बर्ड फ्लू अलर्ट के बीच मुर्गी चूजों की खेप की जांच,नहीं मिला संक्रमण


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले के शासकीय कुक्कुट फार्म कोनी में 24 मार्च को बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और एहतियात के तौर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मुर्गी एवं उससे संबंधित सामग्री की लगातार जांच की जा रही है। यह कार्रवाई विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम द्वारा की जा रही है।

      इसी बीच कुछ स्थानीय मीडिया में प्रकाशित खबर “रेलवे परिसर में दिल्ली से आई मुर्गी चूजों की खेप” को लेकर पशु चिकित्सा विभाग ने तथ्य स्पष्ट किए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित विभाग द्वारा रेलवे अधिकारियों से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त की गई। रेलवे मंडल वाणिज्य प्रबंधक के 30 मार्च के पत्र के अनुसार, दिल्ली से गाड़ी क्रमांक 12442 राजधानी एक्सप्रेस के माध्यम से कुल 17 डिब्बों में चूजे बिलासपुर लाए गए थे, जिन्हें यहां से श्री आकाश नायक द्वारा प्राप्त कर जिला रायगढ़ भेजा गया। प्रशासन द्वारा संबंधित व्यक्ति से फोन पर चर्चा में यह स्पष्ट हुआ कि चूजों को सुरक्षित रूप से रायगढ़ ले जाया गया तथा उनमें किसी भी प्रकार के संक्रामक रोग के लक्षण नहीं पाए गए। प्रशासन ने रेलवे अधिकारियों से चर्चा कर भविष्य में इस प्रकार की खेपों की पूर्व सूचना संबंधित विभाग को देने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि सतर्कता और निगरानी बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सके। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

कला और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के प्रति छत्तीसगढ़ सरकार गंभीर : पद्मश्री भारती बंधु


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  भारतीय भक्ति संगीत जगत के ख्यातिप्राप्त गायक पद्मश्री भारती बंधु ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार कला और कलाकारों के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के संस्कृति विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक महोत्सव कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं, जिससे लोक कला एवं परंपराओं को नई ऊर्जा मिल रही है। पद्मश्री भारती बंधु जिला प्रशासन के आमंत्रण पर मल्हार महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने बिलासपुर पहुंचे थे। 

    पद्मश्री भारती बंधु ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कला और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के लिए सार्थक पहल की जा रही है। इन प्रयासों के कारण प्रदेश के कलाकारों में उत्साह का वातावरण बना है और युवा पीढ़ी भी पारंपरिक कला विधाओं और संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रही है। छत्तीसगढ़ भवन में चर्चा के दौरान उन्होंने मल्हार महोत्सव के पुनः भव्य और जीवंत स्वरूप में आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कलाकारों को मंच मिलता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति को भी व्यापक पहचान मिलती है। उन्होंने इस गरिमामयी आयोजन के लिए मुख्यमंत्री और आमंत्रण के लिए जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। भजन गायकी की अपनी विशिष्ट और पारंपरिक शैली पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि वे इस विधा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनके द्वारा अब तक 10,000 से अधिक युवाओं को भजन गायन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

     उल्लेखनीय है कि प्रख्यात भजन गायक भारती बंधु को भारत सरकार द्वारा चौथे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। भारती बंधु ने देश-विदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया है। उनकी प्रस्तुतियां न केवल आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती हैं, बल्कि श्रोताओं के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का भी संचार करती हैं। पद्मश्री भारती बंधु ने यह भी बताया कि उन्होंने देशभर की अनेक जेलों में बंदियों के समक्ष भजन प्रस्तुतियां दी हैं, और छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में बंदियों के लिए कार्यक्रम किए हैं, जिनका प्रभाव बंदियों पर बेहद सकारात्मक रहा है। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बंदियों के जीवन में आत्मचिंतन, सुधार और नई दिशा की चेतना उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कारों को सहेजने और सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है, और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में इसके संरक्षण हेतु मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयास सराहनीय है। 

रिश्तों का खून: 10 लाख की सुपारी और जमीन के लिए बुजुर्ग की हत्या


मुंगेली। 
 TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में एक सेवानिवृत्त लेखापाल की हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे संपत्ति विवाद और पारिवारिक रंजिश मुख्य वजह रही। पुलिस ने बताया कि 62 वर्षीय दामोदर राजपूत 21 मार्च को अपने घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। उनके भाई ने थाना लालपुर में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को उस रास्ते पर उनकी मोटरसाइकिल मिली, जहां से वे गुजरे थे। इसके बाद पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और एक संदिग्ध कार को चिन्हित किया, जो मृतक के पीछे-पीछे चलती दिखाई दी।

पुलिस के मुताबिक, कार के मालिक तक पहुंचने के बाद पूछताछ में पता चला कि वाहन किराए पर लिया गया था। इस आधार पर पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया, जिसने पूछताछ में हत्या की साजिश का खुलासा किया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पहले से योजना बनाकर इस घटना को अंजाम दिया। मृतक को एक धार्मिक कार्यक्रम के बहाने बुलाया गया और सुनसान रास्ते में उनकी गाड़ी रोककर गला घोंटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को दूसरे जिले में ले जाकर जंगल क्षेत्र में दफना दिया गया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर शव बरामद कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे करोड़ों रुपये की जमीन और अन्य संपत्तियों को लेकर विवाद था। जांच में सामने आया है कि मृतक के कुछ रिश्तेदारों ने कथित तौर पर सुपारी देकर हत्या करवाई। मामले की जांच के दौरान यह भी पता चला कि परिवार के भीतर पहले से विवाद चल रहा था, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने साजिश रची।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में संलिप्त 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार नाबालिगों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की है। 

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सबूत भी बरामद किए हैं। इनमें मुख्य आरोपी संजय यादव से एक टाटा स्पेशियो गोल्ड वाहन और कथित सुपारी की रकम 84,000 रुपये शामिल है। इसके अलावा, एक नाबालिग के पास से 12,000 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस ने देवराज साहू के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई ईऑन कार, एक नाबालिग से मोटरसाइकिल और एक अन्य आरोपी प्रिंस के पास से स्कूटी भी जब्त की है।

गिरफ्तार आरोपी -

पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम इस प्रकार हैं:

रणजीत सिंह राजपूत (55 वर्ष), निवासी झाफल, थाना लोरमी — मृतक के भाई

पालेश्वर राजपूत (50 वर्ष), निवासी झाफल, थाना लोरमी — मृतक के भाई रणजीत का साला

रामपाल सिंह राजपूत (53 वर्ष), निवासी लोरमी — मृतक का चचेरा भाई

पराग सिंह राजपूत (49 वर्ष), निवासी झाफल — मृतक के भाई का पुत्र

हेमंत राजपूत (26 वर्ष), निवासी झाफल — मृतक के भाई का पुत्र

अजय राजपूत (26 वर्ष), निवासी सारधा — मृतक का भांजा

संजय यादव (37 वर्ष), निवासी झाफल, थाना लोरमी

श्रवण उर्फ प्रिंस गोई (18 वर्ष), निवासी जवाहर वार्ड, मुंगेली

योगेश गंधर्व उर्फ योगेश्वर (लगभग 18 वर्ष), निवासी कालीमाई वार्ड, मुंगेली

देवराज साहू उर्फ दद्दु उर्फ देवकुमार (23 वर्ष), निवासी झझपुरीकला, लोरमी

आशीष कारीकांत उर्फ धर्मेन्द्र उर्फ बाबु (20 वर्ष), निवासी बस स्टैंड, लोरमी

इसके अलावा, पुलिस ने इस मामले में चार नाबालिगों को भी हिरासत में लिया है, जिन्हें विधि के अनुसार बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है। 

संजय वन वाटिका: 15 मौतें, एक फरार हिरण और सोता हुआ सिस्टम


अंबिकापुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के संजय वन वाटिका में लगातार हो रही घटनाएं अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि वन्य प्रबंधन की गंभीर विफलता की तस्वीर पेश कर रही हैं। ऐसा लगता है कि संजय वन वाटिका “संरक्षण” नहीं, बल्कि “उपेक्षा” का जीवंत उदाहरण है। जिस स्थान का उद्देश्य वन्य प्राणियों को सुरक्षा और संरक्षण देना है, वही अब उनकी असुरक्षा और मौत का कारण बनता दिख रहा है।

21 मार्च की रात आवारा कुत्तों के हमले में 15 वन्य प्राणियों (चीतल, सांभर और कोटरी) की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। इस घटना की जांच और जिम्मेदारी तय होने से पहले ही 30 मार्च की रात एक और चौंकाने वाली घटना सामने आ गई। 

बताया जा रहा है कि चारा डालने के दौरान एक कर्मचारी ने घेराबंदी का गेट खुला छोड़ दिया, जिसका फायदा उठाकर एक हिरण वन वाटिका से बाहर भाग निकला। यह घटना न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बुनियादी सावधानियां तक नहीं बरती जा रही हैं। हिरण के भागने के बाद कुछ वनकर्मी टॉर्च लेकर उसकी तलाश करते नजर आए, लेकिन यह कोशिश ज्यादा औपचारिकता निभाने जैसी ही लगी। सवाल यह उठता है कि जब पहले ही इतनी बड़ी घटना हो चुकी थी, तो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता क्यों नहीं बरती गई? 

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यह घटनाएं केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं हैं, बल्कि यह उस मानसिकता को उजागर करती हैं जिसमें जवाबदेही का कोई भय नहीं और कर्तव्यबोध का कोई स्थान नहीं। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह “वन वाटिका” यूं ही “वन्य त्रासदी का केंद्र” बनी रहेगी। अब सवाल यह है कि जब जिम्मेदारी की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति ही “अनदेखी” को अपना कार्यशैली बना ले, तो फिर नीचे के कर्मचारियों से सजगता की उम्मीद करना क्या महज एक औपचारिक मजाक नहीं है? 

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