बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों तक बंद रहे श्री जगन्नाथ मंदिर के पट मंगलवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा ने नवयौवन (नवरूप) स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर खुलते ही सुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह का माहौल रहा।
परंपरा के अनुसार, भोर में मंदिर के शिखर पर लगभग 15 फीट लंबा नया ध्वज चढ़ाया गया। ध्वज परिवर्तन की इस परंपरा को 'नेत उत्सव' के रूप में निभाया गया। मान्यता है कि ध्वज बदलने के साथ ही भगवान के स्वस्थ होने का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचता है।
ओड़िया समाज के अध्यक्ष के.के. बेहरा ने बताया कि स्नान पूर्णिमा के दिन महाअभिषेक के बाद भगवान को ज्वर आने की धार्मिक मान्यता है। इसके बाद भगवान 15 दिनों तक 'अनसर' अवधि में विश्राम करते हैं। इस दौरान मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं और भगवान की विशेष सेवा, उपचार तथा श्रृंगार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि विश्राम अवधि पूरी होने के बाद भगवान नवयौवन स्वरूप में प्रकट होते हैं। इस अवसर को 'नवयौवन दर्शन' या 'नवरूप दर्शन' के रूप में मनाया जाता है, जिसका धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, अनसर काल में भगवान की सेवा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से की जाती रही। मंगलवार को विश्राम अवधि समाप्त होने के बाद भगवान को फिर से अन्न का भोग अर्पित किया गया। दिनभर श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते रहे।

