VIDEO लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
VIDEO लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

नारायण टेक्नोक्रेट स्कूल: फीस और बोर्ड पैटर्न को लेकर विवाद, NSUI का प्रदर्शन

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर में स्थित नारायण टेक्नोक्रेट स्कूल एक बार फिर विवादों में है, जहां छात्र संगठन एनएसयूआई ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया है। इस विरोध में संगठन ने प्रतीकात्मक रूप से नोटों से भरा बैग स्कूल के बाहर रखकर फीस और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।

प्रदर्शन नेहरू नगर स्थित स्कूल परिसर के बाहर किया गया। एनएसयूआई नेताओं का आरोप है कि स्कूल ने पूरे सत्र के दौरान अभिभावकों को सीबीएसई पैटर्न के नाम पर फीस लेने के बावजूद वास्तविकता में उसे लागू नहीं किया। उनका कहना है कि सत्र के अंत में छात्रों को छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा में शामिल किया गया, जिससे अभिभावकों और छात्रों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ा।

एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव अर्पित केशरवानी ने कहा कि मामला केवल फीस का नहीं, बल्कि भरोसे का है। उनके अनुसार, जिस आधार पर अभिभावकों ने बच्चों का दाखिला कराया, वही शर्तें सत्र के अंत तक बदल दी गईं। संगठन ने मांग की है कि सीबीएसई के नाम पर ली गई अतिरिक्त फीस वापस की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई ने 12 बिंदुओं पर आधारित एक प्रश्नावली भी जारी की, जिसमें स्कूल की मान्यता और संबद्धता की समय-रेखा पर सवाल उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि यदि प्रवेश प्रक्रिया मान्यता और संबद्धता से पहले शुरू हुई थी, तो उस दौरान सीबीएसई पैटर्न के नाम पर फीस लेने का आधार क्या था। हालांकि, इन आरोपों पर स्कूल प्रबंधन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे पापाराव, 17 कैडरों के साथ आत्मसमर्पण


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में चल रही ‘पूना मारगेम’ पुनर्वास पहल के तहत बुधवार को 18 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की दिशा में एक और संकेत है। यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम जगदलपुर के लालबाग स्थित शौर्य भवन में आयोजित किया गया, जहां पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और स्थानीय टीम के सदस्य मौजूद थे।

पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वालों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े पापा राव के अलावा डिविजनल स्तर के नेता प्रकाश मड़वी और अनिल ताती भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये सभी लंबे समय से सक्रिय कैडर रहे हैं। आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों ने एके-47, एसएलआर, इंसास राइफल, .303 राइफल और बीजीएल लॉन्चर सहित कई हथियार सुरक्षा बलों के हवाले किए।

अधिकारियों ने बताया कि ‘पूना मारगेम’ पहल का उद्देश्य उन लोगों को हिंसा के रास्ते से हटाना है, जो माओवादी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाकर बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वालों के फैसले का स्वागत किया और कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें आर्थिक और सामाजिक सहायता दी जाएगी।

हाल के महीनों में बस्तर क्षेत्र में आत्मसमर्पण की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। सुरक्षा बल इसे अपनी रणनीति की सफलता के रूप में देखते हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक शांति के लिए पुनर्वास के साथ-साथ विकास और स्थानीय विश्वास बहाली भी जरूरी होगी। 

बीजापुर और बस्तर संभाग में पिछले कुछ समय से आत्मसमर्पण की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2024 से अब तक 2,700 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। राज्य सरकार इसे अपनी पुनर्वास नीति और सुरक्षा अभियानों की सफलता के रूप में देखती है, जबकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए विकास, विश्वास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। 



VIDEO: 13 साल की खामोशी के बाद हरीश राणा को अंतिम विदाई


नई दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  दिल्ली के ग्रीन पार्क में बुधवार सुबह एक ऐसे जीवन को अंतिम विदाई दी गई, जो 13 वर्षों से अस्पताल के बिस्तर और मशीनों के बीच ठहरा हुआ था। हरीश राणा—एक नाम, जो कभी सपनों, पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं से जुड़ा था, अब स्मृतियों में बदल गया है।

हरीश 2013 में एक हादसे के बाद कोमा में चले गए थे। पंजाब विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे इस छात्र के जीवन की दिशा एक पल में बदल गई, जब वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। सिर में आई गंभीर चोट ने उन्हें ऐसी खामोशी में धकेल दिया, जहां से वे फिर कभी लौट नहीं सके।

“सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार… ॐ शांति ॐ…” —तो यह केवल सूचना नहीं थी, बल्कि 13 साल लंबे एक संघर्ष के अंत की घोषणा थी। 

इन 13 वर्षों में बहुत कुछ बदला—मौसम, शहर, लोग—लेकिन हरीश की स्थिति वैसी ही बनी रही। उनके लिए समय जैसे थम गया था, जबकि उनके परिवार के लिए हर दिन एक लंबा इंतज़ार बनता चला गया। उम्मीद और असहायता के बीच झूलता यह इंतज़ार आखिरकार एक कठिन निर्णय पर आकर ठहरा।

11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। इसके बाद दिल्ली के एम्स में डॉक्टरों की देखरेख में उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि उन्हें किसी प्रकार की पीड़ा न हो—दवाओं के सहारे उन्हें शांति दी गई। 

उनके पिता अशोक राणा ने जब व्हाट्सऐप समूह में एक संक्षिप्त संदेश लिखा— “सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार… ॐ शांति ॐ…” —तो यह केवल सूचना नहीं थी, बल्कि 13 साल लंबे एक संघर्ष के अंत की घोषणा थी। यह संदेश पढ़ते ही कई लोगों की आंखें नम हो गईं। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल शब्दों से परे था। परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग—सभी एक ऐसे जीवन को विदा कर रहे थे, जो जीते हुए भी जैसे कहीं ठहर गया था। 

13 साल तक उनका परिवार उम्मीद में जीता रहा—हर दिन एक चमत्कार का इंतजार। लेकिन जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो यह इंतजार धीरे-धीरे असहनीय पीड़ा में बदल गया।

भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ मान्यता दी है। लेकिन हर ऐसा मामला केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं होता—यह एक परिवार की पीड़ा, उम्मीद और अंततः स्वीकृति की कहानी भी होता है। हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन अनगिनत अनकहे सवालों की है, जो जीवन और मृत्यु के बीच की उस पतली रेखा पर खड़े होकर पूछे जाते हैं— क्या कभी-कभी विदाई ही सबसे शांतिपूर्ण उत्तर होती है? 

पापा राव समेत 18 माओवादी कैडर सरेंडर, ज़मीन पर क्या होगा असर ?


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है। पुलिस के अनुसार, साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव सहित कुल 18 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर) स्तर के नेता प्रकाश मड़वी और अनिल ताती भी शामिल हैं। इस समूह में सात महिला कैडर भी हैं।

पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों ने AK-47 राइफल सहित अन्य हथियार भी जमा किए हैं। यह आत्मसमर्पण राज्य की पुनर्वास नीति के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। अधिकारियों ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम के बाद दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन नेतृत्व के स्तर पर काफ़ी कमजोर हुआ है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है।

पुलिस को उम्मीद है कि इस कदम के बाद अन्य सक्रिय कैडर भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कुछ माओवादी छोटे-छोटे समूहों में अब भी सक्रिय हैं। 

क्या है दंडकारण्य का महत्व?

दंडकारण्य क्षेत्र लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का प्रमुख गढ़ माना जाता रहा है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में फैला यह क्षेत्र सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व स्तर पर इस तरह के आत्मसमर्पण से संगठन की रणनीतिक क्षमता पर असर पड़ सकता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

ड्रोन तकनीक से अवैध अफीम खेती पर बड़ी कार्रवाई, SSP की चेतावनी किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा


रायगढ़। 
  TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि ड्रोन तकनीक की मदद से पिछले 72 घंटों में तीन अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अफीम की अवैध खेती के एक व्यापक नेटवर्क का खुलासा किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में ड्रोन सर्वेक्षण की अहम भूमिका रही, जिससे दुर्गम और वन क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी। पारंपरिक तरीकों से जिन इलाकों तक पहुंचना मुश्किल था, वहां अब तकनीक के जरिए सटीक लोकेशन चिन्हित कर त्वरित कार्रवाई की जा रही है।

19 मार्च को तमनार क्षेत्र के आमाघाट में हुई कार्रवाई में सब्जी की खेती की आड़ में अफीम उगाई जा रही थी। यहां से 60 हजार से अधिक पौधे बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को गिरफ्तार किया गया। मौके पर फसल को नष्ट करने के लिए जेसीबी और रोटावेटर का इस्तेमाल किया गया। 

इसके बाद 23 मार्च को लैलूंगा क्षेत्र के नवीन घटगांव में ड्रोन और भौतिक सर्वे के दौरान एक और मामला सामने आया। यहां साग-भाजी की खेती के बीच अफीम उगाई जा रही थी। पुलिस ने आरोपी सादराम नाग को गिरफ्तार कर फसल जब्त की। इसी कार्रवाई के दौरान अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल भी बरामद की गई, जिसे साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया। मुड़ागांव में भी ड्रोन से मिले इनपुट के आधार पर जांच की गई, जहां तानसिंह नागवंशी से पूछताछ के बाद संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले। उसके घर से पौधों के सूखे अवशेष बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। 

प्रशासन के अनुसार, इस अभियान के तहत खरसिया, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा, मुकडेगा, रायगढ़, पुसौर और धरमजयगढ़ समेत कई क्षेत्रों के गांवों में ड्रोन के जरिए निगरानी की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से न केवल अवैध गतिविधियों की पहचान तेजी से हो रही है, बल्कि कार्रवाई भी अधिक प्रभावी और समयबद्ध बन रही है। 

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत किया जा रहा है। वहीं, एसएसपी शशि मोहन सिंह ने चेतावनी दी कि मादक पदार्थों की खेती में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी दें, ताकि तकनीक और जनसहयोग के माध्यम से जिले को नशामुक्त बनाने के प्रयासों को और मजबूत किया जा सके। 

VIDEO: संडे मार्केट में मारपीट का वीडियो वायरल, पर्स चोरी के शक से शुरू हुआ विवाद


बिलासपुर।
शहर में रिवर व्यू स्थित संडे मार्केट में दो पक्षों के बीच हुई मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत पर्स चोरी के संदेह को लेकर हुई, जो कुछ ही देर में हिंसक झगड़े में बदल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले मामूली कहासुनी हुई, लेकिन जल्द ही दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इस दौरान युवक और युवतियां दोनों ही एक-दूसरे पर हमला करते नजर आए। वीडियो में कुछ युवतियां एक-दूसरे के बाल खींचती दिखाई देती हैं, जबकि युवक लात-घूंसे चलाते नजर आते हैं। 

मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन कुछ समय तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। वायरल वीडियो में घटना का पूरा दृश्य साफ तौर पर देखा जा सकता है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे से भिड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

सिविल लाइन पुलिस के अनुसार, यदि इस संबंध में कोई शिकायत मिलती है, तो मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, वीडियो के वायरल होने के बाद इस घटना को लेकर शहर में चर्चा का माहौल बना हुआ है। 

एक बार फिर अवैध अफीम: लैलूंगा में अफीम की खेती का खुलासा, एक ही गांव में तीन ठिकाने


रायगढ़।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र में एक बार फिर अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही गांव में तीन अलग-अलग स्थानों पर अफीम की फसल लहलहाती हुई पाई गई है। इसके साथ ही राज्य में इस तरह के मामलों की संख्या अब पांच तक पहुंच चुकी है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, जिन खेतों में अफीम की खेती हो रही थी, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में धान के रूप में सत्यापित किया गया था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब हर रकबे का भौतिक सत्यापन किया गया था, तो फिर अफीम की खेती की जानकारी अधिकारियों को कैसे नहीं मिली।

विपक्ष और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत का मामला भी हो सकता है। वहीं, राज्य की भाजपा सरकार पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि बार-बार ऐसे मामलों का उजागर होना शासन की साख पर असर डाल रहा है। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो अवैध खेती का यह नेटवर्क और फैल सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। 

वन विभाग घिरा: ‘रेस्क्यू सेंटर’ या अवैध जू? हिरणों की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल


रायपुर ।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  अंबिकापुर के संजय वन वाटिका में कुत्तों के हमले से 15 हिरणों की मौत के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल तेज हो गए हैं। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने इस घटना को दुखद बताते हुए वन विभाग के उच्च अधिकारियों से पूछा है कि प्रदेश में ऐसे और कितने केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिन्हें सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से मान्यता प्राप्त नहीं है।

‘रेस्क्यू सेंटर’ या अवैध जू?

सिंघवी का आरोप है कि संजय वाटिका को जू नहीं, बल्कि ‘रेस्क्यू सेंटर’ बताकर अधिकारियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत रेस्क्यू सेंटर के लिए भी CZA की मान्यता अनिवार्य होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यहां लाए गए वन्यजीवों को उपचार के बाद वापस जंगल में छोड़ा जाता है, तो उनकी संख्या लगातार कैसे बढ़ रही है। साथ ही, संरक्षित प्रजातियों—जैसे नीलगाय—को वहां रखने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।

छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े अधिकारी बचे?

सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखी जा रही है, जबकि जिम्मेदारी तय करते समय उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल नहीं उठाए जा रहे। उनका कहना है कि यदि टिकट लेकर आम लोगों के लिए वन्यजीवों का प्रदर्शन किया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर ‘जू संचालन’ की श्रेणी में आता है, जिसके लिए विधिवत मान्यता जरूरी है।

अन्य केंद्रों पर भी सवाल

सिंघवी ने सरगुजा के रमकोला स्थित एलीफेंट रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर, बारनवापारा अभ्यारण के वन भैंसा ब्रीडिंग सेंटर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में संचालित केंद्रों का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या ये सभी संस्थान पूर्ण मान्यता के साथ संचालित हो रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, रायपुर और राजनांदगांव में इको-टूरिज्म के नाम पर सीमित क्षेत्र में फेंसिंग कर वन्यजीवों को रखने की व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।

नंदनवन और पुराने मामलों का जिक्र

सिंघवी ने रायपुर के नंदनवन में वन्यजीवों को लंबे समय तक रखने और धमतरी जिले में निजी जू पर हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए पूछा कि यदि निजी संचालकों पर कार्रवाई हो सकती है, तो सरकारी स्तर पर जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की जाती।

मांग: पारदर्शिता और जवाबदेही

सिंघवी ने मांग की है कि प्रदेश में संचालित सभी ऐसे केंद्रों की स्थिति सार्वजनिक की जाए और जहां भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, वहां कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने इन केंद्रों में रखे गए वन्यजीवों को सुरक्षित अभ्यारणों में छोड़ने की भी मांग उठाई है। इस पूरे मामले में वन विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन घटना ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 


जब गांव में भीड़ बनी अदालत, चोरी के शक में युवक को दी सजा


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /   छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र से सामने आई घटना सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं, बल्कि उस खतरनाक प्रवृत्ति की तस्वीर है, जहां भीड़ खुद ही न्यायाधीश, जज और जल्लाद बन बैठती है। ग्राम धारानगर में चोरी के शक में एक युवक को पकड़कर जिस तरह सरेआम अपमानित और बेरहमी से पीटा गया, उसने कानून व्यवस्था और सामाजिक सोच—दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि युवक पर घर में चोरी की कोशिश का आरोप था। लेकिन क्या इस आरोप ने ग्रामीणों को यह अधिकार दे दिया कि वे उसे बीच सड़क पर अर्धनग्न करें, उसके बाल काटें और पाइप से पीटें? देश के कई हिस्सों की तरह अब छोटे कस्बों और गांवों में भी “भीड़ का न्याय” एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। किसी पर शक हुआ नहीं कि भीड़ उसे घेर लेती है, सजा देती है और कई बार उसकी जान तक ले लेती है। शंकरगढ़ की घटना में भी यही हुआ पहले शक, फिर पूछताछ, और उसके बाद बेकाबू हिंसा। यह उस मानसिकता को दिखाता है, जहां कानून पर भरोसा कम और भीड़ की ताकत पर ज्यादा भरोसा बढ़ता जा रहा है।

अगर युवक ने चोरी की कोशिश की भी थी, तो यह अपराध है और इसके लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान हैं। लेकिन सजा देने का अधिकार सिर्फ न्याय व्यवस्था के पास है, न कि किसी भीड़ के पास। भीड़ द्वारा की गई इस तरह की पिटाई न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह एक अलग अपराध भी है—जिसे अक्सर लोग ‘गुस्से’ या ‘तुरंत न्याय’ के नाम पर सही ठहराने लगते हैं। 

सोशल मीडिया और हिंसा का प्रदर्शन

इस घटना का वीडियो बनाना और उसका वायरल होना एक और चिंताजनक पहलू है। हिंसा अब सिर्फ की नहीं जा रही, बल्कि उसे रिकॉर्ड कर साझा भी किया जा रहा है जैसे यह कोई उपलब्धि हो। यह प्रवृत्ति समाज में संवेदनशीलता की कमी और हिंसा के सामान्यीकरण को दिखाती है।

पुलिस की भूमिका और चुनौती

घटना के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ एफआईआर इस मानसिकता को बदल पाएगी? पुलिस के सामने चुनौती दोहरी है, एक तरफ अपराध को रोकना और दूसरी तरफ लोगों को कानून हाथ में लेने से रोकना।

समाज को तय करना होगा रास्ता

शंकरगढ़ की यह घटना एक चेतावनी है। अगर आज भीड़ चोरी के शक में किसी को पीटती है, तो कल किसी और आरोप में किसी और को निशाना बनाया जा सकता है। जरूरत है यह समझने की कि कानून का विकल्प भीड़ नहीं हो सकती। अगर समाज ने समय रहते इस प्रवृत्ति पर लगाम नहीं लगाई, तो ‘न्याय’ के नाम पर अराजकता ही सामान्य बन जाएगी। यह सिर्फ एक गांव की घटना नहीं, बल्कि उस दिशा का संकेत है, जहां कानून से ज्यादा भीड़ का डर काम करने लगे और यह किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए सबसे खतरनाक स्थिति होती है।


Wildlife Deaths: कुत्तों के हमले के बाद संजय वन वाटिका बंद, 15 चीतलों की मौत


सरगुजा।
  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय वन वाटिका में 15 चीतलों की मौत ने सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि व्यवस्था की गहरी खामियों का सवाल खड़ा कर दिया है। जिस जगह को वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बनाया गया था, वही अब उनकी असुरक्षा और मौत का कारण बनती दिख रही है। 

बताया जा रहा है कि 21 मार्च की रात पांच-छह आवारा कुत्ते बाड़े की कमजोर फेंसिंग का फायदा उठाकर अंदर घुस गए। इसके बाद जो हुआ, वह किसी भी संरक्षण क्षेत्र के लिए शर्मनाक है। यहां मौजूद हिरण प्रजाति के कई वन्यजीव आवारा कुत्तों के सामने बेबस, असहाय दिखे। बताया जा रहा है कि संजय पार्क में आवारा कुत्तों ने 14 चीतल और एक सांभर को मार डाला है । एक अन्य घायल चीतल ने आज सुबह दम तोड़ दिया। वन विभाग ने मरे हुए वन्यप्राणियों के शव को आनन-फानन में जला भी दिया है ताकि बड़े और गंभीर सवालों से बचा जा सके। 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक ‘दुर्घटना’ है, या फिर लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा? प्रारंभिक जानकारी से साफ है कि बाड़े की फेंसिंग इतनी कमजोर थी कि आवारा कुत्ते आसानी से भीतर पहुंच गए। अगर यही सुरक्षा व्यवस्था है, तो फिर यह ‘वाटिका’ नहीं, एक खुला खतरा क्षेत्र बन चुका है। और सवाल यहीं खत्म नहीं होते क्या रात में कोई सुरक्षा गश्त नहीं थी? क्या निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं थी? घटना रात में हुई, लेकिन इसकी जानकारी पार्क प्रबंधन और वन विभाग को अगले दिन सुबह मिली। इसका मतलब साफ है न तो तत्काल निगरानी थी, न ही कोई अलर्ट सिस्टम। संरक्षित क्षेत्र में अगर पूरी रात हिंसक हमला चलता रहे और किसी जिम्मेदार को खबर तक न हो, तो यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि तंत्र की विफलता है। 

हर बड़े हादसे के बाद ‘जांच के आदेश’ एक तय प्रक्रिया बन चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच से आगे भी कुछ होगा? क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा? हालांकि सुरक्षा में बड़ी चूक मानते हुए ड्यूटी पर तैनात 4 कर्मचारियों को तत्काल निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इस मामले में अब तक किसी बड़े अफसर पर गाज नहीं गिरी है, ना ही जवाबदेही तय की गई है। 

संरक्षण या दिखावा?

संजय वन वाटिका को पर्यटकों के लिए तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। लेकिन क्या यह कदम पर्याप्त है? जब तक सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर नहीं किया जाता, निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक यह बंदी सिर्फ एक औपचारिकता भर ही रहेगी।

खल्लारी मंदिर रोपवे दुर्घटना: केबल टूटने से ट्रॉलियां गिरीं, एक की मौत, 18 से अधिक घायल


महासमुंद।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नवरात्रि के दौरान एक बड़ा हादसा सामने आया है। खल्लारी माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु उस समय दुर्घटना का शिकार हो गए, जब रोपवे का केबल टूटने से दो ट्रॉलियां नीचे गिर गईं। 

अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे में 18 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से आधा दर्जन की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस हादसे में एक महिला की मौत की भी पुष्टि हुई है। यह घटना आज रविवार को हुई, जब नवरात्रि और छुट्टी के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद थी। रायपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में दर्शन के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है, जिसका बड़ी संख्या में लोग इस्तेमाल करते हैं। 

बताया जा रहा है कि हादसे के समय दो ट्रॉलियों में 18 से अधिक श्रद्धालु सवार थे। रोपवे करीब 200 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा ही था कि अचानक केबल टूट गया, जिससे ट्रॉलियां नीचे गिर गईं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह तकनीकी खराबी थी या किसी प्रकार की लापरवाही का नतीजा। 


सरकंडा में दो कार में भीषण आग, पलक झपकते ही जलकर खाक


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के सरकंडा क्षेत्र स्थित मेघदूत कॉलोनी के दैहानपारा इलाके में शनिवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब खाली स्थान पर खड़ी दो कारों में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में दोनों वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची जब तब आग बुझाने की कोशिशें होती तब तक दोनों कार पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुकी थीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कॉलोनी में रहने वाले दो व्यक्तियों ने अपनी-अपनी कारें पास के खाली प्लॉट में खड़ी की थीं। दोपहर के समय अचानक वहां से धुआं उठता दिखाई दिया। जब लोग मौके पर पहुंचे तो एक कार में आग लगी हुई थी, जो तेजी से फैलते हुए दूसरी कार को भी अपनी चपेट में ले चुकी थी। आग की लपटों को देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। लोगों ने अपने स्तर पर पानी डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, साथ ही तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर कारें खड़ी थीं वहां सूखे कचरे का ढेर लगा हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि पहले कचरे में आग लगी और फिर उसने पास खड़ी दोनों कारों को अपनी चपेट में ले लिया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। 


पुलिस का सबसे बड़ा ड्रग्स ऑपरेशन, पंजाब से चल रहे हेरोइन सिंडिकेट का भंडाफोड़


रायपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब से संचालित हेरोइन तस्करी के अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। कबीर नगर, आमानाका थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सुनियोजित अभियान के तहत पंजाब में दबिश देकर चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कवलजीत सिंह पन्नू, तरसेम सिंह, विक्की सिंह और जनक राज के रूप में हुई है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के क्षेत्रों से हेरोइन खरीदकर उसे रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में खपाता था। तस्करी के लिए आरोपियों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया था, हेरोइन को सामान्य दिखने वाले पार्सलों में छिपाकर कुरियर के माध्यम से भेजा जाता था। वहीं बड़े स्तर पर सप्लाई के लिए ट्रकों में वैध माल की आड़ ली जाती थी। 

गिरफ्तार आरोपियों में कवलजीत सिंह पन्नू को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस ने उसे ‘टियर-1’ सप्लायर की श्रेणी में रखा है, जो सीधे पाकिस्तान से जुड़े सीमावर्ती नेटवर्क से ड्रग्स खरीदता था। पन्नू का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और वह पूर्व में रायपुर तथा पंजाब की जेलों में रह चुका है। उसकी गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उसके पास से एक बरेटा पिस्टल और जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सिंडिकेट हथियारों के दम पर अपना अवैध कारोबार चला रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार तरसेम सिंह और विक्की सिंह की भूमिका हेरोइन को पैक कर पार्सल के जरिए भेजने की थी। ये दोनों आरोपी बेहद चालाकी से मादक पदार्थों को सामान्य सामान की तरह पैक करते थे, ताकि किसी को शक न हो। वहीं जनक राज ट्रक चालकों के नेटवर्क के जरिए इस अवैध कारोबार को संचालित करता था। वह व्यापारिक माल की आड़ में लंबे समय से हेरोइन की सप्लाई करता आ रहा था।

इस पूरे मामले का खुलासा एक सुनियोजित चार चरणीय कार्रवाई के बाद हुआ। सहायक पुलिस आयुक्त ईशु अग्रवाल ने बताया कि पहले चरण में रायपुर में सक्रिय स्थानीय ड्रग पेडलर्स को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे पंजाब कनेक्शन सामने आया।

तीसरे चरण में पुलिस टीम ने कुरियर सेवाओं और ट्रक परिवहन नेटवर्क पर फोकस करते हुए तस्करी के रास्तों और तरीकों का पता लगाया। अंततः चौथे चरण में विशेष टीम बनाकर पंजाब में छापेमारी की गई और मुख्य सप्लायर समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस अब आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्यों, वित्तीय लेनदेन और सप्लाई चेन के विस्तार की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से नशे के बड़े नेटवर्क को करारा झटका लगा है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

--------------------------

आप अपने क्षेत्र का समाचार, जानकारी और सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों के बारे में हमें इस (9111607770) वाट्सअप नंबर पर सीधे भेज सकते हैं । 

आप इस लिंक https://chat.whatsapp.com/LR2h81C1Qhg3vliVzuyI2G पर क्लिक करें और सीधे वाट्सअप ग्रुप में जुड़े। 

हाथियों के परिवार का भावुक दृश्य वायरल, IAS सुप्रिया साहू ने साझा किया वीडियो


दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  आईएएस सुप्रिया साहू ने अपने X हैंडल पर इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है कि तमिलनाडु के अनामलाई टाइगर रिज़र्व के गहरे जंगलों में हाथियों का एक प्यारा परिवार सो रहा है—एक ऐसा अद्भुत पल जो कैमरे में कैद हो गया। हाथी का बच्चा बड़े हाथी के ऊपर अपना पैर धीरे से रखता है, मानो वह उससे आराम, सुरक्षा और प्यार चाहता हो। हाथियों की दुनिया में, परिवार ही सब कुछ होता है। और उनके चारों ओर जंगल खामोश, सुरक्षा देने वाला और शाश्वत रूप से खड़ा है—ठीक उस पालने की तरह जो जीवन को अपनी गोद में थामे रहता है। 'अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस' के इस अवसर पर, यह कोमल दृश्य हमें एक सीधी-सादी सच्चाई की याद दिलाता है: अगर जंगल नहीं होंगे, तो कुछ भी नहीं बचेगा। बिल्कुल कुछ भी नहीं। जंगलों के बिना, यह दुनिया और भी गरीब, कठोर और सूनी हो जाएगी। हाथियों के लिए, वन्यजीवों के लिए, नदियों के लिए और इंसानों के लिए—जंगल ही जीवन हैं। अद्भुत तस्वीर  
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर साझा किए गए इस वीडियो के जरिए उन्होंने जंगलों के संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि जंगल नहीं रहेंगे तो न केवल वन्यजीव बल्कि इंसानों का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। जंगल ही जीवन का आधार हैं।

तरबूज-ककड़ी की आड़ में उगाई जा रही थी अफीम, आमाघाट में पुलिस ने मारा छापा


रायगढ़ ।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले के तमनार ब्लॉक अंतर्गत आमाघाट क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आया है। सूचना मिलते ही शुक्रवार को पुलिस एवं जिला प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ एकड़ में लहलहा रही अफीम की फसल को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई। मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड निवासी मार्शल सांगा पिछले 10-12 वर्षों से तमनार क्षेत्र में रहकर खेती कर रहा था। उसने आमाघाट के एक किसान से तरबूज एवं ककड़ी की खेती के नाम पर खेत लिया था, लेकिन वहां अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। 

प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी झारखंड में अफीम की खेती से परिचित था और वहीं से प्रेरित होकर उसने यहां इस अवैध गतिविधि को शुरू किया। फिलहाल खेत के वास्तविक स्वामित्व एवं इस खेती को किसके संरक्षण में किया जा रहा था, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पिछले 15 दिनों के भीतर यह अफीम की खेती का चौथा मामला है। इससे पहले दुर्ग एवं बलरामपुर जिले में भी इसी प्रकार की अवैध खेती पकड़ी जा चुकी है।

इधर, इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राज्य सरकार पर अफीम की खेती को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। पुलिस एवं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

रिक्की पैनल से चल रहा था ऑनलाइन सट्टे का साम्राज्य, राजा बजाज और प्रदीप खत्री गिरफ्तार


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  पुलिस के विशेष अभियान “प्रहार” के तहत ऑनलाइन सट्टा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सिविल लाइन थाना पुलिस एवं ए.सी.सी.यू. (सायबर सेल) की संयुक्त टीम ने एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

मुखबिर से सूचना मिली कि बिलासपुर एवं आसपास क्षेत्रों में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से सट्टा संचालित किया जा रहा है। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी राजेश उर्फ राजा बजाज (34) निवासी मोपका एवं प्रदीप खत्री (34) निवासी मंगला को गिरफ्तार किया। बताया जाता है कि मुख्य आरोपी राजेश बजाज पुलिस से बचने के लिए रायपुर में ठिकाना बदल-बदलकर रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पूर्व में ₹5000 का इनाम भी घोषित किया गया था। 

पुलिस के अनुसार आरोपी “रिक्की” पैनल के माध्यम से Aviator, Wingo, Casino, Horse Riding जैसे ऑनलाइन गेम्स पर सट्टा संचालित करते थे। इसके लिए टेलीग्राम के जरिए देशभर में ग्राहकों को जोड़ा जाता था तथा व्हाट्सएप के माध्यम से लिंक भेजकर उन्हें प्लेटफॉर्म तक पहुंचाया जाता था।

आरोपियों के कब्जे से ₹6.90 लाख नकद, महंगे मोबाइल फोन, एचपी पवेलियन लैपटॉप, पांच बैंक पासबुक, पांच चेकबुक, तीन कारें, एक स्कूटी एवं दो रजिस्टर जब्त किए गए हैं, जिनमें लाखों रुपये के लेन-देन का हिसाब दर्ज है। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹45 लाख बताई जा रही है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड एवं बैंक खातों के माध्यम से लेन-देन करते थे तथा मुनाफे का 65 प्रतिशत हिस्सा हेड ऑफिस और 35 प्रतिशत ब्रांच को मिलता था।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। साथ ही अवैध रूप से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस आगे की जांच में जुटी हुई है।  


सकरी बायपास पर दर्दनाक हादसा: स्कॉर्पियो के परखच्चे उड़े, चार मृत


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  ज़िले के सकरी थाना क्षेत्र में गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात हुए एक सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है। हादसा सकरी- पेंड्रीडीह बाईपास पर ग्राम सम्बलपुरी स्थित यादव ढाबा के सामने हुआ है । 

पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, रात करीब दो बजे ट्रेलर (CG-11-BD-9044) रतनपुर से रायपुर की ओर जा रहा था। इसी दौरान चालक कथित तौर पर वाहन से नियंत्रण खो बैठा और ट्रेलर रॉन्ग साइड में पहुंच गया। सामने से आ रही स्कॉर्पियो (CG-04-MQ-4220) से उसकी आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रेलर पास में खड़े एक अन्य ट्रेलर से टकराने के बाद पलट गया। 

हादसे के बाद स्कॉर्पियो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग वाहन के भीतर फंस गए। सूचना मिलने पर पुलिस और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। गैस कटर की मदद से करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मृतकों का शव बाहर निकाला गया। 

मृतकों की पहचान छत्रपाल रात्रे (37) निवासी कुवागांव, विशाल लहरें (25), अनमोल लहरें (14) निवासी बिरगहनी, जिला मुंगेली और सोनू मिरी (28) निवासी कोटा के रूप में हुई है। प्रकाश रात्रे गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने ट्रेलर चालक को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। हाईवे पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 


युवा कांग्रेस: राष्ट्रीय अध्यक्ष की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन, भाजपा जिला कार्यालय का घेराव

 


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  / नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के बाद युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की गिरफ्तारी को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी युवा कांग्रेस सड़कों पर उतर आई।

बेलतरा युवा कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार का पुतला दहन किए जाने के बाद आज गुरुवार को जिला युवा कांग्रेस के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और पुतला दहन किया गया। जिला युवा कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष जयकिशन यादव (राजू) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्र हुए। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और राष्ट्रीय अध्यक्ष की गिरफ्तारी को लेकर आक्रोश जताया। 


यातायात व्यवस्था सुधारने प्रशासन सख्त, मार्ग किनारे अतिक्रमण हटाने चली JCB


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए यातायात पुलिस और नगर निगम प्रशासन ने मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है। प्रशासन ने मार्ग किनारे बसाहट करने वाले लोगों और व्यवसाय संचालकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक मार्गों पर किसी भी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न करें।

प्रशासन का कहना है कि मुख्य मार्ग आम नागरिकों के सरल, सुगम और सुरक्षित आवागमन के लिए निर्धारित हैं। इन मार्गों पर अतिक्रमण या यातायात नियमों की अनदेखी करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

यातायात पुलिस और नगरीय निकाय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मुख्य मार्ग के दोनों ओर व्यवसाय संचालित करने वाले सभी दुकानदार और प्रतिष्ठान संचालक यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। साथ ही, उन्हें अपने प्रतिष्ठानों के सामने किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या अवरोध नहीं करने की हिदायत दी गई है।

प्रशासन ने कहा है कि यह कार्रवाई जनहित में की जा रही है, ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और लोगों को जाम जैसी समस्याओं से राहत मिल सके। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यातायात पुलिस ने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में प्रशासन का सहयोग करें।

GGU में होली मिलन समारोह में बवाल: छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट, वीडियो वायरल

© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com