Slider

LATEST NEWS
Loading Latest News...

पॉक्सो केस में शिक्षक की याचिका खारिज, कोर्ट बोला- अभी जांच जरूरी

'मैं कोटा में था' दलील भी नहीं आई काम, एफआईआर रद्द करने से इंकार

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक स्कूली छात्रा की शिकायत पर शिक्षक के खिलाफ दर्ज पॉक्सो अधिनियम के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामला नाबालिग छात्रा से जुड़ा है और उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का संकेत मिलता है। ऐसे में जांच के शुरुआती चरण में एफआईआर को निरस्त नहीं किया जा सकता।

मामला सूरजपुर जिले के भटगांव स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है। यहां पदस्थ जीव विज्ञान व्याख्याता हरकेश कुमार जायसवाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

भटगांव पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1)(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत अपराध दर्ज किया था। याचिका में शिक्षक की ओर से दावा किया गया कि शिकायत दुर्भावनावश दर्ज कराई गई है और उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिक्षक वर्ष 2008 से सेवा में हैं और उनके खिलाफ पूर्व में कभी कोई शिकायत नहीं हुई। साथ ही यह भी कहा गया कि कथित घटना की तिथि पर वह राजस्थान के कोटा शहर में अपने बच्चों की नीट परीक्षा की तैयारी के सिलसिले में मौजूद थे।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि कथित घटना 16 फरवरी 2026 की है, जबकि शिकायत लगभग 50 दिन बाद 6 अप्रैल को दर्ज कराई गई। ऐसे में आरोपों की विश्वसनीयता संदिग्ध प्रतीत होती है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाली कक्षा में इस प्रकार की घटना होना भी असंभव बताया गया।

वहीं राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि मामला नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। ऐसे गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी को आधार बनाकर जांच प्रक्रिया समाप्त नहीं की जा सकती। मामले की वास्तविकता निष्पक्ष पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामला प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी माना कि लगाए गए आरोप इस स्तर पर पूरी तरह अविश्वसनीय या असंभव नहीं कहे जा सकते।

इन्हीं आधारों पर अदालत ने एफआईआर निरस्त करने की मांग खारिज कर दी। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी की आशंका है, तो वह कानून के तहत उपलब्ध अन्य वैधानिक उपायों का सहारा ले सकता है।

© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com