नशाखोरी के खिलाफ अभियान तेज, 6 फरार वारंटी और दो बदमाशों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई

लंबे समय से फरार चल रहे 6 वारंटियों को गिरफ्तार किया गया
बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर में अपराध और अव्यवस्था पर लगाम कसने के लिए तोरवा पुलिस ने सख्त अभियान चलाते हुए अड्डेबाजों और फरार आरोपियों पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने नशाखोरी और अड्डेबाजी की चेकिंग के दौरान दो बदमाशों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की, वहीं छह फरार वारंटियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, क्षेत्र में लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त दो बदमाशों को पकड़कर उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की आपराधिक घटना को रोका जा सके। दुना भास्कर पिता लक्ष्मी नारायण उम्र 21 साल साकिन बुधवारी बाजार तोरवा और दीपक बजाज पिता राजेश बजाज उम्र 22 साल साकिन तोरवा बस्ती के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाही की गई है।  

 6 फरार वारंटी चढ़े पुलिस के हत्थे

अभियान के दौरान लंबे समय से फरार चल रहे छह वारंटियों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि ये आरोपी लगातार गिरफ्तारी से बच रहे थे।  फरार गिरफ्तार वांरटी -

01  चेतन नाग पिता गोविंदा नाग उम्र 24 साल पता देवरीखुर्द तोरवा  

02  रोहित धु्रव पिता संतोष ध्रुव उम्र 22 साल साकिन देवरीखुर्द तोरवा

03  अभिषेक जाना उर्फ कलुवा पिता सुनील जाना उम्र 25 साल साकिन लालखदान तोरवा 

04 अमीत कुमार बघेल पिता स्व. ओझा दास बघेल उम्र 28 साल साकिन लालखदान तोरवा 

05 आलोक तांडी पिता जग्गनाथ टांडी उम्र 32 साल साकिन देवरीखुर्द तोरवा बिलासपुर 

06 चंद्रप्रकाश कोल उर्फ गुंडा पिता जोहन जाज कोल उम्र 32 साल साकिन देवरीखुर्द तोरवा 

अड्डेबाजी पर सख्ती, “मारपीट के इरादे” से घूम रहे थे बदमाश; शहर में जीरो टॉलरेंस का संदेश


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर में अपराध पर नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत तोरवा पुलिस ने अड्डेबाजों और आदतन बदमाशों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को धारदार हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक गगन कुमार के नेतृत्व में तोरवा थाना पुलिस द्वारा विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। 3 अप्रैल की शाम थाना प्रभारी निरीक्षक अभय सिंह बैस के नेतृत्व में पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त और चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पेंडलवार नर्सिंग होम के पास गली में स्कूटी सवार दो युवकों पर संदेह होने पर उन्हें रोका गया। तलाशी लेने पर दोनों के पास से कमर में छुपाकर रखे गए दो धारदार, तलवारनुमा चाकू बरामद किए गए।

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे जरूरत पड़ने पर मारपीट करने के लिए इन चाकुओं को अपने पास रखते थे। पुलिस ने मौके से 2 नग धारदार चाकू (तलवारनुमा) एक एक्टिवा स्कूटी (CG 10 AZ 7497) जप्त की है।तोरवा पुलिस ने इस मामले में हर्ष कुकरेजा (20 वर्ष) और राकेश ध्रुव (33 वर्ष) को गिरफ्तार किया है।  दोनों आरोपी तोरवा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

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साइबर अपराध पर आधारित शॉर्ट फिल्म ‘ख़ौफ़ - द डिजिटल वॉर’ का आज भव्य विमोचन


रायगढ़ / जशपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  / साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल के तहत शशि मोहन सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित और अभिनीत शॉर्ट फिल्म ‘ख़ौफ़ - द डिजिटल वॉर’ का 4 अप्रैल को जशपुर के विशिष्ट कम्युनिटी हॉल में भव्य विमोचन किया जाएगा। कार्यक्रम रात्रि 8 बजे आयोजित होगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कौशल्या देवी साय (धर्मपत्नी विष्णु देव साय) उपस्थित रहेंगी।

🎬 फिल्म के जरिए साइबर अपराधों पर वार

यह फिल्म तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के जरिए हो रहे अपराधों को केंद्र में रखकर बनाई गई है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह अपराधी खुद को बैंक, पुलिस, आरबीआई या अन्य एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और ठगी को अंजाम देते हैं।

🎭 एसएसपी खुद निभा रहे पीड़ित शिक्षक की भूमिका

फिल्म की खास बात यह है कि शशि मोहन सिंह इसमें एक स्कूल शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं, जो साइबर ठगी का शिकार बनता है। यह किरदार आम लोगों को जागरूक करने का मुख्य माध्यम है। यह फिल्म डिजिटल युग के खतरों को उजागर करती है।  फिल्म में जिन विषयों को विस्तार से दिखाया गया है उनमें प्रमुख रूप से फर्जी कॉल और ईमेल के जरिए ठगी, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ऑनलाइन गेम्स के जरिए धोखाधड़ी, केवाईसी अपडेट और संदिग्ध लिंक का खतरा और स्क्रीन शेयरिंग ऐप और ओटीपी शेयर करने के जोखिम को बड़ी ही बारीकी से बताया गया है।  फिल्म का संदेश स्पष्ट है— “डिजिटल दुनिया में जागरूकता ही सुरक्षा है।” 

🎥 स्थानीय कलाकारों को मिला मंच

इस फिल्म में रायपुर, दुर्ग, कोरबा और जशपुर के कई स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया है। प्रमुख कलाकारों में आरवी सिन्हा, दीपा महंत, राम प्रकाश पाण्डेय, ऋभु समर्थ सिंह, कुंदन सिंह, प्रवीण अग्रवाल, विजय सिंह राजपूत सहित अन्य शामिल हैं। फिल्म का निर्माण Take 3 Studios द्वारा किया गया है। छायांकन (DOP) अनुज कुमार ने किया है, जबकि पटकथा और संवाद लेखन में भी स्थानीय प्रतिभाओं की भागीदारी रही है।

👮 जागरूकता के साथ भरोसे का संदेश

फिल्म में छत्तीसगढ़ पुलिस और साइबर सेल की कार्यप्रणाली को भी दर्शाया गया है, ताकि आम लोगों को यह भरोसा मिल सके कि किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर वे पुलिस की मदद ले सकते हैं।

शशि मोहन सिंह ने कहा—

“डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। यह फिल्म लोगों को सतर्क करने और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है।” 

महिला की मौत के बाद अस्पताल में बवाल, दो पक्षों में जमकर मारपीट


रायपुर।
 TODAY छत्तीसगढ़  / राजधानी के टिकरापारा थाना क्षेत्र स्थित नवकार अस्पताल में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद मायके और ससुराल पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और अस्पताल परिसर में दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई। 

मिली जानकारी के अनुसार, संतोषी नगर के शिव नगर निवासी यास्मिन ने गुरुवार को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। गंभीर हालत में परिजनों ने उसे रिंग रोड स्थित नवकार अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शुक्रवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलते ही मायके पक्ष के लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और उन्होंने पति इरशाद व ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि यास्मिन के साथ लंबे समय से मारपीट की जा रही थी और घटना वाले दिन भी घर में विवाद हुआ था।

मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि महिला की हत्या कर मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसे फांसी पर लटकाया गया। इसी आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। अचानक हुई इस मारपीट से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मरीजों और उनके परिजनों में भी दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया। घटना के बाद अस्पताल परिसर और आसपास एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। यह घटना एक बार फिर घरेलू विवादों के गंभीर रूप लेने और अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती को उजागर करती है।

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