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छत्तीसगढ़ की प्रमुख नृत्य एवं लोक कला, संस्कृति पर केंद्रित फोटो प्रदर्शनी 2 से 4 जनवरी तक

सांकेतिक तस्वीर 

जिला स्तरीय घासीदास लोककला महोत्सव में सिलपहरी पंथी पार्टी अव्वल


बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  परम पूज्य बाबा गुरुघासीदास जी के जयंती के अवसर पर जिला स्तरीय गुरुघासीदास लोक कला महोत्सव पर 18 दिसम्बर 2025 को शासकीय प्री में सामूहिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास जरहाभाठा में आयोजित की गई। बाबा गुरुघासीदास की छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिसमें तीन दलों के द्वारा मनमोहक पंथी नृत्य एवं भरथरी गीतों का प्रदर्शन किया गया। प्रतियोगिता में सम्मिलित दलों में से सिलपहरी पंथी पार्टी बिलासपुर को प्रथम स्थान एवं संत के संदेश पंथी पार्टी ग्राम करहीपारा तखतपुर को द्वितीय स्थान तथा हमर छत्तीसगढ़ के माटी लोककला मंच छोटी कोनी बिलासपुर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। 

उक्त आयोजन में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दलों को राज्य स्तरीय आयोजन हेतु नवागढ़ बेमेतरा भेजा जावेगा। राज्य स्तरीय कार्यक्रम हेतु शासन द्वारा प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल को 1 लाख रूपए एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को 75 हजार रूपये पुरस्कार राशि देने का प्रावधान है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास बिलासपुर श्री पीसी लहरे द्वारा की गई। इनके अलावा श्री महादेवा संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा, सुश्री आकांक्षा पटेल सहायक संचालक, श्रीमती सीमा मिंज सहायक लेखा अधिकारी, समाज के प्रतिष्ठितगण डॉ. के. एल. सान्डे, श्री गुलाब चन्द्र भारद्वाज, हेमल पाल घृतलहरे, श्री शत्रुहन घृतलहरे एवं समस्त अधीक्षकगण, अधिकारी कर्मचारी की गरिमामयी उपस्थित में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जाति संस्कृति उनके पारंपरिक रितिरिवाज और लोक कला महोत्सव को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है। इस आयोजन में छात्रावासी बच्चों द्वारा बढ़-चढ़कर हर्षाेल्लास के साथ भाग लिया गया एवं अपनी संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिला।  

जयंती 18 दिसम्बर पर विशेष: संत गुरु घासीदास बाबा जी— सतनाम पंथ के नक्षत्र


भारतीय संत परंपरा के तत्वावधान में हमारे संतों ने बाहरी आडम्बरों , जाति- पाँति धार्मिक कट्टरता को शिथिल करते हुए समाज में प्रेम और सामजिक सद्भाव जैसी महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया | ऐसी ही संत परम्परा में कबीर, नानक, मीरा बाई, नामदेव, रविदास, सूरदास, आदि का नाम हम श्रद्धा और आदर से लेते हैं | उन्होंने अपनी वाणी के द्वारा लोगों में चेतना जाग्रत किया | जो कि भक्ति का मार्ग अपनाकर सामाजिक एकता कायम रख सके | ऐसी ही हमारे छत्तीसगढ़ में एक महान संत हुए जो संत गुरु घासीदास के नाम से जाने जाते हैं |

    ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम अपना जीवन किस तरह जीना चाहते हैं। समय कोई भी हो, कितने ही युग बीत जायें मगर जिन्हें महान कार्य करना हो, समाज के उद्धार के लिए, दीन-दुखियों की सेवा के लिए, वे बाधाओें की परवाह किये बिना सदकार्य में लग जाते है। उन्हें उनके पथ से कोई डिगा नहीं सकता। ऐसे ही महान युग प्रवर्तक, समाज सेवक, निस्वार्थ, निष्काम सेवा भावी संत थे छत्तीसगढ़ के ग्राम गिरौदपुरी में जन्मे सतगुरु बाबा घासीदास। 

        जिस वक्त गुरुजी का आविर्भाव हुआ था तब छत्तीसगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में एकदम पिछड़ा क्षेत्र था। केवल उच्च वर्ग के, धनाड्य , सम्पन्न घरों के बच्चे ही विद्याध्ययन कर पाते थे। क्योंकि तब शिक्षा को जरूरी नहीं समझा जाता था। जरूरी था तो बस इतना ही कि विद्यार्थी अक्षर ज्ञान प्राप्त कर ले। सो किसान वर्ग, श्रमिक वर्ग, हरिजन, आदिवासियों ने शिक्षा के प्रति ध्यान ही नहीं दिया। वैसे भी तब के जमींदार, मालगुजार या ब्राम्हण वर्ग नहीं चाहते थे कि निम्न वर्ग के बच्चे उनके बच्चों के साथ बैठकर विद्याध्ययन करें। तब उन्हें अछूत समझा जाता था। यही कारण है कि उनका बौद्धिक स्तर कम ही रहा। जनता दलित, पीड़ित और शोषित थी। अपने लोगों की इस दशा में गुरु घासीदास का हृदय द्रवीभूत हो गया था। उनका मन दलितों के उद्धार की ओर अग्रसर होने लगा। परिणाम स्वरूप उन्होंने ‘‘सतनाम पंथ’’ की स्थापना की। 

        उनके चिंतन से कहीं भी यह आभास नहीं होता है कि यह उपदेश या बातें किसी एक विशेष वर्ग के लिए कही गई है बल्कि समस्त मानव समुदाय और विश्व स्तर पर सभी धर्मावलम्बियों को प्रभावित किया है। 

      यही कारण है कि आज उनके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। जिस समय आपका आविर्भाव हुआ देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। अंध विश्वास, कुरीति, सामाजिक रूढ़िवादिता, धर्मभीरूता, कुप्रथा, सामाजिक प्रतिबंध, छुआछूत जैसी सामाजिक अव्यवस्थायें हावी थीं। ऐसे वक्त में गुरुजी ने जो उपदेश दिया उसे सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण रखकर आज के परिप्रेक्ष्य में रखकर विचार करें तो हम पाते हैं कि उनके उपदेश या कथन सभी वर्गो के लिए मान्य है | गुरु ने कहा है कि - न कोई जन्मना ऊँचा, न नीचा है, विभाजन कर्म की रेखा, उठाती है, गिराती है, विभाजित आचरण लेखा, नहीं वह नीच हो सकता, कि जिसका कर्म ऊँचा है, बड़ा वह हो नहीं सकता, कि जिसका कर्म नीचा है, हमारे वेद, श्रुतियाँ, उपनिषद, सिद्धांत शास्त्रों के, यही कहते, इसी में मर्म जीवन का समूचा है। 

         अर्थात न कोई जन्म से ऊँचा है और न कोई नीचा है। मुझे कहीं भी असमानता की स्थिति नजर नहीं आती और असमानता हो भी तो किस बात पर। मानव-मानव सब एक है फिर भेदभाव कैसा किन्तु, नासमझी की भावना ही हमें एक दूसरे से अलग करती है। हम विभाजन किसलिए करते हैं। एक ऊँचा एक नीचा यही प्रवृत्ति सबसे घातक होती है। हमारा कर्म, हमारी सोच ही हमें छोटा-बड़ा बनाती है। वही इंसान को ऊँचा उठाती है और वही नीचे गिराती है। स्पष्ट यह कि हमारा आचरण कैसा हो। 

    वे कहते हैं कि एक उच्च कुल का व्यक्ति यदि हत्या जैसे अपराध करता है वहीं एक निम्न कुल का व्यक्ति भी यह अपराध करता है तो दोनों एक ही स्तर के हुए। इनमें न कोई छोटा न बड़ा। दोनों का ही कुल एक हुआ और वह कुल है हत्यारे का। यहाँ जाति पीछे छूट जाती है और कर्म सामने आता है। सो बड़ा कर्म करने वाला ऊँचा और छोटा कर्म करने वाला नीचा, वह कैसे हो सकता है ? समानता का सिद्धांत होना चाहिए। यही हमारे वेद समस्त शास्त्र और श्रुतियाँ भी कहते हैं और इसी में जीवन का मर्म छिपा हुआ है। 

    गुरु घासीदास जी के द्वारा वाचिक परम्परा के माध्यम से प्राणित ‘‘26’’ उपदेशों को आत्मसात कर, उन्हीं के बताये मार्ग पर चलकर सभी वर्गों, सभी धर्मों के साथ समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

 व्यक्तिगत रूप से मैं गुरु घासीदास जी द्वारा मानव जाति के लिए दिये गये संदेशों से, उपदेशों से, उनके समग्र व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हूँ। कौन कहता है कि वे एक वर्ग विशेष के हैं। वर्ग विशेष के वे तब थे जब उन्होंने समाज में व्याप्त भ्रान्तियों को दूर करने का बीड़ा उठाया था। आज तो वे समस्त वर्ग के आराध्य के रूप में पूजे जाते हैं । हमारा वर्तमान परिदृष्य यह कहता है कि आज समाज में ऊँच-नीच, छोटे-बड़े की बात बेमानी है। मनुष्य को आत्मा के शुद्धिकरण के लिए सोचना चाहिए न कि केवल तन के शुद्धिकरण की। यदि तन के शुद्धिकरण से ही समानता की बात होती तो पवित्र नदियों के तट पर बसने वालों में कहीं भी छोटा-बड़ा या ऊँच-नीच का वर्ग विष्लेषण नहीं होता। 

हमारी नदियों ने, हमारे पर्यावरण ने, हमारी प्रकृति ने हमें आपस में प्रेम, भाईचारा का पाठ पढ़ाया है। तभी तो महात्मा बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उसी तरह सतगुरु घासीदास बाबा जी ने भी तेंदू वृक्ष के नीचे बैठकर ज्ञान की प्राप्ति की थी, ज्ञान का बोध किया था। 

अतः इन संत महात्माओं ने हमें यह भी बोध कराया है कि हमें पर्यावरण के प्रति भी सजग रहना है यह कि पेड़ हमारें लिए कितना उपयोगी है। बिना पेड़-पौधों के प्राकृतिक वातावरण नष्ट होता है और हमारा पर्यावरणीय अस्तित्व संकट में पड़ जाता है। 

Chhattisgarh: शादी से पहले सेक्स पर बयान देकर विवादों में आध्यात्मिक गुरु परम आलय


बिलासपुर ।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे आध्यात्मिक गुरु परम आलय अपने बयान को लेकर विवादों में आ गए हैं। कार्यक्रम में उन्होंने मीडिया को दिये बयान में साफ-साफ कहा कि “लड़कियों को शादी से पहले सेक्स पर ऐतराज नहीं होना चाहिए।” उनके इस कथन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस बयान पर कड़ी आपत्ति जता रहे हैं।

सेक्स को बताया ‘ऊर्जा’

आध्यात्मिक गुरु परम आलय ने कहा कि “सेक्स ऊर्जा और भोजन ऊर्जा पर हमारे देश में बात नहीं होती। सेक्स को पूजनीय मानना चाहिए, क्योंकि इससे हमारा जन्म हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि “लड़कियों को शादी से पहले सेक्स के बारे में समझ होना जरूरी है, जैसे गाड़ी लेने से पहले टेस्ट ड्राइव की जाती है।”

इस कथन के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई यूजरों ने गुरु के बयान को अमर्यादित और अनुपयुक्त बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत विचार की आज़ादी का मामला बताते हुए समर्थन भी किया। {NBT}

राम मंदिर कार्यक्रम: ‘निमंत्रण क्यों नहीं मिला, देने वाले जानें’—प्रवीण तोगड़िया


 बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  विश्व हिंदू परिषद के पूर्व प्रमुख और वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि वह चार दशक तक राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे, लोगों को मंदिर निर्माण के लिए प्रेरित करते रहे, लेकिन अयोध्या में मंदिर निर्माण पूर्ण होने और भगवा झंडा फहराए जाने के बाद भी उन्हें किसी कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उन्हें कोई नाराजगी नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण पूरा होने की खुशी ही उनके लिए पर्याप्त है।

तोगड़िया ने कहा, “देश के 50 लाख हिंदुओं ने 40 साल तक मेहनत की। उसमें मेरा योगदान भी गिलहरी की तरह रहा। आज मंदिर बन गया, सपना पूरा हो गया। मुझे निमंत्रण क्यों नहीं मिला, यह देने वाले ही बता सकते हैं।”

2014 के बाद उनकी सक्रियता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि वे हमेशा सक्रिय रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान लगातार सभाएं और आंदोलन के कारण वे अधिक दिखाई देते थे। उन्होंने बताया कि अब वे पूरे देश के एक लाख गांवों में हनुमान चालीसा पाठ अभियान शुरू कर रहे हैं, जिसे वे अपनी निरंतर सक्रियता का प्रमाण बताते हैं।

हिंदू सुरक्षा के प्रश्न पर तोगड़िया ने कहा कि देश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनसे सुरक्षा की आवश्यकता स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा, “पहलगाम में लोग क्यों मारे गए? दिल्ली में ब्लास्ट क्यों हुआ? हिंदुओं को सुरक्षा की जरूरत पहले भी थी, आज भी है और आगे भी रहेगी।”

सामूहिक हनुमान चालीसा के उद्देश्य पर उन्होंने कहा कि जैसे नमाज़ सामूहिक रूप से मस्जिद में पढ़ी जाती है, उसी तरह संगठन की मजबूती के लिए सामूहिक पाठ आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से न केवल धार्मिक गतिविधियाँ होंगी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में अनाज वितरण और स्वास्थ्य सुविधाएँ देकर सेवा कार्य भी किए जाएंगे, जिससे धर्मांतरण जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सके।

लव जिहाद और धर्मांतरण पर पूछे गए सवाल पर तोगड़िया ने कहा कि यह चुनौती अब भी मौजूद है, इसलिए हनुमान चालीसा केंद्रों के जरिए समाज को संगठित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य देश में हिंदू समाज की सेवा और संगठन को मजबूत करना है।

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: जनजातीय गौरव दिवस नवोदय विद्यालय में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

 


बीजापुर । 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जिले में जनजातीय गौरव दिवस का गरिमामय आयोजन नवोदय विद्यालय परिसर में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों द्वारा पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद दी गई रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को उत्सवमय बना दिया। 


कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल माध्यम से जुड़े और देशवासियों को जनजातीय गौरव दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अविस्मरणीय योगदान का स्मरण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने जिले के लिए विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ करते हुए करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दो एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का वर्चुअल लोकार्पण किया। इनमें बालक एवं बालिका एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, आवापल्ली, तथा बालक एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, भोपालपटनम शामिल हैं। इन विद्यालयों से जनजातीय विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों सहित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। 

कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने उपस्थित जनसमुदाय को जनजातीय गौरव दिवस की बधाई देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री का संबोधन समारोह स्थल पर बड़ी संख्या में मौजूद नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने ध्यानपूर्वक सुना।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती नीना रावतिया उद्दे, सदस्य मैथ्यूज कुजूर, कलेक्टर संबित मिश्रा, अपर कलेक्टर भूपेन्द्र अग्रवाल, संयुक्त कलेक्टर जागेश्वर कौशल, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास देवेंद्र सिंह सहित अनेक अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


देश भर में दुर्गोत्सव की धूम, प्रतिमाओं का श्रद्धा के साथ विसर्जन शुरू



TODAY छत्तीसगढ़  /  सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल: लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट पर देवी दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जा रहा है। विसर्जन जुलूस में भगवान हनुमान की वेशभूषा में शामिल हुए गणेश कहते हैं, "जय मां दुर्गा...मां इतने दिनों तक यहां आईं और हम सभी के बीच रहीं...मैंने यहां कई कार्यक्रम किए हैं। मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है..." 

नवरात्रि में कमल तोड़ाई का दृश्य: श्रद्धा और भक्ति से सजी बाजार की रौनक



TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर, 28 सितम्बर । नवरात्रि का पावन पर्व आते ही पूरे देश में भक्ति और आस्था का माहौल छा जाता है। मंदिरों से लेकर घर-घर तक देवी पूजन की गूंज से पूरा वातावरण आस्था से सराबोर हो जाता है । इस अवसर पर देवी माँ को अर्पित किए जाने वाले फूलों में कमल का विशेष महत्व है। देवी महालक्ष्मी और माँ सरस्वती को कमल प्रिय माना गया है, वहीं माँ दुर्गा की आराधना में भी कमल का पूजन शुभ फलदायी माना जाता है।

इसी कड़ी में यह दृश्य अपने आप में अद्भुत है—तालाब के बीचों-बीच दो व्यक्ति हवा भरे ट्यूब पर बैठकर सावधानी से खिले हुए कमल चुन रहें हैं। चारों ओर पानी की सतह पर तैरते हरे पत्तों के बीच गुलाबी कमल खिले हुए हैं, मानो तालाब खुद देवी माँ के स्वागत में सजा हो। नवरात्रि के दौरान कमल फूलों की मांग अचानक बढ़ जाती है। स्थानीय बाजारों में सुबह-सुबह फूलों से भरी टोकरी सज जाती है और भक्त अपने आराध्य को अर्पित करने के लिए इन फूलों की खरीदारी करते हैं। दुकानों और मंदिरों के आसपास भक्ति गीत गूंजते हैं और वातावरण में पूजा की तैयारी की ख़ुशबू रची-बसी रहती है।

कमल तोड़ने वाले श्रमिकों के लिए यह समय खास होता है। उनकी मेहनत से ही देवी के भक्त अपने पूजन में शुद्ध और ताजे फूल अर्पित कर पाते हैं। यह वीडियो सिर्फ एक व्यक्ति की मेहनत नहीं, बल्कि नवरात्रि के भक्ति-भाव और सांस्कृतिक रंगों को जीवंत करता है।कमल का खिलना और भक्तों तक पहुँचना, प्रकृति और आस्था के बीच का वह सेतु है जो नवरात्रि जैसे पर्व को और भी पावन बना देता है।

 

POLICE; नागरिकों से अपील, छोटे वाहनों अथवा सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें


 TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर / नवरात्र उत्सव के तहत शहर में माँ दुर्गा दर्शन और डांडिया-गरबा कार्यक्रमों के चलते यातायात पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है। पुलिस ने श्रद्धालुओं और नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें। शहर के प्रमुख स्थलों पर जहाँ भारी भीड़ की संभावना है, वहाँ अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं।

गोड़ पारा माँ दुर्गा दर्शन स्थल के लिए  - लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर, हैप्पी स्ट्रीट, बाजपेई मैदान, कोतवाली मल्टीलेवल पार्किंग, रामसेतु सरकंडा मार्ग और फुटबॉल ग्राउंड को पार्किंग स्थल बनाया गया है।

जलसा गरबा (साइंस कॉलेज) के लिए खेल परिसर (सरकंडा रोड) को पार्किंग स्थल तय किया गया है।

पंखिड़ा गरबा (सीपीआई हाईकोर्ट रोड) हेतु सीपीआई परिसर, बोदरी मार्ग और जीवन विहार मार्ग पार्किंग स्थल रहेंगे।

यातायात पुलिस के मुताबिक, 24 सितम्बर को शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक इन मार्गों पर यातायात दबाव अधिक रहेगा। इसलिए नागरिक छोटे वाहनों अथवा सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें। पंडाल परिसर में किसी भी वाहन को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।  पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल एंट्री और एग्जिट मार्गों से ही आवागमन करें, जिससे श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन हो सके और यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रहे।

उगते सूर्य को अर्ध्य देने उठे हजारों हाथ, श्रद्धा के साथ छठ पूजा सम्पन्न


 बिलासपुर /  TODAY छत्तीसगढ़  / देश के सबसे बड़े छठ घाट बिलासपुर के अरपा नदी के तट पर शुक्रवार को छठ महापर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गुरुवार की शाम और शुक्रवार की सुबह व्रती महिलाओं के साथ पुरुषों ने भी उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व मनाया। इस दौरान बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल छठ घाट पहुंचें और सभी को पर्व की बधाई दी। 

लोगों की मान्यता है कि छठ पर्व पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से सभी मन्नतें पूरी हो जाती है। हर साल की तरह इस बार भी दैनिक भास्कर ने इस आकर्षक नजारे का ड्रोन वीडियो तैयार किया है। मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाने वाला छठ पर्व अब छत्तीसगढ़ के साथ ही बिलासपुर में भी उत्साह के साथ मनाए जाने लगा है। यही वजह है कि यहां अरपा नदी के तट पर देश का सबसे बड़ा स्थायी छठघाट तैयार किया गया है, जहां हर साल व्रतियों की भीड़ बढ़ रही है।

चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व पर दिवाली के बाद दूसरी दिवाली की झलक नजर आई। इस दौरान श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। करीब 1000 हजार मीटर के इस घाट में अर्घ्य देने वाली व्रतियों की भीड़ नजर आई। दावा किया जा रहा है कि आयोजन में 50 हजार से ज्यादा लोग छठ घाट पर पहुंचे।  शुक्रवार तड़के 3 बजे से गाजे-बाजे के साथ लोगों के दौरा और गन्ना लेकर छठ घाट पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान पहले घाट पर दौरा का पूजा की।जिसके बाद छठी मईया की विधि-विधान से पूजा-आराधना कर अरपा नदी में दीपदान कर व्रत करने वाले लोग एक-एक कर पानी के अंदर गए। कमर तक पानी के बीच उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। 

छठ पर्व : अस्त होते सूर्य को अर्ध्य देकर व्रतियों ने की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना

 36 घंटे का निर्जला व्रत कल सुबह भगवान् भास्कर के उदय होते ही अर्ध्य देकर विधिवत समाप्त होगा। 


बिलासपुर । 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छठ महापर्व के तीसरे दिन का शुभ अवसर व्रतियों के लिए विशेष महत्व रखता है। आज गुरुवार की संध्या में डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए हजारों श्रद्धालु और व्रती अरपा नदी के किनारे तोरवा छठ घाट में  एकत्र हुए।  भगवान भास्कर की विधिवत पूजा के पश्चात् उनको पहला अर्ध्य देकर व्रतियों ने अपने परिवार और समाज के कल्याण के लिए माँ छठी से आशीर्वाद मांगा। 

जानकारों की माने तो बिलासपुर का छठ घाट देश का सबसे बड़ा स्थाई छठ घाट है जहां आज दोपहर बाद छठ व्रतियों का आना शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरा घाट भक्तों और व्रतियों की भीड़ में खो सा गया। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु और व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया, कल शुक्रवार की सुबह उदय होते भगवान भास्कर को अर्ध्य देकर सभी व्रती अपनी उपासना प्रसाद ग्रहण कर ख़त्म करेंगे। 

इस दौरान घाट में मेले जैसा माहौल दिखाई पड़ा । जिला और पुलिस प्रशासन ने सारे इंतज़ामात पहले से कर रखे थे लिहाजा छठ घाट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुगम तरीके से यातायात भी चलता रहा। कलेक्टर अवनीश शरण, पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह और नगर निगम आयुक्त अमित कुमार भी छठ घाट पहुँचे, उन्होंने भी प्रत्यक्ष रूप से साड़ी व्यवस्थाओं का न सिर्फ जायजा लिया बल्कि भगवान् भास्कर को प्रणाम कर सभी की खुशहाली की कामना छठी मैया से की। 

छठ पूजा : घाट की ओर से गुजरने वाले वाहनों का मार्ग परिवर्तित, भारी वाहन पूर्णतः प्रतिबंधित

 


बिलासपुर / 
TODAY छत्तीसगढ़  /  सूर्य उपासना का पर्व छठ के मद्देनज़र बिलासपुर पुलिस ने तमाम एहतियात और तैयारियां पूरी कर ली हैं। तोरवा छठ घाट पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति के मद्देनज़र पुलिस ने गुरुवार 7 नवम्बर और शुक्रवार 8 नवम्बर को आवागमन मार्ग में कुछ बदलाव किया है जो आम जनता के लिये सुविधाजनक होगा। पुलिस ने यातायात डायवर्सन के मार्ग के संबध में जो जानकारी दी है उस लिहाज से  कल 7 नवम्बर को दोपहर 2 बजे से 8 नवम्बर की सुबह 11 बजे तक तोरवा चौक से छठ घाट होकर मोपका, राजकिशोर नगर जाने वाले मार्ग पर भारी वहां पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे।  

छठ महापर्व के बीच शहर के आवाम को बेहतर और सुचारु यातायात सुविधा मिल सके इस लिहाज से पुलिस ने जिन रास्तों से वाहनों को डायवर्ट किया है वो इस प्रकार है। 

(01) / महमंद  मोड भारी वाहन डायवर्सन— महमंद मोड़ से सभी प्रकार के भारी वाहनों का शहर प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा इस प्रकार सभी भारी वाहन सिरगिट्टी होकर आगे की यात्रा तय करेंगे। 

(02) / चिल्हाटी तिराहा भारी वाहन डायवर्सन—  चिल्हाटी तिराहा से सभी प्रकार के भारी वाहनों का शहर प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, सभी भारी वाहन सेंदरी—मोपका बाईपास होकर आगे की यात्रा तय करेंगे।

इसी प्रकार दुपहिया, कार एवं हल्का वाहन मोपका—सरकंडा—लिंगियाडीह—दयालबंद—तोरवा होकर आना जाना कर सकेंगे। 

(01) /  छठ घाट तिराहा डायवर्सन— इस तिराहा से छठ घाट की ओर सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा सभी प्रकार के कार आदि वाहनों को डायवर्सन किया जाएगा जो की आरके नगर लिंगियाडिड रोड से सरकंडा एवं दयालबंद की ओर से आना-जाना कर सकेंगे।

(02) / धान मंडी मोड़ (तोरवा पेट्रोल पंप) डायवर्सन— यहां से छठ घाट की ओर सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा सभी प्रकार के कार आदि वाहन गुरु नानक चौक, दयालबंद होते हुए शहर एवं लिंगियाडीह, सरकंडा, मोपका की ओर आवागमन कर सकेंगे।

यातायात पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे परिवर्तित मार्ग का उपयोग करते हुए आवागमन करें ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। 

अरपा माई की महाआरती : नहाय खाय से शुरू हुआ लोक आस्था का महापर्व छठ, कल खरना

बिलासपुर / TODAY छत्तीसगढ़  /लोक आस्था के महापर्व की गूंज जिले के कोने-कोने में सुनाई देने लगी है। छठ घाट जहां सज धज कर तैयार हैं, वही जिन घरों में व्रती हैं वहां नहाय खाय के साथ चार दिवसीय लोक आस्था छठ पूजा का शुभारंभ आज माँ अरपा की महाआरती के साथ हो गया। 

 चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत मंगलवार को नहाय-खाय के साथ हुई। वहीं आठ नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस लोक पर्व का विधिवत समापन होगा। । आज व्रतियों ने स्नान कर छठ व्रत का संकल्प लिया। उसके बाद अरवा चावल का भात, चने की दाल और कद्दू (लौकी) की सब्जी ग्रहण की। इसमें परिवार के सदस्य भी शामिल रहे। नहाय-खाय के बाद व्रती खरना की तैयारी में जुट गए। कल खरना है, सभी छठव्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर गुरुवार 7 नवम्बर की शाम अस्त होते भास्कर को अर्ध्य देकर छठ्ठी माई से अपनी मनोकामना पूरी होने कामना करेंगे। अगले दिन यानि 8 नवम्बर शुक्रवार को सभी व्रती उदय होते भगवान् भास्कर को अर्ध्य देंगे और विधिवत पूजा का समापन करेंगे। 

तीन दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत के लिए बिलासपुर शहर के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है। कहीं, लोग छठ के लिए कपड़े से लेकर दउरा खरीद रहे हैं तो कहीं, सूप, मिट्टी व कांसे के बर्तन के साथ ही टोकरी और फल खरीदते हुए लोग आसानी से देखे जा सकते हैं।


कबीर आश्रम में जलता पटाखा फेंका : दामाखेड़ा मामले में सियासत तेज, 16 लोगों की गिरफ्तारी

गुरु प्रकाश मुनि साहेब से मुलाक़ात करने दामाखेड़ा पहुंचें कांग्रेस नेता

 रायपुर।TODAY छत्तीसगढ़  /  बलौदाबाजार जिले के दामाखेड़ा में शुक्रवार रात कबीर पंथ के धार्मिक गुरु प्रकाश मुनि साहेब के आश्रम में पटाख़ा फेंके जाने के मामले में पुलिस ने अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति निर्मित हुई जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इस मामले में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है वहीँ दोनों ही प्रमुख राजनैतिक पार्टी के लोग आश्रम पहुँचकर गुरु प्रकाश मुनि साहेब से मुलाक़ात कर चुके हैं। 

आपको बता दें कि 1 नवम्बर की देर रात करीब 9 बजे यह जब गुरु प्रकाश मुनि साहेब दीपावली पूजन के बाद अपने पुत्र और समर्थकों के साथ दीपावली मिलन के लिये ग्राम भ्रमण में निकले थे, उसी दौरान कुछ शरारती तत्वों ने आश्रम परिसर में जलते हुए पटाखे फेंके और उनके पुत्र के साथ दुर्व्यवहार किया। इस घटनाक्रम की सूचना गुरु प्रकाश मुनि साहेब ने तत्काल सिमगा थाने को दी और गृह मंत्री से फोन पर बातचीत कर मामले से अवगत कराया। 

 इस घटनाक्रम की ख़बर आग की तरह फैली, मामले की गंभीरता को देखते हुये रात करीब 2 बजे गृह मंत्री विजय शर्मा, भाटापारा के पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, रायपुर रेंज के आईजी रजनीश सिंह और बलौदाबाजार एसपी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया । 

 इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पार्टी के कई प्रमुख नेता दामाखेड़ा पहुंचे। यहां कबीर पंथ के‌ प्रमुख प्रकाश मुनि साहेब से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कबीर आश्रम दामाखेड़ा पर  हमला और वंशाचार्य उदितमुनि नाम साहेब पर हत्या की नीयत से किया गया हमला बेहद दुःखद और निंदनीय है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार में हमारे संत व धार्मिक स्थल भी सुरक्षित नहीं हैं। 

लुतरा शरीफ का 66 वां सालाना उर्स, परचम कुशाई के साथ कल से शुरू होगा 6 दिवसीय उर्स


 बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में सीपत के नजदीक ग्राम लुतरा में शहंशाहे छत्तीसगढ़ के नाम से मशहूर सूफी-संत हुजूर बाबा सैय्यद इंसान अली शाह रहमतुल्लाह अलैह लुतरा शरीफ के लिए छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा गठित इंतेजामिया कमेटी 6 दिवसीय सालाना उर्स की तैयारी पूरी कर चुकी है। रविवार को परचम कुशाई के साथ उर्स का आगाज होने जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष इरशाद अली ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह के 6 दिवसीय 66 वां सालाना उर्स पाक 20 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर तक बड़े ही अकीदत और शानो शौकत के साथ मनाया जाएगा। इंतेजामिया कमेटी से जुड़े सभी पदाधिकारी, मेंबर के अलावा उर्स कमेटी के तमाम पदाधिकारी तैयारी पूरी कर चुके हैं।   

श्री अली ने जानकारी दी कि सालाना उर्स का आगाज़ 20 रविवार की सुबह 11:00 बजे परचम कुशाई मटका पार्टी पप्पू नौशाही,कामठी नागपुर के साथ होगा। पहले दिन रात 9:00 बजे नात मनकबत तकरीर कारी अल्हाज हसन अशरफी व हाफिज मोहम्मद इजरायल मुदर्रिश दारुल उलूम फैजाने इंसान अली शाह के द्वारा कलामें पाक की तिलावत के साथ प्रोग्राम की शुरुआत करेंगे। इसके पहले दोपहर 3:00 बजे दरगाह से शाही संदल चादर निकाली जाएगी जिसे दादी अम्मा की दरगाह खम्हारिया में चढ़ाई जाएगी।

 उर्स के दूसरे दिन 21 अक्टूबर को दोपहर 12:40 बजे मजार ए पाक का गुस्ल,सलातो सलाम व शिजरा खानी होगी। शाम 3:00 बजे पुराने दरबार में संदल चादर व महफिले समा के साथ ही दरबारी कव्वाल यासीन शोला व उनके साथी सूफियाना कलाम पेश करेंगे। रात 9:00 बजे तकरीर का अजीमुशशान जलसा रखा गया है जिसमें किछौछा शरीफ (उप्र) से आए धर्म गुरु सैय्यद राशिद मक्की मियां साहब व कटिहार बिहार  के मुफ्ती मोइनुद्दीन चतुर्वेदी साहब तकरीर (प्रवचन) करेंगे। 

उर्स के तीसरे दिन 22 अक्टूबर को रात 9:00 बजे रेडियो ऑडियो एवं टीवी सिंगर दिल्ली के कव्वाल चांद अफजाल कादरी अपना कलाम पेश करेंगे।इसके पहले आल छत्तीसगढ़ मुस्लिम तंजीमों (कमेटी)का इस्तेकबाल किया जाएगा।

प्रोग्राम के चौथे दिन 23 अक्टूबर को आल इंडिया नातियां मुशायरा कार्यक्रम रात 9 बजे किया जाएगा जिसमें जेरे सदारत फरजंदे गौसे आजम शहजादे शिमना हजरत अल्लामा वा मौलाना सैयद राशिद मक्की मियां साहब क़िब्ला किछौछा शरीफ की सदारत में होगा। मुशायरा का संचालन कफिल अंबर साहब कलकत्तवी, शायरे इस्लाम जैनुल आबदीन कानपुरी, नायाब व मंजर कलकत्तवी, गुलाम नूर ए मुजस्सम उन्नावी और अहमदुल फ़त्ताह फैजाबादी अपने-अपने अंदाज में खूबसूरत शायरी प्रस्तुत करेंगे।

 इसी तरह 24 अक्टूबर की रात 9:00 बजे से लुतरा शरीफ के दरबारी और हिंदुस्तान के मशहूर रेडियो ऑडियो एवं टीवी सिंगर बिजनौर यूपी के बीच कव्वाल रईस अनीस साबरी के द्वारा शानदार कव्वाली की प्रस्तुति दी जाएगी। 

उर्स के 6 वें और अंतिम दिन 25 अक्टूबर  को बाद नमाजे फजर कुरान ख्वानी  11:00 बजे रंग की महफिल व कुल की फातिहा होगी जिसमें मुस्लिम समाज के धर्म गुरु हजरत अल्लामा व मौलाना सैय्यद राशिद मक्की मियां साहब किछौछा शरीफ के द्वारा प्रदेश के अमन चैन की दुआ मांगी जाएगी। पूरे उर्स के दौरान 6 दिन 24 घंटे शुद्ध शाकाहारी दरबारी शाही लंगर के साथ रोजाना सुबह चाय नाश्ते का भी बेहतरीन इंतेजाम रहेगा।

कमेटी के सेक्रेटरी रियाज अशरफी ने बताया कि इस बार कमेटी के द्वारा प्रदेश के लगभग सभी जिलों से बाबा सरकार के चाहने वालों को जोड़ा गया हैं। दरगाह परिसर में लगातार सुधार,जीर्णोद्धार के साथ ही मुस्लिम एजुकेशन सिस्टम को उन्नत किया जा रहा है। दरगाह परिसर में स्थित मदरसे में बच्चों को फ्री भोजन,आवास के साथ आधुनिक,शिक्षा दी जा रही है।उर्स के दौरान आने वाले हजारों लाखों श्रद्धालुओं की खिदमत के लिए कमेटी के तमाम सदस्य कमर कस कर तैयार हैं।इस दौरान दरगाह परिसर में कलम का लंगर लगाया जाएगा जिसके तहत "एक रोटी कम खाओ मगर बच्चों को खूब पढ़ाओ" का नारा देकर बच्चों और उनके परिजनों को जागरूक करते हुए उन्हें कलम और कॉपी बांटी जाएगी।इस अवसर पर धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक के अलावा अन्य संदेशपरक कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। समाज के लोगों को सबसे बड़ा संदेश देने के लिए तंजीम का सम्मान किया जा रहा है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि प्रशासन और हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए संदल चादर लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के डीजे साउंड बजाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।सिंगल यूज प्लास्टिक को भी बैन करने का निर्णय लिया गया है इसके लिए सभी दुकानदारों से अपील की जाएगी। इस बार सालाना उर्स के दौरान मुस्लिम समाज के हित में जूझ कर कम करने वाली तंजीमों (संस्था) का कमेटी सम्मान करेगी। यही नहीं लुतरा शरीफ के आसपास के गांव,समाज प्रमुखों का सम्मान करने का निर्णय लिया गया है।मुस्लिम बच्चों के अलावा दिगर कौम के बच्चों की भी शिक्षा और जनचेतना को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है।इस बार शिरनी (प्रसाद) घर घर तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है।

उर्स कमेटी के सरपरस्त रायपुर निवासी एडवोकेट सैय्यद फैसल रिजवी साहब, हाजी रंगराज, सैय्यद मकबूल अली बिलासपुर,हाजी डॉ सैय्यद शब्बीर अहमद कोरबा, नब्बू गौंटिया खम्हरिया सहित अन्य पदाधिकारियों के दिशा निर्देश पर सालाना उर्स को सफल बनाने के लिए इंतेजामिया कमेटी दरगाह लुतरा शरीफ के नायब सदर मोहम्मद सिराज, नायब सेक्रेटरी हाजी गुलाम रसूल साबरी, खजांची रोशन खान, कमेटी के सदस्य मोहम्मद कुद्दूस,अब्दुल रहीम खान, मोहम्मद जुबेर,हाजी करीम बेग,महबूब खान,रहीम खान, फिरोज खान उर्स कमेटी के सभी सदस्य उर्स को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।


शरदोत्सव : पत्रकार कालोनी में 'मिश्र बंधुओं' की भक्तिमय प्रस्तुति

  बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  बुधवार की रात पत्रकार कॉलोनी रिंग रोड 2 में शरदोत्सव भक्तिमय माहौल में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मिश्र बंधुओं द्वारा प्रस्तुत भक्ति संगीत में श्रोता मंत्रमुग्ध रहे।

 इस भक्तिमय कार्यक्रम के आरम्भ में वरिष्ठ नागरिक श्रीमती कामनी देवी पुरोहित और श्रीमती कस्तुरी मिश्रा के द्वारा श्रीराधाकृष्ण की पूजा अर्चना की गयी । कार्यक्रम में सारधा चकरभाठा के सुप्रसिद्ध गायक मिश्र बंधु भगवत और ओंकर की जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।  भजन 'नटवर नागर नंदा..., जय जय राधारमण हरि बोल..., प्रभु मिल जायेंगे..... सूरज की गर्मी से' जैसी एक से बढ़कर एक मनमोहक प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। तबले पर संगत कर रहे दीपक पुष्पेन्द्र कौशिक ने बेहतरीन तबला वादन कर अपनी छाप श्रोताओं पर छोड़ी। 

  इस अवसर पर पार्षद भरत कश्यप, समिति के अध्यक्ष रामाधार देवांगन, वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार शर्मा, राजेश अग्रवाल, मनोज शर्मा, सचिव रमन दुबे, पूर्व पार्षद रमेश जायसवाल, बृजेश शर्मा, बलराम विश्वकर्मा, आरके वर्मा, कमलेश शर्मा, विजय शर्मा, सौरभ द्विवेदी, गिरीश तिवारी, कृष्ण प्रधान, श्रीमती ज्योति दुआ, श्रीमती नम्रता शुक्ला, श्रीमती सुमन शर्मा, श्रीमती अनीता दुबे, श्रीमती प्राची शर्मा, श्रीमती बिंदु विश्वकर्मा, श्रीमती ममता पटेल, श्रीमती श्वेता तिवारी, सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सांस्कृतिक मंच का संचालन राजेश दुआ ने किया।

शरद पूर्णिमा : पत्रकार कालोनी में भजन संध्या, मिश्र बंधु श्रोताओं को भक्ति रस में डुबोएँगे


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  आगामी 16 अक्टूबर, बुधवार को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ‘पत्रकार कॉलोनी जन कल्याण समिति’ द्वारा शरद उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस भव्य कार्यक्रम में लोकप्रिय श्री मिश्र बंधु मंडली, सारधा (चकरभाठा) अपनी मनमोहक प्रस्तुति देंगी। पत्रकार कॉलोनी रिंग रोड क्र. 2 के गार्डन में रात्रि 8 बजे से आयोजित भजन संध्या में मिश्र बंधु के भजनों का आनंद लें और इस शरद पूर्णिमा को भक्ति संगीत के साथ मनाएं। इस कार्यक्रम में भाग लेकर श्रद्धालु आध्यात्मिक संगीत का आनंद उठा सकेंगे।

देशभक्ति के जज्बे को दिखा रहा 'कालापानी' की अवधारणा पर बनाया गया मां दुर्गा पूजा पंडाल


 बिलासपुर/  TODAY छत्तीसगढ़  /  रेलवे कन्सट्रक्शन कालोनी बिलासपुर के परिसर में सार्वजनिक दुर्गा लक्ष्मी काली पूजा उत्सव समिति के आयाजकों द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य पूजा पंडाल के मध्य मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। परंतु इस वर्ष बनाए गए पूजा पंडाल की बात ही निराली है। राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान मातृभूमि को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देने वाले क्रांतिकारियों को दी जाने वाली क्रूरतम सजाओं में से एक कालापानी की ही सजा थी।

सेल्यूलर जेल में बंदियों को दी जाने वाली तरह-तरह के कठोर यातनाओं का जीवंत चित्रण दर्शकों को रोमांचित करने वाले हैं। आजादी के लिए सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपना कर देश को आजाद कराने के लिए संघर्षरत युवाओं ने अदम्य साहस का परिचय दिया और कालापानी की सजा झेली। हजारों देशभक्तों ने सेल्यूलर जेल की यातनामय कष्ट झेले। आज की वर्तमान पीढ़ी को 'कालापानी' के देशभक्तों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ग्रहण करने की आवश्यकता है।

        सेल्यूलर जेल पर केन्द्रित कर बनाए गए पूजा पंडाल की खबर मिलने के बाद इससे प्रभावित होकर लेखक व इतिहासकार डॉ. लोकेश शरण उक्त पंडाल को देखने पहुंचे। उन्होंने कैदियों की भूमिका निभा रहे कलाकारों से मुलाकात कर उनकी हौसलाअफजाई की। डॉ. शरण ने दुर्गा पूजा समिति आयोजक मंडल के सर्वश्री स्वराजनाथ चौधरी, अब्दुल फरीद व लोकनाथ बिस्वाल को 'भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में कालापानी की ऐतिहासिक भूमिका' शीर्षक से प्रकाशित अपनी लिखित पुस्तक भेंट की तथा उनकी पूरी टीम को मंगलमय जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त की।


मुख्यमंत्री साय ने रावण दहन किया, रावण भाठा के दशहरा मैदान के लिए 50 लाख रुपये की स्वीकृति

 रायपुर /  TODAY छत्तीसगढ़  /  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के डब्ल्यूआरएस कॉलोनी मैदान में दशहरा पर्व के अवसर पर भगवान श्रीराम के जयकारे के बीच रिमोट का बटन दबाकर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के विशालकाय पुतले का दहन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री दूधाधारी मठ रावण भाठा के दशहरा मैदान के विकास के लिए 50 लाख रुपये की राशि प्रदाय करने की घोषणा की। 

शारदीय नवरात्र : आवास मेले में कन्या भोज का आयोजन, 125 कुंवारी कन्याओं को भोज कराया गया

 


बिलासपुर / 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  शारदीय नवरात्र में आज अष्टमी-नवमी के दिन मुंगेली जिला मुख्यालय स्थित मंडी परिसर में आयोजित आवास मेले अंतर्गत कन्या भोज का भी आयोजन किया गया। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और जिले के प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने 125 कुंवारी कन्याओं को भोज कराया। उन्होंने सभी कन्याओं को अपने हाथों से खीर, पूड़ी, हलवा सहित विभिन्न प्रकार का मिष्टान्न परोसा और उपहार भेंट किया। साथ ही कन्याओं की मां देवी के रूप में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। 

बता दें कि शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक जिस तरह से माता दुर्गा की आवभगत और पूजा-अर्चना की जाती है, उसी तरह से नवरात्रि में सप्तमी तिथि से कन्या पूजन का दौर शुरू हो जाता है। अष्टमी और नवमी तिथि पर कुंवारी कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर उनका स्वागत-सत्कार किया जाता है। नवरात्र में कुंवारी कन्याओं के भोजन कराने से पुण्य और कल्याण की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, वन मंडलाधिकारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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