बैठक का मुख्य उद्देश्य दोपहिया और चारपहिया वाहनों की चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना, संदिग्ध वाहनों की त्वरित पहचान करना और चोरी गए वाहनों की रिकवरी दर बढ़ाना रहा।
24 घंटे में पूरा करना होगा अधूरा डेटा
आइजी ने वाहन चोरी के लंबित मामलों में अधूरे डेटा को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। जिन प्रकरणों में इंजन या चेसिस नंबर दर्ज नहीं हैं, उन्हें वाहन पोर्टल पर 24 घंटे के भीतर अपडेट करने को कहा गया। साथ ही एफआइआर दर्ज होते ही चोरी गए वाहन का विवरण ‘सशक्त’ एप में दर्ज करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि यथासंभव प्रत्येक एफआइआर में वाहन का इंजन नंबर और चेसिस नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए, ताकि संदिग्ध वाहन की पहचान और रिकवरी में आसानी हो।
रेलवे स्टेशन और पार्किंग स्थलों पर बढ़ेगी जांच
पुलिस को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सराफा क्षेत्रों और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर ‘सशक्त’ एप के माध्यम से संदिग्ध वाहनों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पार्किंग ठेकेदारों और कर्मचारियों को भी एप पर यूजर बनाकर जांच अभियान से जोड़ने की बात कही गई।
नए पदस्थ डीएसपी, निरीक्षक, उप निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों का एप पर शत-प्रतिशत पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए। नए यूजर को प्रतिदिन कम से कम 20 संदिग्ध वाहनों की जांच का लक्ष्य भी दिया गया है।
बरामद वाहनों की जानकारी भी तत्काल एप के बैकएंड में अपडेट करने को कहा गया, ताकि वाहन सुपुर्दगी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और डेटा में दोहराव की स्थिति न आए।
साइबर ठगी की रकम वापस कराने MRM पर प्रस्तुति
बैठक में मुंगेली एसपी भोजराम पटेल ने साइबर अपराध के पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने के लिए अपनाए जा रहे मनी रिकवरी मैकेनिज्म (MRM) का लाइव प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और संबंधित पोर्टल के माध्यम से शिकायत मिलने के बाद पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची है, उन्हें होल्ड या फ्रीज कराने का प्रयास करती है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होल्ड की गई राशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराने की कार्रवाई की जाती है।
एसपी ने साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती एक से दो घंटे को ‘गोल्डन आवर’ बताया। उन्होंने कहा कि ठगी के तुरंत बाद शिकायत मिलने पर रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और उसे सुरक्षित ब्लॉक कराने की संभावना बढ़ जाती है।
तकनीक आधारित पुलिसिंग पर जोर
आइजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि ‘सशक्त’ एप का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी और परिणाममूलक बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को एप का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि चोरी के वाहनों की बरामदगी में तेजी आए और लंबित प्रकरणों का निराकरण हो सके।

