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आधी रात हाईवे पर क्रेटा की सनरूफ़ से निकलकर दिखा रहे थे 'स्वैग', पुलिस ने उतारा स्टंट का भूत

TODAY छत्तीसगढ़  /  चलती कार की सनरूफ़ (Sunroof) से बाहर निकलकर स्टंट करने और यातायात नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के आरोप में एक चालक के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है.

बिलासपुर जिले के चकरभाठा थाना पुलिस ने स्टंट में इस्तेमाल की गई क्रेटा (Creta) कार को ज़ब्त कर लिया है और वाहन चालक के ख़िलाफ़ मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicles Act) के तहत मामला दर्ज किया है.

चकरभाठा थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 21 जून की रात क़रीब 2 बजे से 3 बजे के बीच की है. आरोप है कि बिलासपुर-रायपुर हाईवे पर हिर्री माइंस के पास एक तेज़ रफ़्तार कार (CG 10 BE 4400) में कुछ युवक सफ़र कर रहे थे. इसी दौरान एक युवक कार की छत (सनरूफ़) से बाहर निकल गया और चलती गाड़ी में स्टंट करने लगा. पुलिस का कहना है कि यह कृत्य न केवल यातायात नियमों का गंभीर उल्लंघन था, बल्कि इससे ख़ुद की और हाईवे पर चल रहे अन्य लोगों की जान को भी ख़तरे में डाला गया.

पुलिस की कार्रवाई

घटना की रिपोर्ट और जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कार की पहचान की.

पुलिस टीम ने कार को ज़ब्त कर चकरभाठा थाने लाया और वाहन के 21 वर्षीय चालक प्रशांत जायसवाल (निवासी- पुराना बस स्टैंड, कोतवाली, बिलासपुर) को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़, पूछताछ में चालक ने ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन की बात स्वीकार की है. इसके बाद पुलिस ने ज़ब्त वाहन और चालक के ख़िलाफ़ मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई पूरी की है.

कोयले में मिलावट और चोरी का आरोपी आकाश सिंघल चढ़ा पुलिस के हत्थे

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में मस्तूरी पुलिस ने कोयले की खेप में मिलावट और हेराफेरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफ़ाश किया है.

पुलिस ने इस मामले में एक कोल डिपो संचालक, दो ट्रेलर मालिकों और एक चालक समेत कुल चार लोगों को गिरफ़्तार किया है. पुलिस के मुताबिक़, ये लोग खदान से निकलने वाले उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को रास्ते में उतार लेते थे और उसकी जगह गिट्टी मिला हुआ ख़राब कोयला प्लांट में सप्लाई करते थे.

इस कार्रवाई में पुलिस ने 30 टन कोयला, तीन ट्रेलर और मिलावट में इस्तेमाल होने वाली एक 'रोलर मशीन' ज़ब्त की है. सभी अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत (रिमांड) में जेल भेज दिया गया है.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सरकंडा के मोपका निवासी सत्यनारायण ने इस मामले की शिकायत दर्ज़ कराई थी. उन्होंने बताया कि 'राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड' प्लांट के लिए 15 जून 2026 को एसएम एंटरप्राइजेज़ के माध्यम से गेवरा कोल माइंस से 30,000 टन (G-11 ग्रेड) कोयले का ऑर्डर दिया गया था.

17 जून की रात क़रीब 2 बजे से सुबह 7 बजे के बीच कई ट्रेलरों से कोयला प्लांट में पहुंचा. लेकिन जब वहां तीन ट्रेलरों (CG 10 EC 5488, CG 10 BT 6138, CG 15 EG 5055) के कोयले की गुणवत्ता जांची गई, तो वह बेहद ख़राब और मिलावटी निकला.

आरोप है कि जब प्लांट के अधिकारियों ने इस बारे में ट्रेलरों के चालकों (जिया लाल कुमार, वीरेंद्र और जयकांत) से पूछताछ की, तो वे डरकर अपने वाहन वहीं छोड़कर मौक़े से भाग गए. इसके बाद पुलिस में आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज़ कराई गई.

रास्ते में कैसे होता था मिलावट का 'खेल'?

पुलिस ने जांच के दौरान सबसे पहले ट्रेलर चालक जयकांत यादव को पकड़ा. पूछताछ में उसने इस पूरे खेल का तरीक़ा (Modus Operandi) बताया.

पुलिस के मुताबिक़, ये लोग गेवरा माइंस से G-11 ग्रेड का अच्छी क्वालिटी वाला कोयला लोड करते थे. रास्ते में वे ट्रेलर को बेलतरा टोल प्लाज़ा के पास स्थित आकाश सिंघल के कोल डिपो में ले जाते थे. वहां अच्छा कोयला उतार लिया जाता था और उसकी जगह ट्रेलरों में गिट्टी मिक्स किया हुआ ख़राब कोयला भर दिया जाता था. इसके बदले डिपो संचालक आकाश सिंघल ट्रेलर मालिकों और चालकों को पैसे देता था, जिसे वे आपस में बांट लेते थे.

डिपो संचालक आकाश सिंघल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया है कि वह चोरी किए गए अच्छे कोयले को रोलर मशीन के ज़रिए अपने डिपो के कोयले में मिक्स कर देता था.

ज़ब्ती और गिरफ़्तार अभियुक्त

पुलिस ने इस गिरोह के चार लोगों को 21 और 22 जून को गिरफ़्तार कर अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है. मामले में निखिल साहू नाम के एक अन्य संदिग्ध का नाम भी सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है.

गिरफ़्तार अभियुक्त:

  1. आकाश सिंघल (41 वर्ष): कोल डिपो संचालक, निवासी- देवरीखुर्द, बिलासपुर.

  2. सुनीत यादव (23 वर्ष): वाहन (ट्रेलर) मालिक, निवासी- सरकंडा, बिलासपुर.

  3. सूरज सिंह (31 वर्ष): वाहन (ट्रेलर) मालिक, निवासी- गेवरा प्रोजेक्ट, दीपका, कोरबा.

  4. जयकांत यादव (38 वर्ष): ट्रेलर चालक, निवासी- मझिआंव, गढ़वा (झारखंड).

ज़ब्त सामग्री:

  • 30 टन कोयला

  • तीन ट्रेलर वाहन

  • कोयला मिक्स करने वाली एक रोलर मशीन

सुबह-सुबह नींद से उठे शहर के 'बदमाश', पुलिस का सबसे बड़ा क्रैकडाउन!

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस ने आदतन अपराधियों, 'चाकूबाज़ों' और निगरानीशुदा बदमाशों के ख़िलाफ़ एक बड़ा सघन अभियान चलाया है.

पुलिस के मुताबिक़, शहर में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के मक़सद से सभी थाना क्षेत्रों में एक साथ सुबह-सुबह छापेमारी की गई. इस दौरान संदिग्धों के घरों पर दबिश देकर उनकी गतिविधियों का सत्यापन (वेरिफ़िकेशन) किया गया और पूछताछ के लिए कुल 85 लोगों को हिरासत में लिया गया.

क्या है पुलिस की कार्रवाई का ब्योरा?

पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए 85 लोगों से पूछताछ के बाद उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए अलग-अलग कार्रवाई की गई है:

  • प्रतिबंधात्मक कार्रवाई: 56 आदतन गुंडे-बदमाशों के ख़िलाफ़ नए आपराधिक क़ानून 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 126 और 135(3) के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है.

  • जेल भेजे गए: 25 लोगों को BNSS की धारा 170 के तहत अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है.

  • आर्म्स एक्ट: अभियान के दौरान 4 लोगों के पास से अवैध रूप से रखे गए धारदार हथियार बरामद हुए हैं. इनके ख़िलाफ़ 'आर्म्स एक्ट' (शस्त्र अधिनियम) के तहत मामला दर्ज़ किया गया है.

'ज़िला बदर' की सख़्त चेतावनी

इस अभियान की निगरानी कर रहे उपमहानिरीक्षक (DIG) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने पकड़े गए सभी असामाजिक तत्वों को सख़्त हिदायत दी है.

पुलिस की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में ये लोग किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि, मारपीट, लोगों में डर पैदा करने या क़ानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करते पाए गए, तो उनके ख़िलाफ़ 'ज़िला बदर' (ज़िले की सीमा से बाहर निकालने) और अन्य कठोर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस की नागरिकों से अपील

बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ज़िले में अपराध, गुंडागर्दी और चाकूबाज़ी को किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. साथ ही, पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अगर उनके आस-पास ऐसे असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें. सूचना देने वाले नागरिक की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी.

छत्तीसगढ़ के जंगलों का 'हिडन जेम': इंसानी नज़रों से दूर रहने वाली दुर्लभ उड़न गिलहरी कैमरे में क़ैद

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी ज़िले में फैले उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में एक दुर्लभ 'इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल' (भारतीय उड़न गिलहरी) देखी गई है.

वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के मुताबिक़, इस दुर्लभ प्रजाति का नज़र आना इस बात का प्रमाण है कि रिज़र्व का वन पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) और जैव विविधता बेहद स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से समृद्ध है.

गश्त के दौरान कैमरे में क़ैद हुआ जीव

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में जंगल की गश्त (पेट्रोलिंग) के दौरान यह जीव दिखाई दिया. मुख्य रूप से घने जंगलों में पाई जाने वाली यह गिलहरी अमूमन इंसानी नज़रों से दूर ही रहती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि उड़न गिलहरी केवल घने और सुरक्षित जंगलों में ही अपना बसेरा बनाती है, इसलिए इसका मिलना संरक्षण प्रयासों के लिहाज़ से एक अहम संकेत है. उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के उप संचालक (डिप्टी डायरेक्टर) वरुण जैन ने बताया कि इस दुर्लभ जीव का दिखाई देना वन्यजीवों के सुरक्षित आवास को लेकर किए जा रहे संरक्षण कार्यों का सकारात्मक परिणाम है.

उड़न गिलहरी की क्या है ख़ासियत?

  • असल में उड़ती नहीं, 'ग्लाइड' करती है: नाम के विपरीत, यह गिलहरी पक्षियों की तरह असल में उड़ती नहीं है. इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच एक ख़ास त्वचा (झिल्ली) होती है, जो पैराशूट की तरह काम करती है. इसी झिल्ली को फैलाकर यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में फिसलते (Gliding) हुए लंबी दूरी तय करती है.

  • निशाचर (रात में जागने वाला) जीव: यह एक रात्रिचर जीव है. दिन के समय यह आमतौर पर पेड़ों के खोखले हिस्सों में आराम करती है और रात के अंधेरे में ही भोजन की तलाश में बाहर निकलती है.

इको-पर्यटन और रिसर्च को मिलेगी मदद

वन विभाग का मानना है कि इस दुर्लभ प्रजाति के दस्तावेज़ीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) से छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को एक नई पहचान मिलेगी. अधिकारियों को उम्मीद है कि इस खोज से न केवल विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के बीच वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि राज्य में 'इको-पर्यटन' (Eco-tourism) को भी बढ़ावा मिलेगा.


#VIDEO: "मुझे नीचा दिखाने की कोशिश..." पोस्टर में फ़ोटो न होने पर आख़िर क्यों नाराज़ हुए साजा विधायक?

TODAY छत्तीसगढ़  /  बेमेतरा ज़िले में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौक़े पर आयोजित एक कार्यक्रम उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब साजा विधानसभा क्षेत्र से विधायक ईश्वर साहू कथित तौर पर नाराज़ होकर मंच से चले गए.

बताया जा रहा है कि कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनर और पोस्टरों में विधायक की तस्वीर नहीं थी. इसे देखकर विधायक ईश्वर साहू नाराज़ हो गए और उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने इस घटना को ख़ुद को 'नीचा दिखाने की साज़िश' क़रार दिया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

विधायक ने क्या आरोप लगाए?

इस घटना के बाद अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए साजा विधायक ईश्वर साहू ने कहा कि आयोजकों ने यह सब जानबूझकर किया है.

अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा, "मंच के पोस्टर में मेरा फ़ोटो नहीं था. मुझे नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है. मैं इसकी उच्च स्तरीय शिकायत कर जांच कराऊंगा."

उन्होंने आगे कहा, "मैं इसमें किसी व्यक्ति विशेष को दोषी नहीं ठहराना चाहूंगा, लेकिन जो भी यह कार्य किया गया है, वह जानबूझकर किया गया है. आयोजक अगर चाहते, तो दो घंटे के भीतर पोस्टर को बदला जा सकता था."

राजनीतिक और सार्वजनिक आयोजनों में बैनर-पोस्टर पर नेताओं की तस्वीरों को लेकर अक्सर संवेदनशीलता देखने को मिलती है. प्रशासन या आयोजकों की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है. 


पहले साड़ी से घोंटा गला, फिर पेट्रोल डालकर 60 साल की प्रेमिका को जलाया

TODAY छत्तीसगढ़  /  रायगढ़ ज़िले में पुलिस ने एक महिला की हत्या कर उसका शव जलाने के मामले को सुलझाने का दावा किया है. पुलिस ने इस मामले में मृतका के लिव-इन पार्टनर (प्रेमी) को जशपुर से गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक़, यह पूरी वारदात आपसी विवाद और शक के कारण हुई. पहचान छिपाने के मक़सद से अभियुक्त ने कथित तौर पर महिला के शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी. 

क्या है पूरा मामला?

पूंजीपथरा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 17 जून को तमनार चौक से पूंजीपथरा जाने वाले एक कच्चे रास्ते (पगडंडी) पर मायाराम सालिकराम क्रेशर के पास एक अधेड़ महिला का जला हुआ शव बरामद हुआ था. मौक़े पर शव को घसीटने के निशान भी मिले थे.

पुलिस ने शव को सुरक्षित रखवाकर अज्ञात अभियुक्त के ख़िलाफ़ नए आपराधिक क़ानून 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 103(1) और 238 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.

सोशल मीडिया से हुई शव की शिनाख़्त

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह के निर्देश पर पुलिस टीम ने मृतका की पहचान के लिए उसके कपड़ों और अन्य साक्ष्यों की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और स्थानीय औद्योगिक इकाइयों में प्रसारित कीं.

इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि लक्ष्मी कॉलोनी में किराए पर रहने वाला इमिलीयूस तिग्गा और उसके साथ रहने वाली एक महिला कुछ दिनों से ग़ायब हैं. वहीं, सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरें देखकर जशपुर (ग्राम बोरो) के दो युवकों ने शव की पहचान अपनी 60 वर्षीय मां मंगरिता एक्का के रूप में की, जो पूंजीपथरा इलाक़े में मज़दूरी करती थीं.

शक और विवाद के चलते हत्या का आरोप

मृतका की पहचान पुख़्ता होने के बाद पुलिस ने मुख्य संदिग्ध इमिलीयूस तिग्गा की तलाश शुरू की और उसे जशपुर ज़िले के फरसाबहार इलाक़े से हिरासत में ले लिया.

पुलिस पूछताछ में अभियुक्त ने बताया कि वह पिछले तीन महीनों से मृतका के साथ पति-पत्नी की तरह रह रहा था. आरोप है कि मृतका को अभियुक्त पर किसी और महिला से संबंध होने (दूसरी पत्नी रखने) का शक था, जिसे लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था.

वारदात को कैसे दिया अंजाम?

पुलिस के अनुसार, 17 जून को दोनों गांव जाने के नाम पर घर से निकले थे. रास्ते में एक महुआ के पेड़ के नीचे बैठकर दोनों ने शराब पी. इसी दौरान पुरानी बातों को लेकर उनके बीच फिर से विवाद हो गया.

आरोप है कि ग़ुस्से में आकर इमिलीयूस ने मंगरिता की साड़ी से ही उसका गला घोंट दिया और शव को झाड़ियों में छिपा दिया. शाम होने पर उसने पास के पेट्रोल पंप से पेट्रोल ख़रीदा और शव को घसीटकर क्रेशर डस्ट के ढेर के पास ले जाकर आग लगा दी, ताकि मृतका की पहचान न हो सके.

पुलिस का कहना है कि अभियुक्त की निशानदेही पर वारदात के वक़्त पहने गए कपड़े, पेट्रोल की बोतल और माचिस बरामद कर ली गई है. अभियुक्त को गिरफ़्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

पुलिस को चकमा देकर कार से भागा था 'मास्टरमाइंड', अब महिला साथी के साथ हुआ गिरफ़्तार

TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर में पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक़, पकड़े गए दोनों अभियुक्त पिछले कुछ समय से फ़रार चल रहे थे. इनमें से मुख्य अभियुक्त पर राजधानी के एक अन्य थाने में भी गांजा तस्करी का पुराना मामला दर्ज़ है, जिसमें पुलिस को उसकी तलाश थी.

क्या था 8 मई का मामला?

पुरानी बस्ती थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 8 मई को पुलिस और साइबर यूनिट की संयुक्त टीम ने मुखबिरों की सूचना पर भाठागांव-खुड़मुड़ा रोड पर नाकेबंदी की थी. सूचना थी कि अभनपुर की ओर से आ रही एक सफ़ेद रंग की मारुति स्विफ्ट कार (CG 04 HE 5555) में अवैध रूप से गांजे की तस्करी की जा रही है.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब इस वाहन को रोकने का प्रयास किया गया, तो चालक ने गति बढ़ा दी. बाद में पुलिस बल को देखकर चालक और उसका एक साथी कार को सड़क किनारे छोड़कर अंधेरे का फ़ायदा उठाते हुए मौक़े से फ़रार हो गए.

जब पुलिस ने वाहन की तलाशी ली, तो उसकी डिक्की में रखी बोरियों से 21.173 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ. इसके अलावा पुलिस ने मौक़े से कार, दो मोबाइल फ़ोन, वाहन के बीमा काग़ज़ात, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ भी ज़ब्त किए. इस मामले में पुरानी बस्ती थाने में 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट' (NDPS Act) की धारा 20(बी) के तहत एफ़आईआर दर्ज़ की गई थी.

तकनीकी साक्ष्यों से हुई गिरफ़्तारी

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम इस मामले में फ़रार अभियुक्तों की तलाश कर रही थी. घटनास्थल से मिले दस्तावेज़ों और तकनीकी साक्ष्यों (डिजिटल ट्रेल) की मदद से पुलिस को इन अभियुक्तों की लोकेशन का सुराग़ मिला, जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

गिरफ़्तार अभियुक्तों की पहचान इस प्रकार है:

  1. शिवम सोनी (24 वर्ष): मूल निवासी- मंझनपुर (कौशांबी, उत्तर प्रदेश), वर्तमान निवासी- पुरानी बस्ती, रायपुर.

  2. काजल साहू (28 वर्ष): निवासी- हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, नया रायपुर.

एक अन्य मामले में भी थी मुख्य अभियुक्त की तलाश

पुलिस जांच में यह अहम बात सामने आई है कि गिरफ़्तार किया गया मुख्य अभियुक्त शिवम सोनी, न्यू राजेंद्र नगर थाने में दर्ज़ गांजा तस्करी के एक पुराने मामले (अपराध क्रमांक 56/2026) में भी वांछित था.

यह मामला 7 फ़रवरी 2026 का है, जब न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने लालपुर ओवरब्रिज के पास कार्रवाई करते हुए 20.300 किलोग्राम गांजे के साथ एक कार पकड़ी थी. पुलिस के अनुसार, उस वक़्त भी शिवम सोनी मौक़े से भागने में सफल रहा था, जबकि उसका एक साथी (हिमांशु केशरवानी) गिरफ़्तार कर लिया गया था. अब पुलिस उस पुराने मामले में भी शिवम सोनी की आधिकारिक गिरफ़्तारी की प्रक्रिया पूरी कर रही है.

पुलिस के मुताबिक़, हालिया मामले में ज़ब्त किए गए गांजे और वाहन समेत कुल संपत्ति की अनुमानित क़ीमत क़रीब 12 लाख 79 हज़ार रुपये आंकी गई है.

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