बिलासपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक बाउंस) से संबंधित लंबित मामलों के त्वरित और समझौतापूर्ण निपटारे के लिए राज्यव्यापी विशेष लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दंतेवाड़ा जिला एवं सत्र न्यायालय से वर्चुअल माध्यम के जरिए राज्य के सभी 23 जिलों में इस विशेष अभियान की शुरुआत की।
उद्घाटन अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि धारा 138 के अंतर्गत आने वाले अपराध समझौतायोग्य हैं और ऐसे मामलों का आपसी सहमति से त्वरित निराकरण न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से अधिक से अधिक मामलों का समझौतापूर्ण निस्तारण कराने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि इस राज्यव्यापी अभियान के तहत 9,641 चेक बाउंस मामलों की पहचान की गई है। विशेष लोक अदालत के पहले दिन ही 1,996 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया तथा 57 करोड़ 1 लाख 35 हजार 387 रुपये की राशि का समझौता कराया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि 21 से 23 अगस्त 2026 तक उच्चतम न्यायालय में "समाधान समारोह" आयोजित किया जाएगा, जिसमें लंबित मामलों के आपसी सहमति से निपटारे का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों तथा संबंधित पक्षों से इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
कार्यक्रम के बाद न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दंतेवाड़ा जिला न्यायालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा न्यायालय परिसर, डिजिटलीकरण केंद्र और विशेष लोक अदालत की खंडपीठों का निरीक्षण किया। उन्होंने वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से भी चर्चा कर वाणिज्यिक विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
इसके बाद उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायालय, जगदलपुर का भी निरीक्षण किया और वहां न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं तथा न्यायालयीन कर्मचारियों से संवाद करते हुए विशेष लोक अदालत की व्यवस्थाओं और डिजिटलीकरण कार्यों की समीक्षा की।
गौरतलब है कि चेक बाउंस मामलों के निपटारे के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय की अध्यक्षता में विशेष पीठ का गठन भी किया गया है। न्यायपालिका का मानना है कि यह अभियान समझौता आधारित विवाद समाधान प्रणाली को मजबूत करने के साथ पक्षकारों और वित्तीय संस्थानों को त्वरित एवं प्रभावी न्यायिक राहत उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

