं उड़ गया। हालांकि सरकार को धन्यवाद देना चाहिए कि उसने जनता को इतिहास से जोड़ दिया। नई पीढ़ी को पहली बार पता चला कि बिना वाई-फाई, बिना चार्जर और बिना एसी के भी इंसान जिंदा रह सकता है। कुछ बच्चों ने तो पहली बार अपने माता-पिता से बातचीत तक कर ली। यह सामाजिक क्रांति बिजली विभाग के बिना संभव नहीं थी। शुरू में लोगों ने धैर्य रखा। उन्हें भरोसा था कि बिजली विभाग है, कर्मचारी हैं, सिस्टम है। फिर धीरे-धीरे उन्हें याद आया कि यही सबसे बड़ी समस्या है।

पहले छह घंटे बीते। फिर बारह। फिर चौबीस। कुछ इलाकों में तो तीस घंटे बाद बिजली आई। तब तक लोग आधुनिक नागरिक से बदलकर आदिम मानव बन चुके थे। फ्रिज में रखा दूध दही बन चुका था, दही खट्टा होकर विज्ञान प्रयोगशाला का नमूना लगने लगा था और बच्चे मोबाइल चार्ज न होने के कारण पहली बार अपने माता-पिता का चेहरा पहचानने लगे थे। शहर अंधेरे में डूबा रहा और बिजली विभाग “स्थिति पर नजर” रखता रहा। हमारे यहां “स्थिति पर नजर रखना” बहुत महत्वपूर्ण सरकारी काम है। सड़क टूटे—नजर रखो। पुल गिरे—नजर रखो। बिजली जाए—नजर रखो। ऐसा लगता है कि पूरा प्रशासन किसी दूरबीन के सहारे चल रहा है।

सबसे महान संस्था साबित हुआ फ्यूज कॉल सेंटर। जनता फोन लगाती रही और उधर से वही सन्नाटा मिलता रहा, जो चुनाव के बाद जनता को अपने नेता के फोन में मिलता है। कभी-कभी फोन उठ भी गया तो जवाब आया—“टीम काम कर रही है।” यह टीम भारतीय लोकतंत्र की तरह रहस्यमयी होती है। सब उसका नाम लेते हैं, मगर किसी ने उसे काम करते नहीं देखा। फिर मोबाइल पर संदेश आया—“आपकी समस्या का समाधान कर दिया गया है।” यह संदेश पढ़कर अंधेरे में बैठे आदमी के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा जाग उठी। उसने महसूस किया कि असली रोशनी भीतर होती है। बाहर का अंधेरा तो मोह-माया है। पंखा बंद है, फ्रिज सड़ चुका है, पानी नहीं आ रहा, मच्छर खूनदान शिविर चला रहे हैं, लेकिन विभाग कह रहा है—समस्या हल हो गई। यही डिजिटल इंडिया है।

दरअसल, हमारी बिजली व्यवस्था बहुत भावुक है। हल्की हवा चले तो नाराज हो जाती है। बारिश हो तो बैठ जाती है। पेड़ हिले तो बेहोश हो जाती है। और यदि 95 किलोमीटर की हवा चल जाए, तो फिर पूरा सिस्टम सामूहिक अवकाश पर चला जाता है। मगर सबसे बड़ी कला सरकार की भाषा में है। जनता अंधेरे में तड़प रही होती है और बयान आता है—“बिजली व्यवस्था तेजी से बहाल की जा रही है।” यह “तेजी” इतनी अद्भुत होती है कि कछुआ भी शर्म से इस्तीफा दे दे। सरकारें दावा करती हैं कि हमने गांव-गांव बिजली पहुंचा दी। बिल्कुल पहुंचाई। फिर वापस भी ले ली।

स्थानीय प्रशासन बिजली व्यवस्था को की बुनियादी खामियों को दूर करने के लिए गंभीरता का परिचय देता है, सवाल यह है कि जनता भी आखिर कब तक गंभीर रहे? तीस घंटे बिजली न हो तो आदमी लोकतंत्र से ज्यादा मच्छरों पर विश्वास करने लगता है।

रेलवे स्टेशन से 17 किलो गांजा बरामद, महिला समेत तीन गिरफ्तार


रायगढ़। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / रायगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन आघात” के तहत अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में थाना कोतवाली, साइबर थाना और रेलवे पुलिस की संयुक्त टीम ने रायगढ़ रेलवे स्टेशन के सामने पार्किंग क्षेत्र से महिला समेत तीन आरोपियों को भारी मात्रा में गांजा के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 17.726 किलोग्राम गांजा और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 1 लाख 79 हजार 500 रुपये बताई गई है।

जानकारी के अनुसार 8 मई 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन के सामने पार्किंग क्षेत्र में शिव मंदिर के पास पीपल पेड़ के नीचे तीन संदिग्ध बैग लेकर बैठे हैं और उनके पास मादक पदार्थ गांजा मौजूद है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान सिद्धांत गोन्डा, कश्यप साहनी और चंद्रिका साहनी के रूप में बताई। तीनों आरोपी ओडिशा के कंधमाल जिले के रहने वाले हैं।

तलाशी के दौरान एक बैग से 6.382 किलो, ट्रॉली बैग से 8.084 किलो और दूसरे बैग से 3.304 किलो गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो कीपैड मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गांजा ओडिशा के कंधमाल जिले से खरीदकर मध्यप्रदेश के खुरई में बेचने ले जा रहे थे। रायगढ़ पहुंचने के बाद वे आगे जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे। आरोपियों के पास गांजा परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। थाना कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

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