STATE

नई दिल्ली, छत्तीसगढ़, Politics, बिहार

GUEST COLUMN

Guest Column

EDITOR CHOICE

Editor Choice

TRAVELLING STORY

TRAVELLING STORY

TCG EXCLUSIVE

टीसीजी एक्सक्लूसिव, इतिहास

VIDEO

VIDEO

37 बकरी-बकरा चोरी: दुकान में काटकर बेच रहा था आरोपी


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  चकरभाठा थाना क्षेत्र के ग्राम सेवार और ग्राम सारधा में हुई 37 नग बकरी-बकरा चोरी मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में तीसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जो चोरी के बकरों को खरीदकर अपनी दुकान में काटकर बेच रहा था।

पुलिस के अनुसार, 15 मार्च 2026 को ग्राम सेवार और ग्राम सारधा से कुल 37 नग बकरी-बकरा चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले में पहले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है। विवेचना के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि चोरी के बकरों को खरीदकर बिक्री करने में एक अन्य आरोपी भी शामिल है।

सूचना के आधार पर पुलिस ने रहीस उर्फ टीर्रू उर्फ मुंडा खान (25 वर्ष) निवासी चिल्हाटी धनुहार मोहल्ला, थाना सरकंडा को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने 10 नग बकरी-बकरा खरीदकर अपनी दुकान में काटकर बेचने की बात स्वीकार की। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, बकरा-बकरी काटने के औजार, तराजू तथा बिक्री की रकम सहित करीब 63 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है।

इस मामले में पहले गिरफ्तार आरोपियों में हेमराज उर्फ हेमू उर्फ राहुल साहू और नजीर खान उर्फ मजीद खान शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि प्रकरण में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 11 वकीलों को दिया सीनियर एडवोकेट का दर्जा


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 तथा हाईकोर्ट ऑफ छत्तीसगढ़ (डिजिग्नेशन ऑफ सीनियर एडवोकेट्स) नियम 2025 के तहत 11 अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) के रूप में नामित किया है। इस संबंध में गुरुवार को हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिसूचना जारी की गई।

जारी अधिसूचना के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और पूर्ण न्यायालय (फुल कोर्ट) की स्वीकृति के बाद इन अधिवक्ताओं को तत्काल प्रभाव से वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया है। सीनियर एडवोकेट घोषित किए गए अधिवक्ताओं में शैलेंद्र दुबे, रणवीर सिंह मरहास, हमीदा सिद्दीकी, यशवंत ठाकुर, अनूप मजूमदार, नीलाभ दुबे, अमृतो दास, मतीन सिद्दीकी, नौशिना अफरीन अली, अरविंद श्रीवास्तव तथा तरेंद्र कुमार झा के नाम शामिल हैं। 

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय पूर्ण न्यायालय की बैठक में अनुमोदन के बाद लिया गया।

ताड़मेटला हत्याकांड में राज्य सरकार की अपील खारिज, 76 जवान शहीद हुये थे


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ताड़मेटला नक्सली हमले मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने कहा कि इतने गंभीर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में भी अभियोजन पक्ष अदालत के सामने कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि बड़े पैमाने पर जवानों की शहादत वाले इस मामले में जांच एजेंसियां आरोप साबित नहीं कर सकीं। अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य अधूरे थे और प्रत्यक्ष साक्ष्य का अभाव था, जिसके चलते ट्रायल कोर्ट को आरोपियों को बरी करना पड़ा।

दरअसल राज्य सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 378(1) के तहत अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा द्वारा 7 जनवरी 2013 को दिए गए फैसले को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने ओयामी गंगा समेत अन्य आरोपियों को आईपीसी की धारा 148, 120बी, 396 और शस्त्र अधिनियम व विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं के तहत आरोपों से बरी कर दिया था।

क्या था ताड़मेटला नरसंहार?

6 अप्रैल 2010 को सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन और पुलिस बल एरिया डोमिनेशन ऑपरेशन पर निकले थे। सुबह ताड़मेटला गांव के जंगल में नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला कर दिया। नक्सलियों ने भारी गोलीबारी और विस्फोटक हमलों के जरिए 76 जवानों को शहीद कर दिया था। हमले के बाद नक्सली जवानों के हथियार भी लूटकर ले गए थे। घटनास्थल के आसपास कई टिफिन बम लगाए गए थे, जिन्हें बाद में निष्क्रिय किया गया। यह घटना देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक मानी जाती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, अदालत केवल विश्वसनीय और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर ही दोष सिद्ध कर सकती है।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने रखा पक्ष

राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा, निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने का फैसला अवैध और अस्थिर है। निचली अदालत महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समझने में विफल रही है, जिसमें आरोपी बरसे लखमा का मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत दिया गया इकबालिया बयान भी शामिल है, जिसमें उसने अन्य आरोपियों के साथ इस अपराध में शामिल होने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, निचली अदालत बम निरोधक दस्ते द्वारा जब्त किए गए पाइप बमों और विस्फोटकों तथा अन्य सहायक सामग्री को भी समझने में विफल रही है। धारा 311 सीआरपीसी के तहत सात घायल सीआरपीएफ जवान, जो चश्मदीद गवाह थे, की जांच के लिए अभियोजन पक्ष के आवेदन को खारिज करना एक गंभीर त्रुटि है, जो मामले को कमजोर करती है।

इस मामले में राज्य सरकार ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। राज्य की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी की, जैसे— आरोपी बरसे लखमा का धारा 164 सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया कथित इकबालिया बयान, बम निरोधक दस्ते द्वारा जब्त पाइप बम, विस्फोटक और अन्य सामग्री, सात घायल सीआरपीएफ जवानों को गवाह के रूप में पेश करने के अभियोजन आवेदन को खारिज करना लेकिन हाई कोर्ट ने जांच और अभियोजन में कई गंभीर कमियां पाईं। अदालत ने कहा— आरोपियों को सीधे हत्या या हमले से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। किसी प्रत्यक्षदर्शी ने आरोपियों की पहचान नहीं की। धारा 164 का इकबालिया बयान स्वतंत्र साक्ष्यों से पुष्ट नहीं था। विस्फोटक सामग्री घटनास्थल से मिली थी, आरोपियों के कब्जे से नहीं। एफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं की गई, इसलिए विस्फोटक होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला। टीआईपी (Test Identification Parade) नहीं कराई गई। शस्त्र अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति का रिकॉर्ड भी नहीं था।

इन्हीं कारणों से हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन “उचित संदेह से परे” अपराध साबित नहीं कर सका और राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। आरोपियों की बरी होने की स्थिति बरकरार रखी गई। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को भविष्य में गंभीर अपराधों की जांच अधिक पेशेवर और प्रक्रियात्मक रूप से मजबूत करने की हिदायत दी, ताकि आपराधिक न्याय प्रणाली पर जनता का भरोसा बना रहे। 

हत्याकांड मामले में पुलिस ने जिन 10 लोगों को आरोपी बनाया था, उन्हें बाद में अदालत से बरी कर दिया गया। आरोपियों की सूची इस प्रकार है—

ओयामी गंगा — पुत्र लखमा, निवासी मिनपा पटेलपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा

माडवी दुला — पुत्र मुक्का, निवासी मिनपा पटेलपारा, चिंतागुफा, सुकमा

पोदियामी हिड़मा — पत्नी माया, निवासी पटेलपारा, चिंतागुफा, सुकमा

ओयामी हिड़मा — पुत्र गंगा, निवासी पटेलपारा, चिंतागुफा, सुकमा

कवासी बुथरा — पुत्र हड़मा, निवासी पटेलपारा, चिंतागुफा, sुकमा

हुर्रा जोगा — पुत्र हड़मा, निवासी मिनपा पटेलपारा, चिंतागुफा, सुकमा

बरसे लखमा — पुत्र भीमा, निवासी कावासीरस मारेपल्ली, चिंतागुफा, सुकमा

मड़कम गंगा — पुत्र मड़कम हड़मा, निवासी गोरगुंडा, चिंतागुफा, सुकमा

राजेश नायक — पिता चिकन राम, निवासी गोरगुंडा, चिंतागुफा, सुकमा

करतम जोगा — पुत्र बंदी, निवासी मिस्मा, चिंतागुफा, सुकमा

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका, इसलिए सभी आरोपियों की दोषमुक्ति बरकरार रखी गई।

मितानिन के घर मिला बम बनाने का सामान, महापौर को बम से उड़ाने की धमकी


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र स्थित रावाभाठा इलाके में उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस ने एक घर से देसी बम बनाने का सामान बरामद किया। पुलिस ने मौके से विस्फोटक सामग्री, पिस्टल और संदिग्ध सामान जब्त किया है। मामले में बड़ा खुलासा तब हुआ जब पूछताछ में कांग्रेस नेता और बिरगांव महापौर नंदलाल देवांगन के साले का नाम सामने आया।

जानकारी के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि रावाभाठा क्षेत्र के एक मकान में संदिग्ध सामग्री रखी गई है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मितानिन पुष्पा साहू के घर से बम बनाने का सामान बरामद किया। पूछताछ में पुष्पा साहू ने बताया कि विनय देवांगन नामक व्यक्ति ने उसके घर में बैग रखवाया था। महिला ने पुलिस को बताया कि विनय देवांगन जमीन कारोबारी है और उसी से उन्होंने जमीन खरीदी थी। बैग खोलने पर उसमें पिस्टल और विस्फोटक सामग्री मिली। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी नॉर्थ मयंक गुर्जर ने बिरगांव महापौर नंदलाल देवांगन से भी पूछताछ की। महापौर ने पुलिस को बताया कि विनय देवांगन उसका साला है, लेकिन पिछले करीब 20 वर्षों से दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि विवाद के बाद विनय ने उन्हें बम से उड़ाने की धमकी दी थी।

पुलिस अब फरार आरोपी विनय देवांगन की तलाश में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस जब्त विस्फोटक सामग्री की जांच कर रही है और पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल जारी है। 


© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com