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बाप-बेटे को पुलिस कस्टडी में बर्बरता और मौत पर चला कानून का डंडा, 9 पुलिसवालों को मौत की सजा


नई दिल्ली।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  तमिलनाडु की मदुरै डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बाप-बेटे की पुलिस कस्टडी में मौत मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. मदुरै कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल 2026) को बिजनेसमैन पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में हुई मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है. दोषियों में शामिल पुलिस इंस्पेक्टर श्रीधर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

केस बारे में पढ़कर दिल कांप उठता है: कोर्ट

कोर्ट ने जिन पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई है उसमें इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन और रघु गणेश और पुलिसकर्मी मुरुगन, समदुरई, मुथुराजा, चेल्लादुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेइलुमुथु शामिल हैं. कोर्ट ने कहा, 'पिता और बेटे को बदले की भावना से निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया था. इसके बारे में पढ़कर दिल कांप उठता है. अगर बेंच की निगरानी नहीं होती तो सच दबकर रह जाता.' 

सीबीआई ने की थी फांसी की मांग

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में सीसीटीवी फुटेज पेश किए गए, जबकि आम तौर पर ऐसे मामलों में ऐसा नहीं होता. मदुरै डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में कई ईमानदार पुलिस अधिकारी हैं और यह फैसला पुलिस के बीच डर पैदा नहीं करेगा. पुलिस हिरासत में टॉर्चर और उसके बाद हुई मौत मामले में सीबीआई ने अधिकतम सजा के रूप में फांसी या बिना पैरोल की संभावना के आजीवन कारावास की मांग की थी.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 19 जून, 2020 को शुरू हुआ, जब मोबाइल की दुकान चलाने वाले जयराज और बेनिक्स को लॉकडाउन के दौरान तय समय से अधिक दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. दोनों को सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई. घरवालों ने आरोप लगाया था कि पुलिस कस्टडी में उनके साथ मारपीट की गई थी.

इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य की सीबी-सीआईडी ​​से जांच का जिम्मा संभालने वाली सीबीआई ने इस मामले में 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए लोगों में एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और कई कांस्टेबल शामिल थे. बाद में एजेंसी ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया. (साभार / abp न्यूज़)

VIDEO: 13 साल की खामोशी के बाद हरीश राणा को अंतिम विदाई


नई दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  दिल्ली के ग्रीन पार्क में बुधवार सुबह एक ऐसे जीवन को अंतिम विदाई दी गई, जो 13 वर्षों से अस्पताल के बिस्तर और मशीनों के बीच ठहरा हुआ था। हरीश राणा—एक नाम, जो कभी सपनों, पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं से जुड़ा था, अब स्मृतियों में बदल गया है।

हरीश 2013 में एक हादसे के बाद कोमा में चले गए थे। पंजाब विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे इस छात्र के जीवन की दिशा एक पल में बदल गई, जब वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। सिर में आई गंभीर चोट ने उन्हें ऐसी खामोशी में धकेल दिया, जहां से वे फिर कभी लौट नहीं सके।

“सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार… ॐ शांति ॐ…” —तो यह केवल सूचना नहीं थी, बल्कि 13 साल लंबे एक संघर्ष के अंत की घोषणा थी। 

इन 13 वर्षों में बहुत कुछ बदला—मौसम, शहर, लोग—लेकिन हरीश की स्थिति वैसी ही बनी रही। उनके लिए समय जैसे थम गया था, जबकि उनके परिवार के लिए हर दिन एक लंबा इंतज़ार बनता चला गया। उम्मीद और असहायता के बीच झूलता यह इंतज़ार आखिरकार एक कठिन निर्णय पर आकर ठहरा।

11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। इसके बाद दिल्ली के एम्स में डॉक्टरों की देखरेख में उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि उन्हें किसी प्रकार की पीड़ा न हो—दवाओं के सहारे उन्हें शांति दी गई। 

उनके पिता अशोक राणा ने जब व्हाट्सऐप समूह में एक संक्षिप्त संदेश लिखा— “सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार… ॐ शांति ॐ…” —तो यह केवल सूचना नहीं थी, बल्कि 13 साल लंबे एक संघर्ष के अंत की घोषणा थी। यह संदेश पढ़ते ही कई लोगों की आंखें नम हो गईं। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल शब्दों से परे था। परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग—सभी एक ऐसे जीवन को विदा कर रहे थे, जो जीते हुए भी जैसे कहीं ठहर गया था। 

13 साल तक उनका परिवार उम्मीद में जीता रहा—हर दिन एक चमत्कार का इंतजार। लेकिन जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो यह इंतजार धीरे-धीरे असहनीय पीड़ा में बदल गया।

भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ मान्यता दी है। लेकिन हर ऐसा मामला केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं होता—यह एक परिवार की पीड़ा, उम्मीद और अंततः स्वीकृति की कहानी भी होता है। हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन अनगिनत अनकहे सवालों की है, जो जीवन और मृत्यु के बीच की उस पतली रेखा पर खड़े होकर पूछे जाते हैं— क्या कभी-कभी विदाई ही सबसे शांतिपूर्ण उत्तर होती है? 

TMC मैनिफेस्टो लॉन्च, ममता का BJP पर तीखा वार


कोलकाता। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का घोषणापत्र जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों ने पार्टी को अपार समर्थन और आशीर्वाद दिया है और सरकार ने भी उनकी सेवा करने का हरसंभव प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ता में आने के बाद से भाजपा हर चुनाव में साजिश रचती रही है। उन्होंने कहा कि इस बार साजिश की सारी सीमाएं पार कर दी गई हैं और भाजपा किसी भी तरह पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कब्जा करना चाहती है।

ममता बनर्जी ने आगे कहा कि देश की स्थिति चिंताजनक है और कई राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश को गलत दिशा में ले जा रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में ‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ जैसी स्थिति पैदा कर दी गई है, क्योंकि भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल की जनता से डर रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।

हाईकोर्ट में यूएनआई की याचिका खारिज, दफ्तर सील


नई दिल्ली।
  TODAY छत्तीसगढ़  / दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के हाई कोर्ट के आदेश पर न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) का दफ्तर सील कर दिया। परिसर के बाहर चस्पा नोटिस में कहा गया कि 9, रफी मार्ग की संपत्ति केंद्र सरकार ने कब्जे में ली है। बिना अनुमति प्रवेश या उपयोग पर कार्रवाई होगी। 

दिल्ली जिले के डीसीपी सचिन शर्मा ने बदसलूकी के आरोपों को खारिज किया और कहा, कार्रवाई कानून के तहत हुई। इसकी वीडियोग्राफी है।

हाई कोर्ट ने यूएनआई की याचिका खारिज करते हुए कहा, जमीन आवंटन 1979 में हुआ, लेकिन एजेंसी 4 दशक बाद भी निर्माण शुरू नहीं कर सकी। इससे आवंटन का उद्देश्य विफल हो गया, इसलिए जमीन वापस लेना वैध है। दूसरी ओर, यूएनआई और इसके मौजूदा प्रबंधन स्टेट्समैन ने कार्रवाई को 'मीडिया की आजादी पर हमला' बताया। स्टेट्समैन ने कहा, 'देश की सबसे पुरानी न्यूज एजेंसियों में से एक के दफ्तर से कर्मचारियों को जबरन निकाला गया, कई को उनका सामान लेने का मौका नहीं मिला।' यूएनआई ने कहा, 'करीब 300 पुलिसकर्मी पहुंचे और बिना पर्याप्त समय दिए परिसर खाली कराया। महिला पत्रकारों से बदसलूकी की गई। इस कार्रवाई से हमारी अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू न्यूज सेवाएं ठप हो गईं।  

हाथियों के परिवार का भावुक दृश्य वायरल, IAS सुप्रिया साहू ने साझा किया वीडियो


दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  आईएएस सुप्रिया साहू ने अपने X हैंडल पर इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है कि तमिलनाडु के अनामलाई टाइगर रिज़र्व के गहरे जंगलों में हाथियों का एक प्यारा परिवार सो रहा है—एक ऐसा अद्भुत पल जो कैमरे में कैद हो गया। हाथी का बच्चा बड़े हाथी के ऊपर अपना पैर धीरे से रखता है, मानो वह उससे आराम, सुरक्षा और प्यार चाहता हो। हाथियों की दुनिया में, परिवार ही सब कुछ होता है। और उनके चारों ओर जंगल खामोश, सुरक्षा देने वाला और शाश्वत रूप से खड़ा है—ठीक उस पालने की तरह जो जीवन को अपनी गोद में थामे रहता है। 'अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस' के इस अवसर पर, यह कोमल दृश्य हमें एक सीधी-सादी सच्चाई की याद दिलाता है: अगर जंगल नहीं होंगे, तो कुछ भी नहीं बचेगा। बिल्कुल कुछ भी नहीं। जंगलों के बिना, यह दुनिया और भी गरीब, कठोर और सूनी हो जाएगी। हाथियों के लिए, वन्यजीवों के लिए, नदियों के लिए और इंसानों के लिए—जंगल ही जीवन हैं। अद्भुत तस्वीर  
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर साझा किए गए इस वीडियो के जरिए उन्होंने जंगलों के संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि जंगल नहीं रहेंगे तो न केवल वन्यजीव बल्कि इंसानों का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। जंगल ही जीवन का आधार हैं।

पीएम मोदी से तीनों उपराज्यपालों की अलग-अलग मुलाकात


नयी दिल्ली।
 TODAY छत्तीसगढ़  / दिल्ली, लद्दाख और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपालों ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अलग-अलग मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े प्रशासनिक और विकासात्मक विषयों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने ‘एक्स’ पर दी जानकारी में बताया कि दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। इसी क्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल डी. के. जोशी (सेवानिवृत्त) ने भी प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात की।

बताया गया कि हाल ही में नियुक्ति के बाद यह मुलाकात औपचारिक परिचय और समन्वय के लिहाज से अहम मानी जा रही है। संधू और सक्सेना को पांच मार्च को संबंधित पदों पर नियुक्त किया गया था।

तरनजीत सिंह संधू इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं। वहीं, विनय कुमार सक्सेना लद्दाख में नियुक्ति से पूर्व दिल्ली के उपराज्यपाल के पद पर कार्यरत थे।

दिल्ली आबकारी नीति मामला: अदालत ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को क्लीन चिट


नई दिल्ली। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए शुक्रवार को बरी कर दिया। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) द्वारा दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से भी इनकार कर दिया।इस मामले में 21 अन्य आरोपियों को भी अदालत ने बरी कर दिया है।

सीबीआई ने आम आदमी पार्टी (आम आदमी पार्टी) की पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई और बाद में रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच की थी। 

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने यह भी कहा कि सिसोदिया के विरुद्ध प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता नहीं है।  

न्यायाधीश ने आरोपपत्र में “आंतरिक विरोधाभासों” और “भ्रामक कथनों” का उल्लेख करते हुए कहा कि कई आरोप ऐसे हैं जिनकी पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों या गवाहों से नहीं होती। अदालत के अनुसार, आरोपपत्र में मौजूद कमियां कथित साजिश की थ्योरी को कमजोर करती हैं।

अदालत ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते और किसी भी व्यक्ति को बिना ठोस आधार के अभियोजन का सामना कराना कानून के शासन के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। सिसोदिया के संबंध में अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो उनकी संलिप्तता को दर्शाता हो, और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी दिखाई गई है।  

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, भाजपा ने घेरा


नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट 2026 के दौरान शुक्रवार को इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ लिखी टी-शर्ट लहराई।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान 15 से 20 की संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और हाथों में सफेद रंग की टी-शर्ट लेकर विरोध जताया। टी-शर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर लगी थी और उस पर ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ लिखा हुआ था।

इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि एआई समिट के मंच के पीछे सच को दबाया नहीं जा सकता। संगठन ने आरोप लगाया कि जब देशहित से ऊपर कॉरपोरेट हित नजर आने लगें और विदेश नीति में नरमी दिखे, तब विरोध करना आवश्यक हो जाता है।

वहीं, भाजपा ने इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान इस तरह का प्रदर्शन देश की छवि धूमिल करने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयोग था और इसकी योजना राहुल गांधी के आवास पर बनाई गई थी, जहां सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

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पुतिन का भारत दौरा: राष्ट्रपति भवन में मिला गार्ड ऑफ ऑनर


नई दिल्ली ।
  TODAY छत्तीसगढ़  / रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। दौरे का आज दूसरा दिन है, जहां राष्ट्रपति पुतिन ने औपचारिक कार्यक्रमों की शुरुआत राष्ट्रपति भवन पहुंचकर की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पुतिन ने राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी से हाथ मिलाया, जिसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। पहले रूस का और उसके बाद भारत का राष्ट्रगान बजा।

सम्मान ग्रहण करने के बाद पुतिन ने गार्ड का निरीक्षण किया और फिर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ औपचारिक मुलाकात की। इसके बाद रूसी राष्ट्रपति, राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी के साथ राष्ट्रपति भवन से प्रस्थान कर राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहां से वे हैदराबाद हाउस जाएंगे, जहां दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठकें होंगी।

गुरुवार शाम दिल्ली पहुंचे थे पुतिन। एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं पहुंचकर रूसी राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें रूसी भाषा में अनुवादित ‘गीता’ की प्रति भेंट की। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने लिखा— “गीता की शिक्षाएं दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरणा देती हैं।” एयरपोर्ट पर पुतिन के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसकी पुतिन ने सराहना की। इसके बाद दोनों नेता एक ही वाहन से एयरपोर्ट से रवाना हुए। (IANS)

BRICS 2024 : सीमा से जुड़े मुद्दों पर बनी सहमति का स्वागत... जिनपिंग से बातचीत में बोले पीएम मोदी


 रूस /
  TODAY छत्तीसगढ़  /  कजान में ब्रिक्स समिट से इतर पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात हुई. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई. इस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता रहनी चाहिए. 5 साल के बाद हमारी (चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ) मुलाकात हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे कूटनीतिक संबंधों की आधारशिला होनी चाहिए. पीएम मोदी ने जिनपिंग से कहा कि हम सीमा समझौते का स्वागत करते हैं. 

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन संबंधों के महत्व को स्वीकार किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि हम पांच साल बाद औपचारिक बैठक कर रहे हैं. हमारा मानना ​​है कि भारत-चीन संबंध न केवल हमारे लोगों के लिए, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं. मीटिंग के दौरान दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि भारत-चीन सीमा के सवाल पर विशेष प्रतिनिधि सीमा क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के प्रबंधन की देखरेख करेंगे. साथ ही इस मुद्दे का निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तलाशने के लिए जल्द ही बैठक करेंगे. दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दो पड़ोसी और दुनिया के दो सबसे बड़े राष्ट्रों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का क्षेत्रीय वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. यह मल्टीपोलर एशिया और मल्टीपोलर वर्ल्ड में भी योगदान देगा. 

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को मतभेदों को ठीक से संभालने के लिए अधिक संवाद और सहयोग करने की आवश्यकता है. जिनपिंग ने कहा कि दोनों पक्षों के लिए अधिक संवाद, सहयोग, अपने मतभेदों और असहमतियों को ठीक से संभालना और एक-दूसरे की विकास की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में सहायता करना महत्वपूर्ण है. दोनों पक्षों के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी को निभाना, विकासशील देशों की ताकत और एकता को बढ़ावा देने के लिए एक उदाहरण स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहु-ध्रुवीकरण और लोकतंत्र को बढ़ावा देने में योगदान देना भी महत्वपूर्ण है. (साभार / आज तक )

मुंबई से न्यूयॉर्क, जेद्दा और मस्कट जाने वाली 3 फ्लाइट्स को उड़ाने की धमकी


इंडिगो की ओर से कहा गया है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है, और हर कदम उठाया जा रहा है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि यात्रियों को कोई नुकसान न पहुंचे. यात्रियों को एयरलाइंस और हवाई अड्डे के स्टाफ द्वारा उचित जानकारी और सहायता प्रदान की जा रही है.(फ़ाइल फोटो /TCG )

मुंबई / 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  हवाई अड्डे पर इंडिगो एयरलाइंस की दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बम की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है. इससे पहले मुंबई से ही न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट में बम की धमकी आई थी, जिसके बाद फ्लाइट की दिल्ली में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी. इंडिगो फ्लाइट 6E 1275, मुंबई से मस्कट के लिए रवाना हो रही थी, वहीं इंडिगो फ्लाइट 6E 56, मुंबई से जेद्दा जा रही थी, दोनों को बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा अलर्ट घोषित किया गया. बता दें कि इससे पहले इंडिगो प्रवक्ता के अनुसार, जैसे ही इन दोनों विमानों को बम की धमकी मिली, सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दोनों को तुरंत हवाई अड्डे से एक अलग एरिया में दूर ले जाया गया. विमान को अलग स्थान पर खड़ा करने का उद्देश्य संभावित खतरे से यात्रियों और हवाई अड्डे के बाकी हिस्से की सुरक्षा सुनिश्चित करना था. प्रवक्ता ने बताया कि SOP के तहत अनिवार्य सुरक्षा जांच तुरंत शुरू की गई. इस प्रक्रिया में हवाई अड्डे की सुरक्षा टीम, बम निरोधक दस्ते और अन्य संबंधित एजेंसियां शामिल थीं. विमानों की गहन जांच की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके.

सुरक्षा जांच के दौरान सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. इंडिगो की ओर से कहा गया है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है, और हर कदम उठाया जा रहा है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि यात्रियों को कोई नुकसान न पहुंचे. यात्रियों को एयरलाइंस और हवाई अड्डे के स्टाफ द्वारा उचित जानकारी और सहायता प्रदान की जा रही है. बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने मामले की जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी कहां से और किसने दी. जांच एजेंसियां यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि इस धमकी के पीछे कोई वास्तविक खतरा है या नहीं.

बता दें कि, इससे पहले मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही एअर इंडिया (Air India) की फ्लाइट में बम की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया था. आनन-फानन में प्लेन को हवा में ही दिल्ली की तरफ मोड़ा गया और दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर उसकी लैंडिंग कराई गई थी. यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत प्लेन की जांच की गई.

इस मामले में एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा है कि 14 अक्टूबर को मुंबई से जॉन एफ कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट AI119 को एक विशेष सुरक्षा अलर्ट मिला. सरकार की सुरक्षा नियामक समिति के निर्देश पर इसे दिल्ली की ओर मोड़ दिया गया. सभी यात्री उतर चुके हैं और दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल पर हैं. ऐसा ही एक केस 22 अगस्त को भी सामने आया था, जब एअर इंडिया के एक और विमान में बम की धमकी मिली थी. यह फ्लाइट मुंबई से तिरुवनंतपुरम पहुंची थी. इसके बाद हवाई अड्डे पर पूरी तरह से इमरजेंसी घोषित कर दी गई थी.  



तिरुपति लडडू विवाद पर SC ने सुनाया फैसला, कहा हम कोर्ट को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे


नई दिल्ली
/  TODAY छत्तीसगढ़  /  सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए शुक्रवार को एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का सवाल है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के पांच सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जिसमें सीबीआई, पुलिस और FSSAI के अधिकारी शामिल होंगे। 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तिरुपति लड्डू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है तो यह अस्वीकार्य है। तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि एसआईटी जांच की निगरानी केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाए। 30 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह तय करने में सहायता करने को कहा था कि राज्य द्वारा नियुक्त एसआईटी द्वारा जांच जारी रहनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की जानी चाहिए। 

तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के कथित इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के अनुरोध वाली याचिका समेत अन्य दूसरी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम अदालत को राजनीतिक युद्धक्षेत्र के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देंगे। पिछले महीने की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि राज्य में पिछली जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान तिरुपति में लड्डू तैयार करने में पशु चर्बी का उपयोग किया गया था, जिससे एक बड़ा राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के सार्वजनिक बयान पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लैब रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि इस बात का क्या सबूत है कि तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया था। (साभार-एनबीटी)


संधू के साथ धक्का-मुक्की का मामला : 'गुरुद्वारा पूजा-अर्चना करने की जगह है इसे व्यक्तिगत राजनीति से दूर रखना चाहिए'

फ़ाइल फोटो / भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू

 न्यूयार्क।  TODAY छत्तीसगढ़  /   एक अमेरिकी सिख संस्था ने न्यूयॉर्क के एक गुरुद्वारे में भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू के साथ धक्का-मुक्की की कोशिश के मामले में गुरुद्वारे के प्रबंधन से कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है.

सिख ऑफ़ अमेरिका ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि गुरुद्वारा पूजा-अर्चना करने की जगह है इसे व्यक्तिगत राजनीति से दूर रखना चाहिए. संधू गुरु पूरब के मौके पर न्यूयॉर्क के हिक्सविल के एक गुरुद्वारे में गए थे जहां पर ख़ालिस्तान समर्थकों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की कोशिश की लेकिन उन्हें सिख समुदाय के सदस्यों ने सुरक्षा घेरे में ले लिया. संधू ने रविवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर द्वीट करके गुरुद्वारे में जाने की जानकारी दी थी. TODAY छत्तीसगढ़ के WhatsApp ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें   

उन्होंने लिखा था, "गुरु पूरब के मौक़े पर लॉन्ग आईलैंड के गुरु नानक दरबार की स्थानीय संगत में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसमें अफ़ग़ानिस्तान से भी लोग शामिल हुए, कीर्तन सुना और गुरु नानक के एकजुटता, एकता, बराबरी के संदेश के बारे में भी बताया और सबका आशीर्वाद लिया." संधू का गुरुद्वारे में गर्मजोशी से स्वागत किया गया था लेकिन इसी दौरान कुछ ख़ालिस्तान समर्थकों ने उनका विरोध किया.

रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ लोगों ने खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निञ्जर की हत्या को लेकर उनके साथ धक्का-मुक्की करने की कोशिश की लेकिन उन्हें सिख समुदाय के सदस्यों ने सुरक्षित तरीक़े से बाहर निकाला.

सोमवार को इस  घटना पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक्स पर बताया है कि 'खालिस्तानियों ने भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू के साथ आधारहीन सवालों पर धक्का-मुक्की की कोशिश की,'

आरपी सिंह लिखा- " वो गुरपतवंत की हत्या की नाकाम योजना और खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान के आधारहीन सवालों पर उनसे धक्का-मुक्की की कोशिश कर रहे थे."

"हिक्सविल गुरुद्वारे में हिम्मत सिंह ने खालिस्तान समर्थकों का नेतृत्व किया जो राजदूत संधू पर आरोप लगा रहे थे, वो सरे गुरुद्वारे के अध्यक्ष और खालिस्तान जनमत संग्रह के कनाडा चैप्टर के संयोजक हैं."  (साभार / bbc.com/hindi)


IMEC : परियोजनाओं में शामिल सभी देशों को फायदा होगा, क्योंकि यह परिवहन दक्षता को बढ़ाती है - सीतारमण

Terming IMEC as one of the most promising connectivity projects, Sitharaman said it will benefit all countries involved as it increases transport efficiency, reduces logistics costs, enhances economic integration, creates employment. He said the project will reduce greenhouse gas emissions and help create a cleaner, safer, better world.

नई दिल्ली (भाषा)। TODAY छत्तीसगढ़  /   इजराइल और गाजा के बीच जारी संघर्ष भारत- पश्चिम एशिया- यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए एक चुनौती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को यह बात कही।

आईएमईसी की परिकल्पना परिवहन दक्षता बढ़ाने और लॉजिस्टिक लागत कम करने के लिए की गई है। आईएमईसी को सबसे आशाजनक संपर्क परियोजनाओं में एक बताते हुए सीतारमण ने कहा कि इससे इसमें शामिल सभी देशों को फायदा होगा, क्योंकि यह परिवहन दक्षता को बढ़ाती है, लॉजिस्टिक लागत को कम करती है, आर्थिक एकता बढ़ाती है, रोजगार पैदा करती है। उन्होंने कहा कि परियोजना से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटेगा और एक स्वच्छ, सुरक्षित, बेहतर दुनिया बनाने में मदद मिलेगी।

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उन्होंने यहां हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद को संबोधित करते हुए कहा, "हालांकि, इससे साथ भू-राजनीतिक चुनौतियां भी जुड़ी हैं और इजराइल तथा गाजा के बीच चल रहा संघर्ष इसकी एक चिंताजनक अभिव्यक्ति है।" सितंबर में नयी दिल्ली में आयोजित 18वें जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान आईएमईसी पर हस्ताक्षर किए गए थे।  

भारत ने इसराइल के ख़िलाफ़ वोट क्यों किया ?


  TODAY छत्तीसगढ़  /  भारत ने पिछले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया, जिसमें कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइली बस्तियों की निंदा की गई थी.

'पूर्वी यरुशलम और सीरियाई गोलान समेत कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइली बस्तियां' टाइटल से यूएन महासभा में प्रस्ताव पेश किया गया था.

इस प्रस्ताव के समर्थन में 145 वोट पड़े, ख़िलाफ़ में सात और 18 देश वोटिंग से बाहर रहे. जिन्होंने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट किया, वे देश हैं- कनाडा, हंगरी, इसराइल, मार्शल आईलैंड्स, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेसिया, नाऊरु और अमेरिका. सबसे दिलचस्प है कि भारत ने इसराइल के ख़िलाफ़ वोट किया. इसराइल के ख़िलाफ़ वोट करने वाले देशों में बांग्लादेश, भूटान, चीन, फ़्रांस, जापान, मलेशिया, मालदीव, रूस, साउथ अफ़्रीका, श्रीलंका और ब्रिटेन हैं. (www.bbc.com/hindi)

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खौफ़ की गवाह है ये तस्वीर, जब दहशतज़दा 800 लोगों को लेकर आसमान में उड़ा वायु सेना का सी-17 ग्लोबमास्टर

 TODAY छत्तीसगढ़  /   काबुल /  अफगानिस्तान (Afghanistan) पर तालिबान (Taliban) का कब्जा हो चुका है. वहां का प्रशासन तालिबान नेतृत्व को सत्ता हस्तांतरित करने के लिए बातचीत कर रहा है. इसके साथ ही अफगानिस्तान के लोगों में डर भी बढ़ता जा रहा है. TODAY छत्तीसगढ़ के WhatsApp ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें 

तालिबान से बचने के लिए देश छोड़ रहे लोग

अफगानिस्तान (Afghanistan) के लोग 90 के दशक में तालिबान (Taliban) राज के जुल्मों सितम को भूले नहीं है. इसलिए उसके हाथ में वास्तविक सत्ता आने से पहले किसी भी कीमत पर देश से निकल जाना चाहते हैं. इसके लिए काबुल (Kabul) एयरपोर्ट पर लोगों की जबरदस्त भीड़ लगी हुई है. अफगानिस्तान के लोगों के हालात को बयां करती ऐसी ही तस्वीर हाल में वायरल हुई थी. जिसमें विमान से लटके तीन लोग ऊंचाई से गिरकर मर गए थे. 

प्लेन के अंदर की तस्वीर हो रही वायरल

अब उसी प्लेन के अंदर की एक तस्वीर वायरल हो रही है. जिसे देखकर अफगानिस्तान (Afghanistan) की विभीषिका का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. Defense One वेबसाइट की ओर से जारी वायरल तस्वीर में अमेरिकी (America) वायु सेना के सी-17 ग्लोबमास्टर (C-17 Globemaster) की अंदर की तस्वीर दिख रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस विमान में 134 लोगों के बैठने की ही सीटें होती हैं. हालांकि एयरपोर्ट पर जैसे ही विमान का गेट खुला. उसमें धड़ाधड़ 800 लोग भर गए. अंदर घुसे लोग किसी भी कीमत पर बाहर निकलने को तैयार नहीं था. उनका कहना था कि अफगानिस्तान में रुके तो तालिबानी उन्हें मार देंगे.

800 लोगों को एक साथ लेकर उड़ा प्लेन

आखिर में प्लेन के क्रू ने दुस्साहिक फैसला लिया. उन्होंने 800 लोगों के साथ ही प्लेन (C-17 Globemaster) को उड़ाने का फैसला किया. इसके लिए सीटें निकाल दी गई. जिसके बाद लोग प्लेन की फर्श पर बैठ गए. अधिकारियों के मुताबिक प्लेन में भरे 800 लोगों में से 650 अफगानी (Afghanistan) नागरिक थे. इसके बाद उन लोगों को सुरक्षित अमेरिका (America) ले जाया गया. इस बारे में अमेरिकी वायु सेना की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है. हालांकि माना जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को निकालने का यह एक रिकॉर्ड हो सकता है.  

काबुल से जामनगर पहुंचा वायुसेना का C-17 विमान, भारतीय राजदूत समेत 120 लोगों को लाया गया वापस, देखें VIDEO

भारतीय वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान (C-17 Globemaster) काबुल से भारतीय राजदूत समेत 120 से अधिक अधिकारियों को लेकर वापस आ गया है। भारतीय कर्मचारियों को कल देर शाम हवाई अड्डे के सुरक्षित इलाकों में सुरक्षित पहुंचा दिया गया था।

 TODAY छत्तीसगढ़  / नई दिल्ली / अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद हालात बहुत तेजी से खराब होते जा रहे हैं। दुनिया के अमेरिका समेत दूसरे देशों की तरह भारत ने भी वहां फंसे अपने नागरिकों को निकालने का अभियान तेज कर दिया है। इसी के तहत वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान करीब भारतीय राजदूत समेत 120 से अधिक अधिकारियों को लेकर काबुल से गुजरात के जामनगर पहुंच गया है। कर्मचारियों को कल देर शाम हवाई अड्डे के सुरक्षित इलाकों में सुरक्षित पहुंचा दिया गया था। बता दें कि इससे पहले सोमवार को सी-17 ग्लोबमास्टर विमान करीब 150 लोगों को लेकर भारत पहुंच गया था।

गुजरात के जामनगर पहुंचने के बाद अफगानिस्तान में भारतीय दूत रुद्रेंद्र टंडन ने खुशी जाहिर करते हुए भारतीय वायुसेना को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि हमने अफगानिस्तान के लोगों को छोड़ दिया है, उनका कल्याण और उनके साथ हमारा रिश्ता गहरा है। भारतीय राजदूत ने कहा कि वापस आने वाले भारतीय नागरिक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे हैं। हमने सलाह दी है कि ये जरूरी है कि भारतीय नागरिक भारतीय दूतावास में अपना रजिस्ट्रेशन कराएं ताकि ऐसे वक्त में हम उन्हें वापस ला पाएं।

अफगानिस्तान की राजधानी पर तालिबान के कब्जे के बाद कई अन्य देशों ने वहां स्थित अपने दूतावास बंद कर दिए हैं। सऊदी अरब ने काबुल में अपने दूतावास से सभी राजनयिकों को निकाल लिया है। न्यूजीलैंड सरकार भी देश से अपने लोगों की निकासी के लिए विमान भेज रही है। रूस और चीन ने अफगानिस्तान में अपने दूतावास बंद नहीं किए हैं, जबकि अमेरिका अपने दूतावास को बंद करने के साथ ही कर्मचारियों को भी बाहर निकालने में जुटा है। 

बता दें कि तालिबान के कब्जे के बाद से ही काबुल एयरपोर्ट पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं। काबुल एयरपोर्ट से सभी कमर्शियल फ्लाइट्स को उड़ान भरने से रोक दिया गया है। एयरपोर्ट के अनियंत्रित घोषित होने के बाद एयर इंडिया ने सोमवार को काबुल के लिए संचालित होने वाली अपनी उड़ान रद कर दी। इसके अलावा विभिन्न एयरलाइनों ने अफगानी वायुक्षेत्र से बचने के लिए भारत और पश्चिमी देशों के बीच अपनी उड़ानों का मार्ग बदल दिया।

अमेरिकी मदद से निकाले गए भारतीय

अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए वायुसेना के दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों को काबुल रवाना किया गया था। सूत्रों की मानें तो काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ को देखते हुए वहां विमानों की लैंडिंग नहीं हो सकी थी। इसके बाद ताजिकिस्तान के एक एयरपोर्ट पर विमानों को उतारा गया। फिर अमेरिकी बेड़े की मदद से विमान काबुल पहुंचे। वहां से एक विमान ईरानी वायुक्षेत्र का इस्तेमाल करके करीब 150 लोगों को लेकर सोमवार को हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर उतरा। 

तालिबान के चंगुल से अपनों को बचाने काबुल आ-जा रहे ग्‍लोबमास्‍टर, एक बार फिर मिशन पर एयरफोर्स

TODAY छत्तीसगढ़  /  नई दिल्‍ली / तालिबान का नियंत्रण बढ़ने के साथ ही काबुल में हालात बद से बदतर हो गए हैं। अफगानिस्‍तान में कई भारतीय भी फंसे हुए हैं, हालांकि सरकार ने सुरक्षा कारणों के चलते उनकी संख्‍या नहीं बताई है। उन्‍हें वापस लाने के लिए वायुसेना के दो C-17 ग्‍लोबमास्‍टर विमानों को लगाया गया है। इनमें से एक ने रविवार रात उड़ान भरी और काबुल से कुछ यात्रियों को लेकर सोमवार सुबह भारत पहुंचा। दूसरा विमान काबुल से करीब 130 लोगों को लेकर मंगलवार सुबह उड़ा। सूत्रों ने कहा कि ये दोनों विमान अभी काबुल के कई चक्‍कर लगाएंगे।

सरकार ने एक बयान में कहा कि वह भारतीय नागरिकों के संपर्क में है जो लौटना चाहते हैं। इसके अलावा अफगान सिख और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों से भी सरकार संपर्क साध रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "जो लोग अफगानिस्‍तान छोड़ना चाहते हैं, हम भारत आने में उनकी मदद करेंगे।"

एक बार फिर देवदूत बनी वायुसेना

विदेशों में जब भी कहीं भारतीय ऐसे संकट में फंसते हैं, वायुसेना उनकी मदद को पहुंचती है। चाहे कोविड-19 महामारी का दौर रहा हो या फिर यमन संकट के दौरान चला 'ऑपरेशन राहत'... भारतीय वायुसेना ने अपनों को निकाला है। नेपाल में 'ऑपरेशन मैत्री', बेल्जियम में आत्‍मघाती हमले के बाद भारतीयों को निकालना हो या लीबियाई गृहयुद्ध से अपनों को बचाकर लाना, IAF हर बार भरोसे पर खरी उतरी है। 

सैन्‍य अभियान से हिचक रही सरकार ?

भारत ने कहा कि काबुल एयरपोर्ट से सोमवार को कॉमर्शियल उड़ानों की आवाजाही स्‍थगित कर दी गई है। इससे वहां से लोगों को निकालने में रुकावट आई है। बयान में कहा गया, "हम प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए फ्लाइट्स बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं।" बयान से ऐसे संकेत मिलते हैं कि सरकार इस बात को लेकर निश्चिंत नहीं हैं कि सैन्‍य बचाव अभियान चलाया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि ऐसे किसी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिहाज से काबुल में काफी अनिश्चितता है। फिर भी किसी विकल्‍प को खारिज नहीं किया गया है।

दूतावास बंद करने के मूड में नहीं भारत

केंद्र के बयान से यह भी इशारा मिलता है कि वह अस्‍थायी तौर पर भी दूतावास बंद करने का नहीं सोच रहा। जिन अफगान नागरिकों ने भारत के विकास कार्यक्रमों में मदद की है, वे इसे धोखेबाजी की तरह देखेंगे। भारत के पास यह विकल्‍प है कि वह कूटनीतिक मौजूदगी को कम कर दे या फिर स्‍थानीय कर्मचारियों के भरोसे कुछ दिन दूतावास चलाए। अगले कुछ दिन में इसपर फैसला हो सकता है। - एनबीटी 

भारतीय महिला हॉकी टीम को ब्रॉन्ज मेडल मैच में ब्रिटेन से मिली शिकस्त, हिन्दुस्तान बोला 'वो दिन दूर नहीं जब भारत की बेटियाँ मेडल लेकर आएंगी'

  TODAY छत्तीसगढ़  /  टोक्यो  / भारतीय महिला हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल मैच में ब्रिटेन के हाथों 3-4 से हार का सामना करना पड़ा. टोक्‍यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम चौथे स्‍थान पर रही.  एक समय भारतीय टीम 3-2 से बढ़त बनाए हुए थी, मगर इसके बाद ब्रिटेन ने वापसी की और लगातार दो गोल दागकर भारत पर दबाव बना दिया. मैच के आखिरी सेकंड तक रानी रामपाल की टीम ने भरपूर कोशिश की, मगर चूक गई. ओलंपिक में भारतीय महिला टीम का यह सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन है.  

Tokyo Olympics 2020: भारतीय महिला हॉकी को टोक्यो ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा. लेकिन यह ऐसी हार नहीं, जिस पर रंज हो. भला कितनी बार ऐसा हुआ है कि हमारी हॉकी टीम 0-2 से पिछड़ने के 5 मिनट के भीतर 3-2 की बढ़त बना ले. टोक्यो ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में ऐसा हुआ. वह दिन दूर नहीं जब भारत की बेटियां मेडल लेकर आएंगी.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'इस टीम पर गर्व है. टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में हमारी महिला हॉकी टीम के शानदार प्रदर्शन को हम हमेशा याद रखेंगे. हम महिला हॉकी में बेहद करीब से पदक चूक गए, लेकिन यह टीम नए भारत की भावना को दिखाती है.' 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैच के बाद ट्वीट कर भारतीय महिला हॉकी टीम पर गर्व जताया है. उन्होंने कहा है कि टोक्यो में मिली सफलता कई और बेटियों को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित करेगी. पीएम मोदी ने गुरुवार को पुरुष हॉकी टीम की जीत पर भी बधाई दी थी.
टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारतीय महिला टीम (Indian Women Hockey Team) भले ही कांस्य पदक से चूक गई हो लेकिन पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है. शुक्रवार को हुए मुकाबले में ब्रिटेन ने भारतीय टीम को 4-3 से हरा दिया. भारतीय टीम ने पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचकर पहले ही इतिहास रच दिया था. इस बीच उद्योगपित आनंद महिन्द्रा (Anand Mahindra) ने कहा है कि उनका (भारतीय महिला टीम) भी वक्त आएगा. उद्योगपति ने कहा कि – ‘आज हमने अंडरडॉग्स को बेरहमी से गुर्राते हुए सुना उनका भी वक्त आएगा. उन्होंने एक ऐसी क्रांति शुरू की है जिसे रोका नहीं जा सकता.’
भारत का इससे पहले ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1980 में था जब महिला टीम चौथे स्थान पर रही थी. उस समय सेमीफाइनल नहीं होते थे और छह टीमों ने राउंड रॉबिन आधार पर खेला था जिनमें से दो फाइनल में पहुंची थी.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian Women Hockey Team) की प्रशंसा की है. सीएम योगी ने आज इंग्लैंड के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले में हारने वाली टीम इंडिया के लिए लिखा है कि मैच हारा, लेकिन मन जीता…टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने वाली मां भारती की बेटियों का हार्दिक अभिनंदन. जय हिंद ! 
भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian Women Hockey Team) ने ब्रिटेन के साथ ब्रॉन्ज मेडल के लिए शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन मेडल अपने नाम करने में वह सफल नहीं रह सकीं. हालांकि महिला टीम के इस शानदार प्रदर्शन को फैंस सालों तक याद रखेंगे. टीम का यह ओलंपिक (Tokyo Olympics) में ओवरऑल सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है. अंक तालिका में भारतीय महिला हॉकी टीम चौथे नंबर पर जरूर है, लेकिन भारतीय के दिलों में उन्होंने अहम स्थान बना लिया है. ब्रिटेन से भारत को मिली हार के बाद बॉलीवुड (Bollywood) के किंग खान यानी शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) ने टीम का हौसला बढ़ाते हुए एक ट्वीट किया है.
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के द्वारा मेडल जीतने के बाद लोगों की निगाहें भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian Women Hockey Team) पर थीं. लेकिन शुक्रवार की सुबह देश को हार के साथ निराशा का सामना किया. लेकिन इस हार के बाद भी टीम का हौसला लोग सोशल मीडिया पर खूब बढ़ा रहे हैं. इस लिस्ट में शाहरुख खान भी शामिल हैं. 
उन्होंने ट्वीट कर कहा- ‘दिल टूटा!!! लेकिन हमारे सिर को ऊंचा रखने के सभी कारण हैं, भारतीय महिला हॉकी टीम ने अच्छा खेला. आप सभी ने भारत में सभी को प्रेरित किया, वही जीत है’.
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी ने शानदार प्रदर्शन किया है. उन्हें मेडल नहीं मिला, लेकिन अपने अंतिम मैच में टीम ने बेहतरीन खेल दिखाया और ब्रॉन्ज मेडल से चूक गई. हरियाणा सरकार ने अब इन महिला हॉकी खिलाड़ियों पर इनाम की बौछार कर दी है. भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल हरियाणा की 9 बेटियों को 50-50 लाख रुपए के नकद पुरस्कार की घोषणा की गई है.
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यह घोषणा की और कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम रानी झांसी की तरह अंत तक लड़ी है. हालांकि, उन्होंने उम्दा खेल दिखाया. सीएम ने कहा कि सरकार की ओर से सभी खिलाड़ियों को 50-50 लाख रुपये इनाम दिया जाएगा. 

‘वाशिंगटन एक्जामिनर’ की रिपोर्ट कहती है, तालिबान ने दानिश की बड़ी क्रूरता से हत्या की

TODAY छत्तीसगढ़  / वाशिंगटन / पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी ना तो अफगानिस्तान में गोलीबारी में फंसकर मारे गए, ना ही वह इन घटनाओं के दौरान हताहत हुए बल्कि तालिबान द्वारा उनकी पहचान की पुष्टि करने के बाद ‘‘क्रूरता से हत्या’’ की गई थी. अमेरिका की एक पत्रिका ने बृहस्पतिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह दावा किया.

सिद्दीकी (38) अफगानिस्तान में असाइनमेंट पर थे जब वह मारे गए. पुरस्कार विजेता पत्रकार की कंधार शहर के स्पिन बोल्डक जिले में अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच संघर्ष को कवर करते समय मौत हुई थी.

‘वाशिंगटन एक्जामिनर’ की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्दीकी ने अफगान नेशनल आर्मी टीम के साथ स्पिन बोल्डक क्षेत्र की यात्रा की ताकि पाकिस्तान के साथ लगे सीमा क्रॉसिंग पर नियंत्रण के लिए अफगान बलों और तालिबान के बीच चल रही जंग को कवर किया जा सके. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले के दौरान, सिद्दीकी को छर्रे लगे और इसलिए वह तथा उनकी टीम एक स्थानीय मस्जिद में गए, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार मिला. हालांकि, जैसे ही यह खबर फैली कि एक पत्रकार मस्जिद में है तालिबान ने हमला कर दिया. स्थानीय जांच से पता चला है कि तालिबान ने सिद्दीकी की मौजूदगी के कारण ही मस्जिद पर हमला किया था.

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जब पकड़ा गया तब जिंदा थे दानिश

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘सिद्दीकी उस वक्त जिंदा थे जब तालिबान ने उन्हें पकड़ा. तालिबान ने सिद्दीकी की पहचान की पुष्टि की और फिर उन्हें और उनके साथ के लोगों को भी मार डाला. कमांडर और उनकी टीम के बाकी सदस्यों की मौत हो गई क्योंकि उन्होंने उसे बचाने की कोशिश की थी.’’

अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट में सीनियर फैलो माइकल रूबीन ने लिखा है, ‘‘व्यापक रूप से प्रसारित एक तस्वीर में सिद्दीकी के चेहरे को पहचानने योग्य दिखाया गया है, हालांकि मैंने भारत सरकार के एक सूत्र द्वारा मुझे प्रदान की गई अन्य तस्वीरों और सिद्दीकी के शव के वीडियो की समीक्षा की, जिसमें दिखा कि तालिबान ने सिद्दीकी के सिर पर हमला किया और फिर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया.’’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘तालिबान का हमला करने, सिद्दीकी को मारने और फिर उनके शव को क्षत-विक्षत करने का निर्णय दर्शाता है कि वे युद्ध के नियमों या वैश्विक संधियों का सम्मान नहीं करते हैं.’’ सिद्दीकी का शव 18 जुलाई की शाम दिल्ली हवाई अड्डे पर लाया गया और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया. 

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