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50 बाल अपचारी, सिर्फ दो चौकीदार... आखिर जिम्मेदार कौन ? बेनकाब हुई सुरक्षा व्यवस्था

बाल संप्रेक्षण गृह में हत्या के बाद प्रशासनिक चूक पर घिरा विभाग, न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे परिजन

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  बाल संप्रेक्षण गृह में संविदा चौकीदार नरेंद्र खांडे की हत्या के बाद मामला केवल आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब प्रशासनिक जवाबदेही और संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजन और सामाजिक संगठन 'परिवर्तन' नूतन चौक स्थित बाल संप्रेक्षण गृह के बाहर धरने पर बैठकर न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह घटना सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक और विभागीय लापरवाही का परिणाम है।

धरने पर मौजूद लोगों का आरोप है कि बाल संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय से अपर्याप्त थी। मृतक की पत्नी सीमा खांडे ने बताया कि संस्थान में करीब 50 बाल अपचारी रह रहे हैं, जबकि उनकी निगरानी के लिए केवल दो चौकीदार तैनात थे। दिन और रात की ड्यूटी के बीच सीमित सुरक्षा व्यवस्था के कारण किसी भी आपात स्थिति से निपटना लगभग असंभव था। उनका कहना है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था।

2019 की घटना का भी जिक्र

सामाजिक संगठन परिवर्तन ने दावा किया कि वर्ष 2019 में भी इसी बाल संप्रेक्षण गृह में एक नाबालिग की मौत हुई थी। संगठन का आरोप है कि उस समय भी संस्थान की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे, लेकिन सुधारात्मक कदम प्रभावी ढंग से नहीं उठाए गए। हालांकि, इस आरोप पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ट्रांसफर के बावजूद ड्यूटी पर रखने का आरोप

धरना दे रहे लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि मृतक नरेंद्र खांडे का मार्च महीने में दूसरे स्थान पर स्थानांतरण हो चुका था, लेकिन उन्हें कथित तौर पर तत्कालीन व्यवस्था के तहत वहीं कार्य करने के लिए रोका गया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रदर्शनकारी इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

विभागीय जवाबदेही की मांग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घटना की जांच केवल हत्या तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ की संख्या, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक स्तर पर क्या-क्या कमियां थीं। उनका आरोप है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो इतनी गंभीर घटना नहीं होती।

संगठन ने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है। साथ ही राज्य सरकार से इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की भी अपील की गई है।

परिजनों की प्रमुख मांगें

धरना दे रहे परिजनों और सामाजिक संगठन ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं—

  • घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  • परिवार के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी दी जाए।
  • एफआईआर की प्रति परिजनों को उपलब्ध कराई जाए।
  • मृतक के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करे।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। वहीं पुलिस हत्या और फरार बाल अपचारियों से जुड़े मामले की जांच अलग से कर रही है। 


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