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"दोषी शिक्षकों पर हो कार्रवाई, बंद हो स्कूल"... दुष्कर्म मामले को लेकर सड़क पर उतरा सेन समाज


TODAY
छत्तीसगढ़  /  
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक निजी स्कूल (सेंट जेवियर स्कूल) की नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले को लेकर सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया है.

मंगलवार को 'सर्व सेन समाज छत्तीसगढ़' के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय (कलेक्ट्रेट) का घेराव किया. प्रदर्शनकारियों ने इस घटना के मुख्य अभियुक्त को कड़ी सज़ा देने और मामले में लापरवाही बरतने वाले स्कूल प्रबंधन के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की है.

कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन, स्कूल बंद करने की मांग

प्रदर्शन के दौरान सर्व सेन समाज के प्रांताध्यक्ष त्रिलोक चंद्र श्रीवास के नेतृत्व में प्रभारी कलेक्टर को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया.

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • कड़ी सज़ा: नाबालिग छात्रा का एक साल तक कथित तौर पर यौन शोषण करने वाले अभियुक्त शिक्षक को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए.

  • सह-आरोपियों पर कार्रवाई: घटना की जानकारी होने के बावजूद इसे छिपाने और चुप्पी साधे रखने वाले स्कूल के अन्य दोषी शिक्षकों व कर्मचारियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज़ कर कार्रवाई हो.

  • संस्थान पर कार्रवाई: नियमों की अनदेखी और छात्राओं की सुरक्षा में बड़ी चूक को देखते हुए सेंट जेवियर स्कूल (सिरगिट्टी) का संचालन तुरंत बंद किया जाए.

10 दिनों के भीतर आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के बाद सेन समाज के प्रांताध्यक्ष त्रिलोक चंद्र श्रीवास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि संबंधित संस्थान और मामले में संलिप्त अन्य ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ 10 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा.

इस कलेक्ट्रेट घेराव में सेन समाज के संभागीय व ज़िला पदाधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय कांग्रेस नेता महेश दुबे और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए.

प्रभारी कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है. बिलासपुर के प्रभारी कलेक्टर ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को तत्काल निर्देश जारी किए हैं. अधिकारियों को पूरे मामले की गहराई से जांच करने और दोषियों के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द वैधानिक क़ानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है. 


दरगाहों में डीजे और धूमाल पर बैन... हाईकोर्ट ने वक़्फ़ बोर्ड के इस आदेश पर लगाई रोक

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने राज्य वक़्फ़ बोर्ड के उस आदेश पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है, जिसमें प्रदेश की दरगाहों, उर्स और मज़हबी जलसों में डीजे (DJ) और नाच-गाने पर पाबंदी लगाई गई थी.

जस्टिस ए.के. प्रसाद की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वक़्फ़ बोर्ड के जून 2026 में जारी किए गए आदेश पर रोक लगा दी है. इस फ़ैसले को उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है जो वक़्फ़ बोर्ड के इस नए नियम का विरोध कर रहे थे.

क्या था वक़्फ़ बोर्ड का आदेश?

जून 2026 में छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने एक नया दिशानिर्देश जारी किया था.

इस आदेश के तहत प्रदेश भर की दरगाहों और धार्मिक जलसों में डीजे, धूमाल के इस्तेमाल और नाच-गाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था. बोर्ड ने इस फ़ैसले को सख़्ती से लागू करने के लिए यह भी प्रावधान किया था कि जो भी व्यक्ति या समिति इन नियमों का उल्लंघन करेगी, उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. जानकारी के मुताबिक़, वक़्फ़ बोर्ड ने चंदे (दान) से जुड़े कुछ नियमों को आधार बनाकर यह नया आदेश जारी किया था. 

हाईकोर्ट में दी गई चुनौती

वक़्फ़ बोर्ड के इस आदेश के बाद समाज के एक तबक़े में काफ़ी नाराज़गी थी और इसे धार्मिक आयोजनों के पारंपरिक तरीक़े में दख़ल माना जा रहा था.

इसके ख़िलाफ़ 'सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड' के सदस्य फ़िरोज़ शाह अहमद ने बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से उनके वकील देवेंद्र प्रताप ने दलीलें पेश कीं.

याचिकाकर्ता के वकील का तर्क था कि वक़्फ़ बोर्ड का यह फ़ैसला अधिकार क्षेत्र से बाहर और नियमों के ख़िलाफ़ है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस ए.के. प्रसाद ने वक़्फ़ बोर्ड के दिशा-निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से रोक (स्टे) लगा दी है. अब इस मामले में आगे की क़ानूनी सुनवाई होगी. 

सेंट्रल जेल में 'मर्डर': सोते हुए क़ैदी को नाली के पत्थर से कुचला

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की बिलासपुर सेंट्रल जेल में मंगलवार सुबह एक क़ैदी ने दूसरे क़ैदी की कथित तौर पर पत्थर से हमला कर हत्या कर दी है.

जेल प्रशासन के मुताबिक़, गंभीर रूप से घायल क़ैदी को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद जेल परिसर की सुरक्षा और क़ैदियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

पुलिस और जेल प्रशासन के आला अधिकारी मौक़े पर पहुंच गए हैं और मामले की जांच की जा रही है.

कैसे हुई घटना?

शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार सुबह एक बैरक (Ward) के भीतर हुई. उस वक़्त कुछ क़ैदी लूडो खेल रहे थे, जबकि पीड़ित क़ैदी सो रहा था.

अधिकारियों का कहना है कि इसी दौरान एक अन्य सज़ायाफ़्ता (दोषी) क़ैदी ने नाली ढंकने के लिए रखे गए एक भारी पत्थर को उठाया और सो रहे क़ैदी के सिर पर जानलेवा हमला कर दिया.

हमले में पीड़ित क़ैदी गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो गया. घटना की भनक लगते ही जेल कर्मचारी मौक़े पर पहुंचे और उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.

जेल अधीक्षक का क्या कहना है?

इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक की ओर इशारा किया है. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नाली को ढंकने वाला वह भारी पत्थर क़ैदियों की पहुंच में कैसे था और ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को इस हमले की भनक समय पर क्यों नहीं लगी.

बिलासपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक खोमेश मंडावी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस मौक़े पर मौजूद है और मामले की सघन जांच कर रही है.

जेल अधीक्षक ने कहा, "पुलिस ने मामला दर्ज़ कर लिया है. हत्या की मुख्य वजह और इससे जुड़े अन्य तथ्यों का ख़ुलासा पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा. मृतक और अभियुक्त की पहचान भी क़ानूनी प्रक्रिया के तहत बाद में सार्वजनिक की जाएगी."

फ़िलहाल, एहतियात के तौर पर जेल परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अभियुक्त क़ैदी को एक अलग बैरक में शिफ़्ट कर दिया गया है. पुलिस अभियुक्त से पूछताछ कर हत्या के कारणों (Motive) का पता लगाने की कोशिश कर रही है.

पहले कुत्ते पर किया ट्रायल, फिर एक-एक कर 8 लोगों को दी मौत... 'सीरियल किलिंग' का ख़ौफ़नाक सच

TODAY छत्तीसगढ़  / बलौदाबाज़ार ज़िले में पुलिस ने खर्वे गांव में हुई 8 ग्रामीणों की संदिग्ध मौत के मामले को सुलझाने का दावा किया है. पुलिस के मुताबिक़, ये मौतें स्वाभाविक नहीं थीं, बल्कि एक सुनियोजित साज़िश के तहत की गई कथित हत्याएं थीं.

कसडोल थाना पुलिस ने इस मामले में गांव के ही 46 वर्षीय रामसहाय जायसवाल को गिरफ़्तार किया है. पुलिस का कहना है कि अभियुक्त ने आपसी रंजिश, कर्ज़ माफ़ी और जादू-टोने के शक में इन सभी लोगों को शराब में 'सुहागा' (चूहा मारने वाला ज़हर) मिलाकर पिलाया था.

कैसे हुआ मामले का ख़ुलासा?

फरवरी 2026 से लेकर 14 मई तक खर्वे गांव में एक-एक कर 8 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. 6 जून को ग्रामीणों ने कसडोल के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) को एक आवेदन सौंपकर इन मौतों पर संदेह जताया था और रामसहाय जायसवाल पर शक ज़ाहिर किया था.

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की.

  • पुलिस ने दफ़नाए गए 7 लोगों के शवों को क़ब्र से बाहर निकाला और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए 'मेकाहारा' (रायपुर) भेजा. (एक मृतक का दाह-संस्कार हो चुका था).

  • मेडिकल टीम ने पोस्टमार्टम के बाद फोरेंसिक जांच के लिए शवों का डीएनए (DNA) और विसरा सुरक्षित (प्रिज़र्व) कर लिया.

  • जांच के दौरान पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से पता चला कि संदिग्ध रामसहाय ने गांव के ही एक व्यक्ति से चूहा मारने की दवा (सुहागा) ख़रीदी थी.

कुत्ते पर किया परीक्षण, फिर ग्रामीणों को पिलाया ज़हर

पुलिस के मुताबिक़, हिरासत में लेकर सख़्ती से पूछताछ करने पर अभियुक्त रामसहाय ने अपना जुर्म क़बूल कर लिया.

अधिकारियों ने बताया कि अभियुक्त ने सीधे इंसानों पर ज़हर का इस्तेमाल करने से पहले गांव के एक कुत्ते को यह ज़हर देकर उसका 'ट्रायल' किया था. कुत्ते की मौत के बाद जब उसे ज़हर के असर पर यक़ीन हो गया, तो उसने अपने विरोधियों और जिनसे उसकी रंजिश थी, उन्हें शराब में ज़हर मिलाकर पिलाना शुरू कर दिया. लगातार हो रही मौतों को सामान्य मौत समझा गया, जिससे अभियुक्त का हौसला बढ़ता गया.

पुलिस के मुताबिक़ 8 मृतकों का विवरण और हत्या का कथित कारण:

  • बुठालू (20 फ़रवरी 2026): चुनाव के समय हुए विवाद और सामाजिक स्तर पर गाली-गलौज का बदला लेने के लिए पहला शिकार बनाया गया.

  • बद्री (6 मार्च 2026): अभियुक्त को शराब के लिए परेशान करने और अक्सर गाली-गलौज करने के आरोप में हत्या.

  • छत्तूराम (12 मार्च 2026): अभियुक्त को शक था कि छत्तूराम उसकी पत्नी पर बुरी नीयत रखता था.

  • बुधराम (20 मार्च 2026): ज़मीन के लेन-देन और पुरानी सामाजिक रंजिश के चलते हत्या (परिजनों ने इसका दाह-संस्कार कर दिया था).

  • विनोद कुमार (31 मार्च 2026): लगातार गाली-गलौज करने का आरोप. ज़हरीली शराब पीने के बाद कसडोल अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई.

  • गजानंद (28 अप्रैल 2026): अभियुक्त को शक था कि गजानंद उस पर जादू-टोना (बैगा-गुनिया) करता था, जिसके कारण वह कर्ज़ मुक्त नहीं हो पा रहा है.

  • चैतूराम (29 अप्रैल 2026): अभियुक्त ने चैतूराम से 50,000 रुपये का कर्ज़ लिया था. ब्याज़ और कर्ज़ चुकाने से बचने के लिए उसकी हत्या कर दी.

  • महेतरू राम (14 मई 2026): साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान हुई मारपीट और विवाद का बदला लेने के लिए हत्या.

जानलेवा हमले का एक और मामला पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अभियुक्त ने 14 अप्रैल 2026 को कार्तिक नाम के एक ग्रामीण को भी सुहागा मिली शराब पिलाई थी. हालांकि, तबीयत बिगड़ने पर उसे समय पर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जिससे उसकी जान बच गई.

पुलिस ने अभियुक्त रामसहाय जायसवाल के ख़िलाफ़ हत्या के 8 और हत्या के प्रयास (जानलेवा हमले) का एक मामला दर्ज़ किया है. पुलिस इस मामले में आगे की क़ानूनी कार्रवाई कर रही है. 

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के 3 बड़े फ़ैसले: गांवों में मिलेगा 125 दिन का रोज़गार, कृषि अवशेषों से बनेगी 'बायोगैस'

छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट बैठक में ग्रामीण विकास, रोज़गार और स्वच्छ ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) से जुड़ी तीन अहम योजनाओं को मंज़ूरी दी गई है.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में हुई इस बैठक में मुख्य रूप से ग्रामीण रोज़गार गारंटी, स्थानीय बाज़ार (हाट) के विकास और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी नीतियों पर मुहर लगाई गई.

सरकारी जानकारी के अनुसार, कैबिनेट द्वारा लिए गए तीन प्रमुख फ़ैसले इस प्रकार हैं:

1. 125 दिनों के रोज़गार की गारंटी (VB-G RAM Ji योजना)

कैबिनेट ने ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी 'वीबी-जी राम जी' योजना के प्रारूप को आधिकारिक तौर पर मंज़ूरी दे दी है.

  • प्रावधान: इस योजना के तहत राज्य के पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का अकुशल (Unskilled) रोज़गार उपलब्ध कराया जाएगा.

  • बजट और कार्य: इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में चार हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस योजना के तहत मुख्य रूप से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे कार्य कराए जाएंगे.

2. 'अटल आजीविका समृद्धि हाट' योजना

ग्रामीण इलाक़ों में स्थानीय रोज़गार और कारोबार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने एक नई 'हाट' योजना शुरू करने का फ़ैसला किया है.

  • योजना का मक़सद: इसके तहत गांवों में हथकरघा, सिलाई-बुनाई, हस्तशिल्प, फ़ूड प्रोसेसिंग, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज और डिजिटल सेवा व विपणन केंद्र स्थापित किए जाएंगे.

  • बाज़ार की व्यवस्था: सरकार के मुताबिक़, इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का एक मज़बूत नेटवर्क तैयार करना है, ताकि ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाज़ार मिल सके.

3. छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026

राज्य में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने 'कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026' को भी मंज़ूरी दी है.

  • क्या है नीति: इस नीति के तहत खेतों में बचने वाले कृषि अवशेष (पराली आदि), मवेशियों के अपशिष्ट और शहरी इलाक़ों के ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीक़े से इस्तेमाल किया जाएगा.

  • फ़ायदे: इस अपशिष्ट को प्रसंस्कृत (Process) कर उसे कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में बदला जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, इस क़दम से बेहतर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण इलाक़ों में निवेश और रोज़गार के नए मौक़े पैदा होंगे.

3 लाख की कथित घूस का ऑडियो और रोती हुई महापौर... एक 'मीना बाज़ार' ने कैसे गरमा दी राजनीति ?

TODAY छत्तीसगढ़  /  उत्तरी छत्तीसगढ़ की सियासत का पारा अचानक पिछले कुछ घंटो से गर्म है, वजह है एक आडियो का सोशल मीडिया में वायरल होना। 'मीना बाज़ार' लगाने की अनुमति के बदले तीन लाख रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय राजनीति में चर्चा का बाज़ार लगातार सवाल-जवाब से घिरा हुआ है। 

इस मामले में निशाने पर आईं महापौर मंजूषा भगत ने इस ऑडियो को पूरी तरह से फ़र्ज़ी बताते हुए अजाक (AJAK) थाने में शिकायत दर्ज़ कराई है. उन्होंने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ साज़िश रचने और छवि धूमिल करने के आरोप में एफ़आईआर (FIR) दर्ज़ करने की मांग की है.

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप सामने आई, जिसमें कथित तौर पर मीना बाज़ार के आयोजन की अनुमति के लिए पैसों के लेन-देन की बात सुनी जा सकती है. विपक्षी दलों का दावा है कि इस ऑडियो में आवाज़ स्थानीय महापौर की है.

दूसरी ओर, विवाद बढ़ने के बाद महापौर मंजूषा भगत ने ख़ुद सामने आकर इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन किया है. पत्रकारों से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए उन्होंने इस पूरी घटना को अपने ख़िलाफ़ रची गई एक राजनीतिक साज़िश क़रार दिया.

'मैं आदिवासी महिला हूं, इसलिए हो रहा है षड्यंत्र'

अपना पक्ष रखते हुए महापौर ने बताया कि 21 जून की शाम उन्हें किसी ने फ़ोन पर इस ऑडियो के वायरल होने की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसे सुना. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑडियो में उनकी आवाज़ नहीं है और उन्होंने कभी ऐसी कोई बात नहीं की है.

महापौर ने कहा, "मैं अब तक पांच बार चुनाव लड़ चुकी हूं, लेकिन मेरे राजनीतिक करियर में ऐसा षड्यंत्र पहली बार हुआ है. मैं एक आदिवासी महिला हूं, शायद इसीलिए मेरे साथ इस तरह की साज़िश की जा रही है." 

परिवार के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर जताई चिंता

कथित ऑडियो के वायरल होने के बाद से महापौर और उनका परिवार काफ़ी दबाव में है. उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव के कारण वह पिछले कई दिनों से ठीक से खाना-पीना भी नहीं कर पा रही हैं.

प्रशासन को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, "मेरे पति और पिता पहले से ही बीमार हैं. अगर इस मानसिक प्रताड़ना के कारण उन्हें या मुझे कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी यह फ़र्ज़ी ऑडियो वायरल करने वाले संबंधित व्यक्तियों की होगी."

सड़क पर उतरा विपक्ष, स्पीकर पर बजाया ऑडियो

कथित ऑडियो के सामने आने के बाद सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

विपक्षी दलों को इस मामले से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल गया है. उन्होंने प्रशासन से तत्काल एफ़आईआर दर्ज़ कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है. इसी क्रम में युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट चौक पर उग्र विरोध-प्रदर्शन किया और सड़क पर स्पीकर लगाकर उस कथित वायरल ऑडियो को सार्वजनिक रूप से बजाकर अपना विरोध दर्ज़ कराया.

फ़िलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाक़ी है.

120 बच्चे, एक शिक्षक और 3 साल का इंतज़ार... इस सरकारी स्कूल में कैसे पढ़ेंगे बच्चे?

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षा के दावों पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है. तखतपुर विकासखंड के चितावर गांव की एक पूर्व माध्यमिक शाला (मिडिल स्कूल) पिछले तीन सालों से महज़ एक शिक्षक के भरोसे चल रही है.

आश्चर्य की बात यह है कि इस स्कूल में क़रीब 120 बच्चे नामांकित हैं, जिनकी पढ़ाई और मूल्यांकन की पूरी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ इसी एक शिक्षक के कंधों पर है.

क्या है पूरा मामला?

चितावर गांव के ग्रामीणों और पंचायत के मुताबिक़, पिछले तीन सालों से स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी है. एक ही शिक्षक होने के कारण सभी कक्षाओं को एक साथ संभालना पड़ता है, जिससे न तो बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो पाता है और न ही उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति तब है, जब सरकार की ओर से नई शिक्षा नीति, डिजिटल क्लासरूम और स्मार्ट एजुकेशन को लेकर लगातार ज़ोर दिया जा रहा है. 

कलेक्टर को लिखा गया पत्र, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप

मामले के समाधान के लिए ग्राम पंचायत चितावर की सरपंच इंद्राणी देवी सिंगरौल ने अब ज़िले के कलेक्टर को एक आधिकारिक पत्र लिखा है, जिसमें तत्काल नए शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गई है.

पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को पहले भी कई बार इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं.

ग्रामीणों ने दी 'चक्का जाम' की चेतावनी

नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. इस प्रशासनिक लेटलतीफ़ी से अभिभावकों और गांव वालों में काफ़ी नाराज़गी है.

पंचायत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्रामीण अंचल के बच्चों का भविष्य इस तरह दांव पर नहीं लगाया जा सकता. यदि प्रशासन ने जल्द ही स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की, तो गांव वाले सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और 'चक्का जाम' करने को मजबूर होंगे.

फ़िलहाल प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है.

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