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जंगल में सजता था काटपत्ती का फड़, पुलिस पहुंची तो मच गई भगदड़; 6 गिरफ्तार

CG NEWS: TODAY छत्तीसगढ़  / रायगढ़ । जुआ-सट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन अंकुश” के तहत रायगढ़ पुलिस ने संबलपुरी इलाके में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक संबलपुरी सब स्टेशन के पास सड़क किनारे जंगल में ताश से काटपत्ती जुआ खेल रहे 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मौके से 9,600 रुपये नकद, 52 पत्ती ताश, 8 मोटरसाइकिल और 6 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 5 लाख रुपये बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि संबलपुरी सब स्टेशन के पास सड़क किनारे जंगल में कुछ लोग ताश से काटपत्ती जुआ खेल रहे हैं। सूचना के बाद नगर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना चक्रधरनगर और साइबर थाना की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और जुआ खेल रहे लोगों को पकड़ लिया।

पुलिस ने मौके से आकाश साव (33), भानुप्रताप सिंह (30), राकेश राय (35), हितेश साहू (22), योगेश चौधरी (33) और नरेंद्र साव (46) को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक सभी रायगढ़ और आसपास के इलाकों के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 9,600 रुपये नकद, 52 पत्ती ताश, एक चटाई, 8 दोपहिया वाहन और 6 मोबाइल फोन जब्त किए।

युवती का पीछा कर अश्लील कमेंट और छेड़छाड़ का आरोप, पुलिस ने भेजा जेल

CG NEWS: TODAY छत्तीसगढ़  / जांजगीर-चांपा । पामगढ़ थाना क्षेत्र में एक युवती का पीछा कर अश्लील टिप्पणी और छेड़छाड़ करने के आरोप में पुलिस ने 21 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर आरोपी को ग्राम झिलमिली से पकड़ा गया। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने 20 सितंबर को पामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि धीरेंद्र खांडेकर (21) लगातार उसका पीछा कर रहा था। रास्ते में आते-जाते आरोपी कथित तौर पर अश्लील कमेंट करता और बेइज्जती करने की नीयत से छेड़छाड़ करता था।

महिला संबंधी अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलैंडन यार्क के मार्गदर्शन में टीम गठित की गई। SDOP शिवरीनारायण तोमेश वर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की।

मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पामगढ़ पुलिस टीम ने ग्राम झिलमिली में दबिश देकर धीरेंद्र खांडेकर को पकड़ लिया। पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। 

कैमरे की कलम: दीयों की रोशनी में छिपे सवाल


कश्मीर से कन्याकुमारी तक दीये जले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान के तहत लोगों से दीप जलाकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करने की अपील की गई। लेकिन इसी रोशनी के बीच कुछ ऐसे सवाल भी हैं, जिन्हें लोकतंत्र में पूछना जरूरी है।

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देश के विभिन्न हिस्सों में दीपोत्सव आयोजित किए गए। भारतीय जनता पार्टी ने लोगों से अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील की थी। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसे प्रधानमंत्री के दीर्घायु, स्वस्थ जीवन और निरंतर सफलता के लिए शुभकामना का अभियान बताया था।

बिहार के दरभंगा में हजारों दीये जलाए गए। नेहरू स्टेडियम और दरभंगा राज परिसर में आयोजित कार्यक्रमों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री के लिए शुभाशीष मांगा। प्रधानमंत्री के लिए छत्तीसगढ़ में भी 'आशीर्वाद का दीया' लाखों की संख्या में प्रज्वलित हुआ। 

मध्य प्रदेश के उज्जैन में लाखों दीये जलाने और राज्यभर में करोड़ों दीप प्रज्वलित किए जाने की खबरें भी सामने आईं। बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी दीपोत्सव आयोजित किए गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 20 लाख से अधिक दीये जलाए गए।

दीप जलाना भारतीय संस्कृति में शुभता और मंगलकामना का प्रतीक है। इसलिए किसी नेता के जन्मदिन पर उनके समर्थकों द्वारा दीप जलाना अपने आप में असामान्य बात नहीं है। सवाल उत्सव मनाने के अधिकार का नहीं है। सवाल उस सार्वजनिक संदेश और उसकी सुसंगति का है, जो इस पूरे आयोजन से निकलता है।

मई 2026 में पश्चिम एशिया संकट और विदेशी मुद्रा पर दबाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से कई तरह की मितव्ययिता अपनाने की अपील की थी। इसमें खाद्य तेल की खपत कम करने का आग्रह भी शामिल था।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत खाद्य तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है और यदि प्रत्येक परिवार खाद्य तेल के इस्तेमाल में कमी करता है तो यह देश के लिए बड़ी मदद होगी। उन्होंने खाद्य तेल की कम खपत को देशभक्ति से भी जोड़ा था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत अपनी खाद्य तेल जरूरत का लगभग 55-57 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है।

प्रधानमंत्री की इस अपील को बाद में केंद्र सरकार के स्तर पर भी मितव्ययिता, संसाधन संरक्षण और आत्मनिर्भरता के अभियान से जोड़ा गया। कृषि मंत्रालय ने खाद्य तेल की खपत कम करने के लिए अभियान चलाने की बात कही।

यानी नागरिक से संदेश था—जहां संभव हो, खपत घटाइए; देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम कीजिए; मितव्ययिता को देशहित से जोड़िए। अब उसी वर्ष प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर बड़े पैमाने पर दीपोत्सव का दृश्य सामने आता है। यहीं से एक असहज लेकिन जायज सवाल पैदा होता है।

यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि जन्मदिन के दीपोत्सव में इस्तेमाल हुआ सारा तेल खाद्य तेल था या कि जितने खाद्य तेल की बचत का आह्वान किया गया था, उसका सीधा संबंध इन दीयों में इस्तेमाल तेल से है। ऐसी तुलना के लिए प्रमाणित आंकड़े उपलब्ध होना जरूरी है लेकिन बात केवल गणित की नहीं है। बात सार्वजनिक संदेश की विश्वसनीयता की है।

जब देश के हर परिवार से कहा जाता है कि वह अपने घर की रसोई में तेल की खपत कम करे और इसे देशभक्ति का योगदान बताया जाता है, तब उसी नागरिक के सामने बड़े पैमाने पर तेल के दीये जलाने का दृश्य स्वाभाविक रूप से यह सवाल पैदा करता है कि मितव्ययिता की कसौटी क्या केवल आम आदमी के लिए है? सार्वजनिक जीवन में संदेश तभी प्रभावशाली होता है जब उसका पालन करने का उदाहरण भी दिखाई दे।

इस पूरे प्रसंग का सबसे संवेदनशील पहलू बिहार है। बिहार में इस साल बाढ़ ने बड़ी आबादी को प्रभावित किया। इसी दौरान प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने का अभियान चलाया गया। विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाए। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या और दीपोत्सव पर संभावित खर्च को लेकर सरकार पर निशाना साधा। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; खर्च की उनकी बताई राशि की स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।

पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी सवाल उठाया कि जब बिहार के कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, तब लोगों और सरकारी कर्मचारियों से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीप जलाने की अपेक्षा क्यों की जा रही है। उन्होंने सरकारी स्कूलों में कार्यक्रम के लिए जारी निर्देश का भी मुद्दा उठाया।

यहां फिर वही फर्क समझना जरूरी है—दीप जलाने का कार्यक्रम और बाढ़ राहत कार्य पर खर्च एक-दूसरे के सीधे विकल्प नहीं हैं। किसी आयोजन पर खर्च होने वाला प्रत्येक रुपया बाढ़ राहत में लगाया जा सकता था, ऐसा मान लेना भी उचित नहीं होगा लेकिन आपदा की घड़ी में सरकार और राजनीतिक संगठनों की प्राथमिकताओं का प्रतीकात्मक महत्व जरूर होता है, जिस समय हजारों परिवारों के सामने घर, भोजन, पशु, फसल और रोजमर्रा के जीवन को बचाने की चुनौती हो, उस समय सत्ता के आसपास होने वाला कोई भी बड़ा उत्सव स्वाभाविक रूप से सवालों के घेरे में आएगा।

इस बहस का दूसरा पहलू इससे भी महत्वपूर्ण है—क्या ऐसे आयोजनों में सरकारी तंत्र की भूमिका थी? बिहार में इसको लेकर विरोधाभासी तस्वीर सामने आई। कुछ स्थानों पर सरकारी स्कूलों और संस्थानों में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित करने संबंधी निर्देशों की रिपोर्ट सामने आई। दूसरी ओर लखीसराय में अंतिम समय पर मुख्य सचिव के निर्देश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को कार्यक्रम से अलग रहने को कहा गया और जिला प्रशासन द्वारा तैयार किया गया कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार वहां एक लाख से अधिक मिट्टी के दीयों की तैयारी की गई थी। यह घटनाक्रम अपने आप में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करता है।

प्रधानमंत्री देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उनका जन्मदिन किसी राजनीतिक दल के लिए राजनीतिक कार्यक्रम भी हो सकता है। इसलिए यदि कोई आयोजन पार्टी कर रही है तो उसे पार्टी कार्यक्रम के रूप में स्पष्ट रखना लोकतांत्रिक दृष्टि से अधिक पारदर्शी है। यदि उसमें सरकारी विभाग, सरकारी कर्मचारी, स्कूल या सार्वजनिक धन शामिल होता है तो उसकी प्रकृति और वित्तीय स्रोत भी स्पष्ट होने चाहिए। यही पारदर्शिता लोकतंत्र में भरोसा पैदा करती है । देश में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर उत्सव मनाने वाले नागरिकों को यह अधिकार है कि वे अपनी श्रद्धा और समर्थन व्यक्त करें। किसी नेता के समर्थकों की भावनाओं को भी लोकतांत्रिक विमर्श में स्थान मिलना चाहिए लेकिन लोकतंत्र का दूसरा पक्ष यह भी है कि सार्वजनिक आयोजन पर सवाल पूछे जा सकें और यह सवाल केवल विपक्ष का सवाल नहीं होना चाहिए।

यदि कोई सरकार नागरिकों से कहती है कि खाद्य तेल बचाना देशभक्ति है, तो उसी देशभक्ति के दूसरे पहलू—सार्वजनिक मितव्ययिता—पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि सरकार या राजनीतिक संगठन ‘सेवा’ को प्रधानमंत्री के जन्मदिन का केंद्रीय संदेश बनाते हैं, तो बाढ़, बीमारी, बेरोजगारी या अन्य संकटों से जूझ रहे लोगों के बीच सेवा का प्रत्यक्ष स्वरूप क्या होना चाहिए—इस पर बहस भी स्वाभाविक है और यदि प्रधानमंत्री का जन्मदिन करोड़ों लोगों तक पहुंचने वाले अभियान में बदलता है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि उस अभियान में सरकारी और राजनीतिक भूमिकाओं का विभाजन कितना स्पष्ट है।

इस पूरे मामले को ‘दीया बनाम बाढ़ राहत’ जैसे सरल द्वंद्व में बदलना उचित नहीं होगा। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में उत्सव और आपदा राहत दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। किसी एक के होने से दूसरे की आवश्यकता समाप्त नहीं होती लेकिन सार्वजनिक जीवन में प्रतीकों का महत्व होता है। बाढ़ के बीच एक परिवार के लिए एक पैकेट भोजन, पीने का पानी, दवा या सुरक्षित आश्रय शायद उस समय सबसे बड़ा ‘दीया’ हो सकता है। किसी कुम्हार के लिए हजारों दीयों का ऑर्डर रोजगार का अवसर हो सकता है। दूसरी तरफ बाढ़ में फंसे परिवार के लिए वही समय जीवन बचाने का संघर्ष हो सकता है, इसलिए बहस यह नहीं कि दीया जलना चाहिए था या नहीं। बहस यह है कि क्या उस समय दीपोत्सव से ज्यादा ताकतवर प्रतीक राहत, पुनर्वास और पीड़ितों के साथ खड़े होने का नहीं हो सकता था?

अब जब उसी देश में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर लाखों-करोड़ों दीयों की रोशनी दिखाई देती है, और उसी समय बिहार का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ की मार से जूझ रहा था, तब सवाल उठना स्वाभाविक है— क्या देशभक्ति का अर्थ केवल आम नागरिक द्वारा अपनी खपत कम करना है, या सार्वजनिक जीवन में भी संयम, सादगी और प्राथमिकताओं का वही पैमाना लागू होना चाहिए?

शायद इस सवाल का सबसे ईमानदार उत्तर किसी राजनीतिक भाषण में नहीं, बल्कि उस नागरिक के अनुभव में मिलेगा जो एक हाथ से अपना चूल्हा बचाने के लिए तेल नाप रहा है और दूसरे हाथ से बाढ़ में डूबे घर को बचाने की कोशिश कर रहा है। दीये जलते रहें—यह भारतीय परंपरा की खूबसूरती है,लेकिन लोकतंत्र की असली रोशनी तब होगी, जब उत्सव की चमक के साथ उन सवालों को भी जगह मिले जो उस चमक के पीछे खड़े हैं।

गांजा के साथ 37 हजार कैश भी मिला, मोपका में पुलिस की रेड से मचा हड़कंप

CG NEWS: TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर। मोपका चौकी क्षेत्र में पुलिस ने गांजा बिक्री के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के कब्जे से 1 किलो 64 ग्राम गांजा और 37 हजार रुपये बिक्री की रकम बरामद की गई है।

पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मोपका क्षेत्र में एक व्यक्ति अवैध रूप से गांजा रखकर उसकी बिक्री कर रहा है। सूचना के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर रेड की।

गांजा और बिक्री की रकम बरामद

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दीपेन्द्र वर्मा उर्फ चेपटी (38) को पकड़ा। वह मोपका के वर्मा मोहल्ले का रहने वाला बताया गया है। तलाशी में उसके कब्जे से 1.64 किलो गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 हजार रुपये, बरामद किया गया। इसके अलावा 37 हजार रुपये नकद भी जब्त किए गए।

NDPS एक्ट में केस, न्यायिक रिमांड

पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 1339/26 दर्ज कर NDPS एक्ट की धारा 20(B) के तहत कार्रवाई की। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। 

डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन में खलिन एच. जोशी चैंपियन, साव ने किया पुरस्कृत

CG NEWS: TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर। नवा रायपुर अब आधुनिक शहर के साथ-साथ बड़े खेल आयोजनों के केंद्र के तौर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन गोल्फ टूर्नामेंट-2026 के पुरस्कार वितरण समारोह में उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कहा कि नवा रायपुर का वर्ल्ड क्लास फेयरवे गोल्फ एंड कंट्री क्लब छत्तीसगढ़ में गोल्फ के बढ़ते आकर्षण और आधुनिक खेल सुविधाओं की पहचान बन रहा है।

समारोह में उप मुख्यमंत्री ने टूर्नामेंट के विजेता खलिन एच. जोशी समेत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

बड़े टूर्नामेंट स्थानीय खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच

अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों का आयोजन प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के लिए नए अवसर तैयार करता है। देश-दुनिया के अनुभवी खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से स्थानीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर के खेल का अनुभव मिलता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इससे प्रदेश में गोल्फ समेत अन्य खेलों के प्रति भी रुचि बढ़ने की संभावना है।

कपिल देव और PGTI टीम का जताया आभार

उप मुख्यमंत्री ने डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन के सफल आयोजन के लिए पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव और उनकी पूरी टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बड़े आयोजन छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख खेल आयोजनों के मानचित्र पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अरुण साव ने कहा कि प्रदेश में खेलों के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर मंच देने के प्रयास जारी रहेंगे। आधुनिक खेल अधोसंरचना का विस्तार कर ऐसे अवसर तैयार किए जाएंगे, जहां खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखारकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर सकें।

कोटा के महामाया रेस्टोरेंट में अवैध शराब बिक्री, कैमरे में कैद हुई कथित गतिविधियां


CG NEWS:
TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर: जिले में पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच कोटा-लोरमी मुख्य मार्ग पर गोबरीपाट में स्थित महामाया रेस्टोरेंट/ढाबा में खुलेआम अवैध शराब बिक्री की बात सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतों के बाद की गई पड़ताल में रेस्टोरेंट में शराब की कथित बिक्री और परोसे जाने की गतिविधियां कैमरे में कैद होने का दावा किया गया है। 

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पुलिस या आबकारी विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी लेकिन कैमरे में कैद गतिविधियों से साफ़ होता है कि ढाबा संचालक के रसूख के आगे फिलहाल विभागीय अमला कमजोर है। महामाया ढाबा में शराब की अवैध बिक्री, परोसने का सिलसिला सालों से चल रहा है। कई बार पुलिस ने कार्रवाई भी की है लेकिन अंदरूनी खेल कुछ और ही कहानी कहता है। फिलहाल इस मामले में जिले के वरिष्ठ पुलिस अफसरों दवारा की जाने वाली कार्रवाही का इंतज़ार है। 

स्थानीय लोगों के मुताबिक, महामाया रेस्टोरेंट में ग्राहकों को कथित तौर पर अवैध तरीके से देसी-विदेशी शराब उपलब्ध कराई जाती है। आरोप है कि यहां बिना किसी विशेष पहचान के भी शराब आसानी से मिल जाती है। पड़ताल के दौरान रेस्टोरेंट में शराब की कथित बिक्री से जुड़ी गतिविधियों को एक स्थानीय चैनल द्वारा कैमरे में रिकॉर्ड किए जाने का दावा भी किया गया है। वहीं, यह भी आरोप लगाया गया है कि बाजार में करीब 220 रुपये कीमत वाली ठंडी बीयर को 400 रुपये तक में खुलेआम बेचा जा रहा है। 

पड़ताल के दौरान वहां मौजूद दो युवकों की गतिविधियों को भी कैमरे में कैद होने का दावा किया गया है । बताया गया है कि दोनों एक बड़े थैले के साथ रेस्टोरेंट पहुंचे। बाद में रेस्टोरेंट से बाहर आए एक युवक को थैला सौंपे जाने और इसके बाद दोनों के जंगलनुमा क्षेत्र की ओर जाने की बात कही गई है। हालांकि, थैले में शराब थी या खाने-पीने का सामान अथवा कोई अन्य वस्तु, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस गतिविधि को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जांच के बाद ही संभव होगा।

स्थानीय सूत्रों के हवाले से रेस्टोरेंट में पुलिस और आबकारी विभाग से जुड़े लोगों की आवाजाही के दावे भी किए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने कथित राजनीतिक और विभागीय संरक्षण के आरोप भी लगाए हैं। 

सवाल यह है कि यदि रेस्टोरेंट में बिना अनुमति शराब की बिक्री या परोसने की गतिविधि हो रही है तो जिम्मेदार विभागों की ओर से इसकी जांच क्यों नहीं की गई? वहीं, यदि लगाए जा रहे आरोप गलत हैं तो मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

जिले में पुलिस की ओर से नशे के खिलाफ अभियान और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में मुख्य मार्ग पर स्थित किसी प्रतिष्ठान में अवैध शराब बिक्री की शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस और आबकारी विभाग महामाया रेस्टोरेंट से जुड़े आरोपों की जांच करते हैं या नहीं और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है इसका इंतज़ार है।


रेत-रियल एस्टेट और बुलियन ट्रेडिंग में पैसा लगाया, हिसाब बिगड़ा तो साथी की हत्या

CG NEWS: TODAY छत्तीसगढ़  /  रायपुर: आरंग थाना क्षेत्र के बनचरौदा के पास शिक्षक की हत्या के मामले का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक के साथी शिक्षक चंद्रप्रकाश वर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की वजह रेत, रियल एस्टेट और बुलियन ट्रेडिंग में लेन-देन से जुड़ा करीब 30 लाख रुपये का विवाद और तीन महीने से ब्याज नहीं मिलना था।

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथियार, हथौड़ा, स्कूटी, तीन ब्लैंक चेक, मोबाइल फोन और घटना के समय पहने गए खून लगे कपड़े व जूते समेत अन्य सामान जब्त किया है।

बनचरौदा के पास मिला था शिक्षक का शव

पुलिस के अनुसार, 17 सितंबर को सूचना मिली कि ग्राम बनचरौदा के पास एक व्यक्ति का शव पड़ा है। उसके सिर और चेहरे पर धारदार एवं कठोर वस्तु से चोट के निशान थे।

मृतक की पहचान शिवकुमार चंद्राकर (46), निवासी ग्राम रामपुर डंगनिया, थाना गोबरा नवापारा, रायपुर के रूप में हुई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर फॉरेंसिक, डॉग स्क्वॉड और साइबर टीम की मदद से जांच शुरू की। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया गया।

आखिरी बार साथी शिक्षक के साथ देखा गया था

जांच में सामने आया कि शिवकुमार चंद्राकर और संदिग्ध चंद्रप्रकाश वर्मा दोनों ग्राम कुम्हारी के स्कूल में शिक्षक हैं। पुलिस के मुताबिक, ग्रामीणों और एक चरवाहे ने शिवकुमार को घटना वाले दिन आखिरी बार चंद्रप्रकाश के साथ सफेद स्कूटी पर बनचरौदा की ओर जाते देखा था।

इसके बाद पुलिस ने कुम्हारी स्कूल के CCTV फुटेज खंगाले। साथ ही शिक्षा विभाग के VSK ऐप के लॉग रिकॉर्ड की भी जांच की गई।

दूसरे के फोन से लगाई हाजिरी

पुलिस के मुताबिक, 17 सितंबर को सुबह करीब 9:35 बजे चंद्रप्रकाश स्कूल पहुंचा। इसके बाद वह निजी काम का हवाला देकर स्कूल से बाहर निकला। पुलिस का दावा है कि इस दौरान उसने अपने मोबाइल की लोकेशन बंद कर दी।

घटना के बाद करीब 12:50 बजे वह वापस स्कूल पहुंचा। उसने कथित तौर पर अपना मोबाइल घर पर होने की बात कही और दूसरे शिक्षक के मोबाइल से VSK ऐप में लॉग इन कर उपस्थिति दर्ज की। पुलिस के अनुसार, VSK ऐप की लॉग रिपोर्ट से इस गतिविधि की जानकारी जांच में सामने आई।

30 लाख की उधारी और ब्याज को लेकर था विवाद

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में चंद्रप्रकाश ने हत्या की बात स्वीकार की। उसके अनुसार, वह और शिवकुमार पिछले करीब चार साल से एक-दूसरे को जानते थे और रेत, रियल एस्टेट तथा बुलियन मार्केट में ट्रेडिंग से जुड़े कारोबार में साथ काम करते थे।

पुलिस का कहना है कि चंद्रप्रकाश ने शिवकुमार को करीब 30 लाख रुपये उधार दिए थे। इसके बदले शिवकुमार ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के तीन ब्लैंक चेक दिए थे। आरोपी के अनुसार, वह इस रकम पर हर महीने ब्याज लेता था, लेकिन पिछले तीन महीने से ब्याज नहीं मिला था।

पुलिस के मुताबिक, इसी रकम और ब्याज को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।

स्कूल के पास विवाद के बाद सुनसान जगह पहुंचे

पुलिस के अनुसार, 17 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे दोनों की मुलाकात कुम्हारी स्कूल के बाहर पटवारी कार्यालय के पास हुई। पैसे और ब्याज की वापसी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ।

पुलिस का दावा है कि विवाद के बाद दोनों बनचरौदा के सुनसान इलाके की ओर चले गए। वहां विवाद बढ़ने पर चंद्रप्रकाश ने स्कूटी में रखे धारदार हथियार से शिवकुमार के सिर के पीछे वार किया। इसके बाद हथौड़े से सिर और चेहरे पर वार कर उसकी हत्या करने का आरोप है।

स्कूटी, हथियार, चेक और खून लगे कपड़े जब्त

आरोपी के मेमोरेंडम कथन के आधार पर पुलिस ने घटना से जुड़े कई सामान जब्त किए हैं। इनमें—

  • घटना में इस्तेमाल सफेद स्कूटी
  • धारदार हथियार
  • हथौड़ा
  • मृतक द्वारा दिए गए 3 ब्लैंक चेक
  • मृतक का पर्स
  • दोनों के मोबाइल फोन
  • आरोपी के घटना के समय पहने हुए खून लगे जूते, मोजे और कपड़े

शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी चंद्रप्रकाश वर्मा को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेजने की कार्रवाई की है।

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