वर्धा। TODAY छत्तीसगढ़ / महाराष्ट्र के वर्धा जिले के प्रादेशिक वन क्षेत्र में पहली बार अत्यंत दुर्लभ एल्बिनो बुलबुल (Albino Bulbul) देखे जाने का दावा किया गया है। यह जानकारी महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के मानवविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं वन्यजीव प्रेमी डॉ. वीरेन्द्र प्रताप यादव ने साझा की है।
जारी जानकारी के अनुसार, डॉ. यादव अपने सहयोगियों डॉ. पीयूष पतंजलि और समीर अवस्थी के साथ वन क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कुछ बुलबुल पक्षी दिखाई दिए, जिनमें एक पक्षी असामान्य रूप से सफेद रंग का था। डॉ. यादव ने उसके लाल रंग के अंडर-टेल कवरट्स (वेंट) को देखकर उसे एल्बिनो बुलबुल होने की संभावना जताई। इसके बाद उन्होंने मोबाइल से ली गई तस्वीरें वर्धा वन अनुसंधान केंद्र के वनरक्षक एवं पक्षी विशेषज्ञ मनेशकुमार लिंगुराम सज्जन को भेजीं। सूचना मिलने पर वनरक्षक मौके पर पहुंचे और पक्षी का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण किया।
डॉ. यादव के अनुसार, एल्बिनिज्म एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति है, जिसमें मेलेनिन नामक प्राकृतिक रंगद्रव्य का निर्माण नहीं हो पाता। इसके कारण पक्षी के पंख सफेद हो जाते हैं तथा आंखें, चोंच और पैर गुलाबी या लाल रंग के दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि अनुमानतः करीब 30 हजार पक्षियों में एक में एल्बिनिज्म की स्थिति देखने को मिलती है और बुलबुल में यह और भी दुर्लभ मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि मेलेनिन की कमी के कारण ऐसे पक्षियों की दृष्टि अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिससे भोजन खोजने और शिकारियों से बचने में कठिनाई होती है। सफेद रंग होने के कारण वे दूर से आसानी से दिखाई देते हैं और कई बार अपने समूह से भी अलग हो जाते हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत में एल्बिनो बुलबुल के दस्तावेजीकरण के बहुत कम मामले सामने आए हैं। पहले भी विभिन्न राज्यों में आंशिक या पूर्ण एल्बिनो बुलबुल के कुछ रिकॉर्ड प्रकाशित हो चुके हैं। वर्धा में 26 जुलाई 2026 को दर्ज यह अवलोकन जिले का पहला प्रलेखित मामला बताया गया है।
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| तस्वीर में दाएं से बाएं - डॉ पीयूष पतंजलि, डॉ वीरेन्द्र प्रताप यादव, श्री समीर अवस्थी, श्री मनेशकुमार लिंगुराम सज्जन |
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