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कैमरे की कलम: “मर्यादा बिकाऊ है: समाज के इस ‘सभ्य’ बाजार में आपका स्वागत है”

हाल के कुछ महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आई घटनाएं जिनमें कथित आध्यात्मिक व्यक्तियों पर यौन शोषण के आरोप, सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रभावशाली लोगों पर पद दुरुपयोग के आरोप, और निजी संबंधों में अविश्वास के चलते हिंसा एक व्यापक सामाजिक प्रवृत्ति की ओर संकेत करती हैं।  इन घटनाओं को अलग-अलग देखना आसान है लेकिन जब इन्हें एक साथ रखा जाता है, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या समाज की नैतिक और सामाजिक संरचना किसी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और यदि हां, तो उसकी दिशा क्या है? 

हाल के दिनों में नासिक और सूरत से सामने आए दो अलग-अलग मामले, भले ही अपने स्वरूप में भिन्न प्रतीत होते हों, लेकिन वे एक साझा सामाजिक प्रश्न की ओर इशारा करते हैं। नासिक में एक स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिषी, अशोक खरात, के कथित यौन शोषण से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं। आरोपों के अनुसार, वह महिलाओं को उनके पारिवारिक जीवन, विशेषकर पति से जुड़े संभावित “खतरों” का भय दिखाकर अपने पास बुलाता था। इसके बाद वह कथित रूप से “विशेष अनुष्ठान” के नाम पर उनका शोषण करता, इन कृत्यों को रिकॉर्ड करता और बाद में ब्लैकमेलिंग या आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल करता। इस मामले की गंभीरता केवल आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी बताया गया है कि उसके पास से बड़ी मात्रा में संपत्ति बरामद हुई है जो इस पूरे तंत्र की संगठित प्रकृति की ओर संकेत करता है।

इसी समय, सूरत से सामने आया एक अन्य मामला धार्मिक संस्थाओं की आंतरिक जवाबदेही पर प्रश्न खड़े करता है। यहां एक जैन मुनि के कथित आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो सामने आने के बाद, स्थानीय समुदाय की महिलाओं ने स्वयं पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि शिकायत किसी बाहरी विरोध या राजनीतिक आरोप के रूप में नहीं, बल्कि उसी धार्मिक समुदाय के भीतर से आई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल व्यक्तिगत आचरण का प्रश्न हैं, बल्कि पूरे समुदाय और उसकी आस्था की छवि को प्रभावित करती हैं।

इसी व्यापक परिदृश्य में छत्तीसगढ़ के चर्चित आईपीएस रतनलाल डांगी के स्कैंडल को देखिये। इसी तरह राज्य के बिलासपुर, रायपुर और कवर्धा से सामने आई हाल की घटनाएं सामाजिक अस्थिरता के एक और पहलू को उजागर करती हैं। बिलासपुर जिले के रतनपुर क्षेत्र के ग्राम पेंडरवा में चरित्र संदेह को लेकर हुआ हिंसक संघर्ष हो, या रायपुर में पारिवारिक संबंधों से जुड़ी गंभीर हत्याएं, ये घटनाएं यह संकेत देती हैं कि निजी संबंधों में अविश्वास किस प्रकार हिंसक रूप ले सकता है। इसी तरह, कवर्धा में सामने आया बाल यौन शोषण का मामला यह दर्शाता है कि अपराध के स्वरूप और संदर्भ बदल रहे हैं और पारंपरिक धारणाएं इन जटिलताओं को पूरी तरह समझाने में सक्षम नहीं हैं।

कहते हैं भारत “संस्कारों का देश” है। यहां परिवार है, परंपरा है, मर्यादा है, और सबसे बढ़कर—“इज्जत” है लेकिन जरा ठहरकर आईना देखिए। क्या वाकई यह सब अब भी बचा है, या हम सिर्फ इन शब्दों की माला जपकर खुद को धोखा दे रहे हैं? सच यह है कि समाज अब “संस्कारों” से नहीं सुविधा, स्वार्थ और सन्नाटे से चल रहा है और इस नए समाज में आपका स्वागत है, जहां मर्यादा एक विचार नहीं एक बिकने वाली वस्तु है।

पहले लोग भगवान में विश्वास करते थे। अब लोग “बाबाओं के पैकेज” खरीदते हैं। “समस्या समाधान शिविर”, “विशेष अनुष्ठान” और “गुप्त साधना” नाम बदलते रहते हैं, लेकिन धंधा वही रहता है। डर बेचो, समाधान बेचो और अगर ग्राहक खास हो तो “विशेष सेवा” भी दे दो। यहां सबसे मजेदार बात यह है कि ग्राहक खुद चलकर आता है। वह अपने डर, अपनी कमजोरी और कई बार अपनी समझ तक किसी और के चरणों में रख देता है और फिर जब उसके साथ शोषण होता है तो समाज कहता है “उसे समझना चाहिए था।”

वाह! धोखा भी खाओ और दोष भी खुद पर लो। शरीर: अब आत्मा से ज्यादा उपयोगी संपत्ति। हमने हमेशा कहा कि “आत्मा अमर है, शरीर नश्वर है।” लेकिन व्यवहार में हमने क्या किया? हमने शरीर को ही सबसे बड़ा निवेश बना दिया। कहीं नौकरी के लिए, कहीं प्रमोशन के लिए, कहीं कृपा पाने के लिए— शरीर अब एक “करेंसी” बन चुका है और इस बाजार में खरीदार भी हैं, बिकने वाले भी हैं और सबसे ज्यादा देखकर चुप रहने वाले दर्शक।

कहते हैं सत्ता सेवा का माध्यम होती है लेकिन अब यह सुविधा का शॉर्टकट बन चुकी है। फाइल आगे बढ़ानी है? संपर्क चाहिए। संपर्क नहीं है? तो “समझौता” चाहिए और यह समझौता किस चीज का होता है यह बताने की जरूरत नहीं। यहां नैतिकता फाइलों में बंद रहती है और फैसले बंद कमरों में होते हैं। बाहर भाषण में “नारी सम्मान” गूंजता है, और अंदर सम्मान का सबसे सस्ता सौदा होता है।

हमने बचपन में पढ़ा था कि द्रौपदी का चीर हरण अन्याय था और पूरा सभ्य समाज उसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए था। आज भी चीर हरण हो रहा है लेकिन फर्क यह है कि अब यह एक सिस्टम बन चुका है। कभी कैमरे के जरिए, कभी ब्लैकमेलिंग के जरिए, कभी सत्ता के दबाव से और सबसे बड़ी बात अब कोई कृष्ण नहीं आता क्योंकि आज के “कृष्ण” खुद किसी और के दरबार में खड़े हैं।

समाज को अगर किसी को खत्म करना हो तो उसे सबूत की जरूरत नहीं होती उसे सिर्फ एक शब्द चाहिए: “चरित्र” . एक बार यह शब्द किसी महिला के नाम के साथ जुड़ गया, तो फिर न उसे सफाई का मौका मिलता है न न्याय का। और अगर कोई पुरुष इस “शक” के नाम पर हत्या कर दे तो समाज धीरे से कहता है “गुस्से में गलती हो गई।” गलती? या मानसिकता? 

हम कहते हैं कि “परिवार समाज की नींव है।” लेकिन सच्चाई यह है कि अब परिवार सबसे बड़ा अभिनय मंच बन चुका है। बाहर से सब ठीक, अंदर से सब बिखरा हुआ। संवाद नहीं है, विश्वास नहीं है, लेकिन फोटो पर मुस्कान है और जब सच्चाई बाहर आती है तो या तो रिश्ता टूटता है या किसी की जान चली जाती है।

हर बार जब कोई मामला सामने आता है तो सबसे आसान सवाल पूछा जाता है “वह वहां क्यों गई?” कोई यह नहीं पूछता “उसे वहां तक लाया किसने?” समाज को एक आदत लग चुकी है दोष वहीं डालो, जहां से आवाज कम उठे और महिलाएं इस व्यवस्था में सबसे आसान निशाना हैं।

आज हर स्कैंडल एक “कंटेंट” है। वीडियो वायरल, रील तैयार, कैप्शन सनसनीखेज। किसी की जिंदगी बर्बाद हो रही है, लेकिन व्यूज बढ़ रहे हैं तो सब ठीक है। यह समाज अब संवेदनशील नहीं रहा यह मनोरंजनप्रिय हो गया है। उसे सच नहीं चाहिए, उसे मसाला चाहिए। हम खुद को निर्दोष मानते हैं। कहते हैं “हमने क्या किया?” लेकिन असली सवाल यह है— हमने क्या नहीं किया? हमने सवाल नहीं पूछा, हमने विरोध नहीं किया, हमने चुप्पी चुनी और यही चुप्पी हर अपराध की साझेदार बन गई।

समस्या यह नहीं है कि हमें सच्चाई दिखती नहीं है। समस्या यह है कि हम उसे देखना नहीं चाहते क्योंकि अगर हम सच देख लेंगे, तो हमें बदलना पड़ेगा और बदलना सबसे मुश्किल काम है। इसलिए हम क्या करते हैं? हम मर्यादा की बात करते हैं, संस्कारों की बात करते हैं और फिर चुपचाप उसी दलदल में उतर जाते हैं जिसे हम खुद कोसते हैं। जब मर्यादा बिक रही हो, आस्था व्यापार बन चुकी हो और रिश्ते समझौते में बदल गए हों तो दोष किसे दें?

जुए के अड्डे पर पुलिस का छापा, 9 आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर में अवैध जुआ पर लगाम कसने के लिए ACCU और सिविल लाइन पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक जुए के अड्डे पर छापा मारा। जनता कंस्ट्रक्शन आफिस ,स्मार्ट रोड नेहरू नगर में चल रहे जुआ फड़ से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि बड़ी मात्रा में नगदी, मोबाइल फोन और चार पहिया वाहन जब्त किए गए। 

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जुवारियों के कब्जे से कुल ₹84,400 नगद, 13 मोबाइल फोन और 4 चारपहिया वाहन जब्त किए गए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब ₹45 लाख 84 हजार 400 रुपये आंकी गई है।

पुलिस की गिरफ्त में आये जुआरियों में चंद्र प्रकाश पाण्डेय (43 वर्ष), सागर मंगेशकर (30 वर्ष), नितेश चंद शर्मा (45 वर्ष), दुर्गेश सारथी (32 वर्ष), अखिलेश त्रिवेदी (52 वर्ष), अमन धर (28 वर्ष), आशीष खूंटे (27 वर्ष), रोशन सोनी (31 वर्ष) और सृजन शर्मा (27 वर्ष) शामिल हैं। मौके से पुलिस टीम ने जो वाहन जब्त किये हैं वो Hyundai Creta (CG10BZ9995) Toyota Glanza (CG10CD5550) BMW X1 (DD018888) और Mahindra Thar (CG10AZ0015) शामिल है। 


बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़, 9 खरीदार के साथ 21 मोटरसाइकिल बरामद


रायगढ़।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में संपत्ति संबंधी अपराधों पर लगाम कसने की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर थाना और पूंजीपथरा पुलिस की संयुक्त टीम ने अंतरराज्यीय बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में चोरी की 21 मोटरसाइकिल बरामद की हैं, जिनकी बाजार कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई है।

मामले में मुख्य आरोपी सुखदेव चौहान को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसका साथी शिव नागवंशी फरार बताया जा रहा है। इसके अलावा चोरी की बाइक खरीदने वाले 9 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।पुलिस को सूचना मिली थी कि लैलूंगा क्षेत्र के कुछ युवक पूंजीपथरा, धरमजयगढ़ और ओडिशा के भीड़-भाड़ वाले इलाकों से मोटरसाइकिल चोरी कर सस्ते दामों में बेच रहे हैं। इस पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना और पूंजीपथरा पुलिस की संयुक्त टीम गठित कर कार्रवाई की गई।

पुलिस ने आरोपी सुखदेव चौहान को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपने साथी के साथ मिलकर कई बाइक चोरी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया। आरोपी ने बताया कि वह बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से बाइक चोरी कर सुनसान जगहों पर छिपा देता था और बाद में उन्हें सस्ते दामों में बेच देता था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी पेशे से ड्राइवर हैं और वाहनों की मरम्मत का काम जानते हैं। इसी का फायदा उठाकर वे पेचकस जैसे सामान्य औजारों से बाइक का लॉक तोड़कर आसानी से चोरी कर लेते थे। 

मामले की विवेचना में जुटी पुलिस ने आरोपी सुखदेव चौहान ने बताया कि उसने चोरी की मोटरसाइकिलें कार्तिक राम डूंगडूंग, रामकुमार वैष्णव, केशव यादव, भोजराम पैंकरा, जगदीश पैंकरा, शिवचरण चौहान, सुखचरण चौहान, अमित कुमार नागवंशी और शिवप्रसाद विश्वकर्मा को बेची थीं। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 14 मोटरसाइकिल बरामद की। वहीं आरोपी सुखदेव चौहान द्वारा अपने बाड़ी में छिपाकर रखी गई 7 अन्य मोटरसाइकिल भी जप्त की गई। इस तरह पुलिस को कुल 21 मोटरसाइकिल बरामद करने में सफलता मिली। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(1) तथा चोरी की संपत्ति खरीदने वालों के खिलाफ धारा 317(2), 317(4) के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में शिव नागवंशी निवासी किलकिला को फरार बताया जा रहा है, पुलिस दावा कर रही है कि उसे भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएग। 


एनएच-53 पर 2 करोड़ से अधिक का गांजा जब्त, पांच आरोपी गिरफ्तार


रायपुर / महासमुंद। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत महासमुंद पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गांजा तस्करी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 281.900 किलोग्राम गांजा जब्त किया है, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ 40 लाख 95 हजार रुपये आंकी गई है। मामले में महाराष्ट्र के पांच तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ओडिशा से गांजा की बड़ी खेप महाराष्ट्र ले जाने की सूचना पर एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स और थाना सिंघोड़ा पुलिस की संयुक्त टीम ने एनएच-53 स्थित रेहटीखोल मार्ग पर नाकाबंदी की। इसी दौरान एक फॉर्च्यूनर (MH 12 WC 0090) और एक स्कॉर्पियो (MH 12 YH 0090) को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान वाहनों में रखी बोरियों से गांजा बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे ओडिशा के फुलवानी जिले से गांजा लेकर पुणे (महाराष्ट्र) जा रहे थे।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 281.900 किलोग्राम गांजा के साथ-साथ गांजा परिवहन में प्रयुक्त फॉर्च्यूनर (कीमत करीब 40 लाख रुपये), स्कॉर्पियो (कीमत करीब 25 लाख रुपये) और चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस प्रकार कुल 2 करोड़ 6 लाख 45 हजार रुपये का सामान जप्त किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में प्रशांत शंकर गोले (38 वर्ष), क्षितिज वीरसेन जाधव (21 वर्ष), अक्षय नंदकुमार निगम (27 वर्ष), अभिषेक डेविड जगले (26 वर्ष) और महेश काटकर (39 वर्ष) शामिल हैं, जो सभी महाराष्ट्र के निवासी हैं।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

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