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वन विभाग घिरा: ‘रेस्क्यू सेंटर’ या अवैध जू? हिरणों की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल

15 हिरणों की मौत के बाद CZA मान्यता पर सवाल, वन विभाग से जवाब मांगा गया


रायपुर ।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  अंबिकापुर के संजय वन वाटिका में कुत्तों के हमले से 15 हिरणों की मौत के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल तेज हो गए हैं। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने इस घटना को दुखद बताते हुए वन विभाग के उच्च अधिकारियों से पूछा है कि प्रदेश में ऐसे और कितने केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिन्हें सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से मान्यता प्राप्त नहीं है।

‘रेस्क्यू सेंटर’ या अवैध जू?

सिंघवी का आरोप है कि संजय वाटिका को जू नहीं, बल्कि ‘रेस्क्यू सेंटर’ बताकर अधिकारियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत रेस्क्यू सेंटर के लिए भी CZA की मान्यता अनिवार्य होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यहां लाए गए वन्यजीवों को उपचार के बाद वापस जंगल में छोड़ा जाता है, तो उनकी संख्या लगातार कैसे बढ़ रही है। साथ ही, संरक्षित प्रजातियों—जैसे नीलगाय—को वहां रखने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।

छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े अधिकारी बचे?

सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखी जा रही है, जबकि जिम्मेदारी तय करते समय उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल नहीं उठाए जा रहे। उनका कहना है कि यदि टिकट लेकर आम लोगों के लिए वन्यजीवों का प्रदर्शन किया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर ‘जू संचालन’ की श्रेणी में आता है, जिसके लिए विधिवत मान्यता जरूरी है।

अन्य केंद्रों पर भी सवाल

सिंघवी ने सरगुजा के रमकोला स्थित एलीफेंट रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर, बारनवापारा अभ्यारण के वन भैंसा ब्रीडिंग सेंटर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में संचालित केंद्रों का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या ये सभी संस्थान पूर्ण मान्यता के साथ संचालित हो रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, रायपुर और राजनांदगांव में इको-टूरिज्म के नाम पर सीमित क्षेत्र में फेंसिंग कर वन्यजीवों को रखने की व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।

नंदनवन और पुराने मामलों का जिक्र

सिंघवी ने रायपुर के नंदनवन में वन्यजीवों को लंबे समय तक रखने और धमतरी जिले में निजी जू पर हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए पूछा कि यदि निजी संचालकों पर कार्रवाई हो सकती है, तो सरकारी स्तर पर जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की जाती।

मांग: पारदर्शिता और जवाबदेही

सिंघवी ने मांग की है कि प्रदेश में संचालित सभी ऐसे केंद्रों की स्थिति सार्वजनिक की जाए और जहां भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, वहां कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने इन केंद्रों में रखे गए वन्यजीवों को सुरक्षित अभ्यारणों में छोड़ने की भी मांग उठाई है। इस पूरे मामले में वन विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन घटना ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 


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