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भाई की कलाई से आगे बढ़ी राखी, अब साइबर ठगों से बचाने का बना हथियार; वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम

जांजगीर-चांपा /  TODAY छत्तीसगढ़  / रक्षाबंधन के मौके पर जांजगीर-चांपा पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता की अनोखी पहल शुरू की है। ‘एक राखी साइबर जागृति की’ अभियान के तहत जिले के 432 गांवों, शहरी वार्डों, सरकारी कॉलेजों, हायर सेकेंडरी स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में एक साथ साइबर सुरक्षा का संदेश दिया गया।

अभियान के दौरान जिले में 1 लाख 50 हजार से ज्यादा लोगों को ‘साइबर जागृति की राखी’ बांधी गई और उन्हें साइबर अपराध से बचने की शपथ दिलाई गई। पुलिस के इस व्यापक अभियान को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

राखी के साथ साइबर सुरक्षा का संकल्प

जिला स्तरीय कार्यक्रम जांजगीर के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित किया गया। इसमें कलेक्टर जनमेजय महोबे और पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड छत्तीसगढ़ की राज्य प्रभारी सोनल राजेश शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलैंडन यार्क, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात उदयन बेहार, डीएसपी मुख्यालय विजय पैकरा, डीएसपी अजाक सतरूपा तारम, सीएसपी जांजगीर योगिताबाली खापर्डे, रक्षित निरीक्षक प्रदीप कुमार जोशी और साइबर प्रभारी भास्कर शर्मा समेत अन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि राखी भाई-बहन के बीच सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है। इसी भावना को साइबर सुरक्षा से जोड़ते हुए लोगों को एक-दूसरे को साइबर अपराध से सुरक्षित रखने का संकल्प लेना चाहिए।

432 गांवों में एक साथ पहुंचा संदेश

अभियान की खास बात यह रही कि जिले के 432 गांवों में एक साथ साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जांजगीर-चांपा पुलिस के साथ ग्राम कोटवार और महिला कमांडो ने ग्रामीणों को ‘साइबर जागृति की राखी’ बांधी।

शहरी क्षेत्रों के वार्डों के साथ सरकारी कॉलेजों, हायर सेकेंडरी स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में भी लोगों को राखी बांधकर साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने की शपथ दिलाई गई। पुलिस ने लोगों को समझाया कि साइबर ठगों से बचने के लिए छोटी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।

OTP और बैंक डिटेल साझा नहीं करने की अपील

अभियान के दौरान लोगों को फर्जी लिंक पर क्लिक नहीं करने, अनजान कॉल पर OTP या बैंक की जानकारी साझा नहीं करने और सोशल मीडिया का सावधानी से इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करने की अपील भी की गई।

गोल्डन बुक में दर्ज 

जिलेभर में एक साथ बड़े स्तर पर आयोजित इस अभियान के सत्यापन के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड छत्तीसगढ़ की राज्य प्रभारी सोनल राजेश शर्मा को आमंत्रित किया गया था।

उन्होंने जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों का सत्यापन किया। पुलिस के अनुसार, 432 गांवों में एक साथ साइबर जागरूकता अभियान चलाने की यह पहल गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से अभियान से संबंधित प्रमाण पत्र भी पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय को प्रदान किया गया। 

राखी तैयार करने में महिलाओं और जेल बंदियों का योगदान

‘साइबर जागृति की राखी’ तैयार करने में जिला पुलिस के साथ महिला कमांडो, महिला स्व सहायता समूह और जिला जेल के कैदियों ने भी योगदान दिया। इस पहल के जरिए साइबर सुरक्षा के संदेश को समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

जांजगीर-चांपा पुलिस का कहना है कि गांव से शहर तक एक साथ चलाया गया यह अभियान साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

रिकॉर्ड की खास बातें

  • एक घंटे के भीतर 1 लाख से ज्यादा लोगों को साइबर जागृति की राखी
  • 432 ग्रामों और वार्डों में एक साथ अभियान
  • 336 ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम
  • शासकीय प्रतिष्ठानों और उद्योगों में भी जागरूकता
  • गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

महिला के गले से 80 हजार की सोने की चेन लूटने वाले दो आरोपी राउरकेला से दबोचे

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  सिरगिट्टी पुलिस ने महिला से सोने की चेन लूट के मामले में फरार चल रहे दो आरोपियों को ओडिशा के राउरकेला से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी वारदात के बाद फरार थे। पुलिस ने उन्हें दूसरे राज्य में तलाश कर पकड़ा और बिलासपुर लाने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।

पुलिस के मुताबिक, 19 जून 2026 को एक महिला अपने घर के पास सुबह करीब 8:15 बजे फूल तोड़ रही थी। इसी दौरान स्कूटी से तीन युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि एक युवक महिला के पीछे और दो सामने से आए। बदमाशों ने महिला के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की और उसके गले में पहनी करीब एक तोला वजन की पुरानी सोने की चेन, जिसमें लॉकेट लगा था, लूटकर फरार हो गए।

लूटी गई चेन की कीमत करीब 80 हजार रुपये बताई गई थी। महिला की शिकायत पर सिरगिट्टी थाने में अपराध क्रमांक 457/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई।

दो आरोपी पहले ही हो चुके थे गिरफ्तार

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नवीन साहू और प्रमोद सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था। वहीं वारदात में शामिल दो अन्य आरोपी फरार चल रहे थे।

फरार आरोपियों की तलाश के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सिरगिट्टी पुलिस को निर्देश दिए थे। पुलिस ने मुखबिर तंत्र सक्रिय करने के साथ आरोपियों के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई।

राउरकेला में छिपे थे आरोपी

जांच के दौरान पुलिस को फरार आरोपियों के ओडिशा के राउरकेला में होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने आवश्यक अनुमति लेकर दूसरे राज्य में तलाश शुरू की।

पुलिस ने राउरकेला पहुंचकर सोनू सोनकर उर्फ टेनी (29) और मोह. ईरफान अंसारी उर्फ झुले (19) को हिरासत में लिया। दोनों को गिरफ्तार कर सिरगिट्टी थाना लाया गया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी सोनू सोनकर न्यू बस स्टैंड मछली मार्केट, थाना प्लांट साइट, राउरकेला और मोह. ईरफान अंसारी माल गोदाम मदरसा, थाना उदित नगर, राउरकेला का निवासी है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। 

गिरफ्तार आरोपी

  1. सोनू सोनकर उर्फ टेनी (29) — राउरकेला
  2. मोह. ईरफान अंसारी उर्फ झुले (19) — राउरकेला

वारदात

  • तारीख: 19 जून 2026
  • स्थान: महिला के घर के पास, सिरगिट्टी क्षेत्र
  • लूटा गया सामान: करीब एक तोला सोने की चेन और लॉकेट
  • अनुमानित कीमत: करीब 80 हजार रुपये
  • मामला: अपराध क्रमांक 457/2026

गांवों में साइबर ठगी रोकने की तैयारी, पुलिस ने कोटवारों को बनाया जागरूकता की कड़ी

रायगढ़ /  TODAY छत्तीसगढ़  / साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच रायगढ़ पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाने की पहल तेज कर दी है। साइबर जागृति अभियान के तहत कोतरारोड़ पुलिस ने थाना क्षेत्र के ग्राम कोटवारों को बुलाकर ऑनलाइन ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के तरीके बताए। पुलिस ने कोटवारों से गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने की अपील की।

छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दूसरे सप्ताह 23 से 29 अगस्त तक वित्तीय धोखाधड़ी और UPI सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

कोटवारों को बनाया साइबर जागरूकता की कड़ी

इसी अभियान के तहत थाना प्रभारी कोतरारोड़ निरीक्षक शील आदित्य सिंह ने क्षेत्र के ग्राम कोटवारों को थाना बुलाकर साइबर अपराध से जुड़े खतरों और उनसे बचाव की जानकारी दी।

उन्होंने कोटवारों से कहा कि वे पुलिस और ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। गांवों में होने वाली बैठकों और जनसंपर्क के दौरान लोगों को साइबर ठगी से बचाव के उपायों की जानकारी दें, ताकि ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने से ग्रामीणों को बचाया जा सके।

OTP-PIN किसी को न बताएं

पुलिस ने कोटवारों को समझाया कि किसी भी वित्तीय लेनदेन के दौरान बेहद सावधानी बरतना जरूरी है। OTP, ATM PIN, UPI PIN, CVV, पासवर्ड और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

पुलिस ने बताया कि साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी या किसी संस्था के कर्मचारी बनकर फोन करते हैं और डराकर या लालच देकर बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे कॉल से सावधान रहने की सलाह दी गई।

अनजान QR कोड स्कैन करने से बचें

पुलिस ने फर्जी कॉल और संदिग्ध मैसेज से सावधान रहने को कहा। किसी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने और अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए QR कोड को स्कैन नहीं करने की हिदायत दी गई। साथ ही सुरक्षित बैंकिंग और एटीएम से राशि निकालते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल

पुलिस ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो उसे समय गंवाए बिना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ सकती है।

थाना प्रभारी निरीक्षक शील आदित्य सिंह ने कहा कि साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका समय रहते सावधानी बरतना है। उन्होंने कोटवारों से अपील की कि वे गांव के अधिक से अधिक लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाएं।

पुलिस की अपील

रायगढ़ पुलिस ने लोगों से अपील की है कि OTP, PIN और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करें।

साइबर ठगी से बचने के जरूरी नियम

  • OTP, ATM PIN, UPI PIN, CVV और पासवर्ड किसी को न बताएं।
  • बैंक या पुलिस अधिकारी बनकर फोन करने वालों से सतर्क रहें।
  • संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
  • अनजान QR कोड स्कैन न करें।
  • ऑनलाइन भुगतान करते समय नाम और राशि जांच लें।
  • साइबर ठगी होते ही 1930 पर शिकायत करें।

सब्जी नहीं बनाई तो पत्नी की हत्या! शव जलाकर हड्डियां दबाईं, DNA रिपोर्ट से खुला राज


रायगढ़ /
  TODAY छत्तीसगढ़  / कापू थाना क्षेत्र में करीब चार महीने से उलझी एक गुमशुदगी की गुत्थी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, पत्नी की गला दबाकर हत्या करने के बाद पति ने शव को घर के आंगन में जला दिया और हड्डियों के अवशेष जमीन में दबा दिए थे। इसके बाद उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए पत्नी के लापता होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी।

पुलिस की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। जले हुए हड्डियों के अवशेष का DNA परीक्षण कराया गया, जिसमें मृतका की पहचान 26 वर्षीय चमेली सिदार के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पति देवानंद सिदार (39) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

गुमशुदगी की रिपोर्ट से शुरू हुई जांच

पुलिस के अनुसार, ग्राम कुमा निवासी देवानंद सिदार ने 28 अप्रैल 2026 को कापू थाने में पत्नी चमेली के 16 अप्रैल की रात करीब 8 बजे घर से बिना बताए चले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने गुम इंसान का मामला दर्ज कर महिला की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को देवानंद के बयानों और उसके व्यवहार में कुछ विरोधाभास नजर आए। इसके बाद महिला के परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई। धीरे-धीरे पुलिस का शक देवानंद पर गहराता गया।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने चौंकाने वाला तथ्य आया कि चमेली कहीं गायब नहीं हुई थी, बल्कि उसकी हत्या कर दी गई थी और हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाकर मामले को गुमशुदगी का रूप देने की कोशिश की गई थी।

चार साल पहले हुआ था प्रेम विवाह

मृतका के पिता बालसाय सिदार के मुताबिक, चमेली उनकी सबसे छोटी बेटी थी। करीब चार साल पहले प्रेम संबंध के बाद देवानंद उसे अपने साथ कुमा ले गया था। दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे और उनकी कोई संतान नहीं थी।

परिजनों के अनुसार, घटना के दो दिन बाद 18 अप्रैल को देवानंद मक्कापुर स्थित उनके घर भी पहुंचा था और चमेली के वहां आने के बारे में पूछताछ की थी। परिवार ने बताया कि वह वहां नहीं आई है, जिसके बाद देवानंद वापस लौट गया।

बाद में एक दशकर्म कार्यक्रम के दौरान परिजनों को चमेली की हत्या कर शव जलाए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद वे कुमा स्थित देवानंद के घर पहुंचे और उससे पूछताछ की।

‘सब्जी नहीं बनाई’ तो बढ़ गया विवाद

पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि 16 अप्रैल की रात भाजी की सब्जी बनाने को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर उसने चमेली का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोप है कि हत्या के बाद देवानंद ने साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घर के आंगन में जला दिया। इसके बाद जली हुई हड्डियों के अवशेषों को जमीन में गड्ढा खोदकर पत्थर के नीचे दबा दिया। वारदात छिपाने के लिए उसने पत्नी के लापता होने की कहानी बनाई और थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी।

DNA जांच ने खोला पूरा राज

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से जांच आगे बढ़ाई। विधिवत अनुमति लेने के बाद FSL अधिकारी की मौजूदगी में घटनास्थल से जले हुए हड्डियों के अवशेष बरामद किए गए। अवशेषों का पंचनामा और अन्य वैधानिक कार्रवाई पूरी करने के बाद डॉक्टर द्वारा संरक्षित हड्डी के नमूने का DNA परीक्षण कराया गया। DNA रिपोर्ट में हड्डियों के अवशेषों की पहचान गुम महिला चमेली सिदार के रूप में हुई।

वैज्ञानिक साक्ष्यों से हत्या की पुष्टि होने के बाद 23 अगस्त 2026 को कापू थाने में आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 140/2026 दर्ज किया गया। मामले में धारा 103(1) और 238(ए) भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की गई।

पुलिस को देखकर फरार हुआ आरोपी

अपराध दर्ज होने के बाद कापू पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही देवानंद फरार हो गया। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस टीम ने करीब तीन दिन तक गांव के बाहर कैंप कर मुखबिर तंत्र सक्रिय रखा। लगातार प्रयास के बाद आरोपी को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने हत्या की वारदात स्वीकार की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

मृतका और आरोपी

  • मृतका: चमेली सिदार, उम्र 26 वर्ष
  • आरोपी: देवानंद सिदार, उम्र 39 वर्ष, ग्राम कुमा
  • मामला: अपराध क्रमांक 140/2026
  • धाराएं: 103(1), 238(ए) भारतीय न्याय संहिता

पुलिस भाइयों की कलाई पर सजी राखी, बहनों की सुरक्षा का लिया संकल्प

रायगढ़: TODAY छत्तीसगढ़  / रक्षाबंधन के पावन पर्व पर रायगढ़ पुलिस कंट्रोल रूम में भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘एक शाम राखी के नाम’ कार्यक्रम में लायंस क्लब प्राइड की बहनों ने पुलिस अधिकारियों और जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। पुलिस अधिकारियों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर उनकी सुरक्षा और सम्मान के प्रति हमेशा तत्पर रहने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, एडिशनल एसपी ट्रैफिक पुष्पेंद्र बघेल, डीएसपी उन्नति ठाकुर, एसएन सिंह समेत पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे। लायंस क्लब प्राइड की बहनों ने पुलिसकर्मियों को राखी बांधी तो माहौल भावुक और आत्मीय हो गया।

‘महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता’

कार्यक्रम के दौरान एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा रायगढ़ पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व सुरक्षा और विश्वास के उस रिश्ते की याद दिलाता है, जिसे पुलिस हर परिस्थिति में निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

एसएसपी ने बताया कि महिलाओं और बच्चों की समस्याओं, शिकायतों और मार्गदर्शन के लिए रायगढ़ पुलिस ने ‘हैलो सिस्टर’ हेल्पलाइन नंबर 94792705 जारी किया है। किसी भी समस्या या शिकायत की स्थिति में महिलाएं और बच्चे पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की जांच महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाती है, ताकि जरूरतमंदों को संवेदनशील तरीके से सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

‘जनता के सहयोग से पुलिस को मिलती है ऊर्जा’

एसएसपी ने रायगढ़ की संस्कृति और लोगों के अपनत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले की जनता का पुलिस और प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल है। जनहित के कार्यों में लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

उन्होंने कहा कि जब जनता विश्वास और सहयोग की भावना के साथ पुलिस के साथ खड़ी होती है तो पुलिसकर्मियों को और बेहतर काम करने की ऊर्जा मिलती है। उन्होंने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रायगढ़ पुलिस आगे भी ‘सेवा, सुरक्षा और समर्पण’ की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करती रहेगी।

लायंस क्लब की बहनों ने बांधी राखी

कार्यक्रम में लायंस क्लब प्राइड की प्रेसिडेंट डॉ. सविता साव, कोषाध्यक्ष मनीषा वर्मा, आशा बेरीवाल, चंपा अग्रवाल, शिखा खजांची, डॉ. प्रियंका सक्सेना, रानू पटेल, भावना पुलस्तिया, रितु तायल, मंजू डालमिया, निर्मला बेरीवाल, तान्या साव, दीपिका साव और चरंजीत घई ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को राखी बांधी।

‘एक शाम राखी के नाम’ कार्यक्रम ने रक्षाबंधन के पर्व को भावनात्मक रूप से खास बना दिया। राखी के धागे में जहां बहनों का स्नेह और विश्वास नजर आया, वहीं पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा, सम्मान और सेवा का संकल्प लिया।

यह आयोजन पुलिस और आम लोगों के बीच विश्वास और आत्मीय संबंधों को मजबूत करने की एक खूबसूरत मिसाल बनकर सामने आया।

बाबा कर्मेश्वर के दरबार में पहुंचे CM साय, रुद्राभिषेक कर बोले- छत्तीसगढ़ पर बनी रहे शिव कृपा

बलरामपुर-रामानुजगंज / TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बुधवार को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कर्रा पहुंचे। यहां आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ और शिव पुराण कथा में शामिल होकर उन्होंने प्राचीन बाबा कर्मेश्वर धाम में भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने ग्राम कर्रा में मंगल भवन निर्माण कराने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि बाबा कर्मेश्वर की कृपा से क्षेत्र लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़े, इसके लिए सरकार जरूरी विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करेगी।

‘भगवान शिव की कृपा पूरे छत्तीसगढ़ पर बनी रहे’

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्रा की पावन धरती पर श्री महारुद्र यज्ञ और शिव पुराण कथा का आयोजन सौभाग्य की बात है। उन्होंने कथावाचक आचार्य दिव्यानंद जी महाराज, आयोजन समिति और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। उन्होंने बाबा कर्मेश्वर से प्रार्थना की कि पूरे छत्तीसगढ़ पर भगवान शिव की कृपा बनी रहे और प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आए।

शक्तिपीठों को धार्मिक कॉरिडोर से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ धर्म, संस्कृति और आस्था की समृद्ध परंपरा वाला प्रदेश है। यह माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्राचीन शिवालय, देवी मंदिर और लोक आस्था के केंद्र मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों को धार्मिक कॉरिडोर के रूप में जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे।

50 हजार श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्रीराम से गहरा संबंध है। राज्य सरकार की श्री रामलला दर्शन योजना के जरिए प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या में रामलला के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक करीब 50 हजार श्रद्धालु इस योजना के तहत अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं।

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों की धार्मिक आस्था और तीर्थ यात्रा की इच्छा को ध्यान में रखते हुए तीर्थ दर्शन योजना भी शुरू की गई है। इसके तहत देश के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों को चिन्हित किया गया है और अब तक करीब 10 हजार श्रद्धालु इसका लाभ ले चुके हैं।

बाबा कर्मेश्वर धाम की सदियों पुरानी मान्यता

ग्राम कर्रा स्थित बाबा कर्मेश्वर धाम स्थानीय लोगों की आस्था का प्राचीन केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां स्थित शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ था। जनश्रुति के मुताबिक करीब नौवीं-दसवीं शताब्दी में साल के पेड़ के खोल में शिवलिंग के प्रकट होने की बात कही जाती है। तभी से यहां भगवान शिव की पूजा की परंपरा चली आ रही है। वर्तमान में श्री कर्मेश्वर महादेव मंदिर जीर्णोद्धार समिति की ओर से मंदिर के जीर्णोद्धार का काम कराया जा रहा है।

स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार पुराने समय में बारिश नहीं होने पर ग्रामीण भगवान शिव की विशेष पूजा करते थे। शिवलिंग पर गोबर का लेप लगाने की भी एक पारंपरिक मान्यता रही है। ग्रामीणों का विश्वास रहा है कि इस अनुष्ठान के बाद बारिश होती थी। पीढ़ियों से चली आ रही इन मान्यताओं ने बाबा कर्मेश्वर धाम को क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है।

मां के नाम लगाया रुद्राक्ष का पौधा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंदिर परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अभियान के तहत अपनी माता श्रीमती जसमनी देवी साय के नाम पर रुद्राक्ष का पौधा लगाया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों से प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी मंदिर परिसर में बेल का पौधा लगाया। अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी अभियान के तहत पौधरोपण किया।

बस्तर के विकास और नक्सलवाद पर भी बोले CM

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। लंबे समय तक हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शांति और विकास का वातावरण बन रहा है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे परिवार तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कर्रा सहित पूरे बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में विकास कार्यों को लगातार गति देने की बात कही। धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए क्षेत्र में जरूरी सुविधाओं का विस्तार करने का भी भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, पत्थलगांव विधायक गोमती साय, आईजी दीपक झा, सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा, कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर समेत जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

ई-बसों से बदलेगी शहरों की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था, 240 बसों के संचालन की तैयारी

बिलासपुर TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। PM-eBus Sewa योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। इसे लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के अधिकारियों की बैठक में रूट प्लान, डिपो, चार्जिंग स्टेशन, बस स्टॉप और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर रणनीति तैयार की गई।

बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और MoHUA के निदेशक भानु प्रताप सिंह भदौरिया मौजूद रहे। सीईओ सूडा सुमीत अग्रवाल ने योजना की प्रगति और चारों शहरों में प्रस्तावित ई-बसों की जानकारी दी।

शहर की जरूरत के हिसाब से तय होंगे रूट

बैठक में अधिकारियों ने साफ किया कि ई-बसों के रूट केवल उपलब्ध सड़कों के आधार पर नहीं, बल्कि शहर की वास्तविक परिवहन जरूरत और यात्रियों की मांग को ध्यान में रखकर तय किए जाएंगे।

स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख बाजार और महत्वपूर्ण संस्थानों को ई-बस नेटवर्क से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म रूट प्लान तैयार करने तथा चरणबद्ध तरीके से रूट की व्यवहारिकता जांचने के निर्देश दिए गए।

यात्री संख्या, संभावित मांग, दूरी और कनेक्टिविटी जैसे बिंदुओं का अध्ययन करने के बाद रूट को अंतिम रूप दिया जाएगा। अधिक यात्री दबाव वाले क्षेत्रों में मांग के अनुरूप बस रूट विकसित किए जाएंगे।

यात्रियों को आसानी से मिलेगी बस की जानकारी

अधिकारियों ने ई-बस सेवा की जानकारी आम लोगों तक आसानी से पहुंचाने पर भी जोर दिया। यात्रियों को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि कितनी बसें चल रही हैं, किस रूट पर चल रही हैं और प्रत्येक रूट का समय एवं विवरण क्या है।

इसके लिए रूट चार्ट और संबंधित जानकारी व्यवस्थित तरीके से तैयार कर नागरिकों के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

30 अक्टूबर तक काम पूरा करने पर जोर

बैठक में ई-बस योजना के विभिन्न कामों को तय समय-सीमा में पूरा करने की समीक्षा की गई। अधिकारियों को 30 अक्टूबर तक निर्धारित कार्यों और रूट से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में तेजी बनाए रखने को कहा गया।

इसके साथ ही 1 नवंबर के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संबंधित कार्यों की समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए गए। रूट और संचालन से जुड़े कुछ कामों में आउटसोर्सिंग की संभावनाएं तलाशने पर भी चर्चा हुई।

डिपो और चार्जिंग स्टेशन की तैयारी साथ-साथ

ई-बसों के संचालन के लिए जरूरी डिपो, चार्जिंग स्टेशन और बस स्टॉप तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने निर्देश दिया कि डिपो की क्षमता भविष्य में ई-बसों की संख्या बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखकर तय की जाए।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और उपलब्धता का आकलन कर समय पर जरूरी व्यवस्था करने को कहा गया। डिपो और चार्जिंग स्टेशन के लिए जमीन से जुड़े मामलों को भी समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

NHAI, रेलवे और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जरूरी स्वीकृतियां और तकनीकी प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने को कहा गया, ताकि ई-बसों का संचालन शुरू होने से पहले आधारभूत ढांचा तैयार रहे।

यात्री सुविधा के हिसाब से बनेंगे बस स्टॉप

बैठक में बस स्टॉप के स्थान चयन और विकास पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि बस स्टॉप का चयन यात्री मांग, सुविधा और रूट कनेक्टिविटी के आधार पर किया जाए।

बस स्टॉप पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने और इसके लिए PPP मॉडल की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

रियल टाइम मॉनिटरिंग पर रहेगा जोर

ई-बस संचालन में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को मजबूत करने और बसों की निगरानी के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।

इसके जरिए बसों की लोकेशन, रूट, यात्री संख्या और संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। संचालन के लिए जरूरी मानव संसाधन और अलग-अलग ऑपरेशन मॉडल पर भी अधिकारियों ने चर्चा की।

महिलाओं के लिए विशेष बस सेवा की तैयारी

बैठक में महिलाओं के लिए विशेष बस सेवा शुरू करने की तैयारी पर भी चर्चा हुई। महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसके लिए संभावित रूट और संचालन व्यवस्था तैयार करने पर विचार किया गया।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि PM-eBus Sewa के सभी घटकों को अलग-अलग नहीं, बल्कि एकीकृत रूप से विकसित करने की जरूरत है। रूट प्लानिंग, बस संचालन, डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस स्टॉप और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में बेहतर तालमेल जरूरी है।

उन्होंने शहरवार जरूरत और उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर प्राथमिकताएं तय करने तथा योजना की नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सुगम और सुरक्षित परिवहन विकल्प बनाने का लक्ष्य

बैठक के समापन पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर ने कहा कि PM-eBus Sewa को नागरिकों की सुविधा और शहरों की परिवहन जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रूट, डिपो, चार्जिंग और अन्य आधारभूत सुविधाओं की समग्र तैयारी के साथ ई-बस सेवा को सुगम, सुरक्षित और प्रभावी सार्वजनिक परिवहन विकल्प के रूप में विकसित किया जाएगा।

चार शहरों को मिलेंगी ई-बसें

  • रायपुर: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • बिलासपुर: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • दुर्ग: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • कोरबा: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • कुल स्वीकृत बसें: 240
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