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ट्रैफिक सिग्नलों पर लोगों से पैसे मांगने की घटनाएं, शिकायत के बिना क्यों नहीं होती पुलिस कार्रवाई ?


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के व्यस्त ट्रैफिक सिग्नलों—खासकर नेहरू चौक, गांधी चौक, अग्रसेन चौक, मंगला चौक और महाराणा प्रताप चौक पर वाहनों के रुकते ही कुछ भिखारी और किन्नर वाहन सवार, यात्रियों से पैसे मांगते नजर आते हैं। कई बार यह मांग आग्रह से आगे बढ़कर दबाव या असहज स्थिति का रूप ले लेती है। हाल ही में नेहरू चौक पर पुलिस द्वारा दो किन्नरों की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है, लेकिन इसके साथ ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में पुलिस ने ट्रैफिक सिग्नल पर लोगों से पैसे मांगकर कथित तौर पर परेशान करने के आरोप में दो किन्नरों को गिरफ़्तार किया है। यह कार्रवाई सिविल लाइन थाना क्षेत्र के नेहरू चौक में की गई।

पुलिस के मुताबिक, यह घटना बुधवार शाम की है। गिरफ़्तार किए गए किन्नरों की पहचान जूली चौधरी (36 वर्ष) और नफीसा खातून (25 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे नेहरू चौक ट्रैफिक सिग्नल पर वाहनों के रुकने के दौरान यात्रियों, विशेषकर परिवार के साथ यात्रा कर रहे लोगों और महिलाओं से ताली बजाकर पैसे मांग रही थीं।

पुलिस का कहना है कि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और आगे भी ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

पुलिस का कहना है कि इस दौरान उनके व्यवहार से मौके पर मौजूद लोगों में नाराज़गी की स्थिति बन गई और कुछ देर के लिए वहां भीड़ भी जुट गई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिस पर सिविल लाइन थाना की टीम मौके पर पहुंची और दोनों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 के तहत कार्रवाई की गई है और दोनों आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

शिकायत पर निर्भर कार्रवाई, स्वतः संज्ञान का अभाव

पुलिस की कार्रवाई अक्सर तब सामने आती है, जब कोई नागरिक औपचारिक शिकायत करता है या स्थिति सार्वजनिक विवाद का रूप ले लेती है। जबकि ट्रैफिक सिग्नलों पर इस तरह की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब यह समस्या लगातार और सार्वजनिक रूप से दिखाई देती है, तो पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर नियमित कार्रवाई क्यों नहीं करती।

कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और पुलिस अधिनियम पुलिस को यह अधिकार देते हैं कि वे सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका पर भी कार्रवाई कर सकती है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर सक्रिय निगरानी और निरंतर कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है।

आम लोगों की असहजता, लेकिन शिकायत करने में हिचक

कई नागरिक इस तरह की घटनाओं से असहज होते हैं, लेकिन औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। इसकी वजह झंझट से बचने की मानसिकता, समय की कमी या फिर यह धारणा होती है कि शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान नहीं होगा। नतीजतन, समस्या बनी रहती है और कार्रवाई केवल छिटपुट घटनाओं तक सीमित रह जाती है।

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