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अश्लील वीडियो की धमकी, 35 लाख की उगाही और दुष्कर्म

रायगढ़। TODAY छत्तीसगढ़  / महिला थाना रायगढ़ पुलिस ने दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली के गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। आरोपी पर महिला का अश्लील वीडियो बनाकर वर्षों तक शारीरिक और आर्थिक शोषण करने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार कोतरारोड़ थाना क्षेत्र की 33 वर्षीय महिला ने महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी अनिल ईजारदार को स्कूल के समय से जानती थी। वर्ष 2013 में महिला की शादी हो गई थी, लेकिन वर्ष 2019 में फेसबुक के माध्यम से दोनों का दोबारा संपर्क हुआ और बातचीत शुरू हुई।

महिला का आरोप है कि 25 दिसंबर 2020 को आरोपी उसे चंद्रपुर बस स्टैंड से अपने वाहन में बैठाकर गांव के समीप खेत की ओर ले गया, जहां उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और चोरी-छिपे वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद आरोपी कथित रूप से वीडियो और फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करता रहा।

शिकायत के अनुसार आरोपी ने महिला के पति और परिवारजनों को आपत्तिजनक सामग्री भेजने की धमकी देकर लगातार दबाव बनाया। इसी भय का फायदा उठाकर आरोपी ने 25 दिसंबर 2020 से 24 मई 2026 तक महिला का शारीरिक शोषण किया। महिला ने आरोप लगाया है कि इस दौरान आरोपी ने उससे नगद राशि और जेवरात मिलाकर लगभग 35 लाख रुपये की अवैध वसूली भी की। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि लगातार प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग से वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी तथा आत्महत्या तक का विचार करने लगी थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर महिला थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी। पुलिस टीम ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम बंजारी से आरोपी अनिल ईजारदार (32 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। 

पूछताछ के दौरान आरोपी को हिरासत में लेकर उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट कार क्रमांक CG-13-Y-8772 तथा एक मोबाइल फोन जब्त किया गया। आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(एम), 351(3) और 308(2) के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

"सोशल मीडिया पर हुई पहचान या दोस्ती का कोई व्यक्ति गलत फायदा उठाकर ब्लैकमेल करे तो महिलाएं तुरंत पुलिस से संपर्क करें। रायगढ़ पुलिस हर पीड़िता को संवेदनशीलता के साथ न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।"

पॉक्सो केस में शिक्षक की याचिका खारिज, कोर्ट बोला- अभी जांच जरूरी

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक स्कूली छात्रा की शिकायत पर शिक्षक के खिलाफ दर्ज पॉक्सो अधिनियम के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामला नाबालिग छात्रा से जुड़ा है और उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का संकेत मिलता है। ऐसे में जांच के शुरुआती चरण में एफआईआर को निरस्त नहीं किया जा सकता।

मामला सूरजपुर जिले के भटगांव स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है। यहां पदस्थ जीव विज्ञान व्याख्याता हरकेश कुमार जायसवाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

भटगांव पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1)(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत अपराध दर्ज किया था। याचिका में शिक्षक की ओर से दावा किया गया कि शिकायत दुर्भावनावश दर्ज कराई गई है और उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिक्षक वर्ष 2008 से सेवा में हैं और उनके खिलाफ पूर्व में कभी कोई शिकायत नहीं हुई। साथ ही यह भी कहा गया कि कथित घटना की तिथि पर वह राजस्थान के कोटा शहर में अपने बच्चों की नीट परीक्षा की तैयारी के सिलसिले में मौजूद थे।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि कथित घटना 16 फरवरी 2026 की है, जबकि शिकायत लगभग 50 दिन बाद 6 अप्रैल को दर्ज कराई गई। ऐसे में आरोपों की विश्वसनीयता संदिग्ध प्रतीत होती है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाली कक्षा में इस प्रकार की घटना होना भी असंभव बताया गया।

वहीं राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि मामला नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। ऐसे गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी को आधार बनाकर जांच प्रक्रिया समाप्त नहीं की जा सकती। मामले की वास्तविकता निष्पक्ष पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामला प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी माना कि लगाए गए आरोप इस स्तर पर पूरी तरह अविश्वसनीय या असंभव नहीं कहे जा सकते।

इन्हीं आधारों पर अदालत ने एफआईआर निरस्त करने की मांग खारिज कर दी। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी की आशंका है, तो वह कानून के तहत उपलब्ध अन्य वैधानिक उपायों का सहारा ले सकता है।

कुथरेल में बन रहा था नकली गुटखा, 10 लोग रंगे हाथ गिरफ्तार

दुर्ग।  TODAY छत्तीसगढ़  / जिले में अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अंडा पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध गुटखा निर्माण एवं पैकेजिंग के कारोबार का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कुथरेल और अंडा क्षेत्र में संचालित अवैध इकाइयों पर छापा मारकर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सभी 10 आरोपी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों—बांदा, हरदोई, उन्नाव, कानपुर और फतेहपुर—के निवासी बताए गए हैं, जो दुर्ग जिले में रहकर अवैध गुटखा निर्माण कार्य में लगे हुए थे। 

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि थाना अंडा क्षेत्र के कुथरेल एवं आसपास के इलाकों में अवैध रूप से गुटखा निर्माण और पैकेजिंग का कार्य किया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना अंडा पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने गुटखा निर्माण में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार का कच्चा माल, रसायन, मशीनें, पैकेजिंग सामग्री तथा तैयार एवं अर्द्धनिर्मित उत्पाद बरामद किए। प्रारंभिक जांच में बिना किसी वैधानिक अनुमति के गुटखा निर्माण और पैकेजिंग किए जाने की पुष्टि हुई।

पुलिस ने मौके से बरामद समस्त सामग्री को जब्त कर लिया तथा मामले में संलिप्त 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के विरुद्ध थाना अंडा में अपराध क्रमांक 63/2026 एवं 64/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) तथा कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63 के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार आरोपी अवैध आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से यह कारोबार संचालित कर रहे थे। मामले की विस्तृत जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में अवैध कारोबार के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।



दो साल तक पुलिस से बचता रहा ‘सन्नी सरदार’, आखिर ऐसे आया गिरफ्त में

 
रायगढ़।  TODAY छत्तीसगढ़  / कोतवाली पुलिस ने हत्या के प्रयास के एक चर्चित मामले में करीब दो वर्ष से फरार चल रहे आरोपी संदीप सिंह उर्फ सन्नी सरदार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार संदीप सिंह उर्फ सन्नी सरदार, मूल रूप से अमृतसर (पंजाब) का निवासी है और रायगढ़ में रह रहा था। वह वर्ष 2024 में हुए एक जानलेवा हमले के मामले में फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था, जिसके कारण उसके विरुद्ध फरारी में चालान भी पेश किया गया था।

 यह था मामला

पुलिस के मुताबिक 7 दिसंबर 2024 की रात साहिल ठाकुर अपने मित्रों के साथ पोस्ट ऑफिस के पीछे स्थित जिम के पास आग ताप रहा था। इसी दौरान कार में सवार कई युवक वहां पहुंचे और साहिल ठाकुर पर लोहे की रॉड एवं डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में साहिल के सिर, चेहरे, जबड़े, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई थीं। उसका दांत टूट गया था और जबड़ा भी क्षतिग्रस्त हो गया था। बीच-बचाव करने पहुंचे अमन सिंह ठाकुर पर भी आरोपियों ने हमला किया था। गंभीर रूप से घायल साहिल को रायगढ़ से रायपुर रेफर किया गया, जहां उसका उपचार हुआ।

 पहले मिल चुकी है सजा

मामले की जांच के बाद पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया था। इस मामले में आरोपी राज बरेठ को हत्या के प्रयास के अपराध में दोषी पाते हुए न्यायालय ने 30 अक्टूबर 2025 को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं एक अन्य आरोपी को बलवा के मामले में चार वर्ष की सजा मिली थी।

मुखबिर की सूचना पर दबोचा 

कोतवाली पुलिस लगातार फरार आरोपी संदीप सिंह की तलाश कर रही थी। "ऑपरेशन क्लीन हंट" के तहत सक्रिय किए गए मुखबिर तंत्र से मिली सूचना पर पुलिस टीम ने आरोपी को दबोच लिया। पूछताछ में उसने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उसके मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त बांस का डंडा भी बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

साईं मंगलम गली में देह व्यापार का अड्डा ध्वस्त, तीन गिरफ्तार

रायगढ़।  TODAY छत्तीसगढ़  / जिले में देह व्यापार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत रायगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चक्रधरनगर थाना क्षेत्र के छोटे अतरमुड़ा स्थित एक किराये के मकान में संचालित सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान महिला दलाल सहित दो ग्राहकों को गिरफ्तार किया है। मौके से आपत्तिजनक सामग्री और नकद राशि भी बरामद की गई है।

पुलिस के अनुसार छोटे अतरमुड़ा स्थित साईं मंगलम गली किनारे एक किराये के मकान में देह व्यापार संचालित होने की सूचना मिली थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा और डीएसपी ट्रैफिक उत्तम प्रताप सिंह के नेतृत्व में थाना चक्रधरनगर और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई।

सूचना के सत्यापन के लिए पुलिस ने एक पाइंटर को ग्राहक बनाकर मकान में भेजा। पूर्व निर्धारित संकेत मिलने के बाद पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। छापेमारी के दौरान मकान के अलग-अलग कमरों में महिलाएं और ग्राहक आपत्तिजनक स्थिति में पाए गए।  

जांच में सामने आया कि महिला दलाल गुंजन चौहान किराये के मकान में युवतियों के माध्यम से देह व्यापार का संचालन कर रही थी। तलाशी के दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने आपत्तिजनक सामग्री बरामद की। वहीं पाइंटर द्वारा दिए गए 2,500 रुपये भी महिला दलाल के कब्जे से जब्त किए गए।

पुलिस ने महिला दलाल गुंजन चौहान के साथ ग्राहक नेहरू चौहान और मीर रविउल को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना चक्रधरनगर में अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धारा 3, 4 और 5 के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है।

पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा है कि देह व्यापार जैसे संगठित अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। 



नाले में गिरा मिला अर्धविक्षिप्त युवक, पुलिस ने दिखाई इंसानियत


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  राजधानी रायपुर में बीती शाम से जारी तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के बीच गंज पुलिस ने संवेदनशीलता और मानवीय सरोकारों का परिचय देते हुए एक अर्धविक्षिप्त व्यक्ति की जान बचाने का सराहनीय कार्य किया। लगातार बारिश और खराब मौसम के बीच नाले में गिरे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर पुलिस ने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

बारिश के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए गंज थाना सहित शहर के सभी थानों की पेट्रोलिंग टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर रही थीं। इस दौरान पेड़ गिरने, बिजली के तार टूटने, जलभराव और अन्य संभावित खतरों पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी।

इसी क्रम में गंज थाना में पदस्थ आरक्षक जितेंद्र साहू और आरक्षक जितेश तिवेश मानझी पेट्रोलिंग के दौरान चूनाभट्टी स्थित अंडरब्रिज के समीप पहुंचे। वहां उन्होंने एक व्यक्ति को नाले में गिरा हुआ देखा। तेज बारिश और अंधेरे के कारण स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण थी। दोनों आरक्षकों ने तत्काल स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू अभियान शुरू किया और व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई।

पूछताछ में उसकी पहचान झारखंड के गुमला जिले निवासी श्रावण कुमार भगत के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार बातचीत और व्यवहार से वह अर्धविक्षिप्त प्रतीत हुआ तथा अपने परिजनों और वर्तमान स्थिति के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने में सक्षम नहीं था। गंज पुलिस ने उसके प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक देखभाल और सहायता सुनिश्चित की।

मूसलाधार बारिश और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच की गई यह कार्रवाई एक बार फिर पुलिस के मानवीय चेहरे को सामने लाती है। गंज पुलिस की तत्परता ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया और "सेवा, सुरक्षा और सहयोग" के संकल्प को सार्थक रूप से चरितार्थ किया।


दुष्कर्म मामले में समझौते का दबाव बनाने के आरोप पर एसआई लाइन अटैच

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  सिरगिट्टी क्षेत्र में दो नाबालिग बहनों से दुष्कर्म के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह ने उप निरीक्षक (एसआई) शीतला प्रसाद त्रिपाठी को लाइन अटैच कर दिया है। पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आरोपी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय पुलिस समझौते का दबाव बना रही थी। 

दुष्कर्म केस पर बवाल, शिकायत के बाद एसएसपी का बड़ा एक्शन

परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। पीड़ित बच्चियों की मां ने केंद्रीय गृह मंत्री को शिकायत पत्र भेजकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले में समय पर कार्रवाई नहीं की गई, महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र करने में लापरवाही बरती गई और परिवार पर समझौते का दबाव बनाया गया। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने तत्काल प्रभाव से एसआई शीतला प्रसाद त्रिपाठी को लाइन हाजिर कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मित कौर चावला को सौंपी गई है। उन्हें मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। 

साक्ष्य जुटाने में लापरवाही का आरोप

परिवार का आरोप है कि पूछताछ के दौरान बच्चियों ने बताया था कि आरोपी वारदात के समय उन्हें रस्सी से बांधते थे। परिजनों ने पुलिस से कथित रूप से रस्सी और अन्य संभावित वैज्ञानिक साक्ष्यों को तत्काल जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की थी, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। परिजनों का कहना है कि इससे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका है।

बच्चियों पर मानसिक दबाव का भी आरोप

शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान बच्चियों को बार-बार थाने बुलाया गया, जिससे उन पर मानसिक दबाव पड़ा। परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष की ओर से अब भी धमकियां मिल रही हैं, बावजूद इसके पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई। 

जांच से हटाने की मांग

पीड़िता की मां ने शिकायत में थाना प्रभारी अभय सिंह बैस, उप निरीक्षक शीतला प्रसाद त्रिपाठी और जांच अधिकारी संतोषी अग्रवाल को मामले की जांच से हटाने तथा उनकी भूमिका की विभागीय जांच कराने की मांग की है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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