"लिव-इन रिलेशनशिप पर आधारित फिल्म में युवाओं को संदेश दिया गया कि किसी भी रिश्ते में प्रवेश करने से पहले उसके सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े"
कार्यक्रम में प्रदर्शित लिव-इन रिलेशनशिप पर आधारित फिल्म में युवाओं को संदेश दिया गया कि किसी भी रिश्ते में प्रवेश करने से पहले उसके सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
यातायात जागरूकता पर बनी फिल्म में सड़क पर स्टंट करने जैसी खतरनाक प्रवृत्तियों से दूर रहने का संदेश दिया गया। फिल्म में दिखाया गया कि लापरवाही और स्टंट न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि स्वयं और दूसरों के जीवन को भी खतरे में डालते हैं।
वहीं साइबर क्राइम जागरूकता पर आधारित फिल्म में स्कूली विद्यार्थियों ने ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे अपराधों से बचाव के प्रभावी उपाय प्रस्तुत किए। फिल्म के जरिए लोगों से डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने और अपनी व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखने की अपील की गई।
इस अवसर पर फिल्मों के निर्माण से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम को भी बिलासपुर पुलिस ने सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में फिल्म निर्देशक डॉ. राहुल पारीक, सहायक निर्देशक आकांक्षा सिंह राठौड़, किशन यादव, श्रावणी नायडू, अशोक उपाध्याय, शत्रुघ्न जसवानी तथा मेकअप आर्टिस्ट दीपांशी घोष शामिल रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह रहे। इस अवसर पर डॉ. विनोद तिवारी, लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. अंकुल ठकराल, जेके कॉलेज के सचिव डॉ. इरशाद खान, निदेशक डॉ. आशीष सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह एवं रामगोपाल करियारे सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, शिक्षाविद, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक उमाशंकर पांडेय ने किया।
समापन अवसर पर बिलासपुर पुलिस ने कहा कि जनजागरूकता आधारित लघु फिल्में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम हैं। 'चेतना अभियान' के तहत भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जागरूक किया जाता रहेगा।


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