तेंदुलकर के परिवार का ‘लो-प्रोफाइल’ बिलासपुर दौरा, गांवों और स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा


रायपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में मंगलवार तड़के एक ऐसा दौरा हुआ, जिसकी जानकारी 24 घंटे तक सार्वजनिक नहीं हुई। भारत रत्न और देश के के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के परिवार के सदस्य अंजलि तेंदुलकर, सारा तेंदुलकर और सानिया चांडक शहर पहुंचे और सीमित दायरे में विभिन्न स्थानों का दौरा किया। इस पूरे कार्यक्रम को बेहद कम प्रोफाइल रखा गया और इसकी जानकारी केवल चुनिंदा अधिकारियों तक ही सीमित रही।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तीनों सदस्य सुबह करीब 5:30 बजे बिलासपुर पहुंचे और मंगला चौक स्थित कोर्टयार्ड मेरिओट होटल में ठहरे। होटल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रही, हालांकि आम लोगों की आवाजाही या भीड़ से बचने के लिए कार्यक्रम को सार्वजनिक नहीं किया गया। 

ATR के गांवों का दौरा और स्थानीय लोगों से संवाद

दोपहर के समय यह दल अचानकमार क्षेत्र के छपरवा-बम्हनी गांव पहुंचा। यहां उन्होंने पैदल भ्रमण किया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उन्होंने ग्रामीणों से उनकी जीवनशैली, जरूरतों और दैनिक चुनौतियों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बच्चों के साथ बातचीत और एक नवजात शिशु को गोद में लेने जैसे दृश्य भी सामने आए। यह दौरा औपचारिक कार्यक्रम की बजाय जमीनी स्तर पर स्थितियों को समझने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस

बुधवार यानी आज सुबह यह दल गनियारी स्थित एक जन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। यहां फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया गया और डॉक्टरों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। सूत्रों का कहना है कि यह दौरा किसी सामाजिक संस्था के आमंत्रण पर हुआ और स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावित सहयोग पर भी बातचीत हुई।

गोपनीयता और प्रशासनिक तैयारी

इस दौरे की एक प्रमुख विशेषता इसकी गोपनीयता रही। जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की, लेकिन कार्यक्रम को सार्वजनिक नहीं होने दिया गया।सम्भवतः इस तरह के दौरे में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जानकारी सीमित रखी है।”

क्या संकेत देता है यह दौरा?

कुछ जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरे यह संकेत देते हैं कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग अब सीधे जमीनी स्तर पर जाकर सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस दौरे से जुड़े किसी औपचारिक बयान या भविष्य की योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


मंगलसूत्र बना मौत का फंदा, लिव-इन पार्टनर ने की महिला की हत्या


रायगढ़।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  कोतरारोड़ थाना क्षेत्र में महिला की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि महिला की हत्या उसके लिव-इन पार्टनर ने ही मंगलसूत्र से गला घोंटकर की थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मृतका की पहचान धनेश्वरी विश्वकर्मा (32 वर्ष) के रूप में हुई है।

बीते 1 अप्रैल को जिंदल अस्पताल पतरापाली से महिला की आकस्मिक मौत की सूचना मिलने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गले पर दबाव से दम घुटना बताया गया, जिसे “हॉमीसाइडल” (हत्या) घोषित किया गया। इसके बाद मामला हत्या में बदल गया। जांच के दौरान पुलिस का संदेह मृतका के लिव-इन पार्टनर विकेश बरेठ (26 वर्ष) पर गया। कड़ी पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि विवाद के दौरान उसने महिला के मंगलसूत्र से गला घोंट दिया।  

पुलिस के अनुसार दोनों पिछले चार साल से साथ रह रहे थे। विवाह और निजी विवाद को लेकर अक्सर दोनों के बीच झगड़ा होता था। घटना के दिन भी दोनों का विवाद हुआ। गुस्से में आरोपी विकेश बरेठ ने पीछे से मंगलसूत्र खींचकर गला घोंट दिया। बाद में आरोपी महिला को अस्पताल लेकर गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 103(1) और 238 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 



पॉश कॉलोनी में वकील का हथियारों संग आतंक, पुलिस ने दबोचा


बिलासपुर।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  शहर के पॉश इलाके रामावैली कॉलोनी में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक वकील ने सरेआम हथियार लहराकर लोगों में दहशत फैला दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी अंशुमन श्रीवास्तव अपने घर के बाहर कार में शराब का सेवन कर रहा था। इसी दौरान वह पिस्टल, तलवार और फरसा जैसे हथियार लेकर सड़क पर निकल आया और राहगीरों को डराने-धमकाने लगा। आरोपी की इस हरकत से कॉलोनी में भय का माहौल बन गया। लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। घटना का वीडियो स्थानीय लोगों ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला पुलिस के संज्ञान में आया। मामले की जानकारी मिलते ही सीएसपी निमितेश सिंह परिहार, एसीसीयू टीम और चकरभाठा थाना पुलिस मौके पर पहुंची।पुलिस ने मकान नंबर L-5, 124 की घेराबंदी कर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।

पुलिस ने आरोपी वकील के पास से एक 32.5 इंच की तलवार, एक काले रंग की एयर पिस्टल और फरसा नुमा कुल्हाड़ी ज़ब्त की है। इस मामले में पुलिस ने वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया। 


बाप-बेटे को पुलिस कस्टडी में बर्बरता और मौत पर चला कानून का डंडा, 9 पुलिसवालों को मौत की सजा


नई दिल्ली।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  तमिलनाडु की मदुरै डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बाप-बेटे की पुलिस कस्टडी में मौत मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. मदुरै कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल 2026) को बिजनेसमैन पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में हुई मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है. दोषियों में शामिल पुलिस इंस्पेक्टर श्रीधर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

केस बारे में पढ़कर दिल कांप उठता है: कोर्ट

कोर्ट ने जिन पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई है उसमें इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन और रघु गणेश और पुलिसकर्मी मुरुगन, समदुरई, मुथुराजा, चेल्लादुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेइलुमुथु शामिल हैं. कोर्ट ने कहा, 'पिता और बेटे को बदले की भावना से निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया था. इसके बारे में पढ़कर दिल कांप उठता है. अगर बेंच की निगरानी नहीं होती तो सच दबकर रह जाता.' 

सीबीआई ने की थी फांसी की मांग

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में सीसीटीवी फुटेज पेश किए गए, जबकि आम तौर पर ऐसे मामलों में ऐसा नहीं होता. मदुरै डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में कई ईमानदार पुलिस अधिकारी हैं और यह फैसला पुलिस के बीच डर पैदा नहीं करेगा. पुलिस हिरासत में टॉर्चर और उसके बाद हुई मौत मामले में सीबीआई ने अधिकतम सजा के रूप में फांसी या बिना पैरोल की संभावना के आजीवन कारावास की मांग की थी.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 19 जून, 2020 को शुरू हुआ, जब मोबाइल की दुकान चलाने वाले जयराज और बेनिक्स को लॉकडाउन के दौरान तय समय से अधिक दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. दोनों को सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई. घरवालों ने आरोप लगाया था कि पुलिस कस्टडी में उनके साथ मारपीट की गई थी.

इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य की सीबी-सीआईडी ​​से जांच का जिम्मा संभालने वाली सीबीआई ने इस मामले में 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए लोगों में एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और कई कांस्टेबल शामिल थे. बाद में एजेंसी ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया. (साभार / abp न्यूज़)

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