जहरीला कुत्ता बना काल: 25 गिद्धों की मौत से हड़कंप, वन विभाग जांच में जुटा


लखनऊ।
  TODAY छत्तीसगढ़  / लखीमपुर खीरी के भीरा थाना क्षेत्र स्थित सेमरिया गांव में मंगलवार को एक खेत में मरा हुआ कुत्ता खाने से लुप्तप्राय प्रजाति के 25 गिद्धों की मौत हो गई. गांव वालों ने बकरियों पर हमला करने वाले हिंसक कुत्तों को मारने के लिए चावल में कीटनाशक (पेस्टीसाइड) मिलाकर खिलाया था. इस जहरीले भोजन को खाकर एक कुत्ते की मौत हुई, जिसे खाने के लिए गिद्धों का झुंड वहां पहुंचा. जहर इतना घातक था कि कुत्ते का मांस खाते ही 25 गिद्धों ने मौके पर दम तोड़ दिया, जबकि 5 गिद्धों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है. वन विभाग ने सभी शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. 

सेमरिया गांव के लोगों ने बताया कि उन्होंने सालों से एक साथ इतने गिद्धों का झुंड नहीं देखा था. जब शुरुआत में तकरीबन 40 गिद्ध वहां कुत्ते का शव खाने जुटे, तो ग्रामीण उन्हें देखकर खुश थे. लेकिन कुछ ही देर में यह खुशी मातम में बदल गई. ग्रामीणों के सामने ही एक-एक कर गिद्ध तड़पने लगे और देखते ही देखते खेत में गिद्धों की लाशों का ढेर लग गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 25 गिद्धों ने तुरंत दम तोड़ दिया.

दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि किसान अपनी बकरियों और खेतों में आने वाले जानवरों से परेशान था. उसने चावल में पेस्टीसाइड मिलाकर कुत्तों के लिए रखा था. इसे खाकर जिस कुत्ते की मौत हुई, वह गिद्धों के लिए काल बन गया.वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृत गिद्धों का पोस्टमार्टम कराया है. अधिकारियों के मुताबिक, जहर के असर की सटीक पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित कर आईवीआरआई (IVRI) बरेली भेजा जा रहा है. 

गिद्धों की यह मौत पर्यावरण के लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है. गिद्ध पहले से ही लुप्तप्राय श्रेणी में हैं और सरकार टाइगर रिजर्व के पास सेंचुरी बनाकर उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है. ऐसे में एक ही स्थान पर 25 गिद्धों का मरना संरक्षण प्रयासों को बड़ा झटका है. फिलहाल, 5 गंभीर रूप से बीमार गिद्धों को बचाने की कोशिश की जा रही है. वन विभाग इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी देख रहा है. (साभार / आजतक )



करंट से वन्यजीवों की मौत पर हाई कोर्ट सख्त, अपर मुख्य सचिव से मांगा शपथ पत्र


रायपुर ।
  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ में बिजली करंट से हो रही हाथियों और अन्य वन्यजीवों की लगातार मौत के मामलों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव से शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई।

 लगातार घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की ओर से अदालत में प्रस्तुत समाचार पत्रों की कतरनों के आधार पर बताया गया कि मार्च माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में करंट से कई वन्यजीवों की मौत हुई है। इनमें प्रमुख घटनाएं— रायगढ़ के घरघोड़ा वन क्षेत्र में दो हाथी शावकों की मौत,  सूरजपुर के प्रतापपुर में खेत में करंट तार से हाथी की मौत, कोरबा में 11 केवी तार की चपेट में मादा भालू व दो शावकों की मौत AUR मैनपाट व सारंगढ़ क्षेत्रों में अवैध करंट से मानव और वन्यजीवों की मौत शामिल हैं।

 कोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब

खंडपीठ ने अपर मुख्य सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उक्त घटनाएं किन परिस्थितियों में हुईं जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की ? भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं ? 

 अवैध करंट बना मौत का कारण

प्राथमिक तौर पर सामने आया है कि खेतों व जंगलों में जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा या शिकार के लिए अवैध रूप से करंट युक्त तार बिछाए जा रहे हैं, जो वन्यजीवों के लिए घातक साबित हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 5 मई को निर्धारित की है और तब तक संबंधित विभाग से शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

लाल आतंक के सूर्यास्त के साथ सुकमा में उदय हुआ स्वास्थ्य सेवाओं का सूरज


रायपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  / मेगा हेल्थ कैंप एक प्रमुख निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर है, जहाँ नामी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर कैंसर, हृदय रोग, स्त्री रोग, और नेत्र रोग जैसी बीमारियों का मुफ्त इलाज, जांच और दवाइयां प्रदान करते हैं। इसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा, दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग वितरण और आधुनिक जांचकी सुविधाएं भी मिलती हैं। लाल आतंक की समाप्ति के इस दौर में जब क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बना है, तब प्रशासन की पहुँच अंतिम छोर के व्यक्ति तक आसान हुई है। 

जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर का गत दिवस आयोजन किया गया। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री एवं सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के द्वारा शुभारंभ पश्चात इस मेगा स्वास्थ्य शिविर में उन संवेदनशील और अंदरूनी क्षेत्रों के 3,700 से अधिक ग्रामीण बेखौफ होकर पहुँचे, जो कभी मुख्यधारा से कटे हुए थे। कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित उक्त मेगा स्वास्थ्य शिविर में कुल 6,500 से अधिक लाभार्थियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि अब ग्रामीण बंदूकों के साये से निकलकर आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ परामर्श पर भरोसा जता रहे हैं। शिविर के दौरान 21 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 40 स्वास्थ्य योद्धाओं की टीम ने इन वनवासियों के लिए देवदूत बनकर काम किया। 

तेंदुलकर के परिवार का ‘लो-प्रोफाइल’ बिलासपुर दौरा, गांवों और स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में मंगलवार तड़के एक ऐसा दौरा हुआ, जिसकी जानकारी 24 घंटे तक सार्वजनिक नहीं हुई। भारत रत्न और देश के के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के परिवार के सदस्य अंजलि तेंदुलकर, सारा तेंदुलकर और सानिया चांडक शहर पहुंचे और सीमित दायरे में विभिन्न स्थानों का दौरा किया। इस पूरे कार्यक्रम को बेहद कम प्रोफाइल रखा गया और इसकी जानकारी केवल चुनिंदा अधिकारियों तक ही सीमित रही।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तीनों सदस्य सुबह करीब 5:30 बजे बिलासपुर पहुंचे और मंगला चौक स्थित कोर्टयार्ड मेरिओट होटल में ठहरे। होटल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रही, हालांकि आम लोगों की आवाजाही या भीड़ से बचने के लिए कार्यक्रम को सार्वजनिक नहीं किया गया। 

ATR के गांवों का दौरा और स्थानीय लोगों से संवाद

दोपहर के समय यह दल अचानकमार क्षेत्र के छपरवा-बम्हनी गांव पहुंचा। यहां उन्होंने पैदल भ्रमण किया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उन्होंने ग्रामीणों से उनकी जीवनशैली, जरूरतों और दैनिक चुनौतियों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बच्चों के साथ बातचीत और एक नवजात शिशु को गोद में लेने जैसे दृश्य भी सामने आए। यह दौरा औपचारिक कार्यक्रम की बजाय जमीनी स्तर पर स्थितियों को समझने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस

बुधवार यानी आज सुबह यह दल गनियारी स्थित एक जन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। यहां फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया गया और डॉक्टरों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। सूत्रों का कहना है कि यह दौरा किसी सामाजिक संस्था के आमंत्रण पर हुआ और स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावित सहयोग पर भी बातचीत हुई।

गोपनीयता और प्रशासनिक तैयारी

इस दौरे की एक प्रमुख विशेषता इसकी गोपनीयता रही। जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की, लेकिन कार्यक्रम को सार्वजनिक नहीं होने दिया गया।सम्भवतः इस तरह के दौरे में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जानकारी सीमित रखी है।”

क्या संकेत देता है यह दौरा?

कुछ जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरे यह संकेत देते हैं कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग अब सीधे जमीनी स्तर पर जाकर सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस दौरे से जुड़े किसी औपचारिक बयान या भविष्य की योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


© all rights reserved TODAY छत्तीसगढ़ 2018
todaychhattisgarhtcg@gmail.com