"छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक कथित ड्रग्स (NDPS) मामले में नया मोड़ आ गया है. पिछले क़रीब चार महीनों से जेल में बंद एक महिला के परिजनों ने राज्य महिला आयोग के सामने पुलिस की जांच और पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाए है"
आयोजित जनसुनवाई में रानी सिंह के परिजन महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक से मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि रानी सिंह को एक पारिवारिक विवाद के चलते सुनियोजित तरीके से झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाया गया है और पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
रानी सिंह के भाई शिवराज ने आयोग को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि उनकी बहन के बहनोई, जो मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं, ने कथित रूप से नशीली दवाइयां घर में रखवाकर पुलिस कार्रवाई कराई। उनका दावा है कि यदि मामले की शुरुआत से निष्पक्ष जांच होती तो उनकी बहन को पिछले चार महीने से जेल में नहीं रहना पड़ता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम में कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है और मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
एएसपी को जांच के निर्देश
शिकायत सुनने के बाद महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने मामले को गंभीर मानते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सभी तथ्यों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में परिजनों के आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में आगे नई कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो पुलिस की अब तक की कार्रवाई को बल मिलेगा।
नोट: इस मामले में रानी सिंह के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत दावे हैं। इनकी सत्यता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष के आरोपों या दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।

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