रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 स्थित नंदनवन जंगल सफारी वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और प्रकृति पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। राज्य सरकार के अनुसार, 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह परिसर पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके संरक्षण के बारे में जानकारी देने का अवसर उपलब्ध कराता है।
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में मिनी जू के रूप में हुई थी। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे मिनी जू के रूप में मान्यता दी और बाद में नवा रायपुर में आधुनिक जंगल सफारी विकसित की गई। इसका उद्घाटन 1 नवंबर 2016 को तत्कालीन राज्य स्थापना दिवस समारोह के दौरान किया गया था।
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, सफारी परिसर में शाकाहारी सफारी, बाघ सफारी, भालू सफारी, सिंह सफारी और जू जोन विकसित किए गए हैं। यहां चीतल, सांभर, नीलगाय, काला हिरण, बाघ, एशियाई शेर, भालू सहित कई वन्यजीव प्राकृतिक परिवेश में देखे जा सकते हैं। इसके अलावा सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा 'दीपाशा' जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी आकर्षण का केंद्र हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि नंदनवन का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण एवं प्रजनन तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। यहां विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए समय-समय पर पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर के हवाले से बताया गया है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पहल के अनुरूप नंदनवन जंगल सफारी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025-26 में यहां 3 लाख 24 हजार 785 पर्यटकों ने भ्रमण किया, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है।
नंदनवन जंगल सफारी स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।


