कबाड़ी बाजार में छापा नहीं, लेकिन पुलिस की एंट्री से बढ़ी बेचैनी

राजनांदगांव।  TODAY छत्तीसगढ़  /  चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने और संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने शहर की विभिन्न कबाड़ी दुकानों में आकस्मिक जांच अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने पांच प्रमुख कबाड़ी दुकानों का निरीक्षण कर वहां रखे सामान का सत्यापन किया। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश में यह कार्रवाई की गई।

अभियान के दौरान ममता नगर स्थित रफीक कबाड़ी, भरकापारा के मुन्ना कबाड़ी, पुराना गंज चौक स्थित गनी कबाड़ी, कन्हारपुरी के सलीम कबाड़ी तथा लखोली नाका स्थित अरुण कबाड़ी की दुकानों एवं गोदामों की जांच की गई। पुलिस को जांच के दौरान कोई भी संदिग्ध अथवा चोरी का सामान नहीं मिला। 

पुलिस अधिकारियों ने कबाड़ी संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे किसी भी परिस्थिति में चोरी का लोहा, धातु अथवा अन्य संदिग्ध सामान की खरीदारी न करें। साथ ही यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध सामान बेचने के लिए दुकान पर पहुंचे तो इसकी तत्काल सूचना नजदीकी थाना पुलिस को दें।

अब अखबार में समोसा दिया तो सीधा जेल! FSSAI का बड़ा एक्शन

नई दिल्ली।  TODAY छत्तीसगढ़  /  समोसा, कचौरी और अन्य खाद्य पदार्थों को अखबार में लपेटकर बेचने वाले दुकानदारों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त चेतावनी जारी की है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग, भंडारण या परोसने के लिए अखबार का उपयोग प्रतिबंधित है और नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

एफएसएसएआई ने कहा है कि अखबारों की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में सीसा (लेड), भारी धातुएं और अन्य हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं। जब गर्म या तैलीय खाद्य पदार्थ अखबार के संपर्क में आते हैं, तो ये रसायन भोजन में मिल सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) विनियम-2018 का हवाला देते हुए कहा कि भोजन को रखने, लपेटने या परोसने के लिए अखबार अथवा किसी भी अप्रमाणित सामग्री का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।

एफएसएसएआई के अनुसार यदि कोई दुकानदार चेतावनी के बावजूद खाद्य पदार्थों को अखबार में लपेटकर बेचता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की जेल अथवा पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक है अखबार?

विशेषज्ञों के मुताबिक अखबारों में उपयोग होने वाली स्याही में मौजूद रसायन और भारी धातुएं गर्म भोजन के संपर्क में आने पर भोजन में घुल सकती हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन शरीर में विषैले तत्वों की मात्रा बढ़ा सकता है और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

एफएसएसएआई ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे अखबार में परोसे या पैक किए गए खाद्य पदार्थों से बचें और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने वाले विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदें।

‘लेडी ड्रग स्मगलर’ पर पुलिस का शिकंजा, 16 किलो गांजा बरामद

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के ‘नशामुक्त छत्तीसगढ़’ विजन के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान में रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। टिकरापारा पुलिस ने एक अंतर्राज्यीय महिला तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 16.434 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत 8 लाख 21 हजार 700 रुपये बताई गई है।

पुलिस के अनुसार 6 जून को सूचना मिली थी कि भाठागांव बस स्टैंड के समीप रावणभाठा मैदान के पास एक महिला अवैध गांजा बेचने के लिए ग्राहक तलाश रही है। सूचना मिलते ही पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) संदीप कुमार पटेल के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर मौके पर भेजी गई।

टिकरापारा थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मरई के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध महिला को पकड़ लिया। महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में तलाशी लेने पर उसके पास से 16.434 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।

पूछताछ में आरोपी महिला ने अपनी पहचान पूजा देवी सोनकर (40 वर्ष) निवासी ग्राम चकरा, थाना राजगढ़, जिला गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के रूप में बताई। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह गांजे की खेप ओडिशा से लेकर उत्तर प्रदेश ले जा रही थी, जहां इसे खपाने की योजना थी।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना टिकरापारा में अपराध क्रमांक 501/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार को आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल रायपुर भेज दिया गया।

नशे के नेटवर्क पर पुलिस की नजर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रायपुर पुलिस नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोका जा सके।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी किसी भी जानकारी की सूचना तत्काल पुलिस, डायल-112 या सिटीजन कॉप एप के माध्यम से दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

जमीन बेचकर कमाए 25 लाख, फिर खरीदार को फंसा दिया कानूनी जाल में

दुर्ग।  TODAY छत्तीसगढ़  /  भूमि विक्रय के नाम पर 25.51 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में पुलगांव थाना पुलिस ने पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने जमीन का सौदा कर खरीदार से पूरी राशि प्राप्त कर ली, लेकिन बाद में नामांतरण प्रक्रिया में आपत्ति लगाकर उसे निरस्त करा दिया।

पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता ने मौजा चंदखुरी स्थित खसरा नंबर 1227/1, रकबा 0.0420 हेक्टेयर भूमि खरीदने के लिए कुल 25 लाख 51 हजार रुपये का भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया था। इसके बाद भूमि का पंजीकृत विक्रय पत्र भी निष्पादित किया गया। 

25.51 लाख रुपये की भूमि धोखाधड़ी में पिता-पुत्र पर केस दर्ज

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विक्रय प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपियों गुपेन्द्र कुमार निर्मलकर और खिलेन्द्र कुमार निर्मलकर ने राजस्व अभिलेखों में आपत्ति प्रस्तुत कर नामांतरण की कार्रवाई रुकवा दी। इससे शिकायतकर्ता को आर्थिक एवं कानूनी नुकसान उठाना पड़ा।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को भूमि संबंधी दस्तावेजों, सहमति पत्रों और अन्य अभिलेखों के परीक्षण के दौरान प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी एवं षड्यंत्र के तथ्य मिले। इसके आधार पर थाना पुलगांव में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) एवं 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

पुलिस ने विक्रय पत्र, सहमति पत्र, इकरारनामा, बैंक लेन-देन संबंधी दस्तावेज सहित अन्य अभिलेखों को जांच में शामिल किया है। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

पुलिस की अपील

दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूमि क्रय-विक्रय से पहले स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन अवश्य करें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या धोखाधड़ी की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।

पेड़ के नीचे चल रही थी 'शराब की दुकान', 105 पौवा के साथ गिरफ्तार

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी रायपुर में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 105 पौवा देशी शराब बरामद की है। जब्त शराब की कीमत करीब 10,500 रुपये आंकी गई है।

पुलिस के अनुसार 6 जून को एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट को सूचना मिली थी कि डी.डी. नगर थाना क्षेत्र के सरोना स्थित शक्ति घाट के पास एक महिला अवैध रूप से शराब की बिक्री कर रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) संदीप पटेल के निर्देश पर संयुक्त टीम गठित कर मौके पर भेजी गई।

एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स तथा डी.डी. नगर पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और संदिग्ध महिला को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम नेहा कण्डरा निवासी सरोना, डी.डी. नगर बताया।

तलाशी के दौरान महिला के पास रखी बोरी से 105 पौवा देशी शराब बरामद हुई। पुलिस द्वारा शराब रखने और बिक्री से संबंधित दस्तावेज मांगे जाने पर वह कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। इस दौरान उसने पुलिस को गुमराह करने का भी प्रयास किया।

पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ थाना डी.डी. नगर में अपराध क्रमांक 359/26 के तहत धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अवैध शराब, नशे और मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

#VIDEO : 15 जून से पहले मिला बोनस, ATR में पर्यटकों को दिखा टाइगर

(TCG NEWS / फाइल फोटो)
बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) में शनिवार शाम सफारी के दौरान पर्यटकों को एक बार फिर बाघ के दर्शन हुए। टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। दर्रापानी क्षेत्र में बाघ को प्रत्यक्ष रूप से देखने के बाद पर्यटकों का उत्साह देखते ही बना।

जानकारी के अनुसार बेलगहना निवासी श्याम सुंदर तिवारी अपने परिवार के साथ शनिवार को अचानकमार टाइगर रिजर्व की सफारी के लिए पहुंचे थे। सफारी के दौरान दर्रापानी क्षेत्र में उन्हें बाघ दिखाई दिया। वाहन चालक शिवशंकर सोनवानी और पर्यटक गाइड निरंजनी साकत की सतर्कता और अनुभव के कारण पर्यटक सुरक्षित दूरी से बाघ का दीदार कर सके। जंगल के राजा को सामने देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। कई पर्यटकों ने इस दुर्लभ क्षण को अपने कैमरों में भी कैद किया। बाघ की मौजूदगी ने सफारी को यादगार बना दिया।

अचानकमार टाइगर रिजर्व अपने बेहतर संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए देशभर में पहचान रखता है। यही कारण है कि यहां आने वाले पर्यटकों को अक्सर वन्यजीवों के प्राकृतिक वातावरण में दर्शन का अवसर मिलता है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार अचानकमार टाइगर रिजर्व सहित देश के अधिकांश राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व आगामी 15 जून से मानसून सीजन के दौरान पर्यटकों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। ऐसे में बंदी से पहले बाघ के दर्शन पर्यटकों के लिए किसी खास उपहार से कम नहीं माने जा रहे हैं। 


कैमरे की कलम: तिलचट्टों का गणतंत्र और सपनों की लीक होती हुई परीक्षा

देश में इन दिनों सबसे सुरक्षित चीज़ क्या है? न संविधान, न नौकरियाँ, न युवाओं के सपने। अगर कुछ सुरक्षित है तो वह है सरकारों का यह विश्वास कि जनता सब कुछ भूल जाएगी। कल देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर में लाखों लोग उस आंदोलन से जुड़े जो सरकारों से सीधे सवाल पूछ रही है, देश के हालात और युवाओं के मन में सुलगते सैकड़ों सवालों के बीच शान्ति पूर्ण आंदोलन का आह्वान। आंदोलन में शामिल लोगों की भीड़ के बीच कहीं जय भीम के नारे, कहीं आरएसएस के खिलाफ हल्ला तो किसी कोने से आजादी के लिए उठता शोर। ये शोर कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से उठा जिसे देश ने देखा, बिना डरे बिना हल्ला मचाये।  

एक समय था जब तिलचट्टे रसोई में मिलते थे। अब वे राजनीति में मिल रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि रसोई वाले तिलचट्टे देखकर लोग चीखते थे, राजनीतिक तिलचट्टों को देखकर लोग सेल्फी लेते हैं। और देश की हालत ऐसी हो चुकी है कि अब युवा यह तय नहीं कर पा रहा कि वह नौकरी ढूंढे, परीक्षा की तैयारी करे, या किसी नए आंदोलन का सदस्य बन जाए।

भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश कहलाता है। यह अलग बात है कि इस युवा आबादी का बड़ा हिस्सा रोजगार कार्यालयों, कोचिंग संस्थानों और सोशल मीडिया के बीच पेंडुलम की तरह झूल रहा है। सरकारें हर साल करोड़ों नौकरियों का सपना दिखाती हैं और बदले में करोड़ों युवाओं को "अगले प्रयास के लिए शुभकामनाएँ" का संदेश मिलता है। 

पेपर लीक अब कोई दुर्घटना नहीं रह गया है, यह तो हमारी परीक्षा व्यवस्था का आधिकारिक पाठ्यक्रम बन चुका है। पहले छात्र प्रश्नपत्र खोलते थे, अब प्रश्नपत्र पहले से ही छात्रों के मोबाइल खोल लेते हैं। परीक्षा केंद्रों से ज्यादा चर्चा व्हाट्सऐप ग्रुपों की होती है। कोचिंग संस्थानों से ज्यादा भरोसा टेलीग्राम चैनलों पर किया जाता है। और सरकारें हर बार ऐसे चौंक जाती हैं जैसे पहली बार उन्हें पता चला हो कि पानी गीला होता है।

देश का बेरोज़गार युवा आज सबसे बड़ा व्यंग्य बन चुका है। वह सुबह राष्ट्रनिर्माण के भाषण सुनता है, दोपहर में भर्ती परीक्षा का फार्म भरता है, शाम को परीक्षा स्थगित होने की खबर पढ़ता है और रात को पेपर लीक का वीडियो देखता है। फिर उससे कहा जाता है कि धैर्य रखो, देश आगे बढ़ रहा है। देश आगे बढ़ भी रहा है—बस समस्या यह है कि युवा पीछे छूट रहा है।

ऐसे माहौल में अगर कोई "कॉकरोच जनता पार्टी" पैदा होती है तो उसमें आश्चर्य कैसा? असली सवाल यह नहीं है कि कॉकरोच कौन हैं। असली सवाल यह है कि देश के लाखों पढ़े-लिखे नौजवान खुद को तिलचट्टों से जोड़ने में अपमान क्यों महसूस नहीं कर रहे? शायद इसलिए कि उन्हें लगने लगा है कि इस व्यवस्था में उनकी हैसियत भी किसी दीवार की दरार में छिपे जीव से ज्यादा नहीं है।

राजनीतिक दल आज कॉकरोचों की वंशावली खोज रहे हैं। कोई उन्हें सत्ता का एजेंट बता रहा है, कोई विपक्ष की साजिश। लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि आखिर वह जमीन क्यों तैयार हुई जिसमें ऐसे आंदोलन अंकुरित हो रहे हैं? जब भर्ती परीक्षाएँ मज़ाक बन जाएँ, डिग्रियाँ सजावट का सामान बन जाएँ और मेहनत का इनाम पेपर लीक हो जाए, तब राजनीति के पुराने ब्रांडों पर भरोसा टूटना स्वाभाविक है।

देश में आज हर समस्या का समाधान नैरेटिव से खोजा जा रहा है। बेरोज़गारी है तो राष्ट्रवाद की चर्चा कर लो। पेपर लीक है तो किसी और मुद्दे पर बहस करा दो। महँगाई है तो इतिहास की लड़ाई छेड़ दो। लेकिन पेट इतिहास से नहीं भरता, नौकरी नैरेटिव से नहीं मिलती और भविष्य भाषणों से नहीं बनता।

विडंबना यह है कि आज का युवा सरकार से कम, सिस्टम से ज्यादा नाराज़ है। उसे यह भरोसा नहीं रहा कि उसकी मेहनत और प्रतिभा का सम्मान होगा। उसे लगता है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बिक सकता है, भर्ती से पहले सीटें तय हो सकती हैं और इंटरव्यू से पहले परिणाम लिखा जा सकता है।

ऐसे समय में कॉकरोच सड़क पर उतर रहे हैं। वे सफल होंगे या असफल, ईमानदार होंगे या अवसरवादी, यह भविष्य बताएगा। लेकिन उनकी लोकप्रियता एक चेतावनी है। यह उस पीढ़ी की बेचैनी का संकेत है जो वर्षों से सुन रही है कि वही देश का भविष्य है, लेकिन वर्तमान में उसके हिस्से सिर्फ प्रतीक्षा, परीक्षा और निराशा आई है और अगर व्यवस्था ने इस चेतावनी को भी मज़ाक समझ लिया, तो आने वाले समय में तिलचट्टे ही नहीं, पूरी दीवारें बोलने लगेंगी।

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