बिलासपुर। जिले के सकरी क्षेत्र में प्रस्तावित स्टील प्लांट परियोजना को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। IMAEC स्टील एंड पावर लिमिटेड ने पर्यावरणीय कारणों का हवाला देते हुए अपनी प्रस्तावित ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट परियोजना को स्वेच्छा से वापस लेने का निर्णय लिया है। इस संबंध में कंपनी ने छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को औपचारिक पत्र भेजकर अपने आवेदन को निरस्त करने का अनुरोध किया है।
कंपनी द्वारा 20 अप्रैल 2026 को भेजे गए पत्र के अनुसार, ग्राम सकरी, तहसील सकरी, जिला बिलासपुर में प्रस्तावित इस परियोजना के लिए वेटलैंड NOC हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। यह आवेदन 24 मार्च 2026 को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष रखा गया था।
कंपनी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि परियोजना स्थल के समीप स्थित कोपर्रा जलाशय (रामसर साइट/वेटलैंड क्षेत्र) पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। यह क्षेत्र समृद्ध जैव विविधता (फ्लोरा एवं फौना) से भरपूर है और यहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का आवागमन होता है।
वन विभाग एवं अन्य संबंधित एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि इस क्षेत्र का पर्यावरणीय महत्व अत्यधिक है। ऐसे में किसी भी औद्योगिक परियोजना से यहां के पारिस्थितिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
IMAEC स्टील एंड पावर लिमिटेड ने अपने पत्र में कहा है कि वह पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है और इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने यह निर्णय लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित स्टील प्लांट (जिसमें DRI किल्न, पावर प्लांट और अन्य सहायक इकाइयां शामिल थीं) को पूरी तरह से वापस लिया जा रहा है।
कंपनी ने यह भी बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के PARIVESH पोर्टल पर प्रस्तुत आवेदन को भी विधिवत वापस ले लिया गया है। कंपनी ने वेटलैंड NOC के लिए दिए गए आवेदन को निरस्त मानते हुए इस संबंध में आगे किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने का अनुरोध किया है।
इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आमतौर पर औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय विवाद सामने आते रहते हैं, लेकिन इस मामले में कंपनी द्वारा स्वयं परियोजना वापस लेना एक महत्वपूर्ण संकेत है।
गौरतलब हो कि कल ही हमने इस आशय को लेकर एक खबर प्रकाशित की थी उसके बाद यह बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय एक बार फिर विवादों के केंद्र में थी। प्रस्तावित स्टील एवं पावर प्लांट परियोजना के लिए तैयार इनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट (EIA) रिपोर्ट में कथित तौर पर भ्रामक जानकारी दिए जाने का मामला सामने आया था । इसको लेकर अधिवक्ता संदीप तिवारी एवं वाइल्डलाइफ फोटोजर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी। इधर वेटलैंड अथॉरिटी ने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर दर्ज आपत्ति और शिकायतों की जांच करने कहा था ।
श्री तिवारी ने वेटलैंड अथॉरिटी को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि EIA रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि परियोजना स्थल के 10 किलोमीटर दायरे में किसी भी वन्यजीव का प्रवासी मार्ग नहीं है। जबकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के अनुसार पक्षियों को भी वन्यजीव की श्रेणी में रखा गया है।
रामसर कन्वेंशन को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार कोपरा जलाशय 161 प्रजातियों के पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास है। इनमें 58 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं, जो सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के माध्यम से हर वर्ष यहां पहुंचती हैं। इनमें पांच अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियां भी हैं।
“रामसर साइट कोपरा पर संकट ? EIA रिपोर्ट में ‘गायब’ हो गए प्रवासी पक्षी !”


