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धान खरीदी में बड़ा बदलाव, सैटेलाइट से होगी फसल की पुष्टि; फर्जी रकबे पर लगेगी लगाम

TODAY छत्तीसगढ़  / रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान की खेती के वास्तविक रकबे का सटीक और तकनीक आधारित आकलन करने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम पहल की है। इसके लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के बीच बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस पहल के तहत सैटेलाइट आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य धान उपार्जन व्यवस्था में रकबे के आकलन को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

गैर-जियो-रेफरेंस्ड खेतों की भी होगी मैपिंग

तकनीकी सर्वे के तहत ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जो अभी डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं। खास तौर पर वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित कृषि भूमि को मैपिंग में शामिल किया जाएगा।

इन क्षेत्रों की पहचान के बाद उनकी GIS आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी। इससे दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में मौजूद कृषि भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सैटेलाइट इमेजरी से होगी धान की फसल की पुष्टि

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की जाने वाली पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर धान के वास्तविक रकबे का आकलन किया जाएगा।

जिन क्षेत्रों में पहले से जियो-रेफरेंस्ड भूमि खंड यानी खसरे उपलब्ध हैं, वहां उनके अक्षांश-देशांतर का सैटेलाइट इमेजरी से मिलान किया जाएगा। इसके जरिए संबंधित खेत में धान की फसल मौजूद होने की डिजिटल पुष्टि की जाएगी।

डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए बनेगा मजबूत आधार

सरकार की इस तकनीकी पहल से दूरस्थ क्षेत्रों, FRA भूमि और डुबान क्षेत्रों में कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही भविष्य में होने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार होगा।

इससे धान के रकबे के आकलन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और उपार्जन व्यवस्था के लिए उपलब्ध आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा सकेगा।

अधिकारी रहे मौजूद

MoU के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संचालक कवीश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

हर पात्र हितग्राही तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, कलेक्टर ने दिए निर्देश

CG NEWS: TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर । सेवा संकल्प अभियान को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने के लिए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सभी नोडल अधिकारियों को योजनाओं के सैचुरेशन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना नहीं, बल्कि हर पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

कलेक्टर ने अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को मुख्य सचिव की ओर से अभियान को बेहतर बनाने के लिए दिए गए निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों पर प्रभावी अमल करते हुए अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं से जोड़ा जाए और लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाया जाए।

कलेक्टर ने आम लोगों से सीधे जुड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने को कहा। इसके साथ ही देहदान और वस्त्रदान जैसे मानवीय कार्यों को भी अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने नियमित सरकारी दायित्वों के साथ स्वप्रेरणा से जनसेवा के कार्यों में भी आगे आएं। समाज की भागीदारी से ऐसे काम किए जाएं, जिनका व्यापक स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे।

कलेक्टर ने बुढ़ीखार, मस्तूरी के ग्रामीणों की पहल का उल्लेख किया। ग्रामीणों ने जनभागीदारी से स्कूल में अतिरिक्त भवन का निर्माण कराया और स्कूल परिसर को बेहतर बनाने की पहल की है। उन्होंने बताया कि जिले के स्कूलों को जनभागीदारी से 700 से अधिक स्मार्ट टीवी दान में मिले हैं। अभियान के दौरान ऐसे सहयोगकर्ताओं को सम्मानित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि जिले में अब तक 350 निःशक्तजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सेवा संकल्प अभियान के दौरान 800 और निःशक्तजनों को सहायक उपकरण दिए जाएंगे।

इसके अलावा करीब 10 हजार लोगों को भूमि स्वामित्व कार्ड वितरित किए जाने की जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को आवास निर्माण की अगली किश्त भी जारी की जा रही है।

कलेक्टर ने बताया कि वीबी रामजी योजना के तहत जिले में करीब 3000 कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। वहीं गणेश विसर्जन के बाद अरपा नदी के किनारे स्थित घाटों पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की पहुंच, पात्र हितग्राहियों के कवरेज और जमीनी परिणामों पर लगातार नजर रखने को कहा।

उप मुख्यमंत्री ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज प्रदेश के सभी नगर निगमों के महापौरों, आयुक्तों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के अध्यक्षों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की बैठक लेकर सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित वर्चुअल बैठक में अभियान के दौरान संचालित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों, विभागीय समन्वय, जनभागीदारी और प्रचार-प्रसार को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। आगामी 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक देशव्यापी सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा और सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल अहमदाबाद से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में जुड़े। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों को ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने जनसेवा के प्रति आभार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जन-जन से जोड़ने के लिए अभियान की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने को कहा। उन्होंने अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के विकास और जनकल्याण के लिए विगत 25 वर्षो से अनवरत कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हुई है। श्री साव ने कहा कि आज चीन भी भारत के साथ काम करना चाहता है और रूस के साथ भारत की मित्रता और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है और ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम है।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अभियान के दौरान किए जाने वाले कार्यों के प्रभावी दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभिन्न गतिविधियों और जनभागीदारी से जुड़े कार्यों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण किया जाए। हर आयोजन की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए तथा उनकी रील तैयार कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जाए, ताकि अभियान की गतिविधियों और उनके प्रभाव की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि योजनाओं और अभियानों से नागरिकों के जीवन में आए वास्तविक बदलावों को भी प्रमुखता से सामने लाया जाए। इसके लिए लाभार्थियों की वास्तविक कहानियों, गतिविधियों और उपलब्धियों को रिकॉर्ड कर डिजिटल माध्यमों से प्रसारित करने पर ध्यान दिया जाए। बैठक में अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित विभिन्न गतिविधियों की तैयारियों की समीक्षा की गई। इनमें ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘सेवा की कहानी’, ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘सेवा—मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘रंगोली राष्ट्र’ और ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ सहित विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं। अभियान का समापन 17 अक्टूबर को ‘जनसेवक महाकुंभ—पंचायत से पार्लियामेंट’ के साथ प्रस्तावित है।

श्री साव ने विशेष रूप से ‘सेवा की कहानी’ के तहत वास्तविक लाभार्थियों की प्रेरणादायी कहानियों को सामने लाने और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचारित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं से लोगों के जीवन में आए वास्तविक बदलावों को सामने लाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘सेवा सेतु अभियान’ के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने तथा योजनाओं की जानकारी और सुविधाएं एक स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में ‘स्वच्छता ही सेवा–2026’ से जुड़ी गतिविधियों को भी जनभागीदारी के साथ संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया। श्री साव ने कहा कि स्वच्छता को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। इसके लिए नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों को अपनी अगुवाई में नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों को सक्रिय रूप से जोड़ने का आह्वान किया जाएगा।

श्री साव ने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे स्थानों और क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष स्वच्छता अभियान चलाए जाएं जहां स्वच्छता के क्षेत्र में प्रभावी परिणाम दिखाई दे सकें। उन्होंने अभियान के दौरान किए गए कार्यों की पहले और बाद की स्थिति दर्ज करने के निर्देश भी दिए, ताकि स्वच्छता प्रयासों से हुए वास्तविक बदलावों को सामने लाया जा सके।

ई-बसों से बदलेगी शहरों की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था, 240 बसों के संचालन की तैयारी

बिलासपुर TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। PM-eBus Sewa योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। इसे लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के अधिकारियों की बैठक में रूट प्लान, डिपो, चार्जिंग स्टेशन, बस स्टॉप और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर रणनीति तैयार की गई।

बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और MoHUA के निदेशक भानु प्रताप सिंह भदौरिया मौजूद रहे। सीईओ सूडा सुमीत अग्रवाल ने योजना की प्रगति और चारों शहरों में प्रस्तावित ई-बसों की जानकारी दी।

शहर की जरूरत के हिसाब से तय होंगे रूट

बैठक में अधिकारियों ने साफ किया कि ई-बसों के रूट केवल उपलब्ध सड़कों के आधार पर नहीं, बल्कि शहर की वास्तविक परिवहन जरूरत और यात्रियों की मांग को ध्यान में रखकर तय किए जाएंगे।

स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख बाजार और महत्वपूर्ण संस्थानों को ई-बस नेटवर्क से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म रूट प्लान तैयार करने तथा चरणबद्ध तरीके से रूट की व्यवहारिकता जांचने के निर्देश दिए गए।

यात्री संख्या, संभावित मांग, दूरी और कनेक्टिविटी जैसे बिंदुओं का अध्ययन करने के बाद रूट को अंतिम रूप दिया जाएगा। अधिक यात्री दबाव वाले क्षेत्रों में मांग के अनुरूप बस रूट विकसित किए जाएंगे।

यात्रियों को आसानी से मिलेगी बस की जानकारी

अधिकारियों ने ई-बस सेवा की जानकारी आम लोगों तक आसानी से पहुंचाने पर भी जोर दिया। यात्रियों को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि कितनी बसें चल रही हैं, किस रूट पर चल रही हैं और प्रत्येक रूट का समय एवं विवरण क्या है।

इसके लिए रूट चार्ट और संबंधित जानकारी व्यवस्थित तरीके से तैयार कर नागरिकों के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

30 अक्टूबर तक काम पूरा करने पर जोर

बैठक में ई-बस योजना के विभिन्न कामों को तय समय-सीमा में पूरा करने की समीक्षा की गई। अधिकारियों को 30 अक्टूबर तक निर्धारित कार्यों और रूट से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में तेजी बनाए रखने को कहा गया।

इसके साथ ही 1 नवंबर के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संबंधित कार्यों की समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए गए। रूट और संचालन से जुड़े कुछ कामों में आउटसोर्सिंग की संभावनाएं तलाशने पर भी चर्चा हुई।

डिपो और चार्जिंग स्टेशन की तैयारी साथ-साथ

ई-बसों के संचालन के लिए जरूरी डिपो, चार्जिंग स्टेशन और बस स्टॉप तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने निर्देश दिया कि डिपो की क्षमता भविष्य में ई-बसों की संख्या बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखकर तय की जाए।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और उपलब्धता का आकलन कर समय पर जरूरी व्यवस्था करने को कहा गया। डिपो और चार्जिंग स्टेशन के लिए जमीन से जुड़े मामलों को भी समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

NHAI, रेलवे और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जरूरी स्वीकृतियां और तकनीकी प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने को कहा गया, ताकि ई-बसों का संचालन शुरू होने से पहले आधारभूत ढांचा तैयार रहे।

यात्री सुविधा के हिसाब से बनेंगे बस स्टॉप

बैठक में बस स्टॉप के स्थान चयन और विकास पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि बस स्टॉप का चयन यात्री मांग, सुविधा और रूट कनेक्टिविटी के आधार पर किया जाए।

बस स्टॉप पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने और इसके लिए PPP मॉडल की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

रियल टाइम मॉनिटरिंग पर रहेगा जोर

ई-बस संचालन में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को मजबूत करने और बसों की निगरानी के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।

इसके जरिए बसों की लोकेशन, रूट, यात्री संख्या और संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। संचालन के लिए जरूरी मानव संसाधन और अलग-अलग ऑपरेशन मॉडल पर भी अधिकारियों ने चर्चा की।

महिलाओं के लिए विशेष बस सेवा की तैयारी

बैठक में महिलाओं के लिए विशेष बस सेवा शुरू करने की तैयारी पर भी चर्चा हुई। महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसके लिए संभावित रूट और संचालन व्यवस्था तैयार करने पर विचार किया गया।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि PM-eBus Sewa के सभी घटकों को अलग-अलग नहीं, बल्कि एकीकृत रूप से विकसित करने की जरूरत है। रूट प्लानिंग, बस संचालन, डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस स्टॉप और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में बेहतर तालमेल जरूरी है।

उन्होंने शहरवार जरूरत और उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर प्राथमिकताएं तय करने तथा योजना की नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सुगम और सुरक्षित परिवहन विकल्प बनाने का लक्ष्य

बैठक के समापन पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर ने कहा कि PM-eBus Sewa को नागरिकों की सुविधा और शहरों की परिवहन जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रूट, डिपो, चार्जिंग और अन्य आधारभूत सुविधाओं की समग्र तैयारी के साथ ई-बस सेवा को सुगम, सुरक्षित और प्रभावी सार्वजनिक परिवहन विकल्प के रूप में विकसित किया जाएगा।

चार शहरों को मिलेंगी ई-बसें

  • रायपुर: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • बिलासपुर: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • दुर्ग: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • कोरबा: ई-बस सेवा प्रस्तावित
  • कुल स्वीकृत बसें: 240

पवन देव से काबरा तक—छत्तीसगढ़ में 31 IPS अफसरों की नई जिम्मेदारियां तय

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ सरकार के गृह (पुलिस) विभाग ने 31 भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की नई पदस्थापना का आदेश जारी किया है। आदेश में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर सहायक पुलिस महानिरीक्षक स्तर तक के अफसरों के प्रभार में बदलाव किया गया है।

नई पदस्थापना के तहत पवन देव को महानिदेशक, नगरसेना एवं नागरिक सुरक्षा तथा अग्निशमन सेवाएं छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। गुरजिंदर पाल सिंह को महानिदेशक प्रशिक्षण एवं राज्य पुलिस अकादमी बनाया गया है, जबकि एसआरपी कल्लूरी को छत्तीसगढ़ पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है।

प्रदीप गुप्ता को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशासन एवं चयन के साथ संचालक अभियोजन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। विवेकानंद को एडीजी वित्त, योजना एवं प्रबंध तथा दीपांशु काबरा को एडीजी रेल एवं एडीजी यातायात की जिम्मेदारी मिली है। अमित कुमार को एडीजी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाया गया है।

डॉ. आनंद छाबड़ा को एडीजी तकनीकी सेवाएं, डायल-112 एवं दूरसंचार का प्रभार दिया गया है। आनंद प्रकाश पॉल को आईजी कानून व्यवस्था/सुरक्षा और अंकित कुमार गर्ग को राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के संचालक के अतिरिक्त एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स एवं SIA का प्रभार सौंपा गया है।

इसके अलावा ध्रुव गुप्ता को आईजी CID के साथ CCTNS/SCRB एवं तकनीकी सेवाएं, बालाजी राव सोमावार को आईजी अजाक, प्रशांत कुमार अग्रवाल को आईजी S4C एवं तकनीकी सेवाएं, मिलना कुर्जी को आईजी छसबल और पारूल माथुर को आईजी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की जिम्मेदारी दी गई है।

DIG स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। मनीष शर्मा को प्रशासन एवं चयन, अभिषेक मीणा को छसबल-बस्तर, सदानंद कुमार को छसबल, गिरिजा शंकर जायसवाल को S4C एवं तकनीकी सेवाएं और एमएल कोटवानी को गुप्तवार्ता का प्रभार दिया गया है।

प्रशांत कुमार ठाकुर को CCTNS+SCRB, अजातशत्रु बहादुर सिंह को नगरसेना एवं राज्य आपदा प्रबंधन बल तथा अग्निशमन सेवाएं, विवेक शुक्ला को सुरक्षा और राजेश कुकरेजा को वित्त, योजना एवं प्रबंध की जिम्मेदारी मिली है।

वहीं श्वेता राजमणी को दूरसंचार एवं डायल-112, रामकृष्ण साहू को CID, मोहित गर्ग को प्रशासन एवं चयन तथा रवि कुमार कुर्जे को CID में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है।

यदुवंशी अक्षय कुमार को सहायक पुलिस महानिरीक्षक CCTNS के साथ संयुक्त परिवहन आयुक्त सड़क सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। चिराग जैन को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी से संबंधित जिम्मेदारी और अंजली विश्वकर्मा को सहायक पुलिस महानिरीक्षक यातायात, पुलिस मुख्यालय का प्रभार सौंपा गया है।

तबादला आदेश में शामिल 31 अधिकारी

पवन देव, गुरजिंदर पाल सिंह, एसआरपी कल्लूरी, प्रदीप गुप्ता, विवेकानंद, दीपांशु काबरा, अमित कुमार, डॉ. आनंद छाबड़ा, आनंद प्रकाश पॉल, अंकित कुमार गर्ग, ध्रुव गुप्ता, बालाजी राव सोमावार, प्रशांत कुमार अग्रवाल, मिलना कुर्जी, पारूल माथुर, मनीष शर्मा, अभिषेक मीणा, सदानंद कुमार, गिरिजा शंकर जायसवाल, एमएल कोटवानी, प्रशांत कुमार ठाकुर, अजातशत्रु बहादुर सिंह, विवेक शुक्ला, राजेश कुकरेजा, श्वेता राजमणी, रामकृष्ण साहू, मोहित गर्ग, रवि कुमार कुर्जे, यदुवंशी अक्षय कुमार, चिराग जैन और अंजली विश्वकर्मा।

सीपी राधाकृष्णन के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर सरकार अलर्ट, तैयारियों की हुई समीक्षा

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुई बैठक में उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, चिकित्सा, स्वागत और कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

उपराष्ट्रपति 2 सितंबर को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।

मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम 

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल और मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुसार सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक और वापसी के दौरान एंट्री-एग्जिट प्लान को बेहतर समन्वय के साथ अंतिम रूप देने को कहा गया।

एयरपोर्ट पर स्वागत, रिसेप्शन लाइन, एम्स में रिसेप्शन और अन्य प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं के लिए रायपुर कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए गए। एयरपोर्ट और कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने को भी कहा गया।

सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था 

मुख्य सचिव ने गृह विभाग को सुरक्षा संबंधी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही ठहरने, प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं और आकस्मिक चिकित्सा सहायता की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

दीक्षांत समारोह में बैठक व्यवस्था भारत सरकार के निर्धारित प्रोटोकॉल और डायस प्लान के अनुरूप रखने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम की शुरुआत में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान सहित सभी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने एम्स प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को दीक्षांत समारोह की सभी व्यवस्थाएं समय पर और बेहतर समन्वय के साथ पूरी करने के निर्देश दिए।

तिरंगे की शान में मिलेगा पुलिस सेवा का सम्मान, 12 अधिकारी-कर्मचारियों को राष्ट्रपति पदक

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित राष्ट्रपति पुलिस पदकों से छत्तीसगढ़ पुलिस के 12 अधिकारी और कर्मचारी सम्मानित होंगे। इनमें एक अधिकारी को विशिष्ट सेवा पदक और 11 अधिकारियों-कर्मचारियों को सराहनीय सेवा पदक दिया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पदक प्रदान करेंगे। 

विशिष्ट सेवा के लिए सहायक उप निरीक्षक रामावतार सिंह राजपूत, रक्षित केंद्र, जिला धमतरी को राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए चुना गया है। 

वहीं सराहनीय सेवा के लिए पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग, बिलासपुर रेंज; वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, रायगढ़; पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, रायपुर ग्रामीण; पुलिस अधीक्षक राजश्री मिश्रा, एटीएस; निवेदिता पाल, सेनानी, 6वीं वाहिनी छसबल, रायगढ़; मनीषा ठाकुर रावटे, सेनानी, 20वीं वाहिनी छसबल, महासमुंद; तारकेश्वर पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, मध्य जोन, रायपुर पुलिस कमिश्नरेट; उनैजा खातून अंसारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस मुख्यालय रायपुर; जयलाल मरकाम, सहायक सेनानी, प्रथम वाहिनी छसबल, भिलाई और हजारी लाल साहू, प्लाटून कमांडर, 20वीं वाहिनी छसबल, महासमुंद को पदक प्रदान किया जाएगा।

राष्ट्रपति पुलिस पदक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की विशिष्ट एवं सराहनीय सेवाओं के सम्मान का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पुरस्कार है। स्वतंत्रता दिवस समारोह में इन पदकों का वितरण राज्य पुलिस बल के लिए भी गौरव का अवसर होगा।

एक नजर में

  • कुल सम्मानित: 12 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी
  • विशिष्ट सेवा पदक: 1
  • सराहनीय सेवा पदक: 11
  • सम्मान समारोह: 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस
  • स्थान: रायपुर
  • पदक प्रदान करेंगे: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

बच्चों की थाली में पोषण बढ़ाने की तैयारी, गांवों में अनाज बैंक पर भी मंथन

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने के लिए अब विभिन्न विभाग मिलकर काम करेंगे। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने मंत्रालय महानदी भवन में यूनिसेफ और राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं की समीक्षा की। बैठक में कुपोषण, एनीमिया, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, विकास में देरी और बाल विवाह जैसी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों का प्रभावी विस्तार करने के निर्देश दिए गए।

कुपोषण और एनीमिया पर विशेष फोकस

बैठक में बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही बच्चों के लिए आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन बी-12 और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मैदानी स्तर पर बच्चों और उनके परिवारों तक जरूरी स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचनी चाहिए।

सभी जिलों तक बढ़ेगा कम्युनिटी मैनेजमेंट

बैठक में बच्चों के कम्युनिटी मैनेजमेंट कार्यक्रम को सभी जिलों तक विस्तार देने पर चर्चा हुई। दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई गई।

टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ घर पर पौष्टिक भोजन तैयार करने और बच्चों को बेहतर तरीके से भोजन कराने की पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

गांवों में अनाज बैंक की अवधारणा पर चर्चा

बच्चों को पर्याप्त और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी विचार किया गया। इसमें अनाज, दाल और फलियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही किसानों तक विविध और पोषक तत्वों से भरपूर फसलों एवं दालों के अच्छे बीज पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई गई, ताकि पोषण सुरक्षा को गांव स्तर से ही मजबूत किया जा सके।

बस्तर में एनीमिया पर विशेष अभियान

बैठक में बताया गया कि राज्य में चलाए जा रहे एंटी-मलेरिया अभियान से मलेरिया के मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं बच्चों में एनीमिया की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

बस्तर में बच्चों में एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। अधिकारियों को इन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और जरूरतमंद बच्चों तक सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विषय किसी एक विभाग तक सीमित नहीं हैं। इसके लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने जिलों में योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री अब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा सुश्री किरण कौशल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बाढ़ आई तो क्या होगा? छत्तीसगढ़ में 20 अगस्त को होगा रियलिटी टेस्ट

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / प्रदेश में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में आपदा प्रबंधन की तैयारियों और विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई। तय किया गया कि 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त को व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। अभ्यास के जरिए यह परखा जाएगा कि बाढ़ जैसी आपदा के समय राहत और बचाव एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं।

शून्य देरी से राहत-बचाव पर जोर

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को टेबल-टॉप एक्सरसाइज की प्रक्रिया और एसओपी को अच्छी तरह समझने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से पूर्वाभ्यास को गंभीरता से लेने और संभावित कमियों को समय रहते दूर करने पर जोर दिया, ताकि आपदा के दौरान उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल की होगी परीक्षा

कॉन्फ्रेंस में बाढ़ के दौरान अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियों और उनके बीच समन्वय की विस्तृत समीक्षा की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को प्रभावित लोगों के उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं, लोक निर्माण विभाग को क्षतिग्रस्त सड़कों एवं अधोसंरचना, जल संसाधन विभाग को जलस्तर एवं बांधों की निगरानी तथा पीएचई को पेयजल व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। पशुपालन विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की सुरक्षा और आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।

पुलिस से लेकर रेलवे और एयरपोर्ट तक जुड़ेंगे

राज्य स्तरीय अभ्यास में आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों और एजेंसियों को शामिल किया गया है। नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल, स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया।

इसके अलावा पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।

18 अगस्त को तैयारी, 20 को जमीन पर होगा अभ्यास

प्रशासन द्वारा 18 अगस्त को टेबल-टॉप एक्सरसाइज के जरिए बाढ़ की काल्पनिक स्थिति बनाकर विभागों की कार्ययोजना और निर्णय लेने की क्षमता को परखा जाएगा। इसके बाद 20 अगस्त को मॉक ड्रिल आयोजित कर वास्तविक परिस्थितियों में राहत एवं बचाव की तैयारियों का परीक्षण किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा के दौरान संभावित कमियों की पहचान करना और राहत-बचाव व्यवस्था को और मजबूत बनाना है।

सड़क के बीच बिजली के खंभे देख भड़के अरुण साव, जांच के दिए निर्देश

बिलासपुर / TODAY छत्तीसगढ़  / उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने कहा है कि समय की मांग बदल रही है, इसलिए अधिकारी वर्तमान के साथ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर दूरदर्शी कार्ययोजना बनाएं। विकास कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों में विलंब को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करने की बात कही। श्री साव आज जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित अधिकारियों की बैठक में शासकीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।बैठक में विधायक धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला एवं दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित सभी जनपद पंचायतों एवं नगरीय निकायों के अध्यक्ष तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

      प्रभारी मंत्री श्री साव ने बिल्हा के बरतोरी से मोहतरा मार्ग पर सड़क के बीच  बिजली के खंभे खड़े किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला पंचायत सीईओ को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने पर बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक से अनुपस्थित रहने वाले चार अधिकारियों के प्रति भी प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने बिल्हा, कोटा और तखतपुर जनपद पंचायत के सीईओ तथा रतनपुर नगरपालिका के सीएमओ को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने विभागों के कार्यों की नियमित रूप से समीक्षा करते रहने और मैदानी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान 

श्री साव ने कहा कि बिलासपुर शहर में पहली ही बारिश में जलभराव की स्थिति सामने आई है। इससे निपटने के लिए अभी से ऐसी बेहतर और स्थायी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे आने वाले वर्षों में शहरवासियों को इस समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान सड़कों पर गड्ढे और क्षति की स्थिति बनती है। विभागीय अधिकारी इसकी तैयारी अभी से रखें, ताकि बारिश समाप्त होते ही सड़कों की मरम्मत और सुधार कार्य तत्काल शुरू किया जा सके। उन्होंने निर्माण विभागों की अलग से बैठक लेकर कार्यों की विस्तृत समीक्षा करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण किए जाएं।

मौसमी बीमारियों की रोकथाम के

प्रभारी मंत्री ने मलेरिया सहित मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने गांव स्तर पर लगातार निगरानी रखने तथा मितानिन स्तर तक आवश्यक एवं मूलभूत दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि कोटा विकासखंड में अब तक मलेरिया के 48 मरीज मिले हैं। इनमें 6 मरीज उपचाररत हैं, जबकि अन्य मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। रोटरी क्लब के सहयोग से प्रभावित क्षेत्र में 1500 मच्छरदानियों का वितरण किया जा रहा है।

पर्याप्त बारिश से फसलों की स्थिति 

  कृषि विभाग की समीक्षा में बताया गया कि जिले में पर्याप्त बारिश होने से फसलों की स्थिति अच्छी है। बांधों में भी पर्याप्त जलभराव है। जिले में खाद-बीज की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में समितियों में लगभग 300 क्विंटल बीज तथा 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी, यूरिया सहित अन्य उर्वरक उपलब्ध हैं। श्री साव ने कहा कि इस वर्ष धान खरीदी के लिए किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन जरूरी है। उन्होंने किसानों को इसकी जानकारी देने और गांव-गांव शिविर लगाकर पंजीयन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंजीयन के अभाव में एक भी किसान धान बेचने से वंचित नहीं होना चाहिए।

वीबी-जी रामजी योजना में काम स्वीकृत करें

जिला पंचायत की योजनाओं की समीक्षा के दौरान श्री साव ने वीबी-जी रामजी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत फील्ड की वास्तविक जरूरतों के आधार पर कार्य स्वीकृत किए जाएं। मुक्तिधाम, शौचालय, स्कूलों की मरम्मत, जल संरक्षण, छोटे बांध सहित स्थानीय आवश्यकता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने गांवों में जल संरक्षण के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने और पानी बचाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन की समीक्षा में बताया गया कि जिले में 804 सिंगल विलेज योजनाओं में से 310 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इनमें से 219 योजनाएं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जा चुकी हैं। प्रभारी मंत्री ने योजनाओं के निरंतर संचालन एवं रखरखाव के लिए जनभागीदारी से जल अर्पण अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने वाटर रिचार्जिंग के लिए जिले में जनभागीदारी के साथ किए गए प्रयासों की सराहना की।

मल्हार और रतनपुर के समन्वित विकास 

श्री साव ने ऐतिहासिक नगरी मल्हार और रतनपुर के समन्वित एवं सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों ऐतिहासिक स्थलों की विरासत, पर्यटन संभावनाओं और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार की जाए। नगर विकास की समीक्षा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, अधोसंरचना विकास और साफ-सफाई के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने बिलासपुर में आईएसडीपी योजना के तहत निर्मित आवासों की आवश्यक मरम्मत कराकर पात्र गरीब परिवारों को शीघ्र आवंटित करने को कहा। जीवनदीप और आयुष समिति की बैठक में कई प्रस्ताव स्वीकृत किए । समीक्षा बैठक के बाद जिला अस्पताल की जीवनदीप समिति तथा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की आयुष समिति की बैठक आयोजित की गई। इन बैठकों में अस्पताल एवं महाविद्यालय की आवश्यक सुविधाओं और विकास कार्यों से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर कई प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री साव द्वारा दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

छत्तीसगढ़ में 24 IFS अधिकारियों की नई पदस्थापना, कई DFO बदले

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। राज्य शासन ने भारतीय वन सेवा (IFS) के 24 अधिकारियों की नई पदस्थापना का आदेश जारी किया है। तबादला सूची में कई जिलों के वन मंडलाधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कुछ अधिकारियों को मुख्यालय, टाइगर रिजर्व, वन विकास निगम और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आदेश 8 अगस्त 2026 को जारी किया गया।

कई जिलों के वन मंडलों में बदले अधिकारी

राज्य शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार गणवीर धम्मशील को वन विभाग मंत्रालय, नवा रायपुर में विशेष सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उत्तम कुमार गुप्ता को प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्र निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, जगदलपुर बनाया गया है।

दुलैश्वर प्रसाद साहू को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), मनेंद्रगढ़ और पंकज राजपूत को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), रायपुर की जिम्मेदारी दी गई है। प्रभाकर खलखो को प्रभारी वन संरक्षक, कार्य आयोजन वनमंडल, सरगुजा अंबिकापुर पदस्थ किया गया है।

इसके अलावा संदीप बलगा को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), पूर्व भानुप्रतापपुर, मयंक पाण्डेय को गरियाबंद और सत्यदेव शर्मा को धर्मजयगढ़ पदस्थ किया गया है।

सरगुजा, महासमुंद और कठघोरा में भी नई पोस्टिंग

श्रीनिवास तन्खे को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), महासमुंद की जिम्मेदारी दी गई है। जितेन्द्र कुमार उपाध्याय को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कटघोरा पदस्थ किया गया है।

संजय यादव को खैरागढ़ और कुमार निशात को मरवाही भेजा गया है। वहीं प्रतिनियुक्ति से वापस लौटे पंकज कुमार कमल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बलौदाबाजार पदस्थ किया गया है।

बस्तर और कांकेर में भी बदले अधिकारी

तबादला सूची में वन्यजीव और बस्तर क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं। पुष्पलता टंडन को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सारंगढ़-बिलाईगढ़ और लोकनाथ पटेल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सरगुजा अंबिकापुर बनाया गया है।

शाशिनंदन के. को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कांकेर की जिम्मेदारी मिली है। वहीं दिपेश कपिल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बस्तर जगदलपुर और चंद्र कुमार अग्रवाल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), दुर्ग पदस्थ किया गया है।

वन विकास निगम और मुख्यालय में भी जिम्मेदारियां

अभिषेक जोगावत को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, नवा रायपुर में उप महाप्रबंधक के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है। रौनक गोयल को कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़, नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है।

रोम्या चांद को छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। वहीं ऋषभ जैन को भी छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया गया है। चंद्रशेखर शकरसिंह फरदेसी को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कोरिया और विपुल अग्रवाल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सूरजपुर की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रतिनियुक्ति से लौटे अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी

आदेश में प्रतिनियुक्ति से वापस लौटे अधिकारियों को भी नई पदस्थापना दी गई है। सभी अधिकारियों को आदेश के अनुसार नवीन पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। 


नांदघाट-मुंगेली सड़क अब होगी फोरलेन, 137.81 करोड़ रुपये की मंजूरी

बेमेतरा के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक जाने वाली सड़क अब टू-लेन नहीं, बल्कि फोरलेन बनेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए अतिरिक्त 21.81 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। पहले इस मार्ग के निर्माण के लिए 116 करोड़ रुपये स्वीकृत थे। अब कुल 137.81 करोड़ रुपये की लागत से 36.40 किलोमीटर लंबी सड़क का उन्नयन किया जाएगा।
TODAY छत्तीसगढ़  / राज्य शासन ने नांदघाट-मुंगेली मार्ग को फोरलेन करने के लिए अतिरिक्त राशि की स्वीकृति दे दी है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद गुरुवार को राशि स्वीकृति का पत्र जारी किया गया।

वर्ष 2024 में सीआरआईएफ योजना के तहत नांदघाट-मुंगेली मार्ग के टू-लेन निर्माण के लिए 116 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए अधिकारियों को सड़क को टू-लेन से फोरलेन में उन्नयन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन ने अब इसके लिए 21 करोड़ 81 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है।

36.40 किलोमीटर सड़क का होगा निर्माण

पूर्व में स्वीकृत 116 करोड़ रुपये और नई स्वीकृति के 21.81 करोड़ रुपये को मिलाकर परियोजना की कुल लागत 137.81 करोड़ रुपये हो गई है। इस राशि से नांदघाट और मुंगेली के बीच 36.40 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। 

रायपुर से मुंगेली-मध्यप्रदेश का सफर होगा आसान

नांदघाट-मुंगेली मार्ग को फोरलेन करने की मांग क्षेत्रवासी लंबे समय से कर रहे थे। सड़क के फोरलेन बनने से मुंगेली, लोरमी, पंडरिया और इसके आगे मध्यप्रदेश के क्षेत्रों से राजधानी रायपुर आने-जाने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे आवागमन तेज होने के साथ ही यातायात अधिक सुगम और सुरक्षित होगा।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा नवागढ़ विधायक दयालदास बघेल ने सड़क को फोरलेन के रूप में स्वीकृति मिलने पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव के प्रति आभार जताया है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को भी इस स्वीकृति के लिए बधाई दी।

सर्पदंश राहत प्रकरणों में राजस्व अधिकारियों के संरक्षण की मांग

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की जिला इकाई, बिलासपुर ने संभागायुक्त सुनील जैन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सर्पदंश जनित मृत्यु के राहत प्रकरणों में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को आपराधिक जांच में शामिल किए जाने पर चिंता व्यक्त की है।

संघ की ओर से अपर कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि यदि किसी प्रकरण में मिथ्या शपथपत्र, जाली हस्ताक्षर, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कूटरचित दस्तावेज अथवा अन्य असत्य अभिलेखों के आधार पर न्यायालय से आदेश प्राप्त किए गए हैं, तो कार्रवाई उन व्यक्तियों के विरुद्ध होनी चाहिए जिन्होंने ऐसे दस्तावेज तैयार किए, प्रमाणित किए या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए, न कि उन राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध जिन्होंने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वैधानिक आदेश पारित किए।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदा राहत संबंधी मामलों में राजस्व न्यायालय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में यदि बाद में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो उनकी जवाबदेही संबंधित दस्तावेज तैयार करने या प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों की होनी चाहिए।

संघ ने मांग की है कि सर्पदंश राहत प्रकरणों में न्यायालय को कथित रूप से गुमराह करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत प्रभावी जांच और अभियोजन सुनिश्चित किया जाए तथा ऐसे मामलों को केवल सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि "Fraud upon the Court" (न्यायालय से छल) के रूप में देखा जाए।

ज्ञापन में यह भी आग्रह किया गया है कि न्यायाधीश (संरक्षण) अधिनियम, 1985 तथा राज्य शासन के 14 अक्टूबर 2024 के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए, जिनके तहत राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को विधिक संरक्षण प्राप्त है। संघ का कहना है कि केवल न्यायिक आदेश पारित करने के आधार पर, बिना प्रत्यक्ष और ठोस साक्ष्य के, अधिकारियों पर आपराधिक उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए।

संघ ने राज्य शासन से यह भी मांग की है कि प्राकृतिक आपदा राहत प्रकरणों की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के बीच समन्वित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर लागू किया जाए, ताकि राहत योजनाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान अपर कलेक्टर डॉ. ज्योति पटेल, एसडीएम मनीष साहू, प्रवेश पैकरा, शिवकुमार कंवर, नितिन तिवारी, डिप्टी कलेक्टर गबेल सहित प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

'अन्नपूर्णा' ग्रेन एटीएम से हितग्राहियों को मिलेगा त्वरित राशन

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और हितग्राही-केंद्रित बनाने की दिशा में बिलासपुर के सरकंडा में निर्माणाधीन 'अन्नपूर्णा' ग्रेन एटीएम का शनिवार को खाद्य संचालक, छत्तीसगढ़ शासन फरिहा आलम सिद्दीकी ने आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खाद्य संचालक ने कहा कि ग्रेन एटीएम शासन की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से पात्र हितग्राहियों को अधिक पारदर्शी, सुविधाजनक और गरिमापूर्ण तरीके से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने और सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि ग्रेन एटीएम के संचालन के बाद पात्र हितग्राही मशीन के माध्यम से निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। शासन के अनुसार, जिस प्रकार एटीएम से किसी भी समय नकदी निकाली जा सकती है, उसी प्रकार ग्रेन एटीएम से भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशन प्राप्त किया जा सकेगा। इससे खाद्यान्न वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी, मानव हस्तक्षेप कम होगा तथा वितरण में सटीकता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

निरीक्षण के दौरान सहायक खाद्य अधिकारी राजीव लोचन तिवारी, जिला प्रबंधक नान नितिन दीवान, नगर निगम के अभियंता रमणदीप छाबड़ा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

खाद्य संचालक ने अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए ग्रेन एटीएम का निर्माण निर्धारित समय में पूरा कर आम नागरिकों को इसका लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

डिजिटल सुशासन को नई दिशा देने का सरकार का दावा, सेवा सेतु पर 564 सेवाएं उपलब्ध

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ शासन के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में डिजिटल सुशासन और तकनीक आधारित सेवाओं के विस्तार से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। विभाग के अनुसार, सेवा सेतु, भारतनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से नागरिकों को अधिक सुगम सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

विभाग के सचिव अंकित आनंद और चिप्स (CHiPS) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) मयंक अग्रवाल ने बताया कि सेवा सेतु पोर्टल पर वर्तमान में 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध हैं। उनके अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में पोर्टल पर 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 78 लाख से अधिक आवेदनों का निराकरण किया गया है। पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, एसएमएस एवं व्हाट्सएप सूचना तथा ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

विभाग का दावा है कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत जनवरी 2024 से अब तक 1,273 मोबाइल टावर शुरू किए जा चुके हैं। वहीं भारतनेट फेज-3 के तहत ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने की योजना है, जिसके लिए केंद्र सरकार से 3,928 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि राज्य सरकार ने सीएम आईटी फेलोशिप शुरू की है, जिसके तहत 50 चयनित युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और शासकीय विभागों में कार्यानुभव दिया जा रहा है।

विभाग के अनुसार, विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को भी मजबूत किया जा रहा है। इनमें खनिज ऑनलाइन 2.0, एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (IWMMS), वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, पारस पोर्टल, बस्तर मुन्ने पोर्टल और डिजिटल द्वार जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

विभाग ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ एआई मिशन (CG-AIM) के तहत एआई आधारित कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एआई डेटा लैब स्थापित की जा रही हैं। साथ ही, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के सहयोग से 105.3 करोड़ रुपये की लागत से चार सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप स्थापित करने के लिए समझौता किया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिव अंकित आनंद ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से नागरिकों तक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध सेवाएं पहुंचाना तथा छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करना है।

जल जीवन मिशन पर मुख्य सचिव की समीक्षा, हर घर तक पेयजल पहुंचाने पर जोर

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जल जीवन मिशन (हर घर नल) की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ मिशन के क्रियान्वयन और लंबित कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन से महिलाओं का समय बचेगा, जलजनित बीमारियों में कमी आएगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में मिशन मोड में कार्ययोजना तैयार की जाए और ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कलेक्टरों से हर माह मिशन की प्रगति की समीक्षा करने को भी कहा।

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि पूर्ण और हस्तांतरित योजनाओं का 31 अगस्त तक शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। वहीं, अधूरी योजनाओं को 31 दिसंबर तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई करने को भी कहा।

मुख्य सचिव ने जल स्रोतों के संरक्षण और रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने के लिए जिला स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने, नए जल स्रोतों की पहचान करने तथा आवश्यकता होने पर वैकल्पिक स्रोत विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रखा जा सकता।

बैठक में सोलर आधारित नल-जल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने योजना-वार वित्तीय विश्लेषण, रनिंग बिलों का समय पर भुगतान तथा जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), सांसद निधि, विधायक निधि, सीएसआर और अन्य उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर योजनाओं को पूरा करने पर जोर दिया।

बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, सभी जिलों के कलेक्टर और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

बिना लाइसेंस उर्वरक-कीटनाशक कारोबार पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई

रायपुर/दुर्ग। TODAY छत्तीसगढ़  / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर नकली, अमानक और अवैध उर्वरक-कीटनाशकों के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग जिले के ग्राम चिंगरी (अंडा) में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। कृषि विभाग के अनुसार, बिना वैध अनुज्ञप्ति के उर्वरक एवं कीटनाशकों के निर्माण, भंडारण और विक्रय के आरोप में दो गोदामों को सील कर बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की गई है।

कृषि विभाग ने बताया कि जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल को चंद्राकर किराना स्टोर्स परिसर में अवैध रूप से जैव उत्प्रेरक और कीटनाशकों के निर्माण एवं भंडारण की सूचना मिली थी। निरीक्षण के दौरान गोदाम बंद मिला। विभाग के अनुसार, किरायेदार वरुण त्रिपाठी को मौके पर बुलाया गया, लेकिन सहयोग नहीं मिलने पर मकान मालिक, पंचों और ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचनामा तैयार कर गोदाम का ताला खुलवाया गया।

विभाग का दावा है कि निरीक्षण में बिना लाइसेंस जैव उत्प्रेरक एवं कीटनाशकों के निर्माण के लिए कच्चा माल, तैयार उत्पाद, पैकिंग मशीनें और बड़ी मात्रा में रॉ मटेरियल मिला। जांच में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा कीटनाशक अधिनियम, 1968 के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।

कार्रवाई के दौरान जैव उत्प्रेरक, कीटनाशक, उर्वरक, रसायनों से भरे ड्रम, पैकिंग एवं सीलिंग मशीनों सहित अन्य उपकरण जब्त किए गए। विभाग ने बताया कि सभी सामग्री को संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जब्त कर गोदामों को सील कर दिया गया है।

कृषि विभाग के अनुसार, संबंधित संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

उप संचालक कृषि संदीप भाई ने कहा कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने, नकली या अमानक कृषि आदानों के निर्माण, कालाबाजारी और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि यदि कहीं नकली या निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक अथवा कीटनाशकों की बिक्री की जानकारी मिले तो इसकी शिकायत कृषि विभाग को करें।

रैली के दौरान घायल 16 पुलिस जवानों से मिले पुलिस कमिश्नर

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर में बुधवार को एक रैली के दौरान कानून-व्यवस्था ड्यूटी में तैनात 16 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, बैरिकेडिंग के दौरान कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर पत्थर और बोतलें फेंके जाने से यह स्थिति बनी। घायलों में एक महिला आरक्षक भी शामिल है, जबकि दो पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला अस्पताल पहुंचे और भर्ती पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति और उपचार के संबंध में जानकारी ली तथा सभी को समुचित इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

पुलिस के अनुसार, घायल जवान कलेश्वर वर्मा ने बताया कि बैरिकेडिंग के दौरान भीड़ के बीच फंस जाने से उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया। वहीं, प्रशिक्षु उप निरीक्षक (पीएसआई) देवराज सिंह के सिर पर बोतल लगने से गंभीर चोट आई है और उनका उपचार चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।

पुलिस ने बताया कि अन्य घायल आरक्षकों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस दौरान पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल, एसीपी नीलेश द्विवेदी, टीआई राजेश मरई सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल में मौजूद रहे।

नोट: पथराव और बोतलबाजी संबंधी जानकारी पुलिस के आधिकारिक बयान पर आधारित है। घटना के संबंध में अन्य पक्ष का संस्करण इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।

भारी बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जारी किए इमरजेंसी नंबर

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मौसमी बीमारियों की रोकथाम और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला और विकासखंड स्तर पर आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि बुखार, उल्टी-दस्त अथवा अन्य मौसमी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें।

जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी से 8770664365 पर संपर्क किया जा सकता है। बिलासपुर शहर के लिए खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रक्षित जोगी का मोबाइल नंबर 9009727934 जारी किया गया है।

इसी तरह बिल्हा के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकेश गुप्ता (9009731426), कोटा के डॉ. निखिलेश गुप्ता (9770146540), मस्तूरी के डॉ. अनिल कुमार (9827505957) तथा तखतपुर के डॉ. उमेश साहू (9407728300) से आवश्यकता पड़ने पर संपर्क किया जा सकता है।

शहरी क्षेत्र के लिए शहरी कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. टार्ज़न आदिले (7241133198) तथा जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट एपिडेमियोलॉजिस्ट पंकज सिंह (7587038622) का संपर्क नंबर भी जारी किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि भारी बारिश के दौरान जलजनित और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नागरिक बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तत्काल स्वास्थ्य विभाग या कॉम्बेट टीम से संपर्क कर समय पर उपचार लें।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास और पुनर्वास पर सरकार का बड़ा एक्शन प्लान

रायपुर ।  TODAY छत्तीसगढ़  / उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन नक्सल आरोपियों के विरुद्ध गंभीर जनहानि के मामले नहीं हैं, उनके प्रकरणों की विधिसम्मत समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके लिए विधि विभाग की सहायता से अभियोजन अधिकारियों और शासकीय वकीलों की टीम गठित की जाएगी तथा प्रकरण वापसी की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की जाएगी।

नक्सल मुक्त गांवों को मिलेगा ₹1 करोड़

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे गांवों के तीव्र विकास के लिए नक्सल मुक्त घोषित प्रत्येक ग्राम में एक-एक करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए जाएंगे। इससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा। प्रथम चरण में 50 गांवों का चयन किया गया है, जिनमें सुकमा के 20, बीजापुर के 20 और नारायणपुर के 10 गांव शामिल हैं।

15 अगस्त को हर नक्सल मुक्त गांव में फहरेगा तिरंगा

उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी 15 अगस्त 2026 को सभी नक्सल मुक्त गांवों में तिरंगा यात्रा और ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि राष्ट्रीय एकता, विश्वास और जनभागीदारी का संदेश ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे।

पीड़ित परिवारों को मिलेगा आवास और सहायता

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी नक्सल पीड़ित एवं पुनर्वासित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के विशेष प्रावधानों के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए। जिन क्षेत्रों में बड़ी नक्सली घटनाएं हुई हैं, वहां शहीद जवानों और पीड़ित नागरिकों की स्मृति में सामुदायिक स्मारक भी बनाए जाएंगे।

उप मुख्यमंत्री ने जिलावार नक्सली घटनाओं में शहीद हुए जवानों और मृत नागरिकों के परिजनों को दी गई सहायता तथा लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी पात्र परिवारों को शासन की सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

एक माह में मिलेगा प्रोत्साहन राशि का भुगतान

श्री शर्मा ने पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर पुनर्वासित हुए युवाओं को घोषित प्रोत्साहन राशि एक माह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही नक्सल पीड़ितों एवं पुनर्वासितों से संबंधित सभी जानकारी डिजिटल डैशबोर्ड में दर्ज करने को कहा।

उन्होंने माओवादियों द्वारा लूटे गए हथियारों की बरामदगी के लिए अंतर्राज्यीय समन्वय समिति गठित करने तथा अभियान के दौरान जंगलों में कोई हथियार न छूटे, यह सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में गृह विभाग, पुलिस विभाग और संबंधित नक्सल प्रभावित जिलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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