अंबिकापुर। TODAY छत्तीसगढ़ / शहर के संजय वन वाटिका में लगातार हो रही घटनाएं अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि वन्य प्रबंधन की गंभीर विफलता की तस्वीर पेश कर रही हैं। ऐसा लगता है कि संजय वन वाटिका “संरक्षण” नहीं, बल्कि “उपेक्षा” का जीवंत उदाहरण है। जिस स्थान का उद्देश्य वन्य प्राणियों को सुरक्षा और संरक्षण देना है, वही अब उनकी असुरक्षा और मौत का कारण बनता दिख रहा है।
21 मार्च की रात आवारा कुत्तों के हमले में 15 वन्य प्राणियों (चीतल, सांभर और कोटरी) की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। इस घटना की जांच और जिम्मेदारी तय होने से पहले ही 30 मार्च की रात एक और चौंकाने वाली घटना सामने आ गई।
बताया जा रहा है कि चारा डालने के दौरान एक कर्मचारी ने घेराबंदी का गेट खुला छोड़ दिया, जिसका फायदा उठाकर एक हिरण वन वाटिका से बाहर भाग निकला। यह घटना न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बुनियादी सावधानियां तक नहीं बरती जा रही हैं। हिरण के भागने के बाद कुछ वनकर्मी टॉर्च लेकर उसकी तलाश करते नजर आए, लेकिन यह कोशिश ज्यादा औपचारिकता निभाने जैसी ही लगी। सवाल यह उठता है कि जब पहले ही इतनी बड़ी घटना हो चुकी थी, तो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता क्यों नहीं बरती गई?
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