छोटी बात पर जानलेवा हमला, करगी खुर्द में व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले के करगी खुर्द के गनियारी इलाके में मामूली विवाद ने उस वक्त खूनी रूप ले लिया, जब कुछ युवकों ने मिलकर एक 52 वर्षीय व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस सनसनीखेज वारदात में व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव करने आए एक युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मृतक की पहचान मोहन पांडे (52) पिता जगदीश प्रसाद पांडे, निवासी करगी खुर्द के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, आरोपी राजाराम साहू (21) ने अपने साथियों के साथ मिलकर मोहन पांडे पर लाठी-डंडों और हाथ-मुक्कों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमला इतना बर्बर था कि मोहन पांडे ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

घटना के दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे शरद कौशिक को भी हमलावरों ने नहीं बख्शा। उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है। वारदात के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राजाराम साहू को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, इस हमले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम को भी बुलाया गया है, जो मामले की गहन जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाद मामूली बात को लेकर शुरू हुआ था, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने और सभी आरोपियों को पकड़ने में जुटी हुई है।

शादी के चार महीने बाद ही टूटा साथ, रोपवे हादसे में आयुषी की मौत


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में हुए खल्लारी रोपवे हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में 28 वर्षीय आयुषी धावरे की मौत हो गई, जो रायपुर के राजातालाब इलाके की रहने वाली थीं। आपको बता दें कि आज सुबह खल्लारी मात्रा मंदिर परिसर में लगे रोपवे के टूटकर नीचे गिरने से 18 श्रद्धालु घायल हो गये जिसमें कई की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।  गंभीर रूप से घायल लोगों का रायपुर मेकाहारा में इलाज चल रहा है।  

परिजनों के मुताबिक आयुषी की शादी बीते नवंबर में ऋषभ धावरे से हुई थी। शादी के बाद यह उनकी पहली नवरात्रि थी जिसे मनाने के लिए वे परिवार के साथ खल्लारी माता मंदिर दर्शन के लिए गए थे। लेकिन यह यात्रा एक दर्दनाक हादसे में बदल गई। इस दुर्घटना में उनके पति ऋषभ धावरे भी घायल हुए हैं। साथ ही परिवार के अन्य सदस्य 18 वर्षीय शुभ धावरे और 13 वर्षीय मनस्वी भी इस हादसे में जख्मी हुए हैं। सभी घायलों का इलाज रायपुर के जिला अस्पताल और एक निजी अस्पताल में जारी है।

बताया जा रहा है कि ऋषभ धावरे एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर हैं, जबकि आयुषी धावरे पाटन स्थित आत्मानंद स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। घटना की सूचना मिलते ही राजातालाब के गांधी चौक स्थित उनके घर पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। मोहल्ले में शोक का माहौल है और लोग परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, आयुषी का स्वभाव बेहद सरल और मिलनसार था, जिससे घर और मोहल्ले में सभी उनसे स्नेह रखते थे। 

देर रात आग: कपड़े की दुकान जलकर खाक, लाखों का नुकसान


बिलासपुर।  
TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के व्यस्ततम प्रताप चौक क्षेत्र में शनिवार देर रात लगी आग में एक कपड़े की दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो गई। आग की लपटे इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरे शोरूम को अपनी चपेट में ले लिया और अंदर रखा सारा सामान नष्ट हो गया।

जानकारी के मुताबिक, ‘साक्षी फैशन’ नाम की दुकान से देर रात धुआं उठता देखा गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत आसपास के दुकानदारों को सतर्क किया, लेकिन आग तेजी से फैल चुकी थी और उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया। दुकान में बड़ी मात्रा में रेडीमेड कपड़े और अन्य सामान रखा हुआ था, जिसे बाहर निकालने का मौका नहीं मिल सका। सुबह तक दुकान के अंदर रखा पूरा स्टॉक जलकर खत्म हो गया। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस घटना में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

घटना के कारणों को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना जा रहा है। दुकान संचालक ने किसी साजिश या रंजिश की संभावना से इनकार किया है। रात के समय लगी इस आग से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग देर रात तक मौके पर जुटे रहे।

Wildlife Deaths: कुत्तों के हमले के बाद संजय वन वाटिका बंद, 15 चीतलों की मौत


सरगुजा।
  TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय वन वाटिका में 15 चीतलों की मौत ने सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि व्यवस्था की गहरी खामियों का सवाल खड़ा कर दिया है। जिस जगह को वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बनाया गया था, वही अब उनकी असुरक्षा और मौत का कारण बनती दिख रही है। 

बताया जा रहा है कि 21 मार्च की रात पांच-छह आवारा कुत्ते बाड़े की कमजोर फेंसिंग का फायदा उठाकर अंदर घुस गए। इसके बाद जो हुआ, वह किसी भी संरक्षण क्षेत्र के लिए शर्मनाक है। यहां मौजूद हिरण प्रजाति के कई वन्यजीव आवारा कुत्तों के सामने बेबस, असहाय दिखे। बताया जा रहा है कि संजय पार्क में आवारा कुत्तों ने 14 चीतल और एक सांभर को मार डाला है । एक अन्य घायल चीतल ने आज सुबह दम तोड़ दिया। वन विभाग ने मरे हुए वन्यप्राणियों के शव को आनन-फानन में जला भी दिया है ताकि बड़े और गंभीर सवालों से बचा जा सके। 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक ‘दुर्घटना’ है, या फिर लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा? प्रारंभिक जानकारी से साफ है कि बाड़े की फेंसिंग इतनी कमजोर थी कि आवारा कुत्ते आसानी से भीतर पहुंच गए। अगर यही सुरक्षा व्यवस्था है, तो फिर यह ‘वाटिका’ नहीं, एक खुला खतरा क्षेत्र बन चुका है। और सवाल यहीं खत्म नहीं होते क्या रात में कोई सुरक्षा गश्त नहीं थी? क्या निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं थी? घटना रात में हुई, लेकिन इसकी जानकारी पार्क प्रबंधन और वन विभाग को अगले दिन सुबह मिली। इसका मतलब साफ है न तो तत्काल निगरानी थी, न ही कोई अलर्ट सिस्टम। संरक्षित क्षेत्र में अगर पूरी रात हिंसक हमला चलता रहे और किसी जिम्मेदार को खबर तक न हो, तो यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि तंत्र की विफलता है। 

हर बड़े हादसे के बाद ‘जांच के आदेश’ एक तय प्रक्रिया बन चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच से आगे भी कुछ होगा? क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा? हालांकि सुरक्षा में बड़ी चूक मानते हुए ड्यूटी पर तैनात 4 कर्मचारियों को तत्काल निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इस मामले में अब तक किसी बड़े अफसर पर गाज नहीं गिरी है, ना ही जवाबदेही तय की गई है। 

संरक्षण या दिखावा?

संजय वन वाटिका को पर्यटकों के लिए तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। लेकिन क्या यह कदम पर्याप्त है? जब तक सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर नहीं किया जाता, निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक यह बंदी सिर्फ एक औपचारिकता भर ही रहेगी।

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