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शराब का नशा, मामूली बात पर झगड़ा और फिर मर्डर... पुलिस ने ऐसे सुलझाई हत्या की गुत्थी

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र में हुई एक युवक की हत्या के मामले को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझाने का दावा किया है. इस मामले में पुलिस ने एक 20 वर्षीय युवक को गिरफ़्तार किया है और एक नाबालिग (विधि के साथ संघर्षरत बालक) को हिरासत में लिया है.

पुलिस के मुताबिक़, पकड़े गए अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए पत्थर और वाहन के साथ-साथ अलग-अलग इलाक़ों से चोरी की गई दो पल्सर मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं.

क्रिकेट मैदान में मिला था शव

खमतराई थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 21 जून 2026 को डब्ल्यू.आर.एस. (W.R.S.) कॉलोनी स्थित क्रिकेट मैदान के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की सूचना मिली थी. घटनास्थल के निरीक्षण से पता चला कि मृतक के सिर पर किसी भारी वस्तु से वार कर उसकी हत्या की गई थी.

शुरुआती जांच में पुलिस ने सीमावर्ती ज़िलों के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट और हुलिए का मिलान किया, जिसके बाद मृतक की पहचान शहीद नगर (खमतराई) निवासी 35 वर्षीय रूपेश सारथी के रूप में हुई.

क्षणिक विवाद बना हत्या का कारण

एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और खमतराई पुलिस की संयुक्त जांच और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के विश्लेषण के बाद पुलिस ने गोवर्धन नगर निवासी शिवा सोनानी को हिरासत में लिया. पूछताछ में उसने अपने एक नाबालिग साथी के साथ मिलकर हत्या की बात स्वीकार की.

पुलिस के मुताबिक़, वारदात वाले दिन दोनों अभियुक्त शराब के नशे में थे और अपनी एक्टिवा गाड़ी से जा रहे थे. इसी दौरान जी.टी. कॉम्प्लेक्स के पास उनका रूपेश सारथी से किसी बात को लेकर विवाद हो गया. विवाद बढ़ने पर दोनों ने रूपेश के साथ मारपीट की और उसे ज़बरदस्ती अपनी एक्टिवा पर बैठाकर डब्ल्यू.आर.एस. कॉलोनी के क्रिकेट मैदान ले गए, जहाँ सिर पर पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी गई.

पुलिस ने दोनों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज़ किया है.

दो मोटरसाइकिल चोरियों का भी ख़ुलासा

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि पकड़े गए दोनों अभियुक्त वाहन चोरी की वारदातों में भी शामिल थे. उनकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की दो पल्सर मोटरसाइकिलें बरामद की हैं:

  • पहली चोरी: 30 मई 2026 को देवेंद्र नगर क्षेत्र के फोकटपारा से मोहित साहू की पल्सर मोटरसाइकिल (CG 04 MF 3934) चुराई गई थी.

  • दूसरी चोरी: 9 जून 2026 को पुरानी बस्ती क्षेत्र के भाठागांव में एक होटल के सामने से महेश देवांगन की पल्सर मोटरसाइकिल (CG 05 AQ 7813) चोरी हुई थी.

बरामद की गई दोनों मोटरसाइकिलों की कुल क़ीमत क़रीब 1,60,000 रुपये आंकी गई है. इन मामलों में भी दोनों के ख़िलाफ़ अलग से क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है.

  • गिरफ़्तार अभियुक्त: शिवा सोनानी उर्फ़ तुषार (20 वर्ष), निवासी- गोवर्धन नगर, भनपुरी, रायपुर.

  • हिरासत में: विधि के साथ संघर्षरत 01 बालक.

  • ज़ब्ती: घटना में प्रयुक्त एक्टिवा, पत्थर और चोरी की 2 पल्सर मोटरसाइकिलें.

शिकार और पानी की तलाश हुई पूरी ! उदंती-सीतानदी में बाघिन की दस्तक

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में पिछले कुछ दिनों से एक बाघिन की नियमित मौजूदगी दर्ज की गई है. वन विभाग की ओर से विभिन्न इलाक़ों में लगाए गए कैमरा ट्रैप के वीडियो और तस्वीरों में इस बाघिन को देखा गया है.

वन अधिकारियों के मुताबिक़, यह बाघिन प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए इस वन क्षेत्र तक पहुंची है और अब इसे अपना स्थायी ठिकाना (आशियाना) बनाने की प्रक्रिया में है.

वन्यजीव विशेषज्ञों की राय और आवास सुधार

लंबे समय से बाघों की वापसी का इंतज़ार कर रहे इस रिज़र्व के लिए वन्यजीव विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बाघ या बाघिन का किसी वन क्षेत्र को स्थायी निवास के रूप में चुनना इस बात का प्रमाण है कि वहां पर्याप्त मात्रा में शिकार (प्रेय बेस), बेहतर आवास और सुरक्षित माहौल उपलब्ध है.

वन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उदंती-सीतानदी रिज़र्व में वन्यजीवों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए कई कार्य किए गए हैं, जिनका असर अब दिखने लगा है:

  • सघन गश्त और एंटी-पोचिंग: शिकार विरोधी नेटवर्क को मज़बूत किया गया है और जंगलों के भीतर गश्त बढ़ाई गई है.

  • कृत्रिम जलस्रोतों का निर्माण: वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सैकड़ों कृत्रिम जलस्रोतों और झिरियों का निर्माण कराया गया है.

  • वन भूमि की बहाली: क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए अतिक्रमण हटाकर वन भूमि को वापस लिया गया है.

सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने का फ़ैसला

कैमरा ट्रैप के विश्लेषण के बाद वन अधिकारियों ने बताया कि बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है और वह क्षेत्र का निरीक्षण कर अपनी टेरिटरी (प्रभाव क्षेत्र) स्थापित करने की कोशिश कर रही है.

बाघिन की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने रिज़र्व क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों को उम्मीद है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो यह रिज़र्व आने वाले समय में मध्य भारत के प्रमुख बाघ आवासों के रूप में फिर से अपनी पहचान बना सकेगा और भविष्य में अन्य बाघों के आगमन का मार्ग भी प्रशस्त होगा.


"जो इतिहास भूल जाते हैं, उनका भविष्य संकट में होता है..." रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर बोले सीएम साय

TODAY
छत्तीसगढ़  /  
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

रायपुर के केनाल लिंकिंग रोड पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के ऐतिहासिक योगदान को याद किया और 'विकसित छत्तीसगढ़' के निर्माण के लिए उनके आदर्शों को अपनाने की बात कही.

'इतिहास और नायकों को याद रखना ज़रूरी'

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज के निर्माण में ऐतिहासिक चेतना के महत्व पर ज़ोर दिया.

मुख्यमंत्री ने कहा, "जो समाज अपने इतिहास और विरासत को विस्मृत (भूल) कर देता है, उसका भविष्य संकटग्रस्त हो जाता है. इसके विपरीत, जो समाज अपने महापुरुषों को कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद रखता है, उसका भविष्य सदैव उज्ज्वल होता है."

उन्होंने रानी दुर्गावती के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मुगल साम्राज्य की विशाल सेना के सामने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया और अंतिम क्षण तक मातृभूमि व स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए वीरगति प्राप्त की.

'विकास भी, विरासत भी'

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में "विकास भी, विरासत भी" के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है.

उनके मुताबिक़, विकास की यात्रा तभी सार्थक हो सकती है जब देश अपनी सांस्कृतिक विरासत और महान विभूतियों के योगदान को समान रूप से संरक्षित करे. उन्होंने नागरिकों से रानी दुर्गावती के आदर्शों से प्रेरणा लेकर 'विकसित भारत' और 'विकसित छत्तीसगढ़' के संकल्प को दृढ़ता से आगे बढ़ाने का आह्वान किया.

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के 3 बड़े फ़ैसले: गांवों में मिलेगा 125 दिन का रोज़गार, कृषि अवशेषों से बनेगी 'बायोगैस'

छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट बैठक में ग्रामीण विकास, रोज़गार और स्वच्छ ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) से जुड़ी तीन अहम योजनाओं को मंज़ूरी दी गई है.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में हुई इस बैठक में मुख्य रूप से ग्रामीण रोज़गार गारंटी, स्थानीय बाज़ार (हाट) के विकास और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी नीतियों पर मुहर लगाई गई.

सरकारी जानकारी के अनुसार, कैबिनेट द्वारा लिए गए तीन प्रमुख फ़ैसले इस प्रकार हैं:

1. 125 दिनों के रोज़गार की गारंटी (VB-G RAM Ji योजना)

कैबिनेट ने ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी 'वीबी-जी राम जी' योजना के प्रारूप को आधिकारिक तौर पर मंज़ूरी दे दी है.

  • प्रावधान: इस योजना के तहत राज्य के पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का अकुशल (Unskilled) रोज़गार उपलब्ध कराया जाएगा.

  • बजट और कार्य: इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में चार हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस योजना के तहत मुख्य रूप से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे कार्य कराए जाएंगे.

2. 'अटल आजीविका समृद्धि हाट' योजना

ग्रामीण इलाक़ों में स्थानीय रोज़गार और कारोबार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने एक नई 'हाट' योजना शुरू करने का फ़ैसला किया है.

  • योजना का मक़सद: इसके तहत गांवों में हथकरघा, सिलाई-बुनाई, हस्तशिल्प, फ़ूड प्रोसेसिंग, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज और डिजिटल सेवा व विपणन केंद्र स्थापित किए जाएंगे.

  • बाज़ार की व्यवस्था: सरकार के मुताबिक़, इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का एक मज़बूत नेटवर्क तैयार करना है, ताकि ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाज़ार मिल सके.

3. छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026

राज्य में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने 'कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026' को भी मंज़ूरी दी है.

  • क्या है नीति: इस नीति के तहत खेतों में बचने वाले कृषि अवशेष (पराली आदि), मवेशियों के अपशिष्ट और शहरी इलाक़ों के ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीक़े से इस्तेमाल किया जाएगा.

  • फ़ायदे: इस अपशिष्ट को प्रसंस्कृत (Process) कर उसे कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में बदला जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, इस क़दम से बेहतर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण इलाक़ों में निवेश और रोज़गार के नए मौक़े पैदा होंगे.

मास्टरमाइंड युवक और 4 नाबालिगों की 'चोरी की टोली': पुलिस ने ऐसे किया पर्दाफ़ाश

TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक कंपनी से उपकरण और मशीनें चुराने के आरोप में एक युवक को गिरफ़्तार किया है, जबकि वारदात में कथित तौर पर शामिल चार नाबालिगों (विधि के साथ संघर्षरत बालकों) को भी पकड़ा है.

पुलिस के मुताबिक़, पकड़े गए अभियुक्तों की निशानदेही पर क़रीब साढ़े तीन लाख रुपये का चोरी हुआ पूरा सामान बरामद कर लिया गया है.

क्या है पूरा मामला?

उरला थाना पुलिस के अनुसार, यह घटना बेंद्री बोरझरा स्थित 'श्री धनीराम बायो एनर्जी' की है. 21 जून 2026 की सुबह क़रीब 9 बजे जब कंपनी के सुपरवाइज़र गोपाल मिश्रा ड्यूटी पर पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि वहां से बड़ी मात्रा में सामान ग़ायब है.

पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया कि अज्ञात लोग कंपनी में घुसकर 16 लाइटें, 100 फ़ीट केबल, वेल्डिंग मशीन, ग्राइंडर, ब्लोअर, ड्रिल मशीन, 4 बंडल वायर, डक्ट का पूरा सेट और कुछ मशीनों के पार्ट्स चुरा ले गए थे. इसके बाद पुलिस ने उरला थाने में अपराध क्रमांक 280/26 के तहत बीएनएस की धारा 331(4) और 305 के तहत मामला दर्ज़ कर जांच शुरू की.

सीसीटीवी और मुखबिरों से मिला सुराग़

मामला दर्ज़ होने के बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की.

पुलिस का कहना है कि आस-पास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फ़ुटेज खंगालने और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस को एक संदिग्ध के बारे में अहम जानकारी मिली. इसके बाद पुलिस टीम ने नया बेंद्री (उरला) के रहने वाले 20 वर्षीय संदीप निषाद (उर्फ़ गोलू) को हिरासत में लेकर पूछताछ की.

पुलिस के मुताबिक़, पूछताछ में अभियुक्त संदीप ने अपने चार अन्य नाबालिग साथियों के साथ मिलकर चोरी की इस वारदात को अंजाम देने की बात क़बूल कर ली.

बरामदगी और आगे की कार्रवाई

मुख्य अभियुक्त से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने मामले में शामिल चारों नाबालिगों को भी पकड़ लिया है. पुलिस ने इनकी निशानदेही पर चोरी किया गया कुल सामान (अनुमानित क़ीमत 3,50,000 रुपये) ज़ब्त कर लिया है.

वयस्क अभियुक्त संदीप निषाद को आधिकारिक तौर पर गिरफ़्तार कर लिया गया है, जबकि विधि के साथ संघर्षरत चारों बालकों के ख़िलाफ़ किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के प्रावधानों के तहत क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है.

थैले में छिपा रखा था गांजा, पुलिस के जाल में ऐसे फसी 'गुड़िया'

 

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में एक महिला को गिरफ़्तार किया है. पुलिस के मुताबिक़, गोलबाज़ार थाना क्षेत्र में इस महिला के पास से 1 किलो 500 ग्राम गांजा (कैनबिस) बरामद किया गया है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ़्तार की गई महिला आदतन अपराधी है और पहले भी नशे के कारोबार में शामिल रही है. इसे देखते हुए अब उस पर सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

कैसे हुई गिरफ़्तारी?

गोलबाज़ार थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार (22 जून 2026) की शाम पुलिस टीम मोतीबाग चौक के आस-पास गश्त (पेट्रोलिंग) और संदिग्धों की चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान यूनियन क्लब के सामने एक महिला की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिस ने उसे रोककर उसकी तलाशी ली.

आरोप है कि तलाशी के दौरान महिला के पास मौजूद एक सफ़ेद रंग के थैले से 1.5 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ. पुलिस के मुताबिक़, ज़ब्त किए गए गांजे की अनुमानित क़ीमत क़रीब 75 हज़ार रुपये आंकी गई है.

पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और आगे की कार्रवाई

इस मामले में पुलिस ने 38 वर्षीय अफ़साना बी (उर्फ़ गुड़िया) को गिरफ़्तार किया है, जो मोतीबाग चौक इलाक़े की ही रहने वाली है. पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ गोलबाज़ार थाने में 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट' (NDPS Act) की धारा 20(ख) के तहत मामला दर्ज़ किया है.

पुलिस जांच में यह अहम बात सामने आई है कि अफ़साना के ख़िलाफ़ पहले भी आबकारी अधिनियम और एनडीपीएस एक्ट के तहत आपराधिक मामले दर्ज़ हो चुके हैं. उसकी इन आदतन आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस अब उसकी आधिकारिक 'हिस्ट्रीशीट' खोलने की प्रक्रिया शुरू कर रही है.

इसके अलावा, पुलिस का कहना है कि मादक पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए अभियुक्त के ख़िलाफ़ 'पिट-एनडीपीएस' (PIT-NDPS Act) के तहत भी निरोधात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा.

फ़िलहाल पुलिस इस बात की विस्तृत जांच कर रही है कि यह गांजा कहाँ से लाया गया था और इस नेटवर्क (सप्लाई चेन) में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.

  • गिरफ़्तार अभियुक्त: अफ़साना बी उर्फ़ गुड़िया (38 वर्ष), निवासी- मोतीबाग चौक, रायपुर.

  • बरामदगी: 1 किलो 500 ग्राम गांजा (अनुमानित क़ीमत- 75,000 रुपये).

छत्तीसगढ़ के जंगलों का 'हिडन जेम': इंसानी नज़रों से दूर रहने वाली दुर्लभ उड़न गिलहरी कैमरे में क़ैद

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी ज़िले में फैले उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में एक दुर्लभ 'इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल' (भारतीय उड़न गिलहरी) देखी गई है.

वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के मुताबिक़, इस दुर्लभ प्रजाति का नज़र आना इस बात का प्रमाण है कि रिज़र्व का वन पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) और जैव विविधता बेहद स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से समृद्ध है.

गश्त के दौरान कैमरे में क़ैद हुआ जीव

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में जंगल की गश्त (पेट्रोलिंग) के दौरान यह जीव दिखाई दिया. मुख्य रूप से घने जंगलों में पाई जाने वाली यह गिलहरी अमूमन इंसानी नज़रों से दूर ही रहती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि उड़न गिलहरी केवल घने और सुरक्षित जंगलों में ही अपना बसेरा बनाती है, इसलिए इसका मिलना संरक्षण प्रयासों के लिहाज़ से एक अहम संकेत है. उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के उप संचालक (डिप्टी डायरेक्टर) वरुण जैन ने बताया कि इस दुर्लभ जीव का दिखाई देना वन्यजीवों के सुरक्षित आवास को लेकर किए जा रहे संरक्षण कार्यों का सकारात्मक परिणाम है.

उड़न गिलहरी की क्या है ख़ासियत?

  • असल में उड़ती नहीं, 'ग्लाइड' करती है: नाम के विपरीत, यह गिलहरी पक्षियों की तरह असल में उड़ती नहीं है. इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच एक ख़ास त्वचा (झिल्ली) होती है, जो पैराशूट की तरह काम करती है. इसी झिल्ली को फैलाकर यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में फिसलते (Gliding) हुए लंबी दूरी तय करती है.

  • निशाचर (रात में जागने वाला) जीव: यह एक रात्रिचर जीव है. दिन के समय यह आमतौर पर पेड़ों के खोखले हिस्सों में आराम करती है और रात के अंधेरे में ही भोजन की तलाश में बाहर निकलती है.

इको-पर्यटन और रिसर्च को मिलेगी मदद

वन विभाग का मानना है कि इस दुर्लभ प्रजाति के दस्तावेज़ीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) से छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को एक नई पहचान मिलेगी. अधिकारियों को उम्मीद है कि इस खोज से न केवल विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के बीच वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि राज्य में 'इको-पर्यटन' (Eco-tourism) को भी बढ़ावा मिलेगा.


पुलिस को चकमा देकर कार से भागा था 'मास्टरमाइंड', अब महिला साथी के साथ हुआ गिरफ़्तार

TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर में पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक़, पकड़े गए दोनों अभियुक्त पिछले कुछ समय से फ़रार चल रहे थे. इनमें से मुख्य अभियुक्त पर राजधानी के एक अन्य थाने में भी गांजा तस्करी का पुराना मामला दर्ज़ है, जिसमें पुलिस को उसकी तलाश थी.

क्या था 8 मई का मामला?

पुरानी बस्ती थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 8 मई को पुलिस और साइबर यूनिट की संयुक्त टीम ने मुखबिरों की सूचना पर भाठागांव-खुड़मुड़ा रोड पर नाकेबंदी की थी. सूचना थी कि अभनपुर की ओर से आ रही एक सफ़ेद रंग की मारुति स्विफ्ट कार (CG 04 HE 5555) में अवैध रूप से गांजे की तस्करी की जा रही है.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब इस वाहन को रोकने का प्रयास किया गया, तो चालक ने गति बढ़ा दी. बाद में पुलिस बल को देखकर चालक और उसका एक साथी कार को सड़क किनारे छोड़कर अंधेरे का फ़ायदा उठाते हुए मौक़े से फ़रार हो गए.

जब पुलिस ने वाहन की तलाशी ली, तो उसकी डिक्की में रखी बोरियों से 21.173 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ. इसके अलावा पुलिस ने मौक़े से कार, दो मोबाइल फ़ोन, वाहन के बीमा काग़ज़ात, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ भी ज़ब्त किए. इस मामले में पुरानी बस्ती थाने में 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट' (NDPS Act) की धारा 20(बी) के तहत एफ़आईआर दर्ज़ की गई थी.

तकनीकी साक्ष्यों से हुई गिरफ़्तारी

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम इस मामले में फ़रार अभियुक्तों की तलाश कर रही थी. घटनास्थल से मिले दस्तावेज़ों और तकनीकी साक्ष्यों (डिजिटल ट्रेल) की मदद से पुलिस को इन अभियुक्तों की लोकेशन का सुराग़ मिला, जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

गिरफ़्तार अभियुक्तों की पहचान इस प्रकार है:

  1. शिवम सोनी (24 वर्ष): मूल निवासी- मंझनपुर (कौशांबी, उत्तर प्रदेश), वर्तमान निवासी- पुरानी बस्ती, रायपुर.

  2. काजल साहू (28 वर्ष): निवासी- हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, नया रायपुर.

एक अन्य मामले में भी थी मुख्य अभियुक्त की तलाश

पुलिस जांच में यह अहम बात सामने आई है कि गिरफ़्तार किया गया मुख्य अभियुक्त शिवम सोनी, न्यू राजेंद्र नगर थाने में दर्ज़ गांजा तस्करी के एक पुराने मामले (अपराध क्रमांक 56/2026) में भी वांछित था.

यह मामला 7 फ़रवरी 2026 का है, जब न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने लालपुर ओवरब्रिज के पास कार्रवाई करते हुए 20.300 किलोग्राम गांजे के साथ एक कार पकड़ी थी. पुलिस के अनुसार, उस वक़्त भी शिवम सोनी मौक़े से भागने में सफल रहा था, जबकि उसका एक साथी (हिमांशु केशरवानी) गिरफ़्तार कर लिया गया था. अब पुलिस उस पुराने मामले में भी शिवम सोनी की आधिकारिक गिरफ़्तारी की प्रक्रिया पूरी कर रही है.

पुलिस के मुताबिक़, हालिया मामले में ज़ब्त किए गए गांजे और वाहन समेत कुल संपत्ति की अनुमानित क़ीमत क़रीब 12 लाख 79 हज़ार रुपये आंकी गई है.

ग्राहकों की तलाश में बैग में लेकर घूम रहे थे गांजा... पुलिस ने दो तस्करों को किया गिरफ़्तार

कांपा रेलवे फाटक के पास से गिरफ्तार मनीष गुप्ता
TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी रायपुर में पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों में दो अंतरराज्यीय अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है.

पंडरी थाना पुलिस ने इन दोनों अभियुक्तों के पास से कुल 11 किलो 400 ग्राम अवैध गांजा (कैनबिस) बरामद किया है. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि पकड़े गए दोनों अभियुक्त वर्तमान में सिलवासा (दादरा एवं नगर हवेली, गुजरात) में रह रहे थे और वहीं से रायपुर में नशीले पदार्थों की सप्लाई से जुड़े थे.

पहला मामला: कांपा रेलवे फाटक के पास से गिरफ़्तारी

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पंडरी पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली थी कि कांपा रेलवे फाटक के पास एक युवक बैग में गांजा लेकर ग्राहकों की तलाश कर रहा है.

सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौक़े पर पहुंचकर घेराबंदी की और एक संदिग्ध को हिरासत में लिया.

  • अभियुक्त की पहचान: 21 वर्षीय मनीष गुप्ता (मूल निवासी- महराजगंज, उत्तर प्रदेश; वर्तमान निवासी- सामरवाणी, सिलवासा, गुजरात).

  • बरामदगी: पुलिस ने इसके पास से 7 किलो 330 ग्राम गांजा, एक मोबाइल फ़ोन और 120 रुपये नक़द ज़ब्त किए हैं.

  • कार्रवाई: इसके ख़िलाफ़ पंडरी थाने में अपराध क्रमांक 174/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की धारा 20(B) का मामला दर्ज किया गया है. 

दूसरा मामला: कांपा मालधक्का के पास से गिरफ़्तारी

इसी अभियान के तहत पंडरी पुलिस ने एक और कार्रवाई करते हुए कांपा मालधक्का इलाक़े से एक अन्य व्यक्ति को गिरफ़्तार किया. पुलिस के मुताबिक़, यह अभियुक्त भी एक पिट्ठू बैग में गांजा रखकर ग्राहकों को बेचने की फ़िराक़ में था.

  • अभियुक्त की पहचान: 26 वर्षीय वासुदेव जगताप (निवासी- सागरवानी स्कूल फलिया, सिलवासा, गुजरात).

  • बरामदगी: पुलिस ने वासुदेव के पास से 4 किलो 70 ग्राम अवैध गांजा और एक मोबाइल फ़ोन बरामद किया है.

  • कार्रवाई: इसके ख़िलाफ़ भी पंडरी थाने में अपराध क्रमांक 175/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(B) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रायपुर में नशे के अवैध कारोबार के ख़िलाफ़ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. दोनों मामलों में पुलिस विस्तृत विवेचना (जांच) कर रही है ताकि इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके. 

हाथ पर लिखा 'RK सारथी' और कुचला हुआ चेहरा.. पुलिस के सामने एक अनसुलझी हत्या की गुत्थी

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक युवती की कथित तौर पर हत्या का मामला सामने आया है. खमतराई थाना क्षेत्र के डब्लूआरएस कॉलोनी स्थित एक खुले मैदान में सोमवार सुबह युवती का शव बरामद किया गया है.

पुलिस के मुताबिक़, युवती के चेहरे और सिर को किसी भारी वस्तु से कुचला गया है, जिससे यह स्पष्ट तौर पर हत्या का मामला प्रतीत हो रहा है.

सोमवार की सुबह स्थानीय लोगों ने WRS कॉलोनी के एक खुले मैदान में शव पड़े होने की सूचना पुलिस को दी. मौक़े पर पहुंची खमतराई थाना पुलिस ने शव को अपने कब्ज़े में लेकर जांच शुरू की. पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, यह आशंका जताई जा रही है कि इस वारदात को रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात में अंजाम दिया गया है.

घटना की गंभीरता को देखते हुए मौक़े पर क्राइम ब्रांच, डॉग स्क्वायड और फ़ॉरेंसिक साइंस लैब की टीमों को बुलाया गया. पुलिस ने घटनास्थल से तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं और आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं.

हाथ पर बने टैटू से सुराग़ की तलाश

अधिकारियों के मुताबिक़, मृतका की पहचान अब तक नहीं हो सकी है, क्योंकि उसके चेहरे को बुरी तरह से कुचला गया है. हालांकि, पुलिस को युवती के दाहिने हाथ पर 'RK सारथी' नाम का एक टैटू गुदा हुआ मिला है.

पुलिस इस टैटू को मामले का एक अहम सुराग़ मान रही है और इसी के आधार पर मृतका की पहचान (शिनाख़्त) करने की कोशिश की जा रही है. आस-पास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट भी जांची जा रही हैं.

सभी पहलुओं से हो रही है जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस हत्याकांड के पीछे पुरानी रंजिश, आपसी विवाद या अन्य किसी भी संभावित कारण से अभी इनकार नहीं किया जा सकता. पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है.

अधिकारियों के अनुसार, मृतका की पहचान होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे हत्याकांड की तस्वीर साफ़ हो सकेगी.

सिर्फ़ योग नहीं, नशे के ख़िलाफ़ भी गूंजी आवाज़: देखिए कैसे मनाया गया 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

बिलासपुर ।  TODAY छत्तीसगढ़  / केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्यमंत्री तोखन साहू के मुख्य आतिथ्य में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बहतराई स्टेडियम में जिला स्तरीय भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष की थीम योग फॉर हेल्दी एजिंग रही। कार्यक्रम में हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया।  

क्या रही इस बार की थीम?

प्रशासन के अनुसार, इस साल योग दिवस की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Aging) रखी गई थी.

ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रतिनिधि मंजू दीदी के निर्देशन में प्रतिभागियों ने ताड़ासन, पवनमुक्तासन, वृक्षासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम समेत विभिन्न योग और प्राणायाम किए. कार्यक्रम में स्थानीय विधायक सुशांत शुक्ला, ज़िला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर संजय अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह समेत कई अधिकारी और नेता मौजूद रहे.

योग को दिनचर्या बनाने की अपील

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने योग को भारत की प्राचीन धरोहर बताया. उन्होंने कहा कि योग न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है. उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर वे रोज़ाना एक घंटा योग करें, तो बिना किसी ख़र्च के कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं.

वहीं, विधायक सुशांत शुक्ला और ज़िला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने भी कार्यक्रम में अपनी बात रखी. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि योग को महज़ एक दिन का आयोजन न मानकर, इसे अपनी जीवनशैली और दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बनाएं.

अंत में दिलाया गया 'नशा मुक्ति' का संकल्प

इस कार्यक्रम के समापन पर 'नशामुक्त भारत अभियान' के तहत एक विशेष शपथ भी दिलाई गई.

केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने स्टेडियम में मौजूद सभी लोगों को ख़ुद नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प दिलाया. अधिकारियों के मुताबिक़, आर्ट ऑफ़ लिविंग, गायत्री परिवार और पतंजलि योगपीठ जैसी संस्थाओं के सहयोग से ज़िले की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में भी योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं.

कार्यक्रम में विधायक श्री सुशांत शुक्ला, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पांडे, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, , कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल, श्री दीपक सिंह, पूर्व महापौर श्री किशोर राय सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। ब्रह्माकुमारी संस्था की मंजू दीदी ने योगाभ्यास का संचालन किया। प्रतिभागियों ने वृक्षासन, ताड़ासन, पवनमुक्तासन, कपालभाति, त्रिकोणासन भुजंगासन, वज्रासन अनुलोम-विलोम तथा भ्रामरी, ध्यान सहित विभिन्न योग एवं प्राणायाम का अभ्यास किया। 

क्या 'नक्सलवाद' के डर से ही बचे थे अबूझमाड़ के जंगल? शांति आते ही रोज़ कट रहे हज़ारों पेड़


TODAY
छत्तीसगढ़  /  
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग को 31 मार्च 2026 को 'वामपंथी उग्रवाद मुक्त' घोषित किए जाने के बाद से नारायणपुर ज़िले के अबूझमाड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की जा रही है.

राजधानी रायपुर के पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने इसे एक गंभीर पर्यावरणीय संकट बताते हुए राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. सिंघवी का दावा है कि भारी मशीनों (जेसीबी और डोज़र) के इस्तेमाल से हर दिन क़रीब 50 से 70 हेक्टेयर (0.50 से 0.70 वर्ग किलोमीटर) जंगल साफ़ किया जा रहा है.

क्यों काटे जा रहे हैं पेड़?

अपने पत्र में सिंघवी ने आरोप लगाया है कि शांति स्थापित होने के बाद इस इलाक़े में सड़क निर्माण, खेती (विशेषकर पेंदा या झूम खेती) के नाम पर उन लोगों द्वारा जंगल काटे जा रहे हैं, जो इसके वास्तविक पात्र नहीं हैं. इसके अलावा, इमारती लकड़ी की तस्करी के लिए भी बेतहाशा पेड़ काटे जा रहे हैं.

उनका यह भी दावा है कि स्थानीय लोगों के बीच एक अफ़वाह फैलाई गई है कि अगर 31 मार्च 2026 से एक साल के भीतर जंगल काटकर वहां खेती शुरू कर दी जाए, तो उन्हें 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' के तहत उस ज़मीन का पट्टा (मालिकाना हक़) मिल जाएगा.

  • क़ानूनी हक़ीक़त: सिंघवी ने स्पष्ट किया है कि क़ानून के अनुसार, पट्टा केवल तभी मिलता है जब अनुसूचित जनजातियों के लिए 13 दिसंबर 2005 या उससे पहले का कब्ज़ा साबित हो, और अन्य वन निवासियों के लिए पिछले 75 सालों (तीन पीढ़ियों) का निवास साबित हो. आधुनिक सैटेलाइट तकनीक से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि ज़मीन पर कब से कब्ज़ा है. इसलिए, आज जंगल काटकर पट्टा लेने की बात पूरी तरह ग़लत है.

'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' है पूरा अबूझमाड़

ग़ौरतलब है कि 5000-6000 वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ मध्य भारत के सबसे बड़े प्राकृतिक वनों में से एक है, जिसे 'भारत का फेफड़ा' भी कहा जाता है. यह जंगली भैंसा, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे वन्यजीवों का अहम प्राकृतिक आवास है.

सिंघवी का कहना है कि आज तक अबूझमाड़ का विधिवत ज़मीन सर्वेक्षण नहीं हुआ है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-सी ज़मीन राजस्व विभाग की है और कौन-सी वन विभाग की. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यह पूरा इलाका प्रथम दृष्टया 'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' (Deemed Forest) की श्रेणी में आता है. इसके बावजूद, ज़मीन की स्थिति साफ़ होने से पहले ही सड़क और बुनियादी ढांचे के नाम पर पुराने और परिपक्व पेड़ों की कटाई जारी है. 

ओरछा के पास ग्राम कुतुल की फोटो
अधिकारियों का क्या है तर्क?

सिंघवी ने पत्र में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि यदि एक मामले में कार्रवाई की गई, तो ऐसे सैकड़ों मामलों में कार्रवाई करनी पड़ेगी, जिससे इलाक़े में भारी असंतोष पैदा हो सकता है और चल रहा ज़मीन सर्वेक्षण भी रुक सकता है. वहीं, एक वन अधिकारी ने स्वीकार किया है कि इस इलाक़े में वनरक्षक, डिप्टी रेंजर और रेंजर जैसे कर्मचारी तैनात ही नहीं हैं, जिसका तस्कर और अतिक्रमणकारी फ़ायदा उठा रहे हैं.

पर्यावरणविद के अहम सुझाव

नितिन सिंघवी ने अबूझमाड़ को बचाने के लिए मुख्य सचिव को ये तीन अहम सुझाव दिए हैं:

  1. कटाई पर रोक: जब तक अबूझमाड़ का ज़मीन सर्वेक्षण पूरा नहीं हो जाता, तब तक पेड़ों की कटाई वाले सड़क और अन्य निर्माण कार्यों पर तुरंत रोक लगाई जाए.

  2. जागरूकता अभियान: वन अधिकार अधिनियम को लेकर फैली अफ़वाहों को दूर करने के लिए स्थानीय भाषाओं में जागरूकता अभियान चलाया जाए.

  3. DRG की मदद: अवैध कटाई, तस्करी और नए कब्ज़ों को रोकने के लिए 'डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड' (DRG) जवानों की मदद ली जाए.

सिंघवी ने चेतावनी देते हुए कहा, "राज्य सरकार को ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने देनी चाहिए कि जनता यह सोचने लगे कि जब अबूझमाड़ अशांत था, तब उसके जंगल ज़्यादा सुरक्षित थे, और शांति आते ही वे तेज़ी से ख़त्म होने लगे हैं."

योग दिवस पर CM का बड़ा फ़ैसला: अब इस विभाग के पास होगी 'योग' की ज़िम्मेदारी

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 21 जून 2026 को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौक़े पर अंबिकापुर (सरगुजा) के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

इस दौरान मुख्यमंत्री ने हज़ारों नागरिकों, छात्रों और अधिकारियों के साथ योगाभ्यास किया और प्रदेशवासियों को योग दिवस की शुभकामनाएं दीं. अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में योग के विस्तार और जनजातीय युवाओं की शिक्षा को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं.

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन होगा 'योग'

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक अहम नीतिगत फ़ैसले की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने 'योग' विषय को समाज कल्याण विभाग से हटाकर अब 'चिकित्सा शिक्षा विभाग' के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.

मुख्यमंत्री के मुताबिक़, योग आयुष चिकित्सा पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. सरकार के इस फ़ैसले से राज्य में योग शिक्षा, इसके प्रशिक्षण और अनुसंधान (रिसर्च) को नई दिशा मिलेगी. सरकार का लक्ष्य इसे स्कूलों और कॉलेजों के ज़रिए गांव-गांव तक पहुंचाकर एक जनआंदोलन का रूप देना है.

'स्वस्थ आयु के लिए योग' और पीएम मोदी का ज़िक्र

इस वर्ष योग दिवस की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Aging) का ज़िक्र करते हुए सीएम साय ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों— जैसे तनाव, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे को रोकने में योग बेहद कारगर है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग को मिली पहचान का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. सीएम ने कहा कि साल 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के प्रस्ताव को मिले व्यापक समर्थन से यह साबित हो गया है कि पूरी दुनिया ने भारतीय ज्ञान परंपरा और योग की अहमियत को स्वीकार कर लिया है.

आदिवासी छात्रों की UPSC में सफलता का ज़िक्र

योग दिवस के मंच से मुख्यमंत्री ने जनजातीय (आदिवासी) युवाओं की शिक्षा को लेकर राज्य सरकार के प्रयासों पर भी बात की.

  • सीटों में इज़ाफ़ा: उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित 'ट्राइबल यूथ हॉस्टल' में जनजातीय छात्रों के लिए सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है.

  • UPSC प्रीलिम्स में सफलता: मुख्यमंत्री ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए बताया कि राज्य सरकार के इन प्रयासों के सकारात्मक नतीजे आने लगे हैं और हाल ही में राज्य के जनजातीय वर्ग के 13 युवाओं ने यूपीएससी (UPSC) की प्रारंभिक परीक्षा पास की है, जो पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है.

इस मौक़े पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भी श्रद्धांजलि दी और योग के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को याद किया. 

योग को जीवनशैली में शामिल करें - राज्यपाल 

राज्यपाल रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित योग शिविर में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संदेश का वाचन किया एवं सामूहिक योगाभ्यास में भाग लिया।  

अपने संबोधन में राज्यपाल ने बारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी और कहा कि यह हर्ष का विषय है कि पूरा छत्तीसगढ़ इस ऐतिहासिक अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रहा है। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध रहने की कामना की। 

श्री डेका ने प्रदेशवासियों से कहा कि योग को जीवनशैली में शामिल करें, प्रतिदिन योगाभ्यास की आदत बनाए और बच्चों को भी इसकी आदत डाले जिससे उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और वे  भविष्य में देश के अच्छे नागरिक बनेंगे। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मन और भावनाओं को सुदृढ़ बनाकर व्यक्ति के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

कोटमहर गार्डन में उत्साहपूर्वक मनाया गया 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 

नारायणपुर जिले के कोटमहर गार्डन में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए सामूहिक योगाभ्यास किया तथा जिलेवासियों को स्वस्थ जीवन के लिए नियमित योग अपनाने का संदेश दिया।

मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं अमूल्य धरोहर है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज विश्व के अनेक देशों में लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। योग तनाव को कम करने, कार्यक्षमता बढ़ाने और सकारात्मक जीवनशैली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

​जब फाइलें नहीं, बल्कि जनता के द्वार खुद चलकर पहुंचा प्रशासन

TODAY छत्तीसगढ़  /  प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनके वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करने यानी 'फौती नामांतरण' (Mutation) को एक बेहद जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। ग्रामीण अंचलों में जानकारी के अभाव, बिचौलियों के जाल और लंबी कागजी औपचारिकता के कारण ये मामले दशकों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी प्रभावित होता है।

​इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक ऐसा 'सक्रिय मॉडल' (Proactive Model) प्रस्तुत किया है, जो राज्य के अन्य  जिलों के लिए एक मार्गदर्शक केस स्टडी बन सकता है।

​'सक्रिय अभियान': एक क्रांतिकारी प्रशासनिक

आमतौर पर राजस्व विभाग में यह परंपरा रही है कि जब पीड़ित परिवार आवेदन लेकर दफ्तर पहुंचता है, तब प्रक्रिया शुरू होती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस 'रिएक्टिव' (प्रतिक्रियात्मक) रवैये को बदलकर 'प्रोएक्टिव' (सक्रिय) रुख अपनाया। प्रशासन ने तय किया कि वह खुद चलकर जनता के दरवाजे तक जाएगा।

इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर 12 जून 2026 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर, लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर भूमि अभिलेखों (Land Records) को अपडेट कर दिया गया है।

प्रशासनिक तंत्र की रीढ़: जब 'त्रिमूर्ति' ने संभाला मोर्

इस 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' की सफलता केवल फाइलों या डिजिटल पोर्टल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असली श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली प्रशासनिक कड़ियों (ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी) के उस अनूठे तालमेल को जाता है, जिसने सेवा की पूरी परिभाषा ही बदल दी।

इस पूरे अभियान को एक सुव्यवस्थित पिरामिड की तरह संचालित किया गया। इसके शीर्ष पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार मार्गदर्शक की भूमिका में थे, जो हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहे थे और विधिक प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर अमली जामा पहनाकर अंतिम आदेश पारित कर रहे थे। इस शीर्ष नेतृत्व के ठीक नीचे, मैदानी अमले की 'त्रिमूर्ति' ने इस अभियान को संभाला।

डेटा का प्राथमिक स्रोत ग्राम सचिव ने अपने 'जन्म एवं मृत्यु पंजीयक' के दायित्व का निर्वहन करते हुए पिछले 04 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की एक अचूक सूची (Line List) तैयार की। जिन मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लंबित थे, वहां उन्होंने परिवारों को ये प्रमाणपत्र सुलभ कराए और जहां देरी हुई थी, वहां तहसीलदार से 'विलम्ब पंजीयन' की विशेष अनुमति दिलाकर नए प्रमाण पत्र जारी करवाए।

तकनीकी और विधिक सेतु के रूप में सचिव से सूची प्राप्त होते ही पटवारी ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल 'भुइयां' पर उसका मिलान किया। इससे तत्काल 8,651 ऐसे मृत व्यक्तियों की पहचान हुई जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी। इसके बाद, पटवारी ने स्वयं आगे बढ़कर वारिसों से संपर्क कर आवेदन लिए तथा उनके विधिक उत्तराधिकार को तय करने वाला 'वंश वृक्ष' तैयार किया।

पारदर्शिता की जमीनी कसावट के लिए ग्रामीण भारत की सबसे पारंपरिक कड़ी कोटवार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक सत्यापन) का जिम्मा संभाला। उन्होंने गांव-गांव जाकर मृतकों की सूची और पटवारी द्वारा तैयार किए गए वारिसों के 'वंश वृक्ष' का भौतिक सत्यापन किया। उनके इस जमीनी ज्ञान के कारण किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या अपात्र दावों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई।

​बस्तर की तहसीलों में सुशासन का 'सेचुरेशन'

जिले की सभी 10 तहसीलों के कुल 639 गांवों में से 611 गांवों को इस मुहिम से जोड़कर पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया गया। मैदानी अमले द्वारा चिन्हित किए गए कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों में ऑनलाइन नामांतरण पंजी (MD सीरिज) के तहत विधिक प्रक्रिया इश्तेहार प्रकाशन व दावा-आपत्ति निराकरण पूर्ण कर आदेश पारित किए जा चुके हैं। अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित बचे हैं।

बस्तर जिले के इस विशेष अभियान के तहत सभी 10 तहसीलों में बेहतरीन समन्वय और तत्परता देखने को मिली है। आंकड़ों के लिहाज से तोकापाल तहसील इस पूरी मुहिम में सबसे आगे रही, जहां जिले में सर्वाधिक 1,553 मामले चिन्हित किए गए और रिकॉर्ड 1,454 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। वहीं बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 को पूर्ण कर शत-प्रतिशत 'सेचुरेशन' (सौ फीसदी लक्ष्य) के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है, जहां अब केवल 11 मामले ही शेष हैं।

 प्रशासनिक दक्षता के मामले में बस्तर तहसील ने भी 1,000 से अधिक मामलों की दहलीज को पार करते हुए अपने 1,087 प्रकरणों में से 1,019 का निराकरण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जिला मुख्यालय से जुड़ी जगदलपुर तहसील का प्रदर्शन बेहद अनुकरणीय रहा, जिसने अपने 1,061 मामलों में से 1,057 को निपटा लिया है और वहां अब महज 4 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह, भानपुरी तहसील ने मैदानी स्तर पर तीव्र प्रगति दिखाते हुए 1,018 संवेदनशील मामलों में से 959 का कार्य पूर्ण कर लिया है।

भौगोलिक और सामाजिक रूप से भिन्न अन्य क्षेत्रों में भी यह रफ्तार कायम रही। लोहण्डीगुड़ा तहसील अपने 805 मामलों में से 799 का निपटारा कर पूर्ण संतुष्टि की दहलीज पर खड़ी है, जहां सिर्फ 6 मामले बाकी हैं। करपावण्ड (565 में से 504 मामले) और नानगुर (544 में से 518 मामले) तहसीलों ने तय समय-सीमा के भीतर विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेखों को अपडेट करने में सफलता पाई है।

अंतिम छोर पर स्थित दुर्गम और अंदरूनी इलाकों से घिरे दरभा अंचल ने अपनी चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रयास किया और 484 आवश्यक मामलों में से 452 का निपटारा सुनिश्चित किया। वहीं, सीमित संसाधनों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करते हुए बास्तानार तहसील ने भी अपने 381 चिन्हित मामलों में से 337 भू-स्वामियों के रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त कर दिए हैं।

 बस्तर का यह प्रयोग केवल जमीन के कागजात दुरुस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। समय-सीमा के भीतर आदेश पारित होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तुरंत पात्र हो गए हैं।

​ इस अभियान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक नीतियां संवेदनशील और परिणाम-मूलक (Result-Oriented) हों, तो सबसे कठिन सुधार भी संभव हैं। प्रथम चरण 04 वर्ष के लंबित मामले की इस अभूर्वपूर्व सफलता के बाद, बस्तर जिला प्रशासन अब इसके आगामी चरण की ओर कदम बढ़ा चुका है, जिसके तहत पिछले 10 वर्षों के लंबित मामलों का शत-प्रतिशत सेचुरेशन करने का लक्ष्य रखा गया है।

 बस्तर का यह 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' राज्य के उन सभी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक प्रकाश स्तंभ है, जहां राजस्व सुधारों को अमली जामा पहनाना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पति फ़ैक्ट्री में कर रहा था काम, पीछे से घर पहुंचा पड़ोसी... दुष्कर्म और ब्लैकमेल

TODAY छत्तीसगढ़  /   छत्तीसगढ़ के रायपुर ज़िले में पुलिस ने एक 23 वर्षीय युवक को अपनी पड़ोसन के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने, ब्लैकमेल करने और चाकू से हमला करने के आरोप में गिरफ़्तार किया है.

यह मामला अभनपुर थाना क्षेत्र के कोलर गांव का है. पुलिस के मुताबिक़, गिरफ़्तार किए गए शख़्स की पहचान भास्कर जना (23) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से ओडिशा के सोनापुर ज़िले का रहने वाला है.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, आरोपी और पीड़िता का परिवार कोलर गांव में एक ही मकान के अगल-बगल के कमरों में किराये पर रहते हैं. आरोपी, उसकी पत्नी और पीड़िता का पति—तीनों एक ही बिस्किट फ़ैक्ट्री में काम करते हैं.

शिकायत के मुताबिक़, 18 जून 2026 को सभी लोग हमेशा की तरह काम पर गए थे. आरोप है कि दोपहर के वक़्त भास्कर जना फ़ैक्ट्री से काम छोड़कर घर लौट आया. पुलिस का कहना है कि महिला को घर में अकेला पाकर आरोपी ज़बरदस्ती कमरे में घुस गया और चाकू की नोक पर डरा-धमकाकर उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया.

आरोप है कि इस दौरान उसने महिला की तस्वीरें और वीडियो भी बना लिए. आरोपी ने धमकी दी कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया तो वह उसे और उसके पति को जान से मार देगा.

हमला और गिरफ़्तारी

घटना के बाद किसी तरह महिला ने अपने पति को फ़ोन कर पूरी जानकारी दी. इसके बाद महिला का पति, आरोपी की पत्नी और मकान मालकिन फ़ैक्ट्री से सीधे घर पहुंचे.

पुलिस के मुताबिक़, जब इन लोगों ने आरोपी से घटना के बारे में पूछा, तो वह ग़ुस्से में आकर चाकू लेकर महिला के पति और मकान मालकिन को मारने दौड़ा. अपने बचाव में मकान मालकिन ने पास पड़े एक डंडे से आरोपी के सिर पर वार किया. इसके बाद आस-पड़ोस के लोगों की मदद से आरोपी को पकड़ लिया गया और अभनपुर पुलिस को सूचना दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस मौक़े पर पहुंची और सबसे पहले घायल आरोपी का प्राथमिक उपचार कराया.

पीड़िता की शिकायत के आधार पर अभनपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 (बलात्कार), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 333 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने आरोपी भास्कर जना को गिरफ़्तार कर लिया है और मामले में आगे की क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है.

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान में लगेंगे 2.50 करोड़ पौधे, क्या है विभाग का ब्लू-प्रिंट

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने बड़े पैमाने पर पौधरोपण की तैयारी की है. केंद्र सरकार के "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत राज्य में इस मॉनसून (2026) क़रीब 2.50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है.

वन मंत्री केदार कश्यप और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में विभाग ने दावा किया है कि वे इस बार भी केंद्र द्वारा दिए गए लक्ष्य को आसानी से पार कर लेंगे. इस महाअभियान की औपचारिक शुरुआत 5 जून 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस) को हो चुकी है और इसे सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

2026 के लिए क्या है विभाग की रणनीति?

अधिकारियों के मुताबिक़, हालांकि भारत सरकार ने राज्य को 2.50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है, लेकिन वन विभाग ने कुल 2 करोड़ 59 लाख 23 हज़ार पौधों के रोपण और वितरण का ख़ाका तैयार किया है.

इस योजना को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:

  • विभागीय वनरोपण: मनरेगा, कैम्पा और अन्य विभागीय योजनाओं के तहत 6592 हेक्टेयर और 22.90 किलोमीटर क्षेत्र में 64.31 लाख पौधे लगाए जाएंगे.

  • आम जनता को वितरण: राज्य में हरियाली बढ़ाने के लिए आम नागरिकों और संस्थाओं को 74.45 लाख पौधे बांटे जाएंगे.

  • 'किसान वृक्ष मित्र योजना': किसानों की निजी ज़मीन (17,670 एकड़) पर वानिकी को बढ़ावा देते हुए 1.20 करोड़ से ज़्यादा पौधे लगाए जाएंगे.

पिछले वर्षों का रिकॉर्ड: लक्ष्य और उपलब्धि

वन विभाग का कहना है कि पिछले दो सालों में भी राज्य ने पौधरोपण के मामले में केंद्र के लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया था. इन आंकड़ों को 'मेरी लाइफ़' (Meri LiFE) पोर्टल पर भी दर्ज किया गया है.

आइए इन आंकड़ों पर एक नज़र डालते हैं:

वर्षकेंद्र सरकार का लक्ष्यछत्तीसगढ़ वन विभाग की उपलब्धि / तैयारी
20242.75 करोड़3.50 करोड़ (लक्ष्य से अधिक पौधे रोपे और बांटे गए)
20251.65 करोड़3.55 करोड़ (लक्ष्य से दोगुने से भी अधिक का रिकॉर्ड)
20262.50 करोड़2.59 करोड़ (इस वर्ष की प्रस्तावित कार्ययोजना)

आर्थिक और पर्यावरणीय फ़ायदे

वन विभाग के अनुसार, इस अभियान का मक़सद महज़ पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम हासिल करना है:

  • मिट्टी का कटाव रुकेगा: हसदेव, महानदी, खारून और शिवनाथ जैसी नदियों के किनारे पौधारोपण से मृदा अपरदन (Soil Erosion) पर लगाम लगेगी.

  • किसानों को आर्थिक लाभ: चंदन, सागौन और नीलगिरी जैसी क़ीमती लकड़ियों के पेड़ लगाने से भविष्य में किसानों को सीधा मुनाफ़ा होगा.

  • प्रदूषण में कमी: सड़कों के किनारे फलदार और छायादार पेड़ लगाने से राहगीरों को राहत मिलेगी और प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट आएगी.

विभाग का लक्ष्य है कि सितंबर 2026 तक सारा काम पूरा कर लिया जाए और इसका डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए ताकि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की भागीदारी स्पष्ट हो सके. 

शहर में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस अलर्ट, संदिग्ध ठिकानों पर दबिश

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के रायपुर में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने सख़्त रुख़ अपनाया है. इसी कड़ी में तेलीबांधा थाना पुलिस ने एक विशेष चेकिंग अभियान के दौरान 13 लोगों के ख़िलाफ़ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़, गुरुवार (18 जून) को थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई संदिग्ध स्थानों और इलाक़ों में यह औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया था.

इस चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने 13 संदिग्ध व्यक्तियों (अनावेदकों) को पकड़ा. पुलिस का कहना है कि इन सभी के ख़िलाफ़ नए आपराधिक क़ानून 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (बीएनएसएस - BNSS) की धारा 170/126 और 135 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है. यह धाराएं मुख्य रूप से शांति भंग होने की आशंका और निवारक (प्रतिबंधात्मक) कार्रवाई से जुड़ी हैं.

पुलिस के अनुसार, काग़ज़ी कार्रवाई पूरी करने के बाद इन सभी 13 लोगों को आगे की क़ानूनी प्रक्रिया के लिए विशेष कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और सहायक पुलिस आयुक्त (सिविल लाइंस) की अदालत में पेश किया गया है.


स्कूली छात्रों के बीच हिंसक विवाद, चाकू लगने से एक छात्र की मौत

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के रायपुर ज़िले में दो स्कूली छात्रों के बीच हुए आपसी विवाद में एक छात्र की मौत का मामला सामने आया है. यह घटना तिल्दा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सासाहोली गांव की है. पुलिस के अनुसार, दोनों छात्रों के बीच स्कूल में किसी बात को लेकर मामूली कहासुनी हुई थी, जो बाद में हिंसक झड़प में तब्दील हो गई.

कैसे हुई घटना?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, विवाद के दौरान एक छात्र ने कथित तौर पर अपनी जेब से चाकू निकालकर दूसरे छात्र पर हमला कर दिया. इस हमले में दूसरा छात्र घायल हो गया.

बताया जा रहा है कि इसके बाद घायल छात्र ने अपना बचाव करते हुए पहले छात्र के हाथ से चाकू छीन लिया और उसी चाकू से उस पर जवाबी हमला कर दिया. इस हमले में पहला छात्र गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गया.

गंभीर हालत में घायल छात्र को तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

पुलिस की कार्रवाई

इस घटना में दूसरे छात्र (आरोपी) को भी चोटें आई हैं और फ़िलहाल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है. घटना की सूचना मिलने के बाद तिल्दा थाना पुलिस मौक़े पर पहुँची. पुलिस ने मर्ग क़ायम कर लिया है और इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है. 

महाराष्ट्र को भी भाया छत्तीसगढ़ का 'धान ख़रीदी मॉडल', कृषि योजनाओं पर चर्चा

TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की तर्ज़ पर अब महाराष्ट्र में भी धान ख़रीदी की व्यवस्था और किसानों से जुड़ी नीतियों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

शुक्रवार को महाराष्ट्र के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाक़ात की और राज्य के 'धान ख़रीदी मॉडल' के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी योजनाओं का अध्ययन किया.

मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक के दौरान महाराष्ट्र के विधायकों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे महाराष्ट्र के चार ज़िलों में धान की बड़े पैमाने पर खेती होती है. प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रशासनिक प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि वे इस मॉडल का अध्ययन कर महाराष्ट्र के धान उत्पादक इलाक़ों में भी ऐसे ही प्रयास आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.

मुलाक़ात के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महाराष्ट्र के विधायकों को राज्य की धान ख़रीदी व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की ख़रीदी की जा रही है. इस साल खरीफ़ सीज़न में राज्य सरकार ने लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान ख़रीदा है, जिसे देश के सबसे बड़े धान उपार्जन अभियानों में से एक बताया जा रहा है.

किसानों की सहूलियत के लिए पूरे प्रदेश में क़रीब 2700 धान ख़रीदी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री के मुताबिक़, धान की तौल, परिवहन से लेकर किसानों के बैंक खातों में भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को तकनीक-आधारित और पारदर्शी बनाया गया है.

'कृषक उन्नति योजना' और आय बढ़ाने पर ज़ोर

बैठक में 'कृषक उन्नति योजना' सहित राज्य सरकार की अन्य कृषि योजनाओं पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने कहा कि धान ख़रीदी के साथ-साथ राज्य में फसल विविधीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन), पशुपालन और मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाई जा सके.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्यों के बीच इस तरह के सफल अनुभवों को साझा करने से पूरे देश के कृषि क्षेत्र को मज़बूती मिलती है. इस मौक़े पर उन्होंने महाराष्ट्र से आए विधायकों को स्मृति-चिह्न के रूप में 'बस्तर आर्ट' भेंट किया.

इस बैठक में महाराष्ट्र के विधायक डॉ. परिणय फुके, विनोद अग्रवाल, राजू कारेमोरे और संजय पुराम के अलावा छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, मार्कफेड अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी और मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

योग आयोग के नए अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने मुख्यमंत्री साय से की शिष्टाचार भेंट

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से शिष्टाचार मुलाक़ात की है. यह मुलाक़ात शुक्रवार (19 जून) को रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई.

इस मौक़े पर मुख्यमंत्री साय ने संजय अग्रवाल को उनकी नई ज़िम्मेदारी के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं. बैठक के दौरान राज्य में योग को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने की रूपरेखा पर चर्चा की गई.

'जन-जन तक पहुंचे योग'

बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का अहम हिस्सा है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी माध्यम है.

उन्होंने योग आयोग के नए अध्यक्ष से आह्वान किया कि प्रदेश में योग को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए. मुख्यमंत्री ने ख़ास तौर पर युवाओं, महिलाओं और बुज़ुर्गों को योग से जोड़ने पर ज़ोर दिया.

अधिकारियों के मुताबिक़, मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि संजय अग्रवाल के नेतृत्व में प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार, लोगों में जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रयासों में तेज़ी आएगी.

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