"वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि कर्मचारियों को तात्कालिक ज़रूरतों के लिए इस योजना के तहत बिना ब्याज के (Interest-free) वित्तीय सहायता मिलेगी. इसे एक तरह से वेतन के विरुद्ध एडवांस के रूप में देखा जा रहा है"
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं और आर्थिक चिंता से मुक्त कर्मचारी ही बेहतर ढंग से जनसेवा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना कर्मचारियों को आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक, त्वरित और आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए इसे ई-कोष प्रणाली से जोड़ा है, जिससे बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के पात्र कर्मचारी ऑनलाइन ऋण प्राप्त कर सकेंगे।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि कैशलेस मेडिकल सुविधा के बाद यह दूसरी बड़ी कर्मचारी हितैषी पहल है। योजना के पायलट चरण में दो महीने के भीतर 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया, जबकि 27 हजार कर्मचारी इसका लाभ भी ले चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि के ऋण की सुविधा देने की भी योजना है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने योजना का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही जरूरत पूरी होगी और आपात परिस्थितियों में उन्हें सम्मानजनक आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
योजना के तहत कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण और सहमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऋण स्वीकृत कर राशि सीधे उपलब्ध करा दी जाएगी। वित्त विभाग ने पूरी व्यवस्था के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की है, जिसमें डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।











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