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नक्सल मुक्ति के बाद जंगलों में ‘शिकार राज’ ! VIDEO से खुला 9 दुर्लभ गिलहरियों के शिकार का कांड

गरियाबंद-दंतेवाड़ा में बेखौफ शिकारी, लापरवाह वन तंत्र पर सवाल; भालू की खाल बरामद, गिरोह के तार गहरे

दंतेवाड़ा / रायपुर ।
  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभाव से मुक्त हो रहे इलाकों में अब एक नया खतरा तेजी से उभर रहा है—वन्यजीवों का संगठित अवैध शिकार। दंतेवाड़ा क्षेत्र में (गीदम-बारसूर) 9 दुर्लभ भारतीय विशाल गिलहरियों (Indian Giant Squirrel या Malabar Giant Squirrel) के शिकार का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने जंगलों की सुरक्षा और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 


इस पूरे मामले का खुलासा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल एक वीडियो से हुआ, जिसमें आरोपी शिकार की गई गिलहरियों के साथ दिखाई दे रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की टीम हरकत में आई और संयुक्त कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी बंशीराम कोवासी को दंतेवाड़ा के बारसूर क्षेत्र से गिरफ्तार किया।  

वन महकमें को तलाशी में आरोपी के घर से भालू की खाल, शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे बरामद हुए। यह मामला Wildlife Protection Act 1972 की अनुसूची-1 में शामिल प्रजाति से जुड़ा है, जहां सजा बेहद कठोर है। वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि यह मामला अकेले व्यक्ति का नहीं, बल्कि संगठित शिकार नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। इस मामले में शामिल अन्य आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। 


जानकारों का और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले नक्सली गतिविधियों के कारण मानव गतिविधि सीमित थी, वहां अब नियंत्रण कमजोर पड़ते ही शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।  इस मामले में गिरफ्तार आरोपी ने अपने वायरल वीडियो में जिस गाने को बैग्राउंड में बजाया है वो प्रदेश के कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा के ऊपर बनाया गया गीत है। मतलब साफ़ है कि फिर नक्सली हिड़मा के गाने पर रील बनाकर इंस्टाग्राम पर डालने वाले गिरोह के तार और गहरे हैं। 

इस घटना ने वन विभाग की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकार की गतिविधियां लंबे समय से जारी थीं, सोशल मीडिया पर वीडियो आने के बाद ही वन महकमें की नींद खुली और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गयी। इतना ही नहीं वन अमले का जमीनी स्तर पर गश्त और इंटेलिजेंस कमजोर दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में फंदे और अवैध शिकार अब आम होता जा रहा है, लेकिन समय रहते रोकथाम नहीं हो पा रही।
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