TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक निजी स्कूल (सेंट जेवियर स्कूल) की नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले को लेकर सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया है.
मंगलवार को 'सर्व सेन समाज छत्तीसगढ़' के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय (कलेक्ट्रेट) का घेराव किया. प्रदर्शनकारियों ने इस घटना के मुख्य अभियुक्त को कड़ी सज़ा देने और मामले में लापरवाही बरतने वाले स्कूल प्रबंधन के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की है.
कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन, स्कूल बंद करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान सर्व सेन समाज के प्रांताध्यक्ष त्रिलोक चंद्र श्रीवास के नेतृत्व में प्रभारी कलेक्टर को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
कड़ी सज़ा: नाबालिग छात्रा का एक साल तक कथित तौर पर यौन शोषण करने वाले अभियुक्त शिक्षक को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए.
सह-आरोपियों पर कार्रवाई: घटना की जानकारी होने के बावजूद इसे छिपाने और चुप्पी साधे रखने वाले स्कूल के अन्य दोषी शिक्षकों व कर्मचारियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज़ कर कार्रवाई हो.
संस्थान पर कार्रवाई: नियमों की अनदेखी और छात्राओं की सुरक्षा में बड़ी चूक को देखते हुए सेंट जेवियर स्कूल (सिरगिट्टी) का संचालन तुरंत बंद किया जाए.
10 दिनों के भीतर आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के बाद सेन समाज के प्रांताध्यक्ष त्रिलोक चंद्र श्रीवास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि संबंधित संस्थान और मामले में संलिप्त अन्य ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ 10 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा.
इस कलेक्ट्रेट घेराव में सेन समाज के संभागीय व ज़िला पदाधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय कांग्रेस नेता महेश दुबे और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए.
प्रभारी कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है. बिलासपुर के प्रभारी कलेक्टर ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को तत्काल निर्देश जारी किए हैं. अधिकारियों को पूरे मामले की गहराई से जांच करने और दोषियों के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द वैधानिक क़ानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है.







