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बाघ संरक्षण और जनभागीदारी पर केंद्रित रहा अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस कार्यक्रम

उपमुख्यमंत्री अरुण साव बोले- बाघ बचेंगे तो जंगल और पर्यावरण सुरक्षित रहेंगे

मुंगेली।
  TODAY छत्तीसगढ़  /  अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर बुधवार को शिवतराई बैगा रिसॉर्ट में अचानकमार टाइगर रिजर्व द्वारा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य बाघ संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत उपमुख्यमंत्री द्वारा WWF की ओर से अचानकमार टाइगर रिजर्व को उपलब्ध कराए गए स्निफर डॉग रैपिड एक्शन फोर्स पेट्रोलिंग वाहन (बोलेरो कैंपर) को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के साथ हुई।

अचानकमार टाइगर रिजर्व की स्निफर डॉग 'नीतू' वर्ष 2025 में राष्ट्रीय डॉग प्रशिक्षण केंद्र, पंचकूला (हरियाणा) से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वन एवं वन्यजीव संरक्षण कार्य में तैनात है। विभाग का दावा है कि नीतू ने अब तक छत्तीसगढ़ के पांच वनमंडलों में छह गंभीर वन्यजीव अपराधों के खुलासे में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कार्यक्रम में अचानकमार टाइगर रिजर्व के उप संचालक अभिनव कुमार ने बाघ संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कलेक्टर कुंदन कुमार ने बाघों को वन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमुख संरक्षक बताते हुए जिला प्रशासन की ओर से संरक्षण कार्यों में सहयोग का भरोसा दिलाया। वहीं, मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्रीय निदेशक प्रियंका पाण्डेय ने बाघों की गणना, सुरक्षा तकनीकों और संरक्षण अभियानों की जानकारी साझा करते हुए स्थानीय वनग्रामों के लोगों से संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि स्वस्थ जंगलों और पर्यावरण संतुलन के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण जल स्रोतों, जैव विविधता और पर्यावरण सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पौधों के संरक्षण का भी संदेश दिया। साथ ही अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण, पर्यटन विकास और स्थानीय लोगों के रोजगार सृजन के प्रयासों की सराहना की। 

कार्यक्रम के दौरान बाघिन 'झुमरी' की बांधवगढ़ से अचानकमार तक की यात्रा और उसके प्रजनन पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें वन्यजीव कॉरिडोर और बाघ संरक्षण के महत्व को दर्शाया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में WWF के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी उपेन्द्र दूबे, गोंड एवं गोदना कला के लिए रागिनी ध्रुव और तान्या मरावी सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा अचानकमार टाइगर रिजर्व के 20 उत्कृष्ट वनकर्मियों को मेडल, प्रशस्ति पत्र और ₹1,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। वनग्रामों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों, पूर्व आईएफएस अधिकारी, स्कूली छात्र-छात्राओं, ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लिया।



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