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SSP शशि मोहन सिंह को राष्ट्रपति पुलिस पदक, CM साय ने किया सम्मानित

रायगढ़ ।  TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

छत्तीसगढ़ पुलिस के 11 अधिकारियों और कर्मचारियों को इस वर्ष राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए चुना गया था। इनमें शशि मोहन सिंह का नाम सराहनीय सेवा के लिए शामिल था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री के हाथों पदक मिलने के बाद रायगढ़ पुलिस में खुशी और गर्व का माहौल है।

शशि मोहन सिंह ने वर्ष 1997 में राज्य पुलिस सेवा में चयन के साथ अपने पुलिस करियर की शुरुआत की। उन्होंने मध्य प्रदेश के होशंगाबाद, इटारसी और भोपाल समेत कई स्थानों पर सेवाएं दीं।

छत्तीसगढ़ बनने के बाद उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में 2012 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी के रूप में उन्होंने मैदानी जिलों के साथ-साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में भी पुलिसिंग की। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, आंतरिक सुरक्षा और जनसेवा से जुड़ी जिम्मेदारियों के दौरान उनके अनुभव और नेतृत्व को पुलिस सेवा में महत्वपूर्ण माना गया है।

शशि मोहन सिंह का एक रचनात्मक पक्ष भी है। पुलिस सेवा के अलावा उनकी रुचि अभिनय, कविता और लेखन में रही है।

रायगढ़ पुलिस के मुताबिक, उन्होंने इन माध्यमों का इस्तेमाल पुलिस और समाज के बीच संवाद बेहतर बनाने तथा संवेदनशील पुलिसिंग और सकारात्मक सामाजिक संदेशों को आगे बढ़ाने के लिए भी किया है।

राष्ट्रपति पुलिस पदक मिलने के बाद रायगढ़ पुलिस परिवार ने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों, सहकर्मियों तथा शुभचिंतकों ने एसएसपी शशि मोहन सिंह को बधाई दी है। 

यह सम्मान उनके लंबे पुलिस सेवाकाल में निभाई गई जिम्मेदारियों और सेवाओं की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।

गेट पर ताला फिर भी नहीं माने, खूंटाघाट वेस्टवियर के खतरनाक हिस्से में पहुंचे लोग

बिलासपुर । TODAY छत्तीसगढ़  / बारिश के मौसम में खूंटाघाट वेस्टवियर के तेज बहाव के बीच सेल्फी और वीडियो बनाने पहुंचे लोगों के खिलाफ रतनपुर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, वेस्टवियर पर पानी के तेज बहाव और खतरे को देखते हुए आम लोगों की सुरक्षा के लिए गेट पर ताला लगाया गया था, लेकिन कुछ लोग गेट लांघकर प्रतिबंधित हिस्से में पहुंच गए।

रविवार को सामने आई तस्वीरों में कुछ लोग पानी के तेज बहाव के बेहद करीब खड़े होकर सेल्फी और वीडियो बनाते दिखाई दिए। पुलिस के मुताबिक, कुछ लोग अपने परिवार, बच्चों और महिलाओं के साथ भी इस खतरनाक स्थान तक पहुंच गए थे।

जानकारी मिलने के बाद रतनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और गेट पार कर अंदर गए लोगों को बाहर निकाला। पुलिस ने उन्हें फटकार लगाते हुए समझाया कि गहरे पानी और तेज बहाव वाले स्थानों के करीब जाना जानलेवा हो सकता है।

पुलिस ने लोगों से कहा कि सोशल मीडिया के लिए रील या सेल्फी बनाने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में न डालें। लापरवाही करने वाले कुछ लोगों को मौके पर उठक-बैठक कराकर चेतावनी भी दी गई।

पुलिस के मुताबिक, बारिश के दौरान नदी, नाले, डैम और वेस्टवियर में अचानक पानी का बहाव बढ़ सकता है। ऐसे स्थानों पर पानी की गहराई और बहाव का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। इसलिए सुरक्षा के लिए लगाए गए गेट और बैरिकेड को पार करना जोखिम भरा हो सकता है। रतनपुर पुलिस ने कहा कि खूंटाघाट समेत क्षेत्र के नदी-नालों, डैम और वेस्टवियर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान तेज बहाव और गहरे पानी वाले स्थानों से दूरी बनाए रखें। खासकर बच्चों और परिवार के साथ ऐसे स्थानों पर जाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।

पुलिस का संदेश है कि सेल्फी और रील जिंदगी से बड़ी नहीं हैं। कुछ सेकंड का वीडियो बनाने के लिए जान जोखिम में डालना भारी पड़ सकता है। 


‘अटल जी के दूरदर्शी नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ को नई पहचान दी’: मुख्यमंत्री साय

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री निवास परिसर में अटल जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में वाजपेयी की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस मौके पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी छत्तीसगढ़ के निर्माता थे और प्रदेश के लोगों की अलग राज्य की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा को उन्होंने समझा। प्रधानमंत्री रहते हुए उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला प्रदेश के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपनी व्यक्तिगत स्मृतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें अटल जी का स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का अवसर मिला था।

साय के मुताबिक, अटल जी का छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों के साथ आत्मीय संबंध था। उनका स्नेह और मार्गदर्शन आज भी जनसेवा के लिए प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि कवि, पत्रकार और प्रभावशाली वक्ता भी थे। उनके मुताबिक, अटल जी की पहचान ऐसे नेता के तौर पर रही जिन्हें राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विभिन्न दलों और वर्गों में सम्मान मिला।

साय ने कहा कि वैचारिक दृढ़ता के साथ विनम्रता, संवेदनशीलता और संवाद अटल जी के सार्वजनिक जीवन की प्रमुख विशेषताएं थीं। उनके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था।

मुख्यमंत्री ने अटल सरकार की योजनाओं और नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुशासन और अंत्योदय उनके शासन की प्रमुख अवधारणाएं थीं।

उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को ग्रामीण भारत के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके मुताबिक, गांवों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिली।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अटल सरकार के दौरान पृथक जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो जनजातीय समाज के विकास और उनकी आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस छत्तीसगढ़ की नींव रखी, उसे समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर बनाना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन और अंत्योदय की भावना के साथ गांव, गरीब, किसान, युवा, महिला और जनजातीय समाज तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी का जीवन और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। उनके सपनों के अनुरूप विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

तिरंगे को सलामी, 17 प्लाटूनों की कदमताल और महिला बैंड की धुन— दिखा देशभक्ति का रंग

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में शनिवार को स्वतंत्रता दिवस का 80वां पर्व हर्षोल्लास और गरिमामय माहौल में मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुबह 9 बजे ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों के नाम अपना संदेश भी पढ़ा।

समारोह में अलग-अलग सुरक्षा बलों और संस्थानों की 17 प्लाटूनों ने मार्च पास्ट किया। परेड का नेतृत्व आईपीएस अधिकारी विमल कुमार पाठक ने किया, जबकि परेड-टू-आईसी निशांत गौरव कुर्रे थे।

बिहार पुलिस की टुकड़ी भी हुई शामिल

इस वर्ष आमंत्रित वर्ग में बिहार पुलिस की टुकड़ी ने भी परेड में हिस्सा लिया। इसके अलावा मार्च पास्ट में सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सशस्त्र सीमा बल (SSB), छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की पुरुष और महिला टुकड़ियां, छत्तीसगढ़ पुलिस, जेल पुलिस, नगर सेना, एनसीसी के बालक-बालिका दल, बैंड प्लाटून, घुड़सवार दल और डॉग स्क्वॉड शामिल रहे। महिला बैगपाइपर बैंड ने भी समारोह में विशेष प्रस्तुति दी।

केंद्रीय बलों में ITBP अव्वल

परेड के प्रदर्शन के आधार पर केंद्रीय बलों की श्रेणी में आईटीबीपी की टुकड़ी ने पहला स्थान हासिल किया। विजेता दल को मुख्यमंत्री ने 5 हजार रुपये और ट्रॉफी प्रदान की। बीएसएफ दूसरे और सीआरपीएफ तीसरे स्थान पर रहा। बीएसएफ को 3 हजार रुपये और ट्रॉफी, जबकि सीआरपीएफ को 2 हजार रुपये और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।

राज्य बलों में महिला दल ने मारी बाजी

राज्य बलों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (महिला) की टुकड़ी पहले स्थान पर रही। उसे 5 हजार रुपये और ट्रॉफी प्रदान की गई। छत्तीसगढ़ जेल पुलिस दूसरे और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (पुरुष) तीसरे स्थान पर रहे। दोनों दलों को क्रमशः 3 हजार और 2 हजार रुपये तथा ट्रॉफी प्रदान की गई।

NCC गर्ल्स ने भी हासिल किया पहला स्थान

कंटीजेंट एनसीसी वर्ग में एनसीसी गर्ल्स ने पहला और एनसीसी बॉयज ने दूसरा स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री ने दोनों दलों के कमांडरों को ट्रॉफी देकर प्रोत्साहित किया। समारोह के दौरान परेड-टू-आईसी निशांत गौरव कुर्रे, परेड कमांडर विमल कुमार पाठक, महिला बैगपाइपर दल की कमांडर सोनबती ठाकुर, घुड़सवार दल के कमांडर अनिल यादव और श्वान दल के कमांडर राज कपूर को भी प्रशस्ति पत्र दिए गए। परेड प्रस्तुतियों में योगदान के लिए डॉ. अनुराधा दुबे और मनीष परमानंद को भी सम्मानित किया गया।

धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, 13 प्लाटूनों ने किया परेड प्रदर्शन

बिलासपुर । TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में शनिवार को देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस गरिमामय और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्यमंत्री तोखन साहू ने मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और पुलिस, नगर सेना तथा एनसीसी की 13 प्लाटूनों ने आकर्षक परेड का प्रदर्शन किया।

समारोह में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडे, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, संभागायुक्त सुनील जैन, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह और सीसीएफ मनोज पांडे समेत जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। 

मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा गया

ध्वजारोहण के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का प्रदेशवासियों के नाम संदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और राज्य में विकास एवं जनकल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।

तिरंगा और नशामुक्ति की शपथ

समारोह के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को तिरंगा शपथ दिलाई। वहीं ब्रह्मकुमारी दीदी ने लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। इस दौरान राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने और नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया गया।

शहीद जवानों के परिजनों का सम्मान

समारोह का एक भावुक क्षण तब आया, जब नक्सल हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को केंद्रीय राज्यमंत्री ने सम्मानित किया। इस दौरान लोगों ने शहीद जवानों के बलिदान को नमन किया।

इसके अलावा सरकारी कार्यों और अपने दायित्वों का उत्कृष्ट निर्वहन करने वाले विभिन्न विभागों के 50 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

महिला प्लाटून ने परेड में बाजी मारी

परेड प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में जिला पुलिस बल महिला प्लाटून ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि नगर सेना महिला दूसरे स्थान पर रही।

जूनियर वर्ग में एनसीसी जूनियर डिवीजन बिलासपुर ने पहला, एनसीसी सीनियर गर्ल्स ने दूसरा और एनसीसी सीनियर बॉयज ने तीसरा स्थान हासिल किया।

देशभक्ति गीतों और प्रस्तुतियों ने बांधा समां

समारोह में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला को पहला, एलसीआईटी बोदरी को दूसरा और दिल्ली पब्लिक स्कूल को तीसरा स्थान मिला। नेशनल कॉन्वेंट स्कूल और पद्माक्षी स्कूल को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

कार्यक्रम में सुश्री कनक साहू ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन सौरभ सक्सेना और मुकुल शर्मा ने किया।  


कैमरे की कलम: इंटरव्यू में ईमानदारी, कुर्सी पर सौदेबाजी?

पुराना वीडियो, नए आरोप और एक असहज सवाल—क्या सिविल सेवा में प्रवेश के समय बोले गए आदर्श सरकारी कुर्सी तक पहुंचते-पहुंचते रास्ता भूल जाते हैं?

सिविल सेवा की परीक्षा पास करने वाले युवाओं से जब पूछा जाता है कि वे आईएएस, आईपीएस क्यों बनना चाहते हैं, तो जवाबों में अक्सर देश सेवा, भ्रष्टाचार से लड़ाई, कमजोर तबकों की मदद और शासन व्यवस्था में सुधार जैसे बड़े-बड़े शब्द सुनाई देते हैं। सुनने वाले को कुछ क्षणों के लिए लगता है कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था का कायाकल्प बस अब होने ही वाला है। फिर वही युवा अधिकारी बनते हैं। फाइलें आती हैं, सरकारी गाड़ियां आती हैं, लालफीताशाही आती है, पद आता है, अधिकार आता है और कभी-कभी—आरोप भी आते हैं। 

UPSC में 377वीं रैंक, इंटरव्यू में 138 अंक और फिर पुलिस सेवा की कुर्सी—आज वही राहुल बंसल भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में हैं। आरोप साबित होना बाकी है, लेकिन एक पुराना सवाल फिर सामने है: सिविल सेवा में नैतिकता पढ़ाई जाती है या निभाई भी जाती है? कभी-कभी किसी सरकारी अधिकारी की कहानी इतनी तेजी से करवट लेती है कि लगता है, सरकारी फाइल से ज्यादा तेज तो जिंदगी की टिप्पणी चल रही है। आईपीएस राहुल बंसल की कहानी भी फिलहाल कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है।

साल 2021 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 377वीं रैंक। कुल 939 अंक। पर्सनैलिटी टेस्ट में 275 में से 138 अंक। पांचवें प्रयास में सफलता। फिर भारतीय पुलिस सेवा। छत्तीसगढ़ कैडर। एक युवा के लिए इससे ज्यादा प्रेरक कहानी क्या होगी? चार प्रयासों में असफलता के बाद पांचवें प्रयास में सफलता। मैथ्स जैसे विषय में मजबूत प्रदर्शन। संघर्ष के बाद चयन और फिर वह सरकारी वर्दी, जिसे देखकर आम आदमी उम्मीद करता है कि अब कानून थोड़ा और मजबूत होगा लेकिन कुछ साल बाद यही नाम एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के मामले में चर्चा में है। यही वह जगह है जहां कहानी अचानक प्रेरक कथा से व्यंग्य में बदल जाती है। हालांकि सबसे पहले जरूरी सावधानी।

राहुल बंसल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। आरोपों की जांच चल रही है। किसी आरोप को अदालत में सिद्ध हुए अपराध के बराबर मान लेना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इसलिए अभी यह कहना गलत होगा कि उन्होंने रिश्वत ली ही थी। अदालत और जांच एजेंसियों को तथ्य सामने रखने होंगे लेकिन सवाल पूछना तो लोकतंत्र का काम है और इस मामले में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एक करोड़ रुपये का आरोप सही है या गलत।

सवाल यह भी है कि जिस व्यवस्था में प्रवेश करने वाले युवाओं से ईमानदारी, नैतिकता और जनसेवा की अपेक्षा की जाती है, उस व्यवस्था में कुछ ही वर्षों बाद भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप सामने कैसे आ जाते हैं?

छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल से जुड़ा मामला इसी विरोधाभास को लेकर इन दिनों चर्चा में है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की जांच जारी है और आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। लेकिन इस बीच उनके सिविल सेवा की तैयारी के दिनों का एक पुराना मॉक इंटरव्यू वीडियो फिर सोशल मीडिया पर घूम रहा है और इस वीडियो ने विवाद को एक अजीब नैतिक मोड़ दे दिया है, क्योंकि वीडियो में वही अधिकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलते दिखाई देते हैं।

मामला सिर्फ इतना नहीं कि उन्होंने भ्रष्टाचार के विरोध में कोई सामान्य बात कही थी। उन्होंने अपने परिवार से जुड़ा एक अनुभव सुनाया था। उनके मुताबिक, उनके भाई आईआईटी कानपुर में पढ़ते थे और अमेरिका में रिसर्च पेपर पेश करने के लिए वीजा आवेदन हेतु जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत थी। जल्दी दस्तावेज हासिल करने के लिए पंचायत अधिकारी ने कथित तौर पर 500 रुपये मांगे थे। आईपीएस बंसल ने उस समय कहा था कि 500 रुपये की रिश्वत देने से उन्हें बहुत बुरा लगा। वाकई, 500 रुपये की रिश्वत बुरी चीज है।

इतनी बुरी कि उस पर मॉक इंटरव्यू में बात की जा सकती है, व्यवस्था की खामियों पर चिंता जताई जा सकती है और यह सवाल उठाया जा सकता है कि आखिर एक नागरिक को अपने ही अधिकार का दस्तावेज पाने के लिए पैसे क्यों देने पड़ें लेकिन आज वही वीडियो इसलिए वायरल है क्योंकि बंसल पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत स्वीकार करने के आरोपों ने पुराने शब्दों को एक नए संदर्भ में ला खड़ा किया है। यही सवाल सोशल मीडिया पूछ रहा है। हालांकि सोशल मीडिया का न्यायालय अक्सर बहुत तेज चलता है। वहां एफआईआर फैसला बन जाती है, आरोप सजा और वायरल वीडियो चरित्र प्रमाणपत्र। इसलिए वहां चल रही बहस को अंतिम सत्य मानना भी उतना ही खतरनाक है। फिर भी, सवाल को खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे प्रभावशाली भाषण वही होता है जिसे बोलने वाला अपने आचरण से साबित करे।

सिविल सेवा में नैतिकता का मतलब सिर्फ यह नहीं कि अधिकारी भ्रष्टाचार पर भाषण दे सकता है। असली परीक्षा तब होती है जब उसके सामने अधिकार हो, पैसा हो, दबाव हो और यह भरोसा हो कि शायद कोई देख नहीं रहा।  मॉक इंटरव्यू के कमरे में ईमानदारी कहना आसान है। सरकारी कमरे में ईमानदार रहना मुश्किल और शायद यही भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक है।

सिविल सेवा की तैयारी के दौरान अभ्यर्थी से पूछा जाता है—“आप व्यवस्था में क्या सुधार करेंगे?” नौकरी मिलने के बाद नागरिक पूछता है—“साहब, मेरा काम कब होगा?” पहले सवाल का उत्तर होता है—“पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाऊंगा।” दूसरे का उत्तर कई बार होता है—“फाइल देखनी पड़ेगी।” और फाइल शायद इसलिए भी नहीं चलती क्योंकि वह अकेली चलना नहीं जानती। उसे कभी-कभी किसी ‘प्रोत्साहन’ की जरूरत पड़ती है। यहीं से व्यवस्था और व्यक्ति के बीच की कहानी शुरू होती है।

अगर आईपीएस बंसल के खिलाफ लगे आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो सवाल केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगा। तब यह सवाल भी पूछा जाएगा कि जिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार से लड़ने की शपथ लेकर अधिकारी आते हैं, वही व्यवस्था उन्हें भ्रष्टाचार का हिस्सा बनने की गुंजाइश कैसे देती है? और अगर आरोप साबित नहीं होते, तब भी यह पूरा प्रकरण एक दूसरी समस्या सामने रखेगा—सार्वजनिक जीवन में विश्वास कितनी तेजी से टूटता है।

एक आम नागरिक के लिए आईएएस,आईपीएस अधिकारी कोई सामान्य सरकारी कर्मचारी नहीं होता। वह राज्य की शक्ति का चेहरा होता है। उसके हस्ताक्षर से फाइल आगे बढ़ सकती है, रुक सकती है, किसी को राहत मिल सकती है और किसी का काम वर्षों तक अटक सकता है। इसलिए नागरिक अधिकारी से केवल दक्षता नहीं चाहता। वह उससे चरित्र की उम्मीद भी करता है। यही कारण है कि किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप आम नागरिक को अधिक निराश करता है क्योंकि यहां निराशा सिर्फ पैसों की नहीं होती। यह उस भरोसे की होती है जो संविधान, प्रशासन और सार्वजनिक संस्थाओं के बीच नागरिक को जोड़ता है। 

मॉक इंटरव्यू में बंसल ने व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अक्षमता की बात की थी। यह बात गलत नहीं है। भारत में भ्रष्टाचार को केवल व्यक्तिगत लालच से समझना अधूरा होगा। प्रक्रियाओं की जटिलता, विवेकाधिकार, कमजोर निगरानी, राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव, धीमी शिकायत व्यवस्था और जवाबदेही की कमी—ये सभी इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं लेकिन एक अधिकारी यदि यह कहकर बच निकलना चाहे कि “व्यवस्था ही खराब है”, तो यह तर्क खतरनाक होगा क्योंकि व्यवस्था कोई एलियन नहीं है। व्यवस्था हमसे बनती है। फाइल पर हस्ताक्षर करने वाला भी व्यवस्था है। आदेश जारी करने वाला भी व्यवस्था है। रिश्वत मांगने वाला भी व्यवस्था है। और रिश्वत रोकने वाला भी, जिस दिन हम भ्रष्टाचार को केवल “सिस्टम की समस्या” कहकर छोड़ देते हैं, उसी दिन भ्रष्टाचार को एक अनाथ बीमारी बना देते हैं—जिसका कोई जिम्मेदार नहीं।

शायद सिविल सेवा का सबसे महत्वपूर्ण इंटरव्यू यूपीएससी भवन में नहीं होता। वह उस दिन होता है जब अधिकारी के सामने कोई गरीब व्यक्ति अपनी फाइल लेकर खड़ा होता है। वह उस दिन होता है जब कोई ठेकेदार किसी सुविधा का प्रस्ताव लेकर आता है। वह उस दिन होता है जब ऊपर से दबाव आता है। वह उस दिन होता है जब कोई कर्मचारी कहता है—“साहब, यहां तो ऐसे ही चलता है" और वह उस दिन भी होता है जब अधिकारी के सामने यह विकल्प होता है कि वह नियम के रास्ते चले या उस रास्ते पर, जहां काम जल्दी होता है और सवाल देर से। यूपीएससी का इंटरव्यू कुछ घंटे का होता है। सरकारी कुर्सी का इंटरव्यू कई साल चलता है और उसका पैनल जनता होती है। इसलिए पुराने वीडियो का वायरल होना महज सोशल मीडिया की सनसनी नहीं है। यह उस असहज अंतर की ओर इशारा करता है जो सार्वजनिक जीवन में कही गई बातों और निभाई गई जिम्मेदारियों के बीच पैदा हो सकता है। 500 रुपये की रिश्वत पर दुख जताना तब सही था। अगर आज एक करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप सही साबित होते हैं, तो वह दुख और भी ज्यादा अर्थपूर्ण हो जाएगा—लेकिन एक कटु अर्थ में।

तब सवाल यह नहीं होगा कि पांच सौ रुपये गलत थे या एक करोड़। सवाल होगा कि क्या भ्रष्टाचार की नैतिकता रकम देखकर बदलती है? क्या 500 रुपये लेने वाला भ्रष्ट है, लेकिन एक करोड़ का सवाल आने पर हम पहले पूछते हैं कि “किसने पकड़ा?” क्या भ्रष्टाचार का विरोध तब तक आसान है जब तक रिश्वत किसी और ने ली हो? और क्या ईमानदारी का सबसे कठिन हिस्सा यह नहीं है कि जब अवसर आपके पास हो, तब भी आप उसे ठुकरा दें? इन सवालों के जवाब किसी वायरल वीडियो में नहीं मिलेंगे। न जांच एजेंसी के प्रेस नोट में। न सोशल मीडिया की भीड़ में। इनका जवाब उस जांच में मिलेगा जो निष्पक्ष हो, पारदर्शी हो और समय पर पूरी हो।

अगर आरोप गलत हैं तो अधिकारी को उसी मजबूती से निर्दोष साबित होने का अधिकार मिलना चाहिए, जिस मजबूती से आरोपों की जांच हो रही है और अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो फिर पुराना वीडियो केवल वायरल क्लिप नहीं रहेगा। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के नैतिक प्रशिक्षण और वास्तविक प्रशासनिक संस्कृति के बीच खड़ी एक विडंबना का दस्तावेज बन जाएगा क्योंकि भ्रष्टाचार पर सबसे सुंदर भाषण वही होता है, जिसे बोलने की जरूरत न पड़े। काम करने का तरीका ही भाषण बन जाए। शायद सिविल सेवा का असली सुधार भी वहीं से शुरू होगा—जहां अधिकारी को यह याद दिलाने की जरूरत न पड़े कि जनता की सेवा करनी है और नागरिक को यह डर न रहे कि अपना जन्म प्रमाण पत्र पाने के लिए उसे 500 रुपये देने पड़ेंगे या उससे भी ज्यादा बड़ी रकम। फर्क सिर्फ रकम का नहीं है। फर्क इस बात का है कि सरकारी कुर्सी पर बैठा व्यक्ति उस कुर्सी को सेवा का साधन मानता है या सौदे का और इस सवाल का जवाब किसी मॉक इंटरव्यू में नहीं, असली जिंदगी में देना पड़ता है।

तालाब किनारे जमा थी जुआरियों की महफिल, पुलिस ने मारी दबिश और पांच धराए

राजनांदगांव । TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले की मोहारा पुलिस ने ग्राम धारा में जुआ खेलने की सूचना पर कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को कथित तौर पर जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 27,275 रुपये नकद, पांच मोबाइल फोन, 52 पत्ती ताश और पांच मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2022 की धारा 3 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

तालाब के पास चल रहा था जुआ

पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त को मोहारा चौकी को सूचना मिली थी कि ग्राम धारा में सोसाइटी के पीछे तालाब के पास कुछ लोग जुआ खेल रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दबिश दी। पुलिस का दावा है कि वहां पांच लोग जुआ खेलते मिले, जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

नकदी के साथ पांच बाइक भी जब्त

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 27,275 रुपये की जुआ रकम, पांच मोबाइल फोन, 52 पत्ती ताश और एक बरदाना फट्टी जब्त की। इसके अलावा जुआ खेलने में इस्तेमाल की जा रही पांच मोटरसाइकिलों को भी जब्त किया गया है। गिरफ्तार लोगों की पहचान रामदेव वर्मा (30), उमेश जंघेल (33), प्रभुलाल चावड़ा (62), खेमलाल वर्मा (33) और लिकेश वर्मा (30) के रूप में हुई है। ये सभी राजनांदगांव जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले बताए गए हैं।

जुआ-सट्टे के खिलाफ अभियान जारी

पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई जुआ और सट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। अभियान पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। पुलिस ने कहा है कि जुआ, सट्टा और अन्य असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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