CM का दौरा: रहंगी में राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियां तेज, कलेक्टर और एसएसपी ने किया स्थल निरीक्षण


बिलासपुर ।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  बिल्हा विकासखंड के ग्राम रहंगी में 28 फरवरी को प्रस्तावित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यक्रम की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर तेज कर दी गई हैं। कार्यक्रम स्थल का कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने संयुक्त रूप से निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री रहंगी के खेल मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को धान खरीदी के अंतर की प्रोत्साहन राशि वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के करोड़ों रुपये के विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मुख्य सभामंच, सांस्कृतिक मंच, विभागीय स्टॉल, बैठक व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, पार्किंग और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम स्थल के समीप ही हेलीपैड का निर्माण किया जाएगा। अधिकारियों ने प्रस्तावित पार्किंग स्थलों का भी निरीक्षण कर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की रूपरेखा तैयार की। एसएसपी रजनेश सिंह ने संभावित जनसमूह को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण तथा प्रवेश और निकास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग, कृषि विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जा रही हैं।

ट्रैफिक सिग्नलों पर लोगों से पैसे मांगने की घटनाएं, शिकायत के बिना क्यों नहीं होती पुलिस कार्रवाई ?


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के व्यस्त ट्रैफिक सिग्नलों—खासकर नेहरू चौक, गांधी चौक, अग्रसेन चौक, मंगला चौक और महाराणा प्रताप चौक पर वाहनों के रुकते ही कुछ भिखारी और किन्नर वाहन सवार, यात्रियों से पैसे मांगते नजर आते हैं। कई बार यह मांग आग्रह से आगे बढ़कर दबाव या असहज स्थिति का रूप ले लेती है। हाल ही में नेहरू चौक पर पुलिस द्वारा दो किन्नरों की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है, लेकिन इसके साथ ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में पुलिस ने ट्रैफिक सिग्नल पर लोगों से पैसे मांगकर कथित तौर पर परेशान करने के आरोप में दो किन्नरों को गिरफ़्तार किया है। यह कार्रवाई सिविल लाइन थाना क्षेत्र के नेहरू चौक में की गई।

पुलिस के मुताबिक, यह घटना बुधवार शाम की है। गिरफ़्तार किए गए किन्नरों की पहचान जूली चौधरी (36 वर्ष) और नफीसा खातून (25 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे नेहरू चौक ट्रैफिक सिग्नल पर वाहनों के रुकने के दौरान यात्रियों, विशेषकर परिवार के साथ यात्रा कर रहे लोगों और महिलाओं से ताली बजाकर पैसे मांग रही थीं।

पुलिस का कहना है कि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और आगे भी ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

पुलिस का कहना है कि इस दौरान उनके व्यवहार से मौके पर मौजूद लोगों में नाराज़गी की स्थिति बन गई और कुछ देर के लिए वहां भीड़ भी जुट गई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिस पर सिविल लाइन थाना की टीम मौके पर पहुंची और दोनों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 के तहत कार्रवाई की गई है और दोनों आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

शिकायत पर निर्भर कार्रवाई, स्वतः संज्ञान का अभाव

पुलिस की कार्रवाई अक्सर तब सामने आती है, जब कोई नागरिक औपचारिक शिकायत करता है या स्थिति सार्वजनिक विवाद का रूप ले लेती है। जबकि ट्रैफिक सिग्नलों पर इस तरह की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब यह समस्या लगातार और सार्वजनिक रूप से दिखाई देती है, तो पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर नियमित कार्रवाई क्यों नहीं करती।

कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और पुलिस अधिनियम पुलिस को यह अधिकार देते हैं कि वे सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका पर भी कार्रवाई कर सकती है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर सक्रिय निगरानी और निरंतर कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है।

आम लोगों की असहजता, लेकिन शिकायत करने में हिचक

कई नागरिक इस तरह की घटनाओं से असहज होते हैं, लेकिन औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। इसकी वजह झंझट से बचने की मानसिकता, समय की कमी या फिर यह धारणा होती है कि शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान नहीं होगा। नतीजतन, समस्या बनी रहती है और कार्रवाई केवल छिटपुट घटनाओं तक सीमित रह जाती है।

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हत्या के मामले में नाम आने के बाद भाजपा ने राजू सोनकर को पद से हटाया


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /   हत्या के एक मामले में नाम सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने पदाधिकारी को पद से हटा दिया है। पार्टी ने बेलतरा पूर्वी मंडल में अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष राजू सोनकर को उनके पद से कार्यमुक्त कर दिया है। राजू सोनकर पर आरोप है कि उसने भाजपा पार्षद बंधु मौर्य की हत्या करवाने की सुपारी शहर के आदतन अपराधी नारद उर्फ़ सुमित श्रीवास को दी थी। 

पार्टी के स्थानीय नेताओं के अनुसार यह कार्रवाई उस समय की गई जब सराफा कारोबारी से कथित लूट और भाजपा पार्षद एवं व्यवसायी बंधु मौर्य की हत्या से जुड़े मामले में राजू सोनकर का नाम सामने आया। भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन कश्यप की पुष्टि के बाद भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष मोहित जायसवाल ने राजू सोनकर को पद से हटाने का निर्णय लिया। पार्टी ने इस संबंध में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी सूचना दे दी है। 

पार्टी ने राजू सोनकर के स्थान पर विकास कुर्रे को बेलतरा पूर्वी मंडल में अनुसूचित जाति मोर्चा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। भाजपा जिलाध्यक्ष मोहित जायसवाल ने कहा कि पार्टी अनुशासन को प्राथमिकता देती है और अपराध से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाती है। उन्होंने कहा कि मामले में नाम सामने आने के बाद संगठन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। फिलहाल हत्या के मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म के शीर्षक को लेकर विवाद, कलेक्टर को ज्ञापन


बिलासपुर। 
  TODAY छत्तीसगढ़  / 'घूसखोर पंडित' के कानूनी विवाद में फंसने के बाद, एक और फिल्म, यादव जी की लव स्टोरी, को भी अपने टाइटल को लेकर इसी तरह के विवाद का सामना करना पड़ा। विवाद तब शुरू हुआ जब विश्व यादव परिषद के प्रमुख ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फिल्म पर बैन लगाने या उसका नाम बदलने की मांग की। विवाद का स्वर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में भी सुनाई पड़ा। आज यादव समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर फिल्म के टाईटल और उसमें दिखाई गई कहानी पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। 

आपको बता दें कि विवाद तब शुरू हुआ जब विश्व यादव परिषद के प्रमुख ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फिल्म पर बैन लगाने या उसका नाम बदलने की मांग की। आपत्ति कहानी से थी, जो एक हिंदू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें याचिकाकर्ता का आरोप है कि टाइटल यादव समुदाय को गलत तरीके से दिखाता है। बुधवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह फिल्म आगामी 27 फ़रवरी को देश के सिनेमा हाल में प्रदर्शित होगी। 

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