कोरबा/पाली। डिजिटल इंडिया, सामाजिक समानता और संवैधानिक अधिकारों की बात करने वाले आधुनिक भारत में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो समाज की सोच पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां प्रेम विवाह करने वाले एक दंपती और उनके परिवार को पिछले 11 वर्षों से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ रहा है।
ग्राम पोड़ी, थाना पाली निवासी अशोक कुमार प्रजापति ने 4 जुलाई 2015 को मनीषा कंवर से प्रेम विवाह किया था। दोनों बालिग थे और कानूनन विवाह पूरी तरह वैध था। लेकिन अंतरजातीय विवाह होने के कारण समाज के कुछ लोगों ने पंचायत बुलाकर परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। तब से लेकर आज तक परिवार को समाज से अलग-थलग रखा गया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें शादी-ब्याह, तीज-त्योहार, सामाजिक कार्यक्रमों और यहां तक कि पारिवारिक संबंधों से भी दूर कर दिया गया। आवेदन में उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि समाज के लोगों ने उनका "मृत्युभोज" तक कर लिया, जबकि वे जीवित हैं। यह आरोप न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा भी दर्शाता है।
परिवार का कहना है कि बहिष्कार के कारण वे सामान्य सामाजिक जीवन नहीं जी पा रहे हैं। उन्हें अपने रिश्तेदारों और समाज के लोगों से मिलने-जुलने तक में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप यह भी है कि समाज में दोबारा शामिल करने के लिए आर्थिक मांगें की गईं।
करीब 11 वर्षों तक सामाजिक उपेक्षा सहने के बाद अशोक कुमार प्रजापति ने 29 मई 2026 को थाना पाली और एसडीएम कार्यालय में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने और सामान्य जीवन जीने का अवसर दिलाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार देता है। वहीं सामाजिक बहिष्कार जैसी प्रथाएं न केवल मानवाधिकारों के विरुद्ध हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को भी चुनौती देती हैं।
अब यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक बन गया है जो आज भी जातीय और सामाजिक बंधनों के नाम पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को स्वीकार नहीं कर पा रही है। प्रशासन की कार्रवाई के साथ-साथ समाज को भी आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि क्या प्रेम और वैधानिक विवाह की सजा किसी परिवार को वर्षों तक सामाजिक रूप से मृत घोषित कर देना हो सकती है।
