तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह के सवाल पर राज्य सरकार ने बताया कि कोपरा जलाशय के रामसर साइट घोषित होने के बाद 10 किलोमीटर दायरे में संचालित कोल डिपो के संबंध में छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी से मार्गदर्शन मांगा गया है। फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
रायपुर: TODAY छत्तीसगढ़ / पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक गतिविधियों के बीच टकराव का एक नया मामला छत्तीसगढ़ में सामने आया है। राज्य के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित 'कोपरा जलाशय' को हाल ही में रामसर साइट (Ramsar Site) का दर्ज़ा मिला है, लेकिन इसके 10 किलोमीटर के संवेदनशील दायरे में अभी भी कोल डिपो (कोयला भंडारण) का संचालन बेरोकटोक जारी है।
रामसर साइट की घोषणा के बाद भी राज्य सरकार अब तक इन कोल डिपो को बंद करने या स्थानांतरित करने पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। इस प्रशासनिक देरी के कारण अंतरराष्ट्रीय महत्व के इस आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र पर प्रदूषण का गंभीर ख़तरा मंडराने लगा है।
यह पूरा मामला हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी गूंजा, जहां सरकार ने स्वीकार किया कि इस संबंध में अभी दिशा-निर्देशों का इंतज़ार किया जा रहा है।
विधानसभा में उठे सवाल
तखतपुर से विधायक धर्मजीत सिंह ने विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राज्य सरकार से कई तीखे सवाल पूछे:
कोल डिपो की स्थिति: तखतपुर विधानसभा क्षेत्र में कितने कोयला भंडारण लाइसेंस (अनुज्ञप्ति) किन स्थानों पर, कितनी मात्रा और कितनी अवधि के लिए स्वीकृत हैं?
जांच और कार्रवाई: वर्ष 2024-25 और 2025-26 में इन डिपो की कब-कब जांच की गई? क्या डिपो संचालक पर्यावरण विभाग की शर्तों का पालन कर रहे हैं? अनियमितता पाए जाने पर पिछले दो वर्षों में किन पर क्या कार्रवाई हुई?
रामसर साइट का नियम: क्या कोपरा जलाशय रामसर साइट के रूप में चिह्नित है? यदि हाँ, तो क्या इसके 10 किलोमीटर के दायरे में कोल डिपो संचालित करने का प्रावधान है? यदि नहीं, तो इन पर कार्रवाई कब तक की जाएगी?
मुख्यमंत्री ने क्या दिया जवाब?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इन सवालों का लिखित जवाब दिया। उन्होंने अपने जवाब में स्पष्ट किया:
रामसर साइट की पुष्टि: मुख्यमंत्री ने पटल पर जानकारी दी कि तखतपुर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम कोपरा में स्थित जलाशय को 12 दिसंबर 2025 को 'छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी' द्वारा रामसर साइट के रूप में चिह्नित किया गया है।
कार्रवाई पर असमंजस: 10 किलोमीटर के दायरे में कोल डिपो के संचालन पर कार्रवाई के सवाल पर सरकार ने कहा कि वर्तमान में (आज दिनांक तक) छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी से इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अथॉरिटी से मार्गदर्शन मांगा गया है।
सरकार के इस जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक वेटलैंड अथॉरिटी की ओर से नियम स्पष्ट नहीं किए जाते, तब तक कोल डिपो का संचालन जारी रहेगा।
क्या कहते हैं पर्यावरण संरक्षण के नियम?
रामसर साइट्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिकी (Ecology) के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील माना जाता है। भारत में ऐसे क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं:
पूर्ण प्रतिबंध (Wetlands Rules, 2017): आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत किसी भी रामसर साइट में ठोस कचरा डंप करने, खतरनाक पदार्थों के भंडारण और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की स्थापना पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है।
इको-सेंसिटिव ज़ोन (Eco-Sensitive Zone): सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और रामसर साइटों के आसपास आमतौर पर न्यूनतम 1 किलोमीटर का अनिवार्य "इको-सेंसिटिव ज़ोन" होना चाहिए, जहां मानवीय और औद्योगिक गतिविधियां प्रतिबंधित होती हैं।
10 किलोमीटर का 'ज़ोन ऑफ़ इन्फ्लुएंस' (Zone of Influence): रामसर साइट के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे को 'ज़ोन ऑफ़ इन्फ्लुएंस' माना जाता है। यदि इस दायरे में कोई नया कोल डिपो या भारी उद्योग स्थापित होता है, तो उसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अत्यंत कड़ी पर्यावरण मंज़ूरी (Environmental Clearance) लेनी आवश्यक है।
क्यों मंडरा रहा है ख़तरा?
कोयला डिपो से उड़ने वाली बारीक धूल (Coal Dust) हवा और पानी के ज़रिए आसानी से वेटलैंड तक पहुंच सकती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि कोयले का प्रदूषण जलाशय के पानी की गुणवत्ता को बिगाड़ सकता है, जिससे वहां पनपने वाले जलीय जीवों, वनस्पतियों और यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों के जीवन पर सीधा और जानलेवा असर पड़ सकता है।
अब देखना यह है कि 'छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी' इस मामले में कितनी जल्दी अपने दिशा-निर्देश जारी करती है और राज्य सरकार कोपरा जलाशय के पर्यावरण को बचाने के लिए कोल डिपो पर क्या एक्शन लेती है।
हालांकि, किसी विशेष कोल डिपो द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है या नहीं, इस संबंध में सरकार ने अपने जवाब में कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।

