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छत्तीसगढ़ के पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, मंत्री से GTA प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने और राज्य को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने को लेकर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से ग्लोबल ट्रैवल एसोसिएशन (GTA) के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। बैठक में एयर कनेक्टिविटी, सड़क संपर्क, पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार और पर्यटन अधोसंरचना को मजबूत करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। जीटीए ने मंत्री को 22 अगस्त को होने वाले कान्क्लेव में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

पर्यटन स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर

जीटीए अध्यक्ष मनीष जैन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के साथ छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने, एयर कनेक्टिविटी और सड़क नेटवर्क को बेहतर करने तथा पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं के विस्तार से जुड़े सुझाव दिए।

बैठक में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और राज्य के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ समृद्ध जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों के मामले में बेहद समृद्ध है। राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार, बेहतर संपर्क व्यवस्था और पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण अनुभव उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मंत्री ने पर्यटन के समग्र विकास को लेकर प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए।

22 अगस्त के GTA कान्क्लेव में शामिल होंगे मंत्री

मुलाकात के दौरान GTA के महासचिव शुभम अग्रवाल और कोषाध्यक्ष राहुल वासवानी ने पर्यटन मंत्री को 22 अगस्त को आयोजित होने वाले GTA कान्क्लेव में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मंत्री राजेश अग्रवाल ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की सहमति दी।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग और पर्यटन विभाग के मार्गदर्शन से निजी क्षेत्र और पर्यटन उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

बैठक में GTA के सदस्य आकाश दुधानी, आकाश अग्रवाल, अंशुल खरे, सनी बंसल, प्रणय और आयुष बजाज मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ में 24 IFS अधिकारियों की नई पदस्थापना, कई DFO बदले

रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। राज्य शासन ने भारतीय वन सेवा (IFS) के 24 अधिकारियों की नई पदस्थापना का आदेश जारी किया है। तबादला सूची में कई जिलों के वन मंडलाधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कुछ अधिकारियों को मुख्यालय, टाइगर रिजर्व, वन विकास निगम और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आदेश 8 अगस्त 2026 को जारी किया गया।

कई जिलों के वन मंडलों में बदले अधिकारी

राज्य शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार गणवीर धम्मशील को वन विभाग मंत्रालय, नवा रायपुर में विशेष सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उत्तम कुमार गुप्ता को प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्र निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, जगदलपुर बनाया गया है।

दुलैश्वर प्रसाद साहू को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), मनेंद्रगढ़ और पंकज राजपूत को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), रायपुर की जिम्मेदारी दी गई है। प्रभाकर खलखो को प्रभारी वन संरक्षक, कार्य आयोजन वनमंडल, सरगुजा अंबिकापुर पदस्थ किया गया है।

इसके अलावा संदीप बलगा को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), पूर्व भानुप्रतापपुर, मयंक पाण्डेय को गरियाबंद और सत्यदेव शर्मा को धर्मजयगढ़ पदस्थ किया गया है।

सरगुजा, महासमुंद और कठघोरा में भी नई पोस्टिंग

श्रीनिवास तन्खे को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), महासमुंद की जिम्मेदारी दी गई है। जितेन्द्र कुमार उपाध्याय को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कटघोरा पदस्थ किया गया है।

संजय यादव को खैरागढ़ और कुमार निशात को मरवाही भेजा गया है। वहीं प्रतिनियुक्ति से वापस लौटे पंकज कुमार कमल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बलौदाबाजार पदस्थ किया गया है।

बस्तर और कांकेर में भी बदले अधिकारी

तबादला सूची में वन्यजीव और बस्तर क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं। पुष्पलता टंडन को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सारंगढ़-बिलाईगढ़ और लोकनाथ पटेल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सरगुजा अंबिकापुर बनाया गया है।

शाशिनंदन के. को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कांकेर की जिम्मेदारी मिली है। वहीं दिपेश कपिल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बस्तर जगदलपुर और चंद्र कुमार अग्रवाल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), दुर्ग पदस्थ किया गया है।

वन विकास निगम और मुख्यालय में भी जिम्मेदारियां

अभिषेक जोगावत को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, नवा रायपुर में उप महाप्रबंधक के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है। रौनक गोयल को कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़, नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है।

रोम्या चांद को छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। वहीं ऋषभ जैन को भी छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया गया है। चंद्रशेखर शकरसिंह फरदेसी को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कोरिया और विपुल अग्रवाल को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सूरजपुर की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रतिनियुक्ति से लौटे अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी

आदेश में प्रतिनियुक्ति से वापस लौटे अधिकारियों को भी नई पदस्थापना दी गई है। सभी अधिकारियों को आदेश के अनुसार नवीन पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। 


प्रेस क्लब विवाद : नियमों की जीत, लेकिन सवाल अब भी बाकी

निर्वाचित सचिव-कोषाध्यक्ष को हटाने का फैसला निरस्त; अब सवाल सिर्फ पदों का नहीं, संस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही का भी
TODAY छत्तीसगढ़  /  बिलासपुर प्रेस क्लब में पदाधिकारियों के बीच चल रहा विवाद अब महज आंतरिक मतभेद का मामला नहीं रह गया है। सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग का 6 अगस्त का आदेश इस पूरे प्रकरण को संस्था के संविधान, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता की कसौटी पर ले आया है। आदेश में 31 जुलाई की कार्यकारिणी बैठक में सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह के पदों में किए गए बदलाव को नियमविरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया गया है। दोनों निर्वाचित पदाधिकारियों को उनके पदों पर यथावत रखने के निर्देश दिए गए हैं। 

पत्रकारिता की दुनिया में दूसरों से सवाल पूछना आसान है। मुश्किल तब होती है, जब वही सवाल अपने संगठन के दरवाजे पर खड़ा हो।

इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संस्था के भीतर निर्वाचित पदों में परिवर्तन को केवल कार्यकारिणी के निर्णय से वैध नहीं माना जा सकता। पंजीकृत संविधान और सोसायटी पंजीयन कानून के तहत पदाधिकारियों की नियुक्ति, पदमुक्ति अथवा बदलाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। यही वह बिंदु है जहां प्रेस क्लब का विवाद व्यक्तिगत मतभेद से आगे बढ़कर संस्थागत अनुशासन का प्रश्न बन जाता है।

कार्यकारिणी की शक्ति और उसकी सीमा

किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में कार्यकारिणी को अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन वे अधिकार असीमित नहीं होते। कार्यकारिणी संविधान और नियमावली के दायरे में रहकर ही निर्णय ले सकती है। यदि निर्वाचित पदाधिकारियों के पद में परिवर्तन के लिए सामान्य सभा अथवा अन्य निर्धारित प्रक्रिया जरूरी है, तो केवल कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया फैसला उस प्रक्रिया का विकल्प नहीं बन सकता।

सहायक पंजीयक का आदेश इसी मूल सिद्धांत को रेखांकित करता है। यह फैसला किसी एक पदाधिकारी के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने से अधिक महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि इससे संस्था के भीतर नियमों की सर्वोच्चता स्थापित होती है। पदाधिकारी बदलने की प्रक्रिया यदि स्पष्ट है तो उसे व्यक्तिगत असहमति, बहुमत के दबाव या आंतरिक राजनीतिक समीकरणों के आधार पर दरकिनार नहीं किया जा सकता। 

विवाद का दूसरा और अधिक गंभीर पक्ष—वित्तीय पारदर्शिता

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू क्लब की वित्तीय व्यवस्था भी है। सहायक पंजीयक ने संस्था की निधि बैंक में सुरक्षित रखने और उसके संचालन में अध्यक्ष या सचिव तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आय-व्यय का हिसाब और बैठकों की कार्यवाही नियमानुसार रखने पर भी जोर दिया गया है।  

प्रेस क्लब को यह तय करना होगा कि वह पदों की राजनीति करेगा या संस्था की प्रतिष्ठा बचाएगा।

यह निर्देश केवल वर्तमान विवाद को नियंत्रित करने की प्रशासनिक कवायद नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी पंजीकृत संस्था के लिए आर्थिक पारदर्शिता उसकी विश्वसनीयता की बुनियादी शर्त है। खासकर पत्रकारों की संस्था में वित्तीय व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवाल सामान्य संस्थाओं की तुलना में कहीं अधिक गंभीर होते हैं, क्योंकि ऐसी संस्था स्वयं सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही की पैरवी करती है।

इसलिए प्रेस क्लब के भीतर वित्तीय लेन-देन, आय-व्यय और निधि संचालन को लेकर यदि सवाल उठे हैं, तो उनका समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच के आधार पर होना चाहिए।

धारा 32 का रास्ता खुला, जवाबदेही अभी बाकी

सचिव और कोषाध्यक्ष की ओर से कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी। सहायक पंजीयक ने इस हिस्से पर तत्काल जांच का आदेश देने के बजाय स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 32 के तहत पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं के समक्ष आवेदन किया जा सकता है।

इसका अर्थ यह है कि वित्तीय आरोपों का अध्याय अभी बंद नहीं हुआ है। फिलहाल प्रशासनिक आदेश ने पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन यदि वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में पर्याप्त आधार और दस्तावेज उपलब्ध हैं तो विधि में उनके परीक्षण का रास्ता खुला हुआ है।

यही इस पूरे प्रकरण का अगला महत्वपूर्ण चरण हो सकता है। आरोपों की राजनीतिक व्याख्या करने के बजाय यह देखा जाना चाहिए कि खातों, बैंक लेन-देन, स्वीकृत प्रस्तावों और खर्चों से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं।

प्रेस क्लब के लिए यह आत्ममंथन का समय

इस विवाद से बिलासपुर प्रेस क्लब के सामने एक बड़ा संस्थागत सवाल भी खड़ा होता है—क्या संस्था अपने आंतरिक मतभेदों का समाधान अपने ही संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के भीतर कर सकती है?

यदि हर असहमति का समाधान प्रशासनिक हस्तक्षेप तक पहुंचने लगे तो यह संस्था की आंतरिक व्यवस्था के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है। दूसरी ओर, यदि नियमों की अनदेखी हो रही हो और निर्वाचित पदाधिकारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हों, तो नियामकीय हस्तक्षेप आवश्यक भी हो जाता है।

इसलिए मौजूदा आदेश को किसी पक्ष की जीत और दूसरे पक्ष की हार के रूप में देखना इस प्रकरण को छोटा कर देना होगा। असली जीत तभी होगी जब प्रेस क्लब के भीतर नियम, संस्थागत मर्यादा और पारदर्शिता की व्यवस्था मजबूत हो।

आगे की राह क्या हो?

अब क्लब प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी टकराव को आगे बढ़ाने के बजाय व्यवस्था को सामान्य करने की है। निर्वाचित सचिव और कोषाध्यक्ष को उनके पदों पर बनाए रखने के आदेश का पालन, बैंक खाते और निधि के संचालन में निर्धारित संयुक्त हस्ताक्षर व्यवस्था, नियमित लेखा-जोखा तथा बैठकों की विधिवत कार्यवाही—इन सब पर स्पष्टता जरूरी है।

साथ ही, यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में तथ्य हैं तो संबंधित पक्ष को धारा 32 के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष दस्तावेजों के साथ जाना चाहिए। जांच का निष्कर्ष ही यह तय करे कि आरोप केवल संगठनात्मक विवाद का हिस्सा हैं या वास्तव में वित्तीय गड़बड़ी हुई है।  

समय किसी पक्ष की जीत का जश्न मनाने का नहीं, बल्कि यह साबित करने का है कि बिलासपुर प्रेस क्लब अपने ही घोषित नियमों और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खड़ा है।

'खुद पर भरोसा रखिए, मुश्किल वक्त गुजर जाएगा'— बेटियों से बोलीं ज्ञानेश्वरी

राजनांदगांव। TODAY छत्तीसगढ़  / कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली छत्तीसगढ़ पुलिस की एएसआई ज्ञानेश्वरी यादव का राजनांदगांव पुलिस ने सम्मान किया। पुलिस लाइन स्थित मंगल भवन में आयोजित A Felicitation & Interaction Session for Girls and Women में ज्ञानेश्वरी ने छात्राओं और महिलाओं से अपने संघर्ष, खेल जीवन, मानसिक तैयारी और सफलता के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधन लक्ष्य की राह में बाधा नहीं बनते, जरूरत निरंतर मेहनत, अनुशासन और खुद पर विश्वास की है।

संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर साझा किया

कार्यक्रम में ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने बचपन से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद खेल को लक्ष्य बनाया और लगातार अभ्यास, अनुशासन व आत्मविश्वास के दम पर आगे बढ़ती रहीं। उन्होंने अपनी सफलता में माता-पिता के संघर्ष और सहयोग को सबसे बड़ी ताकत बताया।

उन्होंने कहा कि परिवार का भरोसा खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान मानसिक दबाव का जिक्र करते हुए उन्होंने मेंटल ट्रेनिंग, सकारात्मक सोच और लक्ष्य के प्रति समर्पण को सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

पीरियड्स के पहले दिन भी उतरीं मैदान में

संवाद के दौरान छात्राओं ने ज्ञानेश्वरी से प्रतियोगिता के दौरान शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को लेकर सवाल किए। उन्होंने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने के दौरान उनका पीरियड्स का पहला दिन था। ऐसी स्थिति में आमतौर पर कोच आराम की सलाह देते थे, लेकिन उस समय उन्होंने खुद पर भरोसा किया और प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

उनकी इस बात ने कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं और महिलाओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने की ताकत देता है।

तिरंगा और राष्ट्रगान का पल बताया सबसे भावुक

ज्ञानेश्वरी ने पदक समारोह के उस पल को भी साझा किया जब भारतीय तिरंगा सबसे ऊपर उठा और राष्ट्रगान बजा। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे गौरवपूर्ण और भावुक क्षण बताया। उनके अनुभव सुनकर कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।

महिला सशक्तीकरण की दिशा में पुलिस की पहल

पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य सिर्फ ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि का सम्मान करना नहीं, बल्कि उनकी संघर्षगाथा को जिले की बालिकाओं और महिलाओं तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी की यात्रा से प्रेरणा लेकर बालिकाओं में आत्मविश्वास, दृढ़ता और आगे बढ़ने का जज्बा विकसित हो, यही कार्यक्रम का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी का छत्तीसगढ़ पुलिस परिवार का हिस्सा होना पूरे पुलिस परिवार के लिए गौरव की बात है।

कार्यक्रम में डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण वैष्णव, पुलिस महानिरीक्षक अजय यादव, पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा, सीएसपी वैशाली जैन, डीएसपी मंजुला बाज सहित ज्ञानेश्वरी के माता-पिता मौजूद रहे। विभिन्न संस्थाओं की महिलाएं और छात्राएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं।

समापन अवसर पर ज्ञानेश्वरी यादव और उनके माता-पिता को स्मृति चिन्ह व पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।

सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य... विकास का बड़ा रोडमैप तैयार

रायगढ़। TODAY छत्तीसगढ़  / शहर में नागरिक सुविधाओं और अधोसंरचना के विस्तार को लेकर विकास कार्यों को गति दी जा रही है। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने शुक्रवार को विभिन्न वार्डों में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। पंजरी प्लांट में 33 लाख रुपये के सामुदायिक भवन व स्कूल बाउंड्रीवाल का भूमिपूजन और नवागढ़ी में आठ लाख रुपये के शेड का लोकार्पण किया गया। इस दौरान उन्होंने पंजरी प्लांट में ऑक्सीजोन और ओपन जिम की घोषणा भी की।

हरित क्षेत्र से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य तक विस्तार

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि रायगढ़ के विकास को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। नागरिकों को बेहतर वातावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने शहर में आने वाले वर्षों में 10 ऑक्सीजोन विकसित करने की दिशा में काम किए जाने की बात कही।

पंजरी प्लांट में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने उपभोक्ता फोरम के पास ऑक्सीजोन और ओपन जिम विकसित करने की घोषणा की। इससे क्षेत्र के लोगों को हरित वातावरण के साथ स्वास्थ्य और व्यायाम की सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण भी किया और नागरिकों से पौधों की देखभाल का आह्वान किया।

600 करोड़ की रिंग रोड से कम होगा यातायात का दबाव

रायगढ़ शहर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से रिंग रोड निर्माण की दिशा में काम किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि रिंग रोड बनने से शहर की यातायात व्यवस्था मजबूत होगी और भविष्य के अधोसंरचना विकास को भी गति मिलेगी।

नालंदा परिसर और नए कालेजों पर जोर

शिक्षा के क्षेत्र में भी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। रायगढ़ में नालंदा परिसर का निर्माण कराया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा। इसके अलावा नर्सिंग और फिजियोथेरेपी महाविद्यालय शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रायगढ़ में प्रयास विद्यालय पहले से संचालित है। आने वाले समय में शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य क्षेत्रों में संस्थागत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि जिले के लोगों को बेहतर सुविधाओं के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।

दो वार्डों में विकास कार्यों की सौगात

वार्ड क्रमांक 28 पंजरी प्लांट में 33 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन और शासकीय स्कूल में बाउंड्रीवाल निर्माण का भूमिपूजन किया गया। वहीं वार्ड क्रमांक नौ नवागढ़ी में आठ लाख रुपये की लागत से निर्मित शेड का लोकार्पण हुआ। इन कार्यों से स्थानीय लोगों को सामुदायिक गतिविधियों और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए बेहतर अधोसंरचना मिलेगी।

कार्यक्रम में महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्रीलाल साहू, सुरेश गोयल, पावन अग्रवाल, आशीष ताम्रकार सहित पार्षद, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

नांदघाट-मुंगेली सड़क अब होगी फोरलेन, 137.81 करोड़ रुपये की मंजूरी

बेमेतरा के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक जाने वाली सड़क अब टू-लेन नहीं, बल्कि फोरलेन बनेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए अतिरिक्त 21.81 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। पहले इस मार्ग के निर्माण के लिए 116 करोड़ रुपये स्वीकृत थे। अब कुल 137.81 करोड़ रुपये की लागत से 36.40 किलोमीटर लंबी सड़क का उन्नयन किया जाएगा।
TODAY छत्तीसगढ़  / राज्य शासन ने नांदघाट-मुंगेली मार्ग को फोरलेन करने के लिए अतिरिक्त राशि की स्वीकृति दे दी है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद गुरुवार को राशि स्वीकृति का पत्र जारी किया गया।

वर्ष 2024 में सीआरआईएफ योजना के तहत नांदघाट-मुंगेली मार्ग के टू-लेन निर्माण के लिए 116 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए अधिकारियों को सड़क को टू-लेन से फोरलेन में उन्नयन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन ने अब इसके लिए 21 करोड़ 81 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है।

36.40 किलोमीटर सड़क का होगा निर्माण

पूर्व में स्वीकृत 116 करोड़ रुपये और नई स्वीकृति के 21.81 करोड़ रुपये को मिलाकर परियोजना की कुल लागत 137.81 करोड़ रुपये हो गई है। इस राशि से नांदघाट और मुंगेली के बीच 36.40 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। 

रायपुर से मुंगेली-मध्यप्रदेश का सफर होगा आसान

नांदघाट-मुंगेली मार्ग को फोरलेन करने की मांग क्षेत्रवासी लंबे समय से कर रहे थे। सड़क के फोरलेन बनने से मुंगेली, लोरमी, पंडरिया और इसके आगे मध्यप्रदेश के क्षेत्रों से राजधानी रायपुर आने-जाने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे आवागमन तेज होने के साथ ही यातायात अधिक सुगम और सुरक्षित होगा।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा नवागढ़ विधायक दयालदास बघेल ने सड़क को फोरलेन के रूप में स्वीकृति मिलने पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव के प्रति आभार जताया है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को भी इस स्वीकृति के लिए बधाई दी।

चोरों की गाड़ियों पर अब ‘सशक्त’ की नजर, आइजी ने दिया शत-प्रतिशत रिकवरी का टारगेट

"चोरी के वाहनों की त्वरित बरामदगी और संदिग्ध वाहनों की पहचान के लिए बिलासपुर रेंज पुलिस अब ‘सशक्त’ एप का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करेगी। आइजी रामगोपाल गर्ग ने रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को वाहन चोरी के मामलों का डेटा तत्काल अपडेट करने और बरामदगी की दर शत-प्रतिशत करने के निर्देश दिए। "
TODAY छत्तीसगढ़  / बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने शुक्रवार को ‘सशक्त’ एप की रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक ली। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर, मुंगेली, सारंगढ़ और शक्ति सहित रेंज के विभिन्न जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षक, एएसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी और नए प्रशिक्षु उप निरीक्षक शामिल हुए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य दोपहिया और चारपहिया वाहनों की चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना, संदिग्ध वाहनों की त्वरित पहचान करना और चोरी गए वाहनों की रिकवरी दर बढ़ाना रहा।

24 घंटे में पूरा करना होगा अधूरा डेटा

आइजी ने वाहन चोरी के लंबित मामलों में अधूरे डेटा को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। जिन प्रकरणों में इंजन या चेसिस नंबर दर्ज नहीं हैं, उन्हें वाहन पोर्टल पर 24 घंटे के भीतर अपडेट करने को कहा गया। साथ ही एफआइआर दर्ज होते ही चोरी गए वाहन का विवरण ‘सशक्त’ एप में दर्ज करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि यथासंभव प्रत्येक एफआइआर में वाहन का इंजन नंबर और चेसिस नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए, ताकि संदिग्ध वाहन की पहचान और रिकवरी में आसानी हो।

रेलवे स्टेशन और पार्किंग स्थलों पर बढ़ेगी जांच

पुलिस को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सराफा क्षेत्रों और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर ‘सशक्त’ एप के माध्यम से संदिग्ध वाहनों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पार्किंग ठेकेदारों और कर्मचारियों को भी एप पर यूजर बनाकर जांच अभियान से जोड़ने की बात कही गई।

नए पदस्थ डीएसपी, निरीक्षक, उप निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों का एप पर शत-प्रतिशत पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए। नए यूजर को प्रतिदिन कम से कम 20 संदिग्ध वाहनों की जांच का लक्ष्य भी दिया गया है।

बरामद वाहनों की जानकारी भी तत्काल एप के बैकएंड में अपडेट करने को कहा गया, ताकि वाहन सुपुर्दगी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और डेटा में दोहराव की स्थिति न आए।

साइबर ठगी की रकम वापस कराने MRM पर प्रस्तुति

बैठक में मुंगेली एसपी भोजराम पटेल ने साइबर अपराध के पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने के लिए अपनाए जा रहे मनी रिकवरी मैकेनिज्म (MRM) का लाइव प्रेजेंटेशन दिया।

उन्होंने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और संबंधित पोर्टल के माध्यम से शिकायत मिलने के बाद पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची है, उन्हें होल्ड या फ्रीज कराने का प्रयास करती है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होल्ड की गई राशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराने की कार्रवाई की जाती है।

एसपी ने साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती एक से दो घंटे को ‘गोल्डन आवर’ बताया। उन्होंने कहा कि ठगी के तुरंत बाद शिकायत मिलने पर रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और उसे सुरक्षित ब्लॉक कराने की संभावना बढ़ जाती है।

तकनीक आधारित पुलिसिंग पर जोर

आइजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि ‘सशक्त’ एप का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी और परिणाममूलक बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को एप का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि चोरी के वाहनों की बरामदगी में तेजी आए और लंबित प्रकरणों का निराकरण हो सके।

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