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‘झुमरी की चौपाल’ से गूंज रहा ATR में बाघ संरक्षण का संदेश

एक बाघिन की कहानी, जो बन गई संरक्षण की मिसाल

बिलासपुर।  TODAY छत्तीसगढ़  /  ग्लोबल टाइगर डे के अवसर पर मनाए जा रहे टाइगर डे वीक के तहत अचानकमार टाइगर रिजर्व और WWF-India द्वारा बाघ संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष जागरूकता अभियान की थीम ‘झुमरी की चौपाल’ रखी गई है। इसके अंतर्गत नुक्कड़ नाटक, डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शन, व्याख्यान, किस्से-कहानियां और ग्रामीण चौपालों के माध्यम से बाघ संरक्षण एवं जैव विविधता के महत्व को सरल और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

अभियान की मुख्य पात्र ‘झुमरी’ एक बाघिन है, जिसने कथित तौर पर मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर अचानकमार टाइगर रिजर्व को अपना नया आवास बनाया। आयोजकों के अनुसार, वर्ष 2016 में जन्मी झुमरी ने वयस्क होने के बाद प्राकृतिक प्रवास के दौरान हाईवे, रेलवे लाइन, कोयला खदानों, पावर प्लांट और आबादी वाले क्षेत्रों जैसी कई बाधाओं को पार करते हुए अचानकमार तक का सफर तय किया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अचानकमार पहुंचने के बाद झुमरी ने यहां अपना क्षेत्र स्थापित किया और शावकों को जन्म देकर उनका पालन-पोषण किया। अभियान में उसकी कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) बाघों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन, अस्तित्व और आनुवंशिक विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 

कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों, युवाओं और ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का प्रतीक है। आयोजकों का कहना है कि जंगल, जलस्रोत, वनस्पतियों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बाघों का संरक्षण आवश्यक है।

अभियान के माध्यम से स्थानीय समुदायों से भी वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की जा रही है। आयोजकों के अनुसार, संरक्षण के लक्ष्य तभी सफल हो सकते हैं, जब स्थानीय समाज भी इसमें सहभागी बने और वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखने में सहयोग करे। यह जानकारी उपेन्द्र कुमार दुबे, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी (बाघ संरक्षण परियोजना, सेंट्रल इंडिया लैंडस्केप) WWF India के द्वारा दी गयी है। 


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