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बिलासपुर पुलिस को मिला सुदृढ़ आधार : नवनिर्मित रक्षित आरक्षी केंद्र का लोकार्पण


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  प्रदेश के प्रमुख और संवेदनशील जिलों में शुमार बिलासपुर में पुलिस अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रविवार, 29 मार्च को सामने आया, जब मुख्यमंत्री के करकमलों से नवनिर्मित रक्षित आरक्षी केंद्र कार्यालय भवन का विधिवत लोकार्पण किया गया। लंबे समय से जिला पुलिस के अनेक कार्यालय, थाना एवं चौकियां पुराने और जर्जर भवनों में संचालित हो रही थीं। इनमें से कई भवन अंग्रेज शासनकाल में निर्मित थे, जिनकी स्थिति समय के साथ अत्यंत जर्जर हो चुकी थी। ऐसे में आधुनिक, सुरक्षित और सुविधासंपन्न अधोसंरचना की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

नवनिर्मित रक्षित आरक्षी केंद्र न केवल पुलिस प्रशासन के कार्यों को अधिक सुगम और प्रभावी बनाएगा, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। यह भवन जिला पुलिस के संचालन, संसाधन प्रबंधन और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए एक केंद्रीय आधार के रूप में कार्य करेगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के प्रयासों से पुलिस अधोसंरचना के विकास को नई गति मिली है। उनके मार्गदर्शन में रक्षित आरक्षी केंद्र के साथ-साथ शहीद स्मारक एवं (AJPU) किशोर बालक अनुसंधान इकाई कार्यालय का निर्माण भी पूर्ण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा थाना पचपेड़ी के भवन निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं, जो शीघ्र ही पूर्ण होंगे।

आगामी योजनाओं के अंतर्गत चौकी केंदा, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (कोटा एवं बिलासपुर) के कार्यालय एवं आवास, 110 आवासीय क्वार्टर तथा सामुदायिक भवनों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को बेहतर आवासीय और कार्यपरिसर उपलब्ध हो सकेगा। रक्षित आरक्षी केंद्र जिला पुलिस का मुख्यालय होने के साथ-साथ पुलिस व्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। यह केंद्र कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वीआईपी सुरक्षा, आपात स्थितियों में बल की तैनाती, संसाधनों के प्रबंधन और नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाता है। यहीं से वाहनों, ईंधन, शस्त्र-गोला-बारूद, वर्दी, उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों का सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, यह केंद्र पुलिस जवानों के प्रशिक्षण, पीटी परेड, अनुशासन, स्वास्थ्य एवं दक्षता विकास का प्रमुख स्थल भी है। साथ ही, पुलिस परिवारों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का संचालन भी यहीं से किया जाता है, जिससे बल के मनोबल और कार्यक्षमता को सुदृढ़ आधार मिलता है। निस्संदेह, यह नवनिर्मित रक्षित आरक्षी केंद्र बिलासपुर पुलिस के लिए एक आधुनिक, संगठित और सशक्त कार्यसंरचना का प्रतीक है, जो भविष्य में कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से और अधिक प्रभावी ढंग से निपटने में सहायक सिद्ध होगा।

बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट से शुरू हुई रात्रि उड़ान सेवा, मुख्यमंत्री ने भरी पहली रात की उड़ान


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट से आज रात्रि उड़ान सेवा की ऐतिहासिक शुरुआत हो गई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नाइट ऑपरेशन्स का लोकार्पण किया और इसी दौरान स्वयं रात में पहली उड़ान से रायपुर के लिए रवाना हुए। विधायक श्री धर्मजीत सिंह भी मुख्यमंत्री जी के साथ रात्रि कालीन उड़ान में रायपुर गए।उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट को 3 सी वीएफआर से 3 सी आई एफ आर  श्रेणी में उन्नत करने के लिए कुल 31 करोड़ 1 लाख रुपए की लागत से कार्य किया गया है। इस उन्नयन के बाद डीजीसीए ने 6 फरवरी 2026 को 3 सी आई एफ आर एवं रात्रि संचालन की अनुमति प्रदान की थी। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने की। इस अवसर पर विशेष रूप से विधायक श्री धरमलाल कौशिक, श्री अमर अग्रवाल, श्री धर्मजीत सिंह, श्री सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी उपस्थित  थी।

        मुख्यमंत्री  श्री साय ने अपने संबोधन में इस उपलब्धि को योजनाकारों, तकनीकी टीम, एयरपोर्ट कर्मियों और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि रात्रिकालीन उड़ान सेवा शुरू होने से बिलासपुर की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो गई है। इसके लिए यहां के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने काफी संघर्ष किया है। उन्होंने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुविधा बिलासपुर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। रात्रि उड़ान सेवा शुरू होने से अब निर्धारित और अनिर्धारित उड़ानों के साथ-साथ आपातकालीन एवं मेडिकल फ्लाइट्स भी रात में संचालित हो सकेंगी, जिससे जीवनरक्षक सेवाएं और अधिक प्रभावी होंगी। बेहतर हवाई संपर्क से व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से इस नई सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने की अपील करते हुए सभी यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुखद यात्रा की कामना की। यह ऐतिहासिक पहल बिलासपुर को प्रदेश के प्रमुख हवाई केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। समारोह को केंद्रीय राज्य मंत्री श्री टोकन साहू ने भी संबोधित किया उन्होंने बिलासपुर की जनता को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।श्री साहू ने कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट में तमाम सुविधाएं विकसित हो रही हैं । रक्षा मंत्रालय से जमीन मिल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हवाई चप्पल पहनने वाले को हवाई यात्रा करने के सपना पूरा हो रहा है।

मुख्यमंत्री की बड़ी सौगात: 27 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर प्रवास के दौरान शहर को विकास की नई दिशा देने महत्वपूर्ण सौगातें दी। इस अवसर उन्होंने अरपा रिवर व्यू के पास नवनिर्मित अटल परिसर में आयोजित समारोह में 26.93 करोड़ की लागत के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।  

मुख्यमंत्री द्वारा इनमें लगभग 12.43 करोड़ रुपए की लागत से पूर्ण हुए कार्यों का लोकार्पण किया गया। इनमें प्रमुख रूप से 50 लाख रुपए की लागत से बने अटल परिसर निर्माण कार्य, 73.22 लाख से निर्मित वार्ड क्रमांक 18 में मराठी कन्या शाला भवन में प्रथम तल निर्माण, इमलीपारा में 10 करोड़ की लागत से नवनिर्मित व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण तथा 1.20 करोड़ से बने रक्षित आरक्षी केंद्र निर्माण का लोकार्पण शामिल हैं। ये सभी कार्य शहरी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश के मुखिया श्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के निर्माता भारत में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी कवि साहित्यकार प्रखर राजनेता थे, उन्होंने अपने वादे के अनुरूप 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का निर्माण किया। अटल जी की प्रतिमा उनके ऐतिहासिक व्यक्तित्व से प्रेरणा एवं स्मृतियों को सहेजने की पहल है। छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के कारण इसका तेजी से विकास हो रहा है, हमने राज्य के सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण का निर्णय लिया है। पिछले 25 दिसंबर को 115 निकायों में अटल परिसर का लोकार्पण किया गया। 26 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों से निश्चित रूप से जिले की तस्वीर बदलेगी। हमारी सरकार बिलासपुर के सर्वांगीण विकास के संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति बनी है जिसका प्रभाव पूरे विश्व सहित हमारे देश में भी पड़ा है लेकिन हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता के कारण हम सुरक्षित हैं। हमारे देश की विदेश नीति अच्छी है, आपूर्ति व्यवस्था में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी इसके लिए विचार विमर्शकर कार्य योजना बनाई गई। उन्होंने आम जनों को अफवाह एवं भ्रामक सूचनाओं से दूर रहने की अपील की। 

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोख़न साहू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अटल परिसर का लोकार्पण हमारे लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण का निर्णय लिया गया है इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद दिया। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति के अजातशत्रु थे, उनके योगदान को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता उन्होंने भारत को परमाणु संपन्न राष्ट्र बनाया, शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम अटल जी ने किया, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांव को सड़क से जोड़ने का काम किया। छत्तीसगढ़ की जनता की खुशहाली के लिए राज्य का निर्माण अटल जी की देन है। 

कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में विश्व युद्ध के संकट से जूझ रहा है लेकिन ऐसी स्थिति में भारत पूरी दृढ़ता और मजबूती के साथ खड़ा है। इसका श्रेय स्वर्गीय भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है। आज के इस कार्यक्रम में अटल जी के प्रतिमा के अनावरण का साक्षी बनने का अवसर मिला यह हमारे लिए गौरव का क्षण हैं।

नगर निगम महापौर श्रीमती पूजा विधानी ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज छत्तीसगढ़ के निर्माता युग पुरुष अटल जी के प्रतिमा का अनावरण किया गया है। अटल जी कवि, और प्रखर राष्ट्रवादी राजनेता के रूप में जाने जाते हैं। अटल जी की प्रतिमा न केवल मूर्ति है बल्कि उनके ऐतिहासिक व्यक्तित्व की स्मृतियों को सहेजने की और उनसे प्रेरित होने की एक पहल है। 

भूमिपूजन से विकास को मिलेगा और गति

इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री साय लगभग 14.50 करोड़ रुपए की लागत वाले नए विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इनमें 12.95 करोड़ की लागत से प्रस्तावित अरपा क्षेत्र में सड़क, नाला एवं पिचिंग निर्माण कार्य, 1.04 करोड़ से बननेवाले जरहाभाठा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण व नवीनीकरण कार्य तथा उसलापुर क्षेत्र में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा एवं चबूतरा निर्माण के लिए भूमिपूजन कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं से शहर के बुनियादी ढांचे में मजबूती आएगी, यातायात व्यवस्था बेहतर होगी तथा नागरिकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा।

रेत पर उकेरे शब्दों की संवेदनशील आभा : अजीत सिंह गौर के काव्य-संग्रह का लोकार्पण


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर की साहित्यिक फिज़ा उस समय विशेष रूप से आलोकित हो उठी, जब रविवार, 29 मार्च को सी एम पी डी आई (CMPDI) के कम्युनिटी हॉल में अजीत सिंह गौर के प्रथम काव्य-संग्रह “रेत पर उकेरे जो शब्द” का गरिमामय विमोचन संपन्न हुआ। यह अवसर केवल एक पुस्तक के प्रकाशन का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील रचनाकार के आत्मप्रकाश का उत्सव बन गया, जिसमें प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और बुद्धिजीवियों की स्नेहिल उपस्थिति ने आयोजन को सार्थकता प्रदान की। इस गरिमामय आयोजन में देश के प्रख्यात साहित्यकार सतीश जायसवाल, ख्यातिलब्ध कवि डॉक्टर अजय पाठक, जयप्रकाश, अशोक शर्मा, नीरज मंजीत, पद्मनाभ गौतम और दलजीत सिंह कालरा मौजूद रहे। पुस्तक विमोचन की इस यादगार संध्या में शहर के नामचीन चिकित्सक द्वय डॉक्टर कपिल मिश्रा और डॉक्टर दीप्ती मिश्रा के छायाचित्र और पेंटिंग्स की प्रदर्शनी भी लगाई गयी। कार्यक्रम में मशहूर गायक गुरशीत खनूजा की मनमोहक प्रस्तुति ने समां बांधा वहीँ डॉक्टर सुप्रिया भारतीयन की आवाज़ ने बतौर मंच संचालक पुरे कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। 

विमोचन समारोह में वक्ताओं ने कृति को जीवनानुभवों की सूक्ष्म अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि यह संग्रह मनुष्य के अंतर्मन में उठने वाली उन तरंगों का शब्दांकन है, जो सामान्यतः समय की रेत पर अनलिखी रह जाती हैं। अजीत सिंह गौर ने इन क्षणों को अपनी सहज, आत्मीय और मर्मस्पर्शी भाषा में इस प्रकार उकेरा है कि वे पाठक के भीतर एक स्थायी छाप छोड़ जाते हैं। कवि की रचनाओं में न तो आडंबर है, न ही शब्दों का अनावश्यक विस्तार; बल्कि एक शांत, संयत और विचारशील दृष्टि है, जो जीवन के सूक्ष्मतम बिंदुओं को भी अर्थपूर्ण बना देती है। यही कारण है कि शीर्षक “रेत पर उकेरे जो शब्द” अपने भीतर क्षणभंगुरता और स्थायित्व के द्वंद्व को अत्यंत प्रभावी ढंग से समेटे हुए है।

लेखक अजीत सिंह गौर के बारे में 

मध्यप्रदेश के सागर में जन्मे अजीत सिंह गौर ने सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और एईसीएल में महाप्रबंधक (सिविल) के पद से सेवानिवृत्त हुए। यद्यपि उनका पेशेवर जीवन तकनीकी क्षेत्र से जुड़ा रहा, किंतु साहित्य और कला के प्रति उनका अनुराग बचपन से ही अक्षुण्ण बना रहा। युवावस्था में उनकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं, किंतु उन्होंने कभी स्वयं को प्रचारित करने का प्रयास नहीं किया।

प्रख्यात साहित्यकार सतीश जायसवाल द्वारा उन्हें “एक चुपचाप कवि” कहा जाना उनके व्यक्तित्व और सृजन-धर्मिता का सटीक परिचायक है। वे उन रचनाकारों में हैं, जो शब्दों के माध्यम से अधिक बोलते हैं, स्वयं नहीं। लंबे समय तक अपने सृजन को सीमित दायरे में संजोए रखने वाले गौर ने अंततः अपने शुभचिंतकों के आग्रह पर इस काव्य-संग्रह को प्रकाशित किया।

इस प्रकार, यह लोकार्पण समारोह न केवल एक पुस्तक के सार्वजनिक अवतरण का साक्षी बना, बल्कि उस रचनात्मक यात्रा का भी, जो वर्षों की निस्पृह साधना के बाद अब साहित्यिक संसार के समक्ष साकार रूप में उपस्थित हुई है। इस ख़ास अवसर पर कविता पाठ, सम्माननीय अतिथियों के सम्मान के बीच फोटो और पेंटिंग्स की प्रदर्शनी ने दर्शकों का मन मोह लिया। 

डॉ. दीप्ति मिश्रा : स्पर्श में उपचार, रंगों में आत्मा  

कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने कार्यों से अधिक अपने स्पर्श और संवेदनाओं से पहचाने जाते हैं—डॉ. दीप्ति मिश्रा उन्हीं में से एक हैं। बिलासपुर में बीते दो दशकों से वे एक चिकित्सक के रूप में शरीर के घाव भरती आई हैं, किंतु उनके भीतर एक ऐसा कोमल, सृजनशील मन भी है, जो रंगों, प्रकृति और जीवन के सूक्ष्म सौंदर्य को निरंतर संजोता रहता है। उनकी चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं, एक करुणामय संवाद है—रोगी के दर्द से जुड़ने और उसे आत्मीयता से हल्का करने का प्रयास। वहीं, जब वे अपने ब्रश को थामती हैं, तो वही संवेदनशीलता जलरंगों में ढलकर कागज़ पर उतर आती है। उनकी पेंटिंग्स में प्रकृति का विस्तार, रंगों की शांति और मन की लय एक साथ दिखाई देती है—मानो वे हर चित्र के माध्यम से जीवन के किसी अनकहे भाव को अभिव्यक्त कर रही हों।

डॉ. दीप्ति का मन केवल अस्पताल या कैनवास तक सीमित नहीं है। वह पर्वतों की ऊंचाइयों में भी अपनी राह तलाशता है—एवरेस्ट बेस कैंप जैसे कठिन ट्रेक उनके साहस और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। वहीं, बागवानी में मिट्टी से संवाद, ऑर्गेनिक उपज में सादगी का स्वाद, कथक के लयबद्ध पदचाप में सौंदर्य की अभिव्यक्ति—ये सब उनके जीवन के विविध रंग हैं। वे प्रकृति और पशुओं के प्रति गहरे अनुराग से जुड़ी हुई एक सजग चेतना हैं—एक ऐसी संवेदनशील आत्मा, जो जीवन के हर रूप को सम्मान देती है। लेखन और पठन के माध्यम से वे अपने अनुभवों को शब्द देती हैं, तो कभी चुपचाप उन्हें अपने भीतर संजो भी लेती हैं। डॉ. दीप्ति मिश्रा का व्यक्तित्व इस सत्य का सुंदर उदाहरण है कि जब विज्ञान और कला, संवेदना और संकल्प, सेवा और सृजन एक साथ मिलते हैं, तब जीवन केवल जिया नहीं जाता—वह एक सुंदर अभिव्यक्ति बन जाता है।

डॉ. कपिल मिश्रा : स्पर्श में संबल, दृष्टि में प्रकृति का संगीत

जिनके भीतर विज्ञान की दृढ़ता और प्रकृति की कोमलता एक साथ सांस लेती है—डॉ. कपिल मिश्रा उन्हीं में से एक हैं। बिलासपुर में दो दशकों से वे एक ऑर्थोपेडिक सर्जन के रूप में टूटे हुए जीवन-लयों को फिर से जोड़ते आए हैं। उनके हाथों में केवल शल्य-कौशल नहीं, बल्कि एक ऐसा आश्वस्त कर देने वाला स्पर्श है, जो दर्द को सहने की शक्ति और चलने की नई उम्मीद देता है। परंतु उनके व्यक्तित्व की एक और दुनिया है—जहां वे शल्य-चिकित्सक नहीं, बल्कि प्रकृति के एक शांत दर्शक बन जाते हैं। पक्षियों के प्रति उनका अनुराग केवल एक शौक नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म संवाद है। वर्षों से वे बिलासपुर और उसके आसपास के आकाश में उड़ते पंखों की भाषा को पढ़ते आए हैं। उनके कैमरे में कैद हर पक्षी केवल एक छवि नहीं, बल्कि एक क्षण की कविता है—उड़ान, स्वतंत्रता और जीवन की अनंत संभावनाओं का प्रतीक।

डॉ. मिश्रा की दृष्टि में एक अनोखी स्थिरता है—वे शरीर की हड्डियों की जटिल संरचना को भी समझते हैं और प्रकृति की नाजुक लयों को भी। यही संतुलन उन्हें विशिष्ट बनाता है। वे जानते हैं कि जैसे शरीर को संतुलन की आवश्यकता होती है, वैसे ही मन को भी विस्तार और शांति की जरूरत होती है—और शायद इसी खोज में वे प्रकृति की ओर लौटते रहते हैं। यात्राएं उनके लिए केवल दूरी तय करना नहीं, बल्कि अनुभवों को आत्मसात करना है। संगीत उनके भीतर के मौन को स्वर देता है, और लेखन उनके विचारों को आकार। यहां तक कि वित्तीय बाजारों की जटिलताओं में भी वे एक प्रकार की लय और संरचना खोज लेते हैं—मानो हर क्षेत्र उनके लिए जीवन को समझने का एक अलग माध्यम हो।

डॉ. कपिल मिश्रा का व्यक्तित्व इस सत्य को सहजता से व्यक्त करता है कि मनुष्य केवल अपने पेशे तक सीमित नहीं होता। जब वह अपने भीतर के विविध आयामों को जीता है, तब वह केवल एक सफल चिकित्सक नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और पूर्ण मनुष्य बन जाता है—जो जीवन को ठीक भी करता है और उसे महसूस भी करता है। 


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