‘यशोदा एआई’ से महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान, डिजिटल दुनिया से जुड़ेंगी दीदियां


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर की पहल पर बिलासपुर में स्व सहायता समूह की महिलाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘यशोदा एआई’ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में महिला प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महापौर पूजा विधानी, एडिशनल एसपी रश्मित कौर चावला, आयोग के डिप्टी डायरेक्टर रामअवतार सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजया रहाटकर ने कहा कि डिजिटल युग में महिलाओं का तकनीक से जुड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा अब तक 31 कार्यशालाओं के माध्यम से हजारों महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं स्व सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं और ‘यशोदा एआई’ जैसे प्रशिक्षण उनके लिए नए अवसर खोलेंगे।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को उत्पादों की डिजिटल मार्केटिंग, टैगलाइन तैयार करना, डिजाइन बनाना और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री की जानकारी दी गई। इससे महिलाएं अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचा सकेंगी और आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगी।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि अब वे डिजिटल माध्यमों का बेहतर उपयोग कर सकेंगी और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा पाएंगी। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं की जिज्ञासाओं का विशेषज्ञों द्वारा समाधान भी किया गया। रहाटकर ने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि महिलाओं के साथ सतत संवाद और सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने महिलाओं को तकनीक का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

महिला सुरक्षा पर सख्त संदेश: “अंधश्रद्धा से बचें, जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत” — विजया रहाटकर


बिलासपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर के बिलासपुर दौरे ने महिला सुरक्षा, अंधश्रद्धा और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा को जन्म दे दिया है। कलेक्टोरेट स्थित मंथन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक और जनसुनवाई के बाद वे पत्रकारों से रु-ब-रु हुई। उन्होंने सियासी सवालों से किनारा करते हुये देश और राज्य में महिलाओं से संबंधित सवालों का बड़ी ही मुखरता से जवाब दिया।  

एक सवाल के जवाब में विजया किशोर रहाटकर ने स्पष्ट कहा कि महिला सुरक्षा सिर्फ कानून या व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज की सोच और जागरूकता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई और प्रभावी फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए।

देश के किन राज्यों से महिला संबंधी अपराधों की शिकायतें ज्यादा हैं ? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जाहिर तौर पर देश के बड़े राज्यों में संख्या अधिक दिखना स्वाभाविक है, लेकिन महिलाओं की पीड़ा हर जगह समान है। उन्होंने कहा कि हर राज्य की अपनी चुनौतियां हैं, इसलिए सीधी तुलना करना उचित नहीं होगा । 

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने बताया कि आयोग को देशभर से हर साल एक लाख से अधिक शिकायतें मिलती हैं। उन्होंने कहा कि हर महिला दिल्ली तक नहीं पहुंच सकती, इसलिए आयोग अब “जनसुनवाई मॉडल” को विस्तार दे रहा है, जिससे दूरदराज की महिलाएं भी सीधे अपनी बात रख सकें और उन्हें त्वरित राहत मिल सके। शिकायत और एफआईआर के अंतर पर उन्होंने कहा कि आयोग का दायरा अलग होता है। कई मामले पहले आयोग तक आते हैं, फिर संबंधित एजेंसियों को भेजे जाते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि हर शिकायत को सही मंच तक पहुंचाया जाए ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके। 

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने साफ कहा कि कोई एक क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसे पूरी तरह “हाई रिस्क जोन” कहा जा सके। जहां सामाजिक विकृति है, वहीं अपराध है। इसलिए पूरे समाज में जागरूकता जरूरी है। देश में हाल ही में हुए महिला उत्पीड़न संबंधी कुछ मामलों के प्रकाश में आने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि विश्वास जरूरी है, लेकिन अंधानुकरण नहीं। महिलाओं को हर स्थिति में समझदारी और सतर्कता से निर्णय लेना चाहिए। समाज को भी इस विषय पर लगातार जागरूक रहना होगा। अशोक खरात से लेकर नासिक के चर्चित मामले पर उन्होंने कहा कि यह घटना पूरे समाज के लिए शर्मनाक है। पढ़े-लिखे लोग भी ऐसे जाल में फंस रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने तथाकथित बाबाओं से सावधान रहने की चेतावनी दी।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि महिलाएं हमेशा से नेतृत्व करती रही हैं। पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत आरक्षण के बाद महिलाओं ने उत्कृष्ट कार्य किया है, अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें पूरा अवसर मिलना चाहिए। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर र ने अंत में कहा कि कानून और संस्थाएं जरूरी हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव तभी आएगा जब समाज की सोच बदलेगी और जागरूकता बढ़ेगी।

साय कैबिनेट के बड़े फैसले: गैस नीति से लेकर खेल और राहत तक अहम निर्णय


रायपुर । 
TODAY छत्तीसगढ़  /  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में डिप्टी सीएम (गृह) विजय शर्मा अनुपस्थित रहे, जबकि डिप्टी सीएम अरुण साव ने मीडिया को निर्णयों की जानकारी दी।

सबसे अहम निर्णय के तहत मंत्रिपरिषद ने “छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026” को मंजूरी दी है। इस नीति के लागू होने से प्रदेश में स्वच्छ और किफायती प्राकृतिक गैस की उपलब्धता बढ़ेगी। पाइपलाइन के जरिए गैस आपूर्ति का विस्तार होने से शहरी क्षेत्रों में ईंधन की सुविधा और आसान होगी। इससे न केवल एलपीजी का सस्ता विकल्प मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, खेल अधोसंरचना को बढ़ावा देने के लिए राजनांदगांव जिला क्रिकेट एसोसिएशन को आधुनिक क्रिकेट अकादमी और खेल मैदान निर्माण हेतु 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया गया है।

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 6,809 व्यक्तियों और संस्थाओं को लगभग 11.98 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की स्वीकृति भी प्रदान की। यह सहायता जरूरतमंदों को त्वरित राहत और सामाजिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से दी जाएगी।

बैठक में एक अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए वर्ष 1988 बैच के आईपीएस अधिकारियों संजय पिल्ले, आर.के. विज और मुकेश गुप्ता के संबंध में वर्ष 2019 में जारी पदावनति आदेश को निरस्त कर दिया गया। साथ ही उस समय लिए गए संबंधित निर्णय को भी अपास्त करते हुए पूर्व स्थिति बहाल करने का फैसला लिया गया।

सरकार का कहना है कि ये फैसले राज्य में सुविधा, विकास, पारदर्शिता और प्रशासनिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

तालपुरी ट्रिपल मर्डर केस: 6 साल बाद इंसाफ, आरोपी को मृत्युदंड


भिलाई नगर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  दुर्ग जिले के बहुचर्चित तालपुरी ट्रिपल मर्डर केस में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी रवि शर्मा को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। करीब 6 साल पुराने इस सनसनीखेज हत्याकांड में आरोपी ने अपनी पत्नी, डेढ़ माह की मासूम बच्ची और एक अज्ञात मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की निर्ममता से हत्या कर दी थी।

 कैसे हुआ था खुलासा?

21 जनवरी 2020 की सुबह तालपुरी के पारिजात कॉलोनी में एक घर से धुआं उठता देख हड़कंप मच गया। दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचने पर महिला और मासूम बच्ची के शव मिले, जबकि एक अज्ञात व्यक्ति की अधजली लाश भी बरामद हुई। शुरुआत में कमरे में लिखे भ्रामक संदेश से पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पूरा सच सामने आ गया।

साजिश और क्रूरता की हद

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को घर बुलाकर हत्या की, शव को जलाकर अपनी मौत का झूठा नाटक रचने की कोशिश की, पत्नी को नशीला पदार्थ देकर बांधकर मार डाला, मासूम बच्ची की भी हत्या कर दी और घटना को हादसा दिखाने के लिए गैस ब्लास्ट की योजना बनाई

पुलिस की सतर्कता से हुआ पर्दाफाश

सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान की। वह रायपुर होते हुए भागने की कोशिश में था, लेकिन रेलवे स्टेशन पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

कोर्ट का सख्त रुख

दुर्ग न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी ने मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी और पुलिस की सटीक विवेचना के चलते यह फैसला संभव हो सका।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह मामला अपनी क्रूरता और साजिश के कारण प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा, और अदालत का यह फैसला न्याय व्यवस्था की सख्ती और संवेदनशीलता का प्रतीक माना जा रहा है।
 

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