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VIDEO: पानी के तेज बहाव में रपटा पार करना पड़ा भारी, बड़ा हादसा टला

कवर्धा:  TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही लापरवाही की तस्वीरें भी सामने आने लगी हैं। पंडरिया क्षेत्र के ढोल-ढोली रपटा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि पुल (रपटा) के ऊपर तेज बहाव से पानी गुजर रहा था, इसके बावजूद एक मालवाहक वाहन को पार कराने की कोशिश की गई। इसी दौरान वाहन बीच रपटा में फंस गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मालवाहक वाहन में 20 से अधिक लोग सवार थे। गनीमत रही कि आसपास मौजूद ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते राहत नहीं मिलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

दो दिनों से हो रही है भारी बारिश

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पंडरिया क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। इसके चलते नदी-नाले और रपटे उफान पर हैं। ऐसे में पानी के ऊपर से बह रहे रपटों को पार करना बेहद जोखिम भरा हो गया है।

जोखिम उठाना पड़ सकता है भारी

वीडियो एक बार फिर यह संदेश देता है कि बारिश के दौरान पानी से डूबे पुल या रपटे को पार करने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। थोड़ी सी जल्दबाजी या लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

प्रशासन और विशेषज्ञ भी लगातार लोगों से अपील करते हैं कि पानी के तेज बहाव वाले रपटों और पुलों को पार करने की कोशिश न करें तथा सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग का ही इस्तेमाल करें। जिंदगी से बढ़कर कुछ भी नहीं है।


चाकू लेकर सड़कों पर दहशत फैलाना पड़ा भारी.. पुलिस ने 4 युवकों को किया गिरफ़्तार

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर ज़िले में पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों पर धारदार हथियार (चाकू) लेकर घूमने और लोगों में डर पैदा करने के आरोप में चार युवकों को गिरफ़्तार किया है.

तोरवा थाना पुलिस ने शुक्रवार (3 जुलाई) को की गई इस कार्रवाई में अभियुक्तों के पास से चार लोहे के धारदार चाकू बरामद किए हैं. सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत (रिमांड) पर जेल भेज दिया गया है.

नियमित गश्त के दौरान पकड़े गए अभियुक्त

बिलासपुर पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तोरवा थाना क्षेत्र में शांति और क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की एक टीम नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) और संदिग्धों की जांच कर रही थी.

  • इस दौरान लालखदान क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर चार युवक हाथों में धारदार चाकू लिए संदिग्ध अवस्था में पाए गए.

  • पुलिस के मुताबिक़, इनके कृत्य से स्थानीय लोगों में भय की स्थिति बन रही थी. पुलिस टीम ने मौक़े पर घेराबंदी कर चारों को हिरासत में ले लिया.

आर्म्स एक्ट (शस्त्र अधिनियम) के तहत कार्रवाई

तलाशी के दौरान जब अभियुक्तों के पास से चाकू बरामद हुए, तो तोरवा पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ 'शस्त्र अधिनियम' (Arms Act) की धारा 25 और 27 के तहत 4 अलग-अलग आपराधिक मामले (अपराध क्रमांक 364, 365, 366 और 367) दर्ज़ किए.

गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान: पुलिस के अनुसार, गिरफ़्तार किए गए चारों युवक तोरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत लालखदान (परियापारा) के ही रहने वाले हैं.

  1. कुशल पासी (19 वर्ष)

  2. सुमीत पाल (18 वर्ष)

  3. प्रथम चौहान (20 वर्ष)

  4. शिवम चौहान (22 वर्ष)

तोरवा पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस की सघन जांच आगे भी जारी रहेगी.

कॉलेज से कॉपर वायर चुराने वाले तीन अभियुक्त गिरफ़्तार, 60 हज़ार का सामान बरामद

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर ज़िले में पुलिस ने एक कॉलेज परिसर से बिजली के उपकरण चुराने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.

तोरवा थाना पुलिस और एसीसीयू (ACCU) की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए इन अभियुक्तों के पास से चोरी किया गया कॉपर वायर बरामद कर लिया गया है, जिसकी अनुमानित क़ीमत 60,000 रुपये बताई गई है. तीनों अभियुक्तों को शुक्रवार (3 जुलाई) को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत (रिमांड) पर जेल भेज दिया गया है.

आपातकालीन आपूर्ति के लिए रखा था सामान

बिलासपुर पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह घटना तोरवा थाना क्षेत्र के चौकसे कॉलेज (Chouksey College) की है.

  • कॉलेज के स्टाफ़ विकास चंद्रा ने 25 अप्रैल 2026 को पुलिस में चोरी की शिकायत दर्ज़ कराई थी.

  • शिकायत में बताया गया था कि कॉलेज परिसर में आपातकालीन विद्युत आपूर्ति के लिए कुछ कॉपर वायर और ट्रांसफार्मर ऑयल रखा गया था, जिसे अज्ञात लोगों ने चुरा लिया है.

इस शिकायत के आधार पर तोरवा पुलिस ने 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 303(2) और 3(5) के तहत मामला (अपराध क्रमांक 232/2026) दर्ज़ कर जांच शुरू की थी.

तकनीकी साक्ष्यों से पकड़े गए अभियुक्त

चोरी की इस घटना को सुलझाने के लिए तोरवा पुलिस और एसीसीयू (ACCU) की एक संयुक्त टीम बनाई गई थी. तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मस्तूरी थाना क्षेत्र के तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की.

पुलिस के मुताबिक़, पूछताछ के दौरान तीनों ने कॉलेज परिसर में चोरी की घटना को अंजाम देना स्वीकार कर लिया.

गिरफ़्तार अभियुक्तों की पहचान:

  1. तरुण मनहर उर्फ़ राजा (36 वर्ष), निवासी- रिस्दा, थाना मस्तूरी, बिलासपुर.

  2. लाला उर्फ़ भगत केंवट (28 वर्ष), निवासी- रिस्दा, थाना मस्तूरी, बिलासपुर.

  3. यशवंत धीरज उर्फ़ राजा (26 वर्ष), निवासी- पेंडरी, थाना मस्तूरी, बिलासपुर.

पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर चोरी गया 60,000 रुपये का कॉपर वायर बंडल ज़ब्त कर लिया है और मामले में आगे की क़ानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं.

कलकत्ता चिकन सेंटर के पास हंगामा, तीन युवक गिरफ्तार

राजनांदगांव:  TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र में सार्वजनिक स्थान पर हुल्लड़बाजी कर शांति भंग करने के आरोप में पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद आरोपियों को एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई जिले में असामाजिक तत्वों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

पुलिस के मुताबिक, 2 जुलाई 2026 को सूचना मिली थी कि बसंतपुर थाना क्षेत्र स्थित कलकत्ता चिकन सेंटर के पास कुछ लोग सार्वजनिक स्थान पर हंगामा कर रहे हैं। उनके व्यवहार से क्षेत्र में अशांति का माहौल बन गया था और लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।

सूचना मिलने पर थाना बसंतपुर पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित लोगों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि समझाइश के बावजूद वे नहीं माने और गाली-गलौज तथा हंगामा करते रहे, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बन गई।

तीनों आरोपियों को किया गिरफ्तार

पुलिस ने मौके से तीन लोगों को हिरासत में लिया। उनकी पहचान अब्दुल जुबैर अहमद (27), भूपेंद्र बघेल (31) और साहिल यादव (30) के रूप में हुई है। तीनों राजनांदगांव के लालबाग प्रभातनगर क्षेत्र के निवासी हैं।

बीएनएसएस की धाराओं में कार्रवाई

पुलिस ने तीनों के खिलाफ इस्तगाशा क्रमांक 91-175/2026 के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170, 126 और 135(3) के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की।

इसके बाद आरोपियों को एसडीएम न्यायालय, राजनांदगांव में पेश किया गया। न्यायालय से जेल वारंट जारी होने पर तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के निर्देशन में की गई। कार्रवाई में प्रशिक्षु उपनिरीक्षक राजीव चंद्रा, आरक्षक कुश बघेल, रूपेंद्र वर्मा और राजेश बंदेश्वर की प्रमुख भूमिका रही।

नोट: यह कार्रवाई पुलिस के आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। मामले में आरोपियों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। किसी भी आरोप का अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन होगा।

राज्यपाल के पास लंबित विधेयकों पर 3 साल बाद सुनवाई, सरकार याचिका वापस लेगी

बिलासपुर: TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित विभिन्न विधेयकों पर राज्यपाल की मंजूरी लंबित रहने से जुड़े मामले में लगभग तीन वर्ष बाद शुक्रवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वह इस मामले में दायर अपनी याचिका वापस लेना चाहती है। वहीं, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता संत कुमार नेताम ने अपनी याचिका जारी रखते हुए लंबित विधेयकों पर निर्णय कराने की मांग दोहराई।

न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा कि सरकार अपनी याचिका वापस लेना चाहती है। इसके लिए औपचारिक आवेदन दाखिल करने हेतु समय देने का अनुरोध किया गया।

याचिकाकर्ता बोले- सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दी है सीमा

संत कुमार नेताम की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ स्पष्ट कर चुकी है कि राज्यपाल किसी भी विधेयक को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। ऐसे में उनकी ओर से याचिका वापस नहीं ली जाएगी।

उन्होंने विशेष रूप से राज्य में आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने संबंधी विधानसभा से पारित विधेयक पर शीघ्र निर्णय कराने की मांग की।

हाई कोर्ट ने सरकार को दिया दो सप्ताह का समय

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अपनी याचिका वापस लेने के लिए औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करने हेतु दो सप्ताह का समय दिया। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले की प्रति भी अदालत में प्रस्तुत की जाएगी।

कई अहम विधेयक अब तक लंबित

गौरतलब है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विधानसभा से पारित कई विधेयकों पर राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिल सकी थी। इनमें राज्य में आरक्षण बढ़ाने संबंधी विधेयक के अलावा कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय का नाम बदलकर चंदूलाल चंद्राकर विश्वविद्यालय करने संबंधी विधेयक भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

अन्य राज्यों में भी इसी तरह के विवाद सामने आने के बाद सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने इस विषय पर विस्तृत सुनवाई की थी। अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्यपाल किसी विधेयक को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। उन्हें संविधान के अनुरूप उचित समय के भीतर निर्णय लेना होगा। वे विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा सकते हैं या राष्ट्रपति के विचारार्थ भेज सकते हैं।

संविधान के अनुच्छेद 200 का उल्लेख करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि विधानसभा किसी विधेयक को पुनर्विचार के बाद दोबारा पारित कर देती है, तो राज्यपाल उसे अनिश्चितकाल तक रोककर नहीं रख सकते। साथ ही, यदि लंबे समय तक किसी विधेयक पर निर्णय नहीं लिया जाता है तो प्रभावित पक्ष न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

क्यों अहम है यह मामला?

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार विधानसभा से पारित कोई भी विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद ही कानून बनता है। ऐसे में राज्यपाल के पास लंबे समय तक विधेयकों के लंबित रहने का मुद्दा संवैधानिक और कानूनी बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। 

'डिग्री बड़ी है तो क्या?' हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अनुकंपा नियुक्ति में नहीं चलेगी पसंद की पोस्ट

बिलासपुर:  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता होने से किसी उम्मीदवार को अनुकंपा नियुक्ति के तहत अपनी पसंद या उच्च पद पर नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक राहत देना है, न कि योग्यता के आधार पर नियमित सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना।

जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने सक्ती जिले की निवासी मीनाक्षी चंद्रा की याचिका खारिज करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा उन्हें चपरासी (वर्ग-4) के पद पर दी गई अनुकंपा नियुक्ति को वैध ठहराया है।

पति के निधन के बाद मिली थी अनुकंपा नियुक्ति

याचिका के अनुसार, मीनाक्षी चंद्रा के पति हीरा राम चंद्रा सक्ती जिले के शासकीय प्राथमिक शाला लहंगा में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत थे। 29 नवंबर 2025 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद मीनाक्षी चंद्रा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

जिला शिक्षा अधिकारी, सक्ती ने 18 मार्च 2026 को उन्हें अनुकंपा नियुक्ति देते हुए चपरासी (वर्ग-4) के पद पर नियुक्त किया।

महिला ने कहा- B.Ed. और CG-TET पास हूं, शिक्षक बनाया जाए

डीईओ के आदेश को चुनौती देते हुए मीनाक्षी चंद्रा ने अधिवक्ता विनोद कुमार देवांगन के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह B.Ed. डिग्रीधारी हैं और छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (CG-TET) भी उत्तीर्ण कर चुकी हैं। इसलिए उन्हें चपरासी के बजाय शिक्षक (वर्ग-3) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जानी चाहिए।

सरकार ने बताया- शिक्षक कोटे में कोई पद खाली नहीं था

राज्य सरकार की ओर से डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट अनुजा शर्मा ने याचिका का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि 15 अप्रैल 2024 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के अनुसार वर्ग-3 के केवल 25 प्रतिशत पद ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आरक्षित हैं।

सरकार ने कहा कि संबंधित संभाग में शिक्षक (वर्ग-3) के अनुकंपा कोटे का कोई पद रिक्त नहीं था। ऐसे में परिवार को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से उपलब्ध रिक्ति के आधार पर नियमों के अनुरूप चपरासी (वर्ग-4) का पद दिया गया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता को राज्य सरकार की नीति के तहत पहले ही अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिल चुका है। केवल इस आधार पर कि उनके पास शिक्षक पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता है, उन्हें उस पद पर नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।

अदालत ने यह भी कहा कि डीईओ के 18 मार्च 2026 के नियुक्ति आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि शिक्षक (वर्ग-3) के अनुकंपा कोटे में कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है। इसलिए विभाग द्वारा चपरासी पद पर नियुक्ति देना नीति के अनुरूप और वैध है।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने मीनाक्षी चंद्रा की याचिका खारिज कर दी।

'बांग्लादेशी' बताकर पति को किया डिपोर्ट, लापता होने के मामले में हाई कोर्ट सख्त, केंद्र-राज्य से मांगा जवाब

बिलासपुर: TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक कथित डिपोर्टेशन और उसके बाद व्यक्ति के लापता होने का मामला सामने आया है। बिलासपुर के देवरीखुर्द की रहने वाली दुर्गा शर्मा ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके पति सुब्रिती शर्मा को 'बांग्लादेशी' बताकर अगस्त 2025 में बांग्लादेश भेज दिया। हालांकि, उनका दावा है कि उनके पति वहां भी नहीं पहुंचे और तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से जवाब तलब किया है। अदालत ने केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है और स्पष्ट किया है कि इसके बाद अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

याचिकाकर्ता का दावा, पति के पास थे भारतीय नागरिकता के दस्तावेज

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अदिति सिंघवी ने अदालत को बताया कि दुर्गा शर्मा और सुब्रिती शर्मा का विवाह करीब 15 वर्ष पहले हुआ था। सुब्रिती लंबे समय से भारत में रह रहे थे और उनके पास भारतीय नागरिकता से जुड़े वैध दस्तावेज भी थे।

याचिका के अनुसार, मार्च 2025 में तोरवा थाना पुलिस द्वारा बांग्लादेश से जुड़ी एक आपराधिक जांच के दौरान घटनाक्रम शुरू हुआ। इसके बाद अगस्त 2025 में पुलिस ने सुब्रिती शर्मा को बांग्लादेशी बताते हुए डिपोर्ट कर दिया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनके पति बांग्लादेश भी नहीं पहुंचे और तब से उनका कोई सुराग नहीं मिला है।

केंद्र सरकार ने मांगा समय

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अनमोल शर्मा ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। इस पर हाई कोर्ट ने एक सप्ताह का अंतिम समय देते हुए निर्देश दिया कि जवाबी हलफनामे की अग्रिम प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भी उपलब्ध कराई जाए।

राज्य सरकार से भी मांगा शपथपत्र

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा और शासकीय अधिवक्ता प्रियंक राठी ने अदालत के समक्ष कुछ दस्तावेज पेश किए। बताया गया कि ये दस्तावेज 1 जुलाई 2026 को कवरिंग मेमो के जरिए रिकॉर्ड पर लाए गए थे और राज्य सरकार इन्हीं पर भरोसा कर रही है।

हालांकि, डिवीजन बेंच ने कहा कि दस्तावेजों को केवल मेमो के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी इन दस्तावेजों को विधिवत शपथपत्र के साथ रिकॉर्ड पर पेश करें। इसके लिए भी राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय दिया गया है।

दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को एक-एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने हलफनामे याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, ताकि याचिकाकर्ता अपना पक्ष तैयार कर सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसे दो सप्ताह बाद फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

नोट: मामले में याचिकाकर्ता ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

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