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अचानकमार में दिखा ‘गिद्धों का राजा’, पहली बार नजर आया दुर्लभ किंग वल्चर

गिद्धों की दुनिया का राजा पहुंचा अचानकमार, वन विभाग भी उत्साहित

बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। रिजर्व क्षेत्र में पहली बार बेहद दुर्लभ रेड-हेडेड वल्चर (King Vulture) की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे अचानकमार की समृद्ध जैव विविधता और गिद्धों के लिए अनुकूल वातावरण का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।

अचानकमार टाइगर रिजर्व की मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर श्रीमती प्रियंका पांडेय ने बताया कि रेड-हेडेड वल्चर का देखा जाना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बड़ी उपलब्धि है। यह प्रजाति देश में तेजी से घटती गिद्ध आबादी के बीच बेहद दुर्लभ मानी जाती है और संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल है। 

गिद्धों का राजा माना जाता है किंग वल्चर

देश में पाई जाने वाली नौ गिद्ध प्रजातियों में रेड-हेडेड वल्चर को विशेष स्थान प्राप्त है। इसकी लाल रंग की गर्दन और प्रभावशाली आकार के कारण इसे "गिद्धों का राजा" कहा जाता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मृत पशुओं के शव पर सबसे पहले यही गिद्ध पहुंचता है और इसके बाद अन्य गिद्ध प्रजातियां भोजन के लिए वहां आती हैं।

औरापानी क्षेत्र पहले से गिद्ध संरक्षण का केंद्र

अचानकमार टाइगर रिजर्व का बफर क्षेत्र औरापानी पहले से ही Indian Long-billed Vulture के लिए प्रदेश में विशेष पहचान रखता है। ऐसे में उसी क्षेत्र में रेड-हेडेड वल्चर की उपस्थिति दर्ज होना वन विभाग और संरक्षण विशेषज्ञों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका

गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी माना जाता है। ये मृत पशुओं के अवशेषों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं और कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों तथा महामारी के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन दवाओं के दुष्प्रभाव, आवासीय संकट और अन्य कारणों से पिछले कुछ दशकों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

संरक्षण प्रयासों को मिलेगी नई दिशा

वन विभाग का मानना है कि रेड-हेडेड वल्चर की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि अचानकमार के जंगल आज भी दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बने हुए हैं। यह खोज प्रदेश में गिद्ध संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। 


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