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बिलासपुर हाईकोर्ट: अमित जोगी दोषी, उम्रकैद की सजा


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 31 मई 2007 के फैसले को पलटते हुए यह निर्णय दिया है । मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने सीबीआई की अपील और शिकायतकर्ता की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने अमित जोगी को हत्या की साजिश (धारा 120-बी), हत्या (धारा 302/34) और संपत्ति क्षति (धारा 427/34) के तहत दोषी माना है। अदालत ने कहा कि यह घटना एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी, जिसमें अमित जोगी मुख्य साजिशकर्ता थे।

एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की 4 जून 2003 की रात रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में मामला लूट से जुड़ा बताया गया था, लेकिन बाद में सीबीआई जांच में राजनीतिक साजिश का एंगल सामने आया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि— होटल ग्रीन पार्क में हुई बैठक में साजिश रची गई।  आरोपी की मौजूदगी और भूमिका के पर्याप्त साक्ष्य हैं। चिमन सिंह को हत्या की जिम्मेदारी दी गई। घटना के बाद साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास हुआ। कोर्ट ने माना कि साजिश जैसे मामलों में परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी पर्याप्त होते हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया। इसी आधार पर अमित जोगी को बरी किया गया था, जिसे अब निरस्त कर दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश में साफ़ लिखा गया है कि अमित जोगी तीन सप्ताह के भीतर न्यायालय में सरेंडर करें। 

सीबीआई और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया था कि सभी आरोपियों के खिलाफ समान साक्ष्य होने के बावजूद अमित जोगी को गलत तरीके से बरी किया गया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले में आगे की सुनवाई वहां होगी। 

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