रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। प्रस्तावित स्टील एवं पावर प्लांट परियोजना के लिए तैयार इनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट (EIA) रिपोर्ट में कथित तौर पर भ्रामक जानकारी दिए जाने का मामला सामने आया है। इसको लेकर अधिवक्ता संदीप तिवारी एवं वाइल्डलाइफ फोटोजर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। इधर वेटलैंड अथॉरिटी ने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर दर्ज आपत्ति और शिकायतों की जांच करने कहा है।
श्री तिवारी ने वेटलैंड अथॉरिटी को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि EIA रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि परियोजना स्थल के 10 किलोमीटर दायरे में किसी भी वन्यजीव का प्रवासी मार्ग नहीं है। जबकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के अनुसार पक्षियों को भी वन्यजीव की श्रेणी में रखा गया है।
रामसर कन्वेंशन को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार कोपरा जलाशय 161 प्रजातियों के पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास है। इनमें 58 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं, जो सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के माध्यम से हर वर्ष यहां पहुंचती हैं। इनमें पांच अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियां भी हैं।
Central Asian Flyway का एक अंतरराष्ट्रीय प्रवासी मार्ग है, जिसके जरिए पक्षी हर साल ठंड के मौसम में उत्तर (साइबेरिया/मध्य एशिया) से भारत जैसे देशों में आते हैं। यह मार्ग पक्षियों के लिए भोजन, विश्राम और जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों (जैसे कोपरा जलाशय) पर निर्भर करता है। इसलिए इस मार्ग के किसी भी स्थल को नुकसान पहुंचाना प्रवासी पक्षियों और पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।श्री तिवारी का कहना है कि रिपोर्ट में सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के महत्व को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने मांग की है कि भ्रामक एवं अपूर्ण जानकारी के आधार पर तैयार EIA रिपोर्ट को निरस्त किया जाए तथा एक स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, जिसमें परियोजना के समग्र पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन हो।
वेटलैंड अथॉरिटी द्वारा मामले को कलेक्टर बिलासपुर को भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। तिवारी का कहना है कि रामसर से संबंधित तकनीकी जानकारी वेटलैंड अथॉरिटी के पास उपलब्ध है, ऐसे में इसकी जांच भी उसी स्तर पर की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिला प्रशासन इस प्रकार के जटिल पर्यावरणीय मुद्दे का तकनीकी परीक्षण कैसे कर पाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर औद्योगिक परियोजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि रामसर साइट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी परियोजना को स्वीकृति देने से पहले अत्यंत सावधानी बरतना आवश्यक है। यदि प्रवासी पक्षियों के मार्ग और आवास प्रभावित होते हैं, तो इसका असर केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
कोपरा जलाशय का मामला केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि नीति और प्राथमिकताओं का सवाल है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित वेटलैंड भी सटीक जानकारी और जिम्मेदारी के अभाव में खतरे में पड़ जाएं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। आवश्यक है कि संबंधित एजेंसियां पारदर्शिता और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लें, ताकि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

