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हाथियों की पूजा से संरक्षण की शपथ तक, ATR में विश्व हाथी दिवस का आयोजन

हाथी कैंप में खास दिन, ग्रामीणों ने कहा- हाथियों को बचाएंगे

बिलासपुर / अचानकमार। TODAY छत्तीसगढ़  /  विश्व हाथी दिवस के अवसर पर अचानकमार टाइगर रिजर्व के सिहावल सागर स्थित हाथी कैंप में बुधवार को वन वासियों की मौजूदगी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का केंद्र हाथियों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम में वन वासियों ने हाथियों के संरक्षण की शपथ ली। इस दौरान हाथियों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महावत और हाथी मित्र दल के सदस्यों का सम्मान भी किया गया।

कार्यक्रम में अचानकमार टाइगर रिजर्व की सीसीएफ एवं फील्ड डायरेक्टर श्रीमती प्रियंका पांडेय, डिप्टी डायरेक्टर यूआर गणेश, बफर क्षेत्र के असिस्टेंट डायरेक्टर  समीर जोनाथन, WWF के उपेंद्र दुबे, वरिष्ठ वन्यजीव फोटोग्राफर एवं पत्रकार सत्यप्रकाश पांडेय, एटीआर के सभी रेंज अधिकारी, संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच और सरसाडोल गांव के ग्रामीण मौजूद रहे।

चारों हाथियों की पूजा, खिलाए गए फल 

कार्यक्रम की शुरुआत हाथी कैंप में मौजूद चारों हाथियों की पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद उन्हें गुड़, केला, लड्डू और अन्य खाद्य सामग्री खिलाई गई। इसके बाद हाथियों के संरक्षण की शपथ दिलाई गई। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने ग्रामीणों के साथ हाथियों के व्यवहार, उनके संरक्षण और जंगल के साथ उनके संबंध को लेकर चर्चा की।

विश्व हाथी दिवस क्यों मनाया जाता है?

विश्व हाथी दिवस हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 12 अगस्त 2012 को एशियाई और अफ्रीकी हाथियों के सामने मौजूद गंभीर खतरों के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हुई थी। इस दिवस का उद्देश्य केवल हाथियों के प्रति लोगों की भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण के लिए व्यावहारिक कदमों पर ध्यान केंद्रित करना भी है।

हाथियों के सामने आज कई तरह की चुनौतियां हैं। इनमें आवास का नुकसान, जंगलों का विखंडन, अवैध शिकार और हाथियों तथा इंसानों के बीच बढ़ता संघर्ष प्रमुख हैं। विश्व हाथी दिवस इन समस्याओं पर चर्चा करने और उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देने का अवसर देता है।

हाथी बचेंगे तो जंगल भी सुरक्षित रहेंगे

हाथी जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वे पेड़ों के बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने, वनस्पतियों के प्रसार और जंगल के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं। इसलिए हाथियों का संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा से जुड़ा विषय है।

यही कारण है कि हाथियों के संरक्षण में केवल वन विभाग की भूमिका पर्याप्त नहीं है। उन गांवों और समुदायों की भागीदारी भी जरूरी है, जिनका जीवन हाथियों के आवास वाले जंगलों के आसपास है।

संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका अहम

अचानकमार जैसे वन क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी वन विभाग और स्थानीय समुदायों के सामने एक साथ अवसर और चुनौती दोनों रखती है।

एक तरफ हाथियों की मौजूदगी जंगल की जैव विविधता और पारिस्थितिक स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है। दूसरी ओर, भोजन और पानी की तलाश में हाथियों के जंगल से बाहर निकलने पर फसलों को नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बन सकती है।

ऐसे में ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार की जानकारी देना, समय पर सूचना तंत्र विकसित करना, हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों की पहचान करना और संघर्ष की स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

विश्व हाथी दिवस का उद्देश्य भी इसी तरह के संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देना है—हाथियों के प्राकृतिक आवासों का बेहतर प्रबंधन, संरक्षण कानूनों को प्रभावी बनाना, अवैध शिकार और वन्यजीवों के अवैध व्यापार पर रोक, तथा जंगल और हाथियों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना।

हाथी कैंप बना संवाद का माध्यम

सिहावल सागर के हाथी कैंप में आयोजित कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें संरक्षण को केवल विभागीय गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीणों के साथ संवाद के रूप में सामने रखा गया। महावतों और हाथी मित्र दल का सम्मान भी इसी कड़ी का हिस्सा रहा। हाथियों के साथ लगातार काम करने वाले इन लोगों का अनुभव संरक्षण और मानव-हाथी संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण होता है।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों और वन विभाग के बीच हाथियों के संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान यह संदेश दिया गया कि हाथियों को सुरक्षित रखने के लिए जंगलों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदायों का सहयोग भी जरूरी है।

विश्व हाथी दिवस पर अचानकमार का यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाथियों का संरक्षण केवल जंगल की सीमा के भीतर नहीं होता। उनके लिए सुरक्षित जंगल, सुरक्षित गलियारे और उनके आसपास रहने वाले लोगों का सहयोग—इन तीनों का साथ होना जरूरी है। 


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