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छत्तीसगढ़ कैबिनेट के 3 बड़े फ़ैसले: गांवों में मिलेगा 125 दिन का रोज़गार, कृषि अवशेषों से बनेगी 'बायोगैस'

गांवों में खुलेंगे कोल्ड स्टोरेज और विपणन केंद्र, छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने दी 'अटल आजीविका हाट' को मंज़ूरी

छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट बैठक में ग्रामीण विकास, रोज़गार और स्वच्छ ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) से जुड़ी तीन अहम योजनाओं को मंज़ूरी दी गई है.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में हुई इस बैठक में मुख्य रूप से ग्रामीण रोज़गार गारंटी, स्थानीय बाज़ार (हाट) के विकास और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी नीतियों पर मुहर लगाई गई.

सरकारी जानकारी के अनुसार, कैबिनेट द्वारा लिए गए तीन प्रमुख फ़ैसले इस प्रकार हैं:

1. 125 दिनों के रोज़गार की गारंटी (VB-G RAM Ji योजना)

कैबिनेट ने ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी 'वीबी-जी राम जी' योजना के प्रारूप को आधिकारिक तौर पर मंज़ूरी दे दी है.

  • प्रावधान: इस योजना के तहत राज्य के पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का अकुशल (Unskilled) रोज़गार उपलब्ध कराया जाएगा.

  • बजट और कार्य: इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में चार हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस योजना के तहत मुख्य रूप से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे कार्य कराए जाएंगे.

2. 'अटल आजीविका समृद्धि हाट' योजना

ग्रामीण इलाक़ों में स्थानीय रोज़गार और कारोबार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने एक नई 'हाट' योजना शुरू करने का फ़ैसला किया है.

  • योजना का मक़सद: इसके तहत गांवों में हथकरघा, सिलाई-बुनाई, हस्तशिल्प, फ़ूड प्रोसेसिंग, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज और डिजिटल सेवा व विपणन केंद्र स्थापित किए जाएंगे.

  • बाज़ार की व्यवस्था: सरकार के मुताबिक़, इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का एक मज़बूत नेटवर्क तैयार करना है, ताकि ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाज़ार मिल सके.

3. छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026

राज्य में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने 'कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026' को भी मंज़ूरी दी है.

  • क्या है नीति: इस नीति के तहत खेतों में बचने वाले कृषि अवशेष (पराली आदि), मवेशियों के अपशिष्ट और शहरी इलाक़ों के ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीक़े से इस्तेमाल किया जाएगा.

  • फ़ायदे: इस अपशिष्ट को प्रसंस्कृत (Process) कर उसे कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में बदला जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, इस क़दम से बेहतर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण इलाक़ों में निवेश और रोज़गार के नए मौक़े पैदा होंगे.

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