TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल पर कथित तौर पर ज़बरन कब्ज़ा करने और आधी रात को हंगामा करने का मामला सामने आया है.
आरोप है कि धोखाधड़ी के मामले में फ़रार चल रहे एक शख़्स ने अपने साथियों के साथ मिलकर सिविल लाइन थाना क्षेत्र के बर्जेस इंग्लिश स्कूल के प्रिंसिपल ऑफ़िस का ताला तोड़ दिया. इतना ही नहीं, नियमों को ताक पर रखकर एक हिंदी माध्यम के रिटायर्ड शिक्षक को स्कूल का प्रभार भी सौंप दिया गया.
क्या है पूरा मामला?
घटना गुरुवार रात की बताई जा रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयदीप रॉबिन्सन नाम का एक व्यक्ति अपने साथियों के साथ बर्जेस इंग्लिश स्कूल पहुंचा. आरोप है कि उसने मेन गेट और फिर प्रिंसिपल के कमरे का ताला तोड़ा. इसके बाद वहां कथित तौर पर एक 'फ़ोटो सेशन' किया गया, जिसकी तस्वीरें मसीही समाज के व्हाट्सएप ग्रुप्स में वायरल हो गईं.
इस दौरान सीबीएसई (CBSE) से मान्यता प्राप्त इस इंग्लिश मीडियम स्कूल का प्रभार एक रिटायर्ड हिंदी शिक्षक संगम शुक्ला को सौंप दिया गया.
नियमानुसार, सीबीएसई स्कूल के प्रिंसिपल पद के लिए उम्मीदवार का इंग्लिश मीडियम से होना, बी.एड. (B.Ed.) और 8 साल का अनुभव होना अनिवार्य है. आरोप है कि इन नियमों की अनदेखी करते हुए जयदीप रॉबिन्सन और रायपुर डायसीस से जुड़े सुशील मसीह ने संगम शुक्ला को गुलदस्ता देकर कुर्सी पर बिठा दिया. बताया जाता है कि संगम शुक्ला बीते एक साल से बर्जेस हिंदी कन्या शाला के भी प्रभारी प्राचार्य बने हुए हैं.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
यह पूरी घटना सिविल लाइन थाने से महज़ कुछ ही दूरी पर हुई. मौजूदा प्रिंसिपल निशिता हंसा दास को जब ताला टूटने की जानकारी मिली, तो उन्होंने देर रात थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने शिकायत लेकर मामले की जांच का आश्वासन दिया है.
बताया जा रहा है कि इस घटना से पहले जयदीप के गुट ने थाने से पुलिस बल की भी मांग की थी, जिसे थाना प्रभारी ने ठुकरा दिया था. इसके बावजूद फ़रार आरोपी द्वारा थाने के इतने क़रीब घटना को अंजाम देने से पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं.
कौन है जयदीप रॉबिन्सन?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक़, जयदीप रॉबिन्सन पर पहले से ही सात अलग-अलग मामले दर्ज हैं और वह ज़मानत पर बाहर है. महज़ दो दिन पहले ही बिलासपुर की एक अदालत के निर्देश पर उसके ख़िलाफ़ धोखाधड़ी और जालसाज़ी का एक नया मामला दर्ज किया गया है. उस पर आरोप है कि उसने 'यूसीएमएस' (UCMS) का फ़र्ज़ी पावर ऑफ़ अटॉर्नी दिखाकर नज़ूल की ज़मीन का सौदा किया और लाखों रुपये अपने खाते में ट्रांसफ़र करवा लिए. इस मामले में सिविल लाइन थाने में धारा 420 और 406 के तहत एफ़आईआर दर्ज होने के बाद से वह फ़रार चल रहा था.




























