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युवा इनोवेटर: दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए पेश की 'Navinaut' और 'SignX' तकनीक


रायपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /   यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा सम्मानित 'ग्लोबल यूथ इनोवेटर' और 'एलियन इनोवेशंस' के 21 वर्षीय संस्थापक रवि किरण ने छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाक़ात में उनके साथ स्टार्टअप में ऑपरेशंस और पार्टनरशिप की जिम्मेदारी संभाल रहीं हर्षिता भी उपस्थित थीं। विशेष बात यह है कि ये दोनों ही युवा अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ इस नवाचार के जरिए समाज में बदलाव ला रहे हैं। 

इस अहम मुलाक़ात का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों (PWDS) को सशक्त बनाने और उनके दैनिक जीवन को अधिक स्वतंत्र व सुलभ बनाने के लिए विकसित किए गए अत्याधुनिक उपकरणों— 'नेविनॉट' (Navinaut) और 'साइनएक्स' (SignX)— का प्रदर्शन करना था।

बैठक के दौरान सचिव श्री यादव के समक्ष इन 'मेड इन इंडिया' तकनीकों की कार्यप्रणाली और हजारों दिव्यांगों के जीवन में इनके सकारात्मक प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। रवि ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए भारत का पहला टॉर्च के आकार का कॉम्पैक्ट सहायक उपकरण 'नेविनॉट' प्रस्तुत किया। यह उपकरण बिना पारंपरिक छड़ी के बाधा-मुक्त और सुरक्षित रूप से चलने में मदद करता है। इसमें सटीक रूप से बाधाओं का पता लगाने के लिए एडवांस्ड लिडार (LiDAR) सेंसर और अलर्ट के लिए टैक्टाइल वाइब्रेशन की सुविधा है। इसके साथ ही श्रवण एवं वाक् बाधित (मूक-बधिर) व्यक्तियों के लिए 'साइनएक्स' (SignX) का भी प्रदर्शन किया गया। यह स्मार्ट डेस्क-आधारित एआई (AI) उपकरण बिना किसी दुभाषिए के रीयल-टाइम संवाद को संभव बनाता है। यह 97.6 प्रतिशत सटीकता के साथ सांकेतिक भाषा को पहचानकर उसे तुरंत आवाज में बदल देता है, और 'स्पीच-टू-टेक्स्ट' फीचर के जरिए सामने वाले की बातों को स्क्रीन पर दिखाता है।

समाज कल्याण सचिव श्री भुवनेश यादव ने इन नवाचारों की गहरी सराहना करते हुए बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना शासन की प्राथमिकताओं में से एक है। श्री यादव ने इन उपकरणों की व्यावहारिक उपयोगिता को देखते हुए भविष्य में इन्हें प्रोत्साहित करने और सार्वजनिक स्थानों, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों व शिक्षण संस्थानों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी सार्थक विचार-विमर्श किया। यह बैठक तकनीकी नवाचारों और सरकारी प्रयासों के समन्वय से दिव्यांग समुदाय के लिए एक समावेशी, समान और सुलभ वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।


हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे पापाराव, 17 कैडरों के साथ आत्मसमर्पण


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में चल रही ‘पूना मारगेम’ पुनर्वास पहल के तहत बुधवार को 18 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की दिशा में एक और संकेत है। यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम जगदलपुर के लालबाग स्थित शौर्य भवन में आयोजित किया गया, जहां पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और स्थानीय टीम के सदस्य मौजूद थे।

पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वालों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े पापा राव के अलावा डिविजनल स्तर के नेता प्रकाश मड़वी और अनिल ताती भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये सभी लंबे समय से सक्रिय कैडर रहे हैं। आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों ने एके-47, एसएलआर, इंसास राइफल, .303 राइफल और बीजीएल लॉन्चर सहित कई हथियार सुरक्षा बलों के हवाले किए।

अधिकारियों ने बताया कि ‘पूना मारगेम’ पहल का उद्देश्य उन लोगों को हिंसा के रास्ते से हटाना है, जो माओवादी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाकर बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वालों के फैसले का स्वागत किया और कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें आर्थिक और सामाजिक सहायता दी जाएगी।

हाल के महीनों में बस्तर क्षेत्र में आत्मसमर्पण की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। सुरक्षा बल इसे अपनी रणनीति की सफलता के रूप में देखते हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक शांति के लिए पुनर्वास के साथ-साथ विकास और स्थानीय विश्वास बहाली भी जरूरी होगी। 

बीजापुर और बस्तर संभाग में पिछले कुछ समय से आत्मसमर्पण की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2024 से अब तक 2,700 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। राज्य सरकार इसे अपनी पुनर्वास नीति और सुरक्षा अभियानों की सफलता के रूप में देखती है, जबकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए विकास, विश्वास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। 



जग्गी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में दोबारा शुरू हुई प्रक्रिया, 1 अप्रैल को अंतिम बहस तय


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले की सुनवाई दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में शुरू हो चुकी है। अदालत ने अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है।

मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की उस अपील को स्वीकार किया, जिसमें मामले की दोबारा समीक्षा की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि केस के तथ्यों और सबूतों पर फिर से विस्तार से विचार किया जाना आवश्यक है। इससे पहले, अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए 28 आरोपियों को दी गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया था। उस फैसले को इस लंबे समय से चल रहे मामले में एक अहम पड़ाव माना गया था।

रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक प्रमुख नेता थे। इस घटना ने उस समय राज्य की राजनीति में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी और इसे छत्तीसगढ़ के चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है। मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू अमित जोगी से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की अपील पर भी सुनवाई की अनुमति दी है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अंतिम सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस लंबे समय से चले आ रहे मामले में आगे की दिशा तय होने की संभावना है।

पापा राव समेत 18 माओवादी कैडर सरेंडर, ज़मीन पर क्या होगा असर ?


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है। पुलिस के अनुसार, साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव सहित कुल 18 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर) स्तर के नेता प्रकाश मड़वी और अनिल ताती भी शामिल हैं। इस समूह में सात महिला कैडर भी हैं।

पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों ने AK-47 राइफल सहित अन्य हथियार भी जमा किए हैं। यह आत्मसमर्पण राज्य की पुनर्वास नीति के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। अधिकारियों ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम के बाद दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन नेतृत्व के स्तर पर काफ़ी कमजोर हुआ है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है।

पुलिस को उम्मीद है कि इस कदम के बाद अन्य सक्रिय कैडर भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कुछ माओवादी छोटे-छोटे समूहों में अब भी सक्रिय हैं। 

क्या है दंडकारण्य का महत्व?

दंडकारण्य क्षेत्र लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का प्रमुख गढ़ माना जाता रहा है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में फैला यह क्षेत्र सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व स्तर पर इस तरह के आत्मसमर्पण से संगठन की रणनीतिक क्षमता पर असर पड़ सकता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल का कारनामा: धरसींवा के गिरौद में अतिक्रमण और अवैध प्लाटिंग का खुलासा


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के धरसींवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गिरौद गांव में सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग और अतिक्रमण का मामला सामने आया है। तहसीलदार द्वारा की गई जांच में जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल द्वारा शासकीय भूमि पर कब्जा कर प्लॉटिंग किए जाने की पुष्टि हुई है। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले में सख्ती के संकेत दिए हैं।

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नंदकुमार चौबे ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से शिकायत मिली थी कि गांव में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं। शिकायत के आधार पर तहसीलदार से जांच कराई गई, जिसमें अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

एसडीएम के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के लिए तहसीलदार को तीन बार पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कार्रवाई में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि गिरौद गांव में शासकीय चारागान, निस्तार और जल क्षेत्र की भूमि पर अवैध रूप से सड़क निर्माण कर प्लॉटिंग की जा रही थी। हल्का पटवारी द्वारा मौके का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें कई खसरा नंबरों की जमीन पर कब्जे की पुष्टि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, खसरा नंबर 511/5, 630, 634, 636, 638 और 644 सहित अन्य जमीनों पर अतिक्रमण किया गया है। दस्तावेजों में दर्ज है कि निस्तारी-धरसा के नाम पर लगभग 6.39 हेक्टेयर सरकारी भूमि है, जिसमें से करीब 4.51 हेक्टेयर हिस्से में मुरम सड़क बनाकर प्लॉटिंग की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर बाउंड्रीवाल का निर्माण कर कब्जा किया गया, जबकि चारागाह की जमीन पर सड़क बनाकर उसे निजी व्यक्तियों को बेचने के आरोप हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ हिस्सों में जमीन को समतल कर 60 फीट चौड़ी सड़क बनाई गई और उसके किनारे प्लॉट विकसित किए गए। 

तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा कार्य बिना वैधानिक अनुमति के किया गया, जो राजस्व नियमों का उल्लंघन है। जांच प्रतिवेदन के साथ पंचनामा और नक्शा भी संलग्न कर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। प्रशासन अब इस मामले में अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि जमीन पर कब्जा हटाने की कार्रवाई कब तक और किस स्तर तक की जाती है।

छत्तीसगढ़: 12वीं हिंदी पेपर लीक के दावे के बाद परीक्षा निरस्त, अब 10 अप्रैल को दोबारा होगी परीक्षा


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ में कक्षा 12वीं के हिंदी प्रश्नपत्र के कथित लीक होने के दावों के बाद छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने अहम निर्णय लेते हुए परीक्षा को निरस्त कर दिया है। मंडल ने आदेश जारी कर बताया है कि अब हिंदी विषय की पुनर्परीक्षा 10 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, 12वीं कक्षा का हिंदी पेपर 14 मार्च 2026 को आयोजित हुआ था। परीक्षा के बाद सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप समूहों में प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते सवालों के वायरल होने की खबरें सामने आईं, जिससे पूरे मामले को लेकर संदेह और विवाद की स्थिति बन गई। इस बीच छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने दावा किया कि परीक्षा से पहले ही कुछ प्रश्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे थे। संगठन ने इसे परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर चूक बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सिटी कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके बाद पुलिस की साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि प्रश्नपत्र वास्तव में लीक हुआ था या नहीं, और यदि हुआ तो इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। इस मुद्दे को लेकर एनएसयूआई ने विरोध प्रदर्शन भी किया और मंडल कार्यालय का घेराव कर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। संगठन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और इससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कहा है कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदी विषय की परीक्षा को निरस्त कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया है, ताकि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो। फिलहाल, छात्र-छात्राओं को अब 10 अप्रैल को होने वाली पुनर्परीक्षा की तैयारी करनी होगी, जबकि जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी हैं।

MBBS छात्रा अनुष्का सोन ने जीता ‘मिस इंडिया छत्तीसगढ़’ खिताब,


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के भिलाई की रहने वाली एमबीबीएस छात्रा अनुष्का सोन को फेमिना मिस इंडिया 2026 के 61वें संस्करण के लिए ‘मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026’ चुना गया है। अब वे इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस प्रतियोगिता की चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई। प्रारंभिक ऑडिशन कोलकाता में आयोजित हुए, जहाँ देशभर से सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद इनमें से पाँच फाइनलिस्ट का चयन किया गया।

आयोजकों के अनुसार, अंतिम चरण मुंबई में आयोजित किया गया, जहाँ सीमित संख्या में पहुँची प्रतिभागियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। इसी दौर में अनुष्का सोन ने अपने आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और अभिव्यक्ति क्षमता से निर्णायकों को प्रभावित किया और खिताब अपने नाम किया।

चयन प्रक्रिया के दौरान जज पैनल में फैशन और ग्लैमर जगत से जुड़े कई विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने प्रतिभागियों के व्यक्तित्व, प्रस्तुति और सामाजिक समझ का मूल्यांकन किया। इन मानकों पर खरा उतरते हुए अनुष्का को ‘मिस इंडिया छत्तीसगढ़’ के रूप में चुना गया।

टाइम्स ग्रुप और फेमिना द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता लंबे समय से देश की प्रमुख सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शामिल रही है। इस मंच से पहले भी कई प्रतिभागी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। अब अनुष्का सोन की नजरें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता पर टिकी हैं, जहाँ वे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनके इस चयन को राज्य के युवाओं, खासकर छात्राओं के लिए प्रेरणा के रूप में भी देखा जा रहा है।   

नवा रायपुर जंगल सफारी में बस संचालन को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव का विरोध तेज


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  नवा रायपुर जंगल सफारी में बस संचालन को निजी एजेंसियों को सौंपने के प्रस्ताव के विरोध में आज छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व केबिनेट मंत्री और सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।

वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे वाहन चालकों और गाइडों की आजीविका पर संकट मंडराना निश्चित तौर पर अत्यंत चिंताजनक है। यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों से भी जुड़ा विषय है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रतिनिधि मंडल की बाते सुनने के बाद कहा कि किसी भी परिस्थिति में छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के हक और सम्मान से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

श्री अग्रवाल का मानना है कि यदि बस संचालन में कोई समस्या है, तो उसका समाधान विभागीय स्तर पर किया जाना चाहिए। पुरानी बसों की मरम्मत कर उन्हें पुनः संचालित करना एक व्यवहारिक और न्यायसंगत विकल्प हो सकता है। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल को भरोसा दिलाया कि इस पूरे विषय को शासन के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

वन विभाग घिरा: ‘रेस्क्यू सेंटर’ या अवैध जू? हिरणों की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल


रायपुर ।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  अंबिकापुर के संजय वन वाटिका में कुत्तों के हमले से 15 हिरणों की मौत के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल तेज हो गए हैं। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने इस घटना को दुखद बताते हुए वन विभाग के उच्च अधिकारियों से पूछा है कि प्रदेश में ऐसे और कितने केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिन्हें सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से मान्यता प्राप्त नहीं है।

‘रेस्क्यू सेंटर’ या अवैध जू?

सिंघवी का आरोप है कि संजय वाटिका को जू नहीं, बल्कि ‘रेस्क्यू सेंटर’ बताकर अधिकारियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत रेस्क्यू सेंटर के लिए भी CZA की मान्यता अनिवार्य होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यहां लाए गए वन्यजीवों को उपचार के बाद वापस जंगल में छोड़ा जाता है, तो उनकी संख्या लगातार कैसे बढ़ रही है। साथ ही, संरक्षित प्रजातियों—जैसे नीलगाय—को वहां रखने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।

छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े अधिकारी बचे?

सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखी जा रही है, जबकि जिम्मेदारी तय करते समय उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल नहीं उठाए जा रहे। उनका कहना है कि यदि टिकट लेकर आम लोगों के लिए वन्यजीवों का प्रदर्शन किया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर ‘जू संचालन’ की श्रेणी में आता है, जिसके लिए विधिवत मान्यता जरूरी है।

अन्य केंद्रों पर भी सवाल

सिंघवी ने सरगुजा के रमकोला स्थित एलीफेंट रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर, बारनवापारा अभ्यारण के वन भैंसा ब्रीडिंग सेंटर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में संचालित केंद्रों का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या ये सभी संस्थान पूर्ण मान्यता के साथ संचालित हो रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, रायपुर और राजनांदगांव में इको-टूरिज्म के नाम पर सीमित क्षेत्र में फेंसिंग कर वन्यजीवों को रखने की व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।

नंदनवन और पुराने मामलों का जिक्र

सिंघवी ने रायपुर के नंदनवन में वन्यजीवों को लंबे समय तक रखने और धमतरी जिले में निजी जू पर हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए पूछा कि यदि निजी संचालकों पर कार्रवाई हो सकती है, तो सरकारी स्तर पर जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की जाती।

मांग: पारदर्शिता और जवाबदेही

सिंघवी ने मांग की है कि प्रदेश में संचालित सभी ऐसे केंद्रों की स्थिति सार्वजनिक की जाए और जहां भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, वहां कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने इन केंद्रों में रखे गए वन्यजीवों को सुरक्षित अभ्यारणों में छोड़ने की भी मांग उठाई है। इस पूरे मामले में वन विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन घटना ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 


खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में भागीदारी के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू हो गया है। आज सवेरे अरुणाचल प्रदेश के वेटलिफ्टरों का 14 सदस्यीय दल रायपुर पहुंचा। इनमें 13 खिलाड़ी और एक सपोर्टिंग स्टॉफ शामिल है।

खिलाड़ियों के छत्तीसगढ़ आगमन पर रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर राऊत नाचा दल की रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा साई (SAI) के अधिकारियों ने गुलाब भेंटकर सभी खिलाड़ियों का हार्दिक स्वागत किया। 23 मार्च को कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खिलाड़ी बड़ी संख्या में रायपुर पहुंचेंगे।

देश में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ के तीन शहरों - रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर में किया गया है। इसमें देशभर के करीब तीन हजार जनजातीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़वासियों को सात खेलों में रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। इस दौरान पुरूष और महिला वर्गों में हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती, एथलेटिक्स, तैराकी, तीरंदाजी और वेटलिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं होंगी।

शादी के चार महीने बाद ही टूटा साथ, रोपवे हादसे में आयुषी की मौत


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में हुए खल्लारी रोपवे हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में 28 वर्षीय आयुषी धावरे की मौत हो गई, जो रायपुर के राजातालाब इलाके की रहने वाली थीं। आपको बता दें कि आज सुबह खल्लारी मात्रा मंदिर परिसर में लगे रोपवे के टूटकर नीचे गिरने से 18 श्रद्धालु घायल हो गये जिसमें कई की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।  गंभीर रूप से घायल लोगों का रायपुर मेकाहारा में इलाज चल रहा है।  

परिजनों के मुताबिक आयुषी की शादी बीते नवंबर में ऋषभ धावरे से हुई थी। शादी के बाद यह उनकी पहली नवरात्रि थी जिसे मनाने के लिए वे परिवार के साथ खल्लारी माता मंदिर दर्शन के लिए गए थे। लेकिन यह यात्रा एक दर्दनाक हादसे में बदल गई। इस दुर्घटना में उनके पति ऋषभ धावरे भी घायल हुए हैं। साथ ही परिवार के अन्य सदस्य 18 वर्षीय शुभ धावरे और 13 वर्षीय मनस्वी भी इस हादसे में जख्मी हुए हैं। सभी घायलों का इलाज रायपुर के जिला अस्पताल और एक निजी अस्पताल में जारी है।

बताया जा रहा है कि ऋषभ धावरे एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर हैं, जबकि आयुषी धावरे पाटन स्थित आत्मानंद स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। घटना की सूचना मिलते ही राजातालाब के गांधी चौक स्थित उनके घर पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। मोहल्ले में शोक का माहौल है और लोग परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, आयुषी का स्वभाव बेहद सरल और मिलनसार था, जिससे घर और मोहल्ले में सभी उनसे स्नेह रखते थे। 

खल्लारी मंदिर रोपवे दुर्घटना: केबल टूटने से ट्रॉलियां गिरीं, एक की मौत, 18 से अधिक घायल


महासमुंद।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नवरात्रि के दौरान एक बड़ा हादसा सामने आया है। खल्लारी माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु उस समय दुर्घटना का शिकार हो गए, जब रोपवे का केबल टूटने से दो ट्रॉलियां नीचे गिर गईं। 

अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे में 18 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से आधा दर्जन की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस हादसे में एक महिला की मौत की भी पुष्टि हुई है। यह घटना आज रविवार को हुई, जब नवरात्रि और छुट्टी के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद थी। रायपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में दर्शन के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है, जिसका बड़ी संख्या में लोग इस्तेमाल करते हैं। 

बताया जा रहा है कि हादसे के समय दो ट्रॉलियों में 18 से अधिक श्रद्धालु सवार थे। रोपवे करीब 200 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा ही था कि अचानक केबल टूट गया, जिससे ट्रॉलियां नीचे गिर गईं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह तकनीकी खराबी थी या किसी प्रकार की लापरवाही का नतीजा। 


वंदे भारत से गांजा तस्करी करते दो युवती गिरफ्तार, बिलासपुर के तिफरा की रहने वाली निकलीं


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त कार्रवाई में दो युवतियों को गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों के पास से करीब 24 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 4 लाख रुपये बताई जा रही है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्हें पहले से सूचना मिली थी कि दो महिलाएं विशाखापट्टनम से वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए रायपुर पहुंचने वाली हैं और उनके पास अवैध मादक पदार्थ हो सकता है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही दोनों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान दोनों युवतियों के ट्रॉली बैग से अलग-अलग पैकेट में गांजा बरामद किया गया। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में दोनों ने अपनी पहचान नीलम राठौर और रीना वर्मा के रूप में बताई है। उन्होंने खुद को बिलासपुर के तिफरा इलाके का निवासी बताया है। फिलहाल एजेंसियां उनसे पूछताछ कर रही हैं और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि इस कथित तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और इससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

पुलिस का सबसे बड़ा ड्रग्स ऑपरेशन, पंजाब से चल रहे हेरोइन सिंडिकेट का भंडाफोड़


रायपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब से संचालित हेरोइन तस्करी के अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। कबीर नगर, आमानाका थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सुनियोजित अभियान के तहत पंजाब में दबिश देकर चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कवलजीत सिंह पन्नू, तरसेम सिंह, विक्की सिंह और जनक राज के रूप में हुई है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के क्षेत्रों से हेरोइन खरीदकर उसे रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में खपाता था। तस्करी के लिए आरोपियों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया था, हेरोइन को सामान्य दिखने वाले पार्सलों में छिपाकर कुरियर के माध्यम से भेजा जाता था। वहीं बड़े स्तर पर सप्लाई के लिए ट्रकों में वैध माल की आड़ ली जाती थी। 

गिरफ्तार आरोपियों में कवलजीत सिंह पन्नू को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस ने उसे ‘टियर-1’ सप्लायर की श्रेणी में रखा है, जो सीधे पाकिस्तान से जुड़े सीमावर्ती नेटवर्क से ड्रग्स खरीदता था। पन्नू का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और वह पूर्व में रायपुर तथा पंजाब की जेलों में रह चुका है। उसकी गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उसके पास से एक बरेटा पिस्टल और जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सिंडिकेट हथियारों के दम पर अपना अवैध कारोबार चला रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार तरसेम सिंह और विक्की सिंह की भूमिका हेरोइन को पैक कर पार्सल के जरिए भेजने की थी। ये दोनों आरोपी बेहद चालाकी से मादक पदार्थों को सामान्य सामान की तरह पैक करते थे, ताकि किसी को शक न हो। वहीं जनक राज ट्रक चालकों के नेटवर्क के जरिए इस अवैध कारोबार को संचालित करता था। वह व्यापारिक माल की आड़ में लंबे समय से हेरोइन की सप्लाई करता आ रहा था।

इस पूरे मामले का खुलासा एक सुनियोजित चार चरणीय कार्रवाई के बाद हुआ। सहायक पुलिस आयुक्त ईशु अग्रवाल ने बताया कि पहले चरण में रायपुर में सक्रिय स्थानीय ड्रग पेडलर्स को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे पंजाब कनेक्शन सामने आया।

तीसरे चरण में पुलिस टीम ने कुरियर सेवाओं और ट्रक परिवहन नेटवर्क पर फोकस करते हुए तस्करी के रास्तों और तरीकों का पता लगाया। अंततः चौथे चरण में विशेष टीम बनाकर पंजाब में छापेमारी की गई और मुख्य सप्लायर समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस अब आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्यों, वित्तीय लेनदेन और सप्लाई चेन के विस्तार की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से नशे के बड़े नेटवर्क को करारा झटका लगा है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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‘छोटू’ की शुद्धता पर विवाद, डीएनए रिपोर्ट से नहीं मिला समर्थन


रायपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में रखे गए वन भैंसे ‘छोटू’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वन विभाग जहां उसे अंतिम शुद्ध नस्ल का जंगली भैंसा बता रहा है, वहीं उपलब्ध डीएनए रिपोर्ट इस दावे की पुष्टि नहीं करती है।

डिप्टी डायरेक्टर स्तर पर प्रस्तुत की गई डीएनए रिपोर्ट का अध्ययन करने पर यह सामने आया है कि इसमें केवल उदंती क्षेत्र के भैंसों के आनुवंशिक आंकड़े और विविधता का उल्लेख है। रिपोर्ट में किसी एक भैंसे को शुद्ध नस्ल का घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में छोटू को शुद्ध नस्ल का बताना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा रहा है।

प्रजनन योजना पर उठे सवाल

वन विभाग असम से लाई गई मादा वन भैंसों के साथ छोटू का प्रजनन कराने की तैयारी कर रहा है। इस पर रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने आपत्ति जताते हुए शासन को पत्र लिखकर छोटू की शुद्धता की जांच की मांग की थी। शासन ने इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को दावों के परीक्षण के निर्देश दिए हैं। हालांकि आरोप है कि बिना किसी स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच के ही छोटू को शुद्ध नस्ल का मान लिया गया और आगे इस विषय पर संज्ञान न लेने की अनुशंसा भी की गई।

वन्यजीव प्रेमियों की आवाज दबाने का आरोप

नितिन सिंघवी ने वन विभाग पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने में बाधा उत्पन्न करने और वन्यजीव प्रेमियों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है।

उम्र और प्रजनन क्षमता पर संशय

छोटू की उम्र को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दस्तावेजों में अब भी उसकी उम्र 21 वर्ष दर्ज है, जबकि पूर्व अभिलेखों के आधार पर उसकी वास्तविक उम्र 24 वर्ष से अधिक मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस उम्र में जंगली भैंसों की प्रजनन क्षमता काफी कम हो जाती है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी पूर्व में प्रजनन के प्रयासों के असफल रहने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में वर्तमान प्रजनन योजना की व्यवहारिकता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

अन्य मुद्दों पर भी जवाब बाकी

मामले में असम से लाई गई मादा भैंसों को वर्षों तक बाड़े में रखने, पूर्व में खरीदी गई भैंसों की डीएनए जांच न कराने और हाइब्रिड भैंसों पर हुए खर्च को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल, छोटू को लेकर उठे इस विवाद ने वन विभाग के दावों की वैज्ञानिकता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

मुख्यमंत्री ने पूर्व क्रिकेट कप्तान कपिल देव से की सौजन्य मुलाकात, खेल विकास पर हुई चर्चा

रायपुर ।  TODAY छत्तीसगढ़  /   मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और देश के महान क्रिकेटर कपिल देव से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उन्हें बेल मेटल से निर्मित आकर्षक प्रतिमा और ‘पुण्यभूमि छत्तीसगढ़’ कॉफी टेबल बुक भेंट कर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीकात्मक सम्मान किया।

मुख्यमंत्री ने माता कौशल्या की पावन भूमि छत्तीसगढ़ में उनका स्वागत करते हुए कहा कि राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुलाकात के दौरान प्रदेश में खेल अधोसंरचना के आधुनिकीकरण, खेल सुविधाओं के विस्तार और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान खेलों के माध्यम से युवाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। वहीं कपिल देव ने भी प्रदेश में खेल विकास की संभावनाओं पर सकारात्मक विचार व्यक्त किए। 

NH53: मादक पदार्थ के साथ दो वाहन जब्त, आठ आरोपी गिरफ्तार


महासमुंद। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / जिले में पुलिस और एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (ANTF) ने संयुक्त कार्रवाई में 137 किलोग्राम गांजा जब्त करने का दावा किया है। इस मामले में एक महिला समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर सिंघोड़ा थाना क्षेत्र के रेहटीखोल के पास की गई। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि ओडिशा से महाराष्ट्र की ओर दो वाहनों में मादक पदार्थ ले जाया जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने इलाके में नाकाबंदी की।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान एक मारुति सुजुकी ईको और एक टोयोटा कार को रोका गया। तलाशी लेने पर दोनों वाहनों में प्लास्टिक की बोरियों में गांजा रखा हुआ मिला। पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए गांजे की अनुमानित कीमत करीब 68.5 लाख रुपये है। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में ओडिशा और महाराष्ट्र के निवासी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मादक पदार्थ को ओडिशा के अंगुल जिले से महाराष्ट्र के अकोला ले जाया जा रहा था।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में इस्तेमाल किए गए दोनों वाहन, कुछ मोबाइल फोन और नकदी भी जब्त की गई है। आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में कथित तस्करी नेटवर्क के अन्य संभावित लिंक की जांच की जा रही है। महासमुंद पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक जिले में गांजा तस्करी के कई मामलों में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

दोपहिया वाहन चोरी के गिरोह का पर्दाफाश, 31 वाहनों के साथ तीन आरोपी गिरफ्तार

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / प्रदेश के भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में पुलिस ने दोपहिया वाहन चोरी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार  इस कार्रवाई में 31 चोरी के दोपहिया वाहन बरामद किए गए हैं  जिनकी अनुमानित कीमत करीब 31 लाख रुपये आंकी गई है।

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी ई. पापा राव सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 से भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में दोपहिया वाहन चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। इनमें बीएसपी (भिलाई इस्पात संयंत्र) के मुख्य गेट के पास स्थित पार्किंग और भिलाई-भट्टी क्षेत्र को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा था।

थाना भिलाई नगर में दर्ज मामलों की समीक्षा, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी की पहचान की। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह चोरी के वाहनों को जशपुर जिले के कुंकुरी क्षेत्र में ले जाकर अपने सहयोगियों के माध्यम से बेचता था। पुलिस का कहना है कि बरामद किए गए वाहनों में भिलाई-भट्टी, छावनी और रायपुर थाना क्षेत्रों से चोरी हुई गाड़ियां शामिल हैं। कुछ ऐसे वाहन भी मिले हैं, जिनके दस्तावेज पंजीकृत नहीं पाए गए।

नए बजट से शहर से गांव तक विकास को मिलेगी नई रफ्तार – साव


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज विधानसभा में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रस्तुत श्री विष्णु देव साय सरकार के तीसरे बजट को राज्य के विकास को नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाला बजट बताया है। उन्होंने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम जिस संकल्प को लेकर सरकार में आए हैं, यह बजट ठीक उसी के अनुरूप है। छत्तीसगढ़ को हमने बनाया है और हम ही इसे संवारेंगे। छत्तीसगढ़ को संवारने का यह बजट एक-एक क्षेत्र, एक-एक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का बजट है। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का यह बजट हर क्षेत्र और हर वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें अनेक नई योजनाओं और नवाचारी प्रावधानों को शामिल किया गया है। राज्य के शहरों को आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना’ का प्रावधान किया गया है। वहीं लोक निर्माण विभाग के माध्यम से सड़क अधोसंरचना को नई गति देने के लिए ‘द्रुतगामी सड़क संपर्क योजना’ भी इसमें शामिल है। इन योजनाओं से शहरी विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।

श्री साव ने कहा कि नया बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगा और युवाओं, किसानों, महिलाओं तथा व्यापारियों सहित समाज के सभी वर्गों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। सरकार का उद्देश्य केवल विकास कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है जिससे हर नागरिक को लाभ मिले। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण सरकार का मूल संकल्प है और यह बजट उसी दिशा में एक ठोस और निर्णायक कदम है। प्रदेश के लोगों के विश्वास और अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए सरकार आगामी वर्षों में विकास की रफ्तार को और तेज करेगी। प्रदेशवासियों के कल्याण और समग्र विकास को केंद्र में रखकर यह बजट तैयार किया गया है।

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रंगों की होली: राज्य की सभी देशी और विदेशी मदिरा दुकानें रहेंगी बंद


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /   होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उमंग, उल्लास और सामाजिक मेल-मिलाप का प्रतीक है। लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ में होली का रंग कुछ अलग तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। कुछ दिन पहले जब राज्य सरकार द्वारा तीन ‘ड्राई डे’ समाप्त करने की खबर सामने आई थी, तब यह खबर जितनी अखबारों और सोशल मीडिया की सुर्खियों में रही, उससे कहीं अधिक उत्साह शराब के शौकीनों के बीच देखा गया। खासतौर पर जब यह स्पष्ट हुआ कि इस सूची में होली जैसे बड़े त्योहार का नाम भी शामिल है, तब कई लोगों ने यह मान लिया था कि इस बार की होली पहले से अधिक ‘रंगीन’ और ‘नशीली’ होगी।

गांवों की चौपालों से लेकर शहरों के क्लबों और होटलों तक, यह चर्चा आम हो गई थी कि इस बार त्योहार के दिन भी शराब की दुकानें खुली रहेंगी। कई लोगों ने तो अपनी योजनाएं भी इसी हिसाब से बनानी शुरू कर दी थीं। लेकिन जैसे-जैसे इस फैसले पर सामाजिक और नैतिक स्तर पर सवाल उठने लगे, सरकार ने भी इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझा। त्योहार केवल व्यक्तिगत आनंद का अवसर नहीं होता, बल्कि वह समाज की सामूहिक चेतना और परंपराओं का भी प्रतीक होता है। यही कारण है कि अंततः राज्य सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और एक नया आदेश जारी कर दिया। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने X हेंडल पर ट्वीट किया है। 

छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, 4 मार्च 2026 को होली के दिन पूरे प्रदेश में ‘शुष्क दिवस’ (Dry Day) घोषित किया गया है। इस दिन राज्य की सभी देशी और विदेशी मदिरा दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट-बार और क्लब पूरी तरह बंद रहेंगे। महानदी भवन से जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि केवल शराब दुकानें ही नहीं, बल्कि भांग और भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि त्योहार की मूल भावना को संरक्षित रखने का प्रयास भी माना जा रहा है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निजी क्लब, स्टार होटल या गैर-मालिकाना प्रतिष्ठानों में मदिरा परोसने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही व्यक्तिगत भंडारण और गैर-लाइसेंस प्राप्त परिसरों में शराब रखने पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया गया है।

प्रशासन ने इस आदेश को प्रभावी बनाने के लिए उड़नदस्तों को सक्रिय कर दिया है। इन्हें निर्देश दिए गए हैं कि अवैध परिवहन, बिक्री या भंडारण की सघन जांच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार इस आदेश को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर पूरी गंभीरता से लागू करना चाहती है।

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