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‘भांचा श्रीराम’ की आस्था से जुड़ी यात्रा का आयोजन, 25 जुलाई से शुरु

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर में 25 से 27 जुलाई तक तीन दिवसीय ‘श्रीराम श्रद्धा यात्रा’ आयोजित की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण व्यक्त करना है।

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से श्रद्धा के नारियल एकत्र किए जाएंगे, जिन्हें बाद में अयोध्या धाम ले जाकर रामलला के श्रीचरणों में समर्पित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह समर्पण छत्तीसगढ़ के "ननिहाल" की ओर से "भांचा श्रीराम" के प्रति श्रद्धा का प्रतीक होगा।

आयोजकों ने यह भी दावा किया है कि अयोध्या धाम स्थित रामलला के दरबार से जुड़ी हालिया चोरी की घटना से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। इसी संदर्भ में इस यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।

यात्रा का शुभारंभ 25 जुलाई को दोपहर 12 बजे तिलक नगर स्थित देवकीनंदन चौक के श्री हनुमान मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ होगा। यात्रा तीन दिनों में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरेगी और 27 जुलाई को नगोई स्थित वैष्णो देवी मंदिर में इसका समापन होगा।

यात्रा की जानकारी देते हुए बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने दावा किया कि यह आयोजन पूरी तरह श्रद्धामयी, शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक होगा। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध या प्रदर्शन नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है।

आयोजकों के अनुसार, यात्रा के प्रत्येक दिन के समापन पर भगवान श्रीराम को भोग अर्पित किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से यात्रा में शामिल होने की अपील की।

चार पीढ़ियां, एक परिवार, एक मंच: 200 से अधिक सदस्य जुटे, रिश्तों का अनूठा उत्सव

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / बदलती जीवनशैली और एकल परिवारों के दौर में रिश्तों को सहेजने की अनूठी पहल करते हुए स्वर्गीय फगनी देवी और चमन लाल यादव की स्मृति में पहली बार 'फगनी देवी-चमन लाल यादव स्मृति पारिवारिक मिलन समारोह' का आयोजन किया गया। जूना बिलासपुर में आयोजित इस समारोह में परिवार की चार पीढ़ियों के दो सौ से अधिक सदस्य एक साथ शामिल हुए। एक वर्ष के मासूम बच्चे से लेकर 75 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों की उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया।

समारोह का आयोजन फगनी देवी-चमन लाल यादव स्मृति सेवा संस्थान के तत्वावधान में हुआ। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. सोमनाथ यादव इसके मुख्य सूत्रधार रहे। उन्होंने बताया कि आयोजन का उद्देश्य परिवार के बिखरे सदस्यों को एक मंच पर लाकर आपसी संवाद, संस्कार और पारिवारिक एकजुटता को मजबूत करना है।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय फगनी देवी और चमन लाल यादव के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद परिवार के वरिष्ठजनों का शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया। इस दौरान बुजुर्गों ने परिवार की नई पीढ़ी को एकता, शिक्षा और संस्कारों का महत्व बताते हुए आशीर्वाद दिया तथा पूर्वजों के संघर्ष और जीवन मूल्यों को साझा किया।

समारोह में चिल्हाटी, मस्तूरी, कोटा और मुंगेली से आए कलाकारों ने पारंपरिक बांस गीत प्रस्तुत कर यादव समाज के ऐतिहासिक वीर पात्रों की गाथाएं सुनाईं, जिसे सभी ने सराहा।

दिनभर चले आयोजन में परिवार के सभी सदस्य सामूहिक भोज में शामिल हुए। वर्षों बाद एक साथ बैठकर भोजन करने और पुरानी यादें साझा करने का अवसर कई लोगों के लिए भावुक कर देने वाला रहा।

समारोह के अंतिम सत्र में समाज सेविका फूलबासन यादव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कृषक कार्य प्रांत प्रमुख उत्तर यादव, यादव समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष रामचंद्र यादव तथा शंकर यादव सहित अन्य अतिथियों ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऐसे पारिवारिक मिलन समारोह समाज में पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता को मजबूत करने की दिशा में प्रेरक पहल हैं। चार पीढ़ियों का एक साथ उपस्थित होना अपने आप में अनुकरणीय उदाहरण है।

डॉ. सोमनाथ यादव ने कहा कि उनके माता-पिता का हमेशा आग्रह रहा कि परिवार एकजुट रहे और शिक्षा तथा सकारात्मक सोच को जीवन का आधार बनाया जाए। उन्होंने कहा, "सोच सदैव नई रखो, लेकिन पुराने संस्कारों का अस्तित्व कभी समाप्त मत होने दो।" उन्होंने संयुक्त परिवार को भावनात्मक सुरक्षा, संस्कारों के संरक्षण और बच्चों के बेहतर पालन-पोषण का सबसे मजबूत आधार बताया।

कार्यक्रम के समापन पर सभी सदस्यों ने हर वर्ष इस पारिवारिक मिलन समारोह का आयोजन करने और सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का संकल्प लिया। समारोह का संचालन संतोष यादव ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संस्थान के सचिव सतीश यादव ने किया। समारोह में परिवार के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

300 साल से चली आ रही परंपरा आज भी कायम, ऐसे निकलती है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा

बिलासपुर: TODAY छत्तीसगढ़  /  भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल ओडिशा के पुरी तक सीमित नहीं है, बल्कि बिलासपुर में भी इसकी समृद्ध और प्राचीन परंपरा आज तक जीवित है। शहर के रेलवे परिक्षेत्र, सदर बाजार स्थित पाराशर मंदिर, जूना बिलासपुर के सीताराम मंदिर और गोंड़पारा के दर्जी मंदिर में मंदिर स्थापना के समय से ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथयात्रा श्रद्धा और परंपरा के साथ निकाली जाती है। कहीं भगवान बैलगाड़ी पर विराजते हैं तो कहीं सजे-धजे रथ को खींचने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगती है।

रेलवे परिक्षेत्र मंदिर में 1996 से पुरी की परंपरा का निर्वाह

रेलवे परिक्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर की स्थापना 26 नवंबर 1996 को हुई थी। स्थापना समारोह में पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव और श्रीमंदिर के मुख्य पंडा रमेश राजगुरु विशेष रूप से शामिल हुए थे। यहां स्नान यात्रा, रथयात्रा, नवयौवन दर्शन और नवकलेवर जैसे सभी प्रमुख अनुष्ठान पुरी की परंपराओं के अनुसार संपन्न होते हैं।

वर्ष 2015 में यहां पहली बार पुरी की तर्ज पर नवकलेवर महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें भगवान के ब्रह्म परिवर्तन की प्रक्रिया पुरी से आए सेवायतों के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। मंदिर में स्थापित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं महानीम की लकड़ी से निर्मित हैं, जिन्हें प्रसिद्ध शिल्पकार गजेंद्र महाराणा ने तैयार किया था।

पाराशर मंदिर में तीन शताब्दियों से निभाई जा रही परंपरा

सदर बाजार स्थित पाराशर मंदिर को शहर का सबसे प्राचीन जगन्नाथ मंदिर माना जाता है। दुबे परिवार के अनुसार इसकी स्थापना लगभग 300 वर्ष पहले पंडित पाराशर दुबे ने की थी और आज उनकी सातवीं पीढ़ी मंदिर की सेवा कर रही है।

यहां केवल गुंडिचा यात्रा निकाली जाती है। पहले भगवान की यात्रा बैलगाड़ी से होती थी, जबकि अब सुसज्जित वाहन में शोभायात्रा निकाली जाती है। वर्ष 1980 में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन गर्भगृह और मूल विग्रहों की प्राचीनता को यथावत रखा गया।

जूना बिलासपुर में आज भी बैलगाड़ी से निकलती है यात्रा

जूना बिलासपुर स्थित सीताराम मंदिर में करीब 75 से 80 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की पूजा पुरी की परंपरा के अनुसार हो रही है। पहले यहां लकड़ी के विशाल रथ में भगवान की यात्रा निकलती थी, लेकिन रथ क्षतिग्रस्त होने के बाद पिछले दो दशकों से बैलगाड़ी को सजाकर रथयात्रा निकाली जा रही है। यहां भी महानीम की लकड़ी से बनी प्रतिमाएं विराजमान हैं।

दर्जी मंदिर में काष्ठ विग्रहों के साथ निकलती है शोभायात्रा

गोंड़पारा स्थित करीब 100 वर्ष पुराने दर्जी मंदिर में भी प्रतिवर्ष भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथयात्रा आयोजित होती है। गर्भगृह में स्थापित पत्थर की प्रतिमाओं को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, इसलिए रथयात्रा के लिए विशेष रूप से तैयार काष्ठ विग्रहों का उपयोग किया जाता है। भजन-कीर्तन के साथ निकलने वाली यह शोभायात्रा आज भी मंदिर की प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए हुए है।

आषाढ़ मास का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ के लिए आषाढ़ मास अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसी महीने रथयात्रा, नवयौवन दर्शन और विशेष अनुष्ठानों का आयोजन होता है। अधिकमास (दो आषाढ़) आने पर नवकलेवर की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें भगवान के विग्रहों का पुनर्निर्माण और ब्रह्म परिवर्तन किया जाता है।


बॉक्स | बिलासपुर के प्रमुख जगन्नाथ मंदिर और उनकी विशेषता

मंदिरविशेषता
रेलवे परिक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर1996 से पुरी की परंपरा के अनुसार रथयात्रा और नवकलेवर
पाराशर मंदिर, सदर बाजारलगभग 300 वर्ष पुराना, शहर का सबसे प्राचीन जगन्नाथ मंदिर
सीताराम मंदिर, जूना बिलासपुर75-80 वर्षों से बैलगाड़ी के माध्यम से रथयात्रा
दर्जी मंदिर, गोंड़पारा100 वर्ष पुराना, काष्ठ विग्रहों के साथ निकलती है शोभायात्रा

नवयौवन स्वरूप में भगवान जगन्नाथ ने दिए दर्शन, मंदिर में भक्तों की भीड़

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों तक बंद रहे श्री जगन्नाथ मंदिर के पट मंगलवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा ने नवयौवन (नवरूप) स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर खुलते ही सुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह का माहौल रहा।

परंपरा के अनुसार, भोर में मंदिर के शिखर पर लगभग 15 फीट लंबा नया ध्वज चढ़ाया गया। ध्वज परिवर्तन की इस परंपरा को 'नेत उत्सव' के रूप में निभाया गया। मान्यता है कि ध्वज बदलने के साथ ही भगवान के स्वस्थ होने का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचता है।

ओड़िया समाज के अध्यक्ष के.के. बेहरा ने बताया कि स्नान पूर्णिमा के दिन महाअभिषेक के बाद भगवान को ज्वर आने की धार्मिक मान्यता है। इसके बाद भगवान 15 दिनों तक 'अनसर' अवधि में विश्राम करते हैं। इस दौरान मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं और भगवान की विशेष सेवा, उपचार तथा श्रृंगार किया जाता है।

उन्होंने बताया कि विश्राम अवधि पूरी होने के बाद भगवान नवयौवन स्वरूप में प्रकट होते हैं। इस अवसर को 'नवयौवन दर्शन' या 'नवरूप दर्शन' के रूप में मनाया जाता है, जिसका धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, अनसर काल में भगवान की सेवा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से की जाती रही। मंगलवार को विश्राम अवधि समाप्त होने के बाद भगवान को फिर से अन्न का भोग अर्पित किया गया। दिनभर श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते रहे।     

मुख्यमंत्री ने पूर्व क्रिकेट कप्तान कपिल देव से की सौजन्य मुलाकात, खेल विकास पर हुई चर्चा

रायपुर ।  TODAY छत्तीसगढ़  /   मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और देश के महान क्रिकेटर कपिल देव से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उन्हें बेल मेटल से निर्मित आकर्षक प्रतिमा और ‘पुण्यभूमि छत्तीसगढ़’ कॉफी टेबल बुक भेंट कर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीकात्मक सम्मान किया।

मुख्यमंत्री ने माता कौशल्या की पावन भूमि छत्तीसगढ़ में उनका स्वागत करते हुए कहा कि राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुलाकात के दौरान प्रदेश में खेल अधोसंरचना के आधुनिकीकरण, खेल सुविधाओं के विस्तार और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान खेलों के माध्यम से युवाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। वहीं कपिल देव ने भी प्रदेश में खेल विकास की संभावनाओं पर सकारात्मक विचार व्यक्त किए। 

‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म के शीर्षक को लेकर विवाद, कलेक्टर को ज्ञापन


बिलासपुर। 
  TODAY छत्तीसगढ़  / 'घूसखोर पंडित' के कानूनी विवाद में फंसने के बाद, एक और फिल्म, यादव जी की लव स्टोरी, को भी अपने टाइटल को लेकर इसी तरह के विवाद का सामना करना पड़ा। विवाद तब शुरू हुआ जब विश्व यादव परिषद के प्रमुख ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फिल्म पर बैन लगाने या उसका नाम बदलने की मांग की। विवाद का स्वर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में भी सुनाई पड़ा। आज यादव समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर फिल्म के टाईटल और उसमें दिखाई गई कहानी पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। 

आपको बता दें कि विवाद तब शुरू हुआ जब विश्व यादव परिषद के प्रमुख ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फिल्म पर बैन लगाने या उसका नाम बदलने की मांग की। आपत्ति कहानी से थी, जो एक हिंदू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें याचिकाकर्ता का आरोप है कि टाइटल यादव समुदाय को गलत तरीके से दिखाता है। बुधवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह फिल्म आगामी 27 फ़रवरी को देश के सिनेमा हाल में प्रदर्शित होगी। 

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छत्तीसगढ़ की प्रमुख नृत्य एवं लोक कला, संस्कृति पर केंद्रित फोटो प्रदर्शनी 2 से 4 जनवरी तक

सांकेतिक तस्वीर 

जिला स्तरीय घासीदास लोककला महोत्सव में सिलपहरी पंथी पार्टी अव्वल


बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  परम पूज्य बाबा गुरुघासीदास जी के जयंती के अवसर पर जिला स्तरीय गुरुघासीदास लोक कला महोत्सव पर 18 दिसम्बर 2025 को शासकीय प्री में सामूहिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास जरहाभाठा में आयोजित की गई। बाबा गुरुघासीदास की छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिसमें तीन दलों के द्वारा मनमोहक पंथी नृत्य एवं भरथरी गीतों का प्रदर्शन किया गया। प्रतियोगिता में सम्मिलित दलों में से सिलपहरी पंथी पार्टी बिलासपुर को प्रथम स्थान एवं संत के संदेश पंथी पार्टी ग्राम करहीपारा तखतपुर को द्वितीय स्थान तथा हमर छत्तीसगढ़ के माटी लोककला मंच छोटी कोनी बिलासपुर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। 

उक्त आयोजन में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दलों को राज्य स्तरीय आयोजन हेतु नवागढ़ बेमेतरा भेजा जावेगा। राज्य स्तरीय कार्यक्रम हेतु शासन द्वारा प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल को 1 लाख रूपए एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को 75 हजार रूपये पुरस्कार राशि देने का प्रावधान है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास बिलासपुर श्री पीसी लहरे द्वारा की गई। इनके अलावा श्री महादेवा संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा, सुश्री आकांक्षा पटेल सहायक संचालक, श्रीमती सीमा मिंज सहायक लेखा अधिकारी, समाज के प्रतिष्ठितगण डॉ. के. एल. सान्डे, श्री गुलाब चन्द्र भारद्वाज, हेमल पाल घृतलहरे, श्री शत्रुहन घृतलहरे एवं समस्त अधीक्षकगण, अधिकारी कर्मचारी की गरिमामयी उपस्थित में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जाति संस्कृति उनके पारंपरिक रितिरिवाज और लोक कला महोत्सव को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है। इस आयोजन में छात्रावासी बच्चों द्वारा बढ़-चढ़कर हर्षाेल्लास के साथ भाग लिया गया एवं अपनी संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिला।  

जयंती 18 दिसम्बर पर विशेष: संत गुरु घासीदास बाबा जी— सतनाम पंथ के नक्षत्र


भारतीय संत परंपरा के तत्वावधान में हमारे संतों ने बाहरी आडम्बरों , जाति- पाँति धार्मिक कट्टरता को शिथिल करते हुए समाज में प्रेम और सामजिक सद्भाव जैसी महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया | ऐसी ही संत परम्परा में कबीर, नानक, मीरा बाई, नामदेव, रविदास, सूरदास, आदि का नाम हम श्रद्धा और आदर से लेते हैं | उन्होंने अपनी वाणी के द्वारा लोगों में चेतना जाग्रत किया | जो कि भक्ति का मार्ग अपनाकर सामाजिक एकता कायम रख सके | ऐसी ही हमारे छत्तीसगढ़ में एक महान संत हुए जो संत गुरु घासीदास के नाम से जाने जाते हैं |

    ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम अपना जीवन किस तरह जीना चाहते हैं। समय कोई भी हो, कितने ही युग बीत जायें मगर जिन्हें महान कार्य करना हो, समाज के उद्धार के लिए, दीन-दुखियों की सेवा के लिए, वे बाधाओें की परवाह किये बिना सदकार्य में लग जाते है। उन्हें उनके पथ से कोई डिगा नहीं सकता। ऐसे ही महान युग प्रवर्तक, समाज सेवक, निस्वार्थ, निष्काम सेवा भावी संत थे छत्तीसगढ़ के ग्राम गिरौदपुरी में जन्मे सतगुरु बाबा घासीदास। 

        जिस वक्त गुरुजी का आविर्भाव हुआ था तब छत्तीसगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में एकदम पिछड़ा क्षेत्र था। केवल उच्च वर्ग के, धनाड्य , सम्पन्न घरों के बच्चे ही विद्याध्ययन कर पाते थे। क्योंकि तब शिक्षा को जरूरी नहीं समझा जाता था। जरूरी था तो बस इतना ही कि विद्यार्थी अक्षर ज्ञान प्राप्त कर ले। सो किसान वर्ग, श्रमिक वर्ग, हरिजन, आदिवासियों ने शिक्षा के प्रति ध्यान ही नहीं दिया। वैसे भी तब के जमींदार, मालगुजार या ब्राम्हण वर्ग नहीं चाहते थे कि निम्न वर्ग के बच्चे उनके बच्चों के साथ बैठकर विद्याध्ययन करें। तब उन्हें अछूत समझा जाता था। यही कारण है कि उनका बौद्धिक स्तर कम ही रहा। जनता दलित, पीड़ित और शोषित थी। अपने लोगों की इस दशा में गुरु घासीदास का हृदय द्रवीभूत हो गया था। उनका मन दलितों के उद्धार की ओर अग्रसर होने लगा। परिणाम स्वरूप उन्होंने ‘‘सतनाम पंथ’’ की स्थापना की। 

        उनके चिंतन से कहीं भी यह आभास नहीं होता है कि यह उपदेश या बातें किसी एक विशेष वर्ग के लिए कही गई है बल्कि समस्त मानव समुदाय और विश्व स्तर पर सभी धर्मावलम्बियों को प्रभावित किया है। 

      यही कारण है कि आज उनके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। जिस समय आपका आविर्भाव हुआ देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। अंध विश्वास, कुरीति, सामाजिक रूढ़िवादिता, धर्मभीरूता, कुप्रथा, सामाजिक प्रतिबंध, छुआछूत जैसी सामाजिक अव्यवस्थायें हावी थीं। ऐसे वक्त में गुरुजी ने जो उपदेश दिया उसे सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण रखकर आज के परिप्रेक्ष्य में रखकर विचार करें तो हम पाते हैं कि उनके उपदेश या कथन सभी वर्गो के लिए मान्य है | गुरु ने कहा है कि - न कोई जन्मना ऊँचा, न नीचा है, विभाजन कर्म की रेखा, उठाती है, गिराती है, विभाजित आचरण लेखा, नहीं वह नीच हो सकता, कि जिसका कर्म ऊँचा है, बड़ा वह हो नहीं सकता, कि जिसका कर्म नीचा है, हमारे वेद, श्रुतियाँ, उपनिषद, सिद्धांत शास्त्रों के, यही कहते, इसी में मर्म जीवन का समूचा है। 

         अर्थात न कोई जन्म से ऊँचा है और न कोई नीचा है। मुझे कहीं भी असमानता की स्थिति नजर नहीं आती और असमानता हो भी तो किस बात पर। मानव-मानव सब एक है फिर भेदभाव कैसा किन्तु, नासमझी की भावना ही हमें एक दूसरे से अलग करती है। हम विभाजन किसलिए करते हैं। एक ऊँचा एक नीचा यही प्रवृत्ति सबसे घातक होती है। हमारा कर्म, हमारी सोच ही हमें छोटा-बड़ा बनाती है। वही इंसान को ऊँचा उठाती है और वही नीचे गिराती है। स्पष्ट यह कि हमारा आचरण कैसा हो। 

    वे कहते हैं कि एक उच्च कुल का व्यक्ति यदि हत्या जैसे अपराध करता है वहीं एक निम्न कुल का व्यक्ति भी यह अपराध करता है तो दोनों एक ही स्तर के हुए। इनमें न कोई छोटा न बड़ा। दोनों का ही कुल एक हुआ और वह कुल है हत्यारे का। यहाँ जाति पीछे छूट जाती है और कर्म सामने आता है। सो बड़ा कर्म करने वाला ऊँचा और छोटा कर्म करने वाला नीचा, वह कैसे हो सकता है ? समानता का सिद्धांत होना चाहिए। यही हमारे वेद समस्त शास्त्र और श्रुतियाँ भी कहते हैं और इसी में जीवन का मर्म छिपा हुआ है। 

    गुरु घासीदास जी के द्वारा वाचिक परम्परा के माध्यम से प्राणित ‘‘26’’ उपदेशों को आत्मसात कर, उन्हीं के बताये मार्ग पर चलकर सभी वर्गों, सभी धर्मों के साथ समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

 व्यक्तिगत रूप से मैं गुरु घासीदास जी द्वारा मानव जाति के लिए दिये गये संदेशों से, उपदेशों से, उनके समग्र व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हूँ। कौन कहता है कि वे एक वर्ग विशेष के हैं। वर्ग विशेष के वे तब थे जब उन्होंने समाज में व्याप्त भ्रान्तियों को दूर करने का बीड़ा उठाया था। आज तो वे समस्त वर्ग के आराध्य के रूप में पूजे जाते हैं । हमारा वर्तमान परिदृष्य यह कहता है कि आज समाज में ऊँच-नीच, छोटे-बड़े की बात बेमानी है। मनुष्य को आत्मा के शुद्धिकरण के लिए सोचना चाहिए न कि केवल तन के शुद्धिकरण की। यदि तन के शुद्धिकरण से ही समानता की बात होती तो पवित्र नदियों के तट पर बसने वालों में कहीं भी छोटा-बड़ा या ऊँच-नीच का वर्ग विष्लेषण नहीं होता। 

हमारी नदियों ने, हमारे पर्यावरण ने, हमारी प्रकृति ने हमें आपस में प्रेम, भाईचारा का पाठ पढ़ाया है। तभी तो महात्मा बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उसी तरह सतगुरु घासीदास बाबा जी ने भी तेंदू वृक्ष के नीचे बैठकर ज्ञान की प्राप्ति की थी, ज्ञान का बोध किया था। 

अतः इन संत महात्माओं ने हमें यह भी बोध कराया है कि हमें पर्यावरण के प्रति भी सजग रहना है यह कि पेड़ हमारें लिए कितना उपयोगी है। बिना पेड़-पौधों के प्राकृतिक वातावरण नष्ट होता है और हमारा पर्यावरणीय अस्तित्व संकट में पड़ जाता है। 

मोहले को उप मुख्यमंत्री बनाने की माँग उठी, 7 बार विधानसभा और 4 बार निर्वाचित होकर संसद पहुँच चुके हैं

 


बिलासपुर । 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ समेत अन्य दो राज्यों में प्रधानमंत्री के चेहरे पर चुनाव मैदान उतरी भारतीय जनता पार्टी को मतदाताओं का दिल खोलकर समर्थन मिला है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में स्पष्ट बहुमत से अधिक सीटों पर विजय पताका फहराने के बाद अब चर्चा मुख्यमंत्री कौन की गर्म है। ऐसे में सातवीं बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले और 4 लोकसभा चुनाव जीत चुके पूर्व मंत्री मुंगेली विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुन्नूलाल मोहले को सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने नई सरकार में उप-मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी देने की मांग की है। 

सतनाम भवन तखतपुर में आज सतनामी समाज की एक बैठक हुई जिसमें 18 दिसंबर को होने वाले गुरु घासीदास जयंती के कार्यक्रम की समीक्षा की गई। पूर्व विधायक चोवाराम खांडेकर की उपस्थिति में हुई इस बैठक में समाज के लोगों ने कहा कि वरिष्ठ होने व लगातार चुनाव जीतने के बावजूद मोहले को उनके कद के अनुरूप पद नहीं दिया जाता है। चाहे लोकसभा हो या विधानसभा, जब भी पार्टी ने उनको टिकट दी उन्होंने जीतकर बताया है। वे इस समय सभी भाजपा विधायकों में सबसे वरिष्ठ हैं और विगत 45 वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। उन्हें इस बार भी जीत मिली है। उनको उप-मुख्यमंत्री बनाकर उनके अनुभव और वरिष्ठता का सम्मान किया जाना चाहिए। बैठक में अनेक कर्मचारी तथा सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।TODAY छत्तीसगढ़ के WhatsApp ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें   

परिवार समेत वृद्धाश्रम पहुँचें जिले के पुलिस कप्तान, सुख-दुःख बाँटा


 बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न कराने के बाद पुलिस अधीक्षक बिलासपुर संतोष सिंह, पत्नी वंदना सिंह और बच्चों अर्थ व अयान के साथ वृद्धाश्रम कल्याणकुंज ईदगाह चौक, मदर टेरेसा आश्रम, कुष्ठरोग आश्रम तोरवा और सेवा भारती कुदुदण्ड पहुँचे । पुलिस अधीक्षक ने वहां रहने वालों का कुशल क्षेम पूछा और समस्याएं सुनने के बाद सभी को कंबल, ड्रायफ्रूट, मिठाइयां आदि बांटी। इस ख़ास मौके पर संतोष सिंह ने अपने बच्चों को अन्य लोगों के साथ खुशियां बांटने की सीख दी। TODAY छत्तीसगढ़ के WhatsApp ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें    

इन जगहों पर निवासरत बुजुर्ग पुरुष और महिलाओं से चर्चा कर पुलिस अधीक्षक ने उनकी समस्याएं सुनी, जहां कुछ बुजुर्गों ने बताया कि उनके परिजनों ने उन्हें घर से निकाल दिया है। एक बुजुर्ग की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने उसके पालक के खिलाफ मामला दर्ज करने हेतु संबंधित थाने को निर्देशित किया है। 


अभा. विकलांग चेतना परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न, डॉ. पाठक कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गये

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर / अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद का 21 वां राष्ट्रीय अधिवेशन कारोना काल के निर्देशानुसार वर्चुअल स्वतंत्रता दिवस के अमृत महोत्सव के पावन पर्व पर गीता देवी रामचंद्र अग्रवाल विकलांग अस्पताल अनुसंधान एवं निशुल्क सेवा केंद्र मोपका के सभागार में वृक्षारोपण और झंडोत्तोलन के साथ उल्लास पूर्वक संपन्न हुआ। 

भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन, आर एस मिश्रा द्वारा आस्था मंत्र के पठन और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती विद्या केडिया के स्वागत भाषण से प्रारंभ हुआ ;राष्ट्रीय महामंत्री मदन मोहन अग्रवाल के प्रतिवेदन -राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेंद्र राजू अग्रवाल के ऑडिट रिपोर्ट और करोना काल में परिषद की गतिविधियों पर  डॉ अनीता सिंह ने विवरण प्रस्तुत किया।  प्रांतीय समिति की ओर से अध्यक्ष सत्येंद्र अग्रवाल रायपुर ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।  वही सराईपाली से  आनंद गोयल ,नरेश अग्रवाल, शक्ति से रामअवतार अग्रवाल और लखन लाल अग्रवाल ने प्रगति के साथ सार्थक सुझाव भी प्रस्तुत किए। 

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इस अवसर पर मार्गदर्शक वीरेंद्र पांडे रायपुर का प्रेरक उद्बोधन भी उल्लेखनीय रहा।  राष्ट्रीय मंत्री गोविंदराम मिरि ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में विकलांग विमर्श राष्ट्रीय शोध पीठ के अध्यक्ष डॉ विनय कुमार पाठक का नाम प्रस्तावित किया जिसे सर्वसम्मति से समर्थन देकर परिषद के समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया।  डॉ पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ द्वारिका प्रसाद अग्रवाल के अधूरे छोड़े हुए कार्यों को पूरा करना हमारा कर्तव्य होगा लेकिन इसके लिए सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का सहयोग व सामंजस्य जरूरी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की आसंदी से इंदौर से जुड़े न्यायमूर्ति रमेश चंद्र गर्ग ने अपने सार्थक अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ पाठक को बधाई दी और एक सिक्के के दो पहलू के रूप में इनके जुड़ाव को उल्लेखनीय बताया।  विकलांग चेतना परिषद की विभूतियों के आकस्मिक निधन पर 2 मिनट के मौन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र राजू अग्रवाल तथा आभार प्रदर्शन डॉ अनिल अग्रवाल ने किया इस अवसर पर देश-विदेश के प्रतिनिधि गणों के साथ सभा में मुख्य रूप से डॉ राधेश्याम अग्रवाल, किशन बुधिया, नित्यानंद अग्रवाल, प्रोफेसर बजरंग गोयल, डीपी गुप्ता ,पीएच मुदलियार, डॉ रेखा पालेश्वर डॉ शोभा मिश्रा, श्रीमती ममता मिश्रा ,त्रिपाठी, भंडारी कैलाश गुप्ता ,शेखर मुदलियार, राधा किशन अग्रवाल ,दर्शन सिंह ,राजू सुलतानिया, उमेश मुरारका श्रीमती सावित्री देवी आदि उपस्थित रहे।  

सुप्रसिद्ध लेखक, पत्रकार सतीश जायसवाल को मुख्यमंत्री के हाथों दिया गया 'वसुंधरा सम्मान'

TODAY
 छत्तीसगढ़  /
रायपुर / मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित समारोह में सुप्रसिद्ध लेखक सतीश जायसवाल को 21वें वसुंधरा सम्मान दिया गया। समारोह का आयोजन महात्मा गांधी की परिकल्पना के विनम्र ग्रामसेवक स्वर्गीय देवी प्रसाद चौबे की 45वीं पुण्यतिथि के अवसर पर लोकजागरण की मासिक पत्रिका वसुंधरा के द्वारा किया गया है।

संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन एवं चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने किया। ख्याति प्राप्त पत्रकार एवं सम्पादक हिमांशु द्विवेदी समारोह को मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित किया।

समारोह में वसुंधरा सम्मान के संयोजक विनोद मिश्र, आयोजन समिति के अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव, सचिव मुमताज ने बताया कि समारोह में स्व.देवीप्रसाद चौबे के पुत्र प्रदीप चौबे तथा कृषि एवं जलसंसाधन मंत्री रविंद्र चौबे विशेष रुप से मौजूद हैं। TODAY छत्तीसगढ़ के WhatsApp ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें   

वर्ष 2001से निरंतर जारी वसुंधरा सम्मान अब तक रमेश नैयर, कुमार साहू, श्यामलाल चतुर्वेदी, बसंत कुमार तिवारी, बबन प्रसाद मिश्र, दिवाकर मुक्तिबोध, आशा शुक्ला, शरद कोठारी, गिरिजा शंकर, हिमांशु द्विवेदी, विनोद शंकर शुक्ल, ज्ञान अवस्थी, श्याम वेताल, अभय किशोर, गिरीश पंकज, सुशील त्रिवेदी, बी के एस रे, प्रकाश दुबे, तुषार कांति बोस, ई वी मुरली को प्रदान किया जा चुका है।

समारोह मे लोकजागरण की मासिक पत्रिका वसुंधरा के 58वें तथा कला, साहित्य, संस्कृति की मासिक पत्रिका बहुमत के 109वें अंक का लोकार्पण भी किया गया। वसुंधरा का अंक छत्तीसगढ़ के 11 कहानीकारों की प्रतिनिधि कहानियों पर केंद्रित है। 

'घरोंदा निःशक्त आश्रम' में लायंस क्लब बिलासपुर वूमेन द्वारा दवाइयाँ और ज़रूरी सामान वितरित किया गया

TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर / बुधवार को लायंस क्लब बिलासपुर वूमेन के द्वारा  “घरोंदा निःशक्त आश्रम” डीपूपारा तारबहार जो की विषप्त बच्चो और वयस्कों का आश्रम है, वहां आश्रम की प्रबंधक की माँग पर बच्चों के लिए क्लब की तरफ़ से दवाईयां दी गयीं। संस्था द्वारा आश्रम में रह रहे बच्चे और वयस्कों के लिए एक महीने की दवाईयां उपलबध कराई गई हैं।साथ में 5 steamer, sanitary napkin के 55 बड़े पैकेट और बिस्किट नमकीन भी दिया गया। इस दौरान लायंस क्लब वूमेन बिलासपुर की अध्यक्ष ला सईदा वनक, कोषाध्यक्ष ला निलोफ़र अंसारी और ला फ़रहीन चिश्ती मुख्य रूप से उपस्थित रहीं । 

सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि आबंटन की मांग, प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा ज्ञापन

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर / आज सिक्ख समाज के प्रतिनिधिमंडल ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व  देवेन्द्र पटेल से मुलाकात कर सिक्ख समाज के लिये सार्वजनिक उपयोग हेतु भूमि आबंटन की मांग की गई। श्री पटेल ने इस संबंध में विस्तृत चर्चा कर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। 

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        ज्ञात हो कि विगत दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने बिलासपुर में सभी समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात का कार्यक्रम रखा था जिसमें सिख समाज के लोगों ने भविष्य की योजना हेतु भूमि आबंटन की मांग की थी। सिख समाज की मांग को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कलेक्टर सारांश मित्तर को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। आज अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी दयालबंद के प्रधान त्रिलोचन सिंह अरोरा, पूर्व प्रधान जोगिंदर सिंह गंभीर, पूर्व प्रधान एवं प्रदेश भाजपा के कार्यकारिणी सदस्य अमरजीत सिंह दुआ एवं पंजाबी युवा समिति के प्रधान सुरेंद्र सिंह छाबड़ा शामिल रहे। 

हरिहर बिलासपुर, अरपा किनारे रोपे गए 121 पौधे


TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर।   हरिहर ऑक्सीजन वृक्षारोपण परिक्षेत्र अरपा साईड ग्राम सेंदरी [बिलासपुर] में आज हरीहर बिलासपुर अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के दौरान हरिहर परिक्षेत्र एवं प्राथमिक शाला परिसर सेंदरी में  121 फलदार, छायादार एवं देव पौधों का रोपण किया गया । पौधारोपण अभियान में बिलासा कला मंच के संयोजक संस्थापक डॉ सोमनाथ यादव और अध्यक्ष महेश श्रीवास सहित मंच के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्यगण विशेष रूप से उपस्थित थे। इस मौके पर सोमनाथ यादव ने कहां की हरिहर ऑक्सीजोन का  अभियान आने वाले समय के लिए मील का पत्थर साबित होगा ।  निश्चित ही यह क्षेत्र एक बेहतर उद्यान के साथ ऑक्सीजोन क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है ।  बताया गया है कि अरपा साइड क्षेत्र के पांच अलग-अलग क्षेत्रों अब तक कुल 451 पौधे रोपित किये जा चुके हैं ।

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रानी दुर्गावती के शौर्य और जयंती पर कबीर के आदर्श दोहराये गए


TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर / गुरुवार को संत कबीर जयंती और रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कई आयोजन हुए जिनके माध्यम से संत कबीर के बताये मार्ग और रानी दुर्गावती के शौर्य और साहस पर न सिर्फ चर्चा हुई बल्कि सामजिक लोगों द्वारा उनके आदर्शों पर अनुसरण करने की अपील भी की गई।

 इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संत कबीर को स्मरण करते हुए अपने ट्वीटर पर लिखा है कि 'छत्तीसगढ़ में भी संत कबीर के जीवनदर्शन का लोगों के जन-जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। संत कबीर ने अपने दोहों के माध्यम से भाईचारे, प्रेम, सद्भावना और सामाजिक समानता का संदेश दिया है। उन्होंने समाज में फैले आडंबर और जात-पात का सख्त विरोध किया। अपने दोहों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर कठोर प्रहार किया। उन्होंने लोगों को सत्य, अहिंसा, दया, करूणा, परोपकार जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।' 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वीरांगना रानी दुर्गावती को नमन करते हुए लिखा कि 'गोंडवाना साम्राज्य की रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन। रानी दुर्गावती ने किसी के आगे घुटने नहीं टेके और मातृभूमि एवं आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए। उनका साहस और बलिदान हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।

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रानी दुर्गावती भारत की ऐसी महान वीरांगना हैं जिन्होंने अपने शौर्य और साहस से वीरता की एक नई इबारत लिखी। उन्होंने पति की मृत्यु के बाद न सिर्फ गोंडवाना सामाज्य को संभाला बल्कि अपनी कुशलता से उसे सम्पन्न भी बनाया।'

आज प्रदेश के विभिन्न इलाकों में रहने वाले कबीर पंथी और गोंडवाना समाज ने वीरांगना रानी दुर्गावती के शौर्य गाथा को नमन किया। 

ऊर्जाधानी से राजधानी तक साईकिल का सफ़र मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के लिए

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 छत्तीसगढ़  /  
बिलासपुर। कोरबा जिले में कोरोनावायरस के भयावह स्थितियों से मुकाबला करने वाली अमित नवरंग लाल की एक्टिव टीम साइकिल पर कोरबा से निकलकर लगभग 10 बजे बिलासपुर नेहरू चौक पहुंची।
कोरोना से मृत लोगों का दाह संस्कार करना, लोगों को निशुल्क ऑक्सीजन पहुंचाना, मरीजों को निशुल्क हॉस्पिटल एंबुलेंस से ले जाना और भोजन की व्यवस्था जैसे निस्वार्थ सेवा के काम करने वाली अमित नवरंगलाल की टीम साइकिल से कोरबा से अल्ल सुबह 4:00 बजे निकलकर साढे दस बजे बिलासपुर के नेहरु चौक पहुची। यहां बिलासपुर के नेहरू चौक में साइकल यात्रियों की टीम पहुंचने पर गौरव दुबे की अगुवाई में युवाओं की एक टीम ने उनका तथा आत्मीय स्वागत किया. यहां नेहरू चौक में अपना संदेश लोगों तक पहुंचाने  के पश्चात साइकल से ही  अमित नवरंग लाल की टीम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने के लिए राजधानी रायपुर की ओर रवाना हो गयी ।

                                           

राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन, विभिन्न समाज के प्रतिनिधि शामिल

TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर।‌ बंगाल में समूह विशेष पर लगातार हो रही हिंसा, लूट और  हत्या की घटनाओं के खिलाफ पूरे देश में माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। चुनाव परिणामों के पहले और उसके पश्चात शुरू हुआ हिंसक घटनाओं का सिलसिला अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है।  इस तरह की घटनाओं से देश के विभिन्न प्रदेशों में लोग आक्रोशित, आंदोलित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी इसके खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर है। बंगाल में चल रहे इस हिंसक और आपराधिक सिलसिले को रोकने के लिए बिलासपुर में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के जरिए राष्ट्रपति के नाम  ज्ञापन सौंपा हैं । ज्ञापन देने के लिए पहुंचने वालों में विभिन्न समाजों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। डा प्रफुल्ल शर्मा के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में राष्ट्रपति से पश्चिम बंगाल में चल रही घटनाओं पर विराम लगाने के लिए कठोर कार्यवाही करने का आग्रह किया गया है। कलेक्टर की अनुपस्थिति में सिटी मजिस्ट्रेट अमित गुप्ता को प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन सौंपा।  

क्रिसमस : रैली में उमड़ा जन समुदाय, प्रभु यीशु के जन्म का दिया संदेश

TODAY छत्तीसगढ़  / राजधानी रायपुर में रविवार को मसीहीजनों का सैलाब उमड़ा। वे प्रभु यीशु के जन्म का संदेश देने निकले। क्रिसमस मेगा रैली में छत्तीसगढिय़ा संस्कृति झलक देखने को मिली। बड़े दिन की झांकियों व गायन दलों ने समां बांध दिया। रैली का नेतृत्व कैथोलिक डायसिस के आर्च बिशप विक्टर हैनरी ठाकुर व छत्तीसगढ़ डायसिस के बिशप रॉबर्ट अली व पादरीगण व फादर्स  कर रहे थे।
 रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली। सेंट पॉल्स कैथेड्रल, संत जोसफ महागिरजाघर व सालेम स्कूल तथा शहर के विभिन्न चर्चों की झांकियां नलघर पर आकर मिलीं। यहां से मेगा रैली के रूप में शुरू हुई। राजीव गांधी चौक, बैजनाथपारा, कोतवाली चौक, सीबीएसई चौक, सप्रे स्कूल, श्याम टॉकिज, इंडोर स्टेडम होते हुए रैली ने विवेकानंद सरोवर (बूढ़ातालाब) का राउंड लगाया। वहां से पुलिस लाइन गेट, कालीबाड़ी इंदिरागांधी चौक होते हुए नगर निगम मुख्यालय गार्डन पहुंचकर समापन किया गया। संचालक ने जॉन राजेश पॉल ने आभार व्यक्त किया। आर्च बिशप के आशीर्वचन से रैली विसर्जित हुई।
ये संगठन हुए शामिल- कैथोलिक डायसिस, छत्तीसगढ़ डायसिस (सीएनआई) बिलीवर्स डायोसिस,  केपिटल पास्टर्स फेलोशिप, छत्तीसगढ़ क्रिश्चयन फोरम, पास्टर्स एंड लीडर्स एसोसिएशन, यूनाइटेड पास्टर फेलोशिप, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन एसोसिएशन दुर्ग, गास मेमोरियल सेंटर, सेंट पॉल्स कैथेड्रल, सेंट जोसफ महागिरजाघर, सीएनआई चर्च जोरा, सेंट मैथ्यूस चर्च,  सेंट मेरीस ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च,  न्यू अपास्टालिक चर्च,  सेंट जॉन द बैपटिस्ट चर्च कापा, प्रार्थना भवन खड़वा नवा रायपुर, ग्रेस चर्च, सेंट मेरीज चर्च टाटीबंध, सेंट टेरेसा चर्च अमलीडीह,  मिलाप मसीही जन मंडली, सेंट जॉंस मारथोमा चर्च,  सेंट जॉन द बैपटिस्ट चर्च कांपा,  सेंट फ्रांसिस जेवियर चर्च भनपुरी, सेंट मरीस आर्थोडॉक्स चर्च, विनियार्ड चर्च लोधीपारा, बिलिवर्स ईस्टर्न चर्च, शांतिवन आश्रम महादेवघाट, सेंट पॉल्स चर्च इंग्लिश स्कूल,  सालेम इंग्लिश स्कूल, संडे स्कूल राजातालाब, संडे स्कूल भावेनगर, शामिल हुए। TODAY छत्तीसगढ़ के WhatsApp ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें 
सेंट पॉल्स कैथेड्रल पास्ट्रेट कोर्ट, पास्ट्रेट कमेटी, संडे स्कूल व महिला सभा  सेंट पॉल्स चर्च, पास्ट्रेट कोर्ट, ब्रदरन फैलोशिप, डायसिसन यूथ फैलोशिप,  अखिल भारतीय ईसाई समुदाय अधिकारी संगठन छत्तीसगढ़, बीईसी रायपुर, एलिल्याह चर्च, जवोहा राजा मिनिस्ट्री रायपुर, रायपुर क्रिश्चियन चर्च, शालोम चर्च रायपुर, एजी चर्च रायपुर,,  जनरल फादर सेबेस्टियन पी., फादर जॉन थोडुकयाल, फादर जोस वर्गीस, फादर जॉन पोन्नोर, फादर जोस वर्गीस व जेकब कोशी, फादर बेंजामिन बेहरा, पादरी मार्क राड्रिक्स, पादरी शिमोन पतरस, पास्टर एमआर पतरस, फादर संदीप लाल, शालिनी टोप्पो, जॉर्ज चैरियन, साजू थॉमस, अपर्णा कौशिक,  इवेंजलिस्ट नपताली नाग, इंवेंजलिस्ट प्रेम प्रकाश नाग,  पास्टर उपासन बाघ, जयप्रकाश कुजूर व निशांत टिर्की, आशीष सालोमन, रिचर्ड दास व प्रवीण जेम्स, जय किरण प्रकाश, मोहन चेरियन सामुएल व बॉबी जकर्याह, बीना पावना कुजूर, सेलवेनियुस टोप्पो, जेकब कोशी,, निकोलस सिंग व बसंत टिर्की, जो फर्नांडीस, कमल तांडी, जॉन राजेश पॉल,  केनस नायक, फुलजोंस हरमन,मार्टिन सेंटियागो, विलियम थियोफिलस, अरूण पन्नालाल, दीपक पन्नालाल अंकुश बोरकर, डॉ. राकेश जयराज, केसी ईअप्गपन, साजू वी. थॉमस, रवि थॉमस,  शाजी मथाई, शोभित जोसफ, गजेंद्र, सुरेस सी. पाइक, पास्टर वी. नायक, फास्टर कीर्ति केशरवानी,पास्टर राजीव सोनकर,  वीनस फ्रांसिस सिंग,  रूचि धर्मराज,  नायक, गीता नायक,  शोमरोन केजू, मनशीश केजू, सामुएल असीम अली, आरती तिग्गा, सिलवेस्टर एक्का, अनीश डेनिएल बाबा, संजय सालोमन, गुरुविंदर चढ्ढा,  दीपकराज पीटर, नीलेश राम, पैट्रिक तिग्गा, अपोलो कुजूर  आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए।
ये थे आकर्षण के केंद्र -  - क्रिसमस करौल गाते-बजाते थिरकते समहीजन। 0  गौशाले की चरणी में बालक प्रभु यीशु मसीह माता मरियम व पिता युसूफ के साथ 0 प्रभु के जन्म का संदेश देते स्वर्ग से उतरे दूतगण 0 चरवाहों को दिया संदेश कि जगत का उद्धारकर्ता जन्मा। 0 सातांक्लाज के रूप में बच्चों का दल 0 तीन ज्योतिषि सोना, लोभाव गंधरस की भेंट चढ़ाने पहुंचे बालक यीशु को . 
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