STATE

नई दिल्ली, छत्तीसगढ़, Politics, बिहार

GUEST COLUMN

Guest Column

EDITOR CHOICE

Editor Choice

TRAVELLING STORY

TRAVELLING STORY

TCG EXCLUSIVE

टीसीजी एक्सक्लूसिव, इतिहास

VIDEO

VIDEO
LATEST NEWS
Loading Latest News...

अवैध रेत परिवहन मामले में आरोपी को कठोर कारावास, विशेष न्यायालय ने सुनाई सजा

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में रेत के अवैध परिवहन के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को तीन वर्ष के कठोर कारावास और कुल 26 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला अरपा नदी के नगोई घाट से ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत के अवैध परिवहन से जुड़ा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के दौरान प्रकरण दर्ज किया गया था।

खनिज शाखा से मिली जानकारी के अनुसार, 17 जून 2025 को ग्राम नगोई घाट स्थित अरपा नदी से ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रमांक CG 10 BE 7869 में रेत का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर कुंवर सिंह कंवर, पिता सम्मार सिंह, निवासी सल्का, थाना कोटा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। कार्रवाई के बाद वाहन को पुलिस चौकी बेलगहना की अभिरक्षा में रखा गया था।

दो अलग-अलग प्रावधानों में सजा और जुर्माना

मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, जिला बिलासपुर ने 28 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), सहपठित धारा 3(5) के तहत आरोपी को तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत 25 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड लगाया गया। इस तरह कुल जुर्माना 26 हजार रुपये हुआ।

विशेष अभियान में 66 मामलों में FIR

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 15 जून 2025 को खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग ने संयुक्त कार्रवाई की।

अभियान के तहत कोटा, रतनपुर, सीपत, सिविल लाइन, सरकंडा, मस्तूरी, पचपेड़ी, चकरभाठा और हिर्री थानों में कुल 66 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इनमें से एक मामले में अब न्यायालय का फैसला आया है।

प्रशासन के अनुसार, अवैध खनिज गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई और न्यायालय से मिल रही सजा का उद्देश्य ऐसे मामलों पर रोक लगाना और नियमों का उल्लंघन करने वालों को कड़ा संदेश देना है।

तूफान ‘अर्नब’ का असर: सरकारी और निजी स्कूलों में कल अवकाश

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए बिलासपुर जिले में कल 29 अक्टूबर, गुरुवार को सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, यह छुट्टी जिले के सभी शासकीय और अशासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों पर लागू होगी।

मौसम विभाग से मिली जानकारी के आधार पर यह फैसला छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचने में होने वाली संभावित परेशानी और उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिलासपुर की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 29 अक्टूबर गुरुवार को जिले के सभी संबंधित शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश रहेगा। आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

सुकमा में कलेक्टर-एसपी का ताबड़तोड़ दौरा, चार बिजली फीडर जल्द चालू करने के निर्देश

सुकमा। TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में विकास कार्यों की गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और नागरिक सुविधाओं की स्थिति जांचने के लिए कलेक्टर अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने संयुक्त मैदानी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आपदा प्रबंधन की तैयारियों, छात्रावास, बिजली आपूर्ति, पोषण पुनर्वास केंद्र और धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने और जनहित के कार्यों में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। 

तूफान की आशंका के बीच राहत शिविरों का निरीक्षण

संभावित ‘अर्नब’ तूफान को देखते हुए कलेक्टर और एसपी ने कोंटा के आईटीआई और रेस्ट हाउस में बनाए गए बाढ़ एवं आपदा राहत शिविरों का जायजा लिया। उन्होंने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को सतर्क रहने और राहत-बचाव कार्यों के लिए जरूरी संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए।

इसके बाद अधिकारियों ने सीआरपीएफ कैंप रामाराम में निर्माणाधीन ‘सेवा डेरा’ का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करते हुए काम तय समय-सीमा में पूरा करने को कहा। कोंटा एसडीएम कार्यालय के सिंगल विंडो कक्ष में नागरिकों से संवाद कर सरकारी सेवाएं सरल, पारदर्शी और समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।

छात्रावास में विद्यार्थियों से पढ़ाई का हाल जाना

कलेक्टर अमित कुमार और एसपी मयंक गुर्जर पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास, कोंटा भी पहुंचे। यहां उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, तिमाही परीक्षा के परिणाम और दैनिक अध्ययन की दिनचर्या के बारे में जानकारी ली।

कलेक्टर ने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उच्च शिक्षा, आवास और भोजन के लिए शासन की ओर से उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला प्रशासन की ‘क्षितिज कोचिंग’ का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी।

एसपी ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, अनुशासन और एकाग्रता के साथ मेहनत करने तथा पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी बेहतर प्रदर्शन करने को कहा। अधिकारियों ने छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मीनू और दैनिक सुविधाओं की जानकारी लेकर आवश्यक सुधार करने के निर्देश भी दिए।

चार बिजली फीडर जल्द चालू करने के निर्देश

विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के तहत बंडा में नवनिर्मित विद्युत उपकेंद्र का निरीक्षण किया। तकनीकी व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद संबंधित अधिकारियों को चारों फीडर जल्द चालू करने के निर्देश दिए गए। इससे वनांचल क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बेहतर और निर्बाध बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा कोंटा स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र की व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने धान खरीदी केंद्र, कोंटा का भी औचक निरीक्षण किया। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को ध्यान में रखते हुए जरूरी व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त रखने और किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान देने को कहा गया।

दूरस्थ क्षेत्रों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर

दौरे के दौरान प्रशासन ने आपदा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, विद्युत अधोसंरचना और कृषि उपज खरीदी से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा, विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता प्राथमिकता है।

इस दौरान कोंटा एसडीएम निधि प्रधान, सीएसईबी के कार्यपालन अभियंता सौरभ विश्वकर्मा, जिला खाद्य अधिकारी रवि कोमरा और एसी ट्राइबल हेमंत सिन्हा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। 


बाल शोषण से बचाव और ऑनलाइन सतर्कता, 42 न्यायाधीशों ने बच्चों से किया संवाद

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए रायपुर के 21 विद्यालयों में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान के अंतर्गत 42 न्यायाधीश विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं। बच्चों को बाल संरक्षण कानूनों, व्यक्तिगत सुरक्षा, इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल और निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी जा रही है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान में यह अभियान 10 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ यह बताना है कि असुरक्षा, शोषण या किसी परेशानी की स्थिति में वे किससे मदद मांग सकते हैं, शिकायत कैसे दर्ज करा सकते हैं और निःशुल्क विधिक सहायता का लाभ कैसे उठा सकते हैं।

बाल शोषण से ऑनलाइन सुरक्षा तक 

रायपुर और गरियाबंद जिले में अभियान के पहले चरण के तहत 26 से 31 अक्टूबर तक विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग और साइबर क्राइम विभाग को शामिल करते हुए जिला स्तरीय समन्वय समिति बनाई गई है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा के निर्देश पर चयनित विद्यालयों में ये कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इनमें ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’ और ‘न बाल विवाह, न बाल शोषण’ जैसे विषयों पर बच्चों को जागरूक किया जा रहा है।

कार्यक्रमों में महिला एवं बाल विकास विभाग के पॉक्सो सपोर्ट पर्सन, किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति के सदस्य तथा बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ बच्चों से संवाद कर रहे हैं। इसका मकसद बच्चों को उनकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समझने और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित करना है।

नुक्कड़ नाटक और प्रश्नोत्तरी 

अभियान में विद्यालयों के आसपास स्थित विधि महाविद्यालयों के शिक्षक और विधि विद्यार्थी भी भाग ले रहे हैं। नुक्कड़ नाटक, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला और पेंटिंग जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों तक सुरक्षा और कानूनी अधिकारों से जुड़ी जानकारी पहुंचाई जा रही है।

अभियान का उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना और उन्हें यह जानकारी देना है कि किसी भी तरह की असुरक्षा या शोषण की स्थिति में सहायता कहां से मिल सकती है।

अभियान के बाद भी जारी रहेंगी 

निर्देश दिए गए हैं कि अभियान की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी विद्यालयों में बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास तथा बाल संरक्षण से जुड़ी जागरूकता के लिए नियमित गतिविधियां आयोजित की जाएं। इससे बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी लगातार मिलती रहेगी।


सूरजपुर को 232 करोड़ की सौगात! प्रेमनगर में डोम, इंडोर स्टेडियम और सड़क बनेगी

रायपुर/सूरजपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर जिले को 232 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी है। बुधवार को रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वर्चुअल माध्यम से प्रेमनगर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने 24.29 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण 63 विकास कार्यों का लोकार्पण और 208.20 करोड़ रुपये की लागत वाले 54 कार्यों का भूमिपूजन किया। इसके साथ ही प्रेमनगर नगर पंचायत के लिए 2.70 करोड़ रुपये के अतिरिक्त विकास कार्यों की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरगुजा और बस्तर सहित प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास की नई संभावनाओं को साकार करना सरकार का संकल्प है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है।

प्रेमनगर में डोम, इंडोर स्टेडियम और सड़क की घोषणा

मुख्यमंत्री साय ने प्रेमनगर नगर पंचायत में तीन प्रमुख विकास कार्यों की घोषणा की। इनमें मंगल भवन के पास डोम निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये, इंडोर स्टेडियम के लिए 50 लाख रुपये और वार्ड क्रमांक 10, 11 एवं 12 से विश्रामगृह तक करीब दो किलोमीटर बीटी सड़क बनाने के लिए 1.20 करोड़ रुपये शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। क्षेत्र की जरूरतों और जनप्रतिनिधियों की मांगों के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने प्रतिकूल मौसम के कारण कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंच पाने पर क्षेत्रवासियों से खेद जताया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की तैयारियों के लिए जिला प्रशासन की सराहना भी की।

जल संचय अभियान में सूरजपुर प्रदेश में प्रथम

मुख्यमंत्री ने जल संचय जनभागीदारी अभियान में सूरजपुर जिले की उपलब्धि की सराहना करते हुए नागरिकों, कलेक्टर और जिला प्रशासन की टीम को बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान में सूरजपुर प्रदेश में पहले और देश में चौथे स्थान पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते वर्षा चक्र और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जल संरक्षण बेहद जरूरी है। वर्षा जल का संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।

जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े 2,212 कार्यों पर 130.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन कार्यों से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने, भूजल स्तर सुधारने और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य है।

किसानों के लिए धान खरीदी और सिंचाई सुविधाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आर्थिक समृद्धि और कृषि सुविधाओं के विस्तार के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदा जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए 360 नए धान खरीदी केंद्रों को स्वीकृति दी गई है।

उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा पुरानी सिंचाई योजनाओं की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए 2,800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। महिलाओं के जीवन में बढ़ता आत्मविश्वास और उनके चेहरों पर खुशी योजनाओं की सार्थकता को दर्शाती है।

उन्होंने प्रधानमंत्री जनमन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रदेश में करीब 32 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, कमार, बैगा और अबूझमाड़िया जैसे समुदायों को पक्के आवास और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण की पारिश्रमिक दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की गई है, जिससे वनवासी परिवारों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।

बस्तर और सरगुजा में विकास की नई संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है। जिन क्षेत्रों में पहले विकास कार्यों में बाधाएं थीं, वहां सड़क, बिजली, पानी, आवास और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बस्तर और सरगुजा अंचल में पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों को नई पहचान देने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

घर बैठे शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का उद्देश्य नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देना है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायतों के समयबद्ध निराकरण और सेवा सेतु के जरिए शासकीय सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से शासकीय सेवाओं के साथ बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंजोर विजन 2047 का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में काम कर रही है। लक्ष्य है कि प्रदेश के हर नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के समान अवसर मिलें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरगुजा संभाग में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ग्राम पंचायतों की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक संबल दे रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से गरीब परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

कार्यक्रम में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं विधायक गोमती साय, भरत सिंह सिसोदिया, विधायक भूलन सिंह मरावी, विधायक शकुंतला पोर्ते, जिला पंचायत अध्यक्ष चंदमणि पैकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

उरांव समाज को बड़ी सौगात, गनोद में 50 लाख रुपये से बनेगा सामुदायिक भवन

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि करम परब हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इसका संरक्षण और संवर्धन हम सभी का नैतिक दायित्व है। प्रकृति के प्रति आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री बुधवार को राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम परिसर में उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ की ओर से आयोजित करम पूजा परब 2026 में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने करम राजा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने भारत माता के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया।

गनोद में बनेगा सामुदायिक भवन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने रायपुर जिले के गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भवन बनने से समाज को सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के आयोजन के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। इससे समाज के लोगों को एक मंच पर आकर अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। 

प्रकृति से सामंजस्य का संदेश देता है करम परब

मुख्यमंत्री ने कहा कि करम परब प्रकृति के प्रति प्रेम, आस्था और सम्मान की भावना को दर्शाता है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की जो परंपरा विकसित की, उसमें आज भी समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश निहित हैं। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, सामूहिकता और सामाजिक एकता के मूल्यों से जोड़ता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपर्वों और प्रकृति से गहरे जुड़ाव से है। प्रदेश के विभिन्न जनजातीय समाजों ने अपनी विशिष्ट परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजकर रखा है। करम परब भी इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना के साथ आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की प्रेरणा देता है।

सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना जरूरी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संस्कृति और परंपराएं केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें पूर्वजों का ज्ञान, जीवन मूल्य और समाज को एकजुट रखने की भावना समाहित है। आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अपनी भाषा, लोकगीतों, लोकनृत्यों और पारंपरिक पर्वों से जुड़ी रहेगी, तभी सांस्कृतिक विरासत आगे बढ़ेगी। करम परब जैसे आयोजन समाज के लोगों को एक मंच पर लाते हैं और वरिष्ठजनों से परंपराओं तथा रीति-रिवाजों को जानने-समझने का अवसर देते हैं।

उरांव समाज के प्रयासों की सराहना

मुख्यमंत्री ने उरांव समाज की ओर से सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विविध जनजातीय परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनमें प्रकृति के प्रति सम्मान, परस्पर सहयोग और सामाजिक समरसता का संदेश मिलता है। अपनी संस्कृति पर गर्व करने के साथ उसका संरक्षण करना सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने करम पूजा परब की शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाए तथा समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना और मजबूत हो।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, समाज प्रमुख बिन्देश्वर भगत, उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ के पदाधिकारी, समाज के वरिष्ठजन, सदस्य और बड़ी संख्या में परिवारजन उपस्थित रहे।

रायपुर से दिल्ली जाना है? जानिए पूजा स्पेशल ट्रेन की तारीख और टाइमिंग

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  दीपावली और छठ पूजा के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने दुर्ग और हजरत निजामुद्दीन के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। ट्रेन दोनों दिशाओं में तीन-तीन फेरे लगाएगी। इससे छत्तीसगढ़ से दिल्ली और रास्ते के प्रमुख स्टेशनों तक जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त रेल सुविधा मिलेगी।

रेलवे के अनुसार, गाड़ी संख्या 08751 दुर्ग-निजामुद्दीन पूजा स्पेशल दुर्ग से 1, 8 और 15 नवंबर 2026 को प्रत्येक रविवार रवाना होगी। वापसी में गाड़ी संख्या 08752 निजामुद्दीन-दुर्ग पूजा स्पेशल निजामुद्दीन से 2, 9 और 16 नवंबर को प्रत्येक सोमवार चलेगी।

छत्तीसगढ़ के इन स्टेशनों पर होगा ठहराव

इस ट्रेन का वाणिज्यिक ठहराव दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत रायपुर, उसलापुर, पेंड्रारोड, अनूपपुर, शहडोल और उमरिया स्टेशनों पर रहेगा। इसके अलावा ट्रेन कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, आगरा कैंट और मथुरा होते हुए निजामुद्दीन पहुंचेगी।

दुर्ग से निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेन का टाइम टेबल

गाड़ी संख्या 08751 दुर्ग से सुबह 10:45 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 11:10 बजे निजामुद्दीन पहुंचेगी।

स्टेशनआगमनप्रस्थान
दुर्ग—10:45
रायपुर11:2011:25
उसलापुर13:2013:30
पेंड्रारोड14:5514:57
अनूपपुर15:4015:45
शहडोल16:2016:22
उमरिया17:1417:16
कटनी मुड़वारा19:4019:50
दमोह20:5020:52
सागर22:0022:05
वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसीअगले दिन 03:2503:35
आगरा कैंट07:1007:15
मथुरा08:5509:00
हजरत निजामुद्दीन—11:10 आगमन

समय 24 घंटे के बजाय सामान्य घड़ी के प्रारूप में दिया गया है।

निजामुद्दीन से दुर्ग लौटने वाली ट्रेन की टाइमिंग

गाड़ी संख्या 08752 निजामुद्दीन से दोपहर 12:30 बजे रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 1:45 बजे दुर्ग पहुंचेगी।

स्टेशनआगमनप्रस्थान
हजरत निजामुद्दीन—12:30
मथुरा14:1514:20
आगरा कैंट15:1015:15
वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी19:5019:55
सागर23:5023:55
दमोहअगले दिन 01:0001:02
कटनी मुड़वारा02:4502:55
उमरिया04:1804:20
शहडोल05:3805:40
अनूपपुर06:3006:35
पेंड्रारोड07:1507:17
उसलापुर09:4509:55
रायपुर12:1012:15
दुर्ग—13:45 आगमन

ट्रेन में होंगे 20 कोच

रेलवे के मुताबिक, पूजा स्पेशल ट्रेन में कुल 20 कोच लगाए जाएंगे। इनमें दो एसएलआरडी, चार जनरल, 11 स्लीपर, दो एसी थ्री-टियर और एक एसी सेकंड क्लास कोच शामिल हैं।

त्योहारों के दौरान अतिरिक्त यात्रियों को सुविधा देने के उद्देश्य से यह ट्रेन चलाई जा रही है। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले संचालन की तारीख, समय-सारिणी और ठहराव की जानकारी रेलवे की अधिकृत वेबसाइट, NTES या RailOne ऐप से जांचने की सलाह दी गई है।

© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com
TODAY छत्तीसगढ़
लाइव मार्केट & सराफा