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शिकार और पानी की तलाश हुई पूरी ! उदंती-सीतानदी में बाघिन की दस्तक

जंगलों के पुनर्जीवन की कहानी: छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी रिज़र्व में सालों बाद लौटीं बाघों की पदचाप

TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में पिछले कुछ दिनों से एक बाघिन की नियमित मौजूदगी दर्ज की गई है. वन विभाग की ओर से विभिन्न इलाक़ों में लगाए गए कैमरा ट्रैप के वीडियो और तस्वीरों में इस बाघिन को देखा गया है.

वन अधिकारियों के मुताबिक़, यह बाघिन प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए इस वन क्षेत्र तक पहुंची है और अब इसे अपना स्थायी ठिकाना (आशियाना) बनाने की प्रक्रिया में है.

वन्यजीव विशेषज्ञों की राय और आवास सुधार

लंबे समय से बाघों की वापसी का इंतज़ार कर रहे इस रिज़र्व के लिए वन्यजीव विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बाघ या बाघिन का किसी वन क्षेत्र को स्थायी निवास के रूप में चुनना इस बात का प्रमाण है कि वहां पर्याप्त मात्रा में शिकार (प्रेय बेस), बेहतर आवास और सुरक्षित माहौल उपलब्ध है.

वन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उदंती-सीतानदी रिज़र्व में वन्यजीवों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए कई कार्य किए गए हैं, जिनका असर अब दिखने लगा है:

  • सघन गश्त और एंटी-पोचिंग: शिकार विरोधी नेटवर्क को मज़बूत किया गया है और जंगलों के भीतर गश्त बढ़ाई गई है.

  • कृत्रिम जलस्रोतों का निर्माण: वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सैकड़ों कृत्रिम जलस्रोतों और झिरियों का निर्माण कराया गया है.

  • वन भूमि की बहाली: क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए अतिक्रमण हटाकर वन भूमि को वापस लिया गया है.

सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने का फ़ैसला

कैमरा ट्रैप के विश्लेषण के बाद वन अधिकारियों ने बताया कि बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है और वह क्षेत्र का निरीक्षण कर अपनी टेरिटरी (प्रभाव क्षेत्र) स्थापित करने की कोशिश कर रही है.

बाघिन की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने रिज़र्व क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों को उम्मीद है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो यह रिज़र्व आने वाले समय में मध्य भारत के प्रमुख बाघ आवासों के रूप में फिर से अपनी पहचान बना सकेगा और भविष्य में अन्य बाघों के आगमन का मार्ग भी प्रशस्त होगा.


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