इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के तहत शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों, डिजिटल ट्रैफिक मॉनिटरिंग, ई-चालान और ऑटोमेटेड ट्रैफिक विश्लेषण के जरिए यातायात व्यवस्था की निगरानी की जाती है। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना है।
पुलिस कंट्रोल रूम, सेक्टर-6 में आयोजित समीक्षा बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों के राजपत्रित अधिकारी शामिल हुए। बैठक में पिछले एक वर्ष के दौरान अपराध नियंत्रण, साइबर अपराधों पर कार्रवाई, मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान, महिला एवं बाल सुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग और तकनीक के उपयोग से जुड़े कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया।
डीजीपी ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक मामले की विवेचना वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित होनी चाहिए। उन्होंने फरार आरोपियों और स्थायी वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने तथा महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों में त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया। डीजीपी ने डिजिटल साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग, पुलिस कर्मियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने और आम नागरिकों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, नियमित प्रशिक्षण और अनुशासन को भी प्रभावी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। साथ ही कहा कि जनता के प्रति विनम्र, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवहार पुलिस की सबसे बड़ी पहचान होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक के बाद डीजीपी ने पुलिस कंट्रोल रूम में स्थापित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें सीसीटीवी आधारित निगरानी, ऑटोमेटेड ट्रैफिक मॉनिटरिंग, ई-चालान प्रणाली और डिजिटल ट्रैफिक प्रबंधन की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।
उन्होंने उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सड़क सुरक्षा मजबूत करने, यातायात नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और स्मार्ट पुलिसिंग के जरिए नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों के राजपत्रित अधिकारियों के साथ पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।







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