“ट्रांजैक्शन नहीं, ट्रांसफॉर्मेशन बने जीवन का लक्ष्य” : राज्यपाल
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / राज्यपाल रमेन डेका ने आज अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में “ट्रांसफॉर्मिंग यूनिवर्सिटीज फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट” विषय पर आयोजित कुलपतियों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन में देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुल 42 कुलपतियों और पूर्व कुलपतियों ने भाग लिया। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि अपने संपूर्ण जीवन में कोई एक ऐसा कार्य करें कि जिसमें केवल ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि ट्रांसफॉर्मेशन का भाव हो। इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका कन्हार का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के कुलपति आचार्य एडीएन वाजपेयी, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री गिरीश चंद्र त्रिपाठी, कुल सचिव श्री तारणीश गौतम सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद थे।
राज्यपाल श्री डेका ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था अत्यंत समृद्ध और मूल्यनिष्ठ थी, किंतु औपनिवेशिक काल में लॉर्ड मैकाले की नीतियों के कारण इसकी दिशा परिवर्तित हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय मूल्यों और समग्र विकास की अवधारणा को पुनर्स्थापित करने का सशक्त प्रयास है। इसकी विशेषताओं को समाज तक पहुँचाना तथा प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं रहे बल्कि विचार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के केंद्र हैं। कुलपति शैक्षणिक नेतृत्व के संवाहक हैं, जिनके निर्णय आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं। उन्होंने शैक्षणिक सुशासन, गुणवत्ता आश्वासन, शोध एवं नवाचार तथा डिजिटल परिवर्तन पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि समग्र विकास की दिशा में स्कूल कॉलेजों में ड्रॉपआउट की समस्या सबसे बड़ी चुनौती है। जब तक विद्यार्थी शिक्षा से निरंतर जुड़े नहीं रहेंगे, तब तक किसी भी नीति का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता। डिजिटल युग का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ऑनलाइन संसाधन और डेटा विश्लेषण उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण उपकरण हैं। इनका उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए, साथ ही मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने शोध और नवाचार को विश्वविद्यालयों की आत्मा बताते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान से ही आत्मनिर्भर भारत की नींव सशक्त होगी। विश्वविद्यालयों को उद्योग, समाज और शासन के साथ समन्वय स्थापित कर नवाचार की संस्कृति विकसित करनी चाहिए।
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण, दीक्षांत समारोहों के आयोजन तथा समयबद्ध परीक्षा परिणामों में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। वित्तीय सुदृढ़ीकरण एवं अधोसंरचना विकास योजनाओं पर कार्य जारी है। कुलपति ने विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सभी के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल ने आयोजन के लिए विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर संभागीय कमिश्नर श्री सुनील जैन, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे, सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल एवं शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
उप मुख्यमंत्री से मिलीं अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मैरी कॉम, राज्य में खेल सुविधाओं के विकास पर हुई चर्चा
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ /उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव से छह बार की बॉक्सिंग विश्व चैंपियन एवं ओलंपिक पदक विजेता, प्रसिद्ध मुक्केबाज एम.सी. मैरी कॉम ने सौजन्य मुलाकात की। श्री साव ने अपने नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में मुलाकात के दौरान उन्हें राज्य में खेलों के विकास और खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मैरी कॉम जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलंपिक-2025 के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के शुभारंभ समारोह में शामिल होने छत्तीसगढ़ आई थीं। उन्होंने 11 दिसम्बर को इसमें शामिल होकर खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अभावों और मुश्किलों के बीच अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प से विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत का नाम रोशन करने वाली मैरी कॉम की लंबी खेल यात्रा की प्रशंसा की। श्री साव ने कहा कि मैरी कॉम देश का गौरव और प्रेरणा हैं। उनकी उपस्थिति से बस्तर के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने और मेहनत करने की प्रेरणा जरूर मिली होगी। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में शामिल होने छत्तीसगढ़ आने के लिए मैरी कॉम को धन्यवाद दिया।
मैरी कॉम ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अपने अनुभव साझा करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री साव से छत्तीसगढ़ के युवाओं के खेल में सुधार के लिए हरसंभव मदद की बात कही। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि दूरस्थ गांवों से पहुंचे युवाओं को देख उनकी पुरानी यादें ताजा हो गईं। बस्तर ओलंपिक वहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा मंच है। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेलों और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए अच्छा काम कर रही है। आने वाले समय में यहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मेडल जरूर जीतेंगे। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए जाने पर राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
पीएमश्री योजना से बदली शिक्षा की तस्वीर, जिले के 13 विद्यालय बने आधुनिक आदर्श शिक्षण संस्थान
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ /जिले में पीएमश्री (प्रधानमंत्री स्कूल फ़ॉर राइजिंग इंडिया) योजना के अंतर्गत शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार देखा जा रहा है। वर्तमान में जिले में 08 पीएमश्री शासकीय प्राथमिक विद्यालय एवं 05 पीएमश्री सेजेस शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, इस प्रकार कुल 13 पीएमश्री विद्यालय सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों को आदर्श शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करने का कार्य तीव्र गति से जारी है।
अधोसंरचना, स्मार्ट क्लास, खेल-योग, व्यावसायिक शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं का हुआ व्यापक विस्तार
Bilaspur: स्वस्थ मृदा से बनेगा स्वस्थ शहर, कृषि विज्ञान केंद्र में विशेषज्ञों की राय
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर में ‘स्वस्थ मृदा, स्वस्थ शहर’ थीम पर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शिल्पा कौशिक ने की। उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक खेती के महत्व पर विशेष जोर दिया।
Chhattisgarh: 19वीं राष्ट्रीय जम्बूरी में बिलासपुर के स्काउट्स गाइड्स का उत्कृष्ट प्रदर्शन
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जम्बूरी तथा डायमंड जुबली ग्रैंड फिनाले में बिलासपुर के स्काउट्स, गाइड्स, रोवर्स, रेंजर्स ने भागीदारी की। 23 से 29 नवम्बर तक लखनऊ, (उ. प्र.) में 19वीं राष्ट्रीय डायमंड जुबली जम्बूरी का भव्य आयोजन वृंदावन परिसर में हुआ। जिसमें देश- विदेश से 35 हजार से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुए। स्कूल शिक्षा मंत्री माननीय गजेन्द्र यादव ,भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राज्य मुख्य आयुक्त इंद्रजीत सिंह खालसा व राज्य सचिव जितेन्द्र कुमार साहू के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ से 363 के दल ने जम्बूरी में भागीदारी की और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
“कभी यह मत सोचिए कि आप पीछे रह गए हैं, यदि आप प्रयास करना नहीं छोड़ते, तो आप हमेशा पहले स्थान पर हो सकते हैं’’- पूर्व राष्ट्रपति
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन आज पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के मुख्य आतिथ्य में गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल श्री रमेन डेका ने की। अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विशिष्ट अतिथि उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा शामिल हुए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. दिवाकर नाथ वाजपेयी उपस्थित रहे। समारोह में 64 शोद्यार्थियों को शोध उपाधि, 92 गोल्ड मेडल एवं 36950 स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि दी गई।
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने स्नातक छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और उन्हें शिक्षा, आत्मविश्वास, संकल्प और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के महत्व पर प्रेरित किया। पूर्व राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा कि यह दिन छात्रों के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने विद्यार्थियों, विशेषकर पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे माता-पिता का त्याग, परिवार का सहयोग और गुरुओं का अमूल्य मार्गदर्शन भी निहित है। यह हर विद्यार्थी के लिए एक सुनहरा यादगार पल है, जिसे वे जीवनभर याद रखेंगे।
उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों में बेटियाँ शिक्षा के क्षेत्र में कई बार बेटों से आगे निकल रही हैं और इस विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेताओं में भी बेटियों की संख्या उल्लेखनीय है। पूर्व राष्ट्रपति ने युवा पीढ़ी की ऊर्जा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है और वर्तमान युवा इसका ऐतिहासिक साक्षी और भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से स्नातक होना शिक्षा की पूर्णता नहीं है, बल्कि इक्कीसवीं सदी में सफलता के लिए निरंतर सीखना, कौशल निखारना और आत्मविकास अनिवार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्म-प्रबंधन, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और प्रभावी संचार जैसी क्षमताओं के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही सफलता मिलने पर आत्ममंथन और विनम्रता बनाए रखने की सीख दी। उन्होंने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पालन-पोषण के दौरान कठिनाइयाँ और सीमित संसाधन रहे, लेकिन निरंतर प्रयास और ईश्वर की कृपा से वे उच्चतम पदों तक पहुँचे। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि-“कभी यह मत सोचिए कि आप पीछे रह गए हैं। यदि आप प्रयास करना नहीं छोड़ते, तो आप हमेशा पहले स्थान पर हो सकते हैं।” उन्होंने छात्रों से अपने सपनों को साकार करने के लिए परिश्रम करने, भारतीय संस्कृति, मूल्यों और जड़ों से जुड़े रहने और योग व विज्ञान जैसी भारतीय विरासत को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लेने के महत्व को भी रेखांकित किया। समापन में उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी उपाधि, शिक्षा और संस्कारों का उपयोग करते हुए अपने माता-पिता, गुरुओं, विश्वविद्यालय और देश का नाम रौशन करना चाहिए। उन्होंने सभी स्नातकों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं और उन्हें प्रेरित किया कि वे हमेशा आगे बढ़ते रहें।
संयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़े युवा : राज्यपाल
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में अनेक चुनौतियाँ आती हैं, जिनमें कभी-कभी हम गिरते भी हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हर बार स्वयं को संभालकर फिर से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में गिरावट से भयभीत न हों और हमेशा उठने का साहस रखें। राज्यपाल ने अनुशासन को जीवन में सफलता की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि जीवन एक सुंदर यात्रा है, और इसे उद्देश्यपूर्ण, सकारात्मक और सार्थक ढंग से जीना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के पास असीम अवसर और व्यापक संभावनाएँ हैं और शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके साथ ही शिक्षक और विद्यार्थी के बीच मजबूत, विश्वासपूर्ण और प्रेरक संबंध बनाना अत्यंत आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज तनाव एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इसलिए योग, ध्यान और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी आग्रह किया कि वे जीवन में ऐसा कार्य चुनें जिसमें तनाव कम हो, पारदर्शिता हो और जिससे स्वयं, समाज और राष्ट्र का सकारात्मक परिवर्तन संभव हो। राज्यपाल ने कहा कि ऐसा कार्य ही सच्चा संतोष, सम्मान और वास्तविक सफलता प्रदान करता है। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सभी विद्यार्थियों से कहा कि वे संयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ें। उन्होंने सभी स्नातकों के उज्ज्वल भविष्य और सफलता की कामना की। उन्होंने सबका अलग-अलग आईक्यू होने की बात कहते हुए सबको अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करने की अपील की।
राज्य की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधानों पर ध्यान दें विश्वविद्यालय : मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और उन्हें जीवन में नैतिकता, समर्पण और समाजोपयोगी योगदान की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों, संकल्पों और संघर्षों का उत्सव है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुविषयक अध्ययन, कौशल आधारित शिक्षण, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और आधुनिक पाठ्यचर्या जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने की सराहना की, जिससे छात्र वैश्विक अवसरों का लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विवि में डिजिटलईजेशन के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा फॉर्म, ट्रांसक्रिप्ट और डिग्री प्रमाणपत्र जैसी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। इस नई प्रणाली से छात्रों को सरल, पारदर्शी और त्वरित सेवाएँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएम उषा के तहत वित्तीय सहायता नए प्रयोगशालाओं, स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक अकादमिक अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इससे विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार को सुनिश्चित कर सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अनुसंधान के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि विश्वविद्यालयों को राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक संरचना, भाषासाहित्य और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि यह उपाधि उनके जीवन में नए अध्याय की शुरुआत है और इसे समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए उपयोग करना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर परिश्रम किया। मुख्यमंत्री ने सभी दीक्षार्थियों को उज्ज्वल भविष्य और सफलता की शुभकामनाएँ दी। दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को ज्ञान, अनुशासन और प्रेरणा का एक उत्सव प्रदान किया और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार की प्रतिबद्धता को उजागर किया।
उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने 25 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और यह सभी नागरिकों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के मार्गदर्शन में बने इस प्रदेश ने शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालयों के सतत मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्रों के परिश्रम, संघर्ष और लगन का सम्मान है। उन्होंने मेधावी छात्रों को विशेष बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कई सुधारात्मक पहलें की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है तथा 20 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिससे शैक्षणिक अधोसंरचना और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्राप्त उपाधि केवल प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। अतिथियों ने विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका कन्हार का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. अरूण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने दिया।
जंगल की राह पर शिक्षा : बिंदावल की बच्चियाँ और अधूरी सरकारी उम्मीदें
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व केवल वन्य जैव-विविधता का केंद्र ही नहीं, बल्कि वहाँ बसे आश्रित ग्रामों की सामाजिक हकीकत का दर्पण भी है। इसी क्षेत्र का एक छोटा-सा गाँव बिंदावल, आज भी शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष कर रहा है। यहाँ रहने वाले बच्चे शिक्षा के लिए हर दिन 8 किलोमीटर पैदल चलते हैं। यह दूरी केवल किलोमीटर में नहीं मापी जा सकती, यह उन नीतियों की दूरी है जो आज़ादी के 78 वर्षों बाद भी इन इलाकों तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं।
बिंदावल से ग्राम छपरवा की दूरी 4 किलोमीटर है, जंगल का रास्ता पक्का है लेकिन वीरान। बिंदावल से करीब 40 से अधिक छात्र-छात्राएँ घना जंगल पार कर छपरवा पहुँचते हैं, जहाँ उन्हें कक्षा 12 तक की पढ़ाई उपलब्ध है। अचानकमार टाइगर रिजर्व के बिंदावल जैसे गाँव विकास के उन दावों की सच्चाई उजागर करते हैं, जो मंचों पर चमकते हैं पर ज़मीन पर बिखर जाते हैं। बिंदावल की बच्चियाँ और बच्चे जिन कठिनाइयों के बावजूद प्रतिदिन स्कूल जाते हैं, वह शिक्षा के प्रति उनके संकल्प की मिसाल है।
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| फ़ाइल फोटो/ तीन दशक तक वनांचल (ATR) में शिक्षा की अलख जलाकर रखने वाला मसीहा स्वर्गीय प्रभुदत्त खैरा |
छपरवा में उच्च माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा उपलब्ध होने का श्रेय शिक्षा दूत स्वर्गीय प्रभुदत्त खैरा को जाता है, जिन्होंने अपने जीवनकाल में वनों से घिरे इस क्षेत्र में शिक्षा का दीप जलाने के लिए अथक प्रयास किए। उनके प्रयासों से यहाँ स्कूली व्यवस्था तो खड़ी हो गई, लेकिन शिक्षा के बुनियादी ढांचे और सरकारी जिम्मेदारियों का भार अब भी अधूरा ही है।
78 वर्षों बाद भी गुणवत्ता की तलाश
भारत को आज़ाद हुए 78 वर्ष बीत चुके हैं, परंतु बिंदावल और ऐसे ही कई वन आश्रित गाँव आज भी गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा के इंतज़ार में हैं। स्कूल तो हैं, पर वे न तो पर्याप्त संसाधनों से लैस हैं और न ही शिक्षक संख्या और गुणवत्ता के मानकों पर खरे उतरते हैं।
इन बच्चों की दैनिक यात्रा केवल दूरी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का प्रतीक है जो वर्षों से उपेक्षित रही है। जंगल पार कर स्कूल पहुँचने वाले बच्चे बच्चियाँ जब यह कहती हैं कि “स्कूल जाते हैं, पर पढ़ाई ठीक से नहीं होती”, तो यह शिक्षा की योजनाओं के खोखलेपन पर सवाल उठाता है।
सरस्वती साइकिल योजना : सुविधा से असुविधा तक
राज्य सरकार की सरस्वती साइकिल योजना का उद्देश्य छात्राओं को सुविधा प्रदान करना था, ताकि वे सुरक्षित और जल्दी स्कूल पहुँच सकें पर बिंदावल की लड़कियों के लिए यह योजना उम्मीद की जगह परेशानी बन गई।
कई छात्राओं को मिली साइकिलें खराब गुणवत्ता की थीं—इतनी कि मात्र एक माह के भीतर ही पुर्जे अलग होने लगे और साइकिलें प्रयोग लायक नहीं रहीं। ऐसे में योजना का उद्देश्य तो दूर, साधनहीनता का दर्द और गहरा हो गया। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही, निम्न स्तरीय सामग्री की खरीद और निगरानी की कमी, सभी को एक साथ उजागर करती है।
ठिठुरन बढ़ते ही कई स्कूलों ने बदला समय, केंद्रीय विद्यालय अब सुबह 7.50 बजे खुलेगा
कोरबा। TODAY छत्तीसगढ़ / जिले में पिछले कई दिनों से चल रही सर्द हवाओं ने ठंड बढ़ा दी है। तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे सुबह-शाम ठिठुरन महसूस की जा रही है। मौसम का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बढ़ती ठंड को देखते हुए जिले के कई विद्यालयों ने कक्षाओं के समय में बदलाव किया है।
केंद्रीय विद्यालय प्रबंधन ने नई समय-सारिणी लागू करते हुए कक्षाएं अब सुबह 7.50 बजे से प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। इससे पहले डीएवी स्कूल अपना समय बदल चुका है। इसके बावजूद अभी भी आधा दर्जन से अधिक स्कूल पूर्व निर्धारित समय पर ही संचालित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को सुबह की ठिठुरन में स्कूल पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
एक्यूवेदर के अनुसार जिले में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री और अधिकतम तापमान 26 डिग्री दर्ज किया गया है। हालांकि दिनभर धूप खिलने से कुछ राहत रहती है और लोग धूप तापते नजर आ रहे हैं, वहीं रात होते ही अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड का असर और अधिक बढ़ गया है।
पिछले एक सप्ताह से मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन बीते कुछ दिनों में ठंड अचानक तेज हो गई है। सुबह और शाम चलने वाली सर्द हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। ठंड के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अभिभावक उम्मीद कर रहे हैं कि शेष स्कूल भी समय में बदलाव कर विद्यार्थियों को राहत देंगे।
GGU में रोवर्स–रेंजर्स यूनिट का गठन एवं प्रवेश पाठ्यक्रम का आयोजन
TODAY छत्तीसगढ़ / बिलासपुर, 12 अक्टूबर। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर में रोवर्स–रेंजर्स यूनिट का गठन कर प्रवेश पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्य शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, राज्य मुख्य आयुक्त श्री इन्द्रजीत सिंह खालसा, राज्य सचिव श्री जितेन्द्र कुमार साहू के मार्गदर्शन में एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल के निर्देशानुसार संपन्न हुआ।
जिला मुख्य आयुक्त श्री चन्द्र प्रकाश बाजपेयी, राज्य संगठन आयुक्त (स्काउट) श्री विजय कुमार यादव, एवं जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार टांडे के नेतृत्व में रोवर्स क्रू एवं रेंजर्स टीम का गठन किया गया। प्रवेश पाठ्यक्रम के दौरान जिला संगठन आयुक्त (स्काउट) श्री महेन्द्र बाबू टंडन तथा रोवर स्काउट लीडर श्री शशांक विश्वकर्मा ने प्रतिभागियों को स्काउटिंग का इतिहास, संकेत (साइन), सलामी (सैल्यूट), मोटो, बाएं हाथ से मिलना, प्रतिज्ञा, नियम, प्रार्थना, झंडा गीत, नॉटिंग, लेशिंग तथा प्राथमिक उपचार के विषय में विस्तृत जानकारी दी। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय स्काउट–गाइड समन्वयक डॉ. योगेश वैष्णव एवं डॉ. मधुलिका सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहें।
CIMS: एमबीबीएस बैच 2025-26 का वाइट कोट सेरेमनी एवं इंडक्शन डे सम्पन्न
TODAY छत्तीसगढ़ / बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (सिम्स), बिलासपुर में शनिवार 4 अक्टूबर को एमबीबीएस बैच 2025-26 के लिए इंडक्शन डे एवं वाइट कोट सेरेमनी उत्साहपूर्वक आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सहायक स्टूडेंट सेल प्रभारी डॉ. सचिन पांडेय ने नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें संस्थान की शैक्षणिक एवं नैतिक परंपराओं से अवगत कराया।
डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने अपने संबोधन में चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “वाइट कोट सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि यह सेवा, संवेदना और जिम्मेदारी का प्रतीक है।” उन्होंने अनुशासन, करुणा और निरंतर सीखने की भावना को चिकित्सा पेशे की आधारशिला बताया।
समारोह के दौरान नए छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से ‘वाइट कोट’ पहनाकर चिकित्सा सेवा के प्रति उनकी निष्ठा को औपचारिक रूप दिया गया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश पाना अनेक विद्यार्थियों का सपना होता है।
इस वर्ष विशेष गौरव का विषय रहा कि संभाग आयुक्त, बिलासपुर श्री महादेव क़वारे एवं रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. दिलीप जैन के सुपुत्र ने भी सिम्स में एमबीबीएस में प्रवेश लिया है। इससे संस्थान की प्रतिष्ठा और आकर्षण में निरंतर वृद्धि परिलक्षित होती है।
सिम्स की शुरुआत वर्ष 2001 में पहले बैच के 100 विद्यार्थियों के साथ हुई थी, जो अब 2025 में बढ़कर 150 छात्र-छात्राओं तक पहुंच गई है। यह प्रदेश का दूसरा मेडिकल कॉलेज होने के साथ-साथ निरंतर प्रगति पर अग्रसर है।
कार्यक्रम में , डॉ. मधुमिता मूर्ति (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया),डॉ अर्चना सिंह( प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रेडियो डायग्नोसिस) डॉ. आरती पांडेय (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, ईएनटी), डॉ संगीता रमन जोगी (प्रोफेसर विभागध्यक्ष स्त्री रोग विभाग) डॉ भूपेंद्र कश्यप( नोडल अधिकारी सिम्स) सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, अभिभावक एवं वरिष्ठ छात्र बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का समापन फिजियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं मेडिकल एजुकेशन यूनिट के प्रभारी डॉ. केशव कश्यप द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
ITI कोनी में मनाया गया रजत जयंती उत्सव , विविध कार्यक्रम आयोजित
TODAY छत्तीसगढ़ / बिलासपुर, 30 सितम्बर। आदर्श औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था कोनी में 8 से 23 सितम्बर तक रजत जयंती उत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य क्विज प्रतियोगिता, जॉब फेयर, सेमिनार, एलुमिनी मीट, पुस्तक मेला एवं वार्षिक उत्सव जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री ए. के. सोनी, संयुक्त संचालक (औ.प्र. संस्थाएँ), क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्राचार्य श्री नवीन कुमार साहू ने की।
रजत जयंती उत्सव का संचालन प्रशिक्षण अधीक्षक श्री डी. के. तिवारी एवं श्री मधुसुदन पराये ने किया। वहीं प्रतिदिवसीय कार्यक्रम का संपादन श्रीमती प्रतिमा दुबे, श्रीमती खुशबु ठाकुर, श्रीमती कुन्ति पटेल एवं श्री विक्रम सिंह परिहार, प्रशिक्षण अधिकारीगण द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्था के समस्त प्रशिक्षणार्थी उत्साहपूर्वक सहभागी बने और अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।
मुख्यमंत्री ने विद्या भारती के महाविद्यालय भवन का किया लोकार्पण, प्रांतीय संस्कृति महोत्सव में हुए शामिल
TODAY छत्तीसगढ़ / बिलासपुर, 27 सितंबर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में नव निर्मित सरस्वती महाविद्यालय भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने विद्याभारती द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में प्रदेश के 33 जिलों के सरस्वती स्कूलों से चयनित 24 मेधावी छात्र छात्राओं और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों एवं महोत्सवों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विद्या भारती संस्था भारत की संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने में विशिष्ट योगदान दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र गौरव निर्माण में अपना योगदान दें। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने की। केंद्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री से श्री गजेंद्र यादव विशिष्ट अतिथि के रुप में मौजूद रहे। बिल्हा विधायक श्री धरम लाल कौशिक, तखतपुर विधायक श्री धर्मजीत सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सरस्वती स्कूलों के प्रतिभावान छात्र छात्राओं का किया सम्मान
सरस्वती स्कूल परिसर कोनी में नव निर्मित सरस्वती महाविद्यालय भवन का मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सहित अतिथियों ने विधिवत पूजा अर्चना कर लोकार्पण किया। सरस्वती स्कूल परिसर के लखीराम सभा भवन में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जिलों के 24 प्रतिभावान छात्र छात्राओं व विभिन्न सांस्कृतिक व खेल महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सरस्वती स्कूल के सैकड़ों प्रतिभाओं को सम्मानित किया। नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि मेधावी छात्र-छात्राएँ अपनी मेहनत, अनुशासन और संस्कार से प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। साथ ही विद्यालय का यह नया भवन शिक्षा और ज्ञान के विस्तार का प्रतीक है, जो समाज को नई दिशा देगा। श्री साय ने कहा कि सरस्वती महाविद्यालय ने गुरु घासीदास विश्वविद्यालय एवं इसरो बेंगलुरु से एमओयू किए हैं, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं तकनीकी क्षेत्र में ज्यादा अवसर मिलेंगे। साथ ही पं. सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय का स्टडी सेंटर भी यहां प्रारंभ होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा में शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, हाइटेक लाइब्रेरी, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे दृढ़ संकल्प और परिश्रम के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि विद्या भारती शिक्षा के साथ संस्कार देने का काम कर रही है उन्होंने सभी छात्रों को उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने विद्या भारती संस्था द्वारा ज्ञान परंपरा और भारती संस्कृति को सहेजने के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। विद्या भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री श्री देव नारायण ने विद्या भारती के सिद्धांतों, विचारधारा और कार्य प्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरस्वती संस्थान द्वारा अब तीन महाविद्यालय की स्थापना छत्तीसगढ़ में की गई है और सात प्रकल्प है और ग्राम भारती में 1100 से अधिक विद्यालय है। इन संस्थानों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है जिससे योग्य और राष्ट्र के प्रति समर्पित बच्चों का निर्माण हो रहा है।
कार्यक्रम में नन्हे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। नगर निगम महापौर श्रीमती पूजा विधानी, क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री राम भरोसा सोनी, अध्यक्ष सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़, सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री रतन चंद्राकर, सरस्वती शिशु मंदिर कोनी के अध्यक्ष श्री मुनेश्वर कौशिक, सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति के सचिव श्री संतोष तिवारी, श्री बृजेंद्र शुक्ला, श्री पुरनंदन कश्यप, श्री रामपाल, श्री सुजीत मित्रा, श्री सुदामा राम साहू, श्रीमती दिव्या चंदेल, प्रांत प्रमुख, संचालक, प्राचार्य आचार्यों की प्रमुख भूमिका रही। इस अवसर पर विभिन्न जिलों से आए सरस्वती संस्थान के आचार्य और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे।
राज्यपाल ने तेजस्विनी छात्रावास का किया निरीक्षण, बेहतर इंसान बनने की दी प्रेरणा

TODAY छत्तीसगढ़ / बिलासपुर, 27 सितम्बर / राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान नेहरू नगर स्थित तेजस्विनी छात्रावास का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावास में अध्ययनरत बच्चियों से आत्मीय चर्चा की और उन्हें शिक्षा के साथ-साथ अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
छात्रावास के लिए 2 लाख रूपये की सहायता राशि देने की घोषणा
राज्यपाल श्री डेका ने छात्राओं से चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में भौतिक सफलता के साथ-साथ बेहतर इंसान बनना सबसे जरूरी है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का बेहतर जरिया है। एक सच्चे नागरिक की पहचान उसके सोच और व्यवहार से होती है। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को समावेशी सोच के साथ जीवन यात्रा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सभी छात्राओं से परिचय लेकर उनकी रूचि और भविष्य में वे क्या बनना चाहते हैं,इस संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने छात्राओं की शिक्षा, रहन सहन एवं अन्य आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि बच्चियों की शिक्षा, सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता को लेकर शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। छात्राओं ने राज्यपाल से खुलकर बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने छात्रावास के विकास के लिए 2 लाख रूपए की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम में छात्रावास की संचालिका सुश्री सुलभा देशपांडे ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि यहां 21 बच्चियां अध्ययनरत है। यहां गरीब और बेसहारा वर्ग की बच्चियों के निःशुल्क रहने और खाने की व्यवस्था की जा रही है। यहां की बच्चियां शहर के विभिन्न स्कूलों और कॉलेज में अध्ययनरत हैं। उनकी पढ़ाई की व्यवस्था भी छात्रावास समिति द्वारा की जा रही है। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन छात्रावास समिति की अध्यक्ष डॉ. संजना तिवारी ने किया। इस अवसर पर कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह,
नगर निगम कमिश्नर श्री अमित कुमार, सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल, सहायक कलेक्टर श्री अरविंथ कुमारन सहित छात्रावास समिति के सदस्य मौजूद थे।
Chhattisgarh: बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़, मोबाइल चलाने पर शिक्षक निलंबित
TODAY छत्तीसगढ़ / बालोद। गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम सिर्री स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ दो सहायक शिक्षकों पर शाला समय में मोबाइल चलाना भारी पड़ गया। शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक शिक्षक को निलंबित कर दिया, जबकि दूसरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
मिली जानकारी के अनुसार सहायक शिक्षक विनय कुमार गोस्वामी को निलंबित किया गया है, जबकि सहायक शिक्षक मिर्जा अरमान बेग को तीन दिनों के भीतर जवाब देने का नोटिस जारी किया गया है। दरअसल, 20 सितम्बर को संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग दुर्ग ने शाला का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान दोनों शिक्षक शाला समय में मोबाइल का उपयोग करते पाए गए। साथ ही प्रधान पाठक ने भी शिकायत की थी कि विनय गोस्वामी कक्षा में अध्यापन कार्य नहीं करते। इस आधार पर उन्हें निलंबित किया गया। वहीं मिर्जा अरमान बेग पढ़ाई कराते हैं, लेकिन मोबाइल उपयोग की लापरवाही पर उन्हें नोटिस जारी किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी योग दास साहू ने बताया कि मामले में आगे की कार्यवाही जारी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों के विपरीत आचरण करने वाले शिक्षकों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
आत्मानंद स्कूल : प्राचार्य, संकुल समन्वयक समेत 5 शिक्षकों का निलंबन के कलेक्टर ने दिए निर्देश
बिलासपुर / TODAY छत्तीसगढ़ / कलेक्टर अवनीश शरण ने स्वामी आत्मानंद स्कूल जयराम नगर की प्राचार्या समेत 5 शिक्षकों को निलंबित करने के निर्देश दिए। ये सब अनधिकृत रूप से स्कूल से नदारद थे। एक शिक्षक ने तो आने वाले दिन सोमवार का भी अपना हाजिरी रजिस्टर में चढ़ा दिया था। मध्याह्न भोजन की मेनू का भी पालन नहीं किया जा रहा था।
कलेक्टर ने आज मस्तुरी ब्लॉक के जयराम नगर सहित कई ग्रामों का सघन दौरा किया। शासकीय योजनाओं का फील्ड स्तर पर क्रियान्वयन का हालात नजदीक से देखने निकले थे। निलंबन की अनुशंसा जिन शिक्षकों के विरुद्ध की गई है, उनमें स्वामी आत्मानंद स्कूल जयराम नगर की प्राचार्या श्रीमती एम मोइत्रा, व्याख्याता एलबी मनोज कुमार तिवारी, व्याख्याता एलबी उषा महानंद, व्याख्याता एलबी प्रदीप कुमार राठौर और संकुल समन्वयक गणेश राम मिरी शामिल है। डीपीआई और संयुक्त संचालक शिक्षा को यथा नियम निलंबन के प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।
राज्योत्सव 2024 : तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे शिक्षक की करंट लगने से मौत
सारंगढ़ । TODAY छत्तीसगढ़ / राज्य स्थापना दिवस राज्योत्सव 2024 की खुशियों का हिस्सा बनने के लिये स्कुल शिक्षा विभाग भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा था, इसी समय करंट लगने से एक शिक्षक की मौत हो गई और मौके पर मातम फ़ैल गया । सारंगढ़ जिला मुख्यालय में राज्योत्सव की तैयारी जोरों से चल रही थी, सभी विभागों के स्टाल राज्योत्सव में लगे हुये है। यहाँ शिक्षा विभाग का भी एक स्टॉल लगा हुआ था, जिसमें बैनर लगाते समय 50 वर्षीय शिक्षक भगत पटेल की विद्युत करंट की चपेट में आकर मौत हो गई। मौत की खबर से पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया वहीं शिक्षा विभाग के सारे कर्मचारी इस घटना से काफी हतप्रभ हैं।
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माना जा रहा है कि इन स्टालों तक बिजली पहुंचाने वाले कर्मचारी की गलती से एक शिक्षक की मौत हो गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी जगह से बिजली का तार कटा हुआ था जिससे करंट स्टाल के लिए लगाए गए लोहे के एंगल में प्रवाहित था, उसकी चपेट में आने से भगत पटेल की मौत हो गयी।
सीयू में दो दिवसीय कुलपति समागम का समापन, भारत में विश्वगुरू बनने की क्षमता - साव
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) मध्य क्षेत्र के दो दिवसीय कुलपति समागम का समापन समारोह आज आयोजित किया गया। समारोह में उप मुख्यमंत्री अरूण साव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता प्रो. जी.डी. शर्मा, अध्यक्ष भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने की। मंच पर, डॉ. (श्रीमती) पंकज मित्तल, महासचिव भारतीय विश्वविद्यालय संघ, प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल कुलपति गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं प्रो. मनीष श्रीवास्तव, कुलसचिव गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर भी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि श्री साव ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने के लिए भारतीय विश्वविद्यालय संघ द्वारा किये जा रहे कार्य प्रशंसनीय है। शिक्षा व संस्कृति के क्षेत्र में संघ के योगदान से शिक्षा में एकरूपता व समानता आ रही है। उन्होेंने कहा कि लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति ने हमारे मानसिकता को कमजोर किया है। अब हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालयों में शिक्षा की व्यवस्था करनी होगी। हम सभी जानते है कि भारत में विश्वगुरू बनने की क्षमता है। पिछले कुछ वर्षों में पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान एवं स्वीकार्यता बढ़ी है। भारत को देखने का दुनिया का नजरिया बदला है। वह दिन दूर नहीं, जब भारत फिर से विश्व गुरू कहलाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आज विद्यार्थी तनावग्रस्त एवं अवसादग्रस्त हो रहे है। अनेक अप्रिय घटनाएं हो रही है। इसे रोकने की जरूरत है। इसका समाधान भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में हैं। उन्होंने छात्रों से आहृवान किया कि छात्र पढ़ाई को तनाव के रूप में न लें। छात्रों को कक्षा में आत्मविश्वास व ऊर्जा का माहौल मिले। छात्र को राष्ट्रभक्त एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण नागरिक बनाने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों की है।
कार्यक्रम माँ सरस्वती एवं गुरु घासीदास जी की पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्जवलन के साथ प्रारंभ हुआ। तरंग बैंड के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं कुलगीत की प्रस्तुति दी। इसके पश्चात् मंचस्थ अतिथियों का नन्हें पौधों से स्वागत किया गया। स्वागत उद्बोधन देते हुए गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर के माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने मंचस्थ अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि परिवार के सदस्य की तरह माननीय उप-मुख्यमंत्री श्री अरूण साव का सहयोग हमेशा विश्वविद्यालय को मिलता है। श्री साव सच्चे अर्थो में लोकनायक एवं जननायक हैं। भारतीय विश्वविद्यालय संघ के सभी पदाधिकारियों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि यह संघ भारत ही नहीं, पूरे विश्व में अपनी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यूनिवर्सिटी न्यूज की सम्पादक डॉ. एस. रमा देवी पाणी ने दो दिवसीय कुलपति समागम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। डॉ. (श्रीमती) पंकज मित्तल, महासचिव भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने गुरू घासीदास विश्वविद्यालय की मेजबानी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस समागम में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों का व्यक्तिगत रूप से ध्यान रखा गया। इसके लिए संघ विश्वविद्यालय का आभारी है। उन्होंने शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने में विश्वविद्यालय की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके लिए सात तरह के सहयोग की जरूरत है। शोध एवं नवाचार के लिए विश्वविद्यालयों को निवेश करना पड़ेगा। इसके लिए बजट में प्रावधान भी करना जरूरी है। शोध अनुदान के लिए सरकार पर पूरी तरह निर्भर न रहते हुए अन्य स्त्रोतों की संभावनाओं पर विचार करें।
प्रो. जी.डी. शर्मा, अध्यक्ष भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारत बदल रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप यहां की शिक्षा नीति भी बदल रही है। हमारा आत्मविश्वास विश्व में सबसे ऊपर रहा है। हम मानते रहे हैं कि जो कुछ हमारे पास है, वही श्रेष्ठ है। भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाते हुए अब नकारात्मकता को जड़ से खत्म कर सकारात्मक विचार लाने की आवश्यकता है। हमें विश्व गुरू बनने से कोई भी नहीं रोक सकता। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गरिमा तिवारी, सहायक प्राध्यापक, वानिकी विभाग ने किया।
सामाजिक समरसता एवं समानता का बाबा जी का संदेश आज के समय में अधिक सार्थक - विष्णुदेव साय
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बिलासपुर के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित बाबा घासीदास जी की जयंती समारोह एवं कुल उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा जी का सामाजिक समरसता एवं समानता का संदेश आज अधिक प्रासंगिक एवं सार्थक है। उनके उपदेश का असर है कि छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता बनी हुई है। बाबा जी के बताये रास्ते पर चलकर छत्तीसगढ़ सरकार सामाजिक समरसता को और समृद्ध करने का प्रयास करेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति श्री आलोक कुमार चक्रवाल ने की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कुलपति द्वारा संपादित किताब ‘गुरू घासीदास सतनाम पंथ के प्रवर्तक’ का विमोचन भी किया। श्री साय ने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र -छात्राओं को सम्मानित भी किया। विशेष अतिथि के रूप में समारोह में एटीईक्यू इन्टरनेशन के अध्यक्ष डॉ. विलियम पेन्टर ,बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल,बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला उपस्थित थे।
LIVE: गुरु घासीदास जयंती कार्यक्रम,गुरु घासीदास विश्वविद्यालय,बिलासपुर https://t.co/g6rFzGruP8
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) December 18, 2023
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| घासीदास पर कुलपति द्वारा संपादित पुस्तक का विमोचन |
मुख्यमंत्री श्री साय ने बाबा घासीदास जयंती की सभी को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शैक्षणिक संस्थाओं के अंतर्गत घासीदास विश्वविद्यालय में पहला कार्यक्रम बना है। विशाल स्तर पर जयंती समारोह आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन को बधाई दी। श्री साय ने कहा कि 18 वीं सदी में देश में सामाजिक भेदभाव एवं छूआछूत की भावना चरम पर थी। समाज में ऊंच-नीच की भावना गहराई लिए थी। ऐसी हालात में बाबा घासीदास जी का अवतरण हुआ। उन्हेांने मनखे-मनखे एक समान का उपदेश देकर सामाजिक समरसता का सूत्रपात किया। हमें गर्व है कि बाबा घासीदास जी के नाम पर पूरे देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा के आशीर्वाद एवं जनता के सहयोग से छत्तीसगढ़ को और समृद्ध राज्य बनाएंगे। प्रकृति ने छत्तीसगढ़ की भूमि को उर्वरा बनाया है। खनिज एवं वन ससंाधनों की बहुलता है। छत्तीसगढ़ को देश का नम्बर वन राज्य बनाने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों के अन्य प्रकल्पों पर काम के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की। मुख्यमंत्री ने जयंती के अवसर पर कॉलेज के एनएसएस ईकाई द्वारा ब्लड डोनेशन कैम्प का शुभारंभ किया। 2 सौ यूनिट ब्लड संकलन का लक्ष्य इस शिविर में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में बच्चों के लिए संचालित सस्ते केन्टीन की प्रशंसा की। मात्र 10 रूपये में बच्चों को भरपेट एवं गुणवत्ता पूर्ण भोजन परोसी जाती है। फिलहाल 600 बच्चे इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने घासीदास विश्वविद्यालय का राजधानी में विस्तार के लिए पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी समारोह को सम्बोधित किया। उन्होंने बाबा जी के संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 18 लाख आवासहीन परिवारों को मकान देने का निर्णय लिया। ये सब पिछले पांच साल से मकान को लेकर काफी परेशान थे। राज्य सरकार ने मकान देने में काफी सहानुभूति पूर्वक निर्णय लिया है। बाबा जी ने अपने संपूर्ण जीवन काल में सामाजिक समरसता बनाने और विषमता को दूर करने का काम किया। उनको सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम सब उनके बताये रास्ते पर चलकर समृद्व छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे। कुलपति श्री आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को गर्व है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वे पहले दौरे पर हमारी शैक्षणिक संस्थान में आये। उन्हांेने कहा कि मनखे-मनखे एक समान का बाबाजी का संदेश अभूतपूर्व है। उनके संदेशों की भावना को हमारे सविधान में भी शामिल किया गया है। जिसके कारण देश आज तरक्की के नये आयाग विकसित कर रहा है। विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल एटीईक्यू इन्टरनेशन के अध्यक्ष डॉ. विलियम पेन्टर ने भी बाबा जी के जीवन संदेश और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में बताया ।
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