TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तित्व विकास, कार्यकुशलता में सुधार और अनुशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से "दक्ष ओरिएंटेशन कार्यक्रम" का आयोजन किया गया. इस विशेष सत्र में ज़िला पुलिस बल के क़रीब 300 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए.
पुलिस विभाग के मुताबिक़, इस कार्यक्रम का मक़सद पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, अनुशासित और जनता के प्रति संवेदनशील बनाना है.
लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी और मानसिक दबाव पर चर्चा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकिता शर्मा ने पुलिस सेवा के दौरान आने वाली विभिन्न चुनौतियों, मानसिक दबाव और व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तार से बात की.
नियमों की अनदेखी: एसपी ने पुलिस कर्मियों को सचेत किया कि ड्यूटी के दौरान छोटी-छोटी लापरवाहियां और विभागीय नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है.
विभागीय कार्रवाई: उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसी ग़लतियों के कारण कर्मियों को विभागीय जांच, पुलिस लाइन अटैचमेंट या निलंबन (सस्पेंशन) जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जिससे विभाग की छवि भी प्रभावित होती है.
निर्देश: सभी कर्मचारियों को पारदर्शिता, समयबद्ध कार्रवाई और आम जनता के साथ सकारात्मक व संवेदनशील व्यवहार बनाए रखने के निर्देश दिए गए.
सवालों के जवाब और सुझाव देने वाले सम्मानित
इस दौरान एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र (Q&A Session) भी आयोजित किया गया, जहाँ पुलिस जवानों और अधीनस्थ अधिकारियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याओं को साझा किया.
सत्र में पुलिसिंग को आधुनिक और जनहितैषी बनाने के लिए कई सुझाव भी सामने आए. सकारात्मक पहल और उपयोगी सुझाव देने वाले पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कृत भी किया गया.
कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारी
इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में ज़िले के तमाम थानों के प्रभारियों के अलावा पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
कीर्तन राठौर (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक)
वैशाली जैन (नगर पुलिस अधीक्षक)
अलेक्जेंडर कीरो (वरिष्ठ अधिकारी)
के.पी. मरकाम (पुलिस अनुविभागीय अधिकारी)
जवाबदेह पुलिसिंग और आंतरिक तालमेल को बेहतर बनाने के लिए उपस्थित कर्मचारियों ने इस तरह के संवादात्मक कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की अपेक्षा जताई.
