मोबाइल टावर से केबल चोरी करने वाला गिरोह पकड़ा, लाखों का सामान बरामद


बिलासपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले में मोबाइल टावरों से केबल चोरी करने वाले गिरोह का सीपत पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन विधि से संघर्षरत बालकों को किशोर न्याय बोर्ड भेजा गया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 2.90 लाख रुपये मूल्य का चोरी का सामान बरामद किया गया है।

पुलिस के अनुसार, 19 अप्रैल को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम खम्हरिया के सोंठी रोड बाजार के पास कुछ युवक संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त हैं। सूचना पर थाना प्रभारी के निर्देश पर टीम ने घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ा।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले चार-पांच महीनों से एक कार में घूम-घूमकर विभिन्न जिलों में मोबाइल टावरों से कॉपर केबल और एल्युमिनियम तार चोरी कर रहे थे। गिरोह तखतपुर, मुंगेली, कबीरधाम, कोरबा सहित कई क्षेत्रों में सक्रिय था।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर एक क्विंटल से अधिक कॉपर केबल, 54 किलोग्राम प्लास्टिक कोटेड कॉपर वायर, 12 बंडल एल्युमिनियम तार सहित कुल 2 लाख 90 हजार 400 रुपये का सामान जब्त किया है। साथ ही वारदात में प्रयुक्त एक अर्टिगा कार भी बरामद की गई है। गिरफ्तार आरोपियों में शहबाज अली (25), जगदीश कुमार पटेल (24) और मोईउद्दीन (27) शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

सकरी बाईपास पर भीषण टक्कर के बाद ट्रेलर में लगी आग, चालक जिंदा जला


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  जिले के सकरी बाईपास रोड स्थित संबलपुरी ओवरब्रिज पर रविवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने इलाके को झकझोर कर रख दिया। यहां दो ट्रेलरों के बीच जोरदार टक्कर के बाद लगी आग में एक चालक की दर्दनाक मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ओवरब्रिज पर आगे चल रही ट्रेलर को पीछे से आ रही कोयले से लदी तेज रफ्तार ट्रेलर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पीछे वाले ट्रेलर का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और चालक केबिन में ही फंस गया। वह बाहर निकलने का मौका नहीं पा सका और जिंदा जल गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और राहगीरों ने तुरंत पुलिस व फायर ब्रिगेड को सूचना दी। 

सूचना मिलते ही सकरी थाना पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक चालक की मौत हो चुकी थी। उसका शव केबिन के अंदर बुरी तरह झुलस गया था। फिलहाल पुलिस द्वारा शव को बाहर निकालने की प्रक्रिया जारी है और मृतक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। हादसे के कारण कुछ समय तक मार्ग पर यातायात बाधित रहा। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। 


CEIR पोर्टल: 128 गुम मोबाइल लौटाकर रायगढ़ पुलिस ने जीता भरोसा


रायगढ़।
 TODAY छत्तीसगढ़  /  साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और आम नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने गुम एवं चोरी हुए 128 मोबाइल फोन रिकवर कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपे हैं।

पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी, साइबर डीएसपी उन्नति ठाकुर, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक सहित साइबर टीम की मौजूदगी में मोबाइल वितरण किया गया। 

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि बैंकिंग, जरूरी दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि मोबाइल गुम होने पर तुरंत CEIR पोर्टल पर जानकारी दर्ज करें।

जिले में गुम मोबाइल की शिकायतों के निराकरण के लिए भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा विकसित CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित सिम को ब्लॉक कर दिया जाता है और मोबाइल को ट्रैकिंग पर रखा जाता है।

साइबर डीएसपी उन्नति ठाकुर के निर्देशन में साइबर थाना प्रभारी विजय चेलक और उनकी टीम लगातार मॉनिटरिंग कर कार्रवाई करती है। टेलीकॉम कंपनियों की सहायता से मोबाइल में नई गतिविधि मिलने पर तत्काल कार्रवाई कर उसे बरामद किया जाता है। 

साइबर टीम ने 128 मोबाइल फोन को सफलतापूर्वक ट्रेस किया। ये मोबाइल बिहार, कोलकाता सहित कोरबा, जांजगीर और रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़, घरघोड़ा, पूंजीपथरा, तमनार, छाल और खरसिया क्षेत्रों में उपयोग में पाए गए। पुलिस ने संबंधित उपयोगकर्ताओं से संपर्क कर मोबाइल वापस प्राप्त किए। बरामद मोबाइल में वीवो, ओप्पो, रेडमी, पोको, रियलमी, वनप्लस, सैमसंग और मोटोरोला जैसे ब्रांड शामिल हैं। इनकी कुल कीमत लगभग 25 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई है। 

मोबाइल वापस मिलने पर कई लोग भावुक हो उठे। कुछ ने तो अपने फोन मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। मोबाइल पाकर लोगों ने पुलिस टीम का आभार जताया और खुशी जाहिर की। 

“रामसर साइट कोपरा पर संकट ? EIA रिपोर्ट में ‘गायब’ हो गए प्रवासी पक्षी !”


रायपुर। 
TODAY छत्तीसगढ़  /  छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। प्रस्तावित स्टील एवं पावर प्लांट परियोजना के लिए तैयार इनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट (EIA) रिपोर्ट में कथित तौर पर भ्रामक जानकारी दिए जाने का मामला सामने आया है। इसको लेकर अधिवक्ता संदीप तिवारी एवं वाइल्डलाइफ फोटोजर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। इधर वेटलैंड अथॉरिटी ने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर दर्ज आपत्ति और शिकायतों की जांच करने कहा है।  

श्री तिवारी ने वेटलैंड अथॉरिटी को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि EIA रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि परियोजना स्थल के 10 किलोमीटर दायरे में किसी भी वन्यजीव का प्रवासी मार्ग नहीं है। जबकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के अनुसार पक्षियों को भी वन्यजीव की श्रेणी में रखा गया है।

रामसर कन्वेंशन को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार कोपरा जलाशय 161 प्रजातियों के पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास है। इनमें 58 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं, जो सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के माध्यम से हर वर्ष यहां पहुंचती हैं। इनमें पांच अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियां भी हैं।

Central Asian Flyway का एक अंतरराष्ट्रीय प्रवासी मार्ग है, जिसके जरिए पक्षी हर साल ठंड के मौसम में उत्तर (साइबेरिया/मध्य एशिया) से भारत जैसे देशों में आते हैं। यह मार्ग पक्षियों के लिए भोजन, विश्राम और जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों (जैसे कोपरा जलाशय) पर निर्भर करता है। इसलिए इस मार्ग के किसी भी स्थल को नुकसान पहुंचाना प्रवासी पक्षियों और पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

श्री तिवारी का कहना है कि रिपोर्ट में सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के महत्व को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने मांग की है कि भ्रामक एवं अपूर्ण जानकारी के आधार पर तैयार EIA रिपोर्ट को निरस्त किया जाए तथा एक स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, जिसमें परियोजना के समग्र पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन हो।

वेटलैंड अथॉरिटी द्वारा मामले को कलेक्टर बिलासपुर को भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। तिवारी का कहना है कि रामसर से संबंधित तकनीकी जानकारी वेटलैंड अथॉरिटी के पास उपलब्ध है, ऐसे में इसकी जांच भी उसी स्तर पर की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिला प्रशासन इस प्रकार के जटिल पर्यावरणीय मुद्दे का तकनीकी परीक्षण कैसे कर पाएगा। 

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर औद्योगिक परियोजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। 

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि रामसर साइट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी परियोजना को स्वीकृति देने से पहले अत्यंत सावधानी बरतना आवश्यक है। यदि प्रवासी पक्षियों के मार्ग और आवास प्रभावित होते हैं, तो इसका असर केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।

कोपरा जलाशय का मामला केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि नीति और प्राथमिकताओं का सवाल है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित वेटलैंड भी सटीक जानकारी और जिम्मेदारी के अभाव में खतरे में पड़ जाएं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। आवश्यक है कि संबंधित एजेंसियां पारदर्शिता और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लें, ताकि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

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