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'पिटाई से हुई मौत' के आरोप पर उबल पड़ा गांव, पुलिस घेरे में

रायगढ़। TODAY छत्तीसगढ़  /  अवैध शराब मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय बघेल की हिरासत के दौरान हुई मौत के बाद जिले में माहौल गरमा गया है। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर घूसखोरी और मारपीट के गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल तथा कोतरारोड थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। 

जानकारी के अनुसार कोतरारोड थाना क्षेत्र के नवापारा गांव निवासी संजय बघेल को अवैध शराब बिक्री के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा था। शनिवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंच गए और घटना पर आक्रोश जताया।

ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान तथा हिरासत में संजय बघेल के साथ मारपीट की गई थी। उनका दावा है कि पुलिसकर्मियों द्वारा की गई कथित पिटाई के कारण उसकी हालत बिगड़ी और बाद में मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि थाना क्षेत्र में घूसखोरी का खेल चल रहा है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अस्पताल में प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने कोतरारोड थाने के सामने भी धरना देकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान "जय भीम" के नारे लगाए गए और मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग भी उठाई।

सरपंच नंद कुमार बरेठ और मृतक के परिजनों ने बताया कि संजय को करीब तीन दिन पहले पुलिस ने पकड़ा था। उनका आरोप है कि हिरासत के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।

वहीं जेल अधीक्षक जी.एस. सोरी के अनुसार संजय बघेल को 10 जून को जेल में दाखिल किया गया था। 12 जून को उसकी तबीयत खराब होने पर जेल अस्पताल में उपचार कराया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर 13 जून को उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। 

फिलहाल मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर जांच की मांग उठ रही है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगा। 



सत्य निजनाम सत्संग सम्मेलन में पहुंचे मुख्यमंत्री, नशामुक्ति का दिया संदेश

जांजगीर-चांपा। TODAY छत्तीसगढ़  /   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोड़ी (राछा) स्थित सत्य निजनाम बोध संस्थान में आयोजित सत्य निजनाम सत्संग सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर संस्थान के सदस्यों ने पुष्पवर्षा और गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने परमपूज्य सद्गुरु सत्य कबड्डीदास जी एवं गुरुमाता सत्य लीला देवी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आश्रम परिसर में लाल चंदन का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सत्य निजनाम बोध संस्थान आध्यात्म और नशामुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों से ही स्वस्थ एवं जागरूक समाज का निर्माण संभव है। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए नशामुक्ति को जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। साथ ही जनजागरूकता के माध्यम से समाज को नशामुक्त बनाने के लिए विभिन्न अभियान संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास का वातावरण बना है। इन क्षेत्रों में अब सड़क, दूरसंचार, राशन वितरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंच रहा है। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076, अटल डिजिटल सेवा केंद्र सहित विभिन्न जनसेवा योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में संस्थान के अनुयायी उपस्थित रहे।


दबंगई का खेल खत्म, घर में घुसकर वसूली करने वाले गिरफ्तार

रायगढ़।  TODAY छत्तीसगढ़  /  उधारी रकम की जबरन वसूली के लिए घर में घुसकर मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने वाले तीन आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में चिन्हांकित गुंडा बदमाश कपिल सोलंकी भी शामिल है।

पुलिस के अनुसार आशीर्वाद पुरम कॉलोनी निवासी कमलेश सिंह (52) ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह कोयला ट्रांसपोर्टिंग का कार्य करता है। आर्थिक परेशानी के कारण वह कुडेकेला निवासी ललेश अग्रवाल के करीब सात लाख रुपये का भुगतान पिछले तीन वर्षों से नहीं कर पाया था।

शिकायत के मुताबिक 11 जून की दोपहर कपिल सोलंकी अपने साथियों मनीष परियानी और गिरीश माखीजा के साथ जबरन घर में घुस आया। आरोपियों ने पीड़ित को धमकाते हुए कहा कि यदि रकम नहीं दी गई तो उसका मर्डर करवा दिया जाएगा। इसके बाद आरोपियों ने सात लाख रुपये के बदले 10 लाख रुपये की मांग करते हुए हाथ-मुक्कों और डंडे से मारपीट की।

पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को मिलने पर उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए।

पुलिस टीम ने दबिश देकर पहले मुख्य आरोपी कपिल सोलंकी को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसके दो साथियों की संलिप्तता सामने आने पर मनीष परियानी और गिरीश माखीजा को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में तीनों ने घटना में शामिल होना स्वीकार किया।

पुलिस के अनुसार कपिल सोलंकी कोतवाली थाना क्षेत्र का चिन्हांकित गुंडा बदमाश है। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, बलवा और मारपीट समेत कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। वहीं मनीष परियानी और गिरीश माखीजा के खिलाफ भी विभिन्न थानों में लूट, जुआ, आबकारी और मारपीट के कई मामले दर्ज हैं।

तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जिले में गुंडागर्दी, अवैध वसूली और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।


एशिया कप जीतकर लौटा अवि, मुख्यमंत्री बोले- प्रदेश को है गर्व

रायपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से रविवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारतीय अंडर-18 हॉकी टीम के एशिया कप विजेता सदस्य अवि मानिकपुरी ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अवि मानिकपुरी को अंडर-18 एशिया कप में भारत की ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत के बल पर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अवि मानिकपुरी की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास जताया कि अवि भविष्य में भी भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि अवसर और संकल्प मिलने पर छत्तीसगढ़ की प्रतिभाएं विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। खेल अधोसंरचना के विकास तथा खिलाड़ियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने से युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि बिलासपुर निवासी अवि मानिकपुरी भारतीय हॉकी के उभरते हुए खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने हाल ही में जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप प्रतियोगिता में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जिसमें अवि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष फिरोज अंसारी, महासचिव डॉ. मनीष श्रीवास्तव तथा अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मृणाल चौबे भी उपस्थित थे।


चोरों को नहीं पता था, पुलिस का 'शेरू' पहुंच जाएगा घर तक

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  सकरी पुलिस ने चोरी की एक वारदात का चंद घंटों के भीतर खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से चोरी गए सोने-चांदी के जेवरात बरामद कर लिए गए हैं। इस कार्रवाई में डॉग स्क्वॉड और एफएसएल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पुलिस के अनुसार साईं नगर उसलापुर निवासी नीता बघेल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह कृष्णा अस्पताल में कार्यरत हैं। 12 जून की रात ड्यूटी पर जाने के कारण वह घर में ताला लगाकर गई थीं। अगले दिन सुबह घर लौटने पर मुख्य दरवाजे का ताला टूटा मिला और आलमारी में रखे सोने-चांदी के जेवरात तथा नगदी गायब थे।

चोरी गए सामान में एक जोड़ी चांदी की पायल, दो चांदी के कमरबंद, एक जोड़ी सोने के कान के टॉप्स, एक सोने की फुल्ली तथा करीब एक हजार रुपये नकद शामिल थे। चोरी गए सामान की कुल कीमत लगभग 60 हजार रुपये आंकी गई है।

घटना की सूचना मिलते ही सकरी पुलिस ने मामला दर्ज कर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर थाना प्रभारी ने तत्काल विशेष टीम गठित की। पुलिस टीम डॉग स्क्वॉड और एफएसएल विशेषज्ञों के साथ मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।

जांच के दौरान पुलिस डॉग को घटनास्थल से मिले सुरागों की गंध सूंघाई गई। डॉग सीधे साईं नगर स्थित विकास चतुर्वेदी और अमन टंडन के घर तक पहुंचा। दोनों संदिग्धों से पूछताछ की गई। प्रारंभ में उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर चोरी की वारदात कबूल कर ली।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी गए सभी जेवरात बरामद कर लिए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में विकास चतुर्वेदी (24) निवासी धरमपुरा जिला मुंगेली हाल मुकाम साईं नगर उसलापुर तथा अमन टंडन (20) निवासी बैगाकापा जिला मुंगेली हाल मुकाम साईं नगर उसलापुर शामिल हैं।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। चोरी की वारदात का त्वरित खुलासा करने में सकरी पुलिस, एफएसएल टीम तथा डॉग मास्टर राम मिलन सिंह की विशेष भूमिका रही।


जेल गया, फिर जिंदा नहीं लौटा! मौत पर उठे बड़े सवाल

रायगढ़।  TODAY छत्तीसगढ़  / अवैध शराब बिक्री के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक की मौत जेल में मारपीट के कारण हुई है, जबकि जेल प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

जानकारी के अनुसार कोतरारोड थाना क्षेत्र के नवापारा गांव निवासी संजय बघेल (28) को 10 जून को अवैध शराब बिक्री के मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था। शनिवार सुबह जेल में उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मौत की खबर मिलते ही परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने मौत को संदिग्ध बताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि जेल में संजय के साथ मारपीट की गई थी, जिसके चलते उसकी जान गई। उनका यह भी कहना है कि कई घंटों तक उन्हें शव देखने की अनुमति नहीं दी गई।

मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि एक सामाजिक कार्यक्रम से पुलिस ने दो लोगों को पकड़ा था। कथित तौर पर एक व्यक्ति को 40 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया गया, जबकि रकम नहीं देने पर उनके बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे और परिजनों को समझाइश दी। अधिकारियों ने बताया कि मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शव परिजनों को दिखाया जाएगा। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

नवापारा के सरपंच नंद कुमार बरेठ ने बताया कि संजय को तीन दिन पहले अवैध शराब मामले में गिरफ्तार किया गया था। मौत की सूचना मिलने के बाद ग्रामीण अस्पताल पहुंचे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

जेल अधीक्षक जी.एस. सोरी ने बताया कि संजय बघेल को 10 जून को जेल में दाखिल किया गया था। 12 जून को तबीयत खराब होने पर जेल अस्पताल में उसका उपचार किया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर शनिवार सुबह उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

कैमरे की कलम: "आईना तोड़ो, व्यवस्था बचाओ"

बिलासपुर में एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में एक पुलिसकर्मी थाने के भीतर जमीन पर लेटा दिखाई देता है। आसपास कुछ शराब की बोतलें भी नजर आती हैं। वीडियो की सत्यता क्या है, उसमें दिख रहा दृश्य किस परिस्थिति का है, उसे किसने रिकॉर्ड किया और किसने वायरल किया—ये सब जांच का विषय हैं। होना भी चाहिए। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पड़ताल आवश्यक है लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद जो सबसे दिलचस्प दृश्य सामने आया, वह वीडियो में नहीं बल्कि उसके बाद की प्रतिक्रिया में था।

जिले के पुलिस कप्तान ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति लाइक, कमेंट्स और व्यूअरशिप बढ़ाने के लिए फर्जी वीडियो बनाएगा या बिना प्रमाणिकता के वायरल करेगा तो उसके खिलाफ अपराध दर्ज किया जाएगा। यह बात बिल्कुल उचित है। झूठ फैलाना, किसी की छवि खराब करना और सोशल मीडिया को अफवाहों का अखाड़ा बनाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। मगर समस्या यह है कि हमारे यहां अक्सर अपराध की परिभाषा घटना से नहीं, व्यक्ति से तय होती दिखाई देती है।  

इतिहास बताता है कि संस्थाएँ आईना तोड़कर नहीं, आईने में दिख रही खामियों को सुधारकर मजबूत होती हैं। क्योंकि अंततः किसी भी लोकतंत्र में सबसे बड़ा अपराध सच दिखाना नहीं, सच से आँख चुराना होता है।

यही कारण है कि इस मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं बन पाया कि वीडियो में क्या है, बल्कि यह बन गया कि वीडियो किसने बनाया। यानी अगर किसी थाने के भीतर कुछ असामान्य दिख रहा है तो उससे ज्यादा गंभीर विषय यह है कि किसी ने उसे रिकॉर्ड कैसे कर लिया। यह वही मानसिकता है जिसमें दीवार पर उभरी सीलन से ज्यादा गुस्सा उस आदमी पर आता है जिसने सीलन की तस्वीर खींच ली।

विडंबना यह है कि यही व्यवस्था वर्षों से जनता से अपील करती रही है कि कहीं अपराध दिखे, भ्रष्टाचार दिखे, अवैध वसूली दिखे, सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन दिखे तो वीडियो बनाइए, सबूत दीजिए, शिकायत कीजिए। लेकिन जैसे ही कैमरे का कोण व्यवस्था की ओर घूम जाता है, अचानक कैमरा संदिग्ध हो जाता है और रिकॉर्डिंग अपराध के करीब पहुंच जाती है। ऐसा लगता है मानो समस्या बीमारी नहीं, एक्स-रे मशीन हो। हमारे यहां कानून की एक बड़ी खूबी यह है कि वह सबके लिए समान बताया जाता है और उसकी सबसे बड़ी विडंबना भी यही है कि व्यवहार में वह सबके लिए समान दिखाई नहीं देता।

यदि कोई सामान्य नागरिक सार्वजनिक स्थान पर शराब के नशे में मिलता है तो उसके वीडियो सोशल मीडिया पर घंटों घूमते रहते हैं। लोग उसे नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, पुलिस उसे कानून का पाठ पढ़ाती है और समाज उसे संस्कारों का पाठ पढ़ाता है। लेकिन जब चर्चा में कोई सफेदपोश या वर्दीधारी आता है तो अचानक निजता, प्रतिष्ठा, गरिमा और प्रक्रिया जैसे शब्द शब्दकोश से निकलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की मेज पर सज जाते हैं।

ऐसा नहीं है कि पुलिसकर्मी को गरिमा का अधिकार नहीं है, बिल्कुल है। बल्कि उतना ही है जितना किसी आम नागरिक को है लेकिन प्रश्न यह है कि क्या यह अधिकार सभी को समान रूप से मिलता है? यदि हां, तो फिर आम आदमी की गरिमा की रक्षा के समय यही तीखापन अक्सर दिखाई क्यों नहीं देता? दरअसल समस्या वीडियो नहीं है। समस्या वह असहजता है जो वीडियो पैदा करता है। आईना हमेशा सुंदर चेहरा नहीं दिखाता। कभी-कभी वह चेहरे पर जमी धूल भी दिखाता है। और इतिहास गवाह है कि धूल साफ करने की तुलना में आईना तोड़ना हमेशा आसान काम रहा है।

पुलिस महकमा भी आखिर इसी समाज का हिस्सा है। वहां भी अच्छे लोग हैं, ईमानदार लोग हैं, कर्तव्यनिष्ठ लोग हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जहां शक्ति होती है, वहां जवाबदेही की आवश्यकता और बढ़ जाती है। क्योंकि जनता पुलिस को केवल एक कर्मचारी के रूप में नहीं देखती। वह उसे कानून के प्रतिनिधि के रूप में देखती है।

यही वजह है कि पुलिसकर्मी की छोटी गलती भी बड़ी खबर बन जाती है लेकिन यहां एक और रोचक प्रवृत्ति देखने को मिलती है। जब कोई नागरिक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाता है तो उसे कानून समझाया जाता है। जब कोई पत्रकार सवाल उठाता है तो उसे जिम्मेदारी समझाई जाती है। जब कोई सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठाता है तो उसे प्रक्रिया समझाई जाती है। और जब सोशल मीडिया सवाल उठाता है तो उसे आईटी एक्ट समझाया जाता है। कुल मिलाकर हर सवाल पूछने वाले के लिए कोई न कोई धारा तैयार रहती है। सवालों के जवाब कभी-कभी तैयार नहीं होते। 

"लोकतंत्र में कैमरा अपराधी नहीं होता, वह केवल घटनाओं का दस्तावेज़ होता है। यदि कोई वीडियो फर्जी है तो उस पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है"

यहां यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि फर्जी वीडियो बनाना अपराध है और होना भी चाहिए। किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ की अनुमति नहीं दी जा सकती। लेकिन उसी सांस में यह भी उतना ही जरूरी है कि हर असुविधाजनक वीडियो को "फर्जी", "भ्रामक" या "वायरल गैंग" की श्रेणी में डाल देने की प्रवृत्ति से बचा जाए क्योंकि अगर हर असहज करने वाला तथ्य फर्जी घोषित कर दिया जाएगा तो फिर सत्य की पहचान कौन करेगा?

आज सोशल मीडिया का दौर है। यहां अफवाहें भी दौड़ती हैं और सच्चाइयां भी। चुनौती यह है कि दोनों के बीच फर्क किया जाए। लेकिन अक्सर ऐसा प्रतीत होता है कि व्यवस्था की प्राथमिकता फर्क करना नहीं, नियंत्रण स्थापित करना होती है। नियंत्रण हमेशा आकर्षक होता है। सवालों को नियंत्रित करो। वीडियो को नियंत्रित करो। सूचना को नियंत्रित करो। चर्चा को नियंत्रित करो और यदि संभव हो तो आईने को भी नियंत्रित कर लो। मगर लोकतंत्र का स्वभाव नियंत्रण नहीं, संवाद है। लोकतंत्र में संस्थाओं का सम्मान इसलिए नहीं होता कि वे शक्तिशाली हैं। उनका सम्मान इसलिए होता है क्योंकि वे आलोचना सहने की क्षमता रखती हैं। जिस दिन कोई संस्था आलोचना से डरने लगे, उस दिन उसकी ताकत पर नहीं, उसके आत्मविश्वास पर सवाल उठने लगते हैं।

विडंबना यह भी है कि हमारे यहां अक्सर जांच की दिशा भी बड़ी दिलचस्प होती है। कभी-कभी घटना से ज्यादा ऊर्जा इस बात में लगती है कि जानकारी बाहर कैसे आई। फाइल में क्या लिखा था, यह बाद की बात है; फाइल लीक किसने की, यह पहले जांचा जाता है। कमरे में क्या हुआ, यह बाद में देखा जाता है; कमरे का वीडियो किसने बनाया, यह पहले पूछा जाता है। मानो व्यवस्था का सबसे बड़ा संकट घटना नहीं, उसकी सार्वजनिक जानकारी हो।

बिलासपुर की यह घटना भी उसी व्यापक मानसिकता की एक झलक बन गई है। यहां बहस कानून और जवाबदेही के बीच संतुलन की होनी चाहिए थी। चर्चा इस बात पर होनी चाहिए थी कि यदि वीडियो गलत है तो उसे तथ्यात्मक रूप से गलत साबित किया जाए, और यदि उसमें कोई सच्चाई है तो उसे स्वीकार कर सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाए लेकिन हमारे यहां अक्सर सुधार से पहले संदेश दिया जाता है। संदेश यह कि व्यवस्था को देखने का अधिकार सीमित है। संदेश यह कि सवाल पूछने से पहले सावधान रहिए। संदेश यह कि कैमरा उठाने से पहले सोचिए और धीरे-धीरे यह संदेश समाज के भीतर एक भय में बदलने लगता है। हालांकि इतिहास बताता है कि समाज कैमरों से नहीं बदलते, बल्कि उन कारणों को दूर करने से बदलते हैं जिनकी वजह से कैमरे उठते हैं। यदि संस्थाएं पारदर्शी हों तो वीडियो सनसनी नहीं बनते। यदि जवाबदेही मजबूत हो तो वायरल पोस्ट व्यवस्था के लिए खतरा नहीं बनते। यदि जनता का विश्वास बना रहे तो अफवाहें भी ज्यादा दूर तक नहीं जातीं। 

यदि हर असुविधाजनक वीडियो के जवाब में पहला सवाल यह पूछा जाए कि उसे बनाया किसने, तो संदेह पैदा होता है कि व्यवस्था की चिंता सच्चाई से अधिक उसके सार्वजनिक होने को लेकर है।

आखिर में सवाल केवल बिलासपुर का नहीं है। सवाल उस सोच का है जिसमें व्यक्ति देखकर अपराध की गंभीरता तय की जाती है। जहां वर्दी, पद और प्रभाव के अनुसार संवेदनशीलता का स्तर बदलता रहता है। जहां कभी-कभी कानून की किताब एक ही रहती है, लेकिन उसका वजन अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग महसूस होता है।

लोकतंत्र में पुलिस का सम्मान होना चाहिए, क्योंकि वह कानून की रक्षक है। लेकिन उसी लोकतंत्र में जनता के सवालों का भी सम्मान होना चाहिए, क्योंकि वही कानून की अंतिम मालिक है, इसलिए आवश्यकता वीडियो से डरने की नहीं, सच्चाई से सामना करने की है क्योंकि जिस समाज में आईना दिखाना अपराध और आईना छिपाना कर्तव्य बन जाए, वहां समस्या कैमरे में नहीं होती। समस्या चेहरे पर होती है और चेहरों की मरम्मत आईना तोड़कर नहीं, आत्मनिरीक्षण करके की जाती है। 

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