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बिलासपुर में बर्ड फ्लू अलर्ट: कई वार्डों को इन्फेक्टेड व सर्विलांस जोन घोषित


बिलासपुर। 
  TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) की पुष्टि के बाद प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। कोनी इलाके में स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में 19 से 24 मार्च के बीच करीब 4400 मुर्गियों की मौत हुई, जिसके बाद जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभावित इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है और सख्त निगरानी शुरू कर दी गई है।

कितना बड़ा है खतरा?

जिला प्रशासन ने पोल्ट्री फार्म के एक किलोमीटर दायरे को ‘संक्रमित क्षेत्र’ और 10 किलोमीटर तक के इलाके को ‘सर्विलांस जोन’ घोषित किया है। इस पूरे क्षेत्र में मुर्गियों, अंडों और चारे की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के प्रतिबंध संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी होते हैं, क्योंकि एवियन इन्फ्लुएंजा तेजी से फैलने वाला वायरस है।

क्या कार्रवाई की गई है?

प्राथमिक जांच में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद सभी प्रभावित पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट (कुलिंग) कर दिया गया है। पोल्ट्री फार्म को सील कर छह महीने तक खाली रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि संक्रमण पूरी तरह खत्म हो सके। मृत पक्षियों के नमूनों की जांच भोपाल और पुणे की प्रयोगशालाओं में की गई, जिनमें से भोपाल लैब ने संक्रमण की पुष्टि की है।

इंसानों के लिए कितना जोखिम?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फिलहाल किसी भी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं। पोल्ट्री फार्म के कर्मचारियों और आसपास रहने वाले लोगों को एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया है और निगरानी की जा रही है। हालांकि, अधिकारियों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। पशुपालन विभाग ने 21 दिनों तक चिकन का सेवन न करने की अपील की है। 

प्रशासन क्या कह रहा है?

पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. जी.एस. तंवर के मुताबिक, सभी जरूरी प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है और स्थिति नियंत्रण में है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

मैदान पर निगरानी और सख्ती

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया। प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन में आवाजाही पर सख्त नियंत्रण, लगातार सैंपलिंग, सैनिटाइजेशन और संक्रमित पक्षियों के सुरक्षित निपटान के निर्देश दिए हैं। साथ ही, किसी भी तरह की अफवाहों पर रोक लगाने और सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

बर्ड फ्लू: क्यों जरूरी है सतर्कता?  

बर्ड फ्लू एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करती है, लेकिन कुछ मामलों में यह अन्य जानवरों और इंसानों तक भी पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती स्तर पर सख्त कदम उठाने से इसके बड़े प्रकोप में बदलने की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष: नियंत्रण में स्थिति, लेकिन सतर्कता जरूरी

बिलासपुर में बर्ड फ्लू का यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन शुरुआती स्तर पर उठाए गए कदम संक्रमण को सीमित रखने में मददगार हो सकते हैं।हालांकि, आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, यह निगरानी, जागरूकता और नियमों के पालन पर निर्भर करेगा। 

मां महामाया दर्शन के लिए विशेष यातायात व्यवस्था, आज शाम 4 बजे से भारी वाहनों की एंट्री बंद


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / नवरात्रि के दौरान रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष यातायात प्रतिबंध लागू किए हैं। पुलिस उप महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर आज 25 मार्च को शाम 4 बजे से श्रद्धालुओं के आवागमन वाले प्रमुख मार्गों पर भारी और मध्यम वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था विशेष रूप से सप्तमी और अष्टमी की रात को संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम और सुरक्षित बना रहे।

किन मार्गों पर रहेगा असर

जारी योजना के अनुसार, शहर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को चिल्हाटी मोड़, अशोक नगर चौक, गुरुनानक चौक, गुम्बर पेट्रोल पंप, मंगला चौक और महाराणा चौक के पास रोका जाएगा। इसी तरह रायपुर मार्ग से आने वाले वाहनों को सेंदरी अरपा पुल के पास, कोरबा की ओर से आने वालों को ग्राम कर्रा के पास, और गौरेला-पेंड्रा मार्ग से आने वाले वाहनों को सिल्ली मोड़ पर रोका जाएगा। कोटा मार्ग से आने वाले वाहनों के लिए लखनी मोड़ पर प्रतिबंध लागू रहेगा।

सुरक्षा और निगरानी के इंतज़ाम

पुलिस के अनुसार, मार्गों पर पर्याप्त संख्या में यातायात और पुलिस बल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा पेट्रोलिंग टीम, फिक्स पॉइंट, एम्बुलेंस और क्विक रिस्पॉन्स टीम को भी सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि नशे में वाहन चलाने, तेज़ रफ्तार या लापरवाही से ड्राइविंग करने और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

लोगों से अपील

प्रशासन ने श्रद्धालुओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान संयम और धैर्य बनाए रखें, यातायात नियमों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध या असामाजिक गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। इसके लिए पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर 9479193099 जारी किया गया है।

क्या कहते हैं संकेत?

हर साल नवरात्रि के दौरान रतनपुर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में ट्रैफिक प्रबंधन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय से पहले लगाए गए इस तरह के प्रतिबंध भीड़ नियंत्रण और दुर्घटनाओं को कम करने में मददगार हो सकते हैं, हालांकि इनका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमों का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है।

विश्व क्षय दिवस पर जिले में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  विश्व क्षय दिवस के अवसर पर जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में विविध जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान सीएमएचओ कार्यालय से मितानिनों एवं विभिन्न सहयोगी संगठनों के साथ एक व्यापक जनजागरूकता रैली निकाली गई। रैली को सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल एवं जिला क्षय अधिकारी डॉ. गायत्री बांधी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।इस अवसर पर राज्य में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान के 100 दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत भी की गई। केंद्र स्तर पर इस अभियान का शुभारंभ शाम 5 बजे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा किया गया। जिले में कार्यक्रम का आयोजन मंथन सभा कक्ष में किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति की सभापति श्रीमती अरुणा सूर्या, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल सहित सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल, जिला क्षय अधिकारी डॉ. गायत्री बांधी मौजूद रही।  कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2025 में टीबी मुक्त घोषित पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों को सम्मानित किया गया। उन्हें पुष्प गुच्छ, प्रशस्ति पत्र एवं महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट की गई। प्रथम वर्ष टीबी मुक्त हुई पंचायतों को कांस्य रंग की प्रतिमा तथा लगातार दो वर्ष टीबी मुक्त रहने वाली पंचायतों को सिल्वर रंग की प्रतिमा प्रदान की गई। वर्ष 2025 में बिलासपुर जिले की 62 पंचायतें पहली बार और 20 पंचायतें दूसरी बार टीबी मुक्त घोषित की गई हैं। 

कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल और जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी ने जिले में संचालित टीबी उन्मूलन कार्यों की सराहना करते हुए निरंतर प्रगति बनाए रखने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला क्षय अधिकारी डॉ. गायत्री बांधी ने टीबी रोग एवं प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही अन्य अतिथियों ने भी इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनसहयोग बढ़ाने और व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आह्वान किया। 

पापा राव समेत 18 माओवादी कैडर सरेंडर, ज़मीन पर क्या होगा असर ?


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है। पुलिस के अनुसार, साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव सहित कुल 18 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर) स्तर के नेता प्रकाश मड़वी और अनिल ताती भी शामिल हैं। इस समूह में सात महिला कैडर भी हैं।

पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों ने AK-47 राइफल सहित अन्य हथियार भी जमा किए हैं। यह आत्मसमर्पण राज्य की पुनर्वास नीति के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। अधिकारियों ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम के बाद दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन नेतृत्व के स्तर पर काफ़ी कमजोर हुआ है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है।

पुलिस को उम्मीद है कि इस कदम के बाद अन्य सक्रिय कैडर भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कुछ माओवादी छोटे-छोटे समूहों में अब भी सक्रिय हैं। 

क्या है दंडकारण्य का महत्व?

दंडकारण्य क्षेत्र लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का प्रमुख गढ़ माना जाता रहा है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में फैला यह क्षेत्र सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व स्तर पर इस तरह के आत्मसमर्पण से संगठन की रणनीतिक क्षमता पर असर पड़ सकता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

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