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रामसर क्षेत्र की गतिविधियों का सर्वे पूरा, राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट

वन विभाग के सर्वे में औद्योगिक गतिविधियों का खुलासा, कोपरा रामसर स्थल के 5 किमी दायरे में दो कोल वाशरी और नौ कोल डिपो

बिलासपुर: TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के इकलौते 'रामसर स्थल' (Ramsar Site) कोपरा जलाशय के आसपास चल रही औद्योगिक गतिविधियों को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। वन विभाग ने इस क्षेत्र को लेकर अपनी पहली आधिकारिक प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के इस पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के बेहद करीब कोल वाशरी और कई कोल डिपो संचालित किए जा रहे हैं।

वन विभाग ने यह प्राथमिक रिपोर्ट 'ज़िला वेटलैंड समिति' के माध्यम से राज्य सरकार को सौंप दी है। अब इसके आधार पर जलाशय के संरक्षण की आगे की दिशा तय की जाएगी।

वन विभाग की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

वन विभाग द्वारा कोपरा जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र (जल ग्रहण क्षेत्र) और उसके आसपास की गतिविधियों का जो प्रारंभिक सर्वे कराया गया है, उसके तथ्य चिंताजनक हैं:

  • 5 किलोमीटर के दायरे में उद्योग: रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि रामसर साइट के महज़ 5 किलोमीटर के संवेदनशील दायरे में 2 कोल वाशरी और 9 कोल डिपो का संचालन किया जा रहा है।

  • प्रभावित इलाके: ये औद्योगिक गतिविधियां मुख्य रूप से कोपरा, बेलमुंडी, सैदा और संबलपुरी-बहतराई क्षेत्र में चल रही हैं।

क्यों मंडरा रहा है रामसर साइट पर ख़तरा?

पर्यावरण के लिहाज़ से सबसे बड़ी चिंता का कारण इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति है। वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिन स्थानों (कोपरा, बेलमुंडी, सैदा आदि) पर कोल वाशरी और डिपो संचालित हैं, वे जलाशय की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंचाई पर स्थित हैं।

बारिश के मौसम में इन ऊंचाई वाले इलाकों का पानी सीधे बहकर कोपरा जलाशय के कैचमेंट तक पहुंचता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिश के पानी के साथ कोयले की धूल और अन्य खतरनाक औद्योगिक प्रदूषक भी जलाशय में मिल सकते हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता और वहां का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

अब आगे क्या होगा? (मास्टर प्लान की तैयारी)

वन विभाग की इस प्राथमिक रिपोर्ट के राज्य सरकार तक पहुंचने के बाद अब संरक्षण के कड़े कदम उठाए जाने की तैयारी है:

  • संयुक्त टीम करेगी विस्तृत सर्वे: अब राज्य सरकार और केंद्र सरकार की एक संयुक्त विशेष टीम इस पूरे क्षेत्र का एक विस्तृत और गहन सर्वे करेगी।

  • बनेगा मास्टर प्लान: इस विस्तृत अध्ययन के आधार पर ही कोपरा रामसर साइट के संरक्षण के लिए एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया जाएगा।

  • किन चीज़ों पर होगा फोकस: तैयार होने वाले मास्टर प्लान में मुख्य रूप से जलाशय के जल की गुणवत्ता, कैचमेंट क्षेत्र के प्रबंधन और आसपास चल रही औद्योगिक गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया जाएगा। इसी के आधार पर भविष्य में उद्योगों को हटाने या उनके प्रबंधन को लेकर बड़े निर्णय लिए जाएंगे।

कोपरा रामसर साइट: एक नज़र में

  • क्षेत्रफल: यह जलाशय लगभग 210 हेक्टेयर (2.10 वर्ग किलोमीटर) के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।

  • रामसर का दर्ज़ा: इसे हाल ही में 12 दिसंबर 2025 को वैश्विक स्तर पर 'रामसर स्थल' का प्रतिष्ठित दर्ज़ा प्राप्त हुआ है, जिसके बाद से इसके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय नियम लागू हो गए हैं।

अब सभी की निगाहें राज्य और केंद्र की संयुक्त टीम की विस्तृत रिपोर्ट और उसके बाद बनने वाले मास्टर प्लान पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच इस अहम मामले में सरकार क्या कदम उठाती है। 

जलाशय के आसपास भी सक्रिय हैं कई कोल डिपो और वाशरी

वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रामसर जलाशय तक जाने वाली सड़क के दोनों ओर कई कोल डिपो संचालित हो रहे हैं। इनमें तीन डिपो जलाशय की सीमा से सटे हुए हैं, जिनमें एक सड़क के दाईं ओर और दो बाईं ओर स्थित हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सड़क की बाईं ओर करीब 500 मीटर की दूरी पर एक बड़ी कोल वाशरी संचालित है, जहां बड़े पैमाने पर कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग की जाती है। इसी क्षेत्र में तीन अन्य बड़े कोल डिपो भी मौजूद हैं। इसके अलावा फोरलेन सड़क की दूसरी ओर भी एक कोल डिपो रामसर जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र से महज 100 से 200 मीटर की दूरी पर स्थित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय और उसके कैचमेंट क्षेत्र के इतने निकट कोयला भंडारण, परिवहन और वाशरी गतिविधियों से उड़ने वाली कोयले की धूल तथा अपशिष्ट का असर जल गुणवत्ता और पर्यावरण पर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

दिल्ली और राज्य की संयुक्त टीम तैयार करेगी रामसर का मास्टर प्लान

रामसर वेटलैंड घोषित होने के बाद इसके संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। वन विभाग के अनुसार यह योजना राज्य जैव विविधता बोर्ड और दिल्ली के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बनाई जाएगी। इसके लिए दिल्ली और राज्य की संयुक्त टीम स्थल का विस्तृत सर्वे करेगी। सर्वे में पक्षियों की प्रजातियां, उनके प्राकृतिक आवास, प्रवास मार्ग, कैचमेंट क्षेत्र और संरक्षण के लिए आवश्यक उपायों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण बसेरा

रामसर वेटलैंड स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है। यहां मार्श हैरियर, यूरेशियन कूट, जलमुर्गी, गर्गनी, नॉर्दर्न शोवलर, नॉर्दर्न पिनटेल, ब्लूथ्रोट, भारतीय पिट्टा, भारतीय स्वर्गीय फ्लायकैचर, नदी टिटिहरी और सफेद-दुम शामा सहित अनेक दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का यहां आगमन होता है।

कैचमेंट क्षेत्र का प्राथमिक सर्वे पूरा

वन विभाग ने रामसर घोषित होने के बाद इसके कैचमेंट क्षेत्र और पांच किलोमीटर के दायरे में संचालित उद्योगों, कोल डिपो, कोल वाशरी तथा अन्य गतिविधियों का प्राथमिक सर्वे कराया है। सर्वे रिपोर्ट जिला वेटलैंड समिति को भेज दी गई है, जहां से इसे राज्य स्तर पर अग्रेषित किया गया है।

डीएफओ बिलासपुर मंडल नीरज यादव ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और संरक्षण संबंधी निर्णय राज्य स्तर पर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रामसर वेटलैंड के संरक्षण और प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

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