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शिक्षा विभाग में कौन चला रहा ‘ट्रांसफर गेम’? तबादला सूची पर बड़ा विवाद

संयुक्त वरिष्ठता सूची नहीं बनने से वर्षों से अटकी पदोन्नति, विभागीय ढांचे पर मंडरा रहा संकट

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / स्कूल शिक्षा विभाग में हाल ही में जारी तबादला एवं पदस्थापना आदेश के बाद विभाग के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि प्रशासनिक पदों पर 2015 पीएससी बैच के अधिकारियों की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है, जबकि वरिष्ठ प्राचार्यों और अन्य अधिकारियों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित है।

सूत्रों के अनुसार विभाग में टी-संवर्ग (शिक्षण) और ई-संवर्ग (प्रशासनिक) की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार नहीं हो पाने के कारण प्राचार्यों की उप संचालक (डीडी) पद पर पदोन्नति प्रभावित हो रही है। इसके चलते कई वरिष्ठ अधिकारी वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।

विभागीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के रूप में नियुक्त 2015 पीएससी बैच के अधिकारी तेजी से जिला एवं संभागीय प्रशासनिक पदों तक पहुंच रहे हैं। कई अधिकारी वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के पदों पर कार्यरत हैं।

उप संचालक और जेडी पदों पर संकट

सूत्रों का कहना है कि विभाग में उप संचालक और संयुक्त संचालक जैसे पदों पर नियमित पदस्थापना का अभाव दिखाई दे रहा है। कई संभागों में प्रभारी व्यवस्था के भरोसे काम चल रहा है। आगामी महीनों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

तबादला सूची पर उठे सवाल

हालिया आदेश में कुछ पदस्थापनाओं को लेकर भी विभागीय स्तर पर चर्चा है। कई अधिकारियों का अपेक्षाकृत कम कार्यकाल में तबादला किए जाने तथा कुछ अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी की मांग

शिक्षा विभाग से जुड़े कई कर्मचारियों और अधिकारियों का मानना है कि संयुक्त वरिष्ठता सूची का जल्द निराकरण कर पदोन्नति प्रक्रिया को गति देने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक ढांचे में संतुलन बनेगा और अनुभवी अधिकारियों को भी अवसर मिल सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबित पदोन्नतियों, वरिष्ठता निर्धारण और प्रशासनिक संरचना से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान नहीं किया गया तो विभागीय कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इससे शिक्षा व्यवस्था के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका है।

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