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बिना ब्याज़ मिलेगा एमरजेंसी लोन: सरकार ने ई-कोष के ज़रिए शुरू की पेपरलेस लोन व्यवस्था

"वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि कर्मचारियों को तात्कालिक ज़रूरतों के लिए इस योजना के तहत बिना ब्याज के (Interest-free) वित्तीय सहायता मिलेगी. इसे एक तरह से वेतन के विरुद्ध एडवांस के रूप में देखा जा रहा है"

 

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों को आकस्मिक आर्थिक जरूरतों में राहत देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को 'वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना' का शुभारंभ किया। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने योजना का ब्रोशर भी जारी किया। इस योजना के तहत अब सरकारी कर्मचारियों को निजी साहूकारों या ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ई-कोष प्रणाली के जरिए पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पेपरलेस होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं और आर्थिक चिंता से मुक्त कर्मचारी ही बेहतर ढंग से जनसेवा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना कर्मचारियों को आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक, त्वरित और आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए इसे ई-कोष प्रणाली से जोड़ा है, जिससे बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के पात्र कर्मचारी ऑनलाइन ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि कैशलेस मेडिकल सुविधा के बाद यह दूसरी बड़ी कर्मचारी हितैषी पहल है। योजना के पायलट चरण में दो महीने के भीतर 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया, जबकि 27 हजार कर्मचारी इसका लाभ भी ले चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि के ऋण की सुविधा देने की भी योजना है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने योजना का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही जरूरत पूरी होगी और आपात परिस्थितियों में उन्हें सम्मानजनक आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

योजना के तहत कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण और सहमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऋण स्वीकृत कर राशि सीधे उपलब्ध करा दी जाएगी। वित्त विभाग ने पूरी व्यवस्था के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की है, जिसमें डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।

लिव-इन, साइबर क्राइम और ट्रैफिक जागरूकता पर बनी तीन लघु फिल्मों का विमोचन

"लिव-इन रिलेशनशिप पर आधारित फिल्म में युवाओं को संदेश दिया गया कि किसी भी रिश्ते में प्रवेश करने से पहले उसके सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े"

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / समाज में जागरूकता और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देने की दिशा में बिलासपुर पुलिस ने एक नई पहल की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह (आईपीएस) के निर्देशन में संचालित 'चेतना अभियान' के तहत सामाजिक सरोकारों पर आधारित तीन लघु फिल्मों का बुधवार को चेतना भवन, पुलिस ग्राउंड में भव्य विमोचन किया गया। फिल्मों के माध्यम से युवाओं और आम नागरिकों को लिव-इन रिलेशनशिप, सड़क सुरक्षा और साइबर अपराध जैसे संवेदनशील विषयों पर जागरूक करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में प्रदर्शित लिव-इन रिलेशनशिप पर आधारित फिल्म में युवाओं को संदेश दिया गया कि किसी भी रिश्ते में प्रवेश करने से पहले उसके सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

यातायात जागरूकता पर बनी फिल्म में सड़क पर स्टंट करने जैसी खतरनाक प्रवृत्तियों से दूर रहने का संदेश दिया गया। फिल्म में दिखाया गया कि लापरवाही और स्टंट न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि स्वयं और दूसरों के जीवन को भी खतरे में डालते हैं।

वहीं साइबर क्राइम जागरूकता पर आधारित फिल्म में स्कूली विद्यार्थियों ने ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे अपराधों से बचाव के प्रभावी उपाय प्रस्तुत किए। फिल्म के जरिए लोगों से डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने और अपनी व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखने की अपील की गई।

इस अवसर पर फिल्मों के निर्माण से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम को भी बिलासपुर पुलिस ने सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में फिल्म निर्देशक डॉ. राहुल पारीक, सहायक निर्देशक आकांक्षा सिंह राठौड़, किशन यादव, श्रावणी नायडू, अशोक उपाध्याय, शत्रुघ्न जसवानी तथा मेकअप आर्टिस्ट दीपांशी घोष शामिल रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह रहे। इस अवसर पर डॉ. विनोद तिवारी, लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. अंकुल ठकराल, जेके कॉलेज के सचिव डॉ. इरशाद खान, निदेशक डॉ. आशीष सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह एवं रामगोपाल करियारे सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, शिक्षाविद, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक उमाशंकर पांडेय ने किया।

समापन अवसर पर बिलासपुर पुलिस ने कहा कि जनजागरूकता आधारित लघु फिल्में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम हैं। 'चेतना अभियान' के तहत भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जागरूक किया जाता रहेगा। 


क्या पुलिस ने की एकतरफ़ा कार्रवाई? सरकंडा थाने के चर्चित NDPS मामले में महिला आयोग सख़्त

"छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक कथित ड्रग्स (NDPS) मामले में नया मोड़ आ गया है. पिछले क़रीब चार महीनों से जेल में बंद एक महिला के परिजनों ने राज्य महिला आयोग के सामने पुलिस की जांच और पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाए है"
TODAY छत्तीसगढ़  /  सरकंडा थाना क्षेत्र के चर्चित रानी सिंह एनडीपीएस प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। राज्य महिला आयोग ने परिजनों की शिकायत पर मामले का संज्ञान लेते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि जांच उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर पारदर्शी तरीके से की जाए।

आयोजित जनसुनवाई में रानी सिंह के परिजन महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक से मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि रानी सिंह को एक पारिवारिक विवाद के चलते सुनियोजित तरीके से झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाया गया है और पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। 

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

रानी सिंह के भाई शिवराज ने आयोग को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि उनकी बहन के बहनोई, जो मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं, ने कथित रूप से नशीली दवाइयां घर में रखवाकर पुलिस कार्रवाई कराई। उनका दावा है कि यदि मामले की शुरुआत से निष्पक्ष जांच होती तो उनकी बहन को पिछले चार महीने से जेल में नहीं रहना पड़ता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम में कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है और मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। 

एएसपी को जांच के निर्देश

शिकायत सुनने के बाद महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने मामले को गंभीर मानते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सभी तथ्यों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में परिजनों के आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में आगे नई कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो पुलिस की अब तक की कार्रवाई को बल मिलेगा।

नोट: इस मामले में रानी सिंह के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत दावे हैं। इनकी सत्यता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष के आरोपों या दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।

शराब, कोल और कस्टम मिलिंग घोटाले के मुख्य आरोपी रामगोपाल को EOW ने लिया हिरासत में

"मंगलवार को जांच एजेंसी ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल को तलब कर उनसे लंबी पूछताछ की थी. बताया जा रहा है कि बेटे से पूछताछ के बाद, तीन साल से फ़रार चल रहे रामगोपाल अग्रवाल  आज ख़ुद EOW के दफ़्तर पहुंचे, जिसके बाद एजेंसी ने उन्हें हिरासत में ले लिया."

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों में वांछित कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने हिरासत में ले लिया है। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के पूर्व अध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर थे। उनके खिलाफ ईडी और ईओडब्ल्यू लंबे समय से कार्रवाई कर रही थीं।

बेटे से पूछताछ के बाद पहुंचे EOW कार्यालय

कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच के सिलसिले में ईओडब्ल्यू ने रामगोपाल अग्रवाल को समन जारी किया था। मंगलवार को उनके बेटे वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ की गई। इसके बाद रामगोपाल अग्रवाल स्वयं ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

127 करोड़ के कस्टम मिलिंग घोटाले का आरोप

ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान की कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसी का आरोप है कि नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे करीब 127 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इस मामले में तत्कालीन अधिकारियों, राइस मिलर्स और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

कोल लेवी घोटाले में भी नाम

रामगोपाल अग्रवाल का नाम कथित कोल लेवी घोटाले में भी सामने आया है। ईडी और ईओडब्ल्यू के मुताबिक वर्ष 2020 से 2022 के दौरान कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना बाकी है।

शराब घोटाले की भी जांच

रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के चर्चित शराब घोटाले की जांच में भी शामिल है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। ईडी और ईओडब्ल्यू का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपये का अवैध घोटाला हुआ।

हालांकि, तीनों मामलों में जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि होना शेष है। रामगोपाल अग्रवाल को हिरासत में लिए जाने के बाद इन मामलों की जांच में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

साय कैबिनेट: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निजी विश्वविद्यालयों तक बड़े फैसले

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार (8 जुलाई) को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के प्रशासनिक, औद्योगिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कानून, निजी विश्वविद्यालयों के नए प्रावधान, जीएसटी व वैट कानूनों में संशोधन, बस्तर फाइटर्स के सेवा नियमों में बदलाव, नवा रायपुर के लिए ओटीएस योजना सहित कुल 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन निर्णयों से निवेश, सुशासन, शिक्षा, रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में शासन, उद्योग, शिक्षा, कर व्यवस्था, पुलिस, पर्यावरण और शहरी विकास से जुड़े 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और जनहित से जुड़े कानूनों में आवश्यक संशोधन करना है।

बिजली भुगतान के लिए नई व्यवस्था लागू होगी

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (सीपीएसयू) से खरीदी जा रही बिजली के भुगतान के लिए डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) व्यवस्था लागू करने को मंजूरी दी। इससे एनटीपीसी सहित अन्य कंपनियों से बिजली आपूर्ति निर्बाध रहेगी और राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

बस्तर फाइटर्स के सेवा नियमों में संशोधन

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स) की भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े नियम-2026 में संशोधन को भी स्वीकृति प्रदान की।

निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना होगी आसान

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक-2026 को मंजूरी दी। नए प्रावधानों के तहत निजी विश्वविद्यालयों में 'विन्यास निधि' के स्थान पर 'रक्षित निधि' का प्रावधान होगा तथा यूजीसी के मानकों के अनुरूप आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।

वैट अधिकरण समाप्त होगा

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (वैट) संशोधन विधेयक को मंजूरी देते हुए राज्य के वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करने का निर्णय लिया। अब लंबित मामलों का निपटारा राजस्व मंडल करेगा।

जीएसटी कानून होगा और सरल

छत्तीसगढ़ जीएसटी संशोधन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी गई। इससे करदाताओं, विशेषकर निर्यातकों और उद्योगों के लिए रिफंड प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी तथा कर अनुपालन आसान बनेगा।

औद्योगिक निवेश को मिलेगा बढ़ावा

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन संशोधन विधेयक को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को सरल बनाकर उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कानून लाने वाला पहला राज्य बनेगा छत्तीसगढ़

मंत्रिपरिषद ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियम-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक-2026 के प्रारूप को भी मंजूरी दी। इसमें डीम्ड परमिशन, सेल्फ सर्टिफिकेशन, थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन और रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन जैसे प्रावधान शामिल हैं। दावा किया गया कि ऐसा कानून लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा।

नवा रायपुर में वन टाइम सेटलमेंट योजना

एनआरडीए द्वारा आवंटित भूखंडों और परिसरों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना-2026 को मंजूरी दी गई। इससे बकाया मामलों के निपटारे, भूमि के बेहतर उपयोग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

जल प्रदूषण कानून में संशोधन

कैबिनेट ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) संशोधन अधिनियम-2024 को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया। इससे छोटे उल्लंघनों पर आपराधिक कार्रवाई के बजाय आर्थिक दंड का प्रावधान होगा।

किरायेदारी कानून में बदलाव

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम-2011 में संशोधन को मंजूरी दी गई। संशोधन के बाद मकान मालिक और किरायेदार के अधिकार एवं दायित्व स्पष्ट होंगे तथा किरायेदारी विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

राजनांदगांव में बनेगा आधुनिक ऑडिटोरियम

कैबिनेट ने राजनांदगांव में 2,000 सीट क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। यह परियोजना क्षेत्र में सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक गतिविधियों को नई गति देगी। 

पुलिस में 61 सब इंस्पेक्टर बने इंस्पेक्टर, डीजीपी ने जारी किया पदोन्नति आदेश

'पदोन्नति सूची में शामिल किसी भी अधिकारी के विरुद्ध यदि विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण या ऐसी कोई कार्रवाई लंबित है, जो उसकी पदोन्नति को प्रभावित कर सकती है, तो संबंधित प्रकरण की पूरी जानकारी तत्काल पुलिस मुख्यालय को भेजी जाए।'
TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने 2013 बैच के 61 सब इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर (निरीक्षक) पद पर पदोन्नत किया है। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि, पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना के आदेश अलग से जारी किए जाएंगे।

पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति सूची में शामिल किसी भी अधिकारी के विरुद्ध यदि विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण या ऐसी कोई कार्रवाई लंबित है, जो उसकी पदोन्नति को प्रभावित कर सकती है, तो संबंधित प्रकरण की पूरी जानकारी तत्काल पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर को भेजी जाए।

आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि पदोन्नति के बाद किसी अधिकारी के संबंध में प्रतिकूल टिप्पणी, बड़ी सजा अथवा कोई ऐसी जानकारी सामने आती है, जिससे उसकी पात्रता प्रभावित होती हो, तो उसकी पदोन्नति निरस्त की जा सकती है।

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह योग्यता सूची 18 माह तक अथवा नई योग्यता सूची जारी होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी।

पुलिस विभाग में एक साथ 61 अधिकारियों की पदोन्नति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नई पदस्थापना सूची जारी होने का इंतजार है। 



महिला के घर चल रहा था ऑनलाइन-ऑफलाइन सट्टा, पुलिस की रेड में मोबाइल और सट्टा-पट्टी जब्त

TODAY छत्तीसगढ़  / जुआ-सट्टा के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन अंकुश' के तहत रायगढ़ पुलिस ने शहीद चौक क्षेत्र में एक महिला के घर छापेमार कार्रवाई कर उसे सट्टा-पट्टी लिखते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने मोबाइल फोन, सट्टा-पट्टी का रिकॉर्ड और नगदी जब्त कर महिला के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि शहीद चौक निवासी अनिता साहू अपने घर से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अवैध सट्टा संचालित कर रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से मकान में दबिश दी।

छापेमारी के दौरान अनिता साहू घर पर मौजूद मिली। पूछताछ में उसने सट्टा-पट्टी लिखने की बात स्वीकार की। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया, जिसकी गैलरी में राजधानी कल्याण के विभिन्न सट्टा अंकों की तस्वीरें, सट्टा-पट्टी का रिकॉर्ड और हिसाब-किताब सुरक्षित मिला।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ऑनलाइन और नकद दोनों माध्यमों से रकम लेकर अवैध सट्टा संचालित कर रही थी। पुलिस ने मौके से 480 रुपये नकद, मोबाइल फोन तथा सट्टा संचालन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए।

पुलिस ने अनिता साहू (32 वर्ष), निवासी शहीद चौक, रायगढ़ के विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 के तहत थाना कोतवाली में अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की है।

रायगढ़ पुलिस ने कहा है कि 'ऑपरेशन अंकुश' के तहत जिले में जुआ और सट्टा कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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