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सावन में शिवभक्तों की सेवा के लिए समिति का विशेष अभियान

कबीरधाम/अमरकंटक।  TODAY छत्तीसगढ़  / सावन माह में भगवान शिव और माँ नर्मदा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देवर्षि श्री नारद सेवा समिति ने विशेष सेवा अभियान की घोषणा की है। आयोजकों के अनुसार, समिति भोरमदेव पैदल यात्रा मार्ग पर सेवा स्टॉल लगाएगी और अमरकंटक में तीन दिवसीय विशाल प्रसादी भंडारे का आयोजन करेगी।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 3 अगस्त, सावन के प्रथम सोमवार को भोरमदेव पैदल यात्रा मार्ग पर लगाए जाने वाले सेवा स्टॉल में शिवभक्तों और कांवड़ यात्रियों के लिए निःशुल्क पेयजल, प्रसाद, फल तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। समिति का कहना है कि इसका उद्देश्य यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध कराना और सेवा भावना को बढ़ावा देना है।

आयोजकों के अनुसार, इसके बाद 10, 11 और 12 अगस्त को अमरकंटक स्थित अमलेश्वर माँ अन्नपूर्णा मंदिर के सामने लगातार तीन दिनों तक विशाल प्रसादी भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान माँ नर्मदा के उद्गम स्थल और भगवान शिव के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद वितरित किया जाएगा। समिति ने बताया कि आयोजन के लिए भोजन, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और स्वयंसेवकों की तैनाती की तैयारी की जा रही है।

प्रेस विज्ञप्ति में समिति ने कहा है कि सावन माह सेवा, भक्ति और समर्पण का पर्व है तथा इसी भावना से हर वर्ष धार्मिक आयोजनों में सेवा कार्य किए जाते हैं। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संभावित अधिक संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जा रहा है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देवर्षि श्री नारद सेवा समिति से पत्रकार सूरज मानिकपुरी, वरिष्ठ पत्रकार ऋषिकांत कुंभकार, नीरज शर्मा, रोशन बघेल, विकाश सोनी और मुकेश अवस्थी सहित अन्य सदस्य जुड़े हुए हैं। समिति ने सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं से आयोजन में सहयोग एवं सहभागिता की अपील भी की है।

मुख्यमंत्री ने रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का बढ़ाया उत्साह

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उन्हें इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञानेश्वरी की सफलता वर्षों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वह भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और छत्तीसगढ़ का नाम नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रतियोगिता के लिए रवाना होने से पहले भी उनकी ज्ञानेश्वरी से मुलाकात हुई थी और अब उनकी सफलता पर पुनः संवाद कर उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश की प्रतिभाएं विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

राजनांदगांव निवासी और छत्तीसगढ़ पुलिस में सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) के पद पर कार्यरत ज्ञानेश्वरी यादव ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका प्रोत्साहन और प्रदेशवासियों का स्नेह उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए नई ऊर्जा देगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खेल और सेवा दोनों क्षेत्रों में ज्ञानेश्वरी यादव का योगदान युवाओं के लिए प्रेरणादायी माना गया है।

जनजातीय प्रतिभाओं को नई उड़ान, मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से की आत्मीय चर्चा

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित 'एकलव्य संवाद' कार्यक्रम में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों से नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने विद्यार्थियों को उनकी सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और विशेषकर जनजातीय समाज के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने यह साबित किया है कि अवसर, संसाधन और दृढ़ संकल्प मिलने पर प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। उन्होंने विद्यार्थियों से एकलव्य के जीवन से प्रेरणा लेते हुए निरंतर अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "खूब पढ़िए, आगे बढ़िए और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदार बनिए।"

मुख्यमंत्री ने गुरु के महत्व पर भी प्रकाश डाला और विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों का सम्मान करने तथा उनके मार्गदर्शन को समाजहित में उपयोग करने की बात कही। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जनजातीय युवाओं की नई पहचान बन रहे हैं और इन विद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थी विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने डॉक्टर बनने जा रहे विद्यार्थियों से कहा कि कुशल चिकित्सक होने के साथ संवेदनशील और विनम्र होना भी आवश्यक है। उनके अनुसार, मरीज के प्रति अच्छा व्यवहार और सेवा भाव भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षा, मेडिकल प्रवेश, छात्रवृत्ति, दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा, मेडिकल शिक्षा में हिंदी माध्यम, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा तथा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने उत्तर दिया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं तथा पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने नालंदा परिसर, ट्राइबल यूथ हॉस्टल, छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण और अन्य योजनाओं की जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की।

मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में बंद पड़े विद्यालयों को पुनः संचालित किया जा रहा है तथा जावंगा एजुकेशन हब की तर्ज पर आधुनिक शिक्षा केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा, ज्ञान और संस्कार के बल पर समाज की सेवा करें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

भोरमदेव मंदिर में मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना, लोककल्याण की प्रार्थना

रायपुर/कबीरधाम। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को अपनी पत्नी कौशल्या साय के साथ विश्वप्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना और मंदिर की परिक्रमा कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने पंच दिवसीय महा चतुर शुद्धि सहस्र कलशम् महाअनुष्ठान में भी भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर उन्होंने प्रदेश की उन्नति, सामाजिक सद्भाव और लोकमंगल की प्रार्थना की।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव धाम छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। उनके अनुसार, ऐसे धार्मिक आयोजन वैदिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और लोककल्याण की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 जुलाई से भगवान शिव की आराधना का पावन श्रावण मास प्रारंभ हो रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ भोरमदेव धाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत करने का अवसर मिला है और इस वर्ष भी वे स्वयं श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए भोरमदेव धाम पहुंचेंगे।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, श्री महादिव्य देशम फाउंडेशन के तत्वावधान में 25 जुलाई से प्रारंभ पंच दिवसीय महाअनुष्ठान कबीरधाम सहित पूरे छत्तीसगढ़ के सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण की भावना से आयोजित किया जा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति में फाउंडेशन के प्रमुख राजीव राकुल स्वामी (केरल) के हवाले से बताया गया है कि यह अनुष्ठान प्राण-प्रतिष्ठित मंदिरों के शुद्धिकरण एवं दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार की वैदिक परंपरा पर आधारित है।

कार्यक्रम में पंडरिया विधायक भावना बोहरा, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, वैदिक आचार्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मैं हूँ बीजापुर टाइगर... बताइए, मैं भाग्यशाली हूँ या दुर्भाग्यशाली?

"क्या मैं भाग्यशाली हूँ कि आज भी जिंदा हूँ? या दुर्भाग्यशाली हूँ कि स्वस्थ होने के बावजूद आज़ादी से वंचित हूँ? यह फैसला मैं आप पर छोड़ता हूँ।"
मैं अभी युवा बाघ हूं। मार्च 2025 की बात है, तारीख मुझे याद नहीं। तब मैं छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर के बीजापुर के घने जंगलों में मजे से रहता था। एक दिन शिकारियों द्वारा बिछाये गए लोहे के तार के फंदे में मेरे पीछे के दोनों पाँव फंस गए, जख्म हो गया। दिन पर दिन घाव गहरा होता गया, मवाद और कीड़े पड़ने लगे, दर्द इतना कि मैं बता नहीं सकता। कुछ दिन बाद शिकारियों में से एक मेरी तरफ भाला लेकर आते दिखा। अपने को बचाने के लिए मैं उस पर झपटा और वह वहीं ढेर हो गया। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को बताया कि जंगल में एक बाघ घायल पड़ा है। कुछ अधिकारियों ने आरोपों से बचने के लिए कह दिया कि मेरे पैर पत्थरों के बीच फंस गए होंगे। 

मैं अभी युवा बाघ हूँ। मार्च 2025 की बात है। तब मैं छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के बीजापुर के घने जंगलों में आज़ाद घूमता था। जंगल ही मेरा घर था और वही मेरी दुनिया। फिर एक दिन सब कुछ बदल गया ...

खैर, ताबड़तोड़ मुझे रेस्क्यू कर 16 अप्रैल को रायपुर के जंगल सफारी जू में लाया गया। इलाज शुरू हुआ, 30 जुलाई को मेरी सर्जरी भी हुई। मुझे बिल्कुल अलग रखा गया, सिर्फ केयर टेकर आता है ताकि मानव से मेरा सीधा संपर्क न हो सके। धीरे-धीरे मैं ठीक होने लगा, जीने की आस जागने लगी।

नवंबर तक मैं लगभग पूरी तरह ठीक हो गया। चार डॉक्टर आये, उन्होंने काफी देर तक मेरी जांच की और रिपोर्ट बनाई। मैंने केयर टेकर से रिपोर्ट लेकर पढ़ी। मैं खुशी से उछल पड़ा। रिपोर्ट में लिखा था कि मैं स्वस्थ हूं, जागरूक रहता हूं, सर्जरी का चीरा पूरी तरह भर गया है, बाल भी आ गए हैं। ऑपरेशन किए गए पैर पर शरीर का पूरा भार डाल सकता हूं, चल सकता हूं, घायल पंजा भी सामान्य हो गया है। चलने, दौड़ने या बैठकर उठते समय डॉक्टरों को दर्द के कोई लक्षण नहीं दिखे। केवल कभी-कभी हल्की लंगड़ाहट दिखाई दी, जो उनके अनुसार समय के साथ ठीक हो जाएगी, या बनी भी रह सकती है परंतु दौड़ने में कोई लंगड़ाहट नहीं थी। डॉक्टर आपस में चर्चा कर रहे थे कि पहले मुझे एक बड़े बाड़े में रखा जाएगा, वहां मेरी शिकार करने और प्राकृतिक जीवन जीने की क्षमता जांची जाएगी और उसके बाद मुझे जंगल में छोड़ दिया जाएगा। वे किसी सॉफ्ट रिलीज की बात कर रहे थे। 

ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी कि जंगल में एक घायल बाघ पड़ा है। बाद में कुछ अधिकारियों ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि शायद मेरे पैर पत्थरों के बीच फँस गए होंगे।

मैं आपको नहीं बता सकता उस दिन मैं कितना खुश था। लगा कि अब फिर वही जिंदगी मिलेगी, मजे से जियूंगा। केयर टेकर ने बताया कि बड़े साहब के आदेश के बाद ही मुझे छोड़ा जाएगा। कोई भी कदमों की आहट होती तो मुझे लगता आदेश आ गया होगा, लेकिन मेरा इंतजार जारी रहा। एक दिन मैंने केयर टेकर से पूछा कि आदेश आ क्यों नहीं रहा? उसने कहा कि विभाग अभी इको-टूरिज्म, विकास और लोगों को रोजगार देने में लगा है, आदेश निकालने का समय नहीं है।

खाली बैठे-बैठे मैंने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम भी पढ़ लिया। उसमें तो कहीं भी इको-टूरिज्म, विकास और रोजगार जैसे शब्द नहीं लिखे दिखे। दो महीने बीत गए। मैंने फिर पूछा तो केयर टेकर ने बताया कि मेरी हेल्थ रिपोर्ट में तो सब कुछ ठीक लिखा था, लेकिन डॉक्टरों ने न जाने क्यों रिपोर्ट में सॉफ्ट रिलीज़ की कोई चर्चा नहीं की।

इस बीच वन्यजीव प्रेमियों ने मेरे बारे में पूछा तो मेरे पूरी तरह स्वस्थ घोषित होने के दो महीने बाद बड़े साहब को याद आया कि यहां एक टाइगर भी पड़ा हुआ है। फरवरी में देहरादून के एक संस्थान, जिसका नाम कुछ डब्ल्यू.आई.आई. जैसा है, को पत्र लिखा गया कि डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि मुझे जंगल में छोड़ने से पहले यह परख लिया जाए कि मैं फिर से जंगल के जीवन में ढल पाऊँगा या नहीं, इसलिए विशेषज्ञ भेजे जाएँ। मैंने अपनी हेल्थ रिपोर्ट कई बार पढ़ी, लेकिन उसमें तो डॉक्टरों ने ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया था। साहब लोगों ने डॉक्टरों का नाम लेकर यह बात कहाँ से जोड़ दी, मुझे आज तक समझ में नहीं आया। शायद उन्हें अपने ही डॉक्टरों पर भरोसा नहीं रहा होगा। वन्यजीव प्रेमियों ने भी मुझे छोड़ने के लिए चिट्ठी लिखी, लेकिन डब्ल्यू.आई.आई. को न कोई रिमाइंडर भेजा गया और न विशेषज्ञ आए। महीने पर महीने बीतते गए। मैं निराश हो गया। अब तो कदमों की आहट पर आदेश का इंतजार भी खत्म हो चुका था। 

अंतर्राष्टीय बाघ दिवस (29 जुलाई) की पूर्व संध्या पर यह लेख सुप्रसिद्ध वन्यजीव और पर्यावरण प्रेमी नितिन सिंघवी द्वारा लिखा गया है। इस लेख में वर्णित घटनाएँ वास्तविक हैं तथा तथ्य उपलब्ध अभिलेखों पर आधारित हैं। 

वन्यजीव प्रेमी ने अधिकारियों से कहा कि मुझे कम से कम सॉफ्ट रिलीज वाले बाड़े में ही छोड़ दें। एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा बाड़ा केवल अचानकमार टाइगर रिजर्व में है और वहां मुझे नहीं रखा जा सकता क्योंकि वहां पहले से बहुत बाघ हैं। कहीं और नया बाड़ा बनाने की तैयारी भी शुरू नहीं हुई है।

फरवरी से जून आ गया। नए साहब आ गए। वन्यजीव प्रेमियों ने मेरी रिहाई की मांग की। परन्तु फाइल में विशेषज्ञों की राय लेने की बात लिखी थी। नए साहब ने 24 जून को फिर डब्ल्यू.आई.आई. को पत्र लिखा। विशेषज्ञ तो नहीं आए, लेकिन अगले ही दिन चार विशेषज्ञों की समिति बनाने की सलाह आ गई। मालूम नहीं जिसने तीन महीने तक जवाब नहीं दिया, उस डब्ल्यू.आई.आई. ने दूसरे ही दिन समिति बनाने की सलाह कैसे दे दी। जो भी हो, समिति बन गई है और आपको अपना दुखड़ा सुनाने के दिन तक वह मुझे देखने नहीं आई है। केयर टेकर बता रहा था कि मुझे लेकर 2 दिन पहले शायद कोई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई है और मुझे छोड़े जाने की संभावना नकारात्मक है। 

इस बीच कई बार अखबारों में पढ़ा कि साहब लोग पड़ोसी राज्य से तीन बाघ लाने की तैयारी कर रहे हैं। मेरा दिल टूट गया। खुद के घर के टाइगर को तो छोड़ नहीं रहे और बाहर से तीन लाने की तैयारी कर रहे हैं। बाघ जितने लंबे समय तक मानव संपर्क और कैद में रहता है, उसके मनुष्यों के प्रति अभ्यस्त होने का जोखिम उतना बढ़ जाता है, जिससे उसे दोबारा जंगल में सफलतापूर्वक प्राकृतिक जीवन अपनाने की संभावना कम हो सकती है। 

आज, मेरे कैद होने के पंद्रह महीने बाद, वहीं पिछले कुछ महीनों में चार-पाँच बाघों का शिकार हो चुका है। केयर टेकर बताता है कि शायद अब वहाँ केवल एक बाघ बचा है। अगर मैं वहीं होता... तो शायद मेरा भी शिकार हो चुका होता।

मेरा गणित थोड़ा कमजोर है। जब मैं बीजापुर-नारायणपुर के जंगलों में घूमता था, तब वहां   10-12 बाघ थे। जो भी हो, मेरा शिकार करने का प्रयास किए पंद्रह महीने हो गए। मुझे स्वस्थ घोषित किए सात महीने हो गए। मैं जिंदा हूं, भले ही कैद में हूं, पर उसी बीजापुर और आसपास के इलाके में पिछले कुछ महीनों में चार से पांच बाघों का शिकार हो चुका है। केयर टेकर बता रहा था वहां सिर्फ एक बचा है। अगर मैं वहीं रहता रहा होता, तो हो सकता है मेरा भी शिकार हो जाता, मैं मर गया होता। ऐसे में आप बताइए, मैं यहां कैद में भाग्यशाली हूं या दुर्भाग्यशाली?

-सही-

बीजापुर टाइगर, 28 जुलाई 2026 

क्या स्मार्ट मीटर सच में बढ़ाता है बिल? पावर कंपनी का बड़ा दावा

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (सीएसपीडीसीएल) ने स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही भ्रांतियों के बीच एक अध्ययन जारी करते हुए दावा किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली की खपत नहीं बढ़ाते। कंपनी के अनुसार, रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में स्मार्ट मीटर लगे घरेलू उपभोक्ताओं के मई, जून और जुलाई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण में जुलाई माह के दौरान बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रायपुर शहर में 3.11 लाख से अधिक घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में 1 से 26 जून के बीच लगभग 10.85 करोड़ यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई, जबकि 1 से 26 जुलाई के बीच यह घटकर लगभग 7.77 करोड़ यूनिट रह गई। कंपनी का दावा है कि यह करीब 28 प्रतिशत की कमी है। वहीं 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत वाले 1.21 लाख से अधिक उपभोक्ताओं में लगभग 44 प्रतिशत खपत घटने का दावा किया गया है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दुर्ग में 400 यूनिट से अधिक खपत वाले 240 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में जुलाई में कुल 76,257 यूनिट खपत दर्ज की गई, जबकि जून में यह 1,65,411 यूनिट और मई में 1,75,451 यूनिट थी। कंपनी के अनुसार, यहां जुलाई में लगभग 53 प्रतिशत कमी दर्ज हुई।

इसी प्रकार बिलासपुर सिटी सर्किल के 9,717 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में मई में औसत खपत 524 यूनिट, जून में 596 यूनिट और जुलाई में घटकर 312 यूनिट दर्ज होने का दावा किया गया है, जो लगभग 43 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।

पावर कंपनी का कहना है कि अधिक बिजली खपत का कारण स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं द्वारा एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग है। कंपनी ने यह भी दावा किया है कि जिन घरों में अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, वहां भी मई और जून में पिछले वर्ष की तुलना में खपत अधिक रही, जबकि जुलाई में कमी दर्ज हुई।

कंपनी के अनुसार, उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए अब तक 4,500 चेक मीटर लगाए गए हैं और इनमें दर्ज खपत स्मार्ट मीटर की रीडिंग के समान पाई गई है। साथ ही बताया गया है कि उपभोक्ता 'मोर बिजली' ऐप के माध्यम से स्मार्ट मीटर की दैनिक तथा प्रत्येक आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं।

पावर कंपनी ने यह भी जानकारी दी है कि स्वीकृत भार से अधिक उपयोग के कारण लगने वाली सप्लाई अफोर्डिंग राशि की वसूली की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब यह राशि वर्ष में केवल एक बार दिसंबर माह के बिल (जो जनवरी में जारी होगा) में देय होगी।

कंपनी ने उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर संबंधी भ्रामक जानकारी पर विश्वास नहीं करने और किसी भी शिकायत या शंका के समाधान के लिए टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क करने की अपील की है। 

( ऊपर फोटो थंबनेल सांकेतिक है, खबर के डाटा से इसका कोई सरोकार नहीं है। )

मुख्यमंत्री ने ईशा सिंह, मनु भाकर और ज्ञानेश्वरी यादव को दी शुभकामनाएं

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर पोस्ट कर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाली भारतीय खिलाड़ियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री ने ISSF शूटिंग वर्ल्ड कप 2026 में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली ईशा सिंह और कांस्य पदक जीतने वाली मनु भाकर की सराहना करते हुए लिखा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर विश्व मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों खिलाड़ी भविष्य में भी अपनी प्रतिभा और लगन से नई ऊंचाइयों को हासिल करेंगी और देश का गौरव बढ़ाएंगी।

एक अन्य पोस्ट में मुख्यमंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने वैश्विक मंच पर देश और राज्य का नाम रोशन किया है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में उल्लेख किया कि राजनांदगांव की रहने वाली और छत्तीसगढ़ पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) के पद पर कार्यरत ज्ञानेश्वरी यादव की यह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि खेल और सेवा दोनों क्षेत्रों में उनका समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

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